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आबूराज को स्वच्छता में रोल मॉडल बनाएंगे- गुप्ता

आबूराज। आबूराज यानि माउंट आबू जो प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी विशेष पहचान रखता है, अब स्वच्छता के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत नगर पालिका आबूराज में आयोजित एक महत्वपूर्ण स्वच्छता कार्यशाला में प्रदेश के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर के.के. गुप्ता ने स्पष्ट रूप से कहा कि मुख्यमंत्री के स्वच्छता संकल्प को पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ धरातल पर उतारना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इस अभियान में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कार्यशाला में नगर पालिका के अधिकारी, कर्मचारी, जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। गुप्ता ने स्वच्छता के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए इसे केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि जन-जन से जुड़ा राष्ट्रीय अभियान बताया। उन्होंने कहा कि आबूराज जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल की स्वच्छता सीधे प्रदेश और देश की छवि से जुड़ी होती है, इसलिए यहां विशेष ध्यान देना बेहद आवश्यक है। गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वयं स्वच्छता अभियान की प्रगति की नियमित समीक्षा करते हैं और हर सप्ताह व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर कार्यों की स्थिति की जानकारी लेते हैं। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई, तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए पूरी ईमानदारी और तत्परता के साथ काम करने का आह्वान किया। स्वच्छ भारत मिशन की महत्ता को रेखांकित करते हुए गुप्ता ने कहा कि यह अभियान वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया था, जिसने देश में स्वच्छता के प्रति नई जागरूकता पैदा की है। इस अभियान के तहत देशभर में लगभग 12 करोड़ शौचालयों का निर्माण हुआ, जिससे विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को बड़ी राहत मिली। कोरोना महामारी के दौरान इन शौचालयों का महत्व और अधिक स्पष्ट हुआ, जब लोगों को घरों में ही रहना पड़ा। उन्होंने स्वच्छता और स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंध को भी उजागर किया। गुप्ता ने कहा कि गंदगी और अस्वच्छता के कारण पहले हर वर्ष लाखों लोग बीमारियों का शिकार होते थे और कई लोगों की जान भी चली जाती थी। लेकिन अब स्वच्छता के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण इन आंकड़ों में गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ वातावरण न केवल बीमारियों को कम करता है, बल्कि जीवन स्तर को भी बेहतर बनाता है, इसलिए हर नागरिक को इसे अपनी आदत में शामिल करना चाहिए। कार्यशाला में निकायों की रैंकिंग व्यवस्था की भी जानकारी दी गई। गुप्ता ने बताया कि प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को स्वच्छता के आधार पर चार श्रेणियों—ए, बी, सी और डी में विभाजित किया गया है। ए श्रेणी में उत्कृष्ट कार्य करने वाले निकाय शामिल होंगे, जबकि बी श्रेणी में संतोषजनक कार्य करने वाले निकाय आएंगे। सी श्रेणी में सुधार की आवश्यकता वाले और डी श्रेणी में गंभीर लापरवाही वाले निकायों को रखा गया है। इस व्यवस्था से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और जवाबदेही तय होगी। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण को स्वच्छता अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए गुप्ता ने निर्देश दिए कि हर घर से नियमित और समयबद्ध तरीके से कचरा एकत्र किया जाए। गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग संग्रहित करना अनिवार्य किया जाए और सुबह 10 बजे से पहले यह कार्य पूरा कर लिया जाए। एक वाहन को अधिकतम 400 घरों तक ही सीमित रखने के निर्देश दिए गए, ताकि कार्य की गुणवत्ता बनी रहे। इसके अलावा, सिंगल यूज प्लास्टिक पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश भी दिए गए। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाने की बात कही गई। सामुदायिक शौचालयों और मूत्रालयों की सफाई दिन में कम से कम तीन बार सुनिश्चित करने, पानी की पर्याप्त व्यवस्था रखने और उनके रखरखाव पर विशेष ध्यान देने को कहा गया, ताकि लोग उनका अधिक से अधिक उपयोग करें। व्यावसायिक क्षेत्रों में रात्रिकालीन सफाई को अनिवार्य बताते हुए कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया। उन्हें रेडियम जैकेट पहनने और निर्धारित सीमा में कार्य करने के निर्देश दिए गए। शहर के सभी खाली प्लॉटों की सफाई सुनिश्चित करने के लिए पहले सूचना जारी करने और फिर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। गुप्ता ने बाग-बगीचों, पार्कों और पर्यटन स्थलों की स्वच्छता और सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इन स्थानों पर साफ-सफाई, हरियाली, बच्चों के झूले और अन्य सुविधाएं बेहतर होनी चाहिए। इसके साथ ही सडक़ों, नालियों, डिवाइडरों और बिजली व्यवस्था के रखरखाव को भी स्वच्छता अभियान का हिस्सा बताया गया। अवैध मीट-मांस की दुकानों पर रोक लगाने और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। झीलों और तालाबों में गंदे पानी और सीवरेज के प्रवेश को रोकने तथा जल स्रोतों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। अंत में गुप्ता ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से आबूराज न केवल पर्यटन, बल्कि स्वच्छता के क्षेत्र में भी पूरे देश के लिए एक मिसाल बन सकता है।

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जैसलमेर में दिखा दुर्लभ कैरेकल का कुनबा, रेडियो कॉलर से खुल रहे रहस्य

जैसलमेर। भारत की जैव विविधता दुनिया में सबसे समृद्ध मानी जाती है, लेकिन इसी विविधता के बीच कुछ ऐसी प्रजातियां भी हैं जो धीरे-धीरे विलुप्ति के कगार पर पहुंच रही हैं। ऐसी ही एक रहस्यमयी और दुर्लभ प्रजाति है कैरेकल बिल्ली, जिसे आमतौर पर रेगिस्तानी लिंक्स भी कहा जाता है। इसकी तेज रफ्तार, अद्भुत छलांग लगाने की क्षमता और विशिष्ट काले कानों की लटें इसे अन्य जंगली बिल्लियों से अलग बनाती हैं। राजस्थान के जैसलमेर जिले में दुर्लभ वन्यजीव कैरेकल को लेकर बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और वन विभाग की संयुक्त पहल के तहत इस रहस्यमयी बिल्ली पर लगातार रिसर्च की जा रही है। हाल ही में घोटारू क्षेत्र में रेडियो कॉलर और मोशन सेंसिंग कैमरे की मदद से कैरेकल का पूरा कुनबा कैमरे में कैद हुआ है। यह न केवल वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बड़ी सफलता है, बल्कि इससे इस विलुप्तप्राय प्रजाति के व्यवहार और अस्तित्व को समझने में भी मदद मिलेगी। कैरेकल एक बेहद दुर्लभ और शर्मीली जंगली बिल्ली है, जो मुख्य रूप से अफ्रीका, मध्य एशिया और भारत के कुछ सीमित क्षेत्रों में पाई जाती है। भारत में इसकी मौजूदगी बेहद कम हो चुकी है और यह अब विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी है। इसकी पहचान इसके लंबे काले बालों वाले कान, फुर्तीले शरीर और तेज शिकार करने की क्षमता से होती है। हालांकि यह असली लिंक्स प्रजाति से अलग है। जैसलमेर के घोटारू इलाके में लगाए गए मोशन सेंसिंग कैमरे ने एक बेहद खास पल को कैद किया कैरेकल का पूरा कुनबा एक साथ नजर आया। यह दृश्य इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कैरेकल आमतौर पर अकेले रहने वाला जीव माना जाता है। वन विभाग द्वारा लगाए गए कैमरों और रेडियो कॉलर से यह पहली बार स्पष्ट रूप से सामने आया है कि इस क्षेत्र में कम से कम तीन कैरेकल मौजूद हैं। इससे पहले इनकी संख्या को लेकर केवल अनुमान ही लगाए जाते थे। वन विभाग ने करीब 7 दिन पहले एक कैरेकल पर रेडियो कॉलर लगाया था। इस कॉलर की मदद से वैज्ञानिक और वन अधिकारी उसके मूवमेंट, व्यवहार और शिकार के पैटर्न पर नजर रख पा रहे हैं। हाल के वर्षों में भारत के कुछ हिस्सों, विशेषकर राजस्थान और गुजरात के शुष्क क्षेत्रों में इसके देखे जाने की खबरें सामने आई हैं, जिससे वन्यजीव प्रेमियों और वैज्ञानिकों में उत्साह तो है, लेकिन इसकी घटती संख्या चिंता का विषय भी बन गई है।कैरेकल एक मध्यम आकार की जंगली बिल्ली है जो अफ्रीका, मध्य-पूर्व और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों में पाई जाती है। भारत में यह बेहद दुर्लभ है और मुख्यत: पश्चिमी भारत के सूखे और अर्ध-रेगिस्तानी इलाकों में ही देखी जाती है। वह किस प्रकार के शिकार को प्राथमिकता देता है। रेगिस्तानी परिस्थितियों में वह कैसे जीवित रहता है वन विभाग अब इस दुर्लभ जीव को बचाने के लिए पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मुख्य वन संरक्षक जोधपुर, अनूप के. आर. के अनुसार, जैसलमेर वन विभाग की टीम लगातार कैमरा ट्रैप के जरिए कैरेकल की निगरानी कर रही है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें लोगों को बताया जा रहा है कि कैरेकल का शिकार करना कानूनन अपराध है। यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त दंडनीय है।  

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धुरंधर: रहमान डकैत के किरदार के लिए 2 साल की मेहनत, अक्षय खन्ना ने जीता दिल

रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल की है। फिल्म के पहले पार्ट में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रहा रहमान डकैत का किरदार, जिसे निभाने के लिए कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा को लगभग दो साल का समय लगा। अक्षय खन्ना ने इस भूमिका को पर्दे पर दमदार और जीवंत अंदाज में निभाया, जिससे दर्शक और आलोचक दोनों ने उनकी खूब तारीफ की। लंबी और चुनौतीपूर्ण कास्टिंग मुकेश छाबड़ा ने बताया कि इस किरदार के लिए उन्होंने लगभग 300 एक्टर्स से ऑडिशन लिए। “मैं चाहता था कि स्क्रीन पर दिखने वाले हर किरदार को मैं खुद चुनूं। हमने दो साल तक मेहनत की और 300 लोगों के ऑडिशन लिए।” कास्टिंग के दौरान कई बड़े कलाकारों ने कहानी सुने बिना ही रिजेक्ट कर दिया। इस बात से पता चलता है कि सही कास्टिंग किसी फिल्म की सफलता में कितनी अहम भूमिका निभाती है। रहमान डकैत: सबसे चुनौतीपूर्ण किरदार मुकेश छाबड़ा ने कहा कि रहमान डकैत का किरदार सबसे चुनौतीपूर्ण था। कई बड़े एक्टर्स ने साफ मना कर दिया। उनका कहना था कि वे किसी भी मल्टीस्टारर फिल्म का हिस्सा नहीं बनना चाहते। “हमने कई नामों पर चर्चा की, लेकिन लगातार मना कर रहे थे। उनका कहना था कि वे किसी भी मल्टीस्टारर फिल्म का हिस्सा नहीं बनना चाहते।” इस किरदार के लिए सही अभिनेता ढूंढना मुश्किल था क्योंकि इसे पर्दे पर प्रभावशाली और वास्तविक दिखाना जरूरी था। अक्षय खन्ना बने अंतिम विकल्प अंततः अक्षय खन्ना इस भूमिका के लिए चुने गए। मुकेश के अनुसार, अक्षय में वह क्षमता थी कि उन्हें कोई भी किरदार दिया जाए, वे उसे पूरी शिद्दत और प्रभावशाली अंदाज में निभा सकते हैं। जब मुकेश ने उन्हें कहानी सुनाई, तो अक्षय ने कहा, “तू पागल हो गया है।” फिर कहानी सुनने के बाद उन्होंने कहा, “शानदार। मैं यह फिल्म कर रहा हूँ।” “नरेशन सुनने के बाद अक्षय ने कहा, ‘शानदार।’ और एक दिन में ही उन्होंने मुझे दोबारा फोन किया और कहा कि मैं यह फिल्म कर रहा हूं।” पर्दे पर सफलता फिल्म के पहले पार्ट के बाद यह साफ हो गया कि अक्षय खन्ना का किरदार दर्शकों को सबसे ज्यादा प्रभावित कर गया। रणवीर सिंह के साथ उनकी केमिस्ट्री ने फिल्म को और मज़बूत किया। सोशल मीडिया पर उनके अभिनय की खूब तारीफ हुई। दर्शक और आलोचक दोनों ने अक्षय के रहमान डकैत किरदार की सराहना की। मुकेश ने बताया कि उन्होंने हर किरदार की कास्टिंग खुद की, चाहे वह छोटे सीन के लिए हो या सिर्फ डायलॉग वाले रोल के लिए। उनका उद्देश्य था कि फिल्म में हर किरदार को पूर्ण प्रभाव और वास्तविकता मिले। बाद में पछताए एक्टर्स फिल्म रिलीज होने के बाद कई बड़े सितारे मुकेश से जुड़े और पछताए कि उन्होंने यह रोल क्यों नहीं लिया। यह दिखाता है कि सही कास्टिंग और धैर्य किसी फिल्म की सफलता में अहम भूमिका निभाते हैं। अक्षय खन्ना ने किरदार को पर्दे पर जीवंत बनाकर फिल्म को अलग पहचान दी। कास्टिंग डायरेक्टर की मेहनत मुकेश ने कहा कि उन्होंने हर किरदार के लिए विस्तार से ऑडिशन लिया। किरदारों का चयन सावधानी और धैर्य से किया गया। पर्दे पर दिखने वाला हर किरदार वास्तविक और प्रभावशाली हो, यह उनकी प्राथमिकता थी। “मैं चाहता था कि स्क्रीन पर दिखने वाले हर किरदार का प्रभाव दिखाई दे। इसके लिए हमने दो साल तक मेहनत की।” निष्कर्ष ‘धुरंधर: द रिवेंज’ ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल की।रहमान डकैत का किरदार, जिसे निभाने में दो साल और 300 रिजेक्ट्स लगे, अक्षय खन्ना ने पर्दे पर जीवंत कर दर्शकों का दिल जीत लिया।मुकेश छाबड़ा की मेहनत और धैर्य इस सफलता का बड़ा कारण है।यह फिल्म साबित करती है कि सही कास्टिंग, मेहनत और धैर्य किसी किरदार और फिल्म को यादगार बना सकते हैं।

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सड़क हादसा: पूर्व मॉडल और स्टेज एंकर हर्षिल कालिया की मौत

जयपुर। राजधानी जयपुर में सोमवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में पूर्व मॉडल और वर्तमान में स्टेज एंकरिंग कर रही युवती की मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब वह अपनी सहेली के घर से लौट रही थी। एक्सीडेंट थाना (साउथ) के हेड कॉन्स्टेबल कैलाश के अनुसार, मृतका की पहचान मानसरोवर स्थित एसएफएस कॉलोनी निवासी हर्षिल कालिया (30), पुत्री अरविंद कालिया के रूप में हुई है। सोमवार रात करीब 11:30 बजे वह कार से अपने घर लौट रही थी।बताया जा रहा है कि शिप्रापथ रोड पर नगर निगम कार्यालय के पास मोड़ पर अचानक कार अनियंत्रित हो गई। तेज रफ्तार के चलते वाहन डिवाइडर पर चढ़ गया और पलट गया। हादसा इतना भीषण था कि कार के पलटने से युवती को गंभीर चोटें आईं।  हादसे की सूचना मिलते ही शिप्रापथ थाना और एक्सीडेंट साउथ पुलिस मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों की मदद से कार को सीधा किया गया और गंभीर रूप से घायल हर्षिल को तत्काल जयपुरिया अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने इलाज के दौरान उसे मृत घोषित कर दिया पुलिस के अनुसार, हर्षिल अपनी सहेली से मिलकर घर लौट रही थी। दुर्घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसकी जांच की जा रही है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।

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दादा आदिनाथ के मस्तक पर स्वर्ण आभूषण एवं डायमंड तिलक चढ़ाया

माउंट आबू (महावीर जैन)। विश्वविख्यात आबू देलवाड़ा जैन तीर्थ एक बार फिर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उत्साह से सराबोर नजर आया, जब प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के मस्तक पर स्वर्ण आभूषण एवं डायमंड जडि़त तिलक चढ़ाने का आयोजन संपन्न हुआ। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इसने हजारों वर्षों पुरानी परंपराओं को जीवंत करते हुए जैन समाज की अटूट आस्था को भी प्रदर्शित किया। यह पावन कार्यक्रम मंगलवार को शुभ मुहूर्त में आचार्य भगवंत भाग्येशसूरि महाराज की निश्रा में आयोजित किया गया। इस अवसर पर चतुर्विद संघ की उपस्थिति, गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा, और मंदिर परिसर में गूंजते जय-जय श्री आदिनाथ के जयकारों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। प्राचीनता और गौरव का प्रतीक है देलवाड़ा जैन तीर्थ आबू देलवाड़ा जैन तीर्थ जैन धर्म के पांच प्रमुख प्राचीन तीर्थों में से एक माना जाता है। लगभग 1000 वर्षों का इतिहास समेटे यह तीर्थ अपनी अद्भुत शिल्पकला, धार्मिक महत्व और आध्यात्मिक वातावरण के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। वर्ष 2031 में इस ऐतिहासिक तीर्थ की 1000वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी, जिसके लिए अभी से तैयारियां और उत्साह देखने को मिल रहा है। इस तीर्थ का निर्माण प्राचीन काल में महान दानवीरों और श्रावकों—भामाशाह तेजपाल एवं वस्तुपाल धन्नासेठ द्वारा करवाया गया था। उनकी भक्ति और समर्पण का यह अद्वितीय उदाहरण आज भी स्थापत्य कला के रूप में जीवंत है। संगमरमर पर की गई बारीक नक्काशी, मंदिर की कलात्मक संरचना और सूक्ष्म शिल्पकला इसे विश्व के प्रमुख धार्मिक स्थलों में विशेष स्थान दिलाती है। करीब 995 वर्षों के इतिहास में करोड़ों श्रद्धालु इस तीर्थ के दर्शन कर चुके हैं और यहां की दिव्यता का अनुभव कर चुके हैं। स्वर्ण आभूषण और डायमंड तिलक अर्पण हाल ही में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में भक्तजनों ने भगवान आदिनाथ की प्रतिमा के मस्तक पर लगभग दो किलो स्वर्ण से निर्मित आभूषण, डायमंड जडि़त तिलक, चक्षु एवं कपाली अर्पित किए। यह अर्पण केवल भौतिक भेंट नहीं, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और आस्था का प्रतीक है। कार्यक्रम के दौरान विधिविधान से पूजा-अर्चना के पश्चात जब भगवान की प्रतिमा को इन स्वर्ण आभूषणों से सुशोभित किया गया, तो मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। भगवान की प्रतिमा अत्यंत मनोहारी और दिव्य प्रतीत होने लगी, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और हर कोई इस अलौकिक दृश्य को अपने नेत्रों में बसाना चाहता था। आयोजन की भव्यता और धार्मिक उत्साह इस आयोजन की भव्यता देखते ही बनती थी। मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था। भक्ति संगीत, शंखनाद और मंत्रोच्चार के बीच जब शोभायात्रा निकली, तो पूरा वातावरण आध्यात्मिक उल्लास से भर गया। चतुर्विद संघ—साधु, साध्वी, श्रावक और श्राविका—की उपस्थिति ने इस आयोजन को और अधिक पवित्रता प्रदान की। भक्तजन पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए और पूरे श्रद्धाभाव के साथ कार्यक्रम में भाग लिया। इनकी रही उपस्थिति इस अवसर पर सिरोही जैन संघ और देलवाड़ा तीर्थ से जुड़े कई प्रमुख गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इनमें मुख्य रूप से टिलायत परिवार के कमलेश चौधरी, राकेश बोबावत, दिलीप कुमार वहितरा, पेढ़ी के अध्यक्ष पंकज गांधी, उपाध्यक्ष सुनील सिंघी, ट्रस्टी अनुभव सिंघी और प्रतीक शाह शामिल रहे। इसके अलावा पावापुरी तीर्थ जीव मैत्री धाम के चेयरमैन किशोर एच. संघवी, 35 वर्षों से वर्षीतप की तपस्या में लीन तपस्वी रत्न श्रीमती रतन बेन संघवी, श्रीमती सुधा बेन के. संघवी, मारोल जैन संघ के अध्यक्ष एवं ट्रस्टी नवलमल तातेड़, पारस तातेड़, संस्कार एन तातेड़, किरण कांकरिया और देलवाड़ा पेढ़ी के मुख्य प्रबंधक गोरधन सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। नवपद ओली के आराधकों की उपस्थिति ने इस आयोजन को और अधिक धार्मिक गरिमा प्रदान की। आचार्य भगवंत का प्रेरणादायक संदेश इस अवसर पर आचार्य भगवंत भाग्येशसूरि ने अपने प्रवचन में जैन धर्म के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में परमात्मा को अर्पण करने की परंपरा आदिकाल से चली आ रही है और यह आज भी उसी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है। उन्होंने कहा कि केवल भौतिक अर्पण ही नहीं, बल्कि आत्मिक साधना, त्याग, तप, जप और आराधना ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य होना चाहिए। जैन धर्म का मूल संदेश—अहिंसा, अपरिग्रह, सत्य, अचौर्य और ब्रह्मचर्य—मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाने का मार्ग दिखाता है। आचार्य ने आगे कहा कि जो व्यक्ति इन सिद्धांतों का पालन करता है, वह मोक्ष की ओर अग्रसर होता है। उन्होंने भक्तों को प्रेरित किया कि वे अपने जीवन में इन मूल्यों को अपनाएं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाएं। परंपरा और आधुनिकता का संगम यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि कैसे प्राचीन परंपराएं आज भी आधुनिक समाज में जीवित हैं। जहां एक ओर हजारों वर्ष पुरानी धार्मिक मान्यताओं का पालन किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नई पीढ़ी भी इन परंपराओं से जुड़ रही है। देलवाड़ा जैन तीर्थ न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह संस्कृति, कला और आध्यात्मिकता का संगम भी है। यहां आने वाला हर व्यक्ति केवल दर्शन ही नहीं करता, बल्कि आत्मिक शांति और सुकून का अनुभव भी करता है। 1000वीं वर्षगांठ की तैयारियां आगामी वर्ष 2031 में इस ऐतिहासिक तीर्थ की 1000वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी। यह अवसर न केवल जैन समाज के लिए, बल्कि पूरे देश और विश्व के लिए एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सव होगा। इस भव्य आयोजन के लिए विभिन्न स्तरों पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। मंदिर परिसर के विकास, सुविधाओं के विस्तार और आयोजन की रूपरेखा पर काम किया जा रहा है। उम्मीद है कि इस ऐतिहासिक अवसर पर लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचेंगे और इस गौरवशाली परंपरा के साक्षी बनेंगे।

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जहां कभी पसरा रहता था डर, वहां साथ-साथ दौड़ रहे पुलिस और पुनर्वासित माओवादी

बस्तर, जो पिछले चार दशकों तक माओवादी हिंसा और भय के लिए जाना जाता था, रविवार को नई उम्मीद और उत्साह का केंद्र बन गया। वही सड़कें, जहाँ कभी गोलियों की आवाजें गूंजती थीं, अब धावकों की धमक, जयकारों और उत्साह से गूँज रही थीं। इस बदलाव का प्रतीक बना बस्तर हेरिटेज मैराथन-2026, जिसने न केवल खेल का उत्सव बल्कि सामाजिक समरसता और बदलाव की कहानी पेश की। लगभग 10,000 प्रतिभागी इसमें शामिल हुए, जिनमें पुनर्वासित माओवादी, पुलिसकर्मी, आदिवासी युवा, महिलाएं और विदेशी खिलाड़ी शामिल थे। यह दृश्य उस सामाजिक बदलाव का प्रतीक था, जो कुछ साल पहले तक किसी की कल्पना में मुश्किल था। मैराथन का मार्ग और सांस्कृतिक उत्सव मैराथन की शुरुआत लालबाग मैदान से हुई और यह शहर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों से होकर चित्रकोट जलप्रपात तक पहुंची। लगभग 42 किलोमीटर के इस फुल मैराथन में दंतेश्वरी मंदिर, बस्तर दशहरा रथ और दलपत सागर जैसे स्थल शामिल थे। रास्ते में जनजातीय लोक कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य और संगीत के साथ धावकों का उत्साह बढ़ाते रहे। कहीं धुरवा नृत्य, कहीं गौर सिंग, तो कहीं मुंडाबाजा और गेड़ी नृत्य ने भाग लेने वालों को सांस्कृतिक अनुभव से जोड़ा। देश के विभिन्न राज्यों से आए धावकों के साथ 100 से अधिक विदेशी खिलाड़ी भी इस उत्सव का हिस्सा बने। पुनर्वासित माओवादी और पुलिसकर्मी की भागीदारी सबसे प्रेरक क्षण तब आया, जब पुनर्वासित माओवादी सुकमन ने कहा:“कल तक मैं इन रास्तों में एंबुश लगाता था, आज मैं रनिंग शूज पहनकर पदक जीतने के लिए दौड़ रहा हूँ।” सुकमन की साथी संमति ने बताया कि वही पुलिस जवान जो कभी उन्हें पकड़ने के लिए दौड़ते थे, आज पानी पिलाकर उनका हौसला बढ़ा रहे हैं। यह बदलाव दिखाता है कि पुरानी दुश्मनी सहयोग और समझदारी में बदल सकती है। प्रेरक कहानियाँ: हौसले की कोई उम्र नहीं मैराथन ने सिर्फ प्रतिस्पर्धा ही नहीं, बल्कि प्रेरक कहानियाँ भी गढ़ीं। पीयूष कुमार, कृषि महाविद्यालय के प्राचार्य, जिनका एक पैर नहीं था, उन्होंने 5 किलोमीटर की दौड़ पूरी की। उम्र की कोई सीमा नहीं, यह साबित करते हुए 5 साल के वंश और 72 वर्षीय गुरमील सिंह ने भी दौड़ में भाग लिया। इन कहानियों ने यह संदेश दिया कि शारीरिक बाधाएँ और उम्र किसी को हिम्मत हारने नहीं देती। विजेता और पुरस्कार फुल मैराथन (42 किमी) पुरुष वर्ग: टेडेजे किनेटो वाशे (इथियोपिया) महिला वर्ग: मेसेरेट मेंगिस्तु बस्तर से पुरुष: संजय कोर्राम, महिला: कुसुम शार्दुल हाफ मैराथन (21 किमी) पुरुष ओपन: मोनू कुमार, महिला ओपन: त्सेहे देसाले बस्तर से पुरुष: भावेष कुमार, महिला: कुमली पोयाम 10 किलोमीटर ओपन पुरुष: बबलू, महिला: पूनम जूनियर वर्ग पुरुष: सागर, महिला: लावण्या सब-जूनियर वर्ग पुरुष: मोहित धोंडू, महिला: अंजलि गुप्ता इन विजेताओं ने न केवल खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, बल्कि शांति और सहयोग का संदेश भी दिया। मैराथन का सामाजिक संदेश बस्तर हेरिटेज मैराथन-2026 केवल एक खेल आयोजन नहीं रहा। यह शांति, बदलाव और सामाजिक समरसता का प्रतीक बन गया। माओवादी हिंसा से प्रभावित लोगों ने अब खेल के माध्यम से समाज में अपनी जगह बनाई। पुलिस और पुनर्वासित माओवादी की दोस्ती और सहयोग ने दिखाया कि कभी दुश्मन भी सहयोगी बन सकते हैं। स्थानीय युवाओं, महिलाओं और आदिवासियों ने भागीदारी दिखाकर सकारात्मक सामाजिक संदेश दिया। निष्कर्ष बस्तर हेरिटेज मैराथन ने यह साबित किया कि भूतकाल का डर और हिंसा भी बदलाव और सहयोग में बदल सकते हैं। खेल ने सामाजिक समरसता, शांति और उत्साह का संदेश दिया। प्रतिभागियों की कहानियाँ यह दिखाती हैं कि हौसला, धैर्य और आत्मविश्वास किसी भी चुनौती को पार कर सकते हैं। पुनर्वासित माओवादी और पुलिसकर्मी की भागीदारी यह दर्शाती है कि पुरानी दुश्मनी भी दोस्ती और सहयोग में बदल सकती है। यह आयोजन अब बस्तर में शांति और सामाजिक बदलाव का प्रतीक बन गया है, जो आने वाले वर्षों में भी युवाओं और समाज को प्रेरित करता रहेगा।

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SSB Constable Tradesman Recruitment 2026: 827 पदों पर ऑनलाइन आवेदन आज से शुरू

सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने कॉन्स्टेबल (ट्रेडसमैन) पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया आज यानी 21 मार्च 2026 से शुरू कर दी है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 827 पदों पर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 20 अप्रैल 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती अभियान से जुड़ी जानकारी, पात्रता मानदंड, आयु सीमा, वेतन, और आवेदन प्रक्रिया नीचे विस्तार से दी गई है। भर्ती के बारे में सशस्त्र सीमा बल, भारत की सीमाओं की सुरक्षा में प्रमुख भूमिका निभाने वाला बल है। SSB में कॉन्स्टेबल ट्रेडसमैन के पदों पर भर्ती के जरिए उम्मीदवारों को सशस्त्र बलों के प्रशासनिक और तकनीकी कार्यों में शामिल होने का अवसर मिलता है। इस भर्ती में चयनित उम्मीदवारों को विभिन्न डिपार्टमेंट्स में कार्यरत होने का मौका मिलेगा। इस भर्ती के तहत उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा। यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है और उम्मीदवारों को रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि से पहले अपना फॉर्म भरना आवश्यक है। कुल पद और वेतन कुल पद: 827 पद का नाम: कॉन्स्टेबल (ट्रेडसमैन) वेतनमान: ₹21,700 – ₹69,100 प्रति माह इसके अलावा, चयनित उम्मीदवारों को विभिन्न भत्ते, जैसे रात्रिकालीन भत्ता, ई-पास और यात्रा भत्ता, भी प्रदान किया जाएगा। पात्रता मानदंड 1. शैक्षणिक योग्यता पद के अनुसार उम्मीदवार ने कक्षा 10वीं या 12वीं पास की हो। उम्मीदवार के पास पदानुसार आवश्यक तकनीकी या ट्रेड्समैन योग्यता भी होनी चाहिए। 2. आयु सीमा न्यूनतम आयु: 18 वर्ष अधिकतम आयु: पदानुसार 23, 25, या 27 वर्ष आरक्षित वर्ग को आयु में छूट: SC/ST – 5 वर्ष OBC – 3 वर्ष दिव्यांग उम्मीदवार – 10 वर्ष उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे आयु की गणना भर्ती की अंतिम तिथि के अनुसार करें। रजिस्ट्रेशन फीस सामान्य वर्ग: ₹100 SC/ST और महिला उम्मीदवार: शुल्क में छूट इस भर्ती में आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन है, और किसी भी उम्मीदवार से शुल्क जमा करने की कोई अतिरिक्त आवश्यकता नहीं होगी। चयन प्रक्रिया चयन मेरिट लिस्ट के आधार पर किया जाएगा। उम्मीदवारों को शारीरिक, तकनीकी और शैक्षणिक योग्यताओं के अनुसार मूल्यांकन किया जाएगा। मेरिट सूची में सफल होने वाले उम्मीदवारों को SSB द्वारा संबंधित विभाग में तैनात किया जाएगा। आवेदन कैसे करें ऑनलाइन आवेदन के लिए उम्मीदवार निम्न चरणों का पालन कर सकते हैं: SSB की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ। होमपेज पर Online Registration लिंक पर क्लिक करें। लिंक में SSB Constable Tradesman Recruitment 2026 विकल्प चुनें। मांगी गई व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी दर्ज करें। आवेदन फॉर्म जमा करें और उसका प्रिंट आउट निकालें। आवेदन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें आवेदन फॉर्म भरते समय सभी डॉक्यूमेंट तैयार रखें, जैसे शिक्षा प्रमाणपत्र, पहचान पत्र, और पासपोर्ट साइज फोटो। आवेदन जमा करने के बाद फॉर्म का प्रिंट आउट सुरक्षित रखें, भविष्य में चयन प्रक्रिया में इसे प्रस्तुत करना पड़ सकता है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि से पहले आवेदन जमा करें ताकि किसी तकनीकी समस्या के कारण आवेदन अधूरा न रहे। उम्मीदवारों के लिए टिप्स योग्यता और आयु जांचें: आवेदन से पहले शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा का ध्यान रखें। रिक्तियों का विवरण समझें: पदों की संख्या और आयु सीमा के अनुसार आवेदन करें। ऑनलाइन फॉर्म सावधानी से भरें: गलत जानकारी देने पर आवेदन निरस्त हो सकता है। डॉक्यूमेंट स्कैन और अपलोड करें: फॉर्म में मांगे गए सभी दस्तावेज अपलोड करना अनिवार्य है। फॉर्म जमा करने के बाद प्रिंट निकालें: भविष्य के लिए प्रिंट सुरक्षित रखें। भर्ती की विशेषताएं ऑनलाइन आवेदन: उम्मीदवार घर बैठे आवेदन कर सकते हैं। फीस में छूट: SC/ST/महिला उम्मीदवारों के लिए आवेदन निशुल्क है। वेतन और भत्ते: 21,700 – 69,100 रुपये मासिक, अतिरिक्त भत्ते और ई-पास। चयन: मेरिट लिस्ट और शारीरिक/तकनीकी मूल्यांकन के आधार पर। इस भर्ती के जरिए 827 उम्मीदवारों को सशस्त्र सीमा बल में स्थायी अवसर मिलेगा। यह नौकरी न केवल देश की सेवा करने का अवसर है, बल्कि उम्मीदवारों के लिए सुरक्षित और प्रतिष्ठित करियर विकल्प भी प्रदान करती है। अंतिम तिथि ऑनलाइन आवेदन शुरू: 21 मार्च 2026 अंतिम तिथि: 20 अप्रैल 2026 उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे समय पर आवेदन करें और किसी भी तकनीकी समस्या से बचने के लिए अंतिम हफ्ते में आवेदन करने से बचें। SSB Constable Tradesman Recruitment 2026 नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए सुनहरा अवसर है। योग्य उम्मीदवार इस अवसर का लाभ उठाकर सशस्त्र बल में अपनी सेवा और करियर की शुरुआत कर सकते हैं।

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हफ्ते में सिर्फ दो दिन योग और एक्सरसाइज से रहें फिट, बुढ़ापे तक हेल्दी

दो दिन में भी दिखता है फर्क आज की भागमभाग वाली जिंदगी में लोगों के पास अपनी सेहत का ध्यान रखने का समय कम है। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि फिट रहने के लिए रोज जिम जाना पड़ेगा, महंगे उपकरण खरीदने होंगे या घंटों योग और व्यायाम करना होगा। लेकिन नई स्टडी से पता चला है कि सप्ताह में केवल दो दिन योग और एक्सरसाइज करने से भी मांसपेशियों की ताकत, संतुलन और समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है। नई स्टडी में हुआ खुलासा अमेरिकन कॉलेज ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन के जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में लगभग 30 हजार वयस्कों के डेटा का विश्लेषण किया गया। स्टडी में पाया गया कि योग और सरल एक्सरसाइज जैसे स्क्वाट्स, पुश-अप्स, और घर के सामान को उठाने जैसी गतिविधियां भी मांसपेशियों को मजबूत बनाती हैं। मांसपेशियों की ताकत बढ़ने से शरीर का संतुलन सुधरता है, चलने-फिरने की गति बेहतर होती है और उम्र बढ़ने पर भी गिरने का खतरा कम रहता है। योग केवल फिटनेस को बनाए नहीं रखता, बल्कि यह दैनिक जीवन की गतिविधियों को आसान बनाता है—जैसे सीढ़ियां चढ़ना, घर का सामान लाना या घरेलू सामान लेकर चलना। सिर्फ दो दिन पर्याप्त हैं अध्ययन के अनुसार मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज रोज करने की जरूरत नहीं है। सप्ताह में दो दिन की एक्सरसाइज भी पर्याप्त लाभ देती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि मांसपेशियों में हरकत लाने वाली क्रियाएं शरीर के लिए बेहद फायदेमंद हैं। हालांकि, नियमितता जरूरी है। अधिक स्वस्थ रहने के लिए योग और व्यायाम सप्ताह में चार दिन तक जारी रखने की सलाह दी जाती है। मांसपेशियों के लिए जरूरी है व्यायाम विशेषज्ञों का कहना है कि मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाली एक्सरसाइज का मतलब है ऐसी गतिविधियां जिनमें आपकी मांसपेशियां किसी बाहरी बल या वजन के खिलाफ काम करें। उदाहरण के लिए, भारी सामान उठाना—इसमें वजन आपके शरीर को खींचता है और मांसपेशियां इसे संभालती हैं। 20 से 25 मिनट की एक्सरसाइज में पीठ, घुटने और कूल्हे की मांसपेशियों पर काम करना पर्याप्त होता है। सिर्फ टहलने से मांसपेशियां मजबूत नहीं होतीं, इसलिए योग और व्यायाम अनिवार्य हैं। योग: भारत की पारंपरिक विद्या योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन भी बनाए रखता है। यह रोग-मुक्त, शोक-मुक्त और संतुलित जीवन का प्राकृतिक उपाय है। योग केवल शरीर को मजबूत नहीं बनाता, बल्कि कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता भी बढ़ाता है। एक्सपर्ट की राय आचार्य प्रतिष्ठा, निदेशक, मोक्षायतन योग संस्थान और अध्यक्ष, भारत योग, कहती हैं, “योग साधना को दिया गया एक घंटा बचे हुए 23 घंटों को 46 घंटों में बदल देता है। यह साधक की कार्य करने की क्षमता सौ गुना बढ़ा देता है। विज्ञान की कसौटी पर हो रहे शोध भी योग के लाभों को प्रमाणित करते हैं।” उनके अनुसार, योग को अपनाने से न केवल वर्तमान फिटनेस बनी रहती है, बल्कि बुढ़ापे में भी शरीर मजबूत और सक्रिय रहता है। दैनिक जीवन में योग और व्यायाम के लाभ मांसपेशियों की ताकत बढ़ती है संतुलन सुधारता है, गिरने का खतरा कम होता है चलने-फिरने की गति और सहनशक्ति बढ़ती है घरेलू कार्य और सामान उठाना आसान होता है उम्र बढ़ने पर भी शरीर स्वस्थ और सक्रिय रहता है निष्कर्ष इस अध्ययन से स्पष्ट होता है कि फिटनेस और हेल्थ के लिए रोज जिम या घंटों व्यायाम करना जरूरी नहीं। सप्ताह में केवल दो दिन योग और व्यायाम करने से भी शरीर मजबूत, मांसपेशियां सक्रिय और जीवनशैली स्वस्थ बनी रहती है। योग और सरल एक्सरसाइज को अपनाकर आप बुढ़ापे तक फिट और सक्रिय रह सकते हैं। विज्ञान और परंपरा दोनों ही इस बात की पुष्टि करते हैं कि योग जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है।

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संसद से संसदीय क्षेत्र तक: 2030 तक बाल विवाह समाप्त करने के लिए सांसदों का एकजुट संकल्प

एमपी’ज फॉर चिल्ड्रेन के तहत साझा प्रयास राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ‘एमपी’ज फॉर चिल्ड्रेन’ कार्यक्रम के तहत विभिन्न राजनीतिक दलों के 20 से अधिक सांसद 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त बनाने की रणनीति पर एकजुट हुए। सांसदों ने बाल विवाह के खिलाफ कड़े कदम उठाने, निजी विधेयक लाने और संसदीय क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। बाल विवाह और सोशल मीडिया खतरों पर चर्चा संसद में बाल संरक्षण के लिए गठित इस मंच ने बाल विवाह और बच्चों के लिए सोशल मीडिया के खतरे को एक बड़ी चुनौती करार दिया। सांसदों ने शून्य काल का उपयोग, निजी विधेयक और संसदीय क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से बाल विवाह के खिलाफ सक्रिय प्रयास करने पर सहमति जताई। एमपी’ज फॉर चिल्ड्रेन की शुरुआत ‘एमपी’ज फॉर चिल्ड्रेन’ की शुरुआत 17 नवंबर 2024 को हुई थी, जिसमें बाल विवाह और बाल यौन शोषण पर चिंता जताते हुए 38 सांसदों ने इसका समर्थन किया। इस पहल को ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ का समर्थन प्राप्त है, जो बाल अधिकारों के संरक्षण का देश का सबसे बड़ा नागरिक समाज नेटवर्क है। इसके 250 से अधिक सहयोगी संगठन देश के 450 से अधिक जिलों में काम कर रहे हैं। सांसदों का संदेश ‘डायलॉग विद पार्लियामेंटेरियंस ऑन अचीविंग चाइल्ड फुल पोटेंशल’ में बोलते हुए तेलुगु देशम पार्टी के नेता और एमपी’ज फ़र चिल्ड्रेन के संयोजक लावू श्रीकृष्ण देवरायलु ने कहा, “बाल विवाह किसी एक पार्टी या धर्म का मुद्दा नहीं है। इसे खत्म करने पर सभी दलों में आम सहमति है। जब भारत ने सामूहिक संकल्प के साथ काम किया, हमने पोलियो खत्म किया और बच्चों को स्कूल तक पहुँचाया। उसी संकल्प के साथ 2030 तक बाल विवाह का खात्मा संभव है।” बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम को मजबूत बनाने की पहल संसदीय नेता देवरायलु ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (PCMA), 2006 को मजबूत करने के लिए हाल ही में लोकसभा में एक निजी विधेयक पेश किया। इस विधेयक में शामिल हैं: सख्त सजा का प्रावधान विशेष बाल विवाह निषेध अधिकारी विशेष अदालतें डिजिटल रिपोर्टिंग पोर्टल इस पहल का उद्देश्य बाल विवाह मुक्त भारत के लक्ष्य को तेजी से हासिल करना है। सांसदों का व्यापक समर्थन सांसदों में विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्य शामिल थे, जिनमें भीम सिंह (भाजपा), डॉ. धर्मवीर गांधी (कांग्रेस), राजा राम सिंह कुशवाहा (सीपीआई एमएल), लुंबा राम चौधरी (भाजपा), पुष्पेंद्र सरोज (सपा), जुगल किशोर शर्मा (भाजपा), महुआ माजी (जेएमएम) और कई अन्य शामिल थे। सभी सांसदों ने बाल विवाह के खिलाफ रणनीति और जागरूकता कार्यक्रमों में सहयोग देने का संकल्प लिया। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का योगदान जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, “बाल संरक्षण केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्राथमिकता है। बच्चों को ऑनलाइन और ऑफलाइन खतरों से सुरक्षित रखना राष्ट्र निर्माण की बुनियादी शर्त है। सांसदों ने इस दिशा में कदम उठाया है और ‘बाल विवाह मुक्त भारत दिवस’ घोषित करने पर सहमति जताई है।” बाल विवाह मुक्ति रथ अभियान संगठन ने बाल विवाह के खिलाफ 100 दिन के जागरूकता अभियान के तहत देशभर में 500 से अधिक रथ चलाए। ये रथ गांवों और जनसमुदाय तक बाल विवाह के खिलाफ संदेश पहुंचाने का माध्यम बने। देश के 28 राज्यों और 439 जिलों में ये रथ गए, और 104 से ज्यादा सांसदों ने अपने क्षेत्रों में रथ यात्रा का नेतृत्व किया। राज्य और जिला प्रशासन का सहयोग अभियान में दो मुख्यमंत्रियों, तीन उपमुख्यमंत्रियों, तीन विधानसभा अध्यक्षों, तीन उपाध्यक्षों, 49 राज्य मंत्रियों, 154 विधायकों और 99 जिला कलेक्टरों ने बाल विवाह मुक्ति रथ को हरी झंडी दिखाई। इस कदम ने बच्चों के अधिकारों के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया। निष्कर्ष संसद से संसदीय क्षेत्र तक इस पहल ने यह संदेश दिया कि बाल विवाह का खात्मा सामूहिक और राजनीतिक संकल्प से ही संभव है। 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत का लक्ष्य केवल कानून और प्रशासन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक चेतना, शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से इसे हर स्तर पर लागू किया जाएगा। सांसदों और नागरिक समाज के एकजुट प्रयास ने इस दिशा में नई उम्मीद जगाई है।

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सरकारी शिक्षक के प्यार में अंधी पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर किया पति की हत्या

बालोतरा में दिल दहला देने वाली वारदात राजस्थान के बालोतरा जिले से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। गिड़ा थाना क्षेत्र के मलवा गांव में एक महिला ने अपने प्रेमी शिक्षक के साथ मिलकर नींद में सो रहे पति महेंद्र कुमार की गला घोंटकर हत्या कर दी। यह मामला परिवारिक कलह, प्रेम संबंध और घातक परिणाम का दर्दनाक उदाहरण पेश करता है। विवाह और पारिवारिक तनाव महेंद्र कुमार (21) पुत्र पेमाराम मेघवाल का विवाह तीन साल पहले बागुंडी निवासी अनु देवी से हुआ था। शादी के बाद से दोनों के बीच मतभेद और कलह इतनी बढ़ गई कि अनु अधिकतर समय अपने मायके में ही रहने लगी। पति-पत्नी के बीच लगातार झगड़े होते रहे और कई बार पंचायत भी बुलानी पड़ी। मायके में हुआ प्रेम प्रसंग अनु देवी के मायके में रहने के दौरान उसकी दोस्ती तिलवाड़ा निवासी सरकारी शिक्षक अमराराम पुत्र चेनाराम मेघवाल से हुई। अमराराम चिड़िया क्षेत्र में सरकारी विद्यालय में कार्यरत हैं। पिछले दो सालों से अनु और शिक्षक के बीच प्रेम संबंध चल रहा था। पंचायत के बाद ससुराल वापसी पारिवारिक विवाद को लेकर पंचायत हुई और अनु कुछ समय के लिए ससुराल लौट आई। लेकिन ससुराल आने के सिर्फ दो दिन बाद ही उसने अपने प्रेमी अमराराम को फोन कर बुला लिया। यह कदम आगे चलकर घातक साबित हुआ। नींद में सो रहे पति की हत्या रात के समय, अनु और अमराराम ने मिलकर नींद में सो रहे महेंद्र कुमार की गला दबाकर हत्या कर दी। सुबह जब महेंद्र नहीं उठा तो उसकी मां कमरे में गई और देखा कि महेंद्र का शरीर शांत पड़ा है। गले और शरीर पर खरोंच के निशान देख कर परिवार में हड़कंप मच गया। मृतक के भाई ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी सूचना मिलते ही गिड़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने अनु देवी और अमराराम को डिटेन कर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान दोनों ने हत्या की गवाही दी। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। मृतक का पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंपा गया। सामाजिक और कानूनी पहलू यह मामला केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं है, बल्कि यह सामाजिक रीति-रिवाज, विवाह संबंधी कलह और प्रेम संबंधों के घातक परिणाम को भी उजागर करता है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की पूर्व नियोजित हत्या भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत गंभीर अपराध मानी जाती है। परिवार और समाज में प्रतिक्रिया स्थानीय समाज में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। यह घटना परिवारिक विश्वास और सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से चिंताजनक मानी जा रही है। लोग इस तरह की हत्या को गंभीर चेतावनी के रूप में देख रहे हैं और परिवारिक विवादों में सामाधान के लिए कानूनी मार्ग अपनाने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं। निष्कर्ष बालोतरा की यह घटना दर्शाती है कि प्रेम संबंध और पारिवारिक कलह कभी-कभी घातक परिणाम दे सकते हैं। यह मामला समाज को चेतावनी देता है कि पारिवारिक विवादों का समाधान समझदारी और कानूनी उपायों से करना आवश्यक है।

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