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सबरीमाला केस: सुप्रीम कोर्ट में 7 दिन की सुनवाई, पूछा गया- जिसे भगवान ने बनाया, उसके छूने से देवता कैसे हो सकते हैं अपवित्र

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की प्रवेश पर चल रही निर्णायक सुनवाई बुधवार से शुरू हो गई है। यह सुनवाई कुल सात दिनों तक चलेगी, जिसमें धार्मिक आस्था और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन साधने की कोशिश की जाएगी। पिछले दिनों हुए सत्रों में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यदि कोई राज्य सामाजिक सुधार या जनहित के नाम पर धार्मिक प्रथाओं पर रोक लगाता है, तो कोर्ट उसका संज्ञान ले सकता है।

केरल हाईकोर्ट ने 1991 में सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगा दी थी। इसके बाद 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रतिबंध को हटा दिया था, जिससे बहस और पुनर्विचार याचिकाएं शुरू हो गईं। माहौल इतना संवेदनशील है कि मंदिर प्रबंधन ने भी महिलाओं की एंट्री का कड़ा विरोध किया है।

सुनवाई के प्रमुख बिंदु और घटनाक्रम

  • 7 अप्रैल: केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के फैसले का विरोध जताया और धार्मिक परंपराओं के सम्मान की बात कही।
  • 8 अप्रैल: केंद्र की दलीलें सुनते हुए कोर्ट ने पूछा कि जिन भक्तों का मंदिर में जाना नहीं है, वे धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे सकते हैं।
  • 9 अप्रैल: कोर्ट ने कहा कि मंदिर में महिलाओं की प्रवेश रोकने से समाज का विभाजन बढ़ सकता है।
  • 15 अप्रैल: सबरीमाला मैनेजमेंट ने तर्क दिया कि यह कोई रेस्टोरेंट नहीं है, बल्कि ब्रह्मचारी देवता का मंदिर है।
  • 17 अप्रैल: सुप्रीम कोर्ट ने संविधान की सर्वोच्चता को रेखांकित करते हुए कहा कि निजी धार्मिक मान्यताओं से ऊपर उठकर फैसला लेना जरूरी है।
  • 21 अप्रैल: कोर्ट ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया कि किसी को छूने से देवता अप्रशुद्ध कैसे हो सकते हैं?

यह सुनवाई केवल सबरीमाला मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े 66 अन्य धार्मिक आस्था संबंधी मामलों को भी शामिल किया गया है। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ इस सब पर न्यायिक विवेचना कर रही है। फैसला जल्द आ सकता है या कोर्ट इसे रिजर्व भी रख सकता है।

देश भर में धार्मिक मूल्यों और सामाजिक समानता के बीच संतुलन बनाना सुप्रीम कोर्ट के सामने बड़ी चुनौती है। इस मामले की गंभीरता और सुनवाई के चरण पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यह धार्मिक आस्था, संवैधानिक अधिकार और सामाजिक न्याय के बीच एक अहम कदम साबित होगा।

सबरीमाला मामले से जुड़ी ताजा खबरों और हाईलाइट्स के लिए सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर विस्तृत अपडेट्स जारी रहेंगे।

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