Hot News

जैसलमेर में दिखा दुर्लभ कैरेकल का कुनबा, रेडियो कॉलर से खुल रहे रहस्य

Share News!

जैसलमेर। भारत की जैव विविधता दुनिया में सबसे समृद्ध मानी जाती है, लेकिन इसी विविधता के बीच कुछ ऐसी प्रजातियां भी हैं जो धीरे-धीरे विलुप्ति के कगार पर पहुंच रही हैं। ऐसी ही एक रहस्यमयी और दुर्लभ प्रजाति है कैरेकल बिल्ली, जिसे आमतौर पर रेगिस्तानी लिंक्स भी कहा जाता है। इसकी तेज रफ्तार, अद्भुत छलांग लगाने की क्षमता और विशिष्ट काले कानों की लटें इसे अन्य जंगली बिल्लियों से अलग बनाती हैं। राजस्थान के जैसलमेर जिले में दुर्लभ वन्यजीव कैरेकल को लेकर बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और वन विभाग की संयुक्त पहल के तहत इस रहस्यमयी बिल्ली पर लगातार रिसर्च की जा रही है। हाल ही में घोटारू क्षेत्र में रेडियो कॉलर और मोशन सेंसिंग कैमरे की मदद से कैरेकल का पूरा कुनबा कैमरे में कैद हुआ है। यह न केवल वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बड़ी सफलता है, बल्कि इससे इस विलुप्तप्राय प्रजाति के व्यवहार और अस्तित्व को समझने में भी मदद मिलेगी। कैरेकल एक बेहद दुर्लभ और शर्मीली जंगली बिल्ली है, जो मुख्य रूप से अफ्रीका, मध्य एशिया और भारत के कुछ सीमित क्षेत्रों में पाई जाती है। भारत में इसकी मौजूदगी बेहद कम हो चुकी है और यह अब विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी है। इसकी पहचान इसके लंबे काले बालों वाले कान, फुर्तीले शरीर और तेज शिकार करने की क्षमता से होती है। हालांकि यह असली लिंक्स प्रजाति से अलग है।
जैसलमेर के घोटारू इलाके में लगाए गए मोशन सेंसिंग कैमरे ने एक बेहद खास पल को कैद किया कैरेकल का पूरा कुनबा एक साथ नजर आया। यह दृश्य इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कैरेकल आमतौर पर अकेले रहने वाला जीव माना जाता है।
वन विभाग द्वारा लगाए गए कैमरों और रेडियो कॉलर से यह पहली बार स्पष्ट रूप से सामने आया है कि इस क्षेत्र में कम से कम तीन कैरेकल मौजूद हैं। इससे पहले इनकी संख्या को लेकर केवल अनुमान ही लगाए जाते थे। वन विभाग ने करीब 7 दिन पहले एक कैरेकल पर रेडियो कॉलर लगाया था। इस कॉलर की मदद से वैज्ञानिक और वन अधिकारी उसके मूवमेंट, व्यवहार और शिकार के पैटर्न पर नजर रख पा रहे हैं। हाल के वर्षों में भारत के कुछ हिस्सों, विशेषकर राजस्थान और गुजरात के शुष्क क्षेत्रों में इसके देखे जाने की खबरें सामने आई हैं, जिससे वन्यजीव प्रेमियों और वैज्ञानिकों में उत्साह तो है, लेकिन इसकी घटती संख्या चिंता का विषय भी बन गई है।कैरेकल एक मध्यम आकार की जंगली बिल्ली है जो अफ्रीका, मध्य-पूर्व और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों में पाई जाती है। भारत में यह बेहद दुर्लभ है और मुख्यत: पश्चिमी भारत के सूखे और अर्ध-रेगिस्तानी इलाकों में ही देखी जाती है। वह किस प्रकार के शिकार को प्राथमिकता देता है। रेगिस्तानी परिस्थितियों में वह कैसे जीवित रहता है
वन विभाग अब इस दुर्लभ जीव को बचाने के लिए पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मुख्य वन संरक्षक जोधपुर, अनूप के. आर. के अनुसार, जैसलमेर वन विभाग की टीम लगातार कैमरा ट्रैप के जरिए कैरेकल की निगरानी कर रही है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें लोगों को बताया जा रहा है कि कैरेकल का शिकार करना कानूनन अपराध है। यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त दंडनीय है।

 

Kamlesh Purohit
Kamlesh Purohit
Articles: 436

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

क्रिकेट के 73 नियम बदले