Hot News

राजनीति

Trending, राजनीति

जनकल्याण और विकास पर जोर, जिला परिषद बैठक में योजनाओं की प्रभावी क्रियान्विति पर हुआ मंथन

योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक, जमीनी स्तर पर मॉनिटरिंग करें- जिला प्रमुख सारणेश्वर महादेव मंदिर के 1 किलोमीटर क्षेत्र को मांस-मदिरा मुक्त करने के प्रस्ताव को मिली मंजूरी सिरोही (मनोज माली, गोयली)। जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक बुधवार को जिला परिषद सभागार में जिला प्रमुख अर्जुनराम पुरोहित की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में जिले के विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रभावी क्रियान्विति, पेयजल व्यवस्था, विद्युत आपूर्ति, ग्रामीण समस्याओं के समाधान तथा विभिन्न विभागों की प्रगति रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की गई। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को गंभीरता से उठाते हुए त्वरित समाधान सुनिश्चित करने पर जोर दिया। बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज राज्य मंत्री ओटाराम देवासी ने ग्रीष्म ऋतु को देखते हुए अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के दौरान पेयजल एवं विद्युत व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने विकास अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा आमजन की शिकायतों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। राज्य मंत्री देवासी ने कहा कि प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंच सके। उन्होंने अधिकारियों से संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक राहत और सुविधाएं पहुंचाना है, इसलिए इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। बैठक को संबोधित करते हुए जिला प्रमुख अर्जुनराम पुरोहित ने कहा कि सभी अधिकारी केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं की सफल क्रियान्विति सुनिश्चित करें तथा लक्षित वर्ग को योजनाओं से लाभान्वित करने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए जिले को विकास के क्षेत्र में अग्रणी बनाने का प्रयास करें। उन्होंने विकास कार्यों को गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण कराने पर बल देते हुए कहा कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, इसके लिए जमीनी स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग की आवश्यकता है। जिला प्रमुख ने जिले में बढ़ रही चोरी की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए पुलिस प्रशासन से गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने विभिन्न लंबित विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्हें शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए तथा आमजन की समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ तत्काल समाधान सुनिश्चित करने की बात कही। बैठक में रेवदर विधायक मोतीराम कोली ने अपने क्षेत्र से संबंधित विभिन्न समस्याओं को उठाते हुए विकास कार्यों की प्रगति पर चर्चा की। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को आवश्यक कार्यों में तेजी लाने और ग्रामीण क्षेत्रों की मूलभूत समस्याओं का समाधान करने की आवश्यकता बताई। बैठक के दौरान राज्य वित्त आयोग सप्तम एवं 15वें वित्त आयोग जिला परिषद मद वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्य योजना तथा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की वार्षिक कार्य योजना वर्ष 2026-27 का अनुमोदन किया गया। इससे आगामी वित्तीय वर्ष में विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद जताई गई। मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रकाशचंद अग्रवाल एवं अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी शैलेन्द्र जोशी ने बैठक का संचालन करते हुए विभिन्न विभागों से प्राप्त प्रगति प्रतिवेदन सदन के समक्ष प्रस्तुत किए। अधिकारियों ने विभागवार योजनाओं और कार्यों की स्थिति की जानकारी भी दी। जिला प्रमुख पुरोहित की पहल बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय सिरोही के आराध्य देव सारणेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ा रहा। जिला प्रमुख अर्जुनराम पुरोहित की पहल पर सारणेश्वर महादेव मंदिर के एक किलोमीटर परिक्षेत्र को मांस एवं मदिरा मुक्त क्षेत्र घोषित करने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। इस प्रस्ताव को राज्य सरकार को भेजने का निर्णय लिया गया। इस निर्णय को धार्मिक आस्था और सामाजिक वातावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने इस पहल का समर्थन करते हुए इसे क्षेत्र की धार्मिक गरिमा के अनुरूप बताया। बैठक में गत बैठक में उठाए गए विभिन्न मुद्दों की अनुपालना रिपोर्ट पर भी विस्तार से चर्चा की गई। सदस्यों ने बत्तीसा नाला, जल जीवन मिशन के तहत कनेक्शन, हैंडपंप मरम्मत, ग्रामीण क्षेत्रों में ढीले विद्युत तार, नए विद्युत कनेक्शन, ट्रांसफार्मर स्थापना, सडक़ों की मरम्मत, अवैध बजरी खनन, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित कई विषयों को प्रमुखता से उठाया। इसके अलावा चिकित्सा, रसद, पशुपालन, शिक्षा, वन, श्रम, पुलिस, एनएचएआई, परिवहन, राजस्व, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग से संबंधित लंबित मामलों की भी समीक्षा की गई। जिला प्रमुख ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी लंबित कार्यों को शीघ्र पूर्ण कर उनकी अनुपालना रिपोर्ट पुन: प्रस्तुत की जाए। अतिरिक्त जिला कलेक्टर डॉ. राजेश गोयल ने विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी देते हुए अधिकारियों को नियमित फॉलोअप लेने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं की प्रगति की लगातार निगरानी आवश्यक है ताकि आमजन को समय पर लाभ मिल सके। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक किशोर सिंह ने जिले की कानून एवं शांति व्यवस्था की जानकारी देते हुए सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं पर प्रकाश डाला। इनकी रही मौजूदगी बैठक में उप जिला प्रमुख मनीषा मीणा, सिरोही प्रधान हंसमुख कुमार, सदस्य पदमा, दलिप सिंह मांडाणी, मधु, रामलाल, मगन कोली, अर्जुनराम, कन्हैयालाल, सीमा कुमारी, जोसना, रतन कंवर, दिलीप जैन, किरण कुमार एवं रतनाराम सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, सडक़, शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, रसद, खनन, सार्वजनिक निर्माण विभाग, सिंचाई सहित विभिन्न विभागों से जुड़ी क्षेत्रवार समस्याओं को अधिकारियों के समक्ष रखा। जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की कमी, खराब सडक़ें, पेयजल संकट, स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति तथा विद्युत समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। इस पर जिला प्रमुख अर्जुनराम पुरोहित ने संबंधित अधिकारियों को समस्याओं का त्वरित समाधान कर आमजन को राहत पहुंचाने के निर्देश दिए।

भास्कर अपडेट्स:तेलंगाना में हाउसकीपिंग स्टाफ ने किया 2.65 करोड़ का घोटाला:दो बैंक मैनेजर समेत 4 गिरफ्तार
राजनीति

तेलंगाना हाउसकीपिंग स्टाफ पर 2.65 करोड़ का घोटाला: दो बैंक मैनेजर सहित 4 गिरफ्तार

तेलंगाना के नलगोंडा जिले में बैंक से करोड़ों का घोटाला, चार आरोपी गिरफ्तार तेलंगाना के नलगोंडा जिले से एक बड़े बैंक घोटाले की खबर सामने आई है, जिसमें सरकारी बैंक की शाखा से 2.65 करोड़ रुपए की हेराफेरी की गई है। इस मामले में दो बैंक मैनेजर और हाउसकीपिंग स्टाफ समेत कुल चार लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि ये आरोपी मिलकर बैंक की नॉन-ब्रांच ऑनलाइन KYC अपडेट सिस्टम की खामी का फायदा उठाकर खातों से पैसे अवैध तरीके से ट्रांसफर करते रहे। एसपी शरत चंद्र पवार ने बताया कि मुख्य आरोपी बैंक में कॉन्ट्रैक्ट पर हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में तैनात था। इस स्टाफ ने दो बैंक मैनेजरों और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर यह घोटाला अंजाम दिया। आरोपियों ने बैंक के डॉर्मेंट लेकिन एक्टिव बैलेंस वाले खातों का दुरुपयोग करते हुए लगभग 2.65 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खातों में ट्रांसफर किए गए 2.42 करोड़ रुपए भी बरामद किए हैं। पुलिस ने बताया कि इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब बैंक के नियमित ऑडिट में संदिग्ध लेनदेन का पता चला। जांच में पता चला कि आरोपी नॉन-ब्रांच ऑनलाइन KYC अपडेट सिस्टम की खामियों का इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे खातों की जानकारी को बिना शाखा में रिपोर्ट किए ही अपडेट किया जा रहा था। यह व्यवस्था बैंक के डाटा प्रोटेक्शन और नियमों के खिलाफ थी, जिसका फायदा उठाते हुए ये आरोपी लंबे समय तक बड़ी रकम हेराफेर करते रहे। नलगोंडा पुलिस की टीम ने सक्रिय जांच के बाद आरोपियों को पकड़कर बैंक के करीब 2.42 करोड़ रुपये जब्त कर लिए हैं। मामला गंभीरता से देखने पर स्थानीय प्रशासन ने बताया कि बैंक की आंतरिक सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि भविष्य में ऐसे मामले न हों। इस दौरान पुलिस ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद आरोपियों से पूछताछ जारी है और अधिकारियों का मानना है कि इस घोटाले में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। बैंक प्रशासन भी इस घोटाले को लेकर पूरी तरह से सहयोग दे रहा है। अन्य बड़ी खबरों में, दिल्ली ब्लास्ट केस में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को कोर्ट ने 45 दिन की अतिरिक्त मोहलत दी है। NIA ने कहा है कि जांच अभी जारी है और इसे पूरा करने के लिए और समय चाहिए। कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए एजेंसी को अतिरिक्त समय प्रदान किया है। फिलहाल, इस मामले में जांच के विस्तार और गिरफ्तारियों को लेकर कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इस प्रकार, नलगोंडा बैंक घोटाले से साफ होता है कि वित्तीय संस्थानों में सुरक्षात्मक उपायों को मजबूत करने की जरूरत है, ताकि आम जनता का भरोसा बरकरार रहे और ऐसी गलत गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।

पहलगाम आतंकी हमले का एक साल, सेना बोली-न्याय हमेशा होगा:मोदी ने कहा- भारत आतंकवाद के आगे कभी नहीं झुकेगा, नापाक मंसूबे कामयाब नहीं होंगे
राजनीति

पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी: सेना ने दिया न्याय का वादा, मोदी ने कहा- भारत आतंकवाद के आगे कभी झुकेगा नहीं

आज पहलगाम आतंकी हमले को एक साल पूरा हो गया है। इस आतंकी वारदात को याद करते हुए कश्मीर के सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है। सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतर्कता के साथ घाटी में रह रहे स्थानीय लोगों तथा पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही हैं। खास तौर पर घाटी में काम करने वाले हर पोनी, सर्विस प्रोवाइडर और लोकल गाइड के लिए QR कोड आधारित स्पेशल चेकिंग सिस्टम लागू किया गया है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा सके। 22 अप्रैल 2025 को बैसरन घाटी में हुए इस हमले में आतंकियों ने शांति से घूम रहे सैलानियों पर बेरहमी से गोलीबारी की थी, जिसमें 26 लोगों की मृत्यु हो गई थी। आतंकवाद ने इस घाटी और पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, लेकिन सरकार और सेना ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सुरक्षा प्रबंध और नियंत्रण सख्त कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस भयंकर आतंकी हमले की एक वर्षगांठ पर एक भावुक पोस्ट में कहा है, “पिछले साल आज ही के दिन पहलगाम में हुए इस दमनकारी आतंकी हमले में अपनी जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को हम हमेशा याद रखेंगे। यह देश आतंकवाद के किसी भी रूप के सामने कभी झुकेगा नहीं। आतंकवाद के नापाक मंसूबे हमेशा असफल रहेंगे। हम अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी ताकत से जुटे हैं।” भारतीय सेना ने भी इस बरसी के मौके पर दो बयान जारी किए हैं, जिनमें आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ संकल्प और सुरक्षा बलों की तत्परता की पुष्टि की गई है। सेना ने कहा कि घाटी में किसी भी सीमा उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। 26 शहीदों की याद में परिवारों की वेदना इस हमले की वर्षगांठ पर उन परिवारों की कहानियां भी सामने आईं, जिन्होंने अपने अपनों को खोया है। करनाल के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल, जिन्होंने छह दिन पहले ही शादी की थी, उनकी यादें आज भी उनके घर में आजाद नहीं हुई हैं। विनय के पिता का कहना है कि बेटे की स्मृति में मेडिकल कॉलेज या विश्वविद्यालय का नाम रखकर उसकी सेवा भावना को अमर किया जाना चाहिए। कोलकाता के सॉफ्टवेयर इंजीनियर बितान अधिकारी की मां अब मिठाइयां भी नहीं बनातीं, क्योंकि उनका बेटा ही नहीं रहा। उन्होंने बताया कि बेटे की मौत से परिवार का जीवन पूरी तरह बदल गया है। कानपुर के कारोबारी शुभम द्विवेदी और उनकी पत्नी की दुखद कहानी ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है। शुभम की हत्या के बाद उनका परिवार हर महीने 22 तारीख को उनके स्मरण में भोज कराता है और शुभम को शहीद मानने की मांग करता है। मुंबई के पुणे निवासी इंटीरियर डिजाइनर संतोष जगदाले ने आतंकियों से लोहा लेते हुए अपनी बेटी को बचाया, लेकिन खुद शहीद हो गए। उनकी बहादुरी का परिवार लंबे समय तक सम्मान करता रहेगा। उनकी बेटी ने कहा है कि अब वे अपने वेतन का एक हिस्सा जरूरतमंदों की सेवा में लगाएंगी। सुरक्षा बढ़ाने के प्रयास और आगे की राह बता दें कि घाटी में अभी भी बैसरन घाटी को बंद रखा गया है और भारतीय सेना ने बार-बार यह साफ किया है कि घाटी में किसी भी सीमा रेखा का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पीड़ित परिवारों और आतंकवाद के शिकार हुए लोगों को न्याय दिलाने का वादा करते हुए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट हैं। यह हमला सुरक्षा बलों और आम नागरिकों दोनों के लिए एक कड़ा सबक साबित हुआ है। घाटी की सुंदरता और पर्यटन के महत्व को ध्यान में रखते हुए सरकार और सेना मिलकर आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं ताकि यहां के लोग स्वतंत्र और सुरक्षित महसूस कर सकें। आतंकवाद के इस काले स्याह अध्याय को याद करते हुए पूरे देश के लोग शहीदों की शहादत को सदैव याद रखेंगे और उनके परिवारों के साथ खड़े रहेंगे।

Trending, राजनीति

चुनावी रण का विराम, अब खामोश गलियों में गूंजेगा लोकतंत्र का स्वर

प्रचार थमा, पर सियासी तापमान बरकरार नई दिल्ली। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए चल रही तेज-तर्रार चुनावी सरगर्मियां आखिरकार मंगलवार शाम पांच बजे थम गईं। एक महीने से अधिक समय तक चली रैलियों, रोड शो, आरोप-प्रत्यारोप और जनसभाओं की गूंज अब अचानक थम चुकी है, लेकिन सियासी माहौल अब भी उतना ही गर्म है। चुनाव आयोग के सख्त नियमों के तहत मतदान से 48 घंटे पहले प्रचार पर पूर्ण विराम लगा दिया गया है। अब मंचों की जगह घर-घर संपर्क का दौर शुरू हो गया है, जहां उम्मीदवार और उनके कार्यकर्ता मतदाताओं से सीधे संवाद स्थापित करने में जुट गए हैं। 23 अप्रेल को लोकतंत्र का पहला बड़ा इम्तिहान तमिलनाडु की सभी 234 सीटों और पश्चिम बंगाल के पहले चरण की 152 सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान होगा। मतदान सुबह सात बजे से शुरू होगा और पूरे दिन लोकतंत्र का यह महापर्व जारी रहेगा। पश्चिम बंगाल में चुनाव दो चरणों में आयोजित हो रहे हैं, जिसमें दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को 142 सीटों पर कराया जाएगा। ऐसे में दोनों राज्यों में राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। तमिलनाडु में इस बार कुल 4,023 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। यहां मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ द्रविड़ मनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेतृत्व वाले गठबंधन और उसके प्रमुख प्रतिद्वंदी अन्नाद्रमुक के बीच माना जा रहा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में जुटी है। सत्तारूढ़ द्रमुक की ओर से मुख्यमंत्री एम के स्टालिन पूरे अभियान के केंद्र में रहे। उन्होंने राज्यभर में ताबड़तोड़ रैलियां कर अपनी सरकार के कामकाज को जनता के सामने रखा। वहीं विपक्ष की कमान एडापट्टी के पलानीस्वामी ने संभाली। उन्होंने द्रमुक सरकार पर कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं को लेकर तीखे हमले किए। इस चुनाव में एक नया और दिलचस्प मोड़ तब आया जब अभिनय की दुनिया से सुपरस्टार सी जोसफ विजय ने राजनीति के अखाड़े में कदम रखा। उनकी पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कजगम’ ने कई सीटों पर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। विजय की लोकप्रियता ने खासकर युवा मतदाताओं के बीच उत्सुकता और रोमांच पैदा किया है, जिससे चुनावी समीकरण और अधिक जटिल हो गए हैं। राष्ट्रीय नेताओं की एंट्री से बढ़ी सियासी धार तमिलनाडु में चुनावी माहौल को धार देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन सहित कई राष्ट्रीय नेताओं ने जमकर प्रचार किया। कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों के नेताओं ने भी मैदान में उतरकर गठबंधन को मजबूती देने की कोशिश की। चुनावी प्रचार के दौरान विपक्षी गठबंधन ने सत्तारूढ़ द्रमुक सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपों को प्रमुख मुद्दा बनाया। वहीं द्रमुक और उसके सहयोगी दलों ने तमिल स्वाभिमान और राज्य के अधिकारों पर कथित अतिक्रमण को लेकर जनता के बीच अपनी बात रखी। अंतिम दौर में महिला आरक्षण का मुद्दा भी जोर-शोर से उभरा, जिसने चुनावी बहस को नया आयाम दिया। लोकतंत्र की असली ताकत मतदाता तमिलनाडु में इस चुनाव में 5.67 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के पात्र हैं। इनमें 2.77 करोड़ पुरुष, 2.89 करोड़ महिलाएं और 7,617 उभयलिंगी मतदाता शामिल हैं। इनके लिए राज्यभर में 75,032 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। चुनाव आयोग ने मतदाता भागीदारी बढ़ाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाए हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग मतदान में हिस्सा लें। पश्चिम बंगाल, सियासी संग्राम का महाभारत पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 16 जिलों की 152 सीटों पर मतदान होगा। इस चरण में कुल 1,478 प्रत्याशी मैदान में हैं, जो अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। पहले चरण में जिन जिलों में मतदान होना है, उनमें मुर्शिदाबाद की 22, कूचबिहार की नौ, जलपाईगुड़ी की सात, अलीपुरद्वार की पांच, कलिंपोंग की एक, दार्जिलिंग की पांच, उत्तर दिनाजपुर की नौ, दक्षिण दिनाजपुर की छह, मालदा की 12, बीरभूम की 11, पश्चिम बर्द्धमान की नौ, पूर्व मेदिनीपुर की 16, पश्चिम मेदिनीपुर की 15, झाडग़्राम की चार, पुरुलिया की नौ और बांकुड़ा की 12 सीटें शामिल हैं। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की है। संवेदनशील इलाकों में केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल की भारी तैनाती की गई है। उत्तर बंगाल के आठ, दक्षिण बंगाल के तीन और जंगलमहल अंचल के पांच जिलों में विशेष निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके। पहले चरण में 3.60 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 1.84 करोड़ पुरुष, 1.745 करोड़ महिलाएं और 465 उभयलिंगी मतदाता शामिल हैं। पूरे पश्चिम बंगाल में कुल 6.44 करोड़ मतदाता हैं, जो इस चुनाव को देश के सबसे बड़े लोकतांत्रिक आयोजनों में से एक बनाते हैं। ममता बनाम भाजपा, सीधी राजनीतिक जंग पश्चिम बंगाल में मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच है। तृणमूल कांग्रेस के चुनाव प्रचार का पूरा दारोमदार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कंधों पर रहा। उन्होंने अपने आक्रामक और भावनात्मक भाषणों से समर्थकों को जोडऩे की कोशिश की। इधर भाजपा ने भी इस चुनाव को प्रतिष्ठा का सवाल बनाते हुए पूरी ताकत झोंक दी। प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, शिवराज सिंह चौहान, पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन और विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने ताबड़तोड़ रैलियां कर माहौल को गरमा दिया। अब फैसला जनता के हाथ में प्रचार का शोर भले ही थम गया हो, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होने वाली है। मतदाता अब अपने विवेक से तय करेंगे कि सत्ता किसके हाथ में जाएगी और कौन विपक्ष की भूमिका निभाएगा। लोकतंत्र के इस महापर्व में हर वोट की अहमियत है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि जनता ने किसके वादों पर भरोसा जताया और किसे नकार दिया।

बंगाल में 630 करोड़पति कैंडिडेट, 23% पर क्रिमिनल केस:53% उम्मीदवार ग्रेजुएट भी नहीं, सिर्फ 13% महिलाओं को टिकट; 192 पर महिलाओं के खिलाफ केस
Trending, राजनीति

बंगाल में 630 करोड़पति उम्मीदवार, 23% पर चल रहे क्रिमिनल मामले; केवल 13% टिकट महिलाओं को मिली

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर जारी नवीनतम रिपोर्ट से पता चलता है कि राज्य में 23 प्रतिशत उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक आरोप दर्ज हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) द्वारा किए गए विश्लेषण के अनुसार चुनाव लड़ रहे कुल 2920 उम्मीदवारों में से 630 करोड़पति हैं, जो हर पांचवें उम्मीदवार के लगभग बराबर है। विश्लेषण में यह भी सामने आया है कि सबसे अधिक 208 उम्मीदवार भाजपा के हैं, जिनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज है। इसके अलावा 192 उम्मीदवारों पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के आरोप हैं, जबकि आठ उम्मीदवारों पर रेप का केस दर्ज है। कुल मिलाकर, प्रमुख चार पार्टी—BJP, TMC, कांग्रेस और CPI(M)—के बीच 1074 उम्मीदवार ऐसे हैं जिनमें से 481 पर आपराधिक केस हैं। संपत्ति के मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अधिकांश उम्मीदवार करोड़पति पाए गए हैं, जहां करीब 72% उम्मीदवारों के पास करोड़ों की संपत्ति है। BJP में यह आंकड़ा करीब 49% है। औसतन उम्मीदवारों की संपत्ति 1.28 करोड़ रुपये के आसपास है। मुर्शिदाबाद जिले के जंगीपुर सीट से टीएमसी के जाकिर होसैन 133 करोड़ से अधिक संपत्ति के साथ सबसे अमीर उम्मीदवार हैं। वहीं, बांकुरा जिले से गौतम मिश्रा 105 करोड़ रुपये के साथ दूसरे नंबर पर हैं। शिक्षा के लिहाज से देखें तो लगभग 47% उम्मीदवार ग्रेजुएट या उससे अधिक पढ़े-लिखे हैं, जबकि 48% उम्मीदवार केवल 5वीं से 12वीं तक पढ़े-लिखे हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि शिक्षा के मामले में भी चुनावी मैदान में विविधता मौजूद है। महिला भागीदारी की बात करें तो राज्य में महिलाओं का अनुपात पुरुषों के बराबर होते हुए भी राजनीतिक उम्मीदवारों में महिलाओं की भागीदारी काफी कम है। कुल टिकटों में केवल 13% टिकट महिलाओं को दी गई है। यह स्थिति यह दर्शाती है कि अभी भी महिलाओं को राजनीतिक मंच पर समान प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। उम्र के हिसाब से देखें तो 25 से 40 साल के 29%, 41 से 60 साल के 53%, 61 से 80 साल के 17% उम्मीदवार हैं, जबकि कुछ उम्मीदवार 80 वर्ष से भी अधिक आयु के हैं। राज्य में विधानसभा चुनाव दो चरणों—23 और 29 अप्रैल को—होंगे और परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इस चुनाव में अपराधिक मामलों से ग्रस्त उम्मीदवारों की बड़ी संख्या, करोड़पतियों की गिनती और महिलाओं का कम प्रतिनिधित्व राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

JEE मेन सेशन 2 रिजल्ट घोषित:26 कैंडिडेट्स को मिला 100 पर्सेंटाइल, 5-5 स्टूडेंट्स आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से
राजनीति

JEE मेन सेशन 2 के नतीजे घोषित: 26 कैंडिडेट्स ने 100 पर्सेंटाइल स्कोर किया, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से 5-5 टॉपर्स

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने सोमवार को JEE Main 2026 के दूसरे सेशन के परिणाम घोषित कर दिए हैं। इस बार 26 छात्रों ने 100 पर्सेंटाइल का स्कोर हासिल किया है, जो पिछले साल के 24 स्तर से थोड़ा अधिक है। इस परीक्षा में देशभर के 10 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया था, जिन्होंने 2 से 8 अप्रैल के बीच अपनी परीक्षा पूरी की। सूत्रों के अनुसार 100 पर्सेंटाइल स्कोर करने वाले 26 टॉपर्स में सबसे अधिक – 5-5 छात्र आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से हैं। इसके बाद राजस्थान से 4, दिल्ली से 3, महाराष्ट्र और हरियाणा से 2-2 छात्र शामिल हैं। इसके अतिरिक्त चंडीगढ़, बिहार, तमिलनाडु, ओडिशा और गुजरात से भी एक-एक छात्र ने यह महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। NTA ने स्पष्ट किया है कि 100 पर्सेंटाइल स्कोर प्रतिशत अंक के अनुरूप नहीं होता बल्कि यह एक नॉर्मलाइज्ड स्कोर होता है। इसका उद्देश्य विभिन्न शिफ्टों में परीक्षा देने वाले छात्रों के प्रदर्शन को तुलनात्मक रूप से मापना होता है। यही वजह है कि प्रत्येक उम्मीदवार का स्कोर उनके समूह में उनके प्रदर्शन के आधार पर निर्धारित किया जाता है। पहले सेशन में ही, जो जनवरी माह के 21 से 29 तारीख तक आयोजित किया गया था, 13 लाख से ज्यादा छात्रों ने हिस्सा लिया था। NTA की यह प्रक्रिया देश में इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की गुणवत्ता और निष्पक्षता को बढ़ावा देने में सहायक मानी जाती है। परीक्षा में शामिल छात्रों के लिए रिजल्ट ऑफिशियल वेबसाइट jeemain.nta.nic.in पर उपलब्ध हैं। छात्र अपने एप्लीकेशन नंबर और पासवर्ड का उपयोग कर लॉगिन कर अपने स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। यह रिजल्ट आगे की प्रवेश प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस उपलब्धि के साथ, छात्रों का सपना इंजीनियरिंग के प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिला पाने का और भी मजबूत हुआ है, जहां ये अंक उनके कैरियर की नई शुरुआत का आधार साबित होंगे। एनटीए की यह कोशिश देश के तकनीकी क्षेत्र को और अधिक प्रतिस्पर्धी व सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

MP में 31% महिला कलेक्टर, दक्षिणी राज्यों में 39%:प्रशासन में भी महिलाओं को बड़ी जिम्मेदारियां देने में राज्य पीछे
Trending, राजनीति

मध्यप्रदेश में 31% महिला कलेक्टर, दक्षिणी राज्यों में 39%: प्रशासन में महिलाओं को बड़ी जिम्मेदारियां देने में राज्य पिछड़े

देश में महिलाओं को 33% आरक्षण का कानून लागू होने का इंतजार लंबा चल रहा है। हालांकि प्रशासनिक ढांचे में महिलाओं की भूमिका का जायजा लें तो कई राज्यों में उनकी भागीदारी अपेक्षाकृत कम दिख रही है। प्रदेश अनुसार देखें तो दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में महिला कलेक्टरों की हिस्सेदारी 35 से 39 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जबकि हिंदी पट्टी के राज्यों में यह आंकड़ा कहीं कम है। मध्यप्रदेश 55 जिलों में 17 महिला कलेक्टरों के साथ लगभग 31% महिला प्रतिनिधित्व के साथ हिंदी पट्टी का अकेला ऐसा बड़ा राज्य है, जहां महिलाएं प्रशासन में बढ़-चढ़कर भाग ले रही हैं। दूसरी ओर, छोटा राज्य सिक्किम 33% महिला कलेक्टरों के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियों में महिलाओं की भागीदारी का उदाहरण प्रस्तुत करता है। दक्षिण भारत के राज्यों में तेलंगाना में महिला कलेक्टरों का हिस्सा 39% तक पहुंच चुका है, जो पूरे देश में सबसे अधिक है। तमिलनाडु में यह आंकड़ा 38% है जबकि केरल में 36% तक पहुंचा है। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में भी क्रमशः 35% और 32% महिला कलेक्टर कार्यरत हैं। इस तुलना में हिंदी पट्टी के अन्य बड़े राज्य, जैसे उत्तर प्रदेश और झारखंड, काफी पीछे हैं जहां महिला कलेक्टरों का प्रतिशत क्रमशः 16% और 16% ही है। कुछ अन्य राज्यों के आंकड़ों की बात करें तो बिहार में 18%, हरियाणा में 18%, गुजरात में भी 18% और पश्चिम बंगाल में लगभग 26% महिला कलेक्टर हैं। वहीं, ओडिशा में यह आंकड़ा केवल 8% तक सीमित है, जो अन्य राज्यों के मुकाबले बेहद कम है। इस प्रकार देखा जाए तो प्रशासनिक जिम्मेदारी में महिलाओं को समान अवसर देने में राज्यों के बीच काफी अंतर है। विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं को प्रशासनिक दायित्वों में अधिक अवसर देना राज्य के संतुलित विकास के लिए आवश्यक है। महिला अधिकारियों की भागीदारी से निर्णय लेने की प्रक्रिया में विविधता आती है, जिससे नीतियों में महिलाओं से जुड़े मुद्दों को पहले से बेहतर तरीके से ध्यान में रखा जा सकता है। वहीं, महिला आरक्षण विधेयक के परिप्रेक्ष्य में भी राज्यों की भूमिका महत्वपूर्ण है। विपक्ष की ओर से विधेयक में विलंब और विरोध के कारण इस पर बहस जारी है, जिससे केवल महिला आरक्षण बिल नहीं, बल्कि परिसीमन विधेयक को लेकर भी राजनीतिक उठापटक बनी हुई है। इस संदर्भ में यह जरूरी है कि राज्य प्रशासनिक संरचना में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने के लिए नीतिगत सुधार किए जाएं। महिलाओं को निर्णायक पदों पर लाने से न केवल प्रशासनिक प्रणाली में मजबूती आएगी, बल्कि समाज में लैंगिक समानता के प्रतीक के रूप में उनका स्थान भी सुनिश्चित होगा। अतः महिलाओं को प्रमुख प्रशासनिक पदों पर जगह देने में राज्य अब भी पीछे हैं। मध्यप्रदेश जैसे कुछ राज्यों ने निश्चित तौर पर यह भूमिका निभाई है, लेकिन पूरे देश में समानता लाने और महिलाओं को सरकारी पदों पर सुनिश्चित भूमिका देने के लिए गंभीर प्रयासों की आवश्यकता है।

पढ़ाई-जॉब के लिए रूस गए,फौजी बनाकर युद्ध में झोंका:रूस-यूक्रेन युद्ध, भारत के 13 से ज्यादा युवाओं की मौत
राजनीति, राष्ट्रीय

पढ़ाई और नौकरी के लिए रूस गए युवाओं को फौजी बना युद्ध में भेजा: रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत के 13 से अधिक युवाओं की मौत

हरियाणा के रेवाड़ी जिले के युवा अंशु पढ़ाई के लिए रूस गया था, लेकिन वहां उसे जबरन सैनिक बनाकर यूक्रेन युद्ध में भेज दिया गया। लगभग छह महीने बाद, 17 अप्रैल को उसका शव घर पहुंचा, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। यह केवल अंशु का मामला नहीं है, बल्कि हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के अनेक परिवार इसी तरह के दर्द का सामना कर रहे हैं। इन राज्यों के कुल 13 से अधिक युवाओं की मृत्यु हो चुकी है और सैकड़ों युवा अभी भी लापता हैं। दैनिक भास्कर ने इन परिवारों से विस्तृत बातचीत की, जिसमें पता चला कि एजेंटों ने युवाओं को स्टडी, वर्क या टूरिस्ट वीजा के बहाने रूस भेजा। वहां पहुंचकर उन्हें पैसों के लालच या भय दिखाकर जबरदस्ती आर्मी में भर्ती करवा लिया गया और मात्र 10-15 दिनों की ट्रेनिंग के बाद युद्ध की फ्रंट लाइन पर भेज दिया गया। वर्तमान में कई युवाओं के शव रूसी झंडे में लिपटे उनके घर लौट रहे हैं, जबकि कुछ का कोई पता नहीं चल पा रहा। इस दुखद घटना से प्रभावित परिवारों में कुछ के नाम इस प्रकार हैं: हरियाणा से विकास और अनुज (करनाल), अंशु (रेवाड़ी), अंकित (फतेहाबाद), रवि, गीतिक शर्मा, कर्मचंद (कैथल), सोनू (हिसार), अंकित (सोनीपत); पंजाब से समरजीत (लुधियाना) और मनदीप (जालंधर); राजस्थान से अजय (बीकानेर); तथा जम्मू-कश्मीर से सचिन और खाऊर पालनवाला (जम्मू)। इस पूरे मामले में 4 राज्यों के 26 परिवारों ने संयुक्त रूप से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका की सुनवाई 24 अप्रैल को निर्धारित है। रोहतक के श्रीभगवान और हिसार के विकास ने बताया कि परिवारों से संपर्क कर इन्हें संयुक्त रूप से आवाज बुलंद करने की प्रेरणा मिली है। याचिका में मांग की गई है कि जिन युवाओं को जबरन युद्ध में भेजा गया है, उनकी स्थिति स्पष्ट की जाए, मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए तथा झांसेबाज एजेंटों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। यह घटनाक्रम देश भर में चिंता का विषय बन गया है और युवाओं के भविष्य एवं उनके परिवारों की बेहतरी के लिए त्वरित एवं ठोस कदम उठाने की जरूरत है। सरकार और न्यायपालिका से उम्मीद की जा रही है कि वे इस मामले को संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ देखेंगे ताकि ऐसे दुर्घटनाओं को दोबारा न होने दिया जा सके।

निहंग सिंहों का अनूठा संकल्प:युद्ध कला में निपुण जत्थेदार बिना कीटनाशक खेती कर रहे, ताकि लंगर पवित्र हो
राजनीति

निहंग सिंहों का अनोखा संकल्प: युद्ध कला में निपुण जत्थेदार बिना कीटनाशक खेती कर लंगर को पवित्र बना रहे

निहंग सिंहों का अनूठा प्रयास: बिना कीटनाशक के 3000 एकड़ में ऑर्गेनिक खेती पंजाब युद्ध कला के माहिर निहंग सिंह अपने अनोखे संकल्प के तहत पर्यावरण और धार्मिक पवित्रता दोनों को सहेजने का काम कर रहे हैं। वे बिना किसी कीटनाशकों का प्रयोग किए, 3000 एकड़ जमीन पर ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं, ताकि गुरुद्वारा साहिब के लंगर के प्रसाद हर प्रकार से शुद्ध और पवित्र बने रहें। यह पहल शिरोमणि पंथ अकाली श्री मिसल शहीदां तरनादल बाबा बकाला साहिब के मुखी जत्थेदार बाबा जोगा सिंह व संत बाबा गुरदेव सिंह जी शहीदी बाग श्री आनंदपुर साहिब के निर्देशानुसार दल द्वारा संचालित की जा रही है। निहंगों द्वारा अपनाई गई खेती की तकनीक काफी अनूठी है। वे सबसे पहले ढैंचा जैसी फसलें खेत में उगाते हैं, जो मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी को पूरा करती हैं। इसके बाद सड़े हुए गोबर को मिट्टी में मिलाकर उसे उपजाऊ बनाया जाता है। जत्थेदार बाबा जोगा सिंह और बाबा नोध सिंह समाध के प्रबंधन में यह क्रम जारी है। बाबा परमिंदरबीर सिंह के अनुसार, जत्थेदार भगवान सिंह गेहूं की क्वालिटी को सिर्फ बरकरार ही नहीं रख रहे, बल्कि उसे बेहतर भी बना रहे हैं। गेहूं की बुवाई के बाद 25-30 दिन तक हाथों से या छोटे उपकरणों से निराई-गुड़ाई की जाती है। जैसे ही पौधे निकलते हैं, उनकी जरूरत के अनुरूप स्वाह या नीम के घोल से छिड़काव किया जाता है, ताकि फसल की रक्षा हो सके। यदि फसल में कीड़े व अन्य कीट लगते हैं तो 10 प्रकार की कड़वी पत्तियों से बना अर्क छिड़का जाता है, जो किसानों के लिए प्राकृतिक और प्रभावी सुरक्षा का जरिया है। यह भी बताया गया कि बारिश न होने पर फसल को 4-5 बार पानी दिया जाता है जिससे उसकी अच्छी पैदावार सुनिश्चित हो सके। निहंग सिंह गेहूं के अतिरिक्त लंगर में प्रयुक्त सभी खाद्य पदार्थ जैसे गन्ना, मूंग, गोभी, आलू, प्याज, सरसों, मक्का, जौ, तेल और तिल जैसी फसलों की भी उन्नत ऑर्गेनिक खेती करते हैं। यह सारी उपज सीधे लंगर में उपयोग की जाती है और इसे बाहर बाजार में नहीं बेचा जाता। बिना कीटनाशक के फसल बचाना चुनौतीपूर्ण है लेकिन निहंग सिंह ऐसी कठिनाइयों का मुकाबला बड़ी प्रतिबद्धता और समर्पण से कर रहे हैं। कभी-कभी स्वाह को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ढोना पड़ता है, क्योंकि हर खेत की जरूरत अलग-अलग होती है। स्वाह, जो कि रसोई से निकलने वाला प्राकृतिक पदार्थ है, को बिल्कुल व्यर्थ नहीं जाने दिया जाता। इसके अलावा, बड़ी संख्या में गोशालाएं भी चलायी जा रही हैं जहां से नियमित रूप से गोबर प्राप्त होता है। यह पहल न केवल धार्मिक भावनाओं को सशक्त कर रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक मिसाल कायम कर रही है। निहंग सिंह अपनी पारंपरिक युद्ध कला की महारत के साथ-साथ कृषि के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। उनकी यह सेवा गुरु की श्रद्धा के साथ-साथ प्रकृति के प्रति उनकी जिम्मेदारी को दर्शाती है। इस प्रकार, निहंग सिंहों का यह अनूठा प्रयोग आधुनिक कृषि पद्धतियों और पारंपरिक संस्कारों का सुंदर संगम है, जो आने वाले समय में अन्य धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।

Trending, राजनीति, राज्य-शहर

602 वें स्थापना दिवस पर सूना रहा सिरोही, प्रशासन की बेरुखी से आहत हुए शहरवासी

 इतिहास का सम्मान होना चाहिए था, वहां पसरी रही खामोशी सिरोही। सिरोही के 602वें स्थापना दिवस जैसे गौरवशाली, पावन और ऐतिहासिक अवसर पर इस बार प्रशासनिक स्तर पर कोई विशेष आयोजन नहीं होना शहरवासियों के लिए गहरी निराशा का कारण बना। जिस दिन पूरे नगर को अपनी समृद्ध विरासत, संस्कृति और इतिहास का उत्सव मनाते हुए एकजुट होना चाहिए था, उसी दिन जिम्मेदार तंत्र की चुप्पी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। स्थापना दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि शहर की पहचान, उसके गौरवशाली अतीत और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक होता है। ऐसे महत्वपूर्ण अवसर पर प्रशासन की निष्क्रियता ने यह संदेश दिया कि शायद अब परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के प्रति संवेदनशीलता कम होती जा रही है। शहर के बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, हर वर्ग में इस बात को लेकर नाराजगी और मायूसी साफ तौर पर देखी गई। चौधरी लाइन के नागरिकों ने निभाई परंपरा जब प्रशासनिक तंत्र मौन रहा, तब सिरोही की जागरूक जनता ने अपनी जिम्मेदारी निभाई। चौधरी लाइन क्षेत्र के परिवारों, व्यापारियों एवं आसपास के नागरिकों ने इस ऐतिहासिक दिन को यूं ही गुजरने नहीं दिया। शाम को शीशाजी मंदिर प्रांगण में एकत्रित होकर उन्होंने आरती का आयोजन किया और शहर की सुख-समृद्धि, शांति और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। यह आयोजन इस बात का सशक्त उदाहरण बना कि सिरोही की जनता आज भी अपने संस्कारों, परंपराओं और इतिहास से गहराई से जुड़ी हुई है। लोगों ने कहा कि चाहे प्रशासन साथ दे या न दे, लेकिन शहर की अस्मिता और परंपरा को जीवित रखना हर नागरिक का कर्तव्य है। यही कारण है कि सीमित संसाधनों के बावजूद नागरिकों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस आयोजन को सफल बनाया। दो वर्ष पहले था उत्साह, अब उदासीनता? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दो वर्ष पूर्व जब संयम विधायक थे, तब सिरोही स्थापना दिवस बड़े उत्साह, उल्लास और गरिमा के साथ मनाया जाता था। उस समय प्रशासन और जनप्रतिनिधि दोनों मिलकर इस दिन को यादगार बनाते थे। विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, सामाजिक आयोजन और शहर की विरासत को प्रदर्शित करने वाली गतिविधियां आयोजित की जाती थीं, जिससे लोगों में गर्व और उत्साह का माहौल बनता था। लेकिन पिछले दो वर्षों से स्थिति पूरी तरह बदलती नजर आ रही है। अब यह गौरवमयी दिवस उपेक्षा का शिकार होता दिख रहा है। न तो प्रशासन की ओर से कोई पहल दिखाई देती है और न ही जनप्रतिनिधियों की सक्रियता नजर आती है। इस बदलाव ने शहरवासियों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर उनकी भावनाओं और शहर की परंपराओं के प्रति जिम्मेदार लोगों की संवेदनाएं कहां खो गई हैं? आस्था और इतिहास का केंद्र शीशाजी मंदिर सिरोही नगर की स्थापना के इतिहास में शीशाजी मंदिर का विशेष महत्व है। मान्यता है कि जब सिरोही नगर की स्थापना का संकल्प लिया गया था, तब सर्वप्रथम इसी पवित्र मंदिर की स्थापना की गई थी। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सिरोही की आस्था, संस्कृति, समृद्ध परंपरा और गौरवशाली इतिहास का मूल आधार एवं प्रेरणास्रोत है। स्थापना दिवस जैसे अवसर पर इस मंदिर में आयोजन होना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह शहर की जड़ों से जुडऩे और अपनी पहचान को सहेजने का भी माध्यम है। शाम 7.30 बजे हुई आरती, गूंजे श्रद्धा के स्वर स्थापना दिवस के अवसर पर शाम साढे सात बजे श्री शीशाजी मंदिर, चौधरी लाइन, सदर बाजार में भव्य आरती का आयोजन किया गया। आरती के दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। दीपों की रोशनी, मंत्रोच्चार और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को अत्यंत भावनात्मक और प्रेरणादायक बना दिया। शहरवासियों ने एक स्वर में सिरोही की सुख-शांति, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की। यह दृश्य इस बात का प्रतीक था कि चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों, लेकिन सिरोही की जनता अपने शहर के प्रति प्रेम और समर्पण में कभी कमी नहीं आने देगी। इनकी रही मौजूदगी इस आयोजन में क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। वरिष्ठजनों में किशोर चौधरी, जयंतीलाल , व्यापारी वर्ग से राजू भाई, नितेश उर्फ लाला , जय, विक्रम हरण, निरंजन भाई सहित क्षेत्र की महिलाएं एवं अनेक नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर न केवल आरती में भाग लिया, बल्कि शहर के विकास और समृद्धि के लिए सामूहिक संकल्प भी लिया।    

Shopping Cart
Scroll to Top