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स्वर्ण जयंती महोत्सव का समापन, आस्था और उत्साह से सराबोर रहा वातावरण

भागीरथेश्वर महादेव मंदिर के 50 वर्ष पूर्ण होने पर चार दिवसीय आयोजन में उमड़ा जनसैलाब सिरोही। स्थानीय सगरवंशी माली समाज के आराध्य देव भागीरथेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित चार दिवसीय स्वर्ण जयंती महामहोत्सव का भव्य और श्रद्धा से ओतप्रोत समापन हुआ। इस अवसर पर कलश यात्रा, विशाल शोभायात्रा, लघुरुद्राभिषेक, भजन संध्या तथा वरिष्ठजनों व प्रतिभावान विद्यार्थियों के सम्मान सहित विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें हजारों लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। समाज के पूर्व सचिव सुरेश सगरवंशी ने बताया कि महोत्सव की शुरुआत मंदिर पर ध्वजारोहण और गणपति स्थापना के साथ हुई। मंदिर परिसर एवं समाज की भूमि पर आयोजित कार्यक्रम में महिला, पुरुष और बच्चों ने बढ़-चढक़र भाग लिया। महिलाओं ने मांगलिक गीत गाए, वहीं डीजे की धुन पर समाजजन झूमते नजर आए। समाज के सचिव गिरीश सगरवंशी के अनुसार, महोत्सव के दौरान समाज के प्रत्येक घर पर तोरण लगाए गए तथा मेहंदी और गुड़ का वितरण किया गया। संगीतमय सुंदरकांड पाठ एवं मंदिर में लघुरुद्राभिषेक हवन का आयोजन हुआ, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। महोत्सव के दौरान मंदिर से आयोजन स्थल तक 208 कलशों के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गई। इसमें हजारों महिला, पुरुष और बच्चों ने बैंड और डीजे की धुन पर नाचते-गाते हुए भाग लिया, जिससे पूरा क्षेत्र आस्था और उत्साह से सराबोर हो गया। समाज द्वारा 75 वर्ष से अधिक आयु के करीब तीन दर्जन वरिष्ठजनों का साफा, शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। पंडितों द्वारा विधि-विधान से समाज भूमि का पूजन किया गया। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से पीपल और बेलपत्र के पौधे लगाकर वृक्षारोपण किया गया। रात्रि में आयोजित भजन संध्या में मनोज रिया एंड पार्टी (दिल्ली) द्वारा प्रस्तुत आकर्षक झांकियों ने देर रात तक श्रद्धालुओं को बांधे रखा। इस दौरान संत जोगपुरी महाराज, संत भास्करपुरी महाराज और सूरदास मोहन महाराज का सानिध्य भी प्राप्त हुआ। महोत्सव के अंतिम दिन मंदिर से शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए विशाल शोभायात्रा निकाली गई। इसमें घोड़े, ऊंटगाड़ी, बैंड, डीजे, रथ और पालकी शामिल रहे। हजारों लोगों ने उत्साह के साथ भाग लिया। सांसद लुंबाराम चौधरी भी इस शोभायात्रा में शामिल हुए। महोत्सव के अंतर्गत प्रतिभावान विद्यार्थियों के प्रोत्साहन समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें राज्य मंत्री ओटाराम देवासी और पूर्व विधायक संयम लोढ़ा का सम्मान किया गया। समाज के टॉपर विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया। काव्या विनोद सगरवंशी ने 10वीं बोर्ड में 95.50 प्रतिशत अंक प्राप्त कर समाज में प्रथम स्थान हासिल किया, जिन्हें विशेष सम्मान दिया गया। गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से आए समाज प्रतिनिधियों का साफा, माला और स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया गया। सभी आगंतुकों के लिए आवास और भोजन प्रसादी की उत्तम व्यवस्था की गई। समाजजनों ने महाप्रसादी का लाभ लिया और उत्साहपूर्वक चढ़ावे भी अर्पित किए।  

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संयम दीक्षा: कोमल कुमारी के वर्षीदान वरघोड़े से गूंजा भटाना

महावीर जैन सिरोही। जिले की रेवदर तहसील के भटाना गांव में मुमुक्षु कोमल कुमारी पुखराज परमार का भव्य वर्षीदान वरघोड़ा निकाला गया। आराध्यदेव शांतिनाथ भगवान की पावन छाया में सूरिमंत्र समाराधक आचार्य रविरत्नसूरीऔर जयेशरत्नसूरी आदि साधु-साध्वी भगवंतों के शुभ सानिध्य में यह आयोजन हुआ। वरघोड़े में ढोल, शहनाई, मंडलियां, बैंड-बाजे, घोड़ी का रथ और मुमुक्षु की बग्गी जैसे अनेक आकर्षण शामिल थे। मुमुक्षु कोमल अपनी माता मंजुला बेन पुखराज परमार परिवार के साथ बग्गी में बैठकर दीक्षा से पहले अनेक वस्तुओं का उदारतापूर्वक दान कर वर्षीदान किया। यह वरघोड़ा नगर में घूमते हुए जैन मंदिर पहुंचा, जहां धर्मसभा में परिवर्तित हुआ। इस दौरान धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य ने कहा कि दीक्षा देने वाले और ग्रहण करने वाले दोनों ही प्रशंसा के पात्र हैं। माता-पिता अपनी पुत्री को मोह-माया छोडक़र दीक्षा दिलाते हैं, जबकि मुमुक्षु संसार की ममता का त्याग कर दीक्षा ग्रहण करती है। मुमुक्षु कोमल ने चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) की डिग्री प्राप्त की हुई है और वह आईसीआईसीआई बैंक में कार्यरत थीं। मुमुक्षु कोमल में वैराग्य का भाव शत्रुंजय महातीर्थ पालीताना की 99 बार पैदल यात्रा करते-करते जागृत हुआ। पालीताना में विराजित दादा आदिनाथ भगवान के पथ पर चलने की प्रेरणा से उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और गुरु चरणों में संयम की ट्रेनिंग ली। अब वह चालीस अंगीकार करने जा रही हैं। उन्होंने बताया कि संयम जीवन में सीए का मतलब चार्टर्ड एकाउंटेंट नहीं, बल्कि चारित्र अंगीकार करना है। संघ के अग्रणी केवल भाई ने बताया कि बुधवार को सुबह शुभ मुहूर्त में आचार्य भगवंत मुमुक्षु कोमल को ओघा प्रदान कर दीक्षा ग्रहण करवाएंगे।

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नरसिंह जयंती, श्रद्धा, साहस और धर्म की विजय का पावन पर्व

सिरोही। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाने वाली नरसिंह जयंती हिंदू धर्म के प्रमुख और अत्यंत महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है। यह दिन भगवान विष्णु के चौथे अवतार, भगवान नरसिंह के प्राकट्य का प्रतीक है, जिन्होंने भक्त प्रह्लाद की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए अवतार लिया था। वर्ष 2026 में नरसिंह जयंती 30 अप्रैल, गुरुवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी। इस दिन भक्त भगवान नरसिंह की पूजा-अर्चना कर उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं और अपने जीवन से भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। नरसिंह जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह धर्म, आस्था और सत्य की विजय का जीवंत संदेश भी देती है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जब-जब अधर्म बढ़ता है और निर्दोषों पर अत्याचार होता है, तब-तब भगवान स्वयं किसी न किसी रूप में प्रकट होकर धर्म की रक्षा करते हैं। भगवान नरसिंह का स्वरूप आधा मनुष्य और आधा सिंह का है, जो इस बात का प्रतीक है कि ईश्वर अपने भक्तों की रक्षा के लिए किसी भी रूप में अवतरित हो सकते हैं। नरसिंह अवतार की पौराणिक कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, हिरण्यकश्यप नामक एक अत्याचारी और अहंकारी राक्षस राजा था, जिसने कठोर तपस्या कर ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया था कि उसे न तो कोई मनुष्य मार सके, न पशु, न दिन में और न रात में, न घर के अंदर और न बाहर, न अस्त्र से और न शस्त्र से। इस वरदान के कारण वह अत्यंत शक्तिशाली हो गया और स्वयं को ईश्वर मानने लगा। उसने अपने राज्य में भगवान विष्णु की पूजा पर प्रतिबंध लगा दिया। लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। प्रह्लाद की भक्ति देखकर हिरण्यकश्यप क्रोधित हो गया और उसने उसे अनेक प्रकार की यातनाएं दीं, परंतु हर बार भगवान विष्णु ने अपने भक्त की रक्षा की। अंतत: जब हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद से पूछा कि उसका भगवान कहां है, तो प्रह्लाद ने उत्तर दिया कि भगवान हर जगह हैं। क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने एक खंभे की ओर इशारा करते हुए पूछा कि क्या उसमें भी भगवान हैं। जैसे ही उसने खंभे पर प्रहार किया, उसी क्षण उसमें से भगवान नरसिंह प्रकट हुए। भगवान नरसिंह ने संध्या समय (जो न दिन था न रात), महल के द्वार पर (जो न अंदर था न बाहर), अपनी जंघा पर बैठाकर (जो न धरती थी न आकाश), अपने नाखूनों से (जो न अस्त्र थे न शस्त्र) हिरण्यकश्यप का वध किया और अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की। इस प्रकार भगवान ने अपने भक्त की भक्ति और विश्वास को सफल किया और अधर्म का अंत किया। नरसिंह जयंती 2026 का पूजन मुहूर्त वर्ष 2026 में वैशाख शुक्ल चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ 29 अप्रैल को दोपहर लगभग 1.22 बजे से होगा और इसका समापन 30 अप्रेल को दोपहर लगभग 3.18 बजे तक रहेगा, अत: नरसिंह जयंती का पर्व 30 अप्रेल को मनाया जाएगा। भगवान नरसिंह का प्राकट्य संध्या काल में हुआ था, इसलिए इस दिन संध्या समय पूजा का विशेष महत्व है। पूजा का शुभ समय शाम लगभग 4.45 बजे से रात 7.20 बजे तक रहेगा, इसी अवधि में भगवान नरसिंह की पूजा-अर्चना करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। पूजन विधि और धार्मिक अनुष्ठान नरसिंह जयंती के दिन प्रात:काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं और व्रत का संकल्प लिया जाता है। घर या मंदिर में भगवान नरसिंह की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर विधिवत पूजा की जाती है। पूजा में पंचामृत से अभिषेक, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य और तुलसी अर्पित की जाती है। भगवान को विशेष रूप से चंदन, केसर और सुगंधित पुष्प अर्पित किए जाते हैं। इस दिन भक्त नरसिंह कवच, विष्णु सहस्रनाम और नरसिंह स्तोत्र का पाठ करते हैं, जिससे भय और संकट दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। व्रत रखने वाले भक्त दिनभर उपवास करते हैं और संध्या काल में पूजा के बाद ही भोजन ग्रहण करते हैं। कई स्थानों पर मंदिरों में भजन-कीर्तन, कथा और विशेष आरती का आयोजन भी किया जाता है। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जो भय, बाधाओं या नकारात्मक शक्तियों से परेशान हैं। भगवान नरसिंह की पूजा करने से मन में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह पर्व हमें यह भी सिखाता है कि अहंकार और अत्याचार का अंत निश्चित है, चाहे वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो। विभिन्न राज्यों में नरसिंह जयंती बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। मंदिरों को सजाया जाता है, विशेष पूजा और अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं और भक्त बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कई स्थानों पर झांकियां और शोभायात्राएं भी निकाली जाती हैं, जिनमें भगवान नरसिंह के जीवन प्रसंगों का प्रदर्शन किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह पर्व सामाजिक एकता और सामूहिक भक्ति का प्रतीक बन जाता है। लोग मिलकर भजन-कीर्तन करते हैं, प्रसाद वितरण करते हैं और धर्म की महत्ता को समझते हैं। इस प्रकार नरसिंह जयंती केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है।

सबरीमाला केस- सुप्रीम कोर्ट में 7 दिन की सुनवाई:कल पूछा था- जिसे भगवान ने ही बनाया, उसके छूने से ईश्वर अपवित्र कैसे हो सकता है
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सबरीमाला केस: सुप्रीम कोर्ट में 7 दिन की सुनवाई, पूछा गया- जिसे भगवान ने बनाया, उसके छूने से देवता कैसे हो सकते हैं अपवित्र

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की प्रवेश पर चल रही निर्णायक सुनवाई बुधवार से शुरू हो गई है। यह सुनवाई कुल सात दिनों तक चलेगी, जिसमें धार्मिक आस्था और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन साधने की कोशिश की जाएगी। पिछले दिनों हुए सत्रों में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यदि कोई राज्य सामाजिक सुधार या जनहित के नाम पर धार्मिक प्रथाओं पर रोक लगाता है, तो कोर्ट उसका संज्ञान ले सकता है। केरल हाईकोर्ट ने 1991 में सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगा दी थी। इसके बाद 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रतिबंध को हटा दिया था, जिससे बहस और पुनर्विचार याचिकाएं शुरू हो गईं। माहौल इतना संवेदनशील है कि मंदिर प्रबंधन ने भी महिलाओं की एंट्री का कड़ा विरोध किया है। सुनवाई के प्रमुख बिंदु और घटनाक्रम 7 अप्रैल: केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के फैसले का विरोध जताया और धार्मिक परंपराओं के सम्मान की बात कही। 8 अप्रैल: केंद्र की दलीलें सुनते हुए कोर्ट ने पूछा कि जिन भक्तों का मंदिर में जाना नहीं है, वे धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे सकते हैं। 9 अप्रैल: कोर्ट ने कहा कि मंदिर में महिलाओं की प्रवेश रोकने से समाज का विभाजन बढ़ सकता है। 15 अप्रैल: सबरीमाला मैनेजमेंट ने तर्क दिया कि यह कोई रेस्टोरेंट नहीं है, बल्कि ब्रह्मचारी देवता का मंदिर है। 17 अप्रैल: सुप्रीम कोर्ट ने संविधान की सर्वोच्चता को रेखांकित करते हुए कहा कि निजी धार्मिक मान्यताओं से ऊपर उठकर फैसला लेना जरूरी है। 21 अप्रैल: कोर्ट ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया कि किसी को छूने से देवता अप्रशुद्ध कैसे हो सकते हैं? यह सुनवाई केवल सबरीमाला मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े 66 अन्य धार्मिक आस्था संबंधी मामलों को भी शामिल किया गया है। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ इस सब पर न्यायिक विवेचना कर रही है। फैसला जल्द आ सकता है या कोर्ट इसे रिजर्व भी रख सकता है। देश भर में धार्मिक मूल्यों और सामाजिक समानता के बीच संतुलन बनाना सुप्रीम कोर्ट के सामने बड़ी चुनौती है। इस मामले की गंभीरता और सुनवाई के चरण पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यह धार्मिक आस्था, संवैधानिक अधिकार और सामाजिक न्याय के बीच एक अहम कदम साबित होगा। सबरीमाला मामले से जुड़ी ताजा खबरों और हाईलाइट्स के लिए सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर विस्तृत अपडेट्स जारी रहेंगे।

अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से, 57 दिन चलेगी:28 अगस्त को खत्म होगी; 15 अप्रैल से रजिस्ट्रेशन शुरू होंगे
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अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू, 28 अगस्त को समाप्त होगी; रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल से शुरू

  अमरनाथ यात्रा के लिए तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को बताया कि इस साल यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगी। कुल 57 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा के लिए जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से पहला जत्था रवाना होगा। यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल से शुरू होंगे, जो देशभर के 556 बैंक शाखाओं और श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन भी कराया जा सकेगा। LG मनोज सिन्हा ने बताया कि इस बार 13 से 70 वर्ष के लोग इस यात्रा में शामिल हो सकते हैं। यात्रा की शुरुआत गुफा में 19 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा पर पहली पूजा से होगी। यात्रा के मुख्य दो रूट खुलेंगे: पारंपरिक नुनवान-पहलगाम रूट जो 48 किलोमीटर लंबा है और बालटाल रूट जो 14 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई वाला रास्ता है। यात्रा के प्रमुख रूट और उनके प्रमुख पड़ाव पहलगाम रूट: इस रूट पर गुफा तक पहुंचने में लगभग तीन दिन लगते हैं। यह रास्ता आसान और पैदल यात्रा के लिए अनुकूल माना जाता है। पहलगाम से पहला पड़ाव चंदनवाड़ी है, जो बेस कैंप से 16 किलोमीटर दूर है। यहां से चढ़ाई शुरू होती है। तीन किलोमीटर की चढ़ाई के बाद पिस्सू टॉप आता है, यहां से पैदल चलकर शाम तक शेषनाग पहुंचा जा सकता है। अगले दिन शेषनाग से 14 किलोमीटर का सफर करते हुए पंचतरणी पहुंचा जाता है, जो गुफा से सिर्फ 6 किलोमीटर दूर है। बालटाल रूट: यह रूट उन यात्रियों के लिए उपयुक्त है जिनके पास यात्रा के लिए कम समय हो। इस मार्ग पर सिर्फ 14 किलोमीटर की दूरी है, लेकिन चढ़ाई बेहद खड़ी और चुनौतीपूर्ण है। बुजुर्ग यात्रियों के लिए यह रूट कठिन साबित हो सकता है क्योंकि रास्ते संकरे और खतरनाक मोड़ों से भरे हुए हैं। यात्रा के दौरान ध्यान देने योग्य बातें यात्रा के दौरान मेडिकल सर्टिफिकेट, चार पासपोर्ट साइज़ फोटो, आधार कार्ड, RFID कार्ड और ट्रैवल एप्लिकेशन फॉर्म साथ रखना अनिवार्य है। फिजिकल फिटनेस के लिहाज से रोजाना चार से पांच किलोमीटर पैदल चलने की प्रैक्टिस शुरू करें। श्वास नियंत्रित योग जैसे प्राणायाम और एक्सरसाइज करें ताकि सहनशीलता बढ़े। यात्रा के दौरान ऊनी कपड़े, रेनकोट, ट्रैकिंग स्टिक, पर्याप्त पानी और आवश्यक दवाओं का साथ होना जरूरी है। अमरनाथ यात्रा देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है। इसका सही तरीके से आयोजन और सावधानीपूर्वक तैयारी यात्रियों की सुरक्षा और यात्रा की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है। उपराज्यपाल का यह निर्देश है कि सभी यात्री निर्धारित नियमों का पालन करें ताकि यात्रा शांतिपूर्ण और सुरक्षित रहे। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर प्रशासन सभी आवश्यक सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने में जुटा है ताकि इस पवित्र यात्रा को सुचारू ढंग से आयोजित किया जा सके।

दिल्ली-यूपी में एक दिन बाद 40°C के पार जाएगा तापमान:मनाली में बर्फबारी, पारा -7 डिग्री पहुंचा; जम्मू में बवंडर उठा
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मनाली में बर्फबारी और जम्मू में बवंडर उठा

  देश भर में गर्मी का प्रकोप तेज होता जा रहा है और मौसम विभाग ने आगामी दिनों में उत्तर-पश्चिमी भारत में तापमान बढ़ने की चेतावनी दी है। वहीं, हिमाचल प्रदेश के मनाली में शनिवार शाम को बर्फबारी हुई, जहां तापमान रात को -7 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। जम्मू में भी एक बवंडर देखने को मिला, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता की लहर दौड़ गई। मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के लखनऊ समेत कई शहरों में रविवार को अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच सकता है। दिल्ली में भी शनिवार को तापमान 34.7 डिग्री तक पहुँचकर पिछले दिन की तुलना में बढ़ोतरी दर्ज की गई। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी गर्मी का असर देखने को मिला और तापमान 36 डिग्री तक पहुँच गया। राजस्थान के सीकर और शेखावाटी क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) के प्रभाव से तापमान में कुछ गिरावट आई थी, लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि रविवार से फिर से तापमान बढ़ने लगेगा। मौसम विभाग के आगामी दो दिनों (13 और 14 अप्रैल) के पूर्वानुमान के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत और मध्य भारत में तापमान में 6 से 8 डिग्री की वृद्धि होगी। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में तेज गर्मी बनी रहेगी। बिहार में भी गर्मी जारी रहने की संभावना है जबकि छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में हीटवेव का खतरा भी बना है। पूर्वोत्तर राज्यों और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश और तूफान की संभावना बनी हुई है, जो गर्मी को कुछ हद तक कम करने में सहायक हो सकते हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि 15 अप्रैल से मध्य प्रदेश में नया मौसम प्रणाली सक्रिय होगा, जिससे राज्य में तापमान में और वृद्धि हो सकती है। मनाली में बर्फबारी और जम्मू में बवंडर जैसी परिस्थितियों ने मौसम की जटिलता को दर्शाया है। ये घटनाएँ मौसम के अचानक बदलाव का संकेत हैं और लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। बीते सप्ताह से तापमान में तेजी से बदलाव देखने को मिला है, जो पर्यावरण और आम जनजीवन पर प्रभाव डाल सकता है। अतः, आने वाले दिनों में उत्तर भारत में गर्मी के थपेड़ों से बचाव के लिए सावधानी बरतना जरूरी होगा। लोगों को तेज धूप और गर्मी से बचाव के लिए पर्याप्त पानी पीना, हल्का और ढीला परिधान पहनना, और संभव हो तो धूप से बचना चाहिए। सरकार और प्रशासन भी आवश्यक राहत उपायों को जल्द लागू करें ताकि आम जनमानस को गर्मी की मार से राहत मिल सके।

खबर हटके- सैनिक पी गए 36 लाख लीटर कॉफी:सांप ने काटा तो बच्चे को नदी में बांधा; शटर-दीवार के बीच 6 घंटे फंसा रहा चोर
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खबर हटके: अमेरिकी सैनिकों ने पी 36 लाख लीटर कॉफी; सांप ने काटा तो बच्चे को नदी में बांधा; शटर-दीवार के बीच 6 घंटे फंसा रहा चोर

  आज की खबरों में कुछ अनोखी और हैरान करने वाली घटनाएं सामने आई हैं, जो आपकी रुचि को जरूर बढ़ाएंगी। सबसे पहले बात करते हैं अमेरिकी सैनिकों की, जो अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनावपूर्ण जंग के दौरान लगभग 36 लाख लीटर कॉफी पी चुके हैं। कॉफी की इतनी बड़ी मात्रा से सैनिकों को सतर्क और चौकस बनाए रखने में मदद मिली। वहीं, उत्तर प्रदेश के अमरोहा में एक बच्चे के साथ हुई एक डरावनी घटना ने लोगों को हैरान कर दिया है। जब उस बच्चे को सांप ने काटा, तो स्थानीय लोग उसे बचाने की पूरी कोशिश करने के बजाय उसे 12 घंटे तक गंगा नदी में बांधकर रखने का फैसला किया। यह घटना इलाके में चर्चा का विषय बनी है और लोगों में इसके प्रति संवेदना और चिंता दोनों देखी गई है। इसी तरह, गाजियाबाद में एक चोर की अजीबोगरीब स्थिति का समाचार भी सामने आया है। वह चोर लगभग 6 घंटे तक शटर और दीवार के बीच फंसा रहा। पुलिस और आसपास के लोगों ने उसकी मदद के लिए प्रयास किए और अंततः उसे सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस घटना ने स्थानीय स्तर पर लोगों को चेतावनी दी है कि सावधानी बरतनी चाहिए और ऐसी असामान्य परिस्थितियों में सही कदम उठाना आवश्यक है। इन तीनों घटनाओं के अलावा भी आज खबर हटके में और कई रोचक एवं हटके खबरें सामने आई हैं, जो आपको देश-दुनिया की ताजा जानकारियों से रूबरू कराएँगी। हम ऐसे खबरों को आपके लिए लाते रहेंगे ताकि आपका दिन मनोरंजक और जानकारीपूर्ण बना रहे। यदि आपको हमारी ये खबरें पसंद आईं तो कृपया खबर हटके को बेहतर बनाने के लिए अपना फीडबैक जरूर दें। इसके लिए <a href=”

बिहार में सड़क हादसे में 13 की मौत, 32 घायल:मरने वालों में एक ही परिवार के 5 लोग; बस ने पिकअप को उड़ाया, सड़क पर बिखरीं लाशें
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बिहार में सड़क हादसे में 13 की मौत, 32 घायल: मरने वालों में एक परिवार के 5 सदस्य शामिल; बस ने पिकअप को टक्कर मारी, सड़क पर बिखरीं लाशें

बिहार के कटिहार जिले में शनिवार देर शाम राष्ट्रीय राजमार्ग NH-31 पर एक जघन्य सड़क हादसा हुआ, जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई और 32 से अधिक घायल हुए हैं। मृतकों में 10 महिलाएं, 2 पुरुष और एक बच्ची शामिल हैं, जिनमें से पांच लोग एक ही परिवार के बताए जा रहे हैं। अधिकतर मृतक पूर्णिया जिले के रहने वाले हैं, जबकि एक मृतक की पहचान नहीं हो सकी है। यह हादसा कोढ़ा ब्लॉक के पास हुआ है, जहां बस ने पिकअप वाहन को जोरदार टक्कर मारी। हादसे की शुरुआत तब हुई जब बस के ड्राइवर ने तेज गति के कारण पहले दो बाइक सवारों को कुचला। इसके बाद भागते हुए बस ने पिकअप को टक्कर मार दी। उस वक्त बस की रफ्तार 100 किलोमीटर से अधिक बताई जा रही है। हादसे के तुरंत बाद बस का ड्राइवर स्टेयरिंग में फंस गया था, जिसे स्थानीय लोगों ने रॉड की मदद से निकाला। पिकअप में कुल 22 से 25 लोग सवार थे, जो झारखंड से कठिया मेले से लौट रहे थे। स्थानीय लोगों ने बताया कि मृतक सूहवा और सपनी गांव के निवासी हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दुर्घटना के समय बस ड्राइवर शराब के नशे में था, जिसके कारण वाहन की नियंत्रण खो गया। हादसे के बाद स्थानीय लोग और पुलिस कर्मी घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने में जुट गए। कटिहार के पूर्णिया जीएमसी में गंभीर रूप से घायल लोगों का इलाज चल रहा है, जहां कई की स्थिति नाजुक बनी हुई है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए और घायलों को 50-50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर राहत और बचाव कार्य की पुष्टि की है। क्रेन की मदद से मृत एवं घायल वाहन हटाकर सड़क पर जाम समाप्त कराया गया। हादसे से पूरे क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल है। सड़क पर शव बिखरे होने और गंभीर रूप से घायल लोगों की हालत देखकर अफरा-तफरी मची रही। स्थानीय लोग और पुलिस मिलकर राहत कार्यों में लगे थे। मृतकों में शामिल सदानन्द मुर्मू अपने बेटे के लिए परिवार के साथ लड़की देखने जा रहे थे जब यह दुर्घटना हुई। पुलिस ने कहा है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि कुछ घायल अभी भी नाजुक अवस्था में हैं। कटिहार जिले में इस दुखद घटना ने लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया है। दुर्घटना की जांच जारी है और दोषी ड्राइवर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह दुखद घटना सड़क सुरक्षा और नियमों का पालन करने के महत्व को फिर से उजागर करती है। तेज गति से वाहन चलाने तथा शराब पीकर ड्राइविंग का खतरनाक परिणाम आम जनता के लिए एक बड़े सबक के रूप में सामने आई है।

बिहार में सड़क हादसे में 10 लोगों की मौत:25 लोग घायल, कटिहार के कोढ़ा में बस और पिकअप की हुई टक्कर
धर्म एवं यात्रा

बिहार के कटिहार में सड़क हादसे में दस लोगों की मौत, 25 से अधिक घायल

बिहार के कटिहार जिले में शनिवार शाम एक भयानक सड़क हादसा हुआ है, जिसमें दस लोगों की मौत हो गई जबकि 25 से अधिक लोग घायल हो गए। यह दुर्घटना कोढ़ा ब्लॉक के राष्ट्रीय राजमार्ग NH-31 पर घटित हुई। घटना के बाद सड़क पर मंजर भयावह हो गया और दोनों वाहनों के परखच्चे उड़ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेज रफ्तार बस ने एक बाइक सवार को कुचल दिया। बस ड्राइवर ने इसके बाद तेजी से भागने की कोशिश की, इसी दौरान पिकअप वाहन के साथ उसकी टक्कर हो गई। पिकअप में लगभग 22 से 25 लोग सवार थे जो झारखंड की कठिया मेला यात्रा करके लौट रहे थे। मृतकों में सदानंद मुरमुर, प्रमिला देवी और चिंता मणि महतो की पहचान हो चुकी है। अन्य मृतकों व घायलों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। स्थानीय लोगों और पुलिस की तत्परता से घायलों को तुरंत निकाला गया और पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया। गंभीर घायलों को बेहतर इलाज के लिए पूर्णिया जीएमसी भेजा गया है, जहां कई मरीजों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। कठोर आपदा के मद्देनज़र, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए तथा घायलों को पचास-पचास हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने का आदेश दिया है। पुलिस ने पूरे क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता दी है। क्रेन की मदद से जाम वाली सड़क से वाहनों को हटाकर यातायात सामान्य किया गया। वहीं, कटिहार एसपी शिखर चौधरी भी दुर्घटना स्थल पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण कर रहे हैं। हादसे से पूरे इलाके में शोक की लहर है। स्थानीय ग्रामीण और प्रशासनिक अधिकारी इस संकट की घड़ी में एकजुट होकर प्रभावित परिवारों की मदद कर रहे हैं। पुलिस अभी भी दुर्घटना की पूरी जांच कर रही है और मृतक एवं घायलों के आंकड़ों को अपडेट कर रही है। यह दुखद हादसा NH-31 की सुरक्षात्मक स्थिति पर एक बार फिर चिंता का विषय बन गया है और संबंधित विभाग से इसे लेकर तत्काल कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।

थारू कैंप के पास ग्लेशियर टूटा, केदारनाथ पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त:यात्रा से पहले बारिश-बर्फबारी बनी सबसे बड़ी चुनौती, धाम में 3 फीट तक बर्फ
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थारू कैंप के पास ग्लेशियर टूटने से केदारनाथ पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त, यात्रा शुरू होने से पहले बारिश और बर्फबारी बनी सबसे बड़ी चुनौती, धाम में तीन फीट तक बर्फ जमी

  केदारनाथ धाम के कपाट खुलने में अब मात्र 11 दिन शेष हैं। 22 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए धाम के द्वार खोल दिए जाएंगे। प्रशासन ने यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इस बार आने वाले भक्तों को बेहतर अनुभव देने हेतु धाम और उसके आसपास सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्ती और विकास की दिशा में तेजी से काम चल रहा है। केदारनाथ तक पहुँचने वाले पैदल मार्ग और बेस कैंप की साफ-सफाई, मरम्मत तथा सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम ज़ोर-शोर से चल रहा है। प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों के बीच निरंतर समन्वय के साथ काम हो रहा है ताकि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न उत्पन्न हो। बर्फ हटाने से लेकर रास्तों को सुरक्षित बनाने तक हर स्तर पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि इन तैयारियों के बीच मौसम चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। लगातार हो रही बारिश और बर्फबारी के कारण कार्य प्रभावित हो रहा है, और थारू कैंप के पास ग्लेशियर के टूटने से पैदल मार्ग को भी नुकसान पहुँचा है। इसके बावजूद सफाई एवं मरम्मत कार्य में लगी टीमें हर मुश्किल परिस्थिति में तत्पर हैं ताकि निर्धारित समय पर यात्राओं को सुचारू रूप से शुरू किया जा सके। धूप खिलने से तैयारियाँ तेज त्योहारों से पहले हुई भारी बारिश और हिमपात के बाद अब मौसम सुधरना शुरू हो गया है। तेज धूप के कारण धाम के आस-पास जमी मोटी बर्फ को हटाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। कर्मचारी और मजदूर मिलकर रास्ते की मरम्मत और सफाई में लगे हुए हैं ताकि श्रद्धालुओं के लिए यात्रा मार्ग पूरी तरह सुरक्षित और साफ-सुथरा बनाया जा सके। ग्लेशियर टूटने पर अफरा-तफरी यात्रा की तैयारियों के बीच गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर थारू कैंप के पास दोपहर लगभग साढ़े बारह बजे ग्लेशियर टूट गया। यह घटना बड़ी लिनचौली से ऊपर हुई, जहां यात्रा मार्ग को सुगम बनाने के लिए लगातार कार्य चल रहा था। घटना के समय मौके पर कार्यरत मजदूर और कर्मचारी मौजूद थे। अचानक ग्लेशियर टूटने से कार्यस्थल पर अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षा की दृष्टि से उस मार्ग पर यात्रा को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया। खुशकिस्मती रही कि इस घटना में किसी के घायल होने या जान की हानि की कोई सूचना नहीं मिली है। प्रशासन ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रशासन ने बढ़ाई सतर्कता ग्लेशियर टूटने के बाद जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। क्षतिग्रस्त मार्ग को जल्द से जल्द दुरुस्त किया जा रहा है। लगातार भिन्न-भिन्न मौसम परिस्थितियाँ और बर्फबारी ऐसी घटनाओं को जन्म दे रही हैं, लेकिन राहत यह है कि बचाव टीम मौके पर लगी हुई है और यात्रा को समय पर शुरू कराने में कोई कोताही नहीं बरती जा रही है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि ग्लेशियर टूटने से कोई जनहानि नहीं हुई है और सभी कार्यकर्ता सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में परिस्थिति नियंत्रण में है और मार्ग खोलने के लिए श्रमिकों को तैनात कर दिया गया है। भक्तों की संख्या में जारी है आस्था पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों की बात करें तो केदारनाथ धाम पर श्रद्धालुओं की संख्या में उतार-चढ़ाव के बावजूद भक्ति और श्रद्धा में कमी नहीं आई है। वर्ष 2023 में लगभग 19.6 लाख, 2024 में 16.5 लाख और वर्ष 2025 में करीब 17.7 लाख श्रद्धालुओं ने धाम के दर्शन किए। कुल मिलाकर पिछले तीन वर्षों में लगभग 53.8 लाख श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं जो दर्शाता है कि आस्था लगातार बढ़ रही है। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि मौसम की विपरीत परिस्थितियों और चुनौतियों के बीच भी लोग बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ पहुंच रहे हैं। प्रशासन और संबंधित विभाग हर संभव प्रयास कर रहे हैं कि इस बार भी यात्रियों को एक सुरक्षित, सहज और सुखद यात्रा अनुभव मिले।

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