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बालश्रम व बाल तस्करी पर पैनी नजर, प्रदेशभर में चलेगा अभियान

राज्यव्यापी अभियान, पुलिस मुख्यालय ने जारी किए निर्देश जयपुर। राजस्थान में बालश्रम, बाल बंधुआ मजदूरी एवं मानव दुव्र्यापार (बाल तस्करी) के खिलाफ राज्यव्यापी एक माह का विशेष अभियान उमंग-ङ्कढ्ढढ्ढ चलाया जाएगा। पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार यह अभियान 1 जून से 30 जून तक प्रदेशभर में संचालित होगा। अभियान का उद्देश्य बालश्रम एवं बाल तस्करी जैसी गंभीर सामाजिक बुराइयों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना तथा पीडि़त बच्चों का पुनर्वास सुनिश्चित करना है। इस संबंध में अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (सिविल राइट्स एवं एएचटी) हवासिंह घुमरिया ने प्रदेश के समस्त पुलिस आयुक्तों, रेंज आईजी, पुलिस उपायुक्तों एवं जिला पुलिस अधीक्षकों सहित जीआरपी अजमेर एवं जोधपुर को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश में अभियान को पूरी संवेदनशीलता एवं समन्वय के साथ संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त अभियान के प्रभावी संचालन के लिए प्रत्येक जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। जिला पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया गया है कि वे अभियान से जुड़े सभी विभागों एवं हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित करें। इसके तहत सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रम विभाग, बाल अधिकारिता विभाग, बाल कल्याण समिति, शेल्टर होम, चिल्ड्रन होम तथा विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के साथ बैठक आयोजित कर संयुक्त रणनीति तैयार की जाएगी। थानेवार रेस्क्यू टीमें होंगी गठित पुलिस मुख्यालय ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक जिले में थानेवार विशेष रेस्क्यू टीमों का गठन किया जाए। प्रत्येक टीम में एक एसआई अथवा एएसआई सहित चार पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। इन टीमों को अभियान शुरू होने से पहले विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि बालश्रम एवं मानव तस्करी के मामलों की पहचान और कार्रवाई प्रभावी ढंग से हो सके। इन टीमों में महिला एवं बाल विकास विभाग, समाज कल्याण विभाग, बाल अधिकारिता विभाग, बाल कल्याण समिति तथा एनजीओ प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा, जिससे रेस्क्यू और पुनर्वास कार्य अधिक संवेदनशील एवं समन्वित रूप से किया जा सके। ढाबों, फैक्ट्रियों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में होगी स्क्रीनिंग विशेष अभियान के दौरान होटल, ढाबे, ईंट-भट्टे, फैक्ट्रियां, रेलवे प्लेटफॉर्म, बस स्टैंड, धार्मिक स्थल, हाईवे किनारे स्थित ढाबों तथा अस्थायी बस्तियों में रह रहे बच्चों की स्क्रीनिंग की जाएगी। पुलिस मुख्यालय ने निर्देश दिए हैं कि ऐसे बच्चों की पहचान कर उनका पूरा विवरण, फोटोग्राफ एवं आवश्यकता अनुसार वीडियोग्राफी भी की जाए। यदि कोई बच्चा गुमशुदा अथवा मानव तस्करी का शिकार पाया जाता है तो उसके संबंध में तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मुक्त कराए गए बच्चों का मेडिकल परीक्षण करवाया जाएगा तथा जरूरत पडऩे पर उनकी मानसिक स्थिति का भी परीक्षण कराया जाएगा। रेस्क्यू किए गए बच्चों को संबंधित चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही बच्चों के माता-पिता एवं परिजनों की जानकारी जुटाकर उन्हें परिवार से पुन: मिलाने के प्रयास किए जाएंगे। अन्य राज्यों से लाए गए नाबालिग बच्चों के मामलों में संबंधित राज्य एवं स्थानीय थानों को भी तत्काल सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं। मानव तस्करी गिरोहों पर होगी कड़ी कार्रवाई पुलिस मुख्यालय ने विशेष रूप से निर्देश दिए हैं कि बालश्रम एवं बाल तस्करी के पीछे सक्रिय संगठित गिरोहों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। बच्चों के रात्रि निवास स्थलों की भी जांच की जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं कोई संगठित गिरोह तो सक्रिय नहीं है। यदि मानव तस्करी से जुड़े मामले सामने आते हैं तो भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 143, 144, 145, 146, 98 एवं 99 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त किशोर न्याय अधिनियम-2015 की धारा 75 एवं 79 तथा बालश्रम प्रतिषेध अधिनियम-1986 के प्रावधानों के तहत भी सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। डीजीपी का स्पष्ट संदेश: बच्चों के शोषण पर जीरो टॉलरेंस पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि बालश्रम, बाल बंधुआ मजदूरी एवं बाल तस्करी जैसे अपराधों के खिलाफ राज्य सरकार और राजस्थान पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति है। अभियान के माध्यम से न केवल बच्चों को शोषण से मुक्त कराया जाएगा, बल्कि अपराधियों और संगठित गिरोहों के विरुद्ध प्रभावी कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।

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केवल शादी नहीं बल्कि सेवा का संकल्प, रामपुरा में बेटी के विवाह ने जगाई करुणा की अलख

बेटी के विवाह में दिखा गौसेवा का अनूठा संगम खौड़ (पाली)। अक्सर शादियां सिर्फ उत्सव बनकर रह जाती हैं, लेकिन ग्राम पंचायत बडेरावास के गांव रामपुरा में एक विवाह ने इस परंपरा को नई दिशा दे दी। सरपंच लीला चौधरी और अमराराम चौधरी ने अपनी पुत्री के विवाह को सामाजिक सरोकारों से जोड़ते हुए इसे गौसेवा के महाअभियान में बदल दिया। रविवार रात जहां आमतौर पर बंदोली की धूम होती है, वहीं यहां गौ भक्ति संध्या का आयोजन हुआ। रामपुरा खैरवा स्थित प्रभु प्रेमी गौशाला में सजी इस संध्या ने पूरे क्षेत्र को सेवा, संवेदना और संस्कारों के रंग में रंग दिया। प्रसिद्ध गायक ओम मुंडेल और उनकी टीम ने जैसे ही मंच संभाला, वातावरण भक्ति में डूब गया। गौ माता री सेवा सूं मोटो ना कोई धरम जैसे भजनों पर श्रोता देर रात तक झूमते रहे। यह महज सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक ऐसा भावनात्मक जागरण था, जहां हर व्यक्ति ने खुद को गौसेवा से जुड़ा हुआ महसूस किया। यह आयोजन रामपुरा खैरवा स्थित प्रभु प्रेमी गौशाला में हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र में सेवा और संस्कार का संदेश फैलाया। गौ भक्ति संध्या में प्रसिद्ध गायक ओम मुंडेल और उनकी टीम ने गौ माता की महिमा का ऐसा रस घोला कि पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा। गौ माता री सेवा सूं मोटो ना कोई धरम… जैसे भजनों पर श्रोता देर रात तक झूमते रहे। यह केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि गौसेवा के प्रति भावनात्मक जागरण का सजीव दृश्य था, जहां हर व्यक्ति ने खुद को इस पुण्य कार्य से जुड़ा महसूस किया। घोषणाओं की गूंज, गौशाला विकास के लिए उमड़ा सहयोग इस प्रेरणादायक आयोजन में भामाशाहों ने दिल खोलकर सहयोग की घोषणाएं कीं, जिससे गौशाला विकास को नई दिशा मिली। पुनाराम लच्छाराम देवड़ा (कराड़ी, हाल पुणे) ने गौशाला में कार्यालय निर्माण की घोषणा की। अचलाराम नाराराम पंवार (गोदावास) एवं महेंद्रकुमार देवाराम राठौड़ (आंकड़ावास) ने संयुक्त रूप से स्वराज 733 मॉडल ट्रैक्टर भेंट करने का संकल्प लिया। भंवरलाल, खरताराम, रमेश कुमार, पुखराज पुत्र गोमाराम आगलेचा ने लगभग 7 लाख रुपए की लागत से पक्षी घर व चबूतरा बनाने की घोषणा की। रामलाल पुत्र मोतीलाल सेणचा (रामपुरा, हाल गांधीधाम) ने ट्रैक्टर ट्रॉली देने की घोषणा की। कन्याबाई पत्नी वेनाराम मुलेवा एवं भंवर शिवसेना ने चारा कुतर मशीन भेंट करने का संकल्प लिया। सुखीबाई पत्नी दिवंगत लुंबाराम काग ने ट्रैक्टर कल्टीवेटर, तथा भंवरलाल पुत्र मूलाराम पंवार (बाड़सा, पुणे) ने सीड ड्रिल कल्टीवेटर देने की घोषणा की। विद्यादेवी पत्नी खरताराम काग (सोडावास, हाल मुंबई) ने गौ माता हेल्प मशीन भेंट की। डूंगाराम पुत्र हेमाराम वर्पा (गोदावास) ने डिस्क प्लाऊ (दो तवी) देने का संकल्प लिया। नारायणलाल पुत्र पकाराम काग ने गौशाला से जुड़े सभी जेसीबी कार्य अपनी मशीन से निशुल्क करने की घोषणा की। इसके साथ ही विंजाराम भीलवाड़ा, दुर्गाराम सेंणचा, कोलाराम सेंणचा, देवीलाल अड़ाणिया सोनी, लुंबाराम चोयल, पपसा चोयल, मुकेशकुमार आगलेचा, तिलोकराम, डूंगाराम सेंणचा, मांगीलाल आगलेचा, देवाराम केनपुरा, शेराराम सेंणचा, डूंगाराम काग, नारायणलाल मुलेवा मेवाड़, चंपादेवी चौहान, पिंकीदेवी सेंणचा, गुडियाबाई पाली, प्रवीणकुमार नथाराम आगलेचा (रामपुरा) एवं रताराम-रुपाराम देवासी (केनपुरा) सहित अनेक भामाशाहों ने नकद राशि देकर गौशाला को सशक्त बनाने में योगदान दिया। सम्मान और आभार, सेवा ही सबसे बड़ा संस्कार सरपंच लीला चौधरी और अमराराम चौधरी ने सभी भामाशाहों का साफा, शॉल और माला पहनाकर अभिनंदन किया। अमराराम चौधरी ने भावुक शब्दों में कहा किबेटी का विवाह तो केवल एक निमित्त है, हमारा उद्देश्य गौसेवा के इस पुण्य कार्य को आगे बढ़ाना है। जिन दानदाताओं ने सहयोग दिया, हम उनके सदैव आभारी रहेंगे। जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने बढ़ाई गरिमा इस प्रेरणादायक आयोजन में कैबिनेट मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक जोराराम कुमावत, सांसद पीपी चौधरी, पाली प्रधान मोहनीदेवी पुखराज पटेल, अखिल भारतीय सीरवी समाज के महासचिव भंवर चौधरी, सहित आसपास के गांवों के पंच-पटेल और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। एक संदेश जो दिलों में बस गया यह आयोजन सिर्फ एक शादी नहीं, बल्कि समाज को जोडऩे, सेवा को बढ़ावा देने और संस्कारों को जीवित रखने का उदाहरण बन गया। रामपुरा की इस पहल ने साबित कर दिया कि जब खुशियों में सेवा का रंग घुल जाता है, तो वह अवसर प्रेरणा की मिसाल बन जाता है।

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गैस की पाइप लो या चूल्हा ठंडा रखो!

देश में अब विकास पाइपलाइन से होकर गुजर रहा है और अगर आपके घर तक वो पाइप नहीं, तो समझिए आपकी रसोई की किस्मत भी नोटिस के भरोसे है। सरकार का नया फरमान कुछ ऐसा है कि अब एलपीजी सिलेंडर भी पूछेगा भाई पीएनजी लिया कि नहीं? अगर जवाब ‘ना’ हुआ, तो 90 दिन बाद वो भी कहेगा अब मैं चलता हूं, तुम पाइप संभालो! जनता पहले महंगाई से परेशान है, अब कनेक्शन से परेशान है। पहले रिश्ते जोडऩा मुश्किल था, अब गैस कनेक्शन जोडऩा अनिवार्य हो गया है। फर्क बस इतना है कि रिश्तों में नोटिस नहीं आता, यहां 90 दिन का अल्टीमेटम भी है। सरकार का तर्क भी कम दिलचस्प नहीं है जहां पीएनजी नहीं है, वहां एलपीजी बचानी है। यानी जिनके पास विकल्प है, वो मजबूरी बन जाए, और जिनके पास मजबूरी है, वो विकल्प का इंतजार करें। इधर बेचारी जनता हिसाब लगा रही है कि 1090 में कनेक्शन या 1000 में सिलेंडर? फर्क सिर्फ इतना कि एक में आग तुरंत मिलेगी, दूसरे में नियमों की गर्मी! अब रसोई में खाना कम, और नियम ज्यादा पक रहे हैं। क्योंकि नए भारत में गैस सिर्फ जलती नहीं नीति भी बनती है। बेचारी पब्लिक के पास अब रसोई में दो ही रास्ते हैं या तो पाइपलाइन अपनाओ, या सिलेंडर को अलविदा कहने की तैयारी करो। सरकारी फरमान गैस चाहिए तो लाइन में आओ वरना लाइन बंद!

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सडक़ वही, सफर वही,टोल का मूड अपग्रेड!

सडक़ों पर अब गाडिय़ां ही नहीं, जेबें भी सफर करेंगी और वो भी पेड मोड में। नेशनल हाइवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया ने एक बार फिर साबित कर दिया कि देश की सडक़ें भले धीरे-धीरे बनें, लेकिन टोल रेट हर साल समय पर विकास कर लेते हैं। एक अप्रेल से टोल दरों में बढ़ोतरी लागू होगी और तारीख भी ऐसी कि जनता को लगे कहीं ये अप्रेल फूल स्पेशल ऑफर तो नहीं! लेकिन नहीं, ये मज़ाक नहीं है। ये वही गंभीर मजाक है जो हर साल दोहराया जाता है। हालांकि कार वालों को राहत दी गई है। मतलब आम आदमी को मनोवैज्ञानिक सुकून मिल गया। लेकिन असली चोट कॉमर्शियल और भारी वाहनों पर पड़ी है और जैसा कि परंपरा है, वो खर्च आखिरकार आम जनता की जेब से ही वसूला जाएगा बस रास्ता थोड़ा घुमा हुआ होगा। थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर रेट तय होते हैं। यानी अगर महंगाई बढ़े तो टोल बढ़ेगा, और अगर महंगाई कम भी हो जाए तो भी टोल संभावनाओं के आधार पर बढ़ सकता है! कारों के सालाना पास की बात करेें तो पहले 3000 रुपए में 200 बार टोल पार करने का मौका मिलता था, अब 3075 रुपए में वही सुविधा मिलेगी। यानी 75 रुपए ज्यादा देकर आपको वही पुराना रास्ता, वही ट्रैफिक और वही गडढे, बस अनुभव थोड़ा महंगा हो जाएगा। कुल मिलाकर, सडक़ें अब सिर्फ दूरी कम नहीं कर रहीं बल्कि धीरे-धीरे बैंक बैलेंस भी कम कर रही हैं। हम सब इस विकास यात्रा में शामिल हैं क्योंकि रास्ता चाहे कोई भी हो, टोल तो देना ही पड़ेगा!

Deepak Parambol on his cop role in the Zee5 web series ‘Kasaragod Embassy’
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दीपक परंबोल ने ज़ी5 वेब सीरीज ‘कसारगोड एम्बेसी’ में अपने पुलिस अधिकारी की भूमिका पर साझा किया अनुभव

मलयालम फिल्म और वेब सीरीज के युवा और प्रतिभाशाली अभिनेता दीपक परंबोल ने हाल ही में अपनी वेब सीरीज ‘कसारगोड एम्बेसी’ में पुलिस अधिकारी के बेहद चुनौतीपूर्ण किरदार को निभाने पर अपनी भावनाएं साझा कीं। दीपक ने बताया कि इस भूमिका ने उन्हें एक नया मनोरंजन अनुभव दिया, जो उनकी 16 वर्षों की फिल्म इंडस्ट्री यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ है। दीपक परंबोल ने कहा, “मेरे लिए पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाना बेहद रोमांचक रहा। इसे निभाने में मैंने अपने चरित्र के हर पहलू को समझने का प्रयास किया ताकि दर्शकों को एक यथार्थवादी अनुभव मिल सके। यह किरदार मेरे अभिनय के सफर में एक नया आयाम लेकर आया।” इसके साथ ही, उन्होंने मशहूर निर्देशक शाजी कैलास की आगामी फिल्म में अपनी भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि शाजी कैलास के साथ काम करना उनके कैरियर के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और उन्होंने इस अवसर को लेकर बेहद उत्साह व्यक्त किया। “शाजी सर के निर्देशन में काम करना मेरे लिए सीखने का एक अनूठा मौका है। उनकी फिल्मों में जो गहराई और संदेश होता है, उसमें भूमिका निभाना गर्व की बात है,” दीपक ने जोड़ा। दीपक परंबोल ने 16 वर्षों के अपने फिल्मी सफर में कई तरह की भूमिकाओं को निभाया है, जिससे उन्होंने अपनी विविधता और प्रतिबद्धता दोनों साबित की हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि इन वर्षों में मेहनत और समर्पण से ही वे आज इस मुकाम पर पहुंच पाए हैं। “मैं अपने दर्शकों और सहयोगियों का आभारी हूं, जिन्होंने मुझे लगातार प्रेरित किया। मेरा सफर अभी जारी है और मैं नई चुनौतियों के लिए तैयार हूं,” उन्होंने कहा। वेब सीरीज ‘कसारगोड एम्बेसी’ ने मलयालम मनोरंजन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है, और दीपक के अभिनय ने इसकी सफलता में अहम भूमिका निभाई है। उन्हें पुलिस अधिकारी की भूमिका में देखने के लिए दर्शक उत्सुक हैं, जो ज़ी5 पर स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध है। जैसे-जैसे मलयालम वेब सीरीज और फिल्म उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है, दीपक परंबोल जैसी प्रतिभाएं इस क्षेत्र को और भी समृद्ध बनाती हैं। उनकी मेहनत और विविध भूमिकाएं इंडस्ट्री के नए मानदंड स्थापित कर रही हैं। इस प्रकार, दीपक परंबोल की ‘कसारगोड एम्बेसी’ में भूमिका, उनकी शाजी कैलास की फ़िल्म में भागीदारी और 16 सालों के अनुभव को देखते हुए, यह निश्चित है कि वे आने वाले वर्षों में भी मलयालम मनोरंजन दुनिया में एक मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति बनाए रखेंगे।

TVK chief Vijay accuses Chennai police, officials of denying permission for his Perambur campaign
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टीवीके प्रमुख विजय ने चेन्नई पुलिस और अधिकारियों पर पेरम्बूर अभियान की अनुमति न देने का आरोप लगाया

चेन्नई, तमिलनाडु | 27 अप्रैल 2024 टीवीके के प्रमुख विजय ने हाल ही में चेन्नई पुलिस और संबंधित अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि वे उनके पेरम्बूर में चुनावी अभियान की अनुमति देने में लगातार बाधाएं उत्पन्न कर रहे हैं। विजय ने कहा कि डीएमके सरकार चुनावी अभियानों की अनुमति देने के मामले में बार-बार देरी करती है या उसे विभिन्न कारणों से अस्वीकार कर देती है। उन्होंने एक बयान में कहा, “जब भी मैं किसी चुनावी अभियान की योजना बनाता हूं, डीएमके सरकार विभिन्न बहानों के तहत अनुमति देने में विलंब या outright मना कर देती है। इससे हमारे कार्यकर्ताओं और समर्थकों को काफी परेशानी होती है और चुनावी प्रक्रिया प्रभावित होती है।” विजय ने यह भी कहा कि यह व्यवहार चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे बिना किसी पक्षपात के और निष्पक्ष रूप से सभी राजनीतिक दलों को उनके अभियान के लिए आवश्यक अनुमति प्रदान करें। चेन्नई पुलिस ने अभी तक इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, डीएमके सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सभी अनुमति प्रक्रियाएं नियमों और प्रोटोकॉल के अनुसार होती हैं और सभी पार्टियों को समान अवसर मिलते हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई पक्ष महसूस करता है कि उसे अनुचित व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है, तो वे संबंधित विभागों से शिकायत कर सकते हैं। पेरम्बूर क्षेत्र में आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं, और यह आरोप-प्रत्यारोप राजनीतिक तापमान और भी बढ़ा सकते हैं। चुनाव आयोग ने इस मामले में सभी संबंधित पक्षों से संयम बरतने और नियमों का पालन करने को कहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव के दौरान स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए पारदर्शी व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार के आरोप मतदाता और राजनीतिक दलों के बीच विश्वास को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए उनकी त्वरित और न्यायसंगत जांच आवश्यक है। इस मामले की आगे की जांच जारी है और संबंधित पक्षों की ओर से भी बयान आना बाकी है।

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कश्मीर ट्यूलिप फेस्टिवल में पर्यटकों की भीड़

कश्मीर में पर्यटन की चमक: ट्यूलिप गार्डन में बढ़ता आकर्षण खाड़ी देशों में जारी तनाव के बावजूद कश्मीर का पर्यटन उद्योग उत्साहजनक वृद्धि दर्ज कर रहा है। श्रीनगर के ट्यूलिप गार्डन में इस वसंत सीज़न में लगभग 60,000 पर्यटक आ चुके हैं। इनमें पहले सप्ताह में 57,000 ऑफलाइन विजिटर्स शामिल हैं। इसके अलावा, 200-300 विदेशी पर्यटक भी गार्डन घूमने आए। ऑनलाइन टिकटों के आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं, क्योंकि इन्हें सीज़न के समापन के बाद जारी किया जाएगा। कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता, वसंत ऋतु में खिलने वाले रंग-बिरंगे फूल और घाटी का शांत वातावरण पर्यटकों को आकर्षित करने के मुख्य कारण बने हुए हैं। ट्यूलिप गार्डन में इस वर्ष लगभग 70-75 प्रजातियों के ट्यूलिप और अन्य सजावटी फूल प्रदर्शित किए गए हैं। यह गार्डन जम्मू-कश्मीर के पर्यटन कैलेंडर का प्रमुख आकर्षण बन चुका है और देश-विदेश से आने वाले हजारों पर्यटकों को अपनी ओर खींच रहा है। ट्यूलिप गार्डन में पर्यटक गतिविधियां ट्यूलिप गार्डन के इंचार्ज और असिस्टेंट फ्लोरिकल्चर ऑफिसर इमरान अहमद ने बताया कि पहले सप्ताह में आए लगभग 57,000 पर्यटक केवल ऑफलाइन टिकट बिक्री के आंकड़े हैं। ऑनलाइन टिकटों का डेटा सीज़न के समाप्त होने के बाद जारी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में हुई रुक-रुककर बारिश और रमजान का समय कुछ हद तक पर्यटकों की संख्या पर असर डाल रहा था। स्थानीय लोग इस समय कम ही बाहर घूमने निकलते हैं। बावजूद इसके, गार्डन में पर्यटकों की संख्या उत्साहजनक रही और गार्डन का वातावरण जीवंत बना रहा। पर्यटक फूलों की सुंदरता और शांत वातावरण का आनंद ले रहे हैं। गार्डन में 18 लाख रंग-बिरंगे फूलों की सजावट की गई है, जिसमें 45 प्रतिशत ट्यूलिप पहले ही खिल चुके हैं। विदेशी पर्यटक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पहले सप्ताह में लगभग 200-300 विदेशी पर्यटक भी ट्यूलिप गार्डन घूमने आए। विदेशी और घरेलू पर्यटकों का मिश्रण गार्डन में देखने लायक रहा। विदेशी पर्यटक कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर का अनुभव करते हैं, जबकि स्थानीय लोग अपने मेहमानों से बातचीत कर अपने सांस्कृतिक मूल्य साझा करते हैं। इस सांस्कृतिक आदान-प्रदान से पर्यटन और भी समृद्ध होता है। विदेशी पर्यटक न केवल गार्डन का आनंद लेते हैं, बल्कि घाटी के अन्य पर्यटन स्थलों की सैर और स्थानीय कला एवं शिल्प को भी देखने का अवसर पाते हैं। घाटी के अन्य पर्यटन स्थल कश्मीर के अन्य प्रमुख पर्यटन स्थल जैसे गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग और दूधपथरी भी पर्यटकों से गुलजार हैं। प्राकृतिक नजारों और ठंडी हवाओं के बीच पर्यटक इन स्थलों में घूम-घूमकर प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले रहे हैं। गुलमर्ग और पहलगाम में स्कीइंग, ट्रेकिंग और घुड़सवारी जैसी गतिविधियों ने पर्यटकों का आकर्षण बढ़ाया है। सोनमर्ग और दूधपथरी में ताजगी भरी हवा और सुंदर घाटी के दृश्य पर्यटकों को मोहित कर रहे हैं। स्थानीय व्यवसायों पर प्रभाव ट्यूलिप गार्डन और अन्य पर्यटन स्थलों में आने वाले पर्यटकों की संख्या स्थानीय व्यवसायियों के लिए लाभकारी रही है। होटल, होमस्टे और रेस्टोरेंट पूरी तरह बुक रहे। इसके अलावा, गाइडिंग, ट्रांसपोर्टेशन और शॉपिंग जैसी सेवाओं में भी व्यवसाय बढ़ा है। पर्यटकों की आमद ने स्थानीय समुदाय को रोजगार और आर्थिक अवसर प्रदान किए हैं। स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को अपने हुनर का प्रदर्शन करने और बेचने का अवसर मिला। पर्यटन विभाग की तैयारियां और भविष्य इस वर्ष ट्यूलिप गार्डन में इतनी बड़ी संख्या में पर्यटक आने के बाद कश्मीर पर्यटन विभाग ने आने वाले वर्षों के लिए और अधिक आकर्षक कार्यक्रम और गतिविधियां विकसित करने की योजना बनाई है। ट्यूलिप गार्डन न केवल कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता को प्रदर्शित करता है, बल्कि पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय व्यवसायों और अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाता है। कुल मिलाकर, खाड़ी देशों में तनाव के बावजूद कश्मीर में पर्यटन उद्योग में वृद्धि स्पष्ट है। ट्यूलिप गार्डन और अन्य पर्यटन स्थलों में पर्यटकों की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि कश्मीर का पर्यटन भविष्य में और अधिक समृद्ध होने की संभावनाओं के साथ तैयार है।

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🔥 ‘कुबेर का खजाना’ या वैज्ञानिक अनुमान? चीन में मिले 1000 टन सोने ने दुनिया को चौंकाया

एक खोज जिसने बढ़ाई हलचल पड़ोसी देश चीन से आई एक बड़ी खबर ने वैश्विक बाजार, निवेशकों और भूवैज्ञानिक समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बताया जा रहा है कि मध्य चीन के एक इलाके में जमीन के नीचे सोने का विशाल भंडार मिला है, जिसे विशेषज्ञ “सुपरजायंट डिपॉजिट” तक कह रहे हैं। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, इस भंडार में 1,000 मीट्रिक टन से अधिक सोना हो सकता है, जिसकी कीमत करीब 85.9 अरब डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 8 लाख करोड़ रुपये आंकी जा रही है। 📍 कहां मिला यह खजाना? यह खोज चीन के हुनान प्रांत के पिंगजियांग काउंटी में स्थित वांगू गोल्ड फील्ड में हुई है। यह क्षेत्र लंबे समय से खनिज संसाधनों के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन इस बार जो सामने आया है, उसने विशेषज्ञों को भी चौंका दिया है। 🔬 ‘सुपरजायंट डिपॉजिट’ का क्या मतलब? खनिज विज्ञान की भाषा में “सुपरजायंट डिपॉजिट” एक बेहद खास शब्द है। इसका इस्तेमाल केवल उन भंडारों के लिए किया जाता है— जो असाधारण रूप से बड़े हों जिनका वैश्विक स्तर पर आर्थिक महत्व हो जो बाजार की दिशा बदलने की क्षमता रखते हों इस खोज को इसी श्रेणी में रखने का मतलब है कि यह सामान्य खोज नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक खोज हो सकती है। 🧪 कितनी गहराई में मिला सोना? रिपोर्ट्स के मुताबिक, भूवैज्ञानिकों ने जमीन के करीब 2,000 मीटर नीचे— 40 से अधिक सोने की शिराएं (Gold Veins) खोजी हैं ड्रिलिंग के जरिए करीब 300 मीट्रिक टन सोना पुख्ता रूप से मिला है यह आंकड़ा अब तक का सबसे भरोसेमंद माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे जमीन से निकाले गए सैंपल पर आधारित है। ⚠️ लेकिन क्या 1000 टन सोना पक्का है? यहीं पर यह खबर थोड़ा जटिल हो जाती है। 300 टन सोना तो पुष्टि के साथ मिला है बाकी 700 टन से ज्यादा का अनुमान कंप्यूटर मॉडलिंग से लगाया गया है यानी यह संभावित मात्रा है, न कि पूरी तरह प्रमाणित विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे खुदाई और अध्ययन आगे बढ़ेगा, इन आंकड़ों में बदलाव हो सकता है। 🪙 पहले भी मिल चुके हैं बड़े भंडार यह पहली बार नहीं है जब चीन को इतना बड़ा सोना मिला हो। 2025 में: 1,444 टन सोने का दावा 2024 में: 83 बिलियन डॉलर का गोल्ड डिपॉजिट इन खोजों से यह साफ है कि चीन लगातार अपने खनिज संसाधनों की खोज और विस्तार में लगा हुआ है। 🌍 वैश्विक बाजार पर क्या असर पड़ सकता है? 📉 कीमतों पर दबाव अगर यह सोना बड़े पैमाने पर निकाला जाता है, तो वैश्विक सप्लाई बढ़ सकती है, जिससे कीमतों में गिरावट आ सकती है। 💼 निवेशकों की रणनीति सोना हमेशा से सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन इतनी बड़ी खोज के बाद निवेशकों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है। 🌐 चीन की स्थिति मजबूत चीन का गोल्ड रिजर्व बढ़ने से उसकी आर्थिक और रणनीतिक स्थिति मजबूत हो सकती है। 💰 क्या सच में बदल जाएगी चीन की किस्मत? “क्या चीन की किस्मत बदल जाएगी?”—यह सवाल हर किसी के मन में है। हालांकि यह खोज बेहद बड़ी है, लेकिन— सोना निकालना लंबी और महंगी प्रक्रिया है तकनीकी और पर्यावरणीय चुनौतियां होती हैं निवेश और समय दोनों की जरूरत होती है इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे तुरंत आर्थिक क्रांति आ जाएगी। 🇮🇳 भारत के लिए क्यों अहम है यह खबर? भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में से एक है। इस खोज का असर भारत पर भी पड़ सकता है— सोने की कीमतों में बदलाव ज्वेलरी बाजार पर असर निवेशकों की सोच में बदलाव अगर वैश्विक कीमतें गिरती हैं, तो भारतीय उपभोक्ताओं को फायदा मिल सकता है। 🧠 विशेषज्ञों की राय विशेषज्ञ मानते हैं कि यह खोज महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन इसे लेकर संतुलित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। अभी डेटा शुरुआती है पूरी क्षमता का पता लगाना बाकी है बाजार पर असर धीरे-धीरे दिखेगा 🧾 निष्कर्ष चीन में मिला यह सोने का भंडार वाकई में एक बड़ी खोज है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हालांकि, यह अभी शुरुआती चरण में है और कई सवालों के जवाब मिलना बाकी है। अगर यह अनुमान सही साबित होते हैं, तो यह खोज न केवल चीन बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा बदल सकती है। लेकिन फिलहाल इसे “कुबेर का खजाना” मानने से पहले वैज्ञानिक पुष्टि का इंतजार करना ही समझदारी होगी।

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जहां कभी पसरा रहता था डर, वहां साथ-साथ दौड़ रहे पुलिस और पुनर्वासित माओवादी

बस्तर, जो पिछले चार दशकों तक माओवादी हिंसा और भय के लिए जाना जाता था, रविवार को नई उम्मीद और उत्साह का केंद्र बन गया। वही सड़कें, जहाँ कभी गोलियों की आवाजें गूंजती थीं, अब धावकों की धमक, जयकारों और उत्साह से गूँज रही थीं। इस बदलाव का प्रतीक बना बस्तर हेरिटेज मैराथन-2026, जिसने न केवल खेल का उत्सव बल्कि सामाजिक समरसता और बदलाव की कहानी पेश की। लगभग 10,000 प्रतिभागी इसमें शामिल हुए, जिनमें पुनर्वासित माओवादी, पुलिसकर्मी, आदिवासी युवा, महिलाएं और विदेशी खिलाड़ी शामिल थे। यह दृश्य उस सामाजिक बदलाव का प्रतीक था, जो कुछ साल पहले तक किसी की कल्पना में मुश्किल था। मैराथन का मार्ग और सांस्कृतिक उत्सव मैराथन की शुरुआत लालबाग मैदान से हुई और यह शहर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों से होकर चित्रकोट जलप्रपात तक पहुंची। लगभग 42 किलोमीटर के इस फुल मैराथन में दंतेश्वरी मंदिर, बस्तर दशहरा रथ और दलपत सागर जैसे स्थल शामिल थे। रास्ते में जनजातीय लोक कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य और संगीत के साथ धावकों का उत्साह बढ़ाते रहे। कहीं धुरवा नृत्य, कहीं गौर सिंग, तो कहीं मुंडाबाजा और गेड़ी नृत्य ने भाग लेने वालों को सांस्कृतिक अनुभव से जोड़ा। देश के विभिन्न राज्यों से आए धावकों के साथ 100 से अधिक विदेशी खिलाड़ी भी इस उत्सव का हिस्सा बने। पुनर्वासित माओवादी और पुलिसकर्मी की भागीदारी सबसे प्रेरक क्षण तब आया, जब पुनर्वासित माओवादी सुकमन ने कहा:“कल तक मैं इन रास्तों में एंबुश लगाता था, आज मैं रनिंग शूज पहनकर पदक जीतने के लिए दौड़ रहा हूँ।” सुकमन की साथी संमति ने बताया कि वही पुलिस जवान जो कभी उन्हें पकड़ने के लिए दौड़ते थे, आज पानी पिलाकर उनका हौसला बढ़ा रहे हैं। यह बदलाव दिखाता है कि पुरानी दुश्मनी सहयोग और समझदारी में बदल सकती है। प्रेरक कहानियाँ: हौसले की कोई उम्र नहीं मैराथन ने सिर्फ प्रतिस्पर्धा ही नहीं, बल्कि प्रेरक कहानियाँ भी गढ़ीं। पीयूष कुमार, कृषि महाविद्यालय के प्राचार्य, जिनका एक पैर नहीं था, उन्होंने 5 किलोमीटर की दौड़ पूरी की। उम्र की कोई सीमा नहीं, यह साबित करते हुए 5 साल के वंश और 72 वर्षीय गुरमील सिंह ने भी दौड़ में भाग लिया। इन कहानियों ने यह संदेश दिया कि शारीरिक बाधाएँ और उम्र किसी को हिम्मत हारने नहीं देती। विजेता और पुरस्कार फुल मैराथन (42 किमी) पुरुष वर्ग: टेडेजे किनेटो वाशे (इथियोपिया) महिला वर्ग: मेसेरेट मेंगिस्तु बस्तर से पुरुष: संजय कोर्राम, महिला: कुसुम शार्दुल हाफ मैराथन (21 किमी) पुरुष ओपन: मोनू कुमार, महिला ओपन: त्सेहे देसाले बस्तर से पुरुष: भावेष कुमार, महिला: कुमली पोयाम 10 किलोमीटर ओपन पुरुष: बबलू, महिला: पूनम जूनियर वर्ग पुरुष: सागर, महिला: लावण्या सब-जूनियर वर्ग पुरुष: मोहित धोंडू, महिला: अंजलि गुप्ता इन विजेताओं ने न केवल खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, बल्कि शांति और सहयोग का संदेश भी दिया। मैराथन का सामाजिक संदेश बस्तर हेरिटेज मैराथन-2026 केवल एक खेल आयोजन नहीं रहा। यह शांति, बदलाव और सामाजिक समरसता का प्रतीक बन गया। माओवादी हिंसा से प्रभावित लोगों ने अब खेल के माध्यम से समाज में अपनी जगह बनाई। पुलिस और पुनर्वासित माओवादी की दोस्ती और सहयोग ने दिखाया कि कभी दुश्मन भी सहयोगी बन सकते हैं। स्थानीय युवाओं, महिलाओं और आदिवासियों ने भागीदारी दिखाकर सकारात्मक सामाजिक संदेश दिया। निष्कर्ष बस्तर हेरिटेज मैराथन ने यह साबित किया कि भूतकाल का डर और हिंसा भी बदलाव और सहयोग में बदल सकते हैं। खेल ने सामाजिक समरसता, शांति और उत्साह का संदेश दिया। प्रतिभागियों की कहानियाँ यह दिखाती हैं कि हौसला, धैर्य और आत्मविश्वास किसी भी चुनौती को पार कर सकते हैं। पुनर्वासित माओवादी और पुलिसकर्मी की भागीदारी यह दर्शाती है कि पुरानी दुश्मनी भी दोस्ती और सहयोग में बदल सकती है। यह आयोजन अब बस्तर में शांति और सामाजिक बदलाव का प्रतीक बन गया है, जो आने वाले वर्षों में भी युवाओं और समाज को प्रेरित करता रहेगा।

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एलपीजी पर बड़ी राहत: दो और जहाजों ने पार किया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

भारत के दो एलपीजी टैंकर, ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’, युद्ध प्रभावित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित रूप से भारत की ओर बढ़ रहे हैं। ये जहाज लगभग 92,612 टन एलपीजी लेकर आ रहे हैं, जो भारत की एक दिन की खपत के बराबर है। इस उपलब्धि के साथ घरेलू गैस की आपूर्ति में एक बड़ी राहत की उम्मीद जताई जा रही है। युद्धग्रस्त जलमार्ग पार कर भारत की ओर मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह दोनों जहाज सोमवार सुबह फारस की खाड़ी से रवाना हुए और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर गए। यह जलमार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित है और खाड़ी देशों के तेल और गैस उत्पादों को दुनिया के अन्य हिस्सों से जोड़ता है। हाल ही में अमेरिका और इज़राइल के हमलों के कारण यह क्षेत्र लगभग बंद हो गया था। कितनी LPG ला रहे हैं जहाज? पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि इन दोनों जहाजों पर कुल 92,612 टन एलपीजी लोड किया गया है। इतनी एलपीजी से लगभग 65.21 लाख घरेलू सिलिंडर भरे जा सकते हैं। ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’ क्रमशः 33 और 27 भारतीय नाविकों के साथ आ रहे हैं। ये जहाज उन 22 भारतीय जहाजों में से हैं जो पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद फंसे थे। भारत में पहुंचने की संभावना विशेष सचिव के अनुसार, इन टैंकरों के 26 मार्च से 28 मार्च के बीच भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है। इनकी सुरक्षित वापसी घरेलू एलपीजी आपूर्ति को स्थिर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अन्य जहाजों की स्थिति शुरू में, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 28 भारतीय झंडे वाले जहाज मौजूद थे। इनमें से 24 पश्चिमी हिस्से में और चार पूर्वी हिस्से में थे। अब तक दोनों तरफ से दो-दो जहाज सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे हैं। रणनीतिक महत्व और राहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व इसलिए है क्योंकि यह खाड़ी देशों के ऊर्जा उत्पादों का प्रमुख मार्ग है। युद्ध के कारण यह मार्ग बंद होने पर भारत समेत कई देशों में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती थी। ऐसे में इन दो टैंकरों की सुरक्षित वापसी एक सकारात्मक संकेत है। निष्कर्ष भारत की एलपीजी आपूर्ति अब धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौटने की उम्मीद है। विशेषज्ञ मानते हैं कि युद्ध प्रभावित क्षेत्रों से जहाजों की सुरक्षित वापसी ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इस कदम से घरेलू गैस की कीमतों और वितरण पर दबाव कम होने की संभावना है।

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