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NSA डोभाल बोले- जंग का मकसद दुश्मन का मनोबल तोड़ना, देश की सुरक्षा में जनता की इच्छाशक्ति सबसे जरूरी

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने मंगलवार को राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी (RRU) के पांचवें दीक्षांत समारोह के दौरान महत्वपूर्ण बातें कही। देश की सुरक्षा केवल उसकी सैन्य शक्ति पर निर्भर नहीं करती, बल्कि जनता की इच्छाशक्ति और मनोबल सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति में आयोजित इस समारोह में डोभाल ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा एक जटिल और बहुआयामी विषय है, जिसमें सेना, तकनीक, संसाधन, कूटनीति के साथ मानव शक्ति भी शामिल है।

डोभाल ने कहा, “देश की ताकत आंकते समय सबसे बड़ी गलती यह होती है कि लोगों के मनोबल को नजरअंदाज कर दिया जाता है। युद्ध का मकसद केवल दुश्मन की सैन्य ताकत को हराना नहीं, बल्कि उसके मनोबल को तोड़ना भी है।” उनका स्पष्ट मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना, पुलिस या खुफिया एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह देशवासी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

दीक्षांत समारोह में मानद PhD से नवाजे जाने के पश्चात् डोभाल ने युवाओं को भी यह संदेश दिया कि सुरक्षा के क्षेत्र में कोई ‘सिल्वर मेडल’ नहीं होता। “आप या तो जीतते हैं या हारते हैं। अगर आप जीतते हैं तो इतिहास बनाते हैं, और अगर हारते हैं तो इतिहास बन जाते हैं,” उन्होंने कहा। इस सम्मान को स्वीकार करते हुए डोभाल ने कहा कि यह उनके लिए अत्यंत गर्व और जिम्मेदारी का विषय है।

कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अजीत डोभाल को राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए मानद PhD प्रदान की, जो देश के प्रति उनकी निष्ठा और समर्पण को दर्शाता है।

डोभाल ने आगे कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा किसी एक अंग के बूते की बात नहीं है। एक समृद्ध और सुरक्षित राष्ट्र के लिए तकनीकी उन्नति, संसाधनों का समुचित प्रबंधन, कूटनीति तथा हर नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। यही वजह है कि रक्षा और सुरक्षा केवल सीमाओं तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक, और मानसिक दृढ़ता के स्तर पर भी मजबूत होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी बताया कि देश के युवा सुरक्षा की इस जटिल प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं और उन्हें इसके लिए प्रशिक्षित और जागरूक करना हमारा कर्तव्य है। डोभाल की बातों से यह साफ होता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा एक साझा प्रयास है, जिसमें हर भारतीय का योगदान अनिवार्य है।

डोभाल ने इससे पहले भी तानाशाही और खराब शासन के खतरे पर प्रकाश डाला था। उन्होंने कहा था कि बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल जैसे देशों में राजनीतिक अस्थिरता और खराब प्रशासन का देश कमजोर होने का कारण बनता है। इस संदर्भ में उन्होंने लोकतंत्र की मजबूती को अत्यंत आवश्यक बताया।

राष्ट्रीय सुरक्षा पर डोभाल के विचार और उनके अनुभव देश के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शक सिद्ध हो सकते हैं। उनकी बातों से यह स्पष्ट होता है कि सिर्फ सैन्य शक्ति से नहीं, बल्कि देश की जनता की एकजुटता और मनोबल से ही भारत को सशक्त और सुरक्षित बनाया जा सकता है।

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