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स्वर्ण जयंती महोत्सव का समापन, आस्था और उत्साह से सराबोर रहा वातावरण

भागीरथेश्वर महादेव मंदिर के 50 वर्ष पूर्ण होने पर चार दिवसीय आयोजन में उमड़ा जनसैलाब सिरोही। स्थानीय सगरवंशी माली समाज के आराध्य देव भागीरथेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित चार दिवसीय स्वर्ण जयंती महामहोत्सव का भव्य और श्रद्धा से ओतप्रोत समापन हुआ। इस अवसर पर कलश यात्रा, विशाल शोभायात्रा, लघुरुद्राभिषेक, भजन संध्या तथा वरिष्ठजनों व प्रतिभावान विद्यार्थियों के सम्मान सहित विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें हजारों लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। समाज के पूर्व सचिव सुरेश सगरवंशी ने बताया कि महोत्सव की शुरुआत मंदिर पर ध्वजारोहण और गणपति स्थापना के साथ हुई। मंदिर परिसर एवं समाज की भूमि पर आयोजित कार्यक्रम में महिला, पुरुष और बच्चों ने बढ़-चढक़र भाग लिया। महिलाओं ने मांगलिक गीत गाए, वहीं डीजे की धुन पर समाजजन झूमते नजर आए। समाज के सचिव गिरीश सगरवंशी के अनुसार, महोत्सव के दौरान समाज के प्रत्येक घर पर तोरण लगाए गए तथा मेहंदी और गुड़ का वितरण किया गया। संगीतमय सुंदरकांड पाठ एवं मंदिर में लघुरुद्राभिषेक हवन का आयोजन हुआ, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। महोत्सव के दौरान मंदिर से आयोजन स्थल तक 208 कलशों के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गई। इसमें हजारों महिला, पुरुष और बच्चों ने बैंड और डीजे की धुन पर नाचते-गाते हुए भाग लिया, जिससे पूरा क्षेत्र आस्था और उत्साह से सराबोर हो गया। समाज द्वारा 75 वर्ष से अधिक आयु के करीब तीन दर्जन वरिष्ठजनों का साफा, शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। पंडितों द्वारा विधि-विधान से समाज भूमि का पूजन किया गया। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से पीपल और बेलपत्र के पौधे लगाकर वृक्षारोपण किया गया। रात्रि में आयोजित भजन संध्या में मनोज रिया एंड पार्टी (दिल्ली) द्वारा प्रस्तुत आकर्षक झांकियों ने देर रात तक श्रद्धालुओं को बांधे रखा। इस दौरान संत जोगपुरी महाराज, संत भास्करपुरी महाराज और सूरदास मोहन महाराज का सानिध्य भी प्राप्त हुआ। महोत्सव के अंतिम दिन मंदिर से शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए विशाल शोभायात्रा निकाली गई। इसमें घोड़े, ऊंटगाड़ी, बैंड, डीजे, रथ और पालकी शामिल रहे। हजारों लोगों ने उत्साह के साथ भाग लिया। सांसद लुंबाराम चौधरी भी इस शोभायात्रा में शामिल हुए। महोत्सव के अंतर्गत प्रतिभावान विद्यार्थियों के प्रोत्साहन समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें राज्य मंत्री ओटाराम देवासी और पूर्व विधायक संयम लोढ़ा का सम्मान किया गया। समाज के टॉपर विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया। काव्या विनोद सगरवंशी ने 10वीं बोर्ड में 95.50 प्रतिशत अंक प्राप्त कर समाज में प्रथम स्थान हासिल किया, जिन्हें विशेष सम्मान दिया गया। गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से आए समाज प्रतिनिधियों का साफा, माला और स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया गया। सभी आगंतुकों के लिए आवास और भोजन प्रसादी की उत्तम व्यवस्था की गई। समाजजनों ने महाप्रसादी का लाभ लिया और उत्साहपूर्वक चढ़ावे भी अर्पित किए।  

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संयम दीक्षा: कोमल कुमारी के वर्षीदान वरघोड़े से गूंजा भटाना

महावीर जैन सिरोही। जिले की रेवदर तहसील के भटाना गांव में मुमुक्षु कोमल कुमारी पुखराज परमार का भव्य वर्षीदान वरघोड़ा निकाला गया। आराध्यदेव शांतिनाथ भगवान की पावन छाया में सूरिमंत्र समाराधक आचार्य रविरत्नसूरीऔर जयेशरत्नसूरी आदि साधु-साध्वी भगवंतों के शुभ सानिध्य में यह आयोजन हुआ। वरघोड़े में ढोल, शहनाई, मंडलियां, बैंड-बाजे, घोड़ी का रथ और मुमुक्षु की बग्गी जैसे अनेक आकर्षण शामिल थे। मुमुक्षु कोमल अपनी माता मंजुला बेन पुखराज परमार परिवार के साथ बग्गी में बैठकर दीक्षा से पहले अनेक वस्तुओं का उदारतापूर्वक दान कर वर्षीदान किया। यह वरघोड़ा नगर में घूमते हुए जैन मंदिर पहुंचा, जहां धर्मसभा में परिवर्तित हुआ। इस दौरान धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य ने कहा कि दीक्षा देने वाले और ग्रहण करने वाले दोनों ही प्रशंसा के पात्र हैं। माता-पिता अपनी पुत्री को मोह-माया छोडक़र दीक्षा दिलाते हैं, जबकि मुमुक्षु संसार की ममता का त्याग कर दीक्षा ग्रहण करती है। मुमुक्षु कोमल ने चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) की डिग्री प्राप्त की हुई है और वह आईसीआईसीआई बैंक में कार्यरत थीं। मुमुक्षु कोमल में वैराग्य का भाव शत्रुंजय महातीर्थ पालीताना की 99 बार पैदल यात्रा करते-करते जागृत हुआ। पालीताना में विराजित दादा आदिनाथ भगवान के पथ पर चलने की प्रेरणा से उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और गुरु चरणों में संयम की ट्रेनिंग ली। अब वह चालीस अंगीकार करने जा रही हैं। उन्होंने बताया कि संयम जीवन में सीए का मतलब चार्टर्ड एकाउंटेंट नहीं, बल्कि चारित्र अंगीकार करना है। संघ के अग्रणी केवल भाई ने बताया कि बुधवार को सुबह शुभ मुहूर्त में आचार्य भगवंत मुमुक्षु कोमल को ओघा प्रदान कर दीक्षा ग्रहण करवाएंगे।

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नरसिंह जयंती, श्रद्धा, साहस और धर्म की विजय का पावन पर्व

सिरोही। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाने वाली नरसिंह जयंती हिंदू धर्म के प्रमुख और अत्यंत महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है। यह दिन भगवान विष्णु के चौथे अवतार, भगवान नरसिंह के प्राकट्य का प्रतीक है, जिन्होंने भक्त प्रह्लाद की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए अवतार लिया था। वर्ष 2026 में नरसिंह जयंती 30 अप्रैल, गुरुवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी। इस दिन भक्त भगवान नरसिंह की पूजा-अर्चना कर उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं और अपने जीवन से भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। नरसिंह जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह धर्म, आस्था और सत्य की विजय का जीवंत संदेश भी देती है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जब-जब अधर्म बढ़ता है और निर्दोषों पर अत्याचार होता है, तब-तब भगवान स्वयं किसी न किसी रूप में प्रकट होकर धर्म की रक्षा करते हैं। भगवान नरसिंह का स्वरूप आधा मनुष्य और आधा सिंह का है, जो इस बात का प्रतीक है कि ईश्वर अपने भक्तों की रक्षा के लिए किसी भी रूप में अवतरित हो सकते हैं। नरसिंह अवतार की पौराणिक कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, हिरण्यकश्यप नामक एक अत्याचारी और अहंकारी राक्षस राजा था, जिसने कठोर तपस्या कर ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया था कि उसे न तो कोई मनुष्य मार सके, न पशु, न दिन में और न रात में, न घर के अंदर और न बाहर, न अस्त्र से और न शस्त्र से। इस वरदान के कारण वह अत्यंत शक्तिशाली हो गया और स्वयं को ईश्वर मानने लगा। उसने अपने राज्य में भगवान विष्णु की पूजा पर प्रतिबंध लगा दिया। लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। प्रह्लाद की भक्ति देखकर हिरण्यकश्यप क्रोधित हो गया और उसने उसे अनेक प्रकार की यातनाएं दीं, परंतु हर बार भगवान विष्णु ने अपने भक्त की रक्षा की। अंतत: जब हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद से पूछा कि उसका भगवान कहां है, तो प्रह्लाद ने उत्तर दिया कि भगवान हर जगह हैं। क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने एक खंभे की ओर इशारा करते हुए पूछा कि क्या उसमें भी भगवान हैं। जैसे ही उसने खंभे पर प्रहार किया, उसी क्षण उसमें से भगवान नरसिंह प्रकट हुए। भगवान नरसिंह ने संध्या समय (जो न दिन था न रात), महल के द्वार पर (जो न अंदर था न बाहर), अपनी जंघा पर बैठाकर (जो न धरती थी न आकाश), अपने नाखूनों से (जो न अस्त्र थे न शस्त्र) हिरण्यकश्यप का वध किया और अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की। इस प्रकार भगवान ने अपने भक्त की भक्ति और विश्वास को सफल किया और अधर्म का अंत किया। नरसिंह जयंती 2026 का पूजन मुहूर्त वर्ष 2026 में वैशाख शुक्ल चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ 29 अप्रैल को दोपहर लगभग 1.22 बजे से होगा और इसका समापन 30 अप्रेल को दोपहर लगभग 3.18 बजे तक रहेगा, अत: नरसिंह जयंती का पर्व 30 अप्रेल को मनाया जाएगा। भगवान नरसिंह का प्राकट्य संध्या काल में हुआ था, इसलिए इस दिन संध्या समय पूजा का विशेष महत्व है। पूजा का शुभ समय शाम लगभग 4.45 बजे से रात 7.20 बजे तक रहेगा, इसी अवधि में भगवान नरसिंह की पूजा-अर्चना करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। पूजन विधि और धार्मिक अनुष्ठान नरसिंह जयंती के दिन प्रात:काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं और व्रत का संकल्प लिया जाता है। घर या मंदिर में भगवान नरसिंह की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर विधिवत पूजा की जाती है। पूजा में पंचामृत से अभिषेक, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य और तुलसी अर्पित की जाती है। भगवान को विशेष रूप से चंदन, केसर और सुगंधित पुष्प अर्पित किए जाते हैं। इस दिन भक्त नरसिंह कवच, विष्णु सहस्रनाम और नरसिंह स्तोत्र का पाठ करते हैं, जिससे भय और संकट दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। व्रत रखने वाले भक्त दिनभर उपवास करते हैं और संध्या काल में पूजा के बाद ही भोजन ग्रहण करते हैं। कई स्थानों पर मंदिरों में भजन-कीर्तन, कथा और विशेष आरती का आयोजन भी किया जाता है। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जो भय, बाधाओं या नकारात्मक शक्तियों से परेशान हैं। भगवान नरसिंह की पूजा करने से मन में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह पर्व हमें यह भी सिखाता है कि अहंकार और अत्याचार का अंत निश्चित है, चाहे वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो। विभिन्न राज्यों में नरसिंह जयंती बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। मंदिरों को सजाया जाता है, विशेष पूजा और अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं और भक्त बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कई स्थानों पर झांकियां और शोभायात्राएं भी निकाली जाती हैं, जिनमें भगवान नरसिंह के जीवन प्रसंगों का प्रदर्शन किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह पर्व सामाजिक एकता और सामूहिक भक्ति का प्रतीक बन जाता है। लोग मिलकर भजन-कीर्तन करते हैं, प्रसाद वितरण करते हैं और धर्म की महत्ता को समझते हैं। इस प्रकार नरसिंह जयंती केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है।

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केवल शादी नहीं बल्कि सेवा का संकल्प, रामपुरा में बेटी के विवाह ने जगाई करुणा की अलख

बेटी के विवाह में दिखा गौसेवा का अनूठा संगम खौड़ (पाली)। अक्सर शादियां सिर्फ उत्सव बनकर रह जाती हैं, लेकिन ग्राम पंचायत बडेरावास के गांव रामपुरा में एक विवाह ने इस परंपरा को नई दिशा दे दी। सरपंच लीला चौधरी और अमराराम चौधरी ने अपनी पुत्री के विवाह को सामाजिक सरोकारों से जोड़ते हुए इसे गौसेवा के महाअभियान में बदल दिया। रविवार रात जहां आमतौर पर बंदोली की धूम होती है, वहीं यहां गौ भक्ति संध्या का आयोजन हुआ। रामपुरा खैरवा स्थित प्रभु प्रेमी गौशाला में सजी इस संध्या ने पूरे क्षेत्र को सेवा, संवेदना और संस्कारों के रंग में रंग दिया। प्रसिद्ध गायक ओम मुंडेल और उनकी टीम ने जैसे ही मंच संभाला, वातावरण भक्ति में डूब गया। गौ माता री सेवा सूं मोटो ना कोई धरम जैसे भजनों पर श्रोता देर रात तक झूमते रहे। यह महज सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक ऐसा भावनात्मक जागरण था, जहां हर व्यक्ति ने खुद को गौसेवा से जुड़ा हुआ महसूस किया। यह आयोजन रामपुरा खैरवा स्थित प्रभु प्रेमी गौशाला में हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र में सेवा और संस्कार का संदेश फैलाया। गौ भक्ति संध्या में प्रसिद्ध गायक ओम मुंडेल और उनकी टीम ने गौ माता की महिमा का ऐसा रस घोला कि पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा। गौ माता री सेवा सूं मोटो ना कोई धरम… जैसे भजनों पर श्रोता देर रात तक झूमते रहे। यह केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि गौसेवा के प्रति भावनात्मक जागरण का सजीव दृश्य था, जहां हर व्यक्ति ने खुद को इस पुण्य कार्य से जुड़ा महसूस किया। घोषणाओं की गूंज, गौशाला विकास के लिए उमड़ा सहयोग इस प्रेरणादायक आयोजन में भामाशाहों ने दिल खोलकर सहयोग की घोषणाएं कीं, जिससे गौशाला विकास को नई दिशा मिली। पुनाराम लच्छाराम देवड़ा (कराड़ी, हाल पुणे) ने गौशाला में कार्यालय निर्माण की घोषणा की। अचलाराम नाराराम पंवार (गोदावास) एवं महेंद्रकुमार देवाराम राठौड़ (आंकड़ावास) ने संयुक्त रूप से स्वराज 733 मॉडल ट्रैक्टर भेंट करने का संकल्प लिया। भंवरलाल, खरताराम, रमेश कुमार, पुखराज पुत्र गोमाराम आगलेचा ने लगभग 7 लाख रुपए की लागत से पक्षी घर व चबूतरा बनाने की घोषणा की। रामलाल पुत्र मोतीलाल सेणचा (रामपुरा, हाल गांधीधाम) ने ट्रैक्टर ट्रॉली देने की घोषणा की। कन्याबाई पत्नी वेनाराम मुलेवा एवं भंवर शिवसेना ने चारा कुतर मशीन भेंट करने का संकल्प लिया। सुखीबाई पत्नी दिवंगत लुंबाराम काग ने ट्रैक्टर कल्टीवेटर, तथा भंवरलाल पुत्र मूलाराम पंवार (बाड़सा, पुणे) ने सीड ड्रिल कल्टीवेटर देने की घोषणा की। विद्यादेवी पत्नी खरताराम काग (सोडावास, हाल मुंबई) ने गौ माता हेल्प मशीन भेंट की। डूंगाराम पुत्र हेमाराम वर्पा (गोदावास) ने डिस्क प्लाऊ (दो तवी) देने का संकल्प लिया। नारायणलाल पुत्र पकाराम काग ने गौशाला से जुड़े सभी जेसीबी कार्य अपनी मशीन से निशुल्क करने की घोषणा की। इसके साथ ही विंजाराम भीलवाड़ा, दुर्गाराम सेंणचा, कोलाराम सेंणचा, देवीलाल अड़ाणिया सोनी, लुंबाराम चोयल, पपसा चोयल, मुकेशकुमार आगलेचा, तिलोकराम, डूंगाराम सेंणचा, मांगीलाल आगलेचा, देवाराम केनपुरा, शेराराम सेंणचा, डूंगाराम काग, नारायणलाल मुलेवा मेवाड़, चंपादेवी चौहान, पिंकीदेवी सेंणचा, गुडियाबाई पाली, प्रवीणकुमार नथाराम आगलेचा (रामपुरा) एवं रताराम-रुपाराम देवासी (केनपुरा) सहित अनेक भामाशाहों ने नकद राशि देकर गौशाला को सशक्त बनाने में योगदान दिया। सम्मान और आभार, सेवा ही सबसे बड़ा संस्कार सरपंच लीला चौधरी और अमराराम चौधरी ने सभी भामाशाहों का साफा, शॉल और माला पहनाकर अभिनंदन किया। अमराराम चौधरी ने भावुक शब्दों में कहा किबेटी का विवाह तो केवल एक निमित्त है, हमारा उद्देश्य गौसेवा के इस पुण्य कार्य को आगे बढ़ाना है। जिन दानदाताओं ने सहयोग दिया, हम उनके सदैव आभारी रहेंगे। जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने बढ़ाई गरिमा इस प्रेरणादायक आयोजन में कैबिनेट मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक जोराराम कुमावत, सांसद पीपी चौधरी, पाली प्रधान मोहनीदेवी पुखराज पटेल, अखिल भारतीय सीरवी समाज के महासचिव भंवर चौधरी, सहित आसपास के गांवों के पंच-पटेल और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। एक संदेश जो दिलों में बस गया यह आयोजन सिर्फ एक शादी नहीं, बल्कि समाज को जोडऩे, सेवा को बढ़ावा देने और संस्कारों को जीवित रखने का उदाहरण बन गया। रामपुरा की इस पहल ने साबित कर दिया कि जब खुशियों में सेवा का रंग घुल जाता है, तो वह अवसर प्रेरणा की मिसाल बन जाता है।

Summer 2026 in Telugu cinema: Where are the big films?
मनोरंजन

समर 2026 में तेलुगु सिनेमा: बड़ी फिल्मों का क्या है हाल

समर 2026 के लिए तेलुगु सिनेमा की राह स्पष्ट नहीं दिख रही है क्योंकि कई संभावित ब्लॉकबस्टर फिल्में इस सीजन की दौड़ से बाहर हो गई हैं। इस वजह से बॉक्स ऑफिस पर इन बड़ी फिल्मों की अनुपस्थिति से बाजार की जिम्मेदारियाँ विभाजित हो गई हैं और देखने वालों को क्या मिलेगा, यह इस समय अनिश्चितता का विषय बना हुआ है। जबकि तेलुगु सिनेमा हमेशा अपनी विविधता और बड़े बजट की फिल्मों के लिए जाना जाता है, इस बार कुछ प्रमुख निर्माता और निर्देशक तय कार्यक्रमों से हटकर अपनी फिल्मों को अलग समय पर रिलीज करने का निर्णय ले चुके हैं। इसके चलते समर 2026 में दर्शकों के लिए कुछ नई फिल्मों का इंतजार बढ़ गया है, लेकिन बड़े पैमाने पर स्टार-कास्ट या बड़े बजट की फिल्मों की संख्या कम होने के कारण बाॅक्स ऑफिस पर प्रतिस्पर्धा सीमित नजर आ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले वर्षों में समर सीजन तेलुगु फिल्‍मों के लिए बेहद लाभदायक रहा है। वहीं, इस बार की परिस्थिति से पता चलता है कि फिल्म निर्माताओं ने रिलीज डेट को लेकर रणनीतिक बदलाव किए हैं, जिसके कई कारण हो सकते हैं जैसे महामारी के बाद माहौल में बदलाव, आर्थिक दबाव, या फिर फिल्मों के प्रचार-प्रसार पर विचार। फिल्म उद्योग के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि कुछ बड़े प्रोजेक्ट के देरी से रिलीज होने की वजह से इस समर को खालीपन महसूस हो रहा है। दर्शकों और फिल्म प्रेमियों की उम्मीदें भी असमान हैं क्योंकि कई प्रतिभाशाली कलाकारों और निर्देशकों की फिल्में या तो फिल्मों के लिए उपयुक्त समय की प्रतीक्षा कर रही हैं या फिर लॉन्चिंग को स्थगित कर दिया गया है। इसके अलावा, छोटे स्तर की फिल्मों को मौका मिल सकता है जो पहले बड़े स्टार के साए में नहीं आ पाती थी। यह समय नए प्रयोगों और युवा प्रतिभाओं के लिए एक अवसर साबित हो सकता है यदि उन्हें सही तरीके से प्रमोट किया जाए। बॉक्स ऑफिस विश्लेषकों का मानना है कि समर 2026 तेलुगु सिनेमा के लिए एक चुनौतीपूर्ण समय हो सकता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि फिल्म उद्योग पिछड़ जाएगा। बल्कि, यह समय बदलाव और नई सोच के साथ आगे बढ़ने का भी अवसर हो सकता है। पिछले कुछ सालों में, तेलुगु फिल्में न केवल देश में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाने में सफल रही हैं। इसलिए, इंडस्ट्री को जरूरी रणनीतियों और समय प्रबंधन के साथ दर्शकों की उम्मीदों को फिर से पार करना होगा। यही वजह है कि इस समर के बिग प्रोजेक्ट्स का इंतजार बना हुआ है, और दर्शक उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही बड़ी फिल्मों के साथ वह सिनेमा की रंगीन दुनिया का आनंद ले सकेंगे।

‘SVC63’: Salman Khan-Nayanthara film goes on floors, locks Eid 2027 release
मनोरंजन

‘SVC63’: सलमान खान-नयनतारा की फिल्म की शूटिंग शुरू, ईद 2027 में होगी रिलीज

फिल्म निर्माता दिल राजू द्वारा प्रस्तुत की गई आगामी बड़ी फिल्म “SVC63” की शूटिंग हाल ही में शुरू हो गई है। यह फिल्म प्रसिद्ध निर्देशक वामशी पायडीपल्ली के निर्देशन में बन रही है। इस परियोजना में बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान और दक्षिण भारतीय सिनेमा की महत्वपूर्ण अभिनेत्री नयनतारा मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। “SVC63” की शूटिंग की आधिकारिक घोषणा के साथ ही फिल्म के प्रशंसकों में उत्साह की लहर दौड़ गई है। बताया जा रहा है कि यह फिल्म लगभग सभी महत्वपूर्ण लोकेशंस पर शूट की जाएगी, जिनमें भारत के अलावा कुछ विदेशी स्थान भी शामिल हैं। निर्देशक वामशी पायडीपल्ली ने अपनी पिछली सफलताओं के अनुभव के आधार पर इस फिल्म को एक नया और ताजगी भरा आकार देने का आश्वासन दिया है। प्रोडक्शन हाउस की ओर से यह भी पुष्टि की गई है कि “SVC63” का खास उद्देश्य मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक संदेश देना भी रहेगा। Dil Raju के स्टाइलिश निर्देशन और प्रोडक्शन से यह फिल्म बड़े बजट और उच्च निर्माण गुणवत्ता के साथ तैयार की जा रही है। फिल्म के लिए बजट, शूटिंग शेड्यूल, और अन्य प्रमुख कलाकारों की घोषणा जल्द ही की जाएगी। फिल्मकारों ने यह भी जानकारी दी है कि “SVC63” को ईद 2027 के अवसर पर रिलीज किया जाएगा, जो काफी बड़ी प्रतिस्पर्धी सीजन माना जाता है। सलमान खान की पिछली ईद रिलीज़ फिल्मों की सफलता को देखते हुए, इस फिल्म से भी बड़े बॉक्स ऑफिस आंकड़ों की उम्मीद की जा रही है। नयनतारा के फैंस भी उनकी इस मल्टीस्टारर फिल्म को लेकर खासा उत्साहित हैं। “SVC63” का विषय, कहानी और बाकी कलाकारों के बारे में फिलहाल ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन इंडस्ट्री के कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह फिल्म आगामी वर्षों की सबसे बहुप्रतीक्षित फिल्मों में से एक साबित होगी। निर्माता Dil Raju ने फिल्म को लेकर अपनी पूरी योजना और रणनीति तैयार कर रखी है ताकि इसके सफल होने की संभावनाएं अधिक हों। एसवीसी63 के निर्माण के दौरान इस्तेमाल हो रहे तकनीकी संसाधन और सेट डिज़ाइन भी फिल्म को दर्शकों के बीच खास स्थान दिलाने में मदद करेंगे। निर्देशक वामशी पायडीपल्ली ने बताया कि उन्होंने इस फिल्म के लिए नई तकनीकों और फिल्मांकन विधियों का प्रयोग किया है ताकि कहानी और प्रस्तुति दोनों ही ज्यादा बेहतर हो सकें। फिल्म की शूटिंग जारी है और जल्द ही इसके प्रचार की शुरुआत देखी जाएगी। फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने पर न केवल सलमान खान और नयनतारा के प्रशंसकों के बीच बल्कि पूरे मनोरंजन जगत में इस फिल्म को लेकर उत्साह बढ़ जाएगा। फिलहाल, फिल्म के हर अपडेट को फैंस बहुत बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

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जांच के नाम पर जांच, दो टेस्ट में करोड़ों का स्वास्थ्य लाभ?

सीएमएचओ पर खरीद अनियमितताओं के आरोप, ज्ञापन पहुंचा कलेक्टर तक सिरोही। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था इन दिनों दो जांचों में सम्पूर्ण समाधान मॉडल पर चलती दिख रही है। भाजपा जिला मीडिया प्रभारी रोहित खत्री ने जिला कलक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि सीएमएचओ डॉ. दिनेश खराड़ी और डिप्टी सीएमएचओ डॉ. सत्य प्रकाश शर्मा ने एनएचएम राशि के उपयोग में ऐसे नवाचार किए हैं, जिनसे सरकार को राजस्व हानि और आमजन को जांच से दूरी दोनों का अनुभव एक साथ मिल रहा है। 143 जांचों का बजट, लेकिन फोकस सिर्फ 2 पर ज्ञापन के अनुसार, मुख्यमंत्री निशुल्क जांच योजना के तहत उप स्वास्थ्य केन्द्र से जिला अस्पताल तक 143 प्रकार की जांचों के लिए बजट मिलता है। लेकिन आरोप है कि इस व्यापक व्यवस्था को सरलीकरण की राह पर ले जाते हुए बजट का बड़ा हिस्सा सिर्फ दो जांचों ग्लूकोमीटर और हीमोग्लोबीन पर केंद्रित कर दिया गया। जहां उप स्वास्थ्य केन्द्र स्तर पर 14, पीएचसी पर 66, सीएचसी पर 101 और जिला अस्पताल में 143 जांचों की सुविधा होनी चाहिए, वहां जमीनी हकीकत यह बताई जा रही है कि बाकी जांचें मानो अवकाश पर चली गई हैं। परिणामस्वरूप मरीजों को या तो इंतजार करना पड़ रहा है या फिर पड़ोसी राज्य गुजरात की ओर रुख करना पड़ रहा है। एकल स्रोत निविदा, प्रतिस्पर्धा से परहेज? तीन गुना दाम पर खरीद के आरोप खत्री ने आरोप लगाया कि तीन-चार आइटम की खरीद के लिए बार-बार एकल स्रोत उपापन (सिंगल सोर्स प्रोक्योरमेंट) अपनाया गया। लगभग 150 लाख रुपए का क्रय बाजार दर से तीन गुना अधिक कीमत पर किए जाने की बात कही गई है। जहां आमतौर पर सबसे कम बोली की तलाश होती है, वहां यहां सबसे भरोसेमंद स्रोत की परंपरा इतनी मजबूत दिखी कि खुली निविदा की जरूरत ही महसूस नहीं हुई। बजट की मांग बनाम बजट का मार्ग राजकीय मेडिकल कॉलेज सिरोही और जिला अस्पताल की ओर से 143 जांचों के संचालन के लिए बार-बार बजट की मांग किए जाने के पत्र भी सामने आए हैं। लेकिन आरोप है कि यह बजट संबंधित संस्थानों तक पहुंचने के बजाय सीमित जांचों की खरीद में ही खप गया। इस बीच अस्पतालों में अन्य जांचों का ठप होना न केवल मरीजों के लिए परेशानी का कारण बना, बल्कि सरकारी योजनाओं की छवि पर भी सवाल खड़े कर रहा है। हब एंड स्पोक मॉडल, खबरों में लॉन्च, जमीन पर इंतजार 17 फरवरी को समाचार पत्रों में यह दावा किया गया था कि 15 दिनों के भीतर जिले में हब एंड स्पोक मॉडल लागू हो जाएगा और 151 तक उन्नत जांचें निशुल्क उपलब्ध होंगी। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि यह मॉडल अभी भी प्रेस विज्ञप्तियों में सक्रिय है, जबकि जमीनी स्तर पर इसकी शुरुआत का इंतजार जारी है। मरीजों का विकल्प, ‘निशुल्क’ से ‘अनिवार्य यात्रा’ तक, गुजरात की ओर बढ़ते कदम जांच सुविधाओं के अभाव में मरीजों का गुजरात जाना अब एक आम दृश्य बनता जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि जब योजना का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर मुफ्त जांच उपलब्ध कराना था, तो क्या यह आउटसोर्सिंग मॉडल अनजाने में लागू हो गया है? जिला कलक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने मामले में कमेटी गठित कर निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया है। —-    

FEFKA council rejects B. Unnikrishnan’s offer to step down from general secretary post
मनोरंजन

FEFKA परिषद ने बी. उन्नीकृष्णन के महासचिव पद से इस्तीफा देने के प्रस्ताव को खारिज किया

फिल्म एजेंसी फेडरेशन ऑफ केरल आर्टिस्ट्स (FEFKA) की परिषद ने बी. उन्नीकृष्णन के महासचिव पद से इस्तीफा देने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। उन्नीकृष्णन, जो पिछले लगभग 18 वर्षों से इस पद पर कार्यरत थे, ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए पद से हटने की इच्छा व्यक्त की थी। उन्होंने फेडरेशन के लिए नई नेतृत्व व्यवस्था सुझाई थी, लेकिन परिषद ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। बी. उन्नीकृष्णन के नेतृत्व में FEFKA ने कई महत्वपूर्ण बदलाव देखे हैं और उनकी स्थिरता ने संघ की मजबूती को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। फेडरेशन की बैठक में सदस्यों ने एकजुटता दिखाते हुए उन्नीकृष्णन के इस्तीफे को अस्वीकार कर दिया और उन्हें पद पर बने रहने हेतु प्रोत्साहित किया। परिषद के एक वरिष्ठ सदस्य का कहना है कि “उन्नीकृष्णन का अनुभव और नेतृत्व हम सबके लिए अनमोल है, इसलिए उनके निर्णय को फिर से विचार किया जाएगा।” उन्नीकृष्णन ने कहा था कि वे अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारियों के चलते महासचिव पद से हटना चाहते हैं, परंतु फेडरेशन के हित में उन्होंने नई नेतृत्व व्यवस्था के विकल्प भी सुझाए थे। उन्होंने कहा था कि “लगभग दो दशकों तक सेवा करने के बाद मैं फेडरेशन को नई दिशा देने के लिए नए चेहरों को मौका देना चाहता हूं।” FEFKA के सदस्यों ने इस प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए कहा कि लंबे समय तक एक ही व्यक्ति के नेतृत्व में रहते हुए भी संगठन ने मजबूती और सामंजस्य बनाए रखा है। परिषद ने यह भी कहा कि उपयुक्त समय आने पर नेतृत्व परिवर्तन पर विचार किया जाएगा, परंतु फिलहाल उन्नीकृष्णन का साथ देना फेडरेशन के हित में होगा। फिल्म उद्योग के सहयोगी और कलाकार भी इस निर्णय का समर्थन कर रहे हैं। एक वरिष्ठ अभिनेता ने व्यक्त किया, “उन्नीकृष्णन ने संगठन के लिए बहुत कुछ किया है। उनका इस्तीफा फिलहाल उचित नहीं है। हमें उन्हें इस समय और समर्थन देना चाहिए।” इस निर्णय के बाद FEFKA ने आगामी बैठकों में संगठन के विकास और नीतिगत विषयों पर चर्चा जारी रखने का संकल्प लिया है। परिषद का मानना है कि स्थिर नेतृत्व के साथ ही फेडरेशन आगामी चुनौतियों का सामना कर सकेगा और कलाकारों के हितों की रक्षा बेहतर तरीके से कर सकेगा। फिलहाल बी. उन्नीकृष्णन ने सहयोगियों और सदस्यों के आग्रह पर महासचिव पद पर बने रहने का निर्णय लिया है, और वह फेडरेशन की प्रगति के लिए लगातार काम कर रहे हैं। उनकी अगुवाई में FEFKA ने केरल के फिल्म कलाकारों के लिए सुरक्षा, कल्याण और रोजगार की कई नई पहल शुरू की हैं, जिन्हें उद्योग में सराहा जाता है। संक्षेप में, FEFKA परिषद का यह फैसला संगठन के वर्तमान समर्पित नेतृत्व को बनाए रखने और कलाकारों के हितों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगामी समय में इस प्रकार के मुद्दों पर और खुलकर चर्चा होने की संभावना है, जिससे फेडरेशन और भी अधिक मजबूत और प्रभावी साबित हो सकेगा।

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माइंड मैट्रिक्स प्रतियोगिता का भव्य आयोजन

जोधपुर के जी.डी. मेमोरियल ग्रुप ऑफ कॉलेज में ज्ञान और प्रतिभा का उत्सव जोधपुर। सेक्टर चार, कुड़ी भगतासनी हाउसिंग बोर्ड स्थित जी.डी. मेमोरियल ग्रुप ऑफ कॉलेज में 25 अप्रे्रल को माइंड मैट्रिक्स प्रतियोगिता का भव्य एवं आकर्षक आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता, तर्कशक्ति और समसामयिक विषयों पर पकड़ को परखने के लिए विशेष रूप से प्रश्नोत्तरी सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने उत्साह और आत्मविश्वास के साथ हिस्सा लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के निदेशक प्रो. जे.जे. मिश्रा की ओर से सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर उपस्थित सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने ज्ञान की देवी माँ सरस्वती का स्मरण करते हुए कार्यक्रम की सफलता की कामना की। वातावरण पूरी तरह शैक्षणिक ऊर्जा और सकारात्मकता से भर गया। छह टीमों के बीच हुआ रोमांचक मुकाबला प्रतियोगिता में ग्रुप ऑफ कॉलेज की कुल 6 टीमों ने भाग लिया। सभी टीमों के बीच प्रतिस्पर्धा अत्यंत रोचक और ज्ञानवर्धक रही। प्रतिभागियों ने सामान्य ज्ञान, करंट अफेयर्स, तार्किक प्रश्नों और विषय आधारित क्विज के विभिन्न चरणों में शानदार प्रदर्शन किया। हर राउंड के साथ प्रतियोगिता का स्तर और भी चुनौतीपूर्ण होता गया, जिससे प्रतिभागियों की बौद्धिक क्षमता का वास्तविक परीक्षण हो सका। दर्शकों के रूप में उपस्थित विद्यार्थियों ने भी हर सही उत्तर पर तालियों से उत्साहवर्धन किया। प्रतियोगिता में कला संकाय की टीम—गर्वित चौहान, अमित एवं कुसुम देवासी ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। तीनों प्रतिभागियों ने अपने सटीक उत्तरों और बेहतरीन टीमवर्क के बल पर सभी राउंड में बढ़त बनाए रखी और अंतत: विजेता बनने में सफल रहे। उपविजेता बनी गोमी देवी महिला शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय की टीम वहीं, गोमी देवी महिला शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय की टीम की सौम्या पुरोहित, कल्पना चौधरी एवं गोमती ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए उपविजेता का स्थान प्राप्त किया। इस टीम ने कई कठिन प्रश्नों के सटीक उत्तर देकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया और अंत तक कड़ी टक्कर दी। विजेताओं को किया गया सम्मानित महाविद्यालय प्रशासन की ओर से विजेता टीम (आर्ट्स) को 1100 तथा उपविजेता टीम (एजुकेशन) को 500 नगद पुरस्कार के साथ प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। पुरस्कार वितरण के दौरान विद्यार्थियों के चेहरे पर खुशी और गर्व साफ झलक रहा था। इस अवसर पर शिक्षकों ने विजेता एवं उपविजेता टीमों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। समकालीन विषयों पर आधारित प्रश्नों ने बढ़ाया उत्साह कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों से समकालीन विषयों पर आधारित विविध प्रश्न पूछे गए। इनमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं, विज्ञान, इतिहास, साहित्य तथा सामाजिक विषयों से जुड़े प्रश्न शामिल थे। प्रतिभागियों ने न केवल सही उत्तर दिए, बल्कि कई प्रश्नों पर अपने विचार भी प्रस्तुत किए, जिससे कार्यक्रम और भी ज्ञानवर्धक बन गया। यह प्रतियोगिता विद्यार्थियों के लिए सीखने और अपनी समझ को विस्तार देने का बेहतरीन मंच साबित हुई। मंच संचालन और आयोजन में रही महत्वपूर्ण भूमिका कार्यक्रम का मंच संचालन सहायक आचार्य राधिका पारिक की ओर से प्रभावी एवं आकर्षक ढंग से किया गया। उन्होंने पूरे कार्यक्रम को सुव्यवस्थित तरीके से संचालित करते हुए प्रतिभागियों और दर्शकों को जोड़े रखा। प्रतियोगिता के समन्वयक के रूप में डॉ. गीता सांखला, डॉ. आदिति मुथा तथा सहायक आचार्य वीवा सिंह चम्पावत ने तकनीकी एवं क्विज मास्टर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनके कुशल मार्गदर्शन और समन्वय के कारण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो सका। इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। माइंड मैट्रिक्स प्रतियोगिता जैसे आयोजन न केवल विद्यार्थियों के ज्ञान को बढ़ाते हैं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, टीमवर्क और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता का भी विकास करते हैं। महाविद्यालय प्रशासन द्वारा इस तरह के आयोजन समय-समय पर किए जाते हैं, जिससे विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। निदेशक ने किया उत्साहवर्धन कार्यक्रम के अंत में निदेशक प्रो. जे.जे. मिश्रा ने सभी प्रतिभागियों, महाविद्यालय के सहायक आचार्यों एवं विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं और भविष्य में भी ऐसे आयोजन निरंतर किए जाएंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे इसी तरह अपनी प्रतिभा को निखारते रहें और शिक्षा के साथ-साथ प्रतिस्पर्धात्मक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी निभाएं। कार्यक्रम के सफल आयोजन से महाविद्यालय परिसर में उत्साह का माहौल देखने को मिला। विद्यार्थियों और शिक्षकों ने इसे एक यादगार अनुभव बताया।  

Sai Tamhankar interview: The ‘Matka King’ actor on working across languages and her quest for longevity
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भाषाओं के पार काम करने वाली ‘मटका किंग’ अभिनेत्री और उनके दीर्घकालिक सफर की खोज

मुंबई। साई तमंहारक, जिन्होंने महाराष्ट्र की फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई है, ने हाल ही में अपने करियर, चुनौतियों और फिल्मों की सफलता और असफलता पर अपने विचार साझा किए। लंबे समय से फिल्म जगत में सक्रिय साई तमंहारक ने बताया कि वे किस तरह फिल्मी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं। साई ने अपने इंटरव्यू में कहा, “फिल्म इंडस्ट्री में बने रहना आसान काम नहीं है। हर दिन कुछ नया सीखना पड़ता है और लोगों की रुचि बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण होता है। मैं हमेशा अपने काम को लेकर ईमानदार रही हूँ और इसी वजह से मुझे अलग-अलग भाषाओं में काम करने का मौका मिला।” उन्होंने आगे बताया कि उनके लिए सफलता और असफलता दोनों ही महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वे दोनों को बहुत गंभीरता से नहीं लेतीं। “ सफलता और असफलता दोनों ही कड़ी मेहनत के हिस्से हैं, इनसे सीखना जरूरी है। हालांकि, मैं अपनी फिल्मों की प्रतिक्रिया को जानते हुए भी, उसे बहुत गंभीरता से नहीं लेती, क्योंकि यह मेरा पुनः प्रयास करने का उत्साह बनाता है।” साई ने लोगों की धारणाओं को चुनौती देने की भी बात कही। उनका मानना है कि वह हमेशा नए किरदार निभाकर और विविधता लाकर कहीं एक ही तरह की छवि से बाहर निकलना चाहती हैं। उन्होंने कहा, “लोगों की सोच को बदलना मेरे लिए एक मिशन है। मैं उन कलाकारों में से हूँ जो सिर्फ अभिनय के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी सोच और कार्यशैली से भी लोगों के मन में जगह बनाना चाहती हैं।” अपने करियर के सफर को याद करते हुए साई ने कहा, “कभी-कभी कुछ कार्यक्षेत्र में बदलाव लाना आवश्यक होता है। मैंने ऐसा किया और मैंने कई भाषाओं में काम किया जो मेरे लिए एक सीखने का अनुभव रहा। इससे मुझे अभिनय की नयी विधाओं को समझने और अपनाने का मौका मिला।” उन्होंने यह भी माना कि इंडस्ट्री में टिके रहने के लिये धीरज और लगातार मेहनत बेहद जरूरी है। “कुछ पल का फेम आपको स्थायी सफलता नहीं देता। इसके लिये थोड़ी बहुत काबिलियत के साथ साथ, लगातार काम करते रहना और बेहतरीन परिणाम देना होता है।” साई तमंहारक का मानना है कि अभिनय के प्रति उनका समर्पण और उनकी कड़ी मेहनत ही उन्हें लंबे समय तक इस उद्योग में स्थापित रखेगी। उनके अनुभव और दृष्टिकोण ने अनेक नए कलाकारों के लिए प्रेरणा का काम किया है।

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