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एलपीजी पर बड़ी राहत: दो और जहाजों ने पार किया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

भारत के दो एलपीजी टैंकर, ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’, युद्ध प्रभावित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित रूप से भारत की ओर बढ़ रहे हैं। ये जहाज लगभग 92,612 टन एलपीजी लेकर आ रहे हैं, जो भारत की एक दिन की खपत के बराबर है। इस उपलब्धि के साथ घरेलू गैस की आपूर्ति में एक बड़ी राहत की उम्मीद जताई जा रही है। युद्धग्रस्त जलमार्ग पार कर भारत की ओर मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह दोनों जहाज सोमवार सुबह फारस की खाड़ी से रवाना हुए और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर गए। यह जलमार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित है और खाड़ी देशों के तेल और गैस उत्पादों को दुनिया के अन्य हिस्सों से जोड़ता है। हाल ही में अमेरिका और इज़राइल के हमलों के कारण यह क्षेत्र लगभग बंद हो गया था। कितनी LPG ला रहे हैं जहाज? पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि इन दोनों जहाजों पर कुल 92,612 टन एलपीजी लोड किया गया है। इतनी एलपीजी से लगभग 65.21 लाख घरेलू सिलिंडर भरे जा सकते हैं। ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’ क्रमशः 33 और 27 भारतीय नाविकों के साथ आ रहे हैं। ये जहाज उन 22 भारतीय जहाजों में से हैं जो पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद फंसे थे। भारत में पहुंचने की संभावना विशेष सचिव के अनुसार, इन टैंकरों के 26 मार्च से 28 मार्च के बीच भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है। इनकी सुरक्षित वापसी घरेलू एलपीजी आपूर्ति को स्थिर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अन्य जहाजों की स्थिति शुरू में, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 28 भारतीय झंडे वाले जहाज मौजूद थे। इनमें से 24 पश्चिमी हिस्से में और चार पूर्वी हिस्से में थे। अब तक दोनों तरफ से दो-दो जहाज सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे हैं। रणनीतिक महत्व और राहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व इसलिए है क्योंकि यह खाड़ी देशों के ऊर्जा उत्पादों का प्रमुख मार्ग है। युद्ध के कारण यह मार्ग बंद होने पर भारत समेत कई देशों में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती थी। ऐसे में इन दो टैंकरों की सुरक्षित वापसी एक सकारात्मक संकेत है। निष्कर्ष भारत की एलपीजी आपूर्ति अब धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौटने की उम्मीद है। विशेषज्ञ मानते हैं कि युद्ध प्रभावित क्षेत्रों से जहाजों की सुरक्षित वापसी ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इस कदम से घरेलू गैस की कीमतों और वितरण पर दबाव कम होने की संभावना है।

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ईरान पर अमेरिका-इजरायल हमले से पहले नेतन्याहू ने ट्रंप से की थी फोन वार्ता

HighLights नेतन्याहू ने ट्रंप को खामेनेई पर हमले का अवसर बताया ट्रंप पहले युद्ध से बचने की इच्छा रखते थे अमेरिका-इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी की ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले से 48 घंटे पहले, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से फोन पर बात की थी। इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य ट्रंप को यह समझाना था कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को निशाना बनाना और ट्रंप की हत्या के ईरानी प्रयासों का बदला लेना एक ऐतिहासिक अवसर है। खुफिया जानकारी और हमला शुरू करने का कारण सूत्रों के अनुसार, नेतन्याहू और ट्रंप दोनों को उसी सप्ताह नई इंटेलिजेंस ब्रीफिंग मिली, जिसमें बताया गया कि खामेनेई और उनके मुख्य सहयोगी जल्द ही तेहरान स्थित अपने परिसर में बैठक करेंगे। नेतन्याहू को यह जानकारी मिली कि बैठक का समय शनिवार रात से बदलकर शनिवार सुबह कर दिया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि अब या कभी नहीं – यह खामेनेई को मारने और ट्रंप के खिलाफ पूर्व ईरानी साजिशों का जवाब देने का सर्वोत्तम अवसर है। इसमें 2024 की एक कथित साजिश भी शामिल थी, जब ट्रंप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार थे। नेतन्याहू ने फोन पर ट्रंप को बताया कि इस ऑपरेशन से वह इतिहास रच सकते हैं और ईरानी जनता सड़कों पर उतरकर धार्मिक शासन व्यवस्था को चुनौती दे सकती है। ट्रंप की सोच और निर्णय हालांकि, ट्रंप ने पहले सार्वजनिक रूप से ईरान के साथ युद्ध से बचने की इच्छा जताई थी और कूटनीतिक तरीके से समाधान पसंद किया। 2024 में अपने चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत ईरान के साथ शांति बनाए रखने पर जोर दिया था। लेकिन व्हाइट हाउस सूत्रों के अनुसार, जब पिछले वसंत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत असफल रही, तो ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई पर विचार करना शुरू किया। जून में अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी की। कूटनीतिक प्रयास और आगामी हमले की तैयारी दिसंबर में, मार-ए-लागो दौरे के दौरान नेतन्याहू ने ट्रंप को जून के ऑपरेशन से पूरी तरह संतुष्ट नहीं होने की जानकारी दी। ट्रंप ने संकेत दिया कि वे कूटनीतिक बातचीत का एक और दौर आजमाना चाहते हैं, लेकिन सैन्य विकल्प भी तैयार रखते हैं। इस साल ईरान में सत्ता विरोधी आंदोलन के बीच, इजरायली डिफेंस फोर्सेज और अमेरिकी सेनाओं के बीच गोपनीय समन्वय मजबूत हुआ। फरवरी में नेतन्याहू ने ट्रंप को ईरान के बढ़ते बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और अमेरिका तक हमले की संभावनाओं के बारे में भी जानकारी दी। निष्कर्ष नेतन्याहू की वार्ता, खामेनेई की बैठक की समय-सारिणी और ट्रंप के विकल्पों का संयोजन अमेरिका-इजरायल हमले के पीछे निर्णायक कारण बने। यह स्पष्ट है कि ट्रंप के लिए ईरान के सर्वोच्च नेता को मारने का मौका, कूटनीतिक बातचीत के विकल्प के बावजूद, मुख्य प्रेरणा बना।

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बंगाल चुनाव 2026: ओवैसी-कबीर गठबंधन से बदलेगा सियासी खेल?

नई राजनीति, नया समीकरण 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक परिदृश्य में एक अहम मोड़ देखने को मिल रहा है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने हुमायूं कबीर की क्षेत्रीय पार्टी के साथ गठबंधन किया है। यह कदम बंगाल में चुनावी रणनीति को पूरी तरह से बदल सकता है। हुमायूं कबीर, जिन्होंने पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और बाद में तृणमूल कांग्रेस के साथ राजनीति की है, अब अपनी अलग पहचान के साथ मैदान में हैं। उनके पास पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में स्थानीय नेटवर्क और मजबूत पैठ है। AIMIM के साथ गठबंधन करने के बाद उनकी ताकत और प्रभाव बढ़ सकता है। ओवैसी की रणनीति और विस्तार असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली AIMIM पहले भी देश के कई राज्यों में अपनी पैठ बनाने की रणनीति पर काम कर रही थी। पश्चिम बंगाल में पिछली कोशिशों में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन हुमायूं कबीर के साथ गठबंधन के बाद पार्टी को स्थानीय स्तर पर मजबूती मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि AIMIM का उद्देश्य राज्य में मुस्लिम मतदाताओं पर असर डालना और उन्हें एक नई विकल्प की ओर मोड़ना है। यह गठबंधन छोटे और क्षेत्रीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाने के लिए भी तैयार है। वोट बैंक समीकरण बदलने की संभावना हुमायूं कबीर और AIMIM का गठबंधन खासकर उन इलाकों में असरदार हो सकता है, जहां अल्पसंख्यक मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह गठबंधन पारंपरिक रूप से तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस समर्थकों को प्रभावित कर सकता है। वहीं, विपक्ष का कहना है कि इससे वोटों का बंटवारा होगा, जिसका सीधा लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिल सकता है। तीसरे विकल्प की चुनौती राजनीतिक विशेषज्ञ इस गठबंधन को बंगाल में तीसरे विकल्प के रूप में देख रहे हैं। अगर यह गठबंधन सफल होता है, तो राज्य की राजनीति में नया मोड़ आएगा। चुनावी समीकरण अब सिर्फ TMC और BJP तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि AIMIM-कबीर गठबंधन भी निर्णायक हो सकता है। स्थानीय मुद्दों पर ध्यान गठबंधन ने बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, और सामाजिक न्याय जैसे स्थानीय मुद्दों पर काम करने की योजना बनाई है। हुमायूं कबीर ने कहा कि उनका मकसद जनता की आवाज को मजबूती देना है। गठबंधन का यह एजेंडा अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच काफी हद तक प्रभाव डाल सकता है। गठबंधन के राजनीतिक लाभ और चुनौतियां इस गठबंधन के कई संभावित लाभ हैं: स्थानीय नेताओं की ताकत बढ़ाना अल्पसंख्यक वोट बैंक को साधना क्षेत्रीय मुद्दों पर फोकस वहीं चुनौतियां भी कम नहीं हैं: विपक्षी दलों का वोट बंटवारा TMC और BJP जैसी मजबूत पार्टियों के खिलाफ मुकाबला गठबंधन के नए नेताओं के बीच सामंजस्य चुनावी रणनीति और तैयारी राजनीतिक विश्लेषक बता रहे हैं कि AIMIM और हुमायूं कबीर का फोकस उन सीटों पर होगा जहां मुस्लिम मतदाता अधिक हैं। यहां पर उनका उद्देश्य पारंपरिक पार्टियों के वोटरों को प्रभावित करना और नया विकल्प पेश करना है। चुनाव की तैयारी में गठबंधन ने स्थानीय नेता, कार्यकर्ता और सोशल मीडिया कैंपेन पर जोर दिया है। उनका मानना है कि यह रणनीति उन्हें निर्णायक बढ़त दिला सकती है। समर्थक और आलोचक क्या कहते हैं समर्थक मानते हैं कि गठबंधन का उद्देश्य क्षेत्रीय मुद्दों को मजबूती देना और स्थानीय नेतृत्व को आगे लाना है। वहीं आलोचक कहते हैं कि यह गठबंधन वोटों का बंटवारा कर सकता है और इसका फायदा BJP को मिल सकता है। निष्कर्ष 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में यह गठबंधन एक नया फैक्टर साबित हो सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि हुमायूं कबीर और AIMIM का यह कदम मतदाताओं के बीच कितना असर डाल पाता है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए यह निश्चित रूप से एक नई चुनौती है। चुनावी मुकाबला अब पहले से अधिक रोमांचक और अनिश्चित नजर आ रहा है।

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वायरल हुआ ‘ऑपरेशन लियारी’ वीडियो, ‘धुरंधर 2’ के सीन से दिखी समानता

फिल्म की सफलता के बीच सामने आया असली वीडियो बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही फिल्म धुरंधर 2 इन दिनों हर तरफ चर्चा में है। दर्शकों के बीच इसकी कहानी, एक्शन और किरदारों को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हुआ है, जिसने फिल्म की लोकप्रियता को और बढ़ा दिया है। यह वीडियो कराची के चर्चित ‘ऑपरेशन लियारी’ से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें पाकिस्तान के चर्चित पुलिस अधिकारी चौधरी असलम नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के सामने आते ही लोगों ने इसे फिल्म के एक खास सीन से जोड़ना शुरू कर दिया है, जिससे यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है। क्या है ‘ऑपरेशन लियारी’? ऑपरेशन लियारी दरअसल कराची के लियारी इलाके में चलाया गया एक बड़ा पुलिस अभियान था। यह इलाका लंबे समय से गैंगस्टर गतिविधियों, ड्रग्स और संगठित अपराध का केंद्र माना जाता था। यहां कई आपराधिक गिरोह सक्रिय थे, जो इलाके में हिंसा और दहशत फैलाते थे। इन गिरोहों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ने बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू की, जिसे ‘ऑपरेशन लियारी’ नाम दिया गया। इस ऑपरेशन का नेतृत्व चौधरी असलम जैसे सख्त और आक्रामक पुलिस अधिकारी कर रहे थे। कौन थे चौधरी असलम? चौधरी असलम पाकिस्तान पुलिस के उन अधिकारियों में गिने जाते थे, जो अपने सख्त रवैये और अपराधियों के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई के लिए जाने जाते थे। उन्हें ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ के रूप में भी पहचाना जाता था। कराची जैसे बड़े और संवेदनशील शहर में उन्होंने कई बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया। लियारी इलाके में उनकी कार्रवाई को सबसे अहम माना जाता है, जहां उन्होंने गैंग नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार अभियान चलाए। वायरल वीडियो में क्या दिख रहा है? सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में चौधरी असलम को अपने पुलिस दस्ते के साथ एक जोखिम भरे ऑपरेशन को अंजाम देते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में गोलियों की आवाज, तनावपूर्ण माहौल और मौके पर मौजूद पुलिस बल की सक्रियता साफ दिखाई देती है। यह फुटेज उस समय की गंभीरता को दर्शाता है, जब पुलिस को गैंगस्टर्स के खिलाफ सीधे मोर्चा लेना पड़ा था। वीडियो के कई हिस्से ऐसे हैं, जो फिल्म के दृश्यों से काफी मिलते-जुलते लगते हैं। ‘धुरंधर 2’ से कैसे जुड़ा है यह मामला? फिल्म धुरंधर 2 में संजय दत्त ने एसपी असलम का किरदार निभाया है, जो काफी हद तक चौधरी असलम से प्रेरित बताया जा रहा है। फिल्म में एक सीन ऐसा भी है, जिसमें एक रिपोर्टर फायरिंग के बीच मौके से रिपोर्टिंग करता हुआ दिखाई देता है। जब यह वायरल वीडियो सामने आया, तो दर्शकों ने तुरंत इसे फिल्म के उसी सीन से जोड़ दिया। कई लोगों का मानना है कि फिल्म निर्माताओं ने इस वास्तविक घटना से प्रेरणा लेकर इसे बड़े पर्दे पर उतारा है। फिल्म और हकीकत के बीच समानता फिल्मों में अक्सर असली घटनाओं से प्रेरणा ली जाती है, लेकिन इस मामले में समानता काफी स्पष्ट नजर आती है। वायरल वीडियो और फिल्म के सीन में कई ऐसे तत्व हैं—जैसे ऑपरेशन का माहौल, पुलिस की रणनीति और मीडिया की मौजूदगी—जो एक-दूसरे से मेल खाते हैं। इसी वजह से दर्शकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि फिल्म ने वास्तविक घटनाओं को कितनी सटीकता से दिखाया है। सोशल मीडिया पर क्यों छाया वीडियो? यह वीडियो ऐसे समय में सामने आया है, जब धुरंधर 2 पहले से ही चर्चा में है। सोशल मीडिया पर यूजर्स इस वीडियो को शेयर करते हुए फिल्म के सीन से तुलना कर रहे हैं। कुछ लोग इसे फिल्म की रिसर्च और प्रामाणिकता का उदाहरण बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि यह केवल एक संयोग भी हो सकता है। हालांकि, इस वीडियो ने फिल्म को लेकर लोगों की उत्सुकता और बढ़ा दी है। फिल्म की सफलता और स्टारकास्ट धुरंधर 2 19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज हुई और शुरुआती दिनों में ही शानदार कमाई कर चुकी है। फिल्म में रणवीर सिंह एक भारतीय जासूस की भूमिका में नजर आ रहे हैं। इसके अलावा संजय दत्त का किरदार सबसे ज्यादा चर्चा में है। उनके दमदार अभिनय और सख्त पुलिस अधिकारी की छवि ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी है। साथ ही अर्जुन रामपाल, आर माधवन और सारा अर्जुन भी अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। क्या है दर्शकों की प्रतिक्रिया? दर्शकों का कहना है कि फिल्म में दिखाए गए एक्शन और रियल लाइफ घटनाओं के बीच तालमेल इसे और ज्यादा रोचक बना देता है। वायरल वीडियो ने इस उत्सुकता को और बढ़ा दिया है, जिससे लोग फिल्म को एक नए नजरिए से देख रहे हैं। निष्कर्ष ‘ऑपरेशन लियारी’ का वायरल वीडियो और धुरंधर 2 के सीन के बीच समानता ने इस मामले को सुर्खियों में ला दिया है। यह केवल एक फिल्मी कहानी नहीं रह गई, बल्कि वास्तविक घटनाओं से जुड़ा एक ऐसा पहलू बन गया है, जिसने दर्शकों की दिलचस्पी को दोगुना कर दिया है। फिल्म और हकीकत के इस मेल ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सिनेमा और वास्तविक जीवन के बीच की दूरी कभी-कभी बहुत कम रह जाती है।

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पूर्व सीएम Ashok Gehlot का सरकार पर तंज: “प्रदेश में चल रहा है इंतजारशास्त्र

राजस्थान की सियासत एक बार फिर गर्मा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने राज्य सरकार के कामकाज पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि दिसंबर 2023 से प्रदेश में एक अजीबोगरीब “इंतजारशास्त्र” लागू कर दिया गया है। उनका आरोप है कि पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू किए गए जनहितकारी प्रोजेक्ट्स को जानबूझकर धीमा कर दिया गया है, जिससे न केवल विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं बल्कि जनता को भी अपने अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है। विकास कार्यों की रफ्तार पर सवाल गहलोत ने अपने बयान में कहा कि उनकी सरकार के दौरान शुरू किए गए कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स आज अधर में लटके हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार राजनीतिक कारणों से इन योजनाओं को आगे नहीं बढ़ा रही है। उनका कहना है कि इस तरह की राजनीति से प्रदेश का नुकसान हो रहा है और आम जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों को रोकना या धीमा करना केवल राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। “जनता ने सरकार को काम करने के लिए चुना है, न कि पिछली सरकार के कामों को रोकने के लिए,” गहलोत ने कहा। जयपुर में तैयार संस्थान अब भी बंद पूर्व मुख्यमंत्री ने खास तौर पर Jaipur के जेएलएन मार्ग स्थित ‘महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेंस एंड सोशल साइंसेज’ का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि इस संस्थान की भव्य इमारत वर्ष 2024 में ही पूरी तरह तैयार हो चुकी है, लेकिन अब तक इसे शुरू नहीं किया गया है। गहलोत ने सवाल उठाया कि आखिर सरकार इस संस्थान को शुरू करने से क्यों बच रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा—“क्या सरकार इसीलिए इस संस्थान को शुरू नहीं कर रही क्योंकि यह Mahatma Gandhi के नाम पर है?” 233 करोड़ की लागत से बना संस्थान गहलोत ने जानकारी दी कि इस संस्थान की नींव अक्टूबर 2022 में लगभग 233 करोड़ रुपये के बजट से रखी गई थी। इस परियोजना का उद्देश्य राज्य के युवाओं को सुशासन और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता की शिक्षा और शोध सुविधाएं प्रदान करना था। उन्होंने कहा कि इस संस्थान को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे Tata Institute of Social Sciences और MIT Pune की तर्ज पर विकसित किया जाना था। इसका मकसद था कि राजस्थान के छात्र-छात्राओं को राज्य में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा मिल सके। स्वायत्त संस्थान के रूप में की गई थी स्थापना गहलोत ने यह भी बताया कि इस संस्थान को एक एक्ट के माध्यम से स्वायत्त दर्जा दिया गया था, ताकि यह राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रहकर स्वतंत्र रूप से कार्य कर सके। उन्होंने कहा कि शिक्षा और शोध जैसे क्षेत्रों को राजनीति से दूर रखना बेहद जरूरी है। “हमारा उद्देश्य था कि यह संस्थान आने वाले वर्षों में देश और दुनिया में एक पहचान बनाए और राजस्थान को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाए,” उन्होंने कहा। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर आरोप लगाया कि इस संस्थान को शुरू न करना सीधे तौर पर युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि हजारों छात्र इस संस्थान में पढ़ाई करने का सपना देख रहे हैं, लेकिन सरकार की उदासीनता के कारण यह सपना अधूरा रह गया है। गहलोत ने कहा—“संस्थान किसी एक सरकार या दल के लिए नहीं होते, बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए बनाए जाते हैं। ऐसे में उन्हें रोकना या टालना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।” गांधी के नाम पर राजनीति? अपने बयान में गहलोत ने यह भी कहा कि Mahatma Gandhi के नाम और उनके विचारों से राजनीतिक द्वेष रखना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि गांधी जी देश के राष्ट्रपिता हैं और उनके नाम पर बने संस्थान का विरोध करना संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा—“गांधी जी के आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं। उनके नाम पर बने संस्थान को शुरू करने में देरी करना न केवल उनके विचारों का अपमान है बल्कि समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी से भी मुंह मोड़ना है।” सरकार से तुरंत कार्रवाई की मांग गहलोत ने राज्य सरकार से मांग की कि वह तुच्छ राजनीति से ऊपर उठकर इस संस्थान को तुरंत शुरू करे। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने जल्द कोई कदम नहीं उठाया, तो जनता इसका जवाब जरूर देगी। उन्होंने कहा—“जनहित के प्रोजेक्ट्स को रोकना लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। सरकार को चाहिए कि वह सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाए और प्रदेश के विकास के लिए काम करे।” राजनीतिक माहौल में बढ़ी तल्खी गहलोत के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि विकास परियोजनाओं को लेकर इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप जनता के बीच भी चर्चा का विषय बनते हैं और इससे सरकार की छवि पर असर पड़ सकता है। जनता की उम्मीदें और सरकार की जिम्मेदारी राजस्थान की जनता ने हमेशा विकास और सुशासन को प्राथमिकता दी है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि सरकारें राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर जनहित के कार्यों को आगे बढ़ाएं। गहलोत का यह बयान न केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया है, बल्कि यह उन सवालों को भी उठाता है जो आम जनता के मन में हैं—क्या विकास कार्य राजनीति की भेंट चढ़ रहे हैं?

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Rajasthan Board 5th 8th Result 2026: राजस्थान 5वीं 8वीं रिजल्ट लिंक rajpsp.nic.in पर होगा एक्टिव, 4 स्टेप्स में नतीजे करें चेक

आरबीएसई की ओर से कक्षा 5वीं और 8वीं का रिजल्ट आज किसी भी समय rajpsp.nic.in पर जारी कर दिया जायेगा। नतीजे आते ही छात्र सीधे ही इस पेज पर दिए लिंक से परिणाम की जांच कर सकेंगे। आरबीएसई 5th 8th रिजल्ट 24 मार्च को होना है घोषित। पास होने के लिए सभी विषयों में 33 फीसदी अंक प्राप्त करना अनिवार्य।  बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन राजस्थान (RBSE) की ओर से आज परिणाम आज जारी किया जायेगा। बोर्ड की ओर से दोनों ही कक्षाओं का रिजल्ट प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, बोर्ड अध्यक्ष व अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में जारी किया जाएगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में नतीजे जारी होते ही डायरेक्ट लिंक सीधे शालादर्पण पोर्टल rajshaladarpan.nic.in के साथ ही rajpsp.nic.in पर एक्टिव हो जायेगा। नतीजे जारी होने पर RBSE Board 5th 8th Result 2026 Link इस पेज पर भी उपलब्ध करवा दिया जायेगा जिस पर क्लिक करके आप सीधे परिणाम की जांच कर पाएंगे। मार्कशीट केवल 4 स्टेप्स में कर सकेंगे डाउनलोड राजस्थान बोर्ड 5th 8th रिजल्ट जारी होने के बाद यहां दी जा रही केवल 4 स्टेप्स को फॉलो करके परिणाम की जांच की जा सकेगी और मार्कशीट की डिजिटल कॉपी भी डाउनलोड की जा सकेगी स्टेप 1: राजस्थान 5th 8th रिजल्ट 2026 चेक करने के लिए सबसे पहले शालादर्पण पोर्टल rajshaladarpan.nic.in पर जाना होगा। स्टेप 2: वेबसाइट के होम पेज पर आपको जिस कक्षा का रिजल्ट चेक करना है उस लिंक पर क्लिक करना होगा। स्टेप 3: इसके बाद रोल नंबर एवं जिला या रोल नंबर एवं डेट ऑफ बर्थ दर्ज करना होगा। स्टेप 4: अब रिजल्ट स्क्रीन पर ओपन हो जायेगा जहां से आप इसे चेक करने के साथ ही मार्कशीट की प्रति डाउनलोड भी कर सकते हैं। छात्रों एवं उनके अविभावकों को बता दें कि वे ऑनलाइन माध्यम से केवल मार्कशीट का प्रिंट निकाल पाएंगे। ओरिजिनल मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के कुछ दिन बाद आपके स्कूल से प्राप्त होगी। पास होने के लिए सभी विषयों में 33 फीसदी अंक अनिवार्य राजस्थान बोर्ड 5th 8th क्लास में पास होने के लिए सभी विषयों में न्यूनतम 33 फीसदी अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। एक विषय में छात्रों को ग्रेस मार्क्स के साथ भी पास किया जा सकता है। इसके अलावा जो छात्र बोर्ड परीक्षा में फेल हो जायेंगे उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं है। बोर्ड के नए नियम के मुताबिक 45 दिनों के अंदर स्कूलों द्वारा दोबारा परीक्षा का आयोजन किया जायेगा। इसके बाद स्टूडेंट्स इसमें भाग लेकर एग्जाम को पास कर सकेंगे और अपना साल खराब होने से बचा पाएंगे।

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महिलाओं के लिए ज्यादा खतरनाक क्यों है टीबी? ‘जेनिटल टीबी’ छीन सकती है मां बनने का सुख

World TB Day पर बड़ा खुलासा हर साल 24 मार्च को World TB Day मनाया जाता है, ताकि लोगों को Tuberculosis यानी टीबी के प्रति जागरूक किया जा सके। आमतौर पर टीबी को फेफड़ों की बीमारी माना जाता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी महिलाओं के प्रजनन तंत्र को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। क्या है ‘जेनिटल टीबी’? गुरुग्राम स्थित प्रजनन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. पुनीत राणा अरोड़ा के मुताबिक, जब टीबी का संक्रमण महिलाओं के रिप्रोडक्टिव सिस्टम में पहुंचता है, तो इसे ‘जेनिटल टीबी’ कहा जाता है। यह बीमारी गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब और अंडाशय को नुकसान पहुंचाती है। महिलाओं में कैसे असर डालती है टीबी? जेनिटल टीबी का सबसे गंभीर असर बांझपन के रूप में सामने आता है। यह फैलोपियन ट्यूब में सूजन और ब्लॉकेज पैदा करती है, जिससे अंडा और शुक्राणु का मिलना मुश्किल हो जाता है। गंभीर समस्याएं जो पैदा हो सकती हैं पीरियड्स का अनियमित होना गर्भधारण में कठिनाई बार-बार गर्भपात हार्मोनल असंतुलन पुरुषों में क्यों कम खतरा? Tuberculosis का असर पुरुषों में आमतौर पर फेफड़ों तक सीमित रहता है। हालांकि, कुछ मामलों में यह टेस्टिस और प्रोस्टेट को प्रभावित कर सकता है, लेकिन महिलाओं की तुलना में बांझपन का खतरा कम होता है। पहचान में देरी क्यों होती है? जेनिटल टीबी के लक्षण बहुत हल्के होते हैं—जैसे पेट दर्द, कमजोरी, या पीरियड्स में बदलाव। महिलाएं अक्सर इन्हें नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे बीमारी देर से पकड़ में आती है। इलाज और बचाव विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और इलाज से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है। जागरूकता और समय पर मेडिकल सलाह लेना बेहद जरूरी है।

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ईरान-अमेरिका युद्ध: ट्रंप के बयान से Gift Nifty 800 अंक तक उछला, दुनियाभर के बाजारों में आई बड़ी तेजी

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ तनाव कम करने की घोषणा की, जिससे युद्ध की स्थिति में राहत मिली। उन्होंने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर सैन्य हमले को 5 दिनों के लिए स्थगित करने का निर्देश दिया है, जो वार्ताओं पर निर्भर करेगा। इस खबर से गिफ्ट निफ्टी में 3.33% की जबरदस्त तेजी आई और वैश्विक बाजारों में भी उछाल देखा गया। ट्रंप ने ईरान पर सैन्य हमला 5 दिन टाला , गिफ्ट निफ्टी में 3.33% की जोरदार तेजी , वैश्विक शेयर बाजारों में भी बड़ा उछाल।    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे तनाव और युद्ध (US-Iran War) की स्थिति में अचानक राहत की खबर दी है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में घोषणा की कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिनों में “बहुत अच्छी और राहत भरी बात” हुई है। इन बातचीतों के सकारात्मक माहौल को देखते हुए उन्होंने अमेरिकी रक्षा विभाग को ईरान के पावर प्लांट्स और ऊर्जा ढांचे पर किसी भी सैन्य हमले को 5 दिनों के लिए स्थगित करने का निर्देश दिया है। यह फैसला जारी वार्ताओं की सफलता पर निर्भर करेगा। इस खबर के बीच गिफ्ट निफ्टी (सिंगापुर में ट्रेड होने वाला निफ्टी फ्यूचर्स) में जबरदस्त तेजी देखी गई। गिफ्ट निफ्टी 23,533 तक पहुंच गया, जो पिछले स्तर से 800 अंक या 4% तक की बढ़ोतरी है। इससे पहले बाजार में चिंता थी कि ईरान पर हमले से तेल की कीमतें और बढ़ेंगी, जिससे भारतीय शेयर बाजार पर दबाव पड़ सकता था। लेकिन इस खबर ने निवेशकों में राहत की लहर दौड़ा दी है। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में क्या लिखा? मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि पिछले दो दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बहुत अच्छी और सकारात्मक बातचीत हुई है। हम मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे आपसी विवादों को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में चर्चा कर रहे हैं। इन गंभीर और रचनात्मक वार्ताओं के अच्छे रुख को देखते हुए, जो कि इस पूरे हफ्ते जारी रहेंगी मैंने युद्ध विभाग (Department of War) को निर्देश दिया है कि, ईरान के पावर प्लांट और ऊर्जा ठिकानों पर होने वाले सभी सैन्य हमलों को 5 दिनों के लिए टाल दिया जाएं। यह रोक आगे होने वाली बैठकों और चर्चाओं की सफलता पर निर्भर करेगी। इस मामले पर ध्यान देने के लिए आप सभी का धन्यवाद! – राष्ट्रपति डोनल्ड जे. ट्रंप वैश्विक स्टॉक मार्केट इंडेक्स में दिखी तेजी डॉव जोन्स फ्यूचर्स: 46,503.58 (+926.11 अंक, +2.03%) चढ़ा। DAX: 22,819.50 (+439.31 अंक, +1.96%) चढ़ा। FTSE: 9,933.95 (+15.62 अंक, +0.16%) चढ़ा। क्या मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में दिखेगी तेजी? ट्रंप के इस घोषणा के बाद निवेशकों के मन मे एक अहम सवाल उठ रहा है कि क्या कल यानी मंगलवार, 24 मार्च को भारतीय शेयर बाजार में तेजी आएगी? तो इसका सीधा जवाब है- हां! क्योंकि बाजार अब इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि अगले 5 दिनों में क्या होता है। भारतीय निवेशकों के लिए यह सकारात्मक संकेत है, क्योंकि गिफ्ट निफ्टी की तेजी से सोमवार को घरेलू बाजार में मजबूत शुरुआत की उम्मीद है। यह खबर मध्य पूर्व में शांति की उम्मीद को जगाती है। क्योंकि पिछले कई हफ्तों से हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य की बंद होने की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही थी। ऐसे में यदि बातचीत सफल रहीं तो युद्धविराम संभव है, अन्यथा स्थिति फिर बिगड़ सकती है। ट्रंप की यह घोषणा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह पहले अनकंडीशनल सरेंडर पर अड़े हुए थे, लेकिन अब उत्पादक बातचीत पर जोर दे रहे हैं।  

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पंजाब के रंधावा सुसाइड केस में गृह मंत्री शाह ने दिए CBI जांच के साफ संकेत

पंजाब के वेयरहाउस डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (DM) गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या का मामला अब लोकसभा तक पहुँच गया है। पंजाब सरकार के मंत्री लालजीत भुल्लर पर प्रताड़ना के गंभीर आरोपों के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस मामले में CBI जांच के साफ संकेत दिए हैं। संसद में गूँजा मुद्दा, शाह बोले सोमवार को कांग्रेस सांसद गुरजीत औजला ने लोकसभा में रंधावा की मौत का मुद्दा उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा- “यह पंजाब राज्य का विषय है लेकिन अगर पंजाब के सभी सांसद मुझे इस मामले में लिखित अनुरोध देते हैं, तो मैं तुरंत यह केस CBI को ट्रांसफर करने के निर्देश दे दूंगा।” पंजाब के कांग्रेस सांसदों ने अमित शाह को लिखा पत्र  मिली जानकारी के मुताबिक पंजाब से कांग्रेस सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर गगनदीप सिंह रंधावा के मामले में इंसाफ की मांग की है। इस पत्र के जरिए सांसदों ने पूरे मामले की CBI जांच की ज़ोरदार मांग की है। इस चिट्ठी पर पंजाब के जाने-माने कांग्रेस सांसद जिनमें गुरजीत सिंह औजला, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, धर्मबीर गांधी और सुखजिंदर सिंह रंधावा शामिल हैं, ने साइन किए हैं। इस दौरान उन्होंने वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के मैनेजर जी.एस. रंधावा की आत्महत्या के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग उठाई। सांसदों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए CBI जांच जरूरी है। प्रतिनिधिमंडल ने पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि केवल सीबीआई जांच ही किसी भी स्थानीय प्रभाव या दबाव से मुक्त निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कर सकती है। उन्होंने पीड़ित परिवार और आम जनता की भावनाओं को भी व्यक्त किया, जो इस मामले में न्याय और स्पष्टता की मांग कर रहे हैं।

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एक महीने में 51 लाख करोड़ साफ, बड़े-बड़े शेयर टूटे, लेकिन इस सरकारी कंपनी के स्टॉक को नहीं हुआ एक पैसे का लॉस

ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई, जिससे 51 लाख करोड़ रुपये का बाजार पूंजीकरण साफ हो गया। निफ्टी भी 11% से अधिक टूटा। हालांकि, इस दौरान सरकारी कंपनी पावर ग्रिड के शेयरों ने मजबूती दिखाई। HighLights युद्ध से 51 लाख करोड़ रुपये का बाजार पूंजीकरण साफ हुआ। पावर ग्रिड के शेयर बाजार गिरावट में भी स्थिर रहे। फरवरी में 300 के नीचे क्लोज हुए और 302 पर कर रहे हैं कारोबार।  ईरान और अमेरिका (Iran-US War) के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से भारतीय शेयर बाजार (Share Market Crash) लगातार गिरा है। इस दौरान बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 11 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है। 23 फरवरी को बीएसई पर लिस्टेड शेयरों का ज्वाइंट मार्केट कैप 467 लाख करोड़ था और 23 मार्च को यह 416 लाख करोड़ रह गया है। ऐसे में कुल 51 लाख करोड़ बाजार पूंजीकरण साफ हो गया है। लेकिन, आपको जानकार हैरानी होगी कि एक सरकारी कंपनी के शेयर पर इस गिरावट का ज्यादा असर नहीं हुआ है। फरवरी में पावर ग्रिड के शेयर 298 रुपये पर क्लोज हुए थे और अब 302 रुपये के ऊपर ही ट्रेड कर रहे हैं। दरअसल, पावर ग्रिड के शेयरों (Power Grid Shares) में वीकली और मंथली बेसिस पर कोई गिरावट नहीं देखी गई है। खास बात है कि पावर ग्रिड, निफ्टी50 के शेयरों में शामिल स्टॉक है और इस सरकारी कंपनी का मार्केट कैप 2 लाख 80 हजार करोड़ से ज्यादा है। 290 से 310 की रेंज में कारोबार पिछले एक महीने से  पावर ग्रिड के शेयर  290 से 310 रुपये की रेंज में कारोबार कर रहे हैं। मार्केट में कमजोरी आने के बाद इस कंपनी के शेयरों में हल्की गिरावट जरूर आई लेकिन वीकली और मंथली बेसिस पर अब भी यह शेयर मजबूती दिखा रहे हैं, जबकि निफ्टी दोनों ही टाइम फ्रेम पर काफी गिर चुका है। 23 मार्च को भी पावरग्रिड के शेयर कमजोर बाजार में डेढ़ फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुए हैं। पावर ग्रिड के शेयरों में खरीदारी को लेकर जागरण बिजनेस ने दो मार्केट एक्सपर्ट से बात की। चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग के सचिन गुप्ता ने कहा कि पावरग्रिड के शेयर मौजूदा सूरते हाल में काफी आकर्षक लग रहे हैं। इस शेयर के लिए 312 रुपये का स्तर अहम रेजिस्टेंस है, इसके ब्रेक होने पर शेयर में और तेजी देखने को मिल सकते हैं। वहीं, नीचे की ओर 290 रुपये एक अहम सपोर्ट है, जहां स्टॉपलॉस के साथ अपनी पॉजिशन बरकरार रखी जा सकती है। उधर, आनंद राठी इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के जिगर एस पटेल ने बताया कि पावर ग्रिड के शेयरों के लिए 311 रुपये का स्तर अहम है और इसके टूटने पर 321 रुपये के टारगेट देखने को मिल सकते हैं, जबकि नीचे की ओर 290 रुपये का लेवल बड़ा सपोर्ट है। बता दें कि पावर ग्रिड के शेयरों का 52 वीक हाई 322 रुपये है जो इस शेयर ने पिछले साल 21 अप्रैल को लगाया था, और अब यह स्टॉक उसके आसपास ही कारोबार कर रहा है। (डिस्क्लेमर: यहां शेयरों को लेकर दी गई जानकारी ब्रोकरेज फर्म की रिपोर्ट और एक्सपर्ट की राय पर आधारित है, यह किसी भी तरह से निवेश की सलाह नहीं है। चूंकि, स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)

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