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केवल शादी नहीं बल्कि सेवा का संकल्प, रामपुरा में बेटी के विवाह ने जगाई करुणा की अलख

बेटी के विवाह में दिखा गौसेवा का अनूठा संगम खौड़ (पाली)। अक्सर शादियां सिर्फ उत्सव बनकर रह जाती हैं, लेकिन ग्राम पंचायत बडेरावास के गांव रामपुरा में एक विवाह ने इस परंपरा को नई दिशा दे दी। सरपंच लीला चौधरी और अमराराम चौधरी ने अपनी पुत्री के विवाह को सामाजिक सरोकारों से जोड़ते हुए इसे गौसेवा के महाअभियान में बदल दिया। रविवार रात जहां आमतौर पर बंदोली की धूम होती है, वहीं यहां गौ भक्ति संध्या का आयोजन हुआ। रामपुरा खैरवा स्थित प्रभु प्रेमी गौशाला में सजी इस संध्या ने पूरे क्षेत्र को सेवा, संवेदना और संस्कारों के रंग में रंग दिया। प्रसिद्ध गायक ओम मुंडेल और उनकी टीम ने जैसे ही मंच संभाला, वातावरण भक्ति में डूब गया। गौ माता री सेवा सूं मोटो ना कोई धरम जैसे भजनों पर श्रोता देर रात तक झूमते रहे। यह महज सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक ऐसा भावनात्मक जागरण था, जहां हर व्यक्ति ने खुद को गौसेवा से जुड़ा हुआ महसूस किया। यह आयोजन रामपुरा खैरवा स्थित प्रभु प्रेमी गौशाला में हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र में सेवा और संस्कार का संदेश फैलाया। गौ भक्ति संध्या में प्रसिद्ध गायक ओम मुंडेल और उनकी टीम ने गौ माता की महिमा का ऐसा रस घोला कि पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा। गौ माता री सेवा सूं मोटो ना कोई धरम… जैसे भजनों पर श्रोता देर रात तक झूमते रहे। यह केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि गौसेवा के प्रति भावनात्मक जागरण का सजीव दृश्य था, जहां हर व्यक्ति ने खुद को इस पुण्य कार्य से जुड़ा महसूस किया। घोषणाओं की गूंज, गौशाला विकास के लिए उमड़ा सहयोग इस प्रेरणादायक आयोजन में भामाशाहों ने दिल खोलकर सहयोग की घोषणाएं कीं, जिससे गौशाला विकास को नई दिशा मिली। पुनाराम लच्छाराम देवड़ा (कराड़ी, हाल पुणे) ने गौशाला में कार्यालय निर्माण की घोषणा की। अचलाराम नाराराम पंवार (गोदावास) एवं महेंद्रकुमार देवाराम राठौड़ (आंकड़ावास) ने संयुक्त रूप से स्वराज 733 मॉडल ट्रैक्टर भेंट करने का संकल्प लिया। भंवरलाल, खरताराम, रमेश कुमार, पुखराज पुत्र गोमाराम आगलेचा ने लगभग 7 लाख रुपए की लागत से पक्षी घर व चबूतरा बनाने की घोषणा की। रामलाल पुत्र मोतीलाल सेणचा (रामपुरा, हाल गांधीधाम) ने ट्रैक्टर ट्रॉली देने की घोषणा की। कन्याबाई पत्नी वेनाराम मुलेवा एवं भंवर शिवसेना ने चारा कुतर मशीन भेंट करने का संकल्प लिया। सुखीबाई पत्नी दिवंगत लुंबाराम काग ने ट्रैक्टर कल्टीवेटर, तथा भंवरलाल पुत्र मूलाराम पंवार (बाड़सा, पुणे) ने सीड ड्रिल कल्टीवेटर देने की घोषणा की। विद्यादेवी पत्नी खरताराम काग (सोडावास, हाल मुंबई) ने गौ माता हेल्प मशीन भेंट की। डूंगाराम पुत्र हेमाराम वर्पा (गोदावास) ने डिस्क प्लाऊ (दो तवी) देने का संकल्प लिया। नारायणलाल पुत्र पकाराम काग ने गौशाला से जुड़े सभी जेसीबी कार्य अपनी मशीन से निशुल्क करने की घोषणा की। इसके साथ ही विंजाराम भीलवाड़ा, दुर्गाराम सेंणचा, कोलाराम सेंणचा, देवीलाल अड़ाणिया सोनी, लुंबाराम चोयल, पपसा चोयल, मुकेशकुमार आगलेचा, तिलोकराम, डूंगाराम सेंणचा, मांगीलाल आगलेचा, देवाराम केनपुरा, शेराराम सेंणचा, डूंगाराम काग, नारायणलाल मुलेवा मेवाड़, चंपादेवी चौहान, पिंकीदेवी सेंणचा, गुडियाबाई पाली, प्रवीणकुमार नथाराम आगलेचा (रामपुरा) एवं रताराम-रुपाराम देवासी (केनपुरा) सहित अनेक भामाशाहों ने नकद राशि देकर गौशाला को सशक्त बनाने में योगदान दिया। सम्मान और आभार, सेवा ही सबसे बड़ा संस्कार सरपंच लीला चौधरी और अमराराम चौधरी ने सभी भामाशाहों का साफा, शॉल और माला पहनाकर अभिनंदन किया। अमराराम चौधरी ने भावुक शब्दों में कहा किबेटी का विवाह तो केवल एक निमित्त है, हमारा उद्देश्य गौसेवा के इस पुण्य कार्य को आगे बढ़ाना है। जिन दानदाताओं ने सहयोग दिया, हम उनके सदैव आभारी रहेंगे। जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने बढ़ाई गरिमा इस प्रेरणादायक आयोजन में कैबिनेट मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक जोराराम कुमावत, सांसद पीपी चौधरी, पाली प्रधान मोहनीदेवी पुखराज पटेल, अखिल भारतीय सीरवी समाज के महासचिव भंवर चौधरी, सहित आसपास के गांवों के पंच-पटेल और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। एक संदेश जो दिलों में बस गया यह आयोजन सिर्फ एक शादी नहीं, बल्कि समाज को जोडऩे, सेवा को बढ़ावा देने और संस्कारों को जीवित रखने का उदाहरण बन गया। रामपुरा की इस पहल ने साबित कर दिया कि जब खुशियों में सेवा का रंग घुल जाता है, तो वह अवसर प्रेरणा की मिसाल बन जाता है।

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जांच के नाम पर जांच, दो टेस्ट में करोड़ों का स्वास्थ्य लाभ?

सीएमएचओ पर खरीद अनियमितताओं के आरोप, ज्ञापन पहुंचा कलेक्टर तक सिरोही। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था इन दिनों दो जांचों में सम्पूर्ण समाधान मॉडल पर चलती दिख रही है। भाजपा जिला मीडिया प्रभारी रोहित खत्री ने जिला कलक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि सीएमएचओ डॉ. दिनेश खराड़ी और डिप्टी सीएमएचओ डॉ. सत्य प्रकाश शर्मा ने एनएचएम राशि के उपयोग में ऐसे नवाचार किए हैं, जिनसे सरकार को राजस्व हानि और आमजन को जांच से दूरी दोनों का अनुभव एक साथ मिल रहा है। 143 जांचों का बजट, लेकिन फोकस सिर्फ 2 पर ज्ञापन के अनुसार, मुख्यमंत्री निशुल्क जांच योजना के तहत उप स्वास्थ्य केन्द्र से जिला अस्पताल तक 143 प्रकार की जांचों के लिए बजट मिलता है। लेकिन आरोप है कि इस व्यापक व्यवस्था को सरलीकरण की राह पर ले जाते हुए बजट का बड़ा हिस्सा सिर्फ दो जांचों ग्लूकोमीटर और हीमोग्लोबीन पर केंद्रित कर दिया गया। जहां उप स्वास्थ्य केन्द्र स्तर पर 14, पीएचसी पर 66, सीएचसी पर 101 और जिला अस्पताल में 143 जांचों की सुविधा होनी चाहिए, वहां जमीनी हकीकत यह बताई जा रही है कि बाकी जांचें मानो अवकाश पर चली गई हैं। परिणामस्वरूप मरीजों को या तो इंतजार करना पड़ रहा है या फिर पड़ोसी राज्य गुजरात की ओर रुख करना पड़ रहा है। एकल स्रोत निविदा, प्रतिस्पर्धा से परहेज? तीन गुना दाम पर खरीद के आरोप खत्री ने आरोप लगाया कि तीन-चार आइटम की खरीद के लिए बार-बार एकल स्रोत उपापन (सिंगल सोर्स प्रोक्योरमेंट) अपनाया गया। लगभग 150 लाख रुपए का क्रय बाजार दर से तीन गुना अधिक कीमत पर किए जाने की बात कही गई है। जहां आमतौर पर सबसे कम बोली की तलाश होती है, वहां यहां सबसे भरोसेमंद स्रोत की परंपरा इतनी मजबूत दिखी कि खुली निविदा की जरूरत ही महसूस नहीं हुई। बजट की मांग बनाम बजट का मार्ग राजकीय मेडिकल कॉलेज सिरोही और जिला अस्पताल की ओर से 143 जांचों के संचालन के लिए बार-बार बजट की मांग किए जाने के पत्र भी सामने आए हैं। लेकिन आरोप है कि यह बजट संबंधित संस्थानों तक पहुंचने के बजाय सीमित जांचों की खरीद में ही खप गया। इस बीच अस्पतालों में अन्य जांचों का ठप होना न केवल मरीजों के लिए परेशानी का कारण बना, बल्कि सरकारी योजनाओं की छवि पर भी सवाल खड़े कर रहा है। हब एंड स्पोक मॉडल, खबरों में लॉन्च, जमीन पर इंतजार 17 फरवरी को समाचार पत्रों में यह दावा किया गया था कि 15 दिनों के भीतर जिले में हब एंड स्पोक मॉडल लागू हो जाएगा और 151 तक उन्नत जांचें निशुल्क उपलब्ध होंगी। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि यह मॉडल अभी भी प्रेस विज्ञप्तियों में सक्रिय है, जबकि जमीनी स्तर पर इसकी शुरुआत का इंतजार जारी है। मरीजों का विकल्प, ‘निशुल्क’ से ‘अनिवार्य यात्रा’ तक, गुजरात की ओर बढ़ते कदम जांच सुविधाओं के अभाव में मरीजों का गुजरात जाना अब एक आम दृश्य बनता जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि जब योजना का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर मुफ्त जांच उपलब्ध कराना था, तो क्या यह आउटसोर्सिंग मॉडल अनजाने में लागू हो गया है? जिला कलक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने मामले में कमेटी गठित कर निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया है। —-    

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माइंड मैट्रिक्स प्रतियोगिता का भव्य आयोजन

जोधपुर के जी.डी. मेमोरियल ग्रुप ऑफ कॉलेज में ज्ञान और प्रतिभा का उत्सव जोधपुर। सेक्टर चार, कुड़ी भगतासनी हाउसिंग बोर्ड स्थित जी.डी. मेमोरियल ग्रुप ऑफ कॉलेज में 25 अप्रे्रल को माइंड मैट्रिक्स प्रतियोगिता का भव्य एवं आकर्षक आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता, तर्कशक्ति और समसामयिक विषयों पर पकड़ को परखने के लिए विशेष रूप से प्रश्नोत्तरी सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने उत्साह और आत्मविश्वास के साथ हिस्सा लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के निदेशक प्रो. जे.जे. मिश्रा की ओर से सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर उपस्थित सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने ज्ञान की देवी माँ सरस्वती का स्मरण करते हुए कार्यक्रम की सफलता की कामना की। वातावरण पूरी तरह शैक्षणिक ऊर्जा और सकारात्मकता से भर गया। छह टीमों के बीच हुआ रोमांचक मुकाबला प्रतियोगिता में ग्रुप ऑफ कॉलेज की कुल 6 टीमों ने भाग लिया। सभी टीमों के बीच प्रतिस्पर्धा अत्यंत रोचक और ज्ञानवर्धक रही। प्रतिभागियों ने सामान्य ज्ञान, करंट अफेयर्स, तार्किक प्रश्नों और विषय आधारित क्विज के विभिन्न चरणों में शानदार प्रदर्शन किया। हर राउंड के साथ प्रतियोगिता का स्तर और भी चुनौतीपूर्ण होता गया, जिससे प्रतिभागियों की बौद्धिक क्षमता का वास्तविक परीक्षण हो सका। दर्शकों के रूप में उपस्थित विद्यार्थियों ने भी हर सही उत्तर पर तालियों से उत्साहवर्धन किया। प्रतियोगिता में कला संकाय की टीम—गर्वित चौहान, अमित एवं कुसुम देवासी ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। तीनों प्रतिभागियों ने अपने सटीक उत्तरों और बेहतरीन टीमवर्क के बल पर सभी राउंड में बढ़त बनाए रखी और अंतत: विजेता बनने में सफल रहे। उपविजेता बनी गोमी देवी महिला शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय की टीम वहीं, गोमी देवी महिला शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय की टीम की सौम्या पुरोहित, कल्पना चौधरी एवं गोमती ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए उपविजेता का स्थान प्राप्त किया। इस टीम ने कई कठिन प्रश्नों के सटीक उत्तर देकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया और अंत तक कड़ी टक्कर दी। विजेताओं को किया गया सम्मानित महाविद्यालय प्रशासन की ओर से विजेता टीम (आर्ट्स) को 1100 तथा उपविजेता टीम (एजुकेशन) को 500 नगद पुरस्कार के साथ प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। पुरस्कार वितरण के दौरान विद्यार्थियों के चेहरे पर खुशी और गर्व साफ झलक रहा था। इस अवसर पर शिक्षकों ने विजेता एवं उपविजेता टीमों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। समकालीन विषयों पर आधारित प्रश्नों ने बढ़ाया उत्साह कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों से समकालीन विषयों पर आधारित विविध प्रश्न पूछे गए। इनमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं, विज्ञान, इतिहास, साहित्य तथा सामाजिक विषयों से जुड़े प्रश्न शामिल थे। प्रतिभागियों ने न केवल सही उत्तर दिए, बल्कि कई प्रश्नों पर अपने विचार भी प्रस्तुत किए, जिससे कार्यक्रम और भी ज्ञानवर्धक बन गया। यह प्रतियोगिता विद्यार्थियों के लिए सीखने और अपनी समझ को विस्तार देने का बेहतरीन मंच साबित हुई। मंच संचालन और आयोजन में रही महत्वपूर्ण भूमिका कार्यक्रम का मंच संचालन सहायक आचार्य राधिका पारिक की ओर से प्रभावी एवं आकर्षक ढंग से किया गया। उन्होंने पूरे कार्यक्रम को सुव्यवस्थित तरीके से संचालित करते हुए प्रतिभागियों और दर्शकों को जोड़े रखा। प्रतियोगिता के समन्वयक के रूप में डॉ. गीता सांखला, डॉ. आदिति मुथा तथा सहायक आचार्य वीवा सिंह चम्पावत ने तकनीकी एवं क्विज मास्टर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनके कुशल मार्गदर्शन और समन्वय के कारण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो सका। इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। माइंड मैट्रिक्स प्रतियोगिता जैसे आयोजन न केवल विद्यार्थियों के ज्ञान को बढ़ाते हैं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, टीमवर्क और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता का भी विकास करते हैं। महाविद्यालय प्रशासन द्वारा इस तरह के आयोजन समय-समय पर किए जाते हैं, जिससे विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। निदेशक ने किया उत्साहवर्धन कार्यक्रम के अंत में निदेशक प्रो. जे.जे. मिश्रा ने सभी प्रतिभागियों, महाविद्यालय के सहायक आचार्यों एवं विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं और भविष्य में भी ऐसे आयोजन निरंतर किए जाएंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे इसी तरह अपनी प्रतिभा को निखारते रहें और शिक्षा के साथ-साथ प्रतिस्पर्धात्मक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी निभाएं। कार्यक्रम के सफल आयोजन से महाविद्यालय परिसर में उत्साह का माहौल देखने को मिला। विद्यार्थियों और शिक्षकों ने इसे एक यादगार अनुभव बताया।  

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सिरोही कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर को मिला एक्सीलेंस पुरस्कार

लखपति दीदी योजना में उत्कृष्ट कार्य के लिए राज्य स्तर पर हुआ सम्मान सिरोही। लोक सेवा दिवस के अवसर पर जयपुर में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में सिरोही जिला कलेक्टर रोहिताश्वसिंह तोमर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास के हाथों सीएम एक्सीलेंस पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें फ्लैगशिप योजनाओं की श्रेणी में बारां जिले में पदस्थापन के दौरान लखपति दीदी योजना के तहत किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए प्रदान किया गया। यह उपलब्धि न केवल सिरोही जिले के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे राज्य प्रशासनिक तंत्र के लिए प्रेरणादायक उदाहरण भी बनकर उभरी है। तोमर के नेतृत्व में बारां जिले में ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में जो बदलाव देखने को मिला, उसने इस योजना को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। लखपति दीदी योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोडऩे की सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, ताकि वे अपनी आय बढ़ाकर सालाना एक लाख रुपए या उससे अधिक कमा सकें। योजना की प्रारंभिक अवस्था को चरम तक पहुंचाया बारां जिले में जब रोहिताश्वसिंह तोमर ने पदभार संभाला, तब यह योजना प्रारंभिक अवस्था में थी। कई समूह सक्रिय नहीं थे और महिलाओं को योजना के लाभों की पूरी जानकारी भी नहीं थी। ऐसे में तोमर ने इसे मिशन मोड में लागू करते हुए व्यापक बदलाव की शुरुआत की। तोमर के नेतृत्व में प्रशासन ने गांव-गांव जाकर महिलाओं को योजना से जोडऩे का अभियान चलाया। उन्होंने केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर जाकर समूहों की समस्याओं को समझा और उनका समाधान किया। अधिकारियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से घर-घर जाकर महिलाओं को योजना के बारे में जानकारी दी गई। महिलाओं को सिलाई, बुनाई, डेयरी, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प आदि क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया गया। बैंकिंग और वित्तीय समावेशन स्वयं सहायता समूहों को बैंक से जोडक़र उन्हें आसान ऋण सुविधा उपलब्ध कराई गई। महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों को स्थानीय और ऑनलाइन बाजारों से जोडऩे के प्रयास किए गए, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई। तोमर के प्रयासों का सबसे बड़ा प्रभाव महिलाओं की आय में वृद्धि के रूप में सामने आया। कई महिलाएं, जो पहले आर्थिक रूप से निर्भर थीं, आज स्वयं अपने परिवार की आय का प्रमुख स्रोत बन चुकी हैं। बारां जिले में हजारों महिलाओं ने इस योजना के माध्यम से अपनी आय को बढ़ाकर लखपति दीदी बनने का लक्ष्य हासिल किया। इससे न केवल उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ, बल्कि समाज में उनकी स्थिति भी मजबूत हुई। सामाजिक बदलाव की मिसाल बना बारां मॉडल बारां जिले में लागू किया गया यह मॉडल केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी कारण बना। परिवारों में निर्णय लेने की क्षमता में उनकी भागीदारी बढ़ी बेटियों की शिक्षा पर जोर बढ़ा। यह मॉडल अब अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बन चुका है और राज्य स्तर पर इसे अपनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। तोमर ने इस योजना को सफल बनाने के लिए केवल प्रशासनिक मशीनरी पर निर्भर नहीं रहे, बल्कि स्थानीय समुदाय, स्वयंसेवी संस्थाओं और बैंकिंग संस्थानों को भी साथ जोड़ा। पुरस्कार प्रदान करते समय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने रोहिताश्व सिंह तोमर के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के नवाचार और समर्पण से ही सरकारी योजनाएं वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचती हैं। उन्होंने कहा कि बारां में किया गया कार्य अन्य जिलों के लिए मार्गदर्शक है और इससे राज्य की विकास यात्रा को नई दिशा मिलेगी। वर्तमान में सिरोही के जिला कलेक्टर के रूप में कार्यरत तोमर की इस उपलब्धि से जिले के प्रशासनिक अधिकारियों और नागरिकों में खुशी की लहर है। सिरोही के लोगों का मानना है कि जिस प्रकार उन्होंने बारां में उत्कृष्ट कार्य किया, उसी तरह वे यहां भी विकास की नई इबारत लिखेंगे। रोहिताश्व सिंह तोमर की कार्यशैली युवा प्रशासनिक अधिकारियों के लिए प्रेरणा बन रही है। उनका फोकस हमेशा परिणामों पर रहता है और वे हर योजना को आम जनता तक पहुंचाने के लिए नवाचार करने से पीछे नहीं हटते। उनकी यह उपलब्धि यह दर्शाती है कि यदि इच्छाशक्ति और समर्पण हो, तो सरकारी योजनाओं के माध्यम से समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। लखपति दीदी योजना की सफलता के बाद अब राज्य सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों को और अधिक मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। आने वाले समय में इन समूहों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोडऩे, ई-कॉमर्स के माध्यम से उत्पादों की बिक्री बढ़ाने और नई तकनीकों का उपयोग करने पर जोर दिया जाएगा। एक अधिकारी, जिसने बदल दी हजारों जिंदगियां रोहिताश्व सिंह तोमर को मिला सीएम एक्सीलेंस पुरस्कार केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उन हजारों महिलाओं की मेहनत और संघर्ष की भी पहचान है, जिनके जीवन में इस योजना के माध्यम से सकारात्मक बदलाव आया है। बारां जिले में उनके द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों ने यह साबित कर दिया है कि सही नेतृत्व और प्रभावी क्रियान्वयन से सरकारी योजनाएं वास्तव में समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकती हैं।

गुजरात में फूड पॅाइजनिंग से 200 लोग बीमार:59 को अस्पताल में भर्ती, शादी में आम का जूस पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ी
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आम का जूस बना आफत: गुजरात में फूड पॉयजनिंग से 200 लोग बीमार, 59 अस्पताल में भर्ती

शादी में आम के जूस के बाद तबीयत बिगड़ी गुजरात के दाहोद जिले के अभलोड गांव में सोमवार रात हुई एक शादी समारोह में फूड पॉयजनिंग की घटना हुई, जिससे 200 से अधिक लोग बीमार पड़ गए। इस घटना के बाद 59 लोगों को गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया गया है कि लगभग 400 मेहमान इस शादी में शामिल हुए थे। शादी में डिनर की शुरुआत शाम 8 बजे हुई थी। कई मेहमानों ने बताया कि उन्होंने आम का जूस पीने के बाद अचानक तबीयत खराब महसूस करनी शुरू कर दी। कुछ घंटों के भीतर लोगों को उल्टी, दस्त और तेज पेट दर्द की शिकायत हुई। दाहोद कलेक्टर योगेश निर्गुडे ने बताया कि फूड पॉयजनिंग का प्रमाण तब स्पष्ट हुआ जब 230 लोगों ने उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत की। इसके बाद अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती संख्या ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी। सप्ताह के सोमवार की रात को जुटे इतने बड़े मेहमानों के बीच इतनी भारी संख्या में बीमार होने की घटना ने स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को सतर्क कर दिया। सभी बीमार लोगों को नजदीकी सरकारी और निजी अस्पतालों में तुरंत भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया। डॉक्टर राजीव डामोर ने पुष्टि की है कि अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों की हालत फिलहाल स्थिर है और सब जल्द ही ठीक हो जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ना केवल आम के जूस बल्कि शादी में दिए गए भोजन की भी जांच की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। स्थानीय प्रशासन ने घटना के संबंध में जांच का आदेश दिया है और फूड सेफ्टी नियमों का सख्ती से पालन करने की हिदायत जारी की है। जागरूकता बढ़ाने के लिए भी कदम उठाए जाने की बात कही जा रही है ताकि लोगों की जान को खतरा न हो। यह घटना फूड सेफ्टी और स्वास्थ्य सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करती है। शादी जैसे बड़े आयोजन में भोजन की गुणवत्ता और सफाई का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है ताकि ऐसी अप्रिय घटनाएं न हों। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें घटना स्थल पर सक्रिय हैं और वे जल्द से जल्द घटना की पूरी तहकीकात करने में जुटी हैं। गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए भी स्थानीय प्रशासन पूरी तैयारी कर रहा है। फिलहाल, प्रभावित परिवारों को राहत और अस्पताल में भर्ती मरीजों के इलाज पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही सरकार ने लोगों से जागरूक रहने और संदिग्ध भोजन से बचने का आग्रह किया है। इस तरह के हादसे यह याद दिलाते हैं कि सार्वजनिक आयोजन में भोजन की सुरक्षा के लिए हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए। आम के जूस जैसे लोकप्रिय पेय पदार्थों की सुरक्षा जांच जरूरी हो जाती है ताकि सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।

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चुनावी रण का विराम, अब खामोश गलियों में गूंजेगा लोकतंत्र का स्वर

प्रचार थमा, पर सियासी तापमान बरकरार नई दिल्ली। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए चल रही तेज-तर्रार चुनावी सरगर्मियां आखिरकार मंगलवार शाम पांच बजे थम गईं। एक महीने से अधिक समय तक चली रैलियों, रोड शो, आरोप-प्रत्यारोप और जनसभाओं की गूंज अब अचानक थम चुकी है, लेकिन सियासी माहौल अब भी उतना ही गर्म है। चुनाव आयोग के सख्त नियमों के तहत मतदान से 48 घंटे पहले प्रचार पर पूर्ण विराम लगा दिया गया है। अब मंचों की जगह घर-घर संपर्क का दौर शुरू हो गया है, जहां उम्मीदवार और उनके कार्यकर्ता मतदाताओं से सीधे संवाद स्थापित करने में जुट गए हैं। 23 अप्रेल को लोकतंत्र का पहला बड़ा इम्तिहान तमिलनाडु की सभी 234 सीटों और पश्चिम बंगाल के पहले चरण की 152 सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान होगा। मतदान सुबह सात बजे से शुरू होगा और पूरे दिन लोकतंत्र का यह महापर्व जारी रहेगा। पश्चिम बंगाल में चुनाव दो चरणों में आयोजित हो रहे हैं, जिसमें दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को 142 सीटों पर कराया जाएगा। ऐसे में दोनों राज्यों में राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। तमिलनाडु में इस बार कुल 4,023 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। यहां मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ द्रविड़ मनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेतृत्व वाले गठबंधन और उसके प्रमुख प्रतिद्वंदी अन्नाद्रमुक के बीच माना जा रहा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में जुटी है। सत्तारूढ़ द्रमुक की ओर से मुख्यमंत्री एम के स्टालिन पूरे अभियान के केंद्र में रहे। उन्होंने राज्यभर में ताबड़तोड़ रैलियां कर अपनी सरकार के कामकाज को जनता के सामने रखा। वहीं विपक्ष की कमान एडापट्टी के पलानीस्वामी ने संभाली। उन्होंने द्रमुक सरकार पर कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं को लेकर तीखे हमले किए। इस चुनाव में एक नया और दिलचस्प मोड़ तब आया जब अभिनय की दुनिया से सुपरस्टार सी जोसफ विजय ने राजनीति के अखाड़े में कदम रखा। उनकी पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कजगम’ ने कई सीटों पर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। विजय की लोकप्रियता ने खासकर युवा मतदाताओं के बीच उत्सुकता और रोमांच पैदा किया है, जिससे चुनावी समीकरण और अधिक जटिल हो गए हैं। राष्ट्रीय नेताओं की एंट्री से बढ़ी सियासी धार तमिलनाडु में चुनावी माहौल को धार देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन सहित कई राष्ट्रीय नेताओं ने जमकर प्रचार किया। कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों के नेताओं ने भी मैदान में उतरकर गठबंधन को मजबूती देने की कोशिश की। चुनावी प्रचार के दौरान विपक्षी गठबंधन ने सत्तारूढ़ द्रमुक सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपों को प्रमुख मुद्दा बनाया। वहीं द्रमुक और उसके सहयोगी दलों ने तमिल स्वाभिमान और राज्य के अधिकारों पर कथित अतिक्रमण को लेकर जनता के बीच अपनी बात रखी। अंतिम दौर में महिला आरक्षण का मुद्दा भी जोर-शोर से उभरा, जिसने चुनावी बहस को नया आयाम दिया। लोकतंत्र की असली ताकत मतदाता तमिलनाडु में इस चुनाव में 5.67 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के पात्र हैं। इनमें 2.77 करोड़ पुरुष, 2.89 करोड़ महिलाएं और 7,617 उभयलिंगी मतदाता शामिल हैं। इनके लिए राज्यभर में 75,032 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। चुनाव आयोग ने मतदाता भागीदारी बढ़ाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाए हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग मतदान में हिस्सा लें। पश्चिम बंगाल, सियासी संग्राम का महाभारत पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 16 जिलों की 152 सीटों पर मतदान होगा। इस चरण में कुल 1,478 प्रत्याशी मैदान में हैं, जो अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। पहले चरण में जिन जिलों में मतदान होना है, उनमें मुर्शिदाबाद की 22, कूचबिहार की नौ, जलपाईगुड़ी की सात, अलीपुरद्वार की पांच, कलिंपोंग की एक, दार्जिलिंग की पांच, उत्तर दिनाजपुर की नौ, दक्षिण दिनाजपुर की छह, मालदा की 12, बीरभूम की 11, पश्चिम बर्द्धमान की नौ, पूर्व मेदिनीपुर की 16, पश्चिम मेदिनीपुर की 15, झाडग़्राम की चार, पुरुलिया की नौ और बांकुड़ा की 12 सीटें शामिल हैं। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की है। संवेदनशील इलाकों में केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल की भारी तैनाती की गई है। उत्तर बंगाल के आठ, दक्षिण बंगाल के तीन और जंगलमहल अंचल के पांच जिलों में विशेष निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके। पहले चरण में 3.60 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 1.84 करोड़ पुरुष, 1.745 करोड़ महिलाएं और 465 उभयलिंगी मतदाता शामिल हैं। पूरे पश्चिम बंगाल में कुल 6.44 करोड़ मतदाता हैं, जो इस चुनाव को देश के सबसे बड़े लोकतांत्रिक आयोजनों में से एक बनाते हैं। ममता बनाम भाजपा, सीधी राजनीतिक जंग पश्चिम बंगाल में मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच है। तृणमूल कांग्रेस के चुनाव प्रचार का पूरा दारोमदार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कंधों पर रहा। उन्होंने अपने आक्रामक और भावनात्मक भाषणों से समर्थकों को जोडऩे की कोशिश की। इधर भाजपा ने भी इस चुनाव को प्रतिष्ठा का सवाल बनाते हुए पूरी ताकत झोंक दी। प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, शिवराज सिंह चौहान, पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन और विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने ताबड़तोड़ रैलियां कर माहौल को गरमा दिया। अब फैसला जनता के हाथ में प्रचार का शोर भले ही थम गया हो, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होने वाली है। मतदाता अब अपने विवेक से तय करेंगे कि सत्ता किसके हाथ में जाएगी और कौन विपक्ष की भूमिका निभाएगा। लोकतंत्र के इस महापर्व में हर वोट की अहमियत है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि जनता ने किसके वादों पर भरोसा जताया और किसे नकार दिया।

बंगाल में 630 करोड़पति कैंडिडेट, 23% पर क्रिमिनल केस:53% उम्मीदवार ग्रेजुएट भी नहीं, सिर्फ 13% महिलाओं को टिकट; 192 पर महिलाओं के खिलाफ केस
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बंगाल में 630 करोड़पति उम्मीदवार, 23% पर चल रहे क्रिमिनल मामले; केवल 13% टिकट महिलाओं को मिली

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर जारी नवीनतम रिपोर्ट से पता चलता है कि राज्य में 23 प्रतिशत उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक आरोप दर्ज हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) द्वारा किए गए विश्लेषण के अनुसार चुनाव लड़ रहे कुल 2920 उम्मीदवारों में से 630 करोड़पति हैं, जो हर पांचवें उम्मीदवार के लगभग बराबर है। विश्लेषण में यह भी सामने आया है कि सबसे अधिक 208 उम्मीदवार भाजपा के हैं, जिनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज है। इसके अलावा 192 उम्मीदवारों पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के आरोप हैं, जबकि आठ उम्मीदवारों पर रेप का केस दर्ज है। कुल मिलाकर, प्रमुख चार पार्टी—BJP, TMC, कांग्रेस और CPI(M)—के बीच 1074 उम्मीदवार ऐसे हैं जिनमें से 481 पर आपराधिक केस हैं। संपत्ति के मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अधिकांश उम्मीदवार करोड़पति पाए गए हैं, जहां करीब 72% उम्मीदवारों के पास करोड़ों की संपत्ति है। BJP में यह आंकड़ा करीब 49% है। औसतन उम्मीदवारों की संपत्ति 1.28 करोड़ रुपये के आसपास है। मुर्शिदाबाद जिले के जंगीपुर सीट से टीएमसी के जाकिर होसैन 133 करोड़ से अधिक संपत्ति के साथ सबसे अमीर उम्मीदवार हैं। वहीं, बांकुरा जिले से गौतम मिश्रा 105 करोड़ रुपये के साथ दूसरे नंबर पर हैं। शिक्षा के लिहाज से देखें तो लगभग 47% उम्मीदवार ग्रेजुएट या उससे अधिक पढ़े-लिखे हैं, जबकि 48% उम्मीदवार केवल 5वीं से 12वीं तक पढ़े-लिखे हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि शिक्षा के मामले में भी चुनावी मैदान में विविधता मौजूद है। महिला भागीदारी की बात करें तो राज्य में महिलाओं का अनुपात पुरुषों के बराबर होते हुए भी राजनीतिक उम्मीदवारों में महिलाओं की भागीदारी काफी कम है। कुल टिकटों में केवल 13% टिकट महिलाओं को दी गई है। यह स्थिति यह दर्शाती है कि अभी भी महिलाओं को राजनीतिक मंच पर समान प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। उम्र के हिसाब से देखें तो 25 से 40 साल के 29%, 41 से 60 साल के 53%, 61 से 80 साल के 17% उम्मीदवार हैं, जबकि कुछ उम्मीदवार 80 वर्ष से भी अधिक आयु के हैं। राज्य में विधानसभा चुनाव दो चरणों—23 और 29 अप्रैल को—होंगे और परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इस चुनाव में अपराधिक मामलों से ग्रस्त उम्मीदवारों की बड़ी संख्या, करोड़पतियों की गिनती और महिलाओं का कम प्रतिनिधित्व राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

MP में 31% महिला कलेक्टर, दक्षिणी राज्यों में 39%:प्रशासन में भी महिलाओं को बड़ी जिम्मेदारियां देने में राज्य पीछे
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मध्यप्रदेश में 31% महिला कलेक्टर, दक्षिणी राज्यों में 39%: प्रशासन में महिलाओं को बड़ी जिम्मेदारियां देने में राज्य पिछड़े

देश में महिलाओं को 33% आरक्षण का कानून लागू होने का इंतजार लंबा चल रहा है। हालांकि प्रशासनिक ढांचे में महिलाओं की भूमिका का जायजा लें तो कई राज्यों में उनकी भागीदारी अपेक्षाकृत कम दिख रही है। प्रदेश अनुसार देखें तो दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में महिला कलेक्टरों की हिस्सेदारी 35 से 39 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जबकि हिंदी पट्टी के राज्यों में यह आंकड़ा कहीं कम है। मध्यप्रदेश 55 जिलों में 17 महिला कलेक्टरों के साथ लगभग 31% महिला प्रतिनिधित्व के साथ हिंदी पट्टी का अकेला ऐसा बड़ा राज्य है, जहां महिलाएं प्रशासन में बढ़-चढ़कर भाग ले रही हैं। दूसरी ओर, छोटा राज्य सिक्किम 33% महिला कलेक्टरों के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियों में महिलाओं की भागीदारी का उदाहरण प्रस्तुत करता है। दक्षिण भारत के राज्यों में तेलंगाना में महिला कलेक्टरों का हिस्सा 39% तक पहुंच चुका है, जो पूरे देश में सबसे अधिक है। तमिलनाडु में यह आंकड़ा 38% है जबकि केरल में 36% तक पहुंचा है। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में भी क्रमशः 35% और 32% महिला कलेक्टर कार्यरत हैं। इस तुलना में हिंदी पट्टी के अन्य बड़े राज्य, जैसे उत्तर प्रदेश और झारखंड, काफी पीछे हैं जहां महिला कलेक्टरों का प्रतिशत क्रमशः 16% और 16% ही है। कुछ अन्य राज्यों के आंकड़ों की बात करें तो बिहार में 18%, हरियाणा में 18%, गुजरात में भी 18% और पश्चिम बंगाल में लगभग 26% महिला कलेक्टर हैं। वहीं, ओडिशा में यह आंकड़ा केवल 8% तक सीमित है, जो अन्य राज्यों के मुकाबले बेहद कम है। इस प्रकार देखा जाए तो प्रशासनिक जिम्मेदारी में महिलाओं को समान अवसर देने में राज्यों के बीच काफी अंतर है। विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं को प्रशासनिक दायित्वों में अधिक अवसर देना राज्य के संतुलित विकास के लिए आवश्यक है। महिला अधिकारियों की भागीदारी से निर्णय लेने की प्रक्रिया में विविधता आती है, जिससे नीतियों में महिलाओं से जुड़े मुद्दों को पहले से बेहतर तरीके से ध्यान में रखा जा सकता है। वहीं, महिला आरक्षण विधेयक के परिप्रेक्ष्य में भी राज्यों की भूमिका महत्वपूर्ण है। विपक्ष की ओर से विधेयक में विलंब और विरोध के कारण इस पर बहस जारी है, जिससे केवल महिला आरक्षण बिल नहीं, बल्कि परिसीमन विधेयक को लेकर भी राजनीतिक उठापटक बनी हुई है। इस संदर्भ में यह जरूरी है कि राज्य प्रशासनिक संरचना में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने के लिए नीतिगत सुधार किए जाएं। महिलाओं को निर्णायक पदों पर लाने से न केवल प्रशासनिक प्रणाली में मजबूती आएगी, बल्कि समाज में लैंगिक समानता के प्रतीक के रूप में उनका स्थान भी सुनिश्चित होगा। अतः महिलाओं को प्रमुख प्रशासनिक पदों पर जगह देने में राज्य अब भी पीछे हैं। मध्यप्रदेश जैसे कुछ राज्यों ने निश्चित तौर पर यह भूमिका निभाई है, लेकिन पूरे देश में समानता लाने और महिलाओं को सरकारी पदों पर सुनिश्चित भूमिका देने के लिए गंभीर प्रयासों की आवश्यकता है।

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602 वें स्थापना दिवस पर सूना रहा सिरोही, प्रशासन की बेरुखी से आहत हुए शहरवासी

 इतिहास का सम्मान होना चाहिए था, वहां पसरी रही खामोशी सिरोही। सिरोही के 602वें स्थापना दिवस जैसे गौरवशाली, पावन और ऐतिहासिक अवसर पर इस बार प्रशासनिक स्तर पर कोई विशेष आयोजन नहीं होना शहरवासियों के लिए गहरी निराशा का कारण बना। जिस दिन पूरे नगर को अपनी समृद्ध विरासत, संस्कृति और इतिहास का उत्सव मनाते हुए एकजुट होना चाहिए था, उसी दिन जिम्मेदार तंत्र की चुप्पी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। स्थापना दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि शहर की पहचान, उसके गौरवशाली अतीत और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक होता है। ऐसे महत्वपूर्ण अवसर पर प्रशासन की निष्क्रियता ने यह संदेश दिया कि शायद अब परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के प्रति संवेदनशीलता कम होती जा रही है। शहर के बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, हर वर्ग में इस बात को लेकर नाराजगी और मायूसी साफ तौर पर देखी गई। चौधरी लाइन के नागरिकों ने निभाई परंपरा जब प्रशासनिक तंत्र मौन रहा, तब सिरोही की जागरूक जनता ने अपनी जिम्मेदारी निभाई। चौधरी लाइन क्षेत्र के परिवारों, व्यापारियों एवं आसपास के नागरिकों ने इस ऐतिहासिक दिन को यूं ही गुजरने नहीं दिया। शाम को शीशाजी मंदिर प्रांगण में एकत्रित होकर उन्होंने आरती का आयोजन किया और शहर की सुख-समृद्धि, शांति और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। यह आयोजन इस बात का सशक्त उदाहरण बना कि सिरोही की जनता आज भी अपने संस्कारों, परंपराओं और इतिहास से गहराई से जुड़ी हुई है। लोगों ने कहा कि चाहे प्रशासन साथ दे या न दे, लेकिन शहर की अस्मिता और परंपरा को जीवित रखना हर नागरिक का कर्तव्य है। यही कारण है कि सीमित संसाधनों के बावजूद नागरिकों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस आयोजन को सफल बनाया। दो वर्ष पहले था उत्साह, अब उदासीनता? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दो वर्ष पूर्व जब संयम विधायक थे, तब सिरोही स्थापना दिवस बड़े उत्साह, उल्लास और गरिमा के साथ मनाया जाता था। उस समय प्रशासन और जनप्रतिनिधि दोनों मिलकर इस दिन को यादगार बनाते थे। विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, सामाजिक आयोजन और शहर की विरासत को प्रदर्शित करने वाली गतिविधियां आयोजित की जाती थीं, जिससे लोगों में गर्व और उत्साह का माहौल बनता था। लेकिन पिछले दो वर्षों से स्थिति पूरी तरह बदलती नजर आ रही है। अब यह गौरवमयी दिवस उपेक्षा का शिकार होता दिख रहा है। न तो प्रशासन की ओर से कोई पहल दिखाई देती है और न ही जनप्रतिनिधियों की सक्रियता नजर आती है। इस बदलाव ने शहरवासियों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर उनकी भावनाओं और शहर की परंपराओं के प्रति जिम्मेदार लोगों की संवेदनाएं कहां खो गई हैं? आस्था और इतिहास का केंद्र शीशाजी मंदिर सिरोही नगर की स्थापना के इतिहास में शीशाजी मंदिर का विशेष महत्व है। मान्यता है कि जब सिरोही नगर की स्थापना का संकल्प लिया गया था, तब सर्वप्रथम इसी पवित्र मंदिर की स्थापना की गई थी। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सिरोही की आस्था, संस्कृति, समृद्ध परंपरा और गौरवशाली इतिहास का मूल आधार एवं प्रेरणास्रोत है। स्थापना दिवस जैसे अवसर पर इस मंदिर में आयोजन होना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह शहर की जड़ों से जुडऩे और अपनी पहचान को सहेजने का भी माध्यम है। शाम 7.30 बजे हुई आरती, गूंजे श्रद्धा के स्वर स्थापना दिवस के अवसर पर शाम साढे सात बजे श्री शीशाजी मंदिर, चौधरी लाइन, सदर बाजार में भव्य आरती का आयोजन किया गया। आरती के दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। दीपों की रोशनी, मंत्रोच्चार और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को अत्यंत भावनात्मक और प्रेरणादायक बना दिया। शहरवासियों ने एक स्वर में सिरोही की सुख-शांति, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की। यह दृश्य इस बात का प्रतीक था कि चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों, लेकिन सिरोही की जनता अपने शहर के प्रति प्रेम और समर्पण में कभी कमी नहीं आने देगी। इनकी रही मौजूदगी इस आयोजन में क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। वरिष्ठजनों में किशोर चौधरी, जयंतीलाल , व्यापारी वर्ग से राजू भाई, नितेश उर्फ लाला , जय, विक्रम हरण, निरंजन भाई सहित क्षेत्र की महिलाएं एवं अनेक नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर न केवल आरती में भाग लिया, बल्कि शहर के विकास और समृद्धि के लिए सामूहिक संकल्प भी लिया।    

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समारोहों पर संकट: गैस सिलेंडर की कमी पर लोढ़ा ने मांगा तुरंत समाधान

ग्रामीण क्षेत्रों में शादी-ब्याह और धार्मिक आयोजनों पर असर, आपूर्ति सुधारने के दिए सुझाव सिरोही। जिले में कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की लगातार बनी हुई किल्लत अब एक गंभीर जनसमस्या का रूप लेती जा रही है। इस मुद्दे को लेकर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा से सीधे फोन पर बात कर स्थिति से अवगत कराया और तत्काल समाधान की मांग की। लोढ़ा ने मंत्री का ध्यान विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की ओर आकर्षित करते हुए बताया कि वहां कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की भारी कमी के कारण शादी-विवाह और धार्मिक समारोहों के आयोजन में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के सामाजिक और पारिवारिक आयोजनों में गैस की उपलब्धता बेहद जरूरी होती है, लेकिन वर्तमान स्थिति में लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंत्री को भेजे गए पत्र में संयम लोढ़ा ने विस्तार से बताया कि सिरोही जिले की ग्रामीण गैस एजेंसियों को कॉमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति अनियमित रूप से हो रही है। कई एजेंसियों को पर्याप्त मात्रा में सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है। इसका सीधा असर आमजन पर पड़ रहा है, खासकर उन परिवारों पर जिनके यहां विवाह या अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होने वाले हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कई जगहों पर लोगों को समय पर सिलेंडर नहीं मिलने के कारण वैकल्पिक व्यवस्थाएं करनी पड़ रही हैं, जिससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। प्रशासनिक प्राथमिकता से वितरण की मांग पूर्व विधायक लोढ़ा ने मंत्री से आग्रह किया कि इस समस्या के समाधान के लिए जिला प्रशासन को निर्देशित किया जाए कि वह कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों का वितरण प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करे। विशेष रूप से शादी-विवाह और धार्मिक आयोजनों के लिए सिलेंडरों की उपलब्धता को प्राथमिकता दी जाए, ताकि सामाजिक कार्यक्रमों में किसी प्रकार की बाधा न आए। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे आयोजनों के लिए सिलेंडरों का वितरण प्रशासनिक अनुमति के आधार पर किया जाए, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और वास्तविक जरूरतमंदों को ही प्राथमिकता मिल सके। मांग के अनुसार आपूर्ति के निर्देश देने की अपील लोढ़ा ने मंत्री सुमित गोदारा से यह भी मांग की कि गैस आपूर्ति करने वाली कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि वे जिले की वास्तविक मांग के अनुसार कॉमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति सुनिश्चित करें। वर्तमान में आपूर्ति की कमी के कारण स्थिति बिगड़ती जा रही है, जिसे समय रहते नियंत्रित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि कंपनियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएं और आपूर्ति प्रणाली को मजबूत किया जाए, तो इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है। व्यावसायिक और सामाजिक उपयोग में संतुलन जरूरी लोढ़ा ने अपने सुझाव में यह भी उल्लेख किया कि कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों के वितरण में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। एक ओर जहां शादी-विवाह और धार्मिक आयोजनों के लिए प्राथमिकता दी जानी चाहिए, वहीं शेष सिलेंडरों को व्यावसायिक उपयोग के लिए भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित न हों। उन्होंने कहा कि यदि इस दिशा में स्पष्ट नीति बनाई जाती है, तो दोनों प्रकार की आवश्यकताओं को संतुलित किया जा सकता है और किसी भी वर्ग को असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।  

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