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चल गया ‘डिस्काउंट’ फार्मूला, रोजाना 400 सैलानियों की दस्तक
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पर्यटन में उछाल: रोजाना 400 सैलानी, छूट का असर

रोजाना करीब 400 सैलानियों की बढ़ती संख्या से यह स्पष्ट हो गया है कि ‘डिस्काउंट’ फार्मूला अब कारगर साबित हो रहा है। ऑफ-सीजन में पर्यटन क्षेत्र को लिए गए इस रणनीतिक कदम से होटल और पर्यटन उद्योग में नया उत्साह देखने को मिल रहा है। इस योजना ने न केवल यात्रियों को आकर्षित किया है बल्कि पर्यटन व्यवसायी भी इससे राहत महसूस कर रहे हैं। जैसलमेर से लेकर सम के धोरों तक ‘डिस्काउंट’ ने बढ़ाई सैलानियों की संख्या जैसलमेर और सम के धोरों में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था नए सिरे से उत्साह से भर रही है। मार्च के दूसरे पखवाड़े से लागू किए गए इस ‘डिस्काउंट’ फार्मूले ने मार्च और अप्रैल के महीनों में प्रतिदिन लगभग 350 से 400 पर्यटकों को आकर्षित किया है, जो ऑफ-सीजन के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। हाल के वर्षों में ऑफ-सीजन पर्यटन को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर बनाने के लिए होटल कारोबारी, गेस्ट हाउस मालिक तथा अन्य पर्यटन से जुड़े हितधारक मिलकर रियायती दरें लागू कर रहे हैं। इस योजना के अंतर्गत होटल, रिसॉर्ट और गेस्ट हाउस में 30 से 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। साथ ही टूर पैकेज भी किफायती बनाए गए हैं, जिससे घरेलू पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। होटल उद्योग से जुड़े व्यवसायियों का कहना है कि वीकेंड और सरकारी छुट्टियों के दौरान सैलानियों की संख्या में और वृद्धि देखी जा रही है, जो पर्यटन क्षेत्र के लिए आशाजनक संकेत है। इस योजना ने पर्यटन से जुड़े व्यवसायों को नई आर्थिक ऊर्जा दी है और स्थानिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे रियायती कदम पर्यटन उद्योग के विकास और स्थायी रूप से गति देने में मददगार होंगे, जिससे जैसलमेर और आसपास के क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। इस बार का ‘डिस्काउंट’ फार्मूला न केवल पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है, बल्कि जयसलमेर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को भी नई पहचान दिला रहा है। अंततः यह कहा जा सकता है कि ऑफ-सीजन में भी पर्यटन क्षेत्र को सक्रिय बनाए रखने के लिए यह कदम एक सफल प्रयास सिद्ध हुआ है, जो भविष्य में भी जारी रहने की संभावना रखता है।

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Trinity International School का 6वां वार्षिकोत्सव ‘Euphoria’ धूमधाम से सम्पन्न, विद्यार्थियों ने बिखेरा प्रतिभा का रंग

सिरोही। पिंडवाड़ा झांकर गांव स्थित  Trinity International School में 6th Annual Function ‘Euphoria’ का आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास, उत्साह, उमंग एवं भव्यता के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर विद्यालय परिसर को आकर्षक रंग-बिरंगी सजावट और मनमोहक रोशनी से सजाया गया, जिससे पूरा वातावरण उत्सवमय और आलोकित हो उठा। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा गणमान्य अतिथियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे आयोजन की गरिमा और भी बढ़ गई। विद्यालय प्रबंधन द्वारा कार्यक्रम की भव्य तैयारियां कई दिनों पूर्व से ही प्रारंभ कर दी गई थीं। मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की रूपरेखा इस प्रकार तैयार की गई थी कि हर प्रस्तुति दर्शकों के मन में एक अलग छाप छोड़ सके। जैसे ही कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ, पूरे परिसर में उल्लास और ऊर्जा का वातावरण स्पष्ट रूप से महसूस किया जा सकता था। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक विधि से दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस शुभ अवसर पर सन्तों का पावन सानिध्य प्राप्त हुआ—श्री श्री 1008 गोविंद वल्लभ  महाराज (श्रीपति धाम) एवं श्री श्री 1008 रेवानाथ जी महाराज (मरकुंडेश्वर धाम, अजारी) विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके साथ ही मुख्य अतिथि प्रोफेसर अजय कुमार , प्राचार्य, PG College सिरोही, विद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रशांत कुमार एवं चेयरमैन  जगदीश सिंह सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया।  दीप प्रज्वलन के इस पावन क्षण ने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता से भर दिया। मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों ने विद्यार्थियों को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। संत  गोविंद वल्लभ  महाराज ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक सफलता ही नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों को भी अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक होती है, जब उसमें नैतिकता, अनुशासन, संस्कार और भारतीय संस्कृति का समावेश हो।उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने, मेहनत करने और अपने माता-पिता तथा गुरुओं का सम्मान करने का संदेश दिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है, लेकिन जो विद्यार्थी अपने मूल्यों पर अडिग रहते हैं, वही जीवन में सच्ची सफलता प्राप्त करते हैं। रेवानाथ जी महाराज ने भी विद्यार्थियों को आशीर्वाद देते हुए उन्हें जीवन में सकारात्मक सोच अपनाने और अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा दी। विद्यालय प्रशासन का उद्बोधन: उपलब्धियों और संकल्प का उल्लेख विद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रशांत कुमार ने अपने उद्बोधन में विद्यालय की शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों की मेहनत, लगन और प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि Trinity International School केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का एक सशक्त मंच है। उन्होंने यह भी बताया कि विद्यालय निरंतर नए-नए नवाचारों के माध्यम से विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने शिक्षकों के योगदान को भी विशेष रूप से सराहा और कहा कि शिक्षकों की मेहनत और मार्गदर्शन के बिना विद्यार्थियों की सफलता संभव नहीं है। वहीं चेयरमैन  जगदीश सिंह ने अपने संबोधन में विद्यालय के सतत विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखना, बल्कि उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में सक्षम बनाना है। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत विविध और आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी दर्शकों का मन मोह लिया। प्रत्येक प्रस्तुति में विद्यार्थियों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और कठिन परिश्रम स्पष्ट रूप से झलक रहा था। मंच पर प्रस्तुत “मंजुलिका” की नाटकीय प्रस्तुति ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। इसके साथ ही शहीद-ए-आजम भगत सिंह पर आधारित नाट्य प्रस्तुति ने देशभक्ति की भावना को जीवंत कर दिया। विद्यार्थियों ने अपने अभिनय के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष और बलिदान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। “छावा” नाट्य प्रस्तुति भी दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें ऐतिहासिक घटनाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। महाकाली मण्डन की शक्तिशाली झांकी ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया, वहीं कविता “रश्मिरथी (कृष्ण की चेतावनी)” की प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। हर प्रस्तुति के अंत में दर्शकों की तालियों की गूंज यह स्पष्ट कर रही थी कि विद्यार्थियों की मेहनत को भरपूर सराहना मिल रही है। पुरस्कार वितरण: प्रतिभाओं का सम्मान कार्यक्रम के समापन अवसर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर “Best Student of the Year” का प्रतिष्ठित सम्मान विक्रम सिंह आढा को प्रदान किया गया। उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुशासन और सर्वांगीण विकास को देखते हुए यह सम्मान उन्हें दिया गया। इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ओलिंपियाड में गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाली छात्रा यशस्वी सोलंकी को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। उनकी इस उपलब्धि ने विद्यालय का नाम गौरवान्वित किया। पुरस्कार वितरण समारोह ने विद्यार्थियों को आगे बढ़ने और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। ‘Euphoria’ बना सर्वांगीण विकास का प्रतीक ‘Euphoria’ 6th Annual Function केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, सृजनात्मकता और आत्मविश्वास का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा। इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि Trinity International School विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ मंच प्रदान कर उनकी प्रतिभा को निखारने का कार्य कर रहा है। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं को पहचानने और उन्हें प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किया, जिससे उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई। अंत में विद्यालय परिवार की ओर से सभी अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का इस सफल आयोजन में सहयोग और सहभागिता के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम का समापन सकारात्मक ऊर्जा, प्रेरणा और यादगार अनुभवों के साथ हुआ। ‘Euphoria’ ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और मूल्यों का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करते हुए सभी के मन में एक अमिट छाप छोड़ी।

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सिरोही में नारी शक्ति का विराट उदय, पांच हजार से अधिक मातृशक्ति की ऐतिहासिक भागीदारी

विशेष संवाददाता भूपेंद्र माली की खास रिपोर्ट सिरोही। माली समाज छात्रावास स्थित लखमीदास मंदिर प्रांगण आज उस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना, जब माली समाज सेवा संस्थान 14 परगना, सिरोही के तत्वावधान में आयोजित महिला जागृति महासम्मेलन महाकुंभ में 5000 से अधिक मातृशक्ति ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। यह आयोजन नारी शक्ति की एकता, जागरूकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक बनकर उभरा। माली समाज के 14 परगनों से गांव-गांव से पहुंची महिलाओं ने इस महासम्मेलन को जनआंदोलन का रूप दे दिया। पूरे कार्यक्रम में अनुशासन, उत्साह और समाज के प्रति समर्पण का अद्भुत संगम देखने को मिला। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो सिरोही की धरती पर नारी जागरण की नई लहर उमड़ पड़ी हो। इस ऐतिहासिक आयोजन ने पूरे जिले को नारी सशक्तिकरण की भावना से सराबोर कर दिया। महासम्मेलन में शामिल होने के लिए दूर-दराज के गांवों से महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में, उत्साह और आत्मविश्वास के साथ पहुंचीं। उनकी उपस्थिति ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि अब ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं भी जागरूकता और आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। कार्यक्रम स्थल पर हर ओर ऊर्जा, उत्साह और एकता का वातावरण दिखाई दे रहा था। महिलाओं ने न केवल अपनी भागीदारी दर्ज कराई, बल्कि समाज के विकास में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का भी संकल्प लिया। यह महासंगम वास्तव में नारी शक्ति के जागरण का जीवंत उदाहरण बन गया। महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने किया मार्गदर्शन इस महाकुंभ में महिलाओं को विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूक किया गया। विधिक सेवा, चिकित्सा सेवा, साइबर क्राइम एवं फ्रॉड से बचाव, रोजगार और स्वावलंबन जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी। विधिक सेवा प्राधिकरण से वार्ताकार डॉ. गीता माली, विशाखापट्टनम ने महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में जागरूक किया। चिकित्सा विभाग से वार्ताकार डॉ. कीर्ति शर्मा ने स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। पुलिस विभाग एवं साइबर धोखाधड़ी से बचाव के विषय पर वार्ताकार राजकुंवर ने डिजिटल युग में सुरक्षा के उपाय बताए। स्वावलंबन विभाग की प्रतिनिधि रुचिका रावल एवं उनके वरिष्ठ अधिकारियों ने महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसरों के बारे में मार्गदर्शन दिया। इन सभी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा और वे अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति अधिक सजग हुईं। इस आयोजन का सफल संचालन माली समाज 14 परगना अध्यक्ष हीरालाल माली एवं उनकी पूरी कमेटी के नेतृत्व में किया गया। उनके कुशल मार्गदर्शन और अथक प्रयासों के कारण यह कार्यक्रम समाज की एकता, संगठन और सशक्तिकरण की मिसाल बनकर सामने आया। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पूरी टीम ने समर्पण और मेहनत का परिचय दिया। आयोजन की प्रत्येक व्यवस्था चाहे वह स्वागत हो, मंच संचालन हो या व्यवस्थापन—सभी में अनुशासन और समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण देखने को मिला। आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हुआ महासम्मेलन महासम्मेलन की विशेषता रही वात्सल्य मूर्ति पद्म विभूषण साध्वी ऋतंभरा की कृपा पात्र शिष्या साध्वी सत्यसिद्धा गिरी की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनके सानिध्य ने पूरे कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की। साध्वी गिरी ने कहा कि सामाजिक समरसता, राष्ट्र निर्माण और एकता का संदेश दिया। उनके विचारों ने उपस्थित जनसमूह में नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच का संचार किया। उनके आशीर्वचन ने कार्यक्रम को केवल सामाजिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी समृद्ध बना दिया। नारी सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम यह महासम्मेलन न केवल माली समाज की मातृशक्ति के लिए एक सशक्त मंच साबित हुआ, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गया। इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि जब महिलाएं एकजुट होकर आगे बढ़ती हैं, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य आता है। सिरोही आज नारी शक्ति का केंद्र बनकर उभरा, जहां से जागरूकता, एकता और सशक्तिकरण की नई क्रांति का आगाज हो चुका है। यह आयोजन आने वाले समय में समाज के विकास और समरसता के लिए मील का पत्थर साबित होगा। बालिका शिक्षा पर नाट्य प्रस्तुति ने जीता दिल कार्यक्रम के दौरान प्रेरणा एंड पार्टी की ओर से बालिका शिक्षा पर आधारित नाट्य प्रस्तुति दी गई, जिसने सभी उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। इस प्रस्तुति के माध्यम से समाज में बालिका शिक्षा के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। नाटक ने यह संदेश दिया कि यदि बेटियों को उचित शिक्षा और अवसर दिए जाएं, तो वे समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। दर्शकों ने इस प्रस्तुति की सराहना करते हुए कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। पूरे कार्यक्रम का मंच संचालन एशू माली एंड पार्टी की ओर से किया गया, जिन्होंने अपनी प्रभावशाली शैली से कार्यक्रम को रोचक और व्यवस्थित बनाए रखा। उनके संचालन ने कार्यक्रम को एक सुगठित स्वरूप प्रदान किया और दर्शकों का ध्यान अंत तक बनाए रखा। डेढ़ माह की मेहनत से साकार हुआ आयोजन इस महासम्मेलन को सफल बनाने के लिए माली समाज 14 परगनों की पूरी कार्यकारिणी, अध्यापकों की टीम एवं महिलाओं की टीम ने करीब डेढ़ माह तक गांव-गांव जाकर जनसंपर्क किया। उन्होंने महिलाओं को जागरूक करते हुए इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। इस अथक मेहनत और समर्पण का ही परिणाम रहा कि इतनी बड़ी संख्या में मातृशक्ति ने एकत्र होकर इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। यह सामूहिक प्रयास समाज की एकजुटता और संगठन शक्ति का प्रमाण है। कार्यक्रम के अंत में मंत्री एवं उपाध्यक्ष ने सभी सहयोगियों, अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज को नई दिशा देने का कार्य करते हैं और भविष्य में भी ऐसे प्रयास जारी रहेंगे। सिरोही में आयोजित यह महिला जागृति महासम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत है। इसने यह संदेश दिया कि नारी शक्ति जब जागृत होती है, तो समाज में परिवर्तन की धारा स्वत: प्रवाहित होने लगती है।  

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कलम की क्रांति: सावित्रीबाई फुले ने बदली भारत की सोच

विशेष संवाददाता भूपेंद्र माली की एक खास रिपोर्ट सिरोही। भारत के सामाजिक इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जिनकी गूंज सदियों तक सुनाई देती है। उन महान विभूतियों में एक नाम है सावित्रीबाई फुले एक ऐसी महिला, जिन्होंने न केवल अपने समय की रुढियों को चुनौती दी, बल्कि समाज में शिक्षा, समानता और महिलाओं के अधिकारों की नई इबारत भी लिखी। आज जब हम महिला सशक्तिकरण और शिक्षा की बात करते हैं, तो यह समझना जरूरी है कि इस क्रांति की नींव बहुत पहले रखी जा चुकी थी। उस नींव की पहली ईंट रखने वाली थीं सावित्रीबाई फुले है। प्रारंभिक जीवन, संघर्षों से भरी शुरुआत सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उस समय भारत में महिलाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। उन्हें शिक्षा से दूर रखा जाता था और समाज में उनकी भूमिका केवल घर तक सीमित मानी जाती थी। कम उम्र में ही उनका विवाह महात्मा ज्योतिराव फुले से हुआ। यह विवाह उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। ज्योतिराव फुले स्वयं एक प्रगतिशील विचारधारा के व्यक्ति थे, जिन्होंने अपनी पत्नी को शिक्षित करने का निर्णय लिया जो उस दौर में एक क्रांतिकारी कदम था। सावित्रीबाई फुले ने अपने पति से पढऩा-लिखना सीखा और जल्द ही उन्होंने शिक्षा के महत्व को समझ लिया। उन्होंने यह महसूस किया कि अगर समाज को बदलना है, तो सबसे पहले महिलाओं को शिक्षित करना होगा। 1848 में, सावित्रीबाई और ज्योतिराव फुले ने पुणे में भारत का पहला बालिका विद्यालय शुरू किया। यह कदम उस समय के लिए अभूतपूर्व था। समाज के रुढिवादी लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया। जब सावित्रीबाई स्कूल पढ़ाने जाती थीं, तो लोग उन पर पत्थर, गोबर और कीचड़ फेंकते थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वह एक अतिरिक्त साड़ी लेकर घर से निकलती थीं ताकि स्कूल पहुंचकर कपड़े बदल सकें और पढ़ाना जारी रख सकें। सावित्रीबाई फुले को भारत की पहली महिला शिक्षिका कहा जाता है। उन्होंने केवल एक स्कूल ही नहीं, बल्कि कई विद्यालय खोले। उन्होंने दलित और पिछड़े वर्ग की लड़कियों को भी शिक्षा देने का कार्य किया जो उस समय एक बड़ा सामाजिक अपराध माना जाता था। उनकी शिक्षा नीति समानता और स्वतंत्रता पर आधारित थी। उनका मानना था कि शिक्षा ही वह हथियार है, जिससे समाज में फैले अज्ञानता और भेदभाव को खत्म किया जा सकता है। सावित्रीबाई फुले का योगदान केवल शिक्षा तक सीमित नहीं था। उन्होंने समाज में व्याप्त कई कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। बाल विवाह और सती प्रथा के खिलाफ संघर्ष उन्होंने बाल विवाह का विरोध किया और विधवा महिलाओं के पुनर्विवाह का समर्थन किया। उस समय विधवाओं को बहुत ही कठोर जीवन जीना पड़ता था। सावित्रीबाई ने उनके लिए आश्रय स्थल भी बनाए। उन्होंने दलितों और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए भी संघर्ष किया। उन्होंने समाज में समानता का संदेश दिया और जातिगत भेदभाव के खिलाफ आंदोलन चलाया। उन्होंने एक ऐसा केंद्र शुरू किया जहां विधवा महिलाएं अपने बच्चों को जन्म दे सकती थीं और उन्हें सुरक्षित रख सकती थीं। यह उस समय एक बहुत बड़ा कदम था, क्योंकि समाज में विधवाओं को अपमान और बहिष्कार का सामना करना पड़ता था। सावित्रीबाई फुले केवल एक समाज सुधारक ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील कवयित्री भी थीं। उनकी कविताओं में शिक्षा, समानता और मानवता का संदेश स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उनकी प्रमुख कृतियों में काव्य फुले और बावन काशी सुबोध रत्नाकर शामिल हैं। उनकी रचनाएं लोगों को जागरूक करने और समाज में बदलाव लाने का माध्यम बनीं। प्लेग महामारी में सेवा 1897 में पुणे में प्लेग की महामारी फैली। उस समय जब लोग संक्रमित मरीजों से दूर भाग रहे थे, सावित्रीबाई फुले ने आगे बढक़र उनकी सेवा की। उन्होंने अपने दत्तक पुत्र के साथ मिलकर मरीजों के लिए एक अस्पताल खोला। वह स्वयं मरीजों को अपने कंधे पर उठाकर अस्पताल लाती थीं। इसी सेवा के दौरान उन्हें प्लेग हो गया और 10 मार्च 1897 को उनका निधन हो गया। उन्होंने अपने जीवन का अंतिम क्षण भी मानव सेवा में ही बिताया। आज सावित्रीबाई फुले को भारत में महिला शिक्षा की जननी के रूप में सम्मानित किया जाता है। उनके सम्मान में कई विश्वविद्यालय, संस्थान और योजनाएं चलाई जा रही हैं। हर साल 3 जनवरी को उनका जन्मदिन महिला शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन हमें उनके संघर्षों और योगदान को याद दिलाता है। आज भले ही समाज में काफी बदलाव आ गया हो, लेकिन शिक्षा और समानता के क्षेत्र में अभी भी बहुत काम किया जाना बाकी है। सावित्रीबाई फुले के विचार आज भी हमें प्रेरित करते हैं कि हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार मिलना चाहिए। महिलाओं को समान अवसर मिलने चाहिए। समाज में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। सावित्रीबाई फुले का जीवन हमें सिखाता है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है। उन्होंने समाज की जंजीरों को तोडक़र एक नई राह दिखाई एक ऐसी राह, जिस पर चलकर आज लाखों महिलाएं अपने सपनों को साकार कर रही हैं। उनकी कहानी केवल इतिहास नहीं है, बल्कि एक प्रेरणा है एक ऐसी प्रेरणा, जो हमें आगे बढऩे और समाज को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित करती है। सावित्रीबाई फुले केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक आंदोलन हैं शिक्षा, समानता और मानवता का आंदोलन।

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राजस्थान में मौसमों का महासंगम: सर्दी, गर्मी, बारिश और पतझड़ एक मंच पर

सिरोही। कभी ग्लोबल वार्मिंग की चिंता, कभी जंगलों की कटाई पर बहस, तो कभी धरती के अंधाधुंध दोहन की खबरें। इन सबके बीच अब एक नया चमत्कार देखने को मिल रहा है। लगता है जैसे प्रकृति ने भी लोकतंत्र अपना लिया हो और सभी ऋतुओं को एक साथ भागीदारी दे दी हो। सुबह-सुबह जब नींद खुलती है तो लगता है मानो सर्दी ने फिर से वापसी कर ली हो। लोग कंबल में दुबके रहते हैं, चाय की चुस्की लेते हुए सोचते हैं कि अभी तो अप्रेल है, ये जनवरी वाला एहसास क्यों? लेकिन जैसे ही घड़ी दोपहर की ओर बढ़ती है, वही सर्दी अचानक छुट्टी पर चली जाती है और गर्मी बिना बुलाए मेहमान की तरह आ धमकती है। धूप इतनी तेज कि लगता है सूरज ने भी ओवरटाइम शुरू कर दिया है। दोपहर में पंखा, कूलर और एसी सब एक साथ चालू हो जाते हैं, और लोग सोचते हैं कि अब तो पूरी तरह गर्मी आ गई। लेकिन शाम होते-होते आसमान का मिजाज बदल जाता है। बादल घिर आते हैं, हवा में नमी बढ़ जाती है और कभी-कभी तो बारिश भी ऐसे होती है जैसे सावन का महीना चल रहा हो। अगर किस्मत ज्यादा मेहरबान हो तो ओले भी गिर जाते हैं। मानो मौसम ने सरप्राइज पैकेज दे दिया हो। सडक़ किनारे पेड़ों को देखें तो वे भी कंफ्यूज नजर आते हैं। कहीं हरे-भरे पत्ते, तो कहीं सूखे पत्तों की चादर बिछी हुई जैसे पतझड़ और बसंत ने समझौता कर लिया हो आखिर ये सब हो क्यों रहा है? विशेषज्ञ कहते हैं कि यह ग्लोबल वार्मिंग का असर है। यानी पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है और मौसम का संतुलन बिगड़ रहा है। लेकिन आम आदमी की भाषा में कहें तो प्रकृति अब नाराज है। वर्षों से हो रही जंगलों की कटाई, नदियों का सूखना, पहाड़ों का टूटना और जमीन का अंधाधुंध इस्तेमाल इन सबने मिलकर मौसम को भी अस्थिर कर दिया है। पहले जहां हर ऋतु का अपना एक तय समय होता था। सर्दी सर्दियों में, गर्मी गर्मियों में और बारिश अपने मौसम में। अब वो समय-सारणी भी गड़बड़ा गई है। ऐसा लगता है जैसे मौसम विभाग की फाइलें भी मिश्रित हो गई हों और किसी को समझ नहीं आ रहा कि कौनसी ऋतु कब आएगी। इस बदलाव का असर सिर्फ लोगों की दिनचर्या पर ही नहीं, बल्कि खेती-किसानों पर भी पड़ रहा है। किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं। वे तय नहीं कर पा रहे कि कब बोवाई करें और कब कटाई। बारिश समय पर नहीं होती, या फिर इतनी ज्यादा हो जाती है कि फसल खराब हो जाती है। कभी ओले गिर जाते हैं, तो कभी अचानक गर्मी बढ़ जाती है। जिससे फसलें झुलस जाती हैं। इंसान खुद इस स्थिति का जिम्मेदार है और फिर उसी पर चर्चा भी करता है। एक तरफ पेड़ों की कटाई जारी है, दूसरी तरफ पर्यावरण बचाओ के नारे लगाए जा रहे हैं। प्लास्टिक का उपयोग कम करने की बात होती है, लेकिन बाजार में हर चीज प्लास्टिक में ही मिलती है। यानी हम समस्या भी खुद पैदा कर रहे हैं और समाधान भी भाषणों में ढूंढ रहे हैं। सिरोही जैसे छोटे शहरों में भी अब बड़े शहरों जैसी समस्याएं दिखने लगी हैं। पहले यहां का मौसम अपेक्षाकृत संतुलित रहता था, लेकिन अब यहां भी वही मौसमी ड्रामा देखने को मिल रहा है। अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में शायद हमें मौसम शब्द की परिभाषा ही बदलनी पड़ेगी। प्रकृति हमें बार-बार संकेत दे रही है कि अब भी समय है संभलने का। अगर हमने अब भी ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में हालात और भी बिगड़ सकते हैं। यह सिर्फ तापमान का सवाल नहीं है, बल्कि हमारे अस्तित्व का सवाल है। अगर मौसम ही स्थिर नहीं रहेगा तो जीवन भी अस्थिर हो जाएगा।

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सिरोही: सेंट जोसेफ चर्च में क्रॉस यात्रा और प्रार्थना से गूंजा वातावरण

सिरोही। शहर में गुड फ्राइडे के पावन अवसर पर सेंट जोसेफ कैथोलिक गिरजाघर में गहन श्रद्धा और आस्था के साथ ‘दुख भोग स्मरण’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पूरे गिरजाघर परिसर में आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला, जहां श्रद्धालु प्रभु यीशु मसीह के बलिदान को याद करते हुए भाव-विभोर नजर आए। कार्यक्रम की शुरुआत पल्ली पुरोहित फादर जोमी, फादर जोजी थॉमस और फादर जीबीन के नेतृत्व में हुई। उनके मार्गदर्शन में श्रद्धालुओं ने अनुशासन और श्रद्धा के साथ सभी धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। गिरजाघर के प्रवक्ता रणजी स्मिथ ने जानकारी देते हुए बताया कि क्रॉस यात्रा चर्च के मुख्य द्वार से प्रारंभ होकर परिसर के सामने समाप्त हुई। इस यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए, जिन्होंने प्रभु यीशु के कष्टों को स्मरण करते हुए 14 विभिन्न स्थानों पर घुटनों के बल बैठकर आराधना की। यह क्रॉस यात्रा ‘स्टेशंस ऑफ द क्रॉस’ के रूप में जानी जाती है, जिसमें प्रभु यीशु के जीवन के अंतिम क्षणों और उनके बलिदान को याद किया जाता है। यात्रा के दौरान वातावरण पूरी तरह शांत और भक्ति से ओतप्रोत रहा। श्रद्धालुओं ने हाथों में क्रॉस लेकर प्रार्थना की और प्रभु यीशु के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कई लोग भावुक होकर प्रार्थना करते नजर आए, जिससे पूरा माहौल आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। क्रॉस यात्रा के समापन के बाद लगभग 10 मिनट के विश्राम के पश्चात गिरजाघर के भीतर प्रार्थना और आराधना कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से पवित्र बाइबल का वाचन किया। बाइबल वाचन में प्रभु यीशु के जीवन, उनके संघर्ष, त्याग और मानवता के लिए दिए गए संदेशों का विस्तार से वर्णन किया गया। श्रद्धालुओं ने ध्यानपूर्वक इन शिक्षाओं को सुना और अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। गिरजाघर के भीतर गूंजती प्रार्थनाओं और भजनों ने वातावरण को और अधिक पवित्र बना दिया। हर ओर शांति, भक्ति और आत्मचिंतन का माहौल नजर आया। ईश्वर में अटूट विश्वास से ही दूर होंगे दुख- फादर जीबीन इस अवसर पर फादर जीबीन ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए प्रभु यीशु के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यीशु मसीह ने अपने जीवन में अनेक कष्टों को सहन किया, लेकिन उन्होंने कभी भी ईश्वर पर विश्वास नहीं छोड़ा। उन्होंने बाइबल के एक महत्वपूर्ण संदेश को साझा करते हुए कहा किवे क्या कर रहे हैं, वे नहीं जानते, उन्हें माफ किया जाए। फादर जीबीन ने बताया कि यह संदेश हमें क्षमा, प्रेम और सहनशीलता की सीख देता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब दुनिया भौतिकवाद की ओर तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में इंसान अपने रिश्तों और समाज से दूर होता जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास बनाए रखना चाहिए और दूसरों के साथ प्रेम व सद्भाव का व्यवहार करना चाहिए। फादर जीबीन ने अपने संबोधन में वर्तमान समय की चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के दौर में मनुष्य अपनी भौतिक आवश्यकताओं को पूरा करने की दौड़ में इतना व्यस्त हो गया है कि वह आध्यात्मिकता से दूर होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि समाज में तनाव, अशांति और असंतोष बढ़ता जा रहा है। ऐसे समय में प्रार्थना ही एक ऐसा माध्यम है, जो मनुष्य को शांति, संतुलन और सच्चे मार्ग की ओर ले जा सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे अपने जीवन में नियमित रूप से प्रार्थना करें और ईश्वर के प्रति अपनी आस्था को मजबूत बनाए रखें। श्रद्धा, समर्पण और आत्मचिंतन का प्रतीक बना गुड फ्राइडे गुड फ्राइडे का यह आयोजन सिरोही में केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आध्यात्मिक जागरूकता का एक महत्वपूर्ण अवसर बनकर सामने आया। इस दिन श्रद्धालुओं ने प्रभु यीशु के बलिदान को याद करते हुए अपने जीवन की गलतियों पर विचार किया और बेहतर इंसान बनने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी ने शांति, प्रेम और भाईचारे का संदेश देते हुए समाज में सदभाव बनाए रखने की कामना की।

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मिडिल ईस्ट जंग का सीधा असर: राजस्थान में तेल के टिन पर महंगाई की मार, 200 रुपए तक उछाल

राजस्थान में ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध का असर अब थाली तक पहुंच गया है। मुंबई तेल के 15 किलो के टिन की कीमतों में करीब 200 रुपए की वृद्धि दर्ज की गई है। इस वृद्धि ने आम जनता के रसोई बजट को प्रभावित किया है। इस रिपोर्ट में हम आपको ताजा तेल के भाव के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। मध्य-पूर्व तनाव का असर भारत की रसोई तक उदयपुर। मध्य-पूर्व में ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थिति ने न केवल वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया है, बल्कि इसका सीधा असर भारतीय बाजारों विशेषकर राजस्थान की आम जनता की रसोई तक पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेल की आपूर्ति में गिरावट के कारण तेल की कीमतों में अचानक वृद्धि दर्ज की गई है। खाद्य तेल की कीमतों में यह उछाल आम जनता के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। विशेषकर 15 किलो के तेल के टिन पर करीब 200 रुपए की बढ़ोतरी ने घरेलू बजट को प्रभावित किया है। यह वृद्धि सीधे तौर पर खाद्य तेल की कम आपूर्ति और बढ़ती मांग के कारण हुई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण बनी हुई है, जिससे तेल निर्यात प्रभावित हुआ है। राजस्थान के विभिन्न शहरों में, जैसे उदयपुर, जोधपुर, जयपुर, भी इस स्थति के प्रत्यक्ष प्रभाव देखे जा रहे हैं। आम जनता घरेलू आवश्यकताओं के लिए तेल के नए बढ़े हुए दामों को जूझ रही है। व्यापारियों का कहना है कि भविष्य में भी यह मूल्य स्थिर नहीं रहेंगे और अगर मध्य-पूर्व की स्थिति खराब होती रही तो कीमतों में और वृद्धि हो सकती है। सरकारी अधिकारी बाजार की निगरानी कर रहे हैं और वे आने वाले समय में आवश्यक कदम उठाने की तैयारियां कर रहे हैं ताकि आम जनता को ज्यादा परेशान नहीं होना पड़े। वहीं, विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि घरेलू उपयोग की तेल की बचत करे और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए जिससे बाजार में तेल की कमी को कुछ हद तक रोका जा सके। अंततः, मध्य-पूर्व के इस तनावपूर्ण युद्ध ने न केवल क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित किया है बल्कि खाद्य तेल जैसे जरूरी उपभोक्ता वस्त्रों की कीमतों पर भी गहरा असर डाला है। आम जनता के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, और कीमतों में तेजी के कारण घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा है। सरकार और बाजार के संयोजन से ही इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।

‘Patriot’ postponed: Mammootty-Mohanlal movie gets new release date
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Patriot’ की रिलीज़ टली: अब इस दिन सिनेमाघरों में दिखेगी Mammootty–Mohanlal की जोड़ी

केरल के प्रमुख मलयालम फिल्म उद्योग की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘Patriot’ की रिलीज़ में देरी की घोषणा की गई है। यह फिल्म, जिसमें दो दिग्गज अभिनेता मोहन्लाल और Mammootty मुख्य भूमिका में हैं, को कुछ अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण बाद में रिलीज़ किया जाएगा। फिल्म के निर्माता और निर्देशकों ने सोशल मीडिया के जरिए यह जानकारी साझा की है कि तकनीकी और उत्पादन से जुड़ी वजहों से पहले निर्धारित रिलीज़ तारीख को स्थगित किया गया है। हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया है कि फिल्म की गुणवत्ता और प्रस्तुति में किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा। ‘Patriot’ को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह है क्योंकि यह पहली बार है जब मालयालम सिनेमा के दो महानायक एक साथ स्क्रीन पर नजर आएंगे। दोनों अभिनेताओं की फैन फॉलोइंग बेहद विशाल है, और फिल्म के पोस्टर और ट्रेलर ने पहले ही काफी चर्चा बटोरी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म की कहानी सामाजिक मुद्दों और देशभक्ति के भाव पर आधारित है, जो दर्शकों को एक महत्वपूर्ण संदेश देने का प्रयास करेगी। फिल्म के निर्देशन और पटकथा में भी काफी मेहनत और रिसर्च की गई है ताकि इसे एक बेहतरीन कृति के रूप में पेश किया जा सके। निर्देशक ने कहा, ‘हम अपनी पूरी टीम के साथ काम कर रहे हैं ताकि फिल्म के हर पहलू में उत्कृष्टता सुनिश्चित की जा सके। देरी हमारे लिए भी निराशाजनक है, लेकिन हम चाहते हैं कि जब यह रिलीज़ हो, तो यह दर्शकों की उम्मीदों पर खरा उतरे।’ फिल्म उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि ‘Patriot’ की देरी का फायदा यह होगा कि टीम और भी बेहतर परिवर्तन कर सकेगी, जिससे अंततः फिल्म का स्तर और भी उन्नत होगा। हालांकि, प्रशंसकों को अब कुछ और इंतजार करना होगा। फिलहाल, मेकर्स जल्द ही नई रिलीज़ तारीख का ऐलान करने वाले हैं। तब तक दर्शक फिल्म से जुड़े अपडेट्स के लिए आधिकारिक चैनलों और सोशल मीडिया पेजों को फॉलो कर सकते हैं।

Ankahi, a supernatural thriller, mirrors social and cultural unease
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अंकही: रहस्य, डर और समाज की अनकही कहानी

नई दिल्ली : थिएटर प्रेमियों के लिए एक खुशखबरी है। आद्यम थिएटर ने अपने नए सीज़न का उद्घाटन रोहित चौधरी द्वारा निर्देशित हिंदी मंचन “द वुमन इन ब्लैक” के साथ किया है, जो कि सुसान हिल के पुस्तक पर आधारित है। यह नाटक 90 मिनट का एक मनोरंजक और रोमांचक मंचन है जो दर्शकों को शुरुआती से अंत तक बांधे रखने में सफल रहा है। “द वुमन इन ब्लैक” एक रहस्यमय और भयानक कहानी प्रस्तुत करता है जो दर्शकों के दिलों में सिहरन भर देने वाला अनुभव कराता है। इस नाटक का हिंदी अनुवाद और मंचन भारतीय दर्शकों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है, जिससे यह शैलीगत और भाषाई दृष्टिकोण से बेहद आकर्षक बना है। आद्य� थिएटर की यह नई शुरुआत इस बात का प्रमाण है कि क्लासिक साहित्य और आधुनिक थिएटर का बेहतरीन संगम दर्शकों को कैसे आकर्षित कर सकता है। इस नाटक के माध्यम से सुसान हिल की उपन्यास की गहराई और रहस्यपूर्ण पहलुओं को हिंदी रंगमंच पर प्रभावशाली रूप से पेश किया गया है। आपके मनोरंजन के साथ-साथ नाटक में अपनाई गई कहानी कहने की शैली और कलाकारों के दमदार अभिनय ने भी दर्शकों के बीच इसे लोकप्रिय बनाया है। रोहित चौधरी द्वारा निर्देशित इस नाटक ने मंचन के हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया है, जिससे इसकी पेशकश श्रोताओं के लिए यादगार बनती है। अध्ययन, साहित्य और प्रदर्शन कला के क्षेत्र में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह नाटक अनिवार्य रूप से देखने योग्य है। आद्यम थिएटर की यह नई पेशकश हिंदी थिएटर प्रेमियों के लिए एक वरदान साबित होगी और आने वाले समय में अधिक ऐसी प्रस्तुतियों का मार्ग प्रशस्त करेगी। यदि आप थिएटरकला में रूचि रखते हैं और मनोरंजन के साथ-साथ विचारशील और संवेदनशील किस्से देखना पसंद करते हैं, तो “द वुमन इन ब्लैक” आपके लिए एक उत्कृष्ट विकल्प है। यह नाटक न केवल भयानक कहानियों का सूत्रधार है बल्कि इसकी प्रस्तुति में भारतीय रंगमंच की नवीनतम पहलुओं को भी देखा जा सकता है। अंततः, आद्यम थिएटर की इस पहल ने हिंदी रंगमंच की समृद्ध विरासत में एक नयी जीवंतता का संचार किया है। यह नाटक दर्शकों को अपनी सीटों से बांध कर रखता है और रंगमंच के जादू की सच्ची परिभाषा को समझने का मौका देता है।

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तीन अहम स्थानों पर अंडरब्रिज निर्माण की मांग

सिरोही में बढ़ती ट्रैफिक समस्या पर बड़ा कदम सांसद लुम्बाराम चौधरी ने नितिन गडकरी से की मुलाकात सिरोही। जिले में राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगातार बढ़ते यातायात दबाव और सडक़ दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए अब समाधान की दिशा में पहल तेज हो गई है। सिरोही-जालोर के सांसद लुम्बाराम चौधरी ने केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर जिले के तीन महत्वपूर्ण स्थानों पर अंडरब्रिज निर्माण की मांग उठाई। सांसद चौधरी ने मंत्री गडकरी को अवगत कराया कि सिरोही जिले से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-62 और राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-27 पर वाहनों का दबाव तेजी से बढ़ रहा है। इन मार्गों पर भारी वाहनों, स्थानीय यातायात और पैदल यात्रियों की एक साथ आवाजाही के कारण स्थिति लगातार जटिल होती जा रही है। उन्होंने बताया कि इन राजमार्गों पर कई ऐसे स्थान हैं जहां पर्याप्त सुरक्षा उपायों का अभाव है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। विशेष रूप से ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में यह समस्या अधिक गंभीर रूप ले रही है। सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि जिन स्थानों पर अंडरब्रिज की मांग की गई है, वे क्षेत्र स्कूलों, बाजारों और आवासीय इलाकों के पास स्थित हैं। यहां रोजाना बड़ी संख्या में छात्र, महिलाएं और आमजन सडक़ पार करते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए अंडरब्रिज का निर्माण अत्यंत आवश्यक बताया गया। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल दुर्घटनाओं में कमी लाएगा, बल्कि आमजन को भी बड़ी राहत देगा। इन तीन स्थानों पर रखी गई अंडरब्रिज की मांग सांसद लुम्बाराम चौधरी ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष तीन प्रमुख स्थानों का प्रस्ताव रखा जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग-62 पर साणेश्वर महादेव मंदिर रोड जहां यह क्षेत्र धार्मिक आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ स्थानीय आवाजाही का भी प्रमुख मार्ग है। यहां श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की आवाजाही अधिक रहती है। डॉ. भीमराव अंबेडकर राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय के पास एचएच-62 जहां मेडिकल कॉलेज के आसपास मरीजों, स्टाफ और विद्यार्थियों की आवाजाही अधिक रहती है, जिससे यहां सुरक्षित पारगमन की आवश्यकता बेहद जरूरी है। राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर आबूरोड स्थित हनुमान टेकरी, यह स्थान धार्मिक और स्थानीय दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है, जहां अक्सर भीड़ रहती है और सडक़ पार करना जोखिम भरा होता है। सांसद चौधरी ने कहा कि अंडरब्रिज निर्माण से न केवल सडक़ दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि यातायात भी सुचारू होगा। इससे स्थानीय लोगों, विद्यार्थियों और श्रद्धालुओं को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध होगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस तरह की आधारभूत संरचना का विकास क्षेत्रीय प्रगति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इससे सिरोही जिले में विकास को नई गति मिलेगी। केंद्रीय मंत्री ने दिया सकारात्मक आश्वासन मुलाकात के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सांसद की मांगों को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को प्रस्तावों का परीक्षण करने के निर्देश देने का आश्वासन दिया। मंत्री ने कहा कि सडक़ सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है और जहां भी आवश्यक होगा, वहां उपयुक्त कदम उठाए जाएंगे।

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