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March 2026

विशेष आयोजन

अद्वैत दर्शन भारतीय दर्शन का एक महत्वपूर्ण एवं प्राचीन दर्शनशास्त्र है

नई दिल्ली, : अद्वैत दर्शन भारतीय दर्शन का एक महत्वपूर्ण एवं प्राचीन दर्शनशास्त्र है, जिसकी उत्पत्ति वेदांत शास्त्रों में हुई। इस दर्शन के अनुसार, ब्रह्म और आत्मा एक ही हैं, और संसार में जो विविधता दिखाई देती है, वह मायाजाल मात्र है। अद्वैत दर्शन के प्रमुख प्रतिपादक आदि शंकराचार्य हैं, जिन्होंने इस दर्शन को जन-जन तक पहुँचाने में बड़ी भूमिका निभाई। अद्वैत दर्शन का मूल मंत्र ‘एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्ति’ से समझा जा सकता है, जिसका अर्थ है कि सच्चाई एक है, लेकिन विद्वान उसे कई रूपों में प्रकट करते हैं। इस दर्शन के अनुसार, परम सत्ता ब्रह्म ही सर्वोच्च सत्य है और जगत का कोई भी चीज़ स्थायी नहीं है। संसार की विभिन्नता केवल माया के प्रभाव से उत्पन्न होती है, जो हमें वास्तविकता को नहीं समझने देती। विद्वानों का मानना है कि अद्वैत दर्शन ने भारतीय दर्शनशास्त्र में एक क्रांतिकारी परिवर्तन किया। इसने आत्मा और ब्रह्म के बीच के अंतर को समाप्त कर एकता की भावना को बढ़ावा दिया। इसके अलावा, इस दर्शन ने भक्तिमार्ग और ज्ञानमार्ग को संतुलित तरीके से प्रस्तुत किया, जिससे आध्यात्मिक साधना में आसानी हुई। आधुनिक भारत में भी अद्वैत दर्शन का महत्व कम नहीं हुआ है। कई विश्वविद्यालयों में यह दर्शनशास्त्र का एक अनिवार्य विषय है। इसके अधिकारिक अध्ययन से विद्यार्थियों को न केवल दार्शनिक ज्ञान मिलता है, बल्कि जीवन जीने की एक नई सोच भी मिलती है। कई समकालीन विचारक और योग गुरु इस दर्शन को अपनी शिक्षाओं का आधार मानते हैं। अद्वैत दर्शन आज भी लोगों के मन में अध्यात्मिक एवं दार्शनिक प्रश्नों के उत्तर खोजने का मार्ग प्रशस्त करता है। यह दर्शन एक ऐसी जीवनशैली और सोच प्रदान करता है, जो व्यक्ति और ब्रह्म के बीच के संबंध को गहरा करता है। परिणामस्वरूप, अद्वैत दर्शन वर्तमान युग में भी प्रासंगिक एवं प्रभावशाली बना हुआ है। इस प्रकार, अद्वैत दर्शन केवल एक शास्त्रीय संकल्पना नहीं, बल्कि जीवन की वास्तविकता को समझने का एक प्रभावशाली मार्ग है, जो आज के समय में भी विज्ञान, दर्शन और आध्यात्म के क्षेत्र में अपना महत्व बनाए हुए है।

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असम दौरे पर पीएम ने गार्ड को श्रद्धांजलि क्यों नहीं दी? कांग्रेस ने उठाए तीखे सवाल

नई दिल्ली। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के असम दौरे के दौरान वरिष्ठ स्वतंत्रता सेनानी गार्ड को श्रद्धांजलि न देने पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ी आलोचना की है और कहा है कि ऐसे महत्वपूर्ण अवसरों पर राष्ट्रीय धरोहरों का ठीक से सम्मान किया जाना चाहिए। कांग्रेस प्रवक्ता ने एक प्रेस बयान में कहा कि गार्ड भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन शूरवीरों में से एक हैं, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपना जीवन न्योछावर किया। इसलिए, प्रधानमंत्री का उससे सम्मानपूर्वक विदाय न करना न सिर्फ दुखद है, बल्कि यह जनता के भावनाओं के साथ खिलवाड़ जैसा है। पार्टी का कहना है कि सरकार को इस तरह के मामलों में ज़्यादा संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। आधिकारिक कार्यक्रमों में नेताओं द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देना एक पारंपरिक और महत्वपूर्ण कर्तव्य माना जाता है। इससे न केवल उनके योगदान का सम्मान होता है, बल्कि नए पीढ़ी को भी उनके बलिदान की जानकारी मिलती है। कांग्रेस ने सुझाव दिया है कि अगली बार इस तरह के दौरे में सभी प्रमुख हस्तियों को शामिल किया जाना चाहिए ताकि कोई महत्वपूर्ण चरण अनदेखा न रह जाए। वहीं, प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से अभी तक इस विषय पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, असम सरकार ने कहा है कि पूरे कार्यक्रम में सभी आवश्यक सरकारी व्यावस्थाएं की गई थीं और प्रधानमंत्री का दौरा सफल रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मामले ने एक बार फिर यह दर्शाया है कि इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के सम्मान को लेकर राजनीतिक दलों में मतभेद हो सकते हैं। ऐसे समय में जब देश स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव मना रहा है, नेताओं को चाहिए कि वे सभी स्वतंत्रता सेनानियों को आवश्यक सम्मान दें और उनके योगदान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करें। हालांकि, कांग्रेस का यह आंदोलन असम में राजनीतिक हलचल को भी तेज कर सकता है क्योंकि राज्य आगामी चुनावों के लिए भी तैयारियां कर रहा है। इस मुद्दे पर और भी बयान आने की संभावना है। इस विवाद ने देशभर में स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान की भावना को एक बार पुनः जगाया है और उम्मीद की जा रही है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से लेकर भविष्य में इस तरह की चूक न हो, इसका विशेष ध्यान रखेगी।

राज्य-शहर

राज्यसभा चुनाव में ‘अवैध गतिविधियों’ का आरोप: हरियाणा कांग्रेस ने चुनाव आयोग से की शिकायत

कांग्रेस ने निष्पक्ष मतदान पर उठाए सवाल, चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग हरियाणा कांग्रेस ने हाल ही में संपन्न राज्यसभा चुनावों के मद्देनजर चुनाव आयोग को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया में विभिन्न स्तरों पर गैरकानूनी गतिविधियों की बात कही है और उचित जांच की मांग की है। इस कदम को राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सुदृढ़ता के लिए एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। हरियाणा कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि चुनाव के दौरान नियमों का उल्लंघन किया गया है, जिसके कारण चुनाव की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ उम्मीदवारों और उनके समर्थकों द्वारा दबाव और प्रोत्साहन के माध्यम से मतदाता प्रभावी रणनीतियाँ अपनाई गईं, जो चुनाव के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध हैं। पार्टी के प्रवक्ता ने संवाददाताओं से कहा, “हमें खेद है कि चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए कुछ लोगों ने नियमों की खुलेआम अवहेलना की है। हम चुनाव आयोग से अनुरोध करते हैं कि वे इन सभी मामलों की गंभीरता से जांच करें और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें ताकि लोकतंत्र का सम्मान बना रहे।” चुनाव आयोग ने अभी इस शिकायत पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन यह मामला चुनाव आयोग की सतर्कता और जवाबदेही को लेकर सत्ताधारी दलों और विपक्ष दोनों के लिए एक परीक्षण का मौका होगा। चुनाव आयोग की भूमिका चुनाव की निष्पक्षता बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। विश्लेषकों का मानना है कि हरियाणा में आगामी राजनीतिक माहौल और आगामी विधान सभा चुनावों से पहले यह विषय काफी संवेदनशील है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर अपनी सुनवाई कराएंगे और इसे अपने राजनीतिक एजेंडा का हिस्सा बनाएंगे। यह भी देखा जाना बाकी है कि चुनाव आयोग कैसे स्थिति को संभालता है और किस प्रकार के कदम उठाता है। विधि और नियमों का कड़ाई से पालन ही एक स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है, और इस मामले में हरियाणा कांग्रेस का कदम चुनाव आयोग की असरदार भूमिका की मांग को स्पष्ट करता है। अतः, आगामी दिनों में चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और संभावित कार्रवाई से इस विवाद का समाधान निकालने की उम्मीद की जा रही है, जिससे भविष्य में चुनाव प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बने।

1.22 lakh Anganwadi workers in Rajasthan get ₹1,000 each through DBT
राष्ट्रीय

राजस्थान में 1.22 लाख आंगनवाड़ी कर्मियों को DBT के माध्यम से 1,000 रुपये प्रति व्यक्ति भुगतान

जयपुर: राजस्थान के मुख्यमंत्री ने हाल ही में आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के पोषण और विकास को बेहतर बनाने के लिए कई अहम पहलाओं की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि राज्य में आंगनवाड़ी केंद्रों पर तीन से छह वर्ष के बच्चों को सप्ताह में पांच दिन गर्म दूध प्रदान किया जा रहा है। यह सेवा ‘अमृत आहार योजना’ के तहत दी जा रही है, जिसका उद्देश्य बच्चों के स्वस्थ पोषण को सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों की भौतिक संरचना को बेहतर बनाने के लिए भवनों की मरम्मत और नवीनीकरण का कार्य जारी है। इसके साथ ही, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और महिला पर्यवेक्षकों को स्मार्टफोन वितरित किए गए हैं, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता और मॉनिटरिंग बेहतर हो सके। यह कदम डिजिटल माध्यम से योजनाओं के क्रियान्वयन को आसान और पारदर्शी बनाने हेतु उठाया गया है। राज्य सरकार ने कुल 1.22 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सीधे लाभ हस्तांतरण (DBT) के तहत 1,000 रुपये प्रति व्यक्ति भुगतान किया है। यह राशि उनके कार्यों के सम्मान स्वरूप प्रदान की गई है, ताकि वे अपने परिवार और कार्य क्षेत्र में बेहतर सेवाएं दे सकें। आंगनवाड़ी केंद्र ग्रामीण और शहरी इलाकों में बच्चों और महिलाओं के कल्याण का प्रमुख माध्यम हैं, जहां पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। अमृत आहार योजना के लाभ सप्ताह में पांच दिन बच्चों को गर्म दूध उपलब्ध कराना। बच्चों के संपूर्ण पोषण में सुधार। आंगनवाड़ी केंद्रों के स्तर सुधार के लिए भवनों का नवीनीकरण। डिजिटल उपकरणों के माध्यम से सेवाओं का बेहतर प्रबंधन। सरकार का मानना है कि इन पहलों से ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति बेहतर होगी और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बढ़ेगा। स्मार्टफोन वितरण से कार्य प्रक्रियाओं में गति आएगी तथा रिपोर्टिंग और निगरानी में पारदर्शिता बढ़ेगी। राजस्थान में यह कदम सरकार की समर्पित और निरंतर प्रयासों का नतीजा है, जो बाल विकास परियोजनाओं के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने स्थानीय अधिकारियों को आंगनवाड़ी केंद्रों के संचालन और योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए हैं। इस तरह की पहलों से राजस्थान में मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित होगा और आने वाले वर्षों में बच्चों के विकास और समग्र स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव देखा जाएगा।

Israel passes law making death penalty default sentence for Palestinians convicted of lethal attacks
अंतरराष्ट्रीय

इज़राइल ने कानून पास किया: घातक हमलों में दोषी फिलिस्तीनियों के लिए डिफ़ॉल्ट फांसी की सजा

नई दिल्ली। इज़राइल सरकार ने हाल ही में एक विवादास्पद नया कानून पारित किया है, जिसमें उन फिलिस्तीनी संदिग्धों को डिफ़ॉल्ट रूप से मौत की सजा (फांसी) सुनाने का आदेश दिया गया है, जो घातक आतंकवादी हमलों के दोषी पाए गए हैं। इस फैसले ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा कर दी हैं। कानून के अनुसार, यदि कोई फिलिस्तीनी नागरिक आतंकवादी हमलों में दोषी पाया जाता है, जिनमें मौत होती है, तो उसकी सजा फांसी होगी। इससे पहले, इज़राइल में सजा का निर्धारण अधिक लचीला था, जहां मौत की सजा को विशेष परिस्थितियों में ही लागू किया जाता था। लेकिन नए नियम के तहत, फांसी सजा को डिफॉल्ट बताया गया है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में बदलाव आएगा। सरकार ने इस कानून को आतंकवाद विरोधी कठोर कदम बताया है, जिससे हमलों को रोकने में मदद मिल सके। इज़राइली अधिकारी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि यह कानून आतंकियों के लिए एक मजबूत चेतावनी होगा। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि इससे सुरक्षा बलों को आतंकवादी नेटवर्क को खत्म करने में मदद मिलेगी। दूसरी ओर, फिलिस्तीनी प्रशासन और कई मानवाधिकार समूहों ने इस कानून की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि यह कानून न्यायिक प्रक्रिया और मानवाधिकारों के आधारभूत सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस तरह के कठोर कदमों से क्षेत्र में तनाव और हिंसा बढ़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी इस कदम पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। संयुक्त राष्ट्र और कई पश्चिमी देशों ने इज़राइल से ऐसे कानूनों को वापिस लेने का आग्रह किया है, जिससे शांति प्रयासों को बढ़ावा मिल सके। वहीं कुछ देश इज़राइल की सुरक्षा चिंताओं को भी समझने की कोशिश कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून फिलिस्तीन और इज़राइल के बीच लंबे समय से चली आ रही विवाद को और जटिल बना सकता है। सुरक्षा और मानवाधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहेगा। इस मामले में आगे क्या होगा, यह तो समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट है कि इज़राइल द्वारा अपनाया गया यह नया क़ानून क्षेत्रीय संघर्ष के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

The weight of existence: A landmark retrospective of Tyeb Mehta
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अस्तित्व का बोध: तैयब मेहता की एक उल्लेखनीय प्रदर्शनी

नई दिल्ली। इस समय क़िरण नादर म्यूजियम ऑफ़ आर्ट में भारतीय आधुनिक कलाकार तैयब मेहता की एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है, जिसमें उनके जीवन और कला की 120 से अधिक प्रभावशाली रचनाएँ प्रदर्शित की जा रही हैं। यह प्रदर्शनी भारत के आधुनिक कला क्षेत्र में मेहता के प्रतिष्ठित योगदान को समर्पित है और इसे देखकर कला प्रेमियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। तैयब मेहता, जिन्हें प्रखर रंगों और भावपूर्ण अभिव्यक्ति के लिए जाना जाता है, ने भारतीय आधुनिकता की कल्पना में एक नवीन मोड़ प्रस्तुत किया। इस प्रदर्शनी में उनके प्रारंभिक काल से लेकर उनकी अंतिम कृतियाँ तक का समग्र प्रदर्शन है, जो उनके विकास और विविध दृष्टिकोण को दर्शाता है। क़िरण नादर म्यूजियम ऑफ़ आर्ट ने इस आयोजन के माध्यम से मेहता की कला को नए संदर्भ में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, जिससे दर्शकों को उनके दृष्टिकोण और मनोभावना का गहरा अनुभव हो सके। प्रदर्शनी में प्रदर्शित अधिकांश कलाकृतियाँ मेहता के जीवन के विभिन्न पड़ावों पर रची गई हैं, जिनमें मानवीय अस्तित्व, सामाजिक संघर्ष, और आध्यात्मिक अन्वेषण जैसे विषय प्रमुख हैं। उनके प्रभावशाली चित्रों में अनिवार्यता, अंशकालिक अस्तित्व और समय की गति की भावना स्पष्ट रूप से झलकती है। मेहता ने अपनी कला के माध्यम से न केवल भारत के सामाजिक-राजनैतिक परिवर्तनों को चित्रित किया, बल्कि उन्होंने वैश्विक कला मंच पर भी अपनी विशेष पहचान बनाई। इस प्रदर्शनी के क्यूरेटर ने बताया कि उन्हें मेहता की कलाकृतियों में एक ऐसे कलाकार की झलक मिलती है जो गहन संवेदनशीलता और तकनीकी दक्षता दोनों का संयोजन करता है। यह आयोजन कलाकार के जन्मशताब्दी वर्ष पर विशेष रूप से आयोजित किया गया है, जो उनकी विरासत को मंच प्रदान करता है। क़िरण नादर म्यूजियम ने प्रदर्शनी के दौरान विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रम और संगोष्ठियाँ भी आयोजित की हैं, ताकि नई पीढ़ी को मेहता की कला के महत्व और प्रासंगिकता से अवगत कराया जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रदर्शनी न केवल तैयब मेहता की कला का उत्सव है, बल्कि भारतीय आधुनिक कला की उस जड़ों की खोज भी है जिसने देश की कला स्तिथि को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया। कला प्रेमी और शोधकर्ता इसे एक सुनहरा अवसर मान रहे हैं, क्योंकि इसमें मेहता के न्यूनतर ज्ञात रचनात्मक प्रयोग और उनके विचारों की गहराई का समूचा प्रतिबिंब देखने को मिलता है। क़िरण नादर म्यूजियम में यह प्रदर्शनी आने वाले महीनों तक जारी रहेगी, और इसके माध्यम से भारतीय कला के प्रति जागरूकता एवं सराहना बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है।

Why do mosquitoes love some people more than others?
तकनीकी

मच्छर कुछ लोगों को दूसरों से ज्यादा क्यों आकर्षित करते हैं?

नई दिल्ली: मच्छर, जो कि मौसम बदलते ही सबसे ज्यादा परेशान करने वाले कीट बन जाते हैं, कुछ लोगों को दूसरों की तुलना में ज्यादा क्यों पसंद करते हैं, यह सवाल अक्सर उठा है। यह धारणा कि मच्छर केवल मीठे खून वाले इंसानों को ही काटते हैं, पूरी तरह सही नहीं है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि मच्छर लोगों को कई अन्य कारकों के आधार पर आकर्षित करते हैं। सबसे पहला कारण है कार्बन डाइऑक्साइड (CO2)। जब हम सांस लेते हैं, तो हम CO2 उत्सर्जित करते हैं, और मच्छर इसी गैस को अपनी भक्षक खोजने के लिए इस्तेमाल करते हैं। जिन लोगों की सांस तेज होती है, वे अधिक CO2 उत्सर्जित करते हैं, जिससे मच्छर उनकी ओर आकर्षित होते हैं। इसके अलावा, शरीर से निकलने वाली विशिष्ट गंध भी मच्छरों को आकर्षित करती है। इंसान के शरीर से निकलने वाले स्वेद, बैक्टीरिया और त्वचा पर मौजूद रसायन मच्छरों की गंध पहचान प्रणाली को सक्रिय करते हैं। कुछ लोग आनुवंशिक रूप से ऐसे रसायनों को अधिक उत्सर्जित करते हैं, जो मच्छरों के लिए आकर्षक होते हैं। शारीरिक गर्मी भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मच्छर गर्म शरीर की ओर अधिक आकर्षित होते हैं। इसलिए, शारीरिक व्यायाम या गर्म वातावरण में रहने से शरीर की तापन अधिक होती है, जिससे मच्छर का ध्यान बढ़ता है। कपड़े के रंगों का भी प्रभाव होता है। गहरे रंग जैसे काला और लाल रंग मच्छरों को ज्यादा आकर्षित करते हैं, जबकि हल्के रंगों के कपड़े उन्हें कम आकर्षित करते हैं। इसलिए, यह कहना गलत है कि केवल मीठे खून वाले लोगों को मच्छर ज्यादा काटते हैं। कई पर्यावरणीय और शारीरिक عوامل एक साथ मिलकर मच्छरों के व्यवहार को प्रभावित करते हैं। मच्छरों से बचाव के लिए उचित सावधानियां बरतना आवश्यक है, जैसे कि मच्छरदानी का उपयोग करना, कीटनाशक लगाना और साफ-सफाई रखना। अन्ततः, मच्छरों के व्यवहार को समझकर और सावधानी अपनाकर हम अपने स्वयं को मच्छर जनित रोगों से बचा सकते हैं।

Movie-to-menu: When The Princess and the Frog came to the table in Chennai
लाइफस्टाइल

मूवी से मेन्यू तक: जब द प्रिंसेस एंड द फ्रॉग ने चेन्नई की मेज पर कदम रखा

चेन्नई, 27 अप्रैल 2024 — डिज़्नी के मशहूर एनिमेटेड क्लासिक ‘द प्रिंसेस एंड द फ्रॉग’ की यादों को एक अनोखे तरीके से जीने का मौका मिला है। शहर के एक प्रतिष्ठित रेस्टोरेंट ने इस फिल्म को मूर्ति रूप देने के लिए एक पाँच-कोर्स भोजन का आयोजन किया, जिसमें लुइसियाना की सांस्कृतिक और पाक विरासत का खासा सम्मान किया गया। इस अनुभव का मुख्य आकर्षण था गम्बो से लेकर बेन्ये तक की व्यंजन श्रृंखला, जो फिल्म के प्रमुख खाद्य पदार्थों को जीवंत कर गई। गम्बो, जो लुइसियाना की एक पारंपरिक सूप है, अपने मसालेदार और सृजनात्मक स्वाद के लिए जानी जाती है। इसके बाद बेन्ये, जो एक प्रकार का फ्रेंच डोनट है, मिठास और परंपरा का मेल प्रस्तुत करता है। कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया कि यह प्रयास केवल भोजन तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें फिल्म की थीम, संगीत और संस्कृति को भी शामिल किया गया, जिससे मेहमानों को एक समृद्ध सांस्कृतिक अनुभव मिला। चेन्नई में इस तरह का आयोजन पहली बार किया गया है, जो फिल्म प्रेमियों और फूड क्रिटिक्स दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बना। रेस्टोरेंट के प्रमुख शेफ ने कहा, “हमें खुशी है कि हम एक ऐसी कहानी को खाने के माध्यम से जीवंत कर पाए जो सभी आयु वर्ग के लोगों के दिलों में खास जगह रखती है। हमारा उद्देश्य था कि हर डिश में फिल्म की भावना झलके और यह अनुभव अविस्मरणीय बने।” फिल्म और भोजन का इस तरह का संयोजन न केवल मनोरंजन प्रदान करता है बल्कि सांस्कृतिक समझ को भी बढ़ावा देता है। आयोजकों का यह प्रयास दर्शाता है कि कैसे पारंपरिक कहानियों को आधुनिक रूप में पेश किया जा सकता है, जिससे स्थानीय और वैश्विक दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया जा सके। चेन्नई में इस आयोजन को सामाजिक माध्यमों पर भी खूब सराहना मिली है और आने वाले समय में ऐसे और आयोजनों के लिए दर्शकों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। “द प्रिंसेस एंड द फ्रॉग का यह पांच-कोर्स भोजन अनुभव निश्चित रूप से एक सांस्कृतिक पुल का काम करेगा,” एक स्थानीय फूड ब्लॉग ने लिखा। यह आयोजन दर्शाता है कि किस प्रकार फिल्म और पाक कला का मेल विभिन्न संस्कृतियों को जोड़ने और साझा अनुभव प्रदान करने का एक प्रभावी माध्यम बन सकता है।

IPL 2026 PBKS vs GT | Sai Sudharsan one of the hardest workers in the game: Titans batting coach Hayden
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आईपीएल 2026 PBKS बनाम GT | टाइटंस के बल्लेबाजी कोच हेडन ने सई सुधर्शन को खेल के सबसे मेहनती खिलाड़ियों में बताया

चेन्नई: आईपीएल 2026 में पंजाब किंग्स (PBKS) और गुजरात टाइटंस (GT) के बीच मुकाबले को लेकर काफी उत्साह है। इस मैच में GT के बल्लेबाजी कोच मैथ्यू हेडन ने सई सुधर्शन की प्रशंसा करते हुए उन्हें खेल के सबसे मेहनती खिलाड़ियों में से एक बताया है। हेडन ने तमिलनाडु के इस बल्लेबाज की तैयारी और कार्यशैली की सराहना की है। हेडन ने कहा, “सई सुधर्शन और शुभमन गिल को मैदान पर तैयारी करते देखना एक सौभाग्य की बात है। उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण प्रेरणादायक है।” उन्होंने यह भी बताया कि सई के बूते GT की बल्लेबाजी लाइनअप को काफी मजबूती मिली है। सई सुधर्शन ने IPL के पिछले सीज़न में अपनी बल्लेबाजी की शानदार झलक दिखाते हुए टीम में अपनी जगह पक्की की है। उनकी तकनीक, संयम और रन बनाने की क्षमता उन्हें भविष्य का बड़ा खिलाड़ी बनाती है। GT के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि ऐसे युवा और मेहनती खिलाड़ी टीम में हों जो दबाव में भी अपना खेल दिखा सकें। हेडन ने आगे कहा, “सई का फोकस, अनुशासन और ट्रेनिंग के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें बाक़ी खिलाड़ियों से अलग बनाती है। हम क्लब के रूप में भी उनकी प्रगति पर गर्व महसूस करते हैं और उन्हें शीर्ष स्तर पर पहुंचने के लिए पूरी सहायता प्रदान करेंगे।” गुजरात टाइटंस ने पिछले कुछ सालों में अपनी टीम में संतुलित युवा और अनुभवी खिलाड़ियों की शुरुआत की है, जिन्होंने IPL में शानदार प्रदर्शन किया है। सई सुधर्शन और शुभमन गिल जैसे खिलाड़ियों की मौजूदगी ने टीम की बल्लेबाजी को और भी मजबूत किया है। फैंस भी कई मैचों में सई के पावरहिटिंग और बड़े शॉट्स से रोमांचित हुए हैं। अब IPL 2026 के मंच पर उनकी मेहनत के नतीजे देखने को मिल सकते हैं, जिससे GT को और ऊंचाइयों पर ले जाने में मदद मिलेगी। इस मुकाबले से पहले GT की टीम ने अपने अभ्यास सत्रों को और भी कड़ा किया है ताकि IPL के इस सीजन में बेहतरीन प्रदर्शन कर सके। सई सुधर्शन और शुभमन गिल की लगातार मेहनत और सकारात्मक रवैया टीम की सफलता की उम्मीदों को बढ़ा रहा है। यह मुकाबला किसी दर्शक के लिए रोमांचक होने वाला है, जिसमें दोनों टीमों के खिलाड़ी अपनी पूरी क्षमता दिखाने के लिए तैयार हैं। IPL जैसे बड़े टूर्नामेंट में खिलाड़ी की मेहनत ही सफलता की कुंजी होती है और सई सुधर्शन ने इसे अच्छे से समझकर अपनी पहचान बनाई है।

Trending, धर्म एवं यात्रा

नवपद ओली तप: आस्था, संयम और आत्मशुद्धि का महापर्व,महावीर जन्म कल्याणक पर निकलेगी शोभायात्राएं

सिरोही,महावीर जैन। जैन धर्म में चैत्र और वैशाख माह में मनाए जाने वाले नवपद ओली तप का प्राचीन काल से विशेष महत्व रहा है। मान्यता है कि इस तप, जप और आराधना से कर्मों की निर्जरा होती है तथा आत्मा को शाश्वत सुख की प्राप्ति होती है। आचार्य भगवंत एवं साधु-साध्वी समुदाय नवपद ओली की महिमा का वर्णन करते हुए बताते हैं कि इस तप के प्रभाव से जीवन के बड़े संकट भी सहज रूप से दूर हो जाते हैं। नवपद ओली तप के दौरान तपस्वी 9 दिनों तक नवपद की आराधना करते हैं। इस अवधि में वे उकाले हुए पानी का सेवन करते हुए दिन में एक बार सादा, बिना मसाले वाला आयंबिल (लूखा-अलूणा) भोजन ग्रहण करते हैं और दसवें दिन पारणा करते हैं। चैत्र मास में सिरोही जिले के विभिन्न प्राचीन जैन तीर्थों और मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं इस तपस्चर्या में बढ़-चढक़र भाग ले रहे हैं। जिरावला पार्श्वनाथ महातीर्थ में आचार्य रश्मिरत्न सूरी महाराज की निश्रा में एक हजार से अधिक तपस्वी नवपद ओली कर रहे हैं। इसी प्रकार आबू देलवाड़ा तीर्थ में आचार्य कल्पचंद्रसूरी, पावापुरी तीर्थ में आचार्य जयेशरत्नसूरी महाराज, मंडार में मुनिराज भव्यविजय महाराज तथा सिरोही शहर में भी आचार्य भगवंत की निश्रा में ओली आराधना श्रद्धा और उत्साह के साथ जारी है। चैत्र सुदी तेरस को भगवान महावीर के जन्म कल्याणक के अवसर पर जिलेभर में भव्य आयोजन होंगे। इस दिन त्रिशला नंदन वीर की जय, बोलो महावीर की के जयकारों के साथ शोभायात्राएं शहर के विभिन्न मार्गों से निकाली जाएंगी और श्रद्धालुओं को मुंह मीठा कराया जाएगा। इसके साथ ही चैत्र सुदी पूर्णिमा को सिद्धचक्र महापूजन का आयोजन किया जाएगा। नवपद ओली के दौरान प्रतिदिन एक-एक पद—अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु, ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप—की आराधना कराई जाती है। साधक इन नौ पदों की महिमा को समझते हुए प्रतिदिन 27 मालाओं का जाप करते हैं। उल्लेखनीय है कि इसी प्रकार की ओली मूल नवरात्रा के दौरान भी की जाती है। यह आराधना पूरे देश में जैन मंदिरों और उपासरों में साधु-साध्वी भगवंतों की निश्रा में श्रद्धा के साथ संपन्न होती है

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