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May 2026

sirohi

अर्बुदा गौशाला विकास को लेकर जिला कलेक्टर ने दिए अहम निर्देश

संचालन समिति पुनर्गठन, नंदीशाला स्थापना और पौधारोपण पर विशेष जोर सिरोही, 27 मई। जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर की अध्यक्षता में बुधवार को अर्बुदा गौशाला एवं डेयरी फार्म, सिरोही में बैठक आयोजित की गई, जिसमें संबंधित सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में गौशाला के विकास, व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण तथा भविष्य की कार्ययोजना को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। गौशाला संचालक रघुनाथ सिंह ने अर्बुदा गौशाला एवं डेयरी फार्म की गतिविधियों एवं व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। इस दौरान जिला कलेक्टर ने संचालन समिति में आवश्यक बदलाव एवं कार्यकारी सदस्यों के पुनर्गठन के साथ सुव्यवस्थित स्ट्रक्चर तैयार करने हेतु कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने गौशाला में दान एवं सहयोग बढ़ाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने, ऑडिट करवाने तथा पंचायत समिति स्तर पर नंदीशाला खोलने के लिए संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग को निविदा प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश प्रदान किए। जिला कलेक्टर ने तहसीलदार को त्रैमासिक बैठक आयोजित करने के निर्देश देते हुए कहा कि गौशाला में धन संग्रह के लिए गौपालकों को प्रेरित किया जाए। साथ ही सफाई व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने तथा अधिक से अधिक पौधारोपण करने पर भी जोर दिया। बैठक के दौरान गौशाला से संबंधित विभिन्न समस्याओं एवं आवश्यक कार्यों से जिला कलेक्टर को अवगत कराया गया, जिस पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। बैठक के अंत में गौशाला संचालक एवं संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग ने सभी समिति सदस्यों का आभार व्यक्त किया। इससे पूर्व जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने गौशाला परिसर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने गौपूजन कर गौवंश की देखभाल, चारा-पानी एवं अन्य सुविधाओं की जानकारी भी प्राप्त की। बैठक में गोविंद वल्लभदास, एसडीएम हरिसिंह देवल, तहसीलदार जगदीश विश्नोई, बीडीओ मंछाराम, डॉ. मुकेश चौधरी, रघुनाथ सिंह राजपुरोहित, धनराज चौधरी, रघु भाई माली, नरेंद्र सिंह, भूराराम पुरोहित, ब्रह्मदत्त पुरोहित नाररवाड़ा, कमलेश माली, प्रवीण माली, किशन जनापुर, प्रमोद जानी, रमेश सिंह, अशोक पुरोहित आदर्श सहित अन्य मौजूद रहे।

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डीएलएसए सचिव ने किया वन स्टॉप सेंटर का आकस्मिक निरीक्षण

व्यवस्थाएं संतोषजनक मिलीं, बालिका की चिकित्सीय जांच के दिए निर्देश सिरोही। सदस्य सचिव, राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के आदेशानुसार एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सिरोही के निर्देशानुसार श्रीमती सवित्री आनंद निर्भीक, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सिरोही द्वारा मंगलवार को वन स्टॉप सेंटर, सिरोही का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने केंद्र पर उपलब्ध व्यवस्थाओं, अभिलेखों, सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता एवं लाभार्थियों को प्रदान की जा रही सुविधाओं का गहन अवलोकन एवं जांच की। निरीक्षण के समय केंद्र की समस्त व्यवस्थाएं संतोषजनक एवं सुव्यवस्थित पाई गईं। इस दौरान केंद्र पर एक बालिका भी उपस्थित पाई गई। मामले को गंभीरता एवं संवेदनशीलता से लेते हुए सचिव श्रीमती सवित्री आनंद निर्भीक ने संबंधित अधिकारियों को बालिका की आवश्यक चिकित्सीय जांच एवं अन्य जरूरी मेडिकल टेस्ट शीघ्र करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बालिका को समय पर समुचित उपचार एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए। सचिव ने अधिकारियों से कहा कि वन स्टॉप सेंटर में आने वाली प्रत्येक पीडि़ता एवं जरूरतमंद महिला/बालिका को संवेदनशीलता के साथ सहायता उपलब्ध कराई जाए तथा उनकी सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी भी ली तथा रिकॉर्ड संधारण एवं कार्यप्रणाली की सराहना की। निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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सहकारी संस्थाओं में भ्रष्टाचारियों पर कसेगा शिकंजा, गबन करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई और वसूली के दिए निर्देश जयपुर। सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम कुमार दक ने सहकारिता विभाग के कार्यालयों एवं सहकारी संस्थाओं में अनियमितताओं, गबन और भ्रष्टाचार से जुड़े दर्ज प्रकरणों में कठोर कार्रवाई करने के निर्देश गृह विभाग, पुलिस एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना राज्य सरकार की प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दक बुधवार को शासन सचिवालय स्थित चिंतन सभागार में सहकारिता विभाग के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन कार्यालयों एवं सहकारी संस्थाओं में गबन, अनियमितताओं एवं अन्य मामलों में दर्ज एफआईआर की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क का हो खुलासा प्रकरणों में त्वरित, निष्पक्ष और न्यायोचित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए गृह विभाग, पुलिस एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। दक ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गबन, भ्रष्टाचार एवं वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों में शीघ्र अनुसंधान पूरा कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि गबन के मामलों में दोषियों के खिलाफ आपराधिक धाराओं में कार्रवाई के साथ-साथ वसूली भी सुनिश्चित की जाए। फर्जीवाड़े और घोटालों के मामलों में मुख्य आरोपियों के साथ पूरे नेटवर्क का खुलासा कर सभी संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही दोषियों द्वारा परिजनों के नाम पर बनाई गई संपत्तियों के विरुद्ध भी कार्रवाई कर वसूली की जाए। बिना पर्याप्त आधार एफआर लगाने पर जताई नाराजगी सहकारिता मंत्री ने कहा कि गंभीर प्रकृति के मामलों में जिस मंशा से एफआईआर दर्ज करवाई जाती है, उसी अनुरूप कार्रवाई भी होनी चाहिए। ऐसे मामलों में बिना पर्याप्त आधार के एफआर लगने से गलत संदेश जाता है। अपराध प्रमाणित होने पर न्यायालय में समय पर चालान प्रस्तुत किए जाएं। उन्होंने कहा कि पुलिस मुख्यालय स्तर पर अलग सेल का गठन कर ऐसे मामलों की नियमित मॉनिटरिंग की जानी चाहिए। दक ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद सहित अन्य कार्यों में फर्जीवाड़े एवं अनियमितताओं के कई बड़े मामले सामने आए हैं, जिनसे विभाग की छवि प्रभावित हुई है। ऐसे मामलों पर विशेष फोकस किया जाए। ई-मित्र संचालकों और बैंक खाते किराये पर देने वालों पर भी कार्रवाई दक ने फर्जीवाड़े में शामिल ई-मित्र संचालकों एवं बैंक खाते किराये पर देने वाले लोगों के विरुद्ध भी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आमजन और किसानों का सहकारी संस्थाओं पर विश्वास बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए सभी समितियों में वित्तीय अनुशासन, नियमित ऑडिट, पारदर्शी कार्यप्रणाली और जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं में भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं के मामले सामने आने से विभाग की छवि धूमिल होती है तथा आमजन का विश्वास कम होता है। दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होने से भविष्य में ऐसे मामलों पर अंकुश लगेगा और आमजन का सहकारिता पर विश्वास मजबूत होगा। लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण का भरोसा सहकारिता विभाग के शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां डॉ. समित शर्मा ने कहा कि गबन एवं अनियमितताओं के मामलों में विभाग द्वारा सहकारी अधिनियम की धाराओं के अंतर्गत जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई का प्रावधान है। केवल गंभीर प्रकृति के मामलों में ही एफआईआर दर्ज करवाई जाती है। उन्होंने कहा कि अधिकांश मामलों में पूर्व जांच हो चुकी होती है तथा आरोपी भी ज्ञात होते हैं, इसलिए पुलिस स्तर पर तत्काल कार्रवाई संभव है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई होने से निचले स्तर तक स्पष्ट संदेश जाएगा और अनियमितताओं पर रोक लगेगी। पुलिस एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अधिकारियों ने विश्वास दिलाया कि आगामी दिनों में कार्रवाई में तेजी लाते हुए लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जाएगा। ये रहे उपस्थित बैठक में पुलिस महानिरीक्षक, गृह विभाग दीपक कुमार, डीआईजी सीआईडी (सीबी) दीपक भार्गव, राजफेड के प्रबंध निदेशक सौरभ स्वामी, पुलिस अधीक्षक (एसीबी) गोरधन लाल, संयुक्त शासन सचिव सहकारिता विभाग प्रह्लाद सहाय नागा, एडिशनल डीसीपी पुलिस आयुक्तालय जयपुर नीतिराज सिंह सहित सहकारिता विभाग, पुलिस एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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बॉर्डर जिलों के लिए 360 डिग्री सुरक्षा फ्रेमवर्क तैयार

बीकानेर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah ने बीकानेर में सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे जिलों से जुड़े सुरक्षा संबंधी मुद्दों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma, राजस्थान सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों तथा बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर और फलोदी के जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षकों ने भाग लिया। सीमा प्रबंधन को और अधिक सशक्त बनाने पर जोर बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि राज्य सरकार के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए सीमा प्रबंधन को सशक्त एवं व्यापक बनाया जाए। प्रत्येक सीमावर्ती जिले के लिए 360 डिग्री सुरक्षा फ्रेमवर्क तैयार करने का निर्णय लिया गया। इस एकीकृत प्रयास में स्थानीय नागरिकों, राज्य सरकार की मशीनरी तथा सभी संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे सीमा प्रबंधन को और अधिक समग्र एवं मजबूत बनाया जा सके। अवैध निर्माणों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अवैध निर्माणों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय सीमा से 15 किलोमीटर के दायरे में हो रहे अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने बीएसएफ, सीबीडीटी, एनसीबी तथा राज्य सरकार की मशीनरी के साथ समन्वित सीमा प्रबंधन रणनीति अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि घुसपैठ, नारकोटिक्स तस्करी, अतिक्रमण, आतंकवादी फंडिंग और अन्य सीमा-पार अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बैंकों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और फर्जी दस्तावेजों की जांच के निर्देश बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री ने जिला कलेक्टरों को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपते हुए निर्देश दिए कि सभी बैंकों में पूर्ण कानूनी एवं वित्तीय अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही प्रमुख व्यवसायिक प्रतिष्ठानों का सत्यापन, उनके फंडिंग स्रोतों की जांच, म्यूल खातों एवं शेल कंपनियों की पहचान, फर्जी आधार कार्डों की जांच तथा तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जाए। उन्होंने साइबर अपराधों के त्वरित निवारण के लिए ‘1930’ कॉल सेंटर के प्रभावी उपयोग तथा क्षेत्र में कानून व्यवस्था एवं न्यायिक प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने के लिए तीनों नए आपराधिक कानूनों के पूर्ण क्रियान्वयन के निर्देश भी दिए। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल बैठक के दौरान वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (Vibrant Village Programme) के सफल एवं प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया गया। इसके माध्यम से अंतिम छोर तक शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने, आर्थिक अपराधों पर रोक लगाने, बुनियादी सुविधाओं की कमी दूर करने तथा सीमावर्ती क्षेत्रों की जनसंख्या को बेहतर सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही सीमावर्ती गांवों में सभी सरकारी योजनाओं का 100 प्रतिशत संतृप्तिकरण सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई। बैठक में कहा गया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर उच्चतम स्तर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही केंद्र एवं राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास और सुरक्षा को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया।

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ना करो सितम पर सितम, मुझे जीने दो

शहर की सुबह अब चिडिय़ों की चहचहाहट से नहीं, बल्कि सरकारी आदेशों की खडख़ड़ाहट से खुलती है। कहीं पेट्रोल पंप पर लंबी कतारें हैं, कहीं गैस एजेंसी के बाहर खाली सिलेंडर लिए खड़े लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। सडक़ पर निकलो तो ट्रैफिक पुलिस ऐसे घूरती है मानो जनता नहीं, कोई भगोड़ा अपराधी घूम रहा हो। और यदि गलती से किसी गरीब ने फुटपाथ के कोने पर अपनी रोजी-रोटी का छोटा सा ठिकाना बना लिया, तो समझो उसने व्यवस्था के खिलाफ सबसे बड़ा अपराध कर दिया। बेचारी पब्लिक आखिर करे भी तो क्या करे। उसकी आवाज अब नारे नहीं बनती, केवल आह बनकर रह जाती है। उसके हिस्से में विरोध नहीं, सिर्फ गिड़गिड़ाहट बची है। वह हाथ जोडक़र कहती है साहब, जीने दो। लेकिन व्यवस्था के कानों तक उसकी आवाज पहुंचती ही कहां है। वहां तो नोटों की खनखनाहट इतनी तेज है कि गरीब की चीखें दब जाती हैं। आज के दौर में प्रशासन की तलवार बड़ी अदभुत हो गई है। उसका एक सिरा गरीब की झोपड़ी काटता है और दूसरा अमीरों की तिजोरी चमकाता है। कानून की किताबें सबके लिए बराबर होने का दावा करती हैं, लेकिन उनकी स्याही भी शायद जेब देखकर रंग बदल लेती है। निर्धनों के लिए नियम लोहे की जंजीर हैं, जबकि रसूखदारों के लिए वही नियम मोम की तरह पिघल जाते हैं। आखिर इनका दर्द कौन जानें मंगलवार की दोपहर शहर ने एक ऐसा दृश्य देखा जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। फुटपाथ पर कुछ मजदूर परिवार अपने नन्हें बच्चों के साथ पतले कपड़ों और प्लास्टिक की चादरों से छोटा सा आशियाना बनाकर रह रहे थे। वे कोई महल नहीं खड़ा कर रहे थे, न ही सरकारी जमीन बेच रहे थे। वे तो केवल धूप से बचने की कोशिश कर रहे थे। दिनभर मजदूरी करने वाले इन लोगों की सबसे बड़ी ख्वाहिश सिर्फ इतनी थी कि शाम को बच्चे खुले आसमान के नीचे नहीं, बल्कि किसी कपड़े की ओट में सो जाएं। लेकिन व्यवस्था को यह मंजूर नहीं था। निकाय का अमला पहुंचा। जेसीबी ऐसे आगे बढ़ी मानो किसी आतंकवादी अड्डे को ध्वस्त करने जा रही हो। अधिकारियों के चेहरे पर कठोरता थी और गरीबों की आंखों में डर। मासूम बच्चे अपनी मांओं की उंगलियां पकडक़र सहमे खड़े थे। कुछ महिलाएं हाथ जोडक़र विनती कर रही थीं साहब, शाम तक रहने दो, बच्चे हैं। मगर वहां संवेदना नहीं, केवल आदेश था। और आदेश भी ऐसा, जिसका नाम लेते ही हर सवाल खत्म हो जाए। अधिकारी बोले यह कलेक्टरी आदेश है। यह वाक्य आजकल लोकतंत्र का सबसे बड़ा ब्रह्मास्त्र बन चुका है। इसके आगे इंसानियत, संवेदना, करुणा सब बौनी हो जाती हैं। अधिकारी भी इसे ऐसे बोलते हैं जैसे भगवान का फरमान सुना रहे हों। जनता सुनते ही चुप हो जाती है, क्योंकि उसे पता है कि इस आदेश के पीछे सत्ता की पूरी मशीनरी खड़ी है। क्या आदेश केवल गरीबों के लिए होते हैं? शहर की सडक़ों पर नजर दौड़ाइए। बड़े-बड़े प्रतिष्ठानों ने फुटपाथ निगल लिए। कहीं होटल वालों ने पार्किंग बना ली, कहीं दुकानदारों ने सडक़ तक सामान फैला दिया। कई रसूखदारों के भवन तो ऐसे खड़े हैं मानो सरकारी जमीन उनके दादा की विरासत हो। लेकिन वहां न जेसीबी पहुंचती है, न नोटिस चिपकते हैं। वहां कानून आंखों पर पट्टी बांध लेता है। क्योंकि वहां राजनीति की छतरी तनी होती है। वहां नोटों की खनखनाहट होती है। वहां फोन आते हैं अपने आदमी हैं, ध्यान रखना। और प्रशासन तुरंत समझ जाता है कि कौन-सा अतिक्रमण अवैध है और कौनसा सम्माननीय। व्यवस्था का यह दोहरा चरित्र अब छुपा नहीं है। गरीब के लिए नियमों की पूरी सेना उतर आती है, जबकि रसूखदारों के लिए कानून छुट्टी पर चला जाता है। यही कारण है कि शहर में अतिक्रमण की एक समानांतर दुनिया खड़ी हो चुकी है। फर्क सिर्फ इतना है कि गरीब का अतिक्रमण तिरपाल का होता है और अमीर का कंक्रीट का। गरीब की झोपड़ी एक घंटे में टूट जाती है, लेकिन रसूखदारों की बहुमंजिला दीवारों को वर्षों तक कोई हाथ नहीं लगाता। आखिर क्यों? क्योंकि गरीब के पास सिफारिश नहीं होती। उसके पास नेता का मोबाइल नंबर नहीं होता। उसके पास कुछ अधिकारियों की मेज तक पहुंचने वाली हरी पत्तियां नहीं होतीं। आज राजनीति और प्रशासन का रिश्ता भी बड़ा दिलचस्प हो गया है। जनता समझती है कि नेता जनता के सेवक हैं और अधिकारी व्यवस्था के रक्षक। लेकिन असल तस्वीर कुछ और ही है। यहां कई बार नेता और अधिकारी मिलकर ऐसा खेल खेलते हैं जिसमें जनता सिर्फ मोहरा बनकर रह जाती है। जब कार्रवाई करनी होती है तो गरीबों पर डंडा चलता है, ताकि अखबारों में सुर्खियां बनें प्रशासन सख्त। और जब रसूखदारों पर कार्रवाई की बारी आती है, तो फाइलें अचानक गायब हो जाती हैं, नोटिस ठंडे बस्ते में चले जाते हैं और जांच समितियां नींद में चली जाती हैं। यह वही राजनीति है जहां मंचों पर गरीबों के नाम पर आंसू बहाए जाते हैं, लेकिन पर्दे के पीछे उन्हीं गरीबों की झोपडिय़ां उजाड़ी जाती हैं। चुनाव आते हैं तो नेता गरीब की चौखट पर बैठकर रोटी खाते हैं, फोटो खिंचवाते हैं, बच्चों को गोद में उठाते हैं। लेकिन चुनाव खत्म होते ही वही गरीब प्रशासनिक बुलडोजर के नीचे कुचला जाता है। सबसे दुखद बात यह है कि गरीब अब विरोध भी नहीं करता। उसने शायद मान लिया है कि यह व्यवस्था उसके लिए बनी ही नहीं है। वह केवल तमाशा देखता है। उसकी आंखों में गुस्सा नहीं, बल्कि हार दिखाई देती है। मानसिक संवेदनाओं का विध्वंस फुटपाथ पर रोते वे मासूम बच्चे केवल अपने टूटे आशियाने को नहीं देख रहे थे, वे इस व्यवस्था का असली चेहरा देख रहे थे। वे समझ रहे थे कि इस शहर में गरीब होना सबसे बड़ा अपराध है। उन बच्चों ने देखा कि कैसे कुछ लोग फोन घुमाकर अपने अवैध निर्माण बचा लेते हैं। कैसे कुछ लोग नोटों की गड्डिया खनकाकर नियमों को खरीद लेते हैं। कैसे कुछ नेताओं की मुस्कान के पीछे गरीबों की बेबसी छुपी होती है। यह केवल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं थी, यह संवेदनाओं का विध्वंस था। विडंबना देखिए, प्रशासन विकास की बातें करता है। शहर को सुंदर बनाने के दावे किए जाते

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पैडल पर निकले अफसर, शहर को दे रहे पेट्रोल- डीजल बचत का संदेश

सिरोही। जब जिम्मेदार अफसर खुद साइकिल की घंटी के साथ सडक़ों पर उतरें, तो संदेश केवल शब्दों में नहीं, बल्कि पूरे शहर की सोच में उतर जाता है। सिरोही में इन दिनों कुछ ऐसा ही प्रेरणादायी दृश्य देखने को मिल रहा है, जहां पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पेट्रोल-डीजल बचाने, पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए साइकिल पर कार्यालय और निरीक्षण कार्य कर नई मिसाल पेश कर रहे हैं। जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर द्वारा शुरू की गई यह संदेशात्मक पहल अब जिले के पुलिस अधिकारियों तक भी पहुंच चुकी है। रविवार शाम अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सहित पुलिस अधिकारियों ने साइकिल पर शहर में सांयकालीन गश्त कर आमजन को ऊर्जा संरक्षण और फिटनेस का संदेश दिया। अधिकारियों की इस अनूठी मुहिम को शहरवासियों ने उत्साह और सराहना के साथ देखा। सडक़ों पर जब पुलिस अधिकारी साइकिल से गश्त करते नजर आए, तो लोगों में उत्सुकता के साथ सकारात्मक सोच भी जागृत हुई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक किशोरसिंह चौहान, डीएसपी मुकेश चौधरी, सब इंस्पेक्टर प्रेमसिंह तथा कोतवाली के सहायक उपनिरीक्षक सचिंद्र रतनू ने शहर के विभिन्न मार्गों पर साइकिल से गश्त की। इस दौरान अधिकारियों ने यातायात व्यवस्था का जायजा लिया तथा आमजन से कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग की अपील भी की। प्रदूषण घटाने और ईंधन बचाने की अपील पुलिस अधिकारियों ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण और ईंधन की खपत को देखते हुए साइकिल चलाने जैसी आदतों को बढ़ावा देना बेहद आवश्यक है। साइकिल न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अधिकारियों ने कहा कि यदि छोटी दूरी के लिए लोग मोटर वाहनों की बजाय साइकिल का उपयोग करें, तो पेट्रोल और डीजल की बड़ी मात्रा में बचत की जा सकती है तथा प्रदूषण को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। साइकिल गश्त के दौरान अधिकारियों ने शहर के प्रमुख मार्गों, बाजार क्षेत्रों और सार्वजनिक स्थलों का निरीक्षण किया। साथ ही व्यापारियों और आमजन से संवाद कर यातायात नियमों की पालना, हेलमेट पहनने और सडक़ सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने की अपील भी की। इस पहल का उद्देश्य केवल गश्त करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जिम्मेदारी का संदेश देना भी रहा। पुलिस विभाग की इस अनूठी पहल को लोगों ने प्रेरणादायी बताया। कई युवाओं ने कहा कि जब अधिकारी स्वयं साइकिल चलाकर उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं, तो इससे फिटनेस और पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई जागरूकता पैदा होगी।

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साइकिल क्रांति, सिरोही बना प्रेरणा केंद्र, प्रशासन ने दिया ऊर्जा संरक्षण का संदेश

ऊर्जा संरक्षण, फिट इंडिया और पर्यावरण सुरक्षा को मिला जन आंदोलन का स्वरूप  प्रशासनिक अधिकारियों की अनूठी पहल बनी बदलाव की मिसाल, आमजन और युवाओं में जागी नई जागरूकता सिरोही। बदलते वैश्विक हालात और बढ़ती ऊर्जा चुनौतियों के बीच सिरोही जिला प्रशासन ने एक सकारात्मक और प्रेरणादायक पहल करते हुए समाज के सामने जिम्मेदार नागरिकता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ईंधन एवं संसाधनों की बचत के आह्वान को धरातल पर उतारते हुए शुक्रवार को जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर के नेतृत्व में विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी और कर्मचारी साइकिल से अपने कार्यालय पहुंचे। इस अनूठी पहल ने न केवल ऊर्जा संरक्षण का संदेश दिया, बल्कि पर्यावरण सुरक्षा, स्वस्थ जीवनशैली और सामूहिक जिम्मेदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी नई दिशा प्रदान की। सुबह शहर की सडक़ों पर जब प्रशासनिक अधिकारी साइकिल चलाते हुए अपने कार्यालयों की ओर बढ़े तो यह दृश्य आमजन के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया। जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर के साथ मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रकाशचंद अग्रवाल, तहसीलदार जगदीश विश्नोई, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त निदेशक गोविंद चौधरी सहित कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने साइकिल के माध्यम से कार्यालय पहुंचकर यह संदेश दिया कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं। इस पहल को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसे जनभागीदारी और सामाजिक जागरूकता से जोडऩे का प्रयास किया गया। अधिकारियों ने आम नागरिकों से भी सप्ताह में कम से कम एक दिन साइकिल या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपील की। उनका मानना है कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में थोड़ी-सी ऊर्जा बचत को आदत बना ले, तो देश स्तर पर इसका व्यापक सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। ऊर्जा संरक्षण आर्थिक आवश्यकता ही नहीं बल्कि सामाजिक व पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने कहा कि वर्तमान समय में ऊर्जा संरक्षण केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी है। उन्होंने बताया कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें हमें वैकल्पिक और जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा देती हैं। साइकिल का उपयोग न केवल ईंधन बचाता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। नियमित साइकिल चलाने से शरीर स्वस्थ रहता है, प्रदूषण कम होता है और ट्रैफिक दबाव में भी कमी आती है। उन्होंने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि यदि संभव हो तो सप्ताह में कम से कम एक दिन निजी वाहन का उपयोग न करें। छोटी दूरी के लिए साइकिल अपनाएं या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि आने वाली पीढिय़ों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण तैयार करने में भी मदद मिलेगी। इस पहल के दौरान शहरवासियों ने भी प्रशासन के इस प्रयास की सराहना की। कई लोगों ने इसे सकारात्मक बदलाव की शुरुआत बताते हुए कहा कि जब प्रशासन स्वयं आगे बढक़र उदाहरण प्रस्तुत करता है, तब समाज में जागरूकता स्वत: बढ़ती है। युवाओं ने भी इस अभियान को फिटनेस और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए इसे नियमित रूप से अपनाने की बात कही। साइकिल संस्कृति को बढ़ावा देने से शहरी जीवन में कई सकारात्मक परिवर्तन संभव हैं। इससे वायु प्रदूषण में कमी आती है, ईंधन पर निर्भरता घटती है और नागरिकों का स्वास्थ्य बेहतर होता है। विकसित देशों में साइकिल आधारित परिवहन को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है और अब भारत के विभिन्न शहरों में भी इस दिशा में जागरूकता बढ़ रही है। सिरोही प्रशासन की यह पहल उसी सोच को मजबूत करने वाली मानी जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के प्रयास भविष्य में भी जारी रहेंगे और इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में कार्य किया जाएगा। विद्यालयों, महाविद्यालयों और सामाजिक संगठनों को भी इस अभियान से जोडऩे की योजना बनाई जा रही है ताकि युवाओं में ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूकता विकसित हो सके। वर्तमान समय में जब पूरी दुनिया ऊर्जा संकट और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब सिरोही प्रशासन का यह कदम एक सकारात्मक संदेश लेकर सामने आया है। यह पहल बताती है कि समाधान केवल बड़े स्तर की योजनाओं में ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की छोटी आदतों और सामूहिक प्रयासों में भी छिपा होता है।उल्लेखनीय है कि हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई है। सिरोही जिला मुख्यालय पर पेट्रोल के दाम बढक़र 109.32 रुपए प्रति लीटर और डीजल 94.42 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया है। ऐसे समय में ईंधन बचत को लेकर प्रशासन द्वारा शुरू किया गया यह संदेश आमजन को आर्थिक रूप से राहत देने के साथ-साथ संसाधनों के संतुलित उपयोग की दिशा में भी प्रेरित कर रहा है।  

तीखे-तेवर, राज्य-शहर

अपणायत के सेल्फी मोड में सरकार, गड्ढ़ों में भविष्य खोजते युवा

राज्य की राजनीति भी बड़ी अदभुत चीज है। यहां हर मौसम का अपना अलग सरकारी संस्करण होता है। गर्मी पड़े तो जनसंवाद, बारिश आए तो निरीक्षण, चुनाव नजदीक हों तो विकास यात्रा और जनता सवाल पूछने लगे तो अपणायत। इन दिनों प्रदेश में अपणायत ऋतु चल रही है। मुख्यमंत्री गांव-गांव घूम रहे हैं, किसी चौपाल में चाय पी रहे हैं, कहीं बच्चों के साथ सेल्फी ले रहे हैं, तो कहीं किसी बुजुर्ग के कंधे पर हाथ रखकर कैमरे को यह भरोसा दिला रहे हैं कि सरकार और जनता के बीच दूरी कम हो गईं है। इधर प्रदेश का एक युवा अपने कमरे में बंद बैठा है। टेबल पर नीट की किताबें खुली हैं, लेकिन उसका भरोसा बंद हो चुका है। उसे समझ नहीं आ रहा कि वह डॉक्टर बनने की तैयारी करे या सिस्टम की बीमारी का इलाज ढूंढे। क्योंकि परीक्षा में मेहनत कम और मैनेजमेंट ज्यादा काम आने लगा है। परीक्षा केंद्रों से लेकर रिजल्ट तक ऐसी कहानियां निकल रही हैं कि अब छात्र बायोलॉजी से ज्यादा सेटिंग साइंस को महत्वपूर्ण मानने लगे हैं। लेकिन सरकार चिंतित नहीं है। आखिर युवा का काम ही क्या है? वह या तो परीक्षा दे, या विरोध करे, या फिर अगली भर्ती का इंतजार करे। सरकार को तो फिलहाल गांव में अपणायत की फसल बोनी है। मुख्यमंत्रीजी गांव में घूमते हुए इतने सहज दिख रहे हैं मानो प्रदेश में सब कुछ ठीक चल रहा हो। ऐसा लग रहा है जैसे पूरा प्रशासन किसी पर्यटन विभाग की डॉक्यूमेंट्री शूट कर रहा हो। प्रदेश में इन दिनों सडक़ें भी बड़ी भावुक हो गई हैं। नई सडक़ों की घोषणाएं सुनते ही पुरानी सडक़ें टूटकर बिखर जाती हैं। उन्हें पता है कि अब उनका नंबर खत्म हो चुका है। नेताजी के क्षेत्र में नई सडक़ स्वीकृत हो जाए, इससे बड़ा विकास सूचकांक अब कोई नहीं। चाहे पुरानी सडक़ पर इतने गड्ढ़े हो कि कार चलाते-चलाते आदमी आध्यात्मिक यात्रा पर निकल जाए, लेकिन नई सडक़ का शिलान्यास जरूरी है। क्योंकि राजनीति में सडक़ की मजबूती नहीं, फीते की मजबूती मायने रखती है। प्रदेश का नागरिक भी अब समझदार हो गया है। वह जानता है कि सडक़ बनते समय उसमें डामर कम और फोटो ज्यादा डाले जाते हैं। ठेकेदार सडक़ नहीं बनाता, बल्कि भविष्य के गड्ढों की नींव रखता है। पहली बारिश आते ही सडक़ अपने मूल स्वरूप में लौट आती है। यानी मिट्टी। फिर अधिकारी निरीक्षण करते हैं, नेता नाराजगी जताते हैं और ठेकेदार अगले टेंडर की तैयारी करता है। यह एक पवित्र लोकतांत्रिक चक्र है, जिसे तोडऩा संविधान के खिलाफ माना जा सकता है। सडक़ हादसों की खबरें इतनी आम हो चुकी हैं कि अखबारों में अब उनके लिए भावनाएं भी सीमित हो गई हैं। तेज रफ्तार, अनियंत्रित, मौके पर मौत। ये शब्द अब खबर नहीं, स्थायी कॉलम बन चुके हैं। सडक़ें इतनी टूटी हुई हैं कि वाहन चलाने वाला व्यक्ति ड्राइवर कम और एडवेंचर स्पोट्र्स खिलाड़ी ज्यादा लगता है। कहीं गड्ढे बचाओ, कहीं आवारा पशु बचाओ, कहीं अचानक गायब हो जाने वाले डिवाइडर से बचो। ऊपर से प्रशासन कहता है सावधानी हटी, दुर्घटना घटी। जनता पूछना चाहती है साहब, सडक़ हटी तो क्या करें? भ्रष्टाचार की हालत तो यह है कि अब वह किसी विभाग में नहीं रहता, बल्कि पूरे सिस्टम का आधिकारिक शुभंकर बन चुका है। पहले लोग चोरी-छिपे रिश्वत लेते थे, अब बड़े आत्मविश्वास से लेते हैं। जैसे यह उनका संवैधानिक अधिकार हो। आम आदमी भी अब रिश्वत देते समय शर्मिंदा नहीं होता, बल्कि डरता केवल इस बात से है कि कहीं कम न पड़ जाए। सरकारी दफ्तरों में फाइलें अब पंखों से नहीं, नोटों की हवा से उड़ती हैं। प्रदेश का युवा सबसे ज्यादा भ्रमित है। उसे बचपन से सिखाया गया कि मेहनत करो, ईमानदारी से पढ़ो, आगे बढ़ोगे। लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ा होता है, उसे पता चलता है कि आगे वही बढ़ता है जिसकी पहुंच ऊपर तक हो। बाकी लोग केवल कोचिंग सेंटरों के पोस्टर में मुस्कुराने के लिए रह जाते हैं। नीट जैसी परीक्षाओं में धांधली की खबरें आने के बाद अब छात्रों को लगता है कि परीक्षा हॉल में वे प्रश्नपत्र हल नहीं कर रहे, बल्कि अपने भरोसे का पोस्टमार्टम कर रहे हैं। लेकिन सरकार के पास हर सवाल का एक सुंदर उत्तर है जांच होगी। इस देश में जांच एक ऐसी रहस्यमयी प्रक्रिया है, जिसमें समय के साथ जनता का गुस्सा समाप्त हो जाता है और फाइलें स्थायी निद्रा में चली जाती हैं। जांच समितियां बनती हैं, रिपोर्ट आती है, कुछ छोटे अधिकारी निलंबित होते हैं और फिर सब सामान्य हो जाता है। जैसे कुछ हुआ ही न हो। आखिर लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत यही है कि यहां हर घोटाला कुछ दिनों बाद पुरानी खबर बन जाता है। शीर्ष नेताओं को लोग गांवों में लोग फूल-मालाएं पहना रहे हैं। बच्चे कविताएं सुना रहे हैं। प्रशासन पहले से तय कर रहा है कि किस किसान को क्या बोलना है। ऐसा लगता है जैसे पूरा प्रदेश एक विशाल रियलिटी शो बन गया हो। इंडियाज बेस्ट अपणायत। कैमरे के सामने सब मुस्कुरा रहे हैं, कैमरे के पीछे बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और अव्यवस्था चाय पी रही है। राजनीति में आजकल संवेदनशीलता भी इवेंट मैनेजमेंट का हिस्सा बन चुकी है। कोई हादसा हो जाए तो नेता ट्वीट कर देता है दुखद। फिर अगले कार्यक्रम में ढोल-नगाड़ों के साथ मंच पर पहुंच जाता है। जनता भी अब अभ्यस्त हो चुकी है। उसे मालूम है कि उसकी समस्याएं केवल भाषणों में जीवित रहती हैं। जमीन पर वे अक्सर फाइलों में दम तोड़ देती हैं। प्रदेश की हालत उस छात्र जैसी हो गई है, जो परीक्षा में फेल होने के बाद भी मुस्कुराकर फोटो खिंचवा रहा हो ताकि रिश्तेदारों को शक न हो। ऊपर से विकास के होर्डिंग चमक रहे हैं, नीचे गड्ढों में वाहन फंस रहे हैं। मंचों पर रोजगार की बातें हो रही हैं, कोचिंग सेंटरों में छात्र निराशा की दवाइयां खोज रहे हैं। सबसे मजेदार बात यह है कि हर समस्या का समाधान अगली घोषणा में खोजा जा रहा है। सडक़ टूटी, नई सडक़ घोषित करो। परीक्षा में गड़बड़ी, नई समिति बना दो। भ्रष्टाचार बढ़ा, हेल्पलाइन जारी कर दो। जनता परेशान, अपणायत यात्रा निकाल दो। ऐसा लगता है कि सरकार प्रशासन नहीं चला

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विकास कार्यों की जमीनी पड़ताल, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

विभिन्न सुधारात्मक उपायों और आवश्यक कार्यवाहियों के दिए निर्देश सिरोही। जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने बुधवार को सिरोही शहर एवं आसपास के विभिन्न स्थानों का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विकास कार्यों, सफाई व्यवस्था, सड़क निर्माण, जल प्रबंधन तथा सौंदर्यीकरण से जुड़े विषयों की समीक्षा की।  जिला कलेक्टर ने सरस डेयरी के चिलिंग प्लांट, गोयली स्थित गौण मंडी फल-सब्जी मंडी यार्ड, एसटीपी प्लांट, निडोरा तालाब, टाउन हॉल, सरजावाव गेट, अनुसूचित जनजाति छात्रावास एवं विभिन्न सड़कों के निर्माण कार्यों का अवलोकन कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। सरस डेयरी के चिलिंग प्लांट के निरीक्षण के दौरान जिला कलेक्टर ने साफ-सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने तथा राज्य सरकार की बजट घोषणा से संबंधित भूमि कार्यों की त्वरित क्रियान्विति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने प्रयोगशाला में की जाने वाली जांचों, प्लांट की स्टोरेज व्यवस्था, विभिन्न संयंत्रों, समितियों से आने वाले दूध तथा रानीवाड़ा दूध भेजने की प्रक्रिया का गहनता से अवलोकन किया और आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। इसके बाद जिला कलेक्टर ने ग्राम गोयली में गौण मंडी फल-सब्जी यार्ड का निरीक्षण किया। उन्होंने वहां उपलब्ध सुविधाओं एवं अपेक्षित व्यवस्थाओं की जानकारी लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। साथ ही चिन्हित दुकानों, फुटकर दुकानों, थोक दुकानों एवं प्राप्त आपत्तियों के संबंध में भी जानकारी ली। जिला कलेक्टर ने निडोरा तालाब में अमृत 2.0 योजना के तहत चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने टाउन हॉल का अवलोकन करते हुए निर्माण कार्यों तथा विभिन्न तकनीकी विषयों की जानकारी लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। शहर के सौंदर्यीकरण पर चर्चा करते हुए जिला कलेक्टर ने ड्रेनेज सिस्टम में सुधार करने, विभिन्न स्थानों पर हुए अतिक्रमण हटाने तथा हवाई पट्टी के बाहर सड़कों के किनारे पौधारोपण करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने गोयली चौराहा, अनादरा चौराहा, तीन बत्ती चौराहा एवं भाटकड़ा चौराहा के विकास के लिए विस्तृत प्लान तैयार करने को कहा। उन्होंने भाटकड़ा से अनादरा चौराहे तक पैचवर्क कार्य गुणवत्तापूर्ण तरीके से करवाने के निर्देश दिए। वहीं सरजावाव से झालरा बावड़ी तक सड़क निर्माण कार्य को त्वरित गति से पूर्ण करने की बात कही। जिला कलेक्टर ने निर्माणाधीन राजकीय अंबेडकर अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास का भी निरीक्षण किया तथा कार्य को गुणवत्तापूर्ण एवं शीघ्रता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। एसटीपी प्लांट के निरीक्षण के दौरान उन्होंने पानी वितरण व्यवस्था, ड्यू कनेक्शन से संबंधित कार्यों तथा पानी की गुणवत्ता को लेकर अधिकारियों से चर्चा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान उपखंड अधिकारी हरिसिंह देवल, आयुक्त जोधाराम विश्नोई सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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जनकल्याण और विकास पर जोर, जिला परिषद बैठक में योजनाओं की प्रभावी क्रियान्विति पर हुआ मंथन

योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक, जमीनी स्तर पर मॉनिटरिंग करें- जिला प्रमुख सारणेश्वर महादेव मंदिर के 1 किलोमीटर क्षेत्र को मांस-मदिरा मुक्त करने के प्रस्ताव को मिली मंजूरी सिरोही (मनोज माली, गोयली)। जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक बुधवार को जिला परिषद सभागार में जिला प्रमुख अर्जुनराम पुरोहित की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में जिले के विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रभावी क्रियान्विति, पेयजल व्यवस्था, विद्युत आपूर्ति, ग्रामीण समस्याओं के समाधान तथा विभिन्न विभागों की प्रगति रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की गई। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को गंभीरता से उठाते हुए त्वरित समाधान सुनिश्चित करने पर जोर दिया। बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज राज्य मंत्री ओटाराम देवासी ने ग्रीष्म ऋतु को देखते हुए अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के दौरान पेयजल एवं विद्युत व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने विकास अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा आमजन की शिकायतों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। राज्य मंत्री देवासी ने कहा कि प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंच सके। उन्होंने अधिकारियों से संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक राहत और सुविधाएं पहुंचाना है, इसलिए इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। बैठक को संबोधित करते हुए जिला प्रमुख अर्जुनराम पुरोहित ने कहा कि सभी अधिकारी केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं की सफल क्रियान्विति सुनिश्चित करें तथा लक्षित वर्ग को योजनाओं से लाभान्वित करने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए जिले को विकास के क्षेत्र में अग्रणी बनाने का प्रयास करें। उन्होंने विकास कार्यों को गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण कराने पर बल देते हुए कहा कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, इसके लिए जमीनी स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग की आवश्यकता है। जिला प्रमुख ने जिले में बढ़ रही चोरी की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए पुलिस प्रशासन से गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने विभिन्न लंबित विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्हें शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए तथा आमजन की समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ तत्काल समाधान सुनिश्चित करने की बात कही। बैठक में रेवदर विधायक मोतीराम कोली ने अपने क्षेत्र से संबंधित विभिन्न समस्याओं को उठाते हुए विकास कार्यों की प्रगति पर चर्चा की। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को आवश्यक कार्यों में तेजी लाने और ग्रामीण क्षेत्रों की मूलभूत समस्याओं का समाधान करने की आवश्यकता बताई। बैठक के दौरान राज्य वित्त आयोग सप्तम एवं 15वें वित्त आयोग जिला परिषद मद वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्य योजना तथा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की वार्षिक कार्य योजना वर्ष 2026-27 का अनुमोदन किया गया। इससे आगामी वित्तीय वर्ष में विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद जताई गई। मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रकाशचंद अग्रवाल एवं अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी शैलेन्द्र जोशी ने बैठक का संचालन करते हुए विभिन्न विभागों से प्राप्त प्रगति प्रतिवेदन सदन के समक्ष प्रस्तुत किए। अधिकारियों ने विभागवार योजनाओं और कार्यों की स्थिति की जानकारी भी दी। जिला प्रमुख पुरोहित की पहल बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय सिरोही के आराध्य देव सारणेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ा रहा। जिला प्रमुख अर्जुनराम पुरोहित की पहल पर सारणेश्वर महादेव मंदिर के एक किलोमीटर परिक्षेत्र को मांस एवं मदिरा मुक्त क्षेत्र घोषित करने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। इस प्रस्ताव को राज्य सरकार को भेजने का निर्णय लिया गया। इस निर्णय को धार्मिक आस्था और सामाजिक वातावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने इस पहल का समर्थन करते हुए इसे क्षेत्र की धार्मिक गरिमा के अनुरूप बताया। बैठक में गत बैठक में उठाए गए विभिन्न मुद्दों की अनुपालना रिपोर्ट पर भी विस्तार से चर्चा की गई। सदस्यों ने बत्तीसा नाला, जल जीवन मिशन के तहत कनेक्शन, हैंडपंप मरम्मत, ग्रामीण क्षेत्रों में ढीले विद्युत तार, नए विद्युत कनेक्शन, ट्रांसफार्मर स्थापना, सडक़ों की मरम्मत, अवैध बजरी खनन, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित कई विषयों को प्रमुखता से उठाया। इसके अलावा चिकित्सा, रसद, पशुपालन, शिक्षा, वन, श्रम, पुलिस, एनएचएआई, परिवहन, राजस्व, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग से संबंधित लंबित मामलों की भी समीक्षा की गई। जिला प्रमुख ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी लंबित कार्यों को शीघ्र पूर्ण कर उनकी अनुपालना रिपोर्ट पुन: प्रस्तुत की जाए। अतिरिक्त जिला कलेक्टर डॉ. राजेश गोयल ने विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी देते हुए अधिकारियों को नियमित फॉलोअप लेने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं की प्रगति की लगातार निगरानी आवश्यक है ताकि आमजन को समय पर लाभ मिल सके। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक किशोर सिंह ने जिले की कानून एवं शांति व्यवस्था की जानकारी देते हुए सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं पर प्रकाश डाला। इनकी रही मौजूदगी बैठक में उप जिला प्रमुख मनीषा मीणा, सिरोही प्रधान हंसमुख कुमार, सदस्य पदमा, दलिप सिंह मांडाणी, मधु, रामलाल, मगन कोली, अर्जुनराम, कन्हैयालाल, सीमा कुमारी, जोसना, रतन कंवर, दिलीप जैन, किरण कुमार एवं रतनाराम सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, सडक़, शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, रसद, खनन, सार्वजनिक निर्माण विभाग, सिंचाई सहित विभिन्न विभागों से जुड़ी क्षेत्रवार समस्याओं को अधिकारियों के समक्ष रखा। जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की कमी, खराब सडक़ें, पेयजल संकट, स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति तथा विद्युत समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। इस पर जिला प्रमुख अर्जुनराम पुरोहित ने संबंधित अधिकारियों को समस्याओं का त्वरित समाधान कर आमजन को राहत पहुंचाने के निर्देश दिए।

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