आज पहलगाम आतंकी हमले को एक साल पूरा हो गया है। इस आतंकी वारदात को याद करते हुए कश्मीर के सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है। सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतर्कता के साथ घाटी में रह रहे स्थानीय लोगों तथा पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही हैं। खास तौर पर घाटी में काम करने वाले हर पोनी, सर्विस प्रोवाइडर और लोकल गाइड के लिए QR कोड आधारित स्पेशल चेकिंग सिस्टम लागू किया गया है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा सके।
22 अप्रैल 2025 को बैसरन घाटी में हुए इस हमले में आतंकियों ने शांति से घूम रहे सैलानियों पर बेरहमी से गोलीबारी की थी, जिसमें 26 लोगों की मृत्यु हो गई थी। आतंकवाद ने इस घाटी और पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, लेकिन सरकार और सेना ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सुरक्षा प्रबंध और नियंत्रण सख्त कर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस भयंकर आतंकी हमले की एक वर्षगांठ पर एक भावुक पोस्ट में कहा है, “पिछले साल आज ही के दिन पहलगाम में हुए इस दमनकारी आतंकी हमले में अपनी जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को हम हमेशा याद रखेंगे। यह देश आतंकवाद के किसी भी रूप के सामने कभी झुकेगा नहीं। आतंकवाद के नापाक मंसूबे हमेशा असफल रहेंगे। हम अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी ताकत से जुटे हैं।”
भारतीय सेना ने भी इस बरसी के मौके पर दो बयान जारी किए हैं, जिनमें आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ संकल्प और सुरक्षा बलों की तत्परता की पुष्टि की गई है। सेना ने कहा कि घाटी में किसी भी सीमा उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
26 शहीदों की याद में परिवारों की वेदना
इस हमले की वर्षगांठ पर उन परिवारों की कहानियां भी सामने आईं, जिन्होंने अपने अपनों को खोया है। करनाल के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल, जिन्होंने छह दिन पहले ही शादी की थी, उनकी यादें आज भी उनके घर में आजाद नहीं हुई हैं। विनय के पिता का कहना है कि बेटे की स्मृति में मेडिकल कॉलेज या विश्वविद्यालय का नाम रखकर उसकी सेवा भावना को अमर किया जाना चाहिए।
कोलकाता के सॉफ्टवेयर इंजीनियर बितान अधिकारी की मां अब मिठाइयां भी नहीं बनातीं, क्योंकि उनका बेटा ही नहीं रहा। उन्होंने बताया कि बेटे की मौत से परिवार का जीवन पूरी तरह बदल गया है।
कानपुर के कारोबारी शुभम द्विवेदी और उनकी पत्नी की दुखद कहानी ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है। शुभम की हत्या के बाद उनका परिवार हर महीने 22 तारीख को उनके स्मरण में भोज कराता है और शुभम को शहीद मानने की मांग करता है।
मुंबई के पुणे निवासी इंटीरियर डिजाइनर संतोष जगदाले ने आतंकियों से लोहा लेते हुए अपनी बेटी को बचाया, लेकिन खुद शहीद हो गए। उनकी बहादुरी का परिवार लंबे समय तक सम्मान करता रहेगा। उनकी बेटी ने कहा है कि अब वे अपने वेतन का एक हिस्सा जरूरतमंदों की सेवा में लगाएंगी।
सुरक्षा बढ़ाने के प्रयास और आगे की राह
बता दें कि घाटी में अभी भी बैसरन घाटी को बंद रखा गया है और भारतीय सेना ने बार-बार यह साफ किया है कि घाटी में किसी भी सीमा रेखा का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पीड़ित परिवारों और आतंकवाद के शिकार हुए लोगों को न्याय दिलाने का वादा करते हुए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट हैं।
यह हमला सुरक्षा बलों और आम नागरिकों दोनों के लिए एक कड़ा सबक साबित हुआ है। घाटी की सुंदरता और पर्यटन के महत्व को ध्यान में रखते हुए सरकार और सेना मिलकर आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं ताकि यहां के लोग स्वतंत्र और सुरक्षित महसूस कर सकें।
आतंकवाद के इस काले स्याह अध्याय को याद करते हुए पूरे देश के लोग शहीदों की शहादत को सदैव याद रखेंगे और उनके परिवारों के साथ खड़े रहेंगे।












