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सबरीमाला केस- सुप्रीम कोर्ट में 7 दिन की सुनवाई:कल पूछा था- जिसे भगवान ने ही बनाया, उसके छूने से ईश्वर अपवित्र कैसे हो सकता है
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सबरीमाला केस: सुप्रीम कोर्ट में 7 दिन की सुनवाई, पूछा गया- जिसे भगवान ने बनाया, उसके छूने से देवता कैसे हो सकते हैं अपवित्र

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की प्रवेश पर चल रही निर्णायक सुनवाई बुधवार से शुरू हो गई है। यह सुनवाई कुल सात दिनों तक चलेगी, जिसमें धार्मिक आस्था और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन साधने की कोशिश की जाएगी। पिछले दिनों हुए सत्रों में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यदि कोई राज्य सामाजिक सुधार या जनहित के नाम पर धार्मिक प्रथाओं पर रोक लगाता है, तो कोर्ट उसका संज्ञान ले सकता है। केरल हाईकोर्ट ने 1991 में सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगा दी थी। इसके बाद 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रतिबंध को हटा दिया था, जिससे बहस और पुनर्विचार याचिकाएं शुरू हो गईं। माहौल इतना संवेदनशील है कि मंदिर प्रबंधन ने भी महिलाओं की एंट्री का कड़ा विरोध किया है। सुनवाई के प्रमुख बिंदु और घटनाक्रम 7 अप्रैल: केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के फैसले का विरोध जताया और धार्मिक परंपराओं के सम्मान की बात कही। 8 अप्रैल: केंद्र की दलीलें सुनते हुए कोर्ट ने पूछा कि जिन भक्तों का मंदिर में जाना नहीं है, वे धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे सकते हैं। 9 अप्रैल: कोर्ट ने कहा कि मंदिर में महिलाओं की प्रवेश रोकने से समाज का विभाजन बढ़ सकता है। 15 अप्रैल: सबरीमाला मैनेजमेंट ने तर्क दिया कि यह कोई रेस्टोरेंट नहीं है, बल्कि ब्रह्मचारी देवता का मंदिर है। 17 अप्रैल: सुप्रीम कोर्ट ने संविधान की सर्वोच्चता को रेखांकित करते हुए कहा कि निजी धार्मिक मान्यताओं से ऊपर उठकर फैसला लेना जरूरी है। 21 अप्रैल: कोर्ट ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया कि किसी को छूने से देवता अप्रशुद्ध कैसे हो सकते हैं? यह सुनवाई केवल सबरीमाला मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े 66 अन्य धार्मिक आस्था संबंधी मामलों को भी शामिल किया गया है। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ इस सब पर न्यायिक विवेचना कर रही है। फैसला जल्द आ सकता है या कोर्ट इसे रिजर्व भी रख सकता है। देश भर में धार्मिक मूल्यों और सामाजिक समानता के बीच संतुलन बनाना सुप्रीम कोर्ट के सामने बड़ी चुनौती है। इस मामले की गंभीरता और सुनवाई के चरण पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यह धार्मिक आस्था, संवैधानिक अधिकार और सामाजिक न्याय के बीच एक अहम कदम साबित होगा। सबरीमाला मामले से जुड़ी ताजा खबरों और हाईलाइट्स के लिए सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर विस्तृत अपडेट्स जारी रहेंगे।

‘Awarapan’ 2: Emraan Hashmi-Disha Patani film gets a release date
मनोरंजन

‘अवरापन 2’: इमरान हाशमी और दिशा की फिल्म की रिलीज़ डेट घोषित

नई दिल्ली: बॉलीवुड की लोकप्रिय रोमांटिक ड्रामा फिल्म ‘अवरापन’ के सफल सफर के बाद, निर्देशक नितिन कक्कड़ द्वारा निर्देशित ‘अवरापन 2’ जल्द ही रिलीज़ होने जा रही है। इस फिल्म का निर्माण विश्वसनीय निर्माता विषेश भट्ट कर रहे हैं, जो फिल्म जगत में अपने प्रभावशाली कार्यों के लिए जाने जाते हैं। 2007 में रिलीज़ हुई पहली ‘अवरापन’ ने दर्शकों का दिल जीत लिया था और अपनी कहानी, अभिनय और संगीत के लिए खास पहचान बनाई। अब इस फिल्म का सीक्वल, जो कि एक नयी कहानी के साथ प्रस्तुत किया जाएगा, दर्शकों में उत्साह का माहौल बना रहा है। निर्देशक नितिन कक्कड़ ने इस परियोजना पर काम करते हुए कहा कि इस बार कहानी और भी संवेदनशील और प्रभावशाली होगी। उन्होंने बताया कि फिल्म में इमरान हाशमी और दिशा पटानी मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे, जिनके अभिनय की प्रतीक्षा फैन्स को काफी दिनों से थी। विषेश भट्ट के अनुसार, ‘अवरापन 2’ एक कहानी है जो प्रेम और जज्बात की गहराइयों को छूती है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि पहली फिल्म की सफलता का स्तर इस बार भी कायम रहेगा। प्रोडक्शन टीम ने फिल्म की रिलीज़ डेट का भी ऐलान कर दिया है, जिसके मुताबिक ‘अवरापन 2’ आगामी महीनों में सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है। यह घोषणा फिल्म प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है, जो लंबे समय से इस सीक्वल का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। फैंस इस बात को लेकर उत्साहित हैं कि नई कहानी में कैसा ट्विस्ट आएगा और इमरान हाशमी-दिशा पटानी की जोड़ी कितनी सिनेमाई जादू दिखाएगी। साथ ही, संगीत और दृश्य प्रभावों को लेकर भी उम्मीदें बहुत अधिक हैं। अंततः, ‘अवरापन 2’ बॉलीवुड की रोमांटिक फिल्मों में एक नया अध्याय जोड़ने वाला है। फिल्म की तैयारी जोरों पर है और निर्माता, निर्देशक तथा कलाकार मिलकर इसे यादगार बनाने में जुटे हैं। जल्द ही रिलीज़ डेट की घोषणा के बाद इसे व्यापक रूप से प्रचारित किया जाएगा। इस नई पेशकश के साथ, दर्शकों को एक बार फिर से प्रेम की सजीव कहानी देखने को मिलेगी जो दिल को छू जाती है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि 2024 के अंत तक ‘अवरापन 2’ बॉलीवुड में रोमांस के फलसफे को फिर से परिभाषित करेगा।

New Zealand and Bangladesh brace for Chattogram batting surge
खेल जगत

न्यूजीलैंड और बांग्लादेश तैयार हैं चटगांव में बल्लेबाजी तूफान के लिए

चटगांव। भारत और बांग्लादेश के बीच जारी वनडे श्रृंखला का निर्णायक मैच अब चटगांव में खेला जाएगा, जहां खिलाड़ियों को एक बिल्कुल अलग तरह की चुनौती का सामना करना होगा। पहले दो वनडे मैच स्पिनरों के अनुकूल पिच पर खेले गए, जिससे गेंदबाजों को काफी मदद मिली। लेकिन अब निर्णायक मैच एक सपाट पिच पर खेला जाएगा, जो बल्लेबाजों के लिए बेहतरीन अवसर पेश करेगा। पिछले दोनों मैचों में स्पिनरों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे मैच काफी रोमांचक बने। दोनों टीमों के गेंदबाजों ने इसके बेहतर उपयोग के लिए रणनीति बनाई और कई अहम विकेट लिए। हालांकि, अब स्थिति में बदलाव आने वाला है, और बल्लेबाजों को अपनी शक्ति दिखाने का मौका मिलेगा। चटगांव की पिच सामान्यतः बल्लेबाजी के लिए अनुकूल मानी जाती है। हालांकि मौसम की स्थिति और पिच की देखरेख के अनुसार इसके स्वरूप में कुछ परिवर्तन हो सकता है, पर मैच के दिन की ताजा स्थिति बल्लेबाजों के लिए मौके पैदा करेगी। इस प्रकार दोनों टीमें एक नया दृष्टिकोण अपनाएंगी। न्यूजीलैंड और बांग्लादेश दोनों टीमों के बल्लेबाज इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहेंगे। चटगांव में फ्लैट पिच पर बड़े स्कोर बनाने का मौका मिलना बल्लेबाजों के आत्मविश्वास को बढ़ाएगा। इस पिच पर बेहतर स्ट्रोक प्ले और उच्च रनर बनाना संभव होगा। दूसरी ओर गेंदबाजों को भी अपनी रणनीतियों में बदलाव करना होगा। स्पिन पर निर्भर गेंदबाजी के बजाय, तेज गेंदबाजों को भी पिच का सही तरीके से फायदा उठाना होगा। स्लो ऑफ स्पिन के मुकाबले स्विंग और गति से विकेट निकालने की चुनौती उनके सामने होगी। यह निर्णायक मुकाबला दोनों टीमों की आगामी योजना और मौजूदा फॉर्म की परीक्षा होगा। चटगांव की सपाट पिच बल्लेबाजों का मनोबल बढ़ाएगी, लेकिन गेंदबाजों के लिए चुनौती भी बढ़ाएगी। दर्शक इस मैच में जबरदस्त बल्लेबाजी प्रदर्शन की उम्मीद लगाए बैठे हैं। संक्षेप में, ये मैच वनडे श्रृंखला के लिए निर्णायक साबित होगा और चटगांव की पिच पर खेल का स्वरूप कायापलट हो सकता है। दोनों टीमों ने इसे लेकर अच्छी तैयारी की है और मुकाबला बेहद प्रतिस्पर्धात्मक होने की पूरी संभावना है। यह मैच क्रिकेट प्रेमियों के लिए यादगार साबित हो सकता है।

‘Project Hail Mary’ puppeteer James Ortiz eligible for Best Supporting Actor at Oscars
मनोरंजन

ऑस्कर में ‘प्रोजेक्ट हेल मेरी’ के पपेटियर जेम्स ऑर्टिज़ बने बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के पात्र

हाल ही में नाटकीय फिल्मों और टेलीविजन इंडस्ट्री में पपेटियरों का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। इसी कड़ी में, ‘प्रोजेक्ट हेल मेरी’ फिल्म के पपेटियर जेम्स ऑर्टिज़ को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के लिए ऑस्कर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है। उनकी यह पात्रता न केवल उनके कौशल को मान्यता देती है, बल्कि इस क्षेत्र में पपेटियरों के लिए एक नए युग की शुरुआत भी साबित हो सकती है। जेम्स ऑर्टिज़ की यह पात्रता केवल ऑस्कर तक सीमित नहीं है। ऑर्टिज़ अमेरिकी एक्टर्स गिल्ड (SAG) अवॉर्ड्स की एक्टिंग कैटेगरी में भी दावेदारी करने के लिए पात्र हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि पपेटियर SAG-AFTRA के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं, जो कि एक्टर्स और अन्य कलाकारों के संयुक्त गिल्ड का हिस्सा है। यह फैसले सिनेमाई और टेलीविजन इंडस्ट्री में पपेटियर की भूमिका को सम्मानित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। ‘प्रोजेक्ट हेल मेरी’ जैसी फिल्मों में पपेटियर की भूमिका नाटकीय प्रभाव को बढ़انے में काफी महत्वपूर्ण होती है। जेम्स ऑर्टिज़ ने इस फिल्म में अपनी अद्वितीय प्रतिभा का परिचय देते हुए इस क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी यह पात्रता पपेटियरों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी और आने वाले वर्षों में अधिक कलाकारों को इस क्षेत्र में प्रोत्साहित करेगी। फिल्म उद्योग में पपेटियरों की मान्यता बढ़ने से न केवल उनकी मेहनत और कला को सराहा जाएगा, बल्कि इसके साथ ही इस क्षेत्र के लिए नए अवसर भी सृजित होंगे। SAG-AFTRA की इस पहल से पपेटियरों को भी उतना ही सम्मान और अवसर मिल पाएगा जितना कि अन्य कलाकारों को प्राप्त होता है। जेम्स ऑर्टिज़ के इस उल्लेखनीय प्रदर्शन और उनके लिए बनी पात्रताओं से यह स्पष्ट होता है कि पपेटियर भी एक कलाकार के रूप में सक्रिय रूप से फिल्मांकन प्रक्रिया में योगदान दे सकते हैं। इस प्रकार, आने वाले समय में हमें इस क्षेत्र के और कलाकारों से प्रेरणादायी प्रस्तुतियों की उम्मीद करनी चाहिए। ‘प्रोजेक्ट हेल मेरी’ की सफलता और जेम्स ऑर्टिज़ की पहुंच इन पुरस्कारों तक इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि कला के हर रूप का समान सम्मान होना चाहिए। यह फिल्म उद्योग में विविधता और समावेशन की भावना को भी प्रबल करता है जिससे कि सभी कलाकारों को बराबरी का अवसर मिल सके।

'Probably not at her best as of now' - Deepti's slump adds to India's bowling worries
खेल जगत

वर्तमान में शायद सर्वश्रेष्ठ नहीं – दीप्ति के फॉर्म में गिरावट से भारत की गेंदबाजी चिंताएँ बढ़ीं

हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दो मैचों में भारत के गेंदबाजों को सफलता नहीं मिल पाई है। इस संघर्षपूर्ण दौर में भारत की गेंदबाजी इकाई विश्वसनीय प्रदर्शन प्रदान करने से दूर दिख रही है। गेंदबाजी कोच सॉलवी ने इस मामले में संकेत दिया है कि यह चुनौती टीम के लिए एक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके तहत सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी आक्रमण की खोज की जा रही है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले गए दोनों मुकाबलों में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को विकेट लेने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। मैच के दौरान हमारे गेंदबाजों ने विपक्षी बल्लेबाजों को काबू में रखने में कमी दिखाई, जिससे टीम को मैच गंवाना पड़ा। इस स्थिति ने टीम मैनेजमेंट के साथ-साथ फैंस के बीच चिंता को बढ़ावा दिया है। गेंदबाजी कोच सॉलवी ने संवाददाताओं से कहा कि “यह सारी प्रक्रिया स्किल्स और पैफॉर्मेंस को बेहतर बनाने का हिस्सा है। हर टीम को अपने सबसे मजबूत गेंदबाजी संयोजन को खोजने के लिए समय लगता है। हमें उन गेंदबाजों की ताकत और कमजोरियों को समझकर सही संयोजन तलाश करना होगा, ताकि आने वाले मैचों में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।” सॉलवी ने आगे कहा कि गेंदबाजी में असफलता का सामना करना कोई दुर्भाग्य नहीं, बल्कि एक सीखने का अवसर है, जिससे टीम अपना डिफेंसिव और अटैकिंग दोनों पक्षों को संतुलित कर सके। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अनुभवी और युवा गेंदबाजों के मिश्रण से भारत भविष्य में एक प्रभावी गेंदबाजी आक्रमण तैयार कर सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि भारत के लिए इस समय गेंदबाजी आक्रमण के सुधार पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। अगर इस प्रक्रिया को सकारात्मक रूप में लिया जाए तो आने वाले मैचों में अच्छी बल्लेबाजी के साथ मजबूत गेंदबाजी टीम को जीत के करीब पहुंचा सकती है। अग्रिम तैयारी, अनुभव और रणनीति निर्माण कोचिंग स्टाफ के फोकस में हैं ताकि भारतीय टीम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सके। गेंदबाजी विभाग की यह कमी भारत के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है, लेकिन सही दिशा और समय के साथ स्थिति में सुधार की उम्मीद है।

George Kutty, a beloved figure in Bengaluru’s film society movement, no more
मनोरंजन

बेंगलुरु के फिल्म सोसाइटी आंदोलन के प्रिय व्यक्तित्व जॉर्ज कुट्टी का निधन

बेंगलुरु: जॉर्ज कुट्टी, जो बेंगलुरु फिल्म सोसाइटी के सफल संस्थापक और दीप फोकस मैगज़ीन के संपादक के रूप में जाने जाते थे, अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनका निधन इस शहर की कला और फिल्म सिनेमा जगत के लिए एक बड़ी क्षति साबित हुआ है। जॉर्ज कुट्टी ने बेंगलुरु फिल्म सोसाइटी की स्थापना कर समाज में महत्वपूर्ण विषयों को उठाने वाली फिल्मों को दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया। उनकी दूरदर्शिता और समर्पण ने इस सोसाइटी को एक सक्रिय और विचारशील मंच बनाया, जहां दर्शक सामाजिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक मुद्दों पर गहन विमर्श कर सकें। दीप फोकस मैगज़ीन के संपादक के रूप में भी जॉर्ज कुट्टी ने फिल्मों की आलोचना और समीक्षा का एक नया स्तर प्रस्तुत किया। उन्होंने घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय महिलाओं, मानवाधिकार, पर्यावरण और राजनैतिक मुद्दों को लेकर कई लेख प्रकाशित किए, जो फिल्म जगत में जागरूकता बढ़ाने में सहायक रहे। कुट्टी का प्रभाव केवल फिल्म सोसाइटी तक सीमित नहीं था, बल्कि वे बेंगलुरु के कई सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी निभाते रहे। उनकी सोच और कार्यशैली ने कई नए फिल्मकारों को प्रेरित किया है और उन्हें अपनी कला को समाज की सेवा में लगाने के लिए प्रोत्साहित किया। फिल्म सोसाइटी के सदस्यों ने उनका स्मरण करते हुए कहा, “जॉर्ज कुट्टी ने हमें फिल्मों के माध्यम से समाज की विविध समस्याओं को समझने का अवसर दिया। उनकी कमी हमेशा महसूस होगी।” जॉर्ज कुट्टी की विरासत उनके द्वारा स्थापित फिल्म सोसाइटी और दीप फोकस मैगज़ीन के माध्यम से लंबे समय तक जीवित रहेगी। वे उन कुछ लोगों में से थे जिन्होंने अपने जुनून और कर्तव्यनिष्ठा से कला को सामाजिक बदलाव का एक सशक्त माध्यम बनाया। इस दुखद समाचार से बेंगलुरु फिल्म और साहित्य जगत में शोक की लहर फैल गई है। उनकी आत्मा की शांति के लिए सभी शुभचिंतक प्रार्थना कर रहे हैं।

गुजरात में फूड पॅाइजनिंग से 200 लोग बीमार:59 को अस्पताल में भर्ती, शादी में आम का जूस पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ी
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आम का जूस बना आफत: गुजरात में फूड पॉयजनिंग से 200 लोग बीमार, 59 अस्पताल में भर्ती

शादी में आम के जूस के बाद तबीयत बिगड़ी गुजरात के दाहोद जिले के अभलोड गांव में सोमवार रात हुई एक शादी समारोह में फूड पॉयजनिंग की घटना हुई, जिससे 200 से अधिक लोग बीमार पड़ गए। इस घटना के बाद 59 लोगों को गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया गया है कि लगभग 400 मेहमान इस शादी में शामिल हुए थे। शादी में डिनर की शुरुआत शाम 8 बजे हुई थी। कई मेहमानों ने बताया कि उन्होंने आम का जूस पीने के बाद अचानक तबीयत खराब महसूस करनी शुरू कर दी। कुछ घंटों के भीतर लोगों को उल्टी, दस्त और तेज पेट दर्द की शिकायत हुई। दाहोद कलेक्टर योगेश निर्गुडे ने बताया कि फूड पॉयजनिंग का प्रमाण तब स्पष्ट हुआ जब 230 लोगों ने उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत की। इसके बाद अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती संख्या ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी। सप्ताह के सोमवार की रात को जुटे इतने बड़े मेहमानों के बीच इतनी भारी संख्या में बीमार होने की घटना ने स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को सतर्क कर दिया। सभी बीमार लोगों को नजदीकी सरकारी और निजी अस्पतालों में तुरंत भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया। डॉक्टर राजीव डामोर ने पुष्टि की है कि अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों की हालत फिलहाल स्थिर है और सब जल्द ही ठीक हो जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ना केवल आम के जूस बल्कि शादी में दिए गए भोजन की भी जांच की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। स्थानीय प्रशासन ने घटना के संबंध में जांच का आदेश दिया है और फूड सेफ्टी नियमों का सख्ती से पालन करने की हिदायत जारी की है। जागरूकता बढ़ाने के लिए भी कदम उठाए जाने की बात कही जा रही है ताकि लोगों की जान को खतरा न हो। यह घटना फूड सेफ्टी और स्वास्थ्य सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करती है। शादी जैसे बड़े आयोजन में भोजन की गुणवत्ता और सफाई का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है ताकि ऐसी अप्रिय घटनाएं न हों। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें घटना स्थल पर सक्रिय हैं और वे जल्द से जल्द घटना की पूरी तहकीकात करने में जुटी हैं। गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए भी स्थानीय प्रशासन पूरी तैयारी कर रहा है। फिलहाल, प्रभावित परिवारों को राहत और अस्पताल में भर्ती मरीजों के इलाज पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही सरकार ने लोगों से जागरूक रहने और संदिग्ध भोजन से बचने का आग्रह किया है। इस तरह के हादसे यह याद दिलाते हैं कि सार्वजनिक आयोजन में भोजन की सुरक्षा के लिए हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए। आम के जूस जैसे लोकप्रिय पेय पदार्थों की सुरक्षा जांच जरूरी हो जाती है ताकि सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।

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चुनावी रण का विराम, अब खामोश गलियों में गूंजेगा लोकतंत्र का स्वर

प्रचार थमा, पर सियासी तापमान बरकरार नई दिल्ली। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए चल रही तेज-तर्रार चुनावी सरगर्मियां आखिरकार मंगलवार शाम पांच बजे थम गईं। एक महीने से अधिक समय तक चली रैलियों, रोड शो, आरोप-प्रत्यारोप और जनसभाओं की गूंज अब अचानक थम चुकी है, लेकिन सियासी माहौल अब भी उतना ही गर्म है। चुनाव आयोग के सख्त नियमों के तहत मतदान से 48 घंटे पहले प्रचार पर पूर्ण विराम लगा दिया गया है। अब मंचों की जगह घर-घर संपर्क का दौर शुरू हो गया है, जहां उम्मीदवार और उनके कार्यकर्ता मतदाताओं से सीधे संवाद स्थापित करने में जुट गए हैं। 23 अप्रेल को लोकतंत्र का पहला बड़ा इम्तिहान तमिलनाडु की सभी 234 सीटों और पश्चिम बंगाल के पहले चरण की 152 सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान होगा। मतदान सुबह सात बजे से शुरू होगा और पूरे दिन लोकतंत्र का यह महापर्व जारी रहेगा। पश्चिम बंगाल में चुनाव दो चरणों में आयोजित हो रहे हैं, जिसमें दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को 142 सीटों पर कराया जाएगा। ऐसे में दोनों राज्यों में राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। तमिलनाडु में इस बार कुल 4,023 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। यहां मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ द्रविड़ मनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेतृत्व वाले गठबंधन और उसके प्रमुख प्रतिद्वंदी अन्नाद्रमुक के बीच माना जा रहा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में जुटी है। सत्तारूढ़ द्रमुक की ओर से मुख्यमंत्री एम के स्टालिन पूरे अभियान के केंद्र में रहे। उन्होंने राज्यभर में ताबड़तोड़ रैलियां कर अपनी सरकार के कामकाज को जनता के सामने रखा। वहीं विपक्ष की कमान एडापट्टी के पलानीस्वामी ने संभाली। उन्होंने द्रमुक सरकार पर कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं को लेकर तीखे हमले किए। इस चुनाव में एक नया और दिलचस्प मोड़ तब आया जब अभिनय की दुनिया से सुपरस्टार सी जोसफ विजय ने राजनीति के अखाड़े में कदम रखा। उनकी पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कजगम’ ने कई सीटों पर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। विजय की लोकप्रियता ने खासकर युवा मतदाताओं के बीच उत्सुकता और रोमांच पैदा किया है, जिससे चुनावी समीकरण और अधिक जटिल हो गए हैं। राष्ट्रीय नेताओं की एंट्री से बढ़ी सियासी धार तमिलनाडु में चुनावी माहौल को धार देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन सहित कई राष्ट्रीय नेताओं ने जमकर प्रचार किया। कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों के नेताओं ने भी मैदान में उतरकर गठबंधन को मजबूती देने की कोशिश की। चुनावी प्रचार के दौरान विपक्षी गठबंधन ने सत्तारूढ़ द्रमुक सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपों को प्रमुख मुद्दा बनाया। वहीं द्रमुक और उसके सहयोगी दलों ने तमिल स्वाभिमान और राज्य के अधिकारों पर कथित अतिक्रमण को लेकर जनता के बीच अपनी बात रखी। अंतिम दौर में महिला आरक्षण का मुद्दा भी जोर-शोर से उभरा, जिसने चुनावी बहस को नया आयाम दिया। लोकतंत्र की असली ताकत मतदाता तमिलनाडु में इस चुनाव में 5.67 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के पात्र हैं। इनमें 2.77 करोड़ पुरुष, 2.89 करोड़ महिलाएं और 7,617 उभयलिंगी मतदाता शामिल हैं। इनके लिए राज्यभर में 75,032 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। चुनाव आयोग ने मतदाता भागीदारी बढ़ाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाए हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग मतदान में हिस्सा लें। पश्चिम बंगाल, सियासी संग्राम का महाभारत पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 16 जिलों की 152 सीटों पर मतदान होगा। इस चरण में कुल 1,478 प्रत्याशी मैदान में हैं, जो अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। पहले चरण में जिन जिलों में मतदान होना है, उनमें मुर्शिदाबाद की 22, कूचबिहार की नौ, जलपाईगुड़ी की सात, अलीपुरद्वार की पांच, कलिंपोंग की एक, दार्जिलिंग की पांच, उत्तर दिनाजपुर की नौ, दक्षिण दिनाजपुर की छह, मालदा की 12, बीरभूम की 11, पश्चिम बर्द्धमान की नौ, पूर्व मेदिनीपुर की 16, पश्चिम मेदिनीपुर की 15, झाडग़्राम की चार, पुरुलिया की नौ और बांकुड़ा की 12 सीटें शामिल हैं। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की है। संवेदनशील इलाकों में केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल की भारी तैनाती की गई है। उत्तर बंगाल के आठ, दक्षिण बंगाल के तीन और जंगलमहल अंचल के पांच जिलों में विशेष निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके। पहले चरण में 3.60 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 1.84 करोड़ पुरुष, 1.745 करोड़ महिलाएं और 465 उभयलिंगी मतदाता शामिल हैं। पूरे पश्चिम बंगाल में कुल 6.44 करोड़ मतदाता हैं, जो इस चुनाव को देश के सबसे बड़े लोकतांत्रिक आयोजनों में से एक बनाते हैं। ममता बनाम भाजपा, सीधी राजनीतिक जंग पश्चिम बंगाल में मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच है। तृणमूल कांग्रेस के चुनाव प्रचार का पूरा दारोमदार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कंधों पर रहा। उन्होंने अपने आक्रामक और भावनात्मक भाषणों से समर्थकों को जोडऩे की कोशिश की। इधर भाजपा ने भी इस चुनाव को प्रतिष्ठा का सवाल बनाते हुए पूरी ताकत झोंक दी। प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, शिवराज सिंह चौहान, पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन और विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने ताबड़तोड़ रैलियां कर माहौल को गरमा दिया। अब फैसला जनता के हाथ में प्रचार का शोर भले ही थम गया हो, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होने वाली है। मतदाता अब अपने विवेक से तय करेंगे कि सत्ता किसके हाथ में जाएगी और कौन विपक्ष की भूमिका निभाएगा। लोकतंत्र के इस महापर्व में हर वोट की अहमियत है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि जनता ने किसके वादों पर भरोसा जताया और किसे नकार दिया।

बंगाल में 630 करोड़पति कैंडिडेट, 23% पर क्रिमिनल केस:53% उम्मीदवार ग्रेजुएट भी नहीं, सिर्फ 13% महिलाओं को टिकट; 192 पर महिलाओं के खिलाफ केस
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बंगाल में 630 करोड़पति उम्मीदवार, 23% पर चल रहे क्रिमिनल मामले; केवल 13% टिकट महिलाओं को मिली

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर जारी नवीनतम रिपोर्ट से पता चलता है कि राज्य में 23 प्रतिशत उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक आरोप दर्ज हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) द्वारा किए गए विश्लेषण के अनुसार चुनाव लड़ रहे कुल 2920 उम्मीदवारों में से 630 करोड़पति हैं, जो हर पांचवें उम्मीदवार के लगभग बराबर है। विश्लेषण में यह भी सामने आया है कि सबसे अधिक 208 उम्मीदवार भाजपा के हैं, जिनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज है। इसके अलावा 192 उम्मीदवारों पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के आरोप हैं, जबकि आठ उम्मीदवारों पर रेप का केस दर्ज है। कुल मिलाकर, प्रमुख चार पार्टी—BJP, TMC, कांग्रेस और CPI(M)—के बीच 1074 उम्मीदवार ऐसे हैं जिनमें से 481 पर आपराधिक केस हैं। संपत्ति के मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अधिकांश उम्मीदवार करोड़पति पाए गए हैं, जहां करीब 72% उम्मीदवारों के पास करोड़ों की संपत्ति है। BJP में यह आंकड़ा करीब 49% है। औसतन उम्मीदवारों की संपत्ति 1.28 करोड़ रुपये के आसपास है। मुर्शिदाबाद जिले के जंगीपुर सीट से टीएमसी के जाकिर होसैन 133 करोड़ से अधिक संपत्ति के साथ सबसे अमीर उम्मीदवार हैं। वहीं, बांकुरा जिले से गौतम मिश्रा 105 करोड़ रुपये के साथ दूसरे नंबर पर हैं। शिक्षा के लिहाज से देखें तो लगभग 47% उम्मीदवार ग्रेजुएट या उससे अधिक पढ़े-लिखे हैं, जबकि 48% उम्मीदवार केवल 5वीं से 12वीं तक पढ़े-लिखे हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि शिक्षा के मामले में भी चुनावी मैदान में विविधता मौजूद है। महिला भागीदारी की बात करें तो राज्य में महिलाओं का अनुपात पुरुषों के बराबर होते हुए भी राजनीतिक उम्मीदवारों में महिलाओं की भागीदारी काफी कम है। कुल टिकटों में केवल 13% टिकट महिलाओं को दी गई है। यह स्थिति यह दर्शाती है कि अभी भी महिलाओं को राजनीतिक मंच पर समान प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। उम्र के हिसाब से देखें तो 25 से 40 साल के 29%, 41 से 60 साल के 53%, 61 से 80 साल के 17% उम्मीदवार हैं, जबकि कुछ उम्मीदवार 80 वर्ष से भी अधिक आयु के हैं। राज्य में विधानसभा चुनाव दो चरणों—23 और 29 अप्रैल को—होंगे और परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इस चुनाव में अपराधिक मामलों से ग्रस्त उम्मीदवारों की बड़ी संख्या, करोड़पतियों की गिनती और महिलाओं का कम प्रतिनिधित्व राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

Gill misses chance to top Orange Cap table, Rabada on the rise on Purple Cap list
खेल जगत

गिल ने ऑरेंज कैप तालिका में शीर्ष पर पहुंचने का मौका गंवाया, रबाडा पर्पल कैप सूची में उभरते हुए

आईपीएल 2026 के ताजा मुकाबले में मुंबई इंडियंस ने गुजरात टाइटंस को सोमवार को एक जबरदस्त प्रदर्शन के साथ हराया। इस जीत के बाद ऑरेंज कैप और पर्पल कैप की तालिकाओं में भी काफी बदलाव देखने को मिला है, जो इस सीजन के खिलाड़ी प्रदर्शन की कहानी बयां कर रहे हैं। ऑरेंज कैप की बात करें तो गिल, जो इस सीजन की बेहतरीन बल्लेबाजों में से एक हैं, को शीर्ष स्थान पर पहुंचने का मौका मिला था, लेकिन मुंबई इंडियंस के डोमिनेशन ने उन्हें इस मौके से वंचित रख दिया। गिल ने अपनी टीम के लिए अच्छी पारियां खेली हैं और वह इस सीजन में निरंतर रन बनाते रहे हैं, लेकिन सोमवार के मुकाबले में उनका संग्रह इस हद तक नहीं बढ़ पाया जिससे वह ऑरेंज कैप तालिका के शीर्ष पर पहुंच सकें। दूसरी ओर पर्पल कैप की सूची में रबाडा ने जोरदार वापसी की है। उनकी तेज गेंदबाजी और महत्वपूर्ण विकेट लेने की कला ने उन्हें रन-गुलाबी सूची में तेजी से ऊपर चढ़ने में मदद की है। मुंबई इंडियंस के खिलाफ रबाडा ने अपनी गेंदबाजी का जादू दिखाया और टीम के लिए महत्वपूर्ण विकेट निकाले, जिससे उनकी टीम को मुकाबला हासिल हुआ। आईपीएल 2026 के इस सीजन में ऐसे कई टूर्नामेंट ने खिलाड़ियों के जुड़ाव और प्रतिस्पर्धा को नया आयाम दिया है, जहाँ खिलाड़ियों की व्यक्तिगत उपलब्धियाँ टीम की सफलता से जुड़ी हुई हैं। गिल और रबाडा दोनों ही खिलाड़ियों ने इस तालिका पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कड़ी मेहनत की है, और आने वाले मैचों में इनकी चोटियों पर चढ़ने की कोशिश जारी रहेगी। समीक्षा करें तो, मुंबई इंडियंस की इस जीत ने उनके समर्थकों को उत्साहित कर दिया है और टीम को आगामी मुकाबलों के लिए आत्मविश्वास प्रदान किया है। वहीं, गुजरात टाइटंस को अपनी रणनीति में बदलाव करने की जरूरत महसूस हो रही है ताकि वे आगामी मैचों में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। आईपीएल 2026 के वर्तमान ऑरेंज कैप तालिका में शीर्ष बल्लेबाजों की सूची में इस समय काफी प्रतिस्पर्धा है, जिसमें गिल, सूर्यकुमार यादव, विराट कोहली जैसे खिलाड़ी शामिल हैं। वहीं पर्पल कैप की सूची में तेज गेंदबाजों की भी कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है, जिसमें रबाडा के साथ-साथ जेपी डुमिनी, मोहम्मद सिराज भी प्रमुख हैं। आगे चलकर यह देखने योग्य होगा कि कौन से खिलाड़ी अपने प्रदर्शन को बरकरार रखते हैं और कौन नए दावेदार के रूप में उभरते हैं। आईपीएल 2026 ने खेल प्रेमियों को इस बार भी कई रोमांचक और मनोरंजक मुकाबले दिए हैं, जो इस सीजन को और भी यादगार बना रहे हैं।

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