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Author name: Kamlesh Purohit

पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की मांग खारिज:SC ने कहा- असम कोर्ट जाएं; खेड़ा बोले- क्या मैं अपराधी हूं?
राजनीति

पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की मांग सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की, कहा असम कोर्ट का रुख करें; खेड़ा ने जताई चिंता- क्या मैं अपराधी हूं

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की मांग को खारिज कर दिया। कोर्ट ने उन्हें निर्देश दिया कि वे अपनी याचिका असम की स्थानीय अदालत में दायर करें। सुनवाई के दौरान खेड़ा ने अदालत से कुछ अतिरिक्त दिन देने का अनुरोध किया, क्योंकि असम की अदालतें फिलहाल बंद हैं। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या मैं कोई अपराधी हूं, जिसको इतनी भी राहत नहीं मिल सकती?” जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने इस मांग को ठुकराते हुए कहा कि खेड़ा को अपनी याचिका असम की अदालत में प्रस्तुत करनी होगी। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा से जुड़े आरोपों पर आधारित है। 5 अप्रैल को पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि हिमंता बिस्वा सरमा के पास एक से अधिक पासपोर्ट और विदेशी संपत्तियां हैं, जिनका उल्लेख उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में नहीं किया। इस आरोप के दो दिन बाद असम पुलिस ने दिल्ली में उनके आवास पर छापा मारा, हालांकि वह उस समय हैदराबाद में मौजूद थे। पुलिस ने कई दस्तावेज जब्त किए। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल तुषार मेहता ने दस्तावेजों में गड़बड़ी की बात कही। उन्होंने कहा कि आधार कार्ड के सामने और पीछे की जानकारी अलग-अलग और विरोधाभासी है, जिसे फोरम शॉपिंग करार दिया गया। इस पर खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उनकी याचिका जल्दबाजी में दाखिल की गई थी, इसलिए गलत दस्तावेज संलग्न हो गए थे, जिन्हें बाद में ठीक कर लिया गया। उन्होंने मामले को मानहानि का बताया और जालसाजी की संभावना से इंकार किया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने दस्तावेजों की असंगतियों को गंभीरता से लिया और जमानत बढ़ाने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस विवादित मामले में खेड़ा को असम की स्थानीय अदालत में जाकर अपनी बात प्रस्तुत करनी होगी। ट्रांजिट अग्रिम जमानत से जुड़ा इतिहास देखें तो 10 अप्रैल को तेलंगाना हाईकोर्ट ने खेड़ा को असम कोर्ट में पेश होने के लिए एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी। असम सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद 15 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। मामले का संक्षिप्त विवरण 5 अप्रैल: खेड़ा ने सरमा पर ₹52 हजार करोड़ की संपत्ति, तीन पासपोर्ट होने का आरोप लगाया। 6 अप्रैल: हिमंता बिस्वा सरमा ने ट्विट के जरिए कहा कि जिन दो दुबई अपार्टमेंट का जिक्र कांग्रेस ने किया है, वे मोहम्मद अहमद और फातिमा सुलेमान के हैं। यह जानकारी उन्होंने सच्चाई का पता लगाने वाली जासूसी के माध्यम से जुटाई है। 5 अप्रैल की घटना के तुरंत बाद: हिमंता ने दस्तावेजों में करेल गलतियों जैसे गलत नाम, फोटो और पासपोर्ट डिटेल्स की ओर इशारा किया, जो दस्तावेजों की वास्तविकता पर सवाल उठाते हैं। यह मामला राजनीतिक वरण-विवाद का रूप धारण कर चुका है और अब इसकी सुनवाई असम की अदालतों में होगी। सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट रुख यह संकेत देता है कि केंद्र सरकार की सर्वोच्च अदालत स्थानीय न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र का सम्मान करती है और इस प्रकार मामलों का समाधान स्थानीय स्तर पर करने को प्राथमिकता देती है। खेड़ा के समर्थक इस फैसले को लेकर हैरान हैं, जबकि विपक्ष इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा मान रहा है। अभी बाकी है कि असम की अदालतें कब और किस तरह इस मामले पर सुनवाई करेंगी।

‘Bhooth Bangla’ movie review: Dead jokes walking
मनोरंजन

‘भूत बंगला’ मूवी रिव्यू: मरे हुए जोक्स चलते फिरते

नई दिल्ली। बॉलीवुड के प्रमुख अभिनेता अक्षय कुमार और अनुभवी निर्देशक प्रियदर्शन अपनी नई फिल्म “भूत बंगला” के साथ दर्शकों के सामने आए हैं। यह फिल्म हॉरर-कॉमेडी शैली में बनी है, लेकिन इसके बारे में दर्शकों और समीक्षकों के मत दर्शाते हैं कि यह एक थका देने वाला और फार्मूला-आधारित प्रयास है जो उनके पुराने तेज को पुनः खोजने का प्रयास करता है। अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की जोड़ी ने पहले भी कई सुपरहिट कॉमेडी और हॉरर-कॉमेडी फ़िल्में दी हैं। उनके इतिहास को देखते हुए, “भूत बंगला” से उम्मीदें काफी ऊँची थीं। हालांकि, यह फिल्म पुरानी सफलता के वजन तले दबती हुई नजर आती है और अनुभवहीन स्क्रिप्ट तथा पटकथित झलक पेश करती है। फिल्म का स्वरूप दर्शकों को नया कुछ नहीं देता, बल्कि पुरानी शैली का थका देने वाला पुनरावृत्तिपूर्ण संस्करण प्रतीत होता है। फिल्म के कथानक में जादू-टोना और भुतहा बंगले के क्लिच शामिल हैं, जो पहले हजारों बार देखे और सुने जा चुके हैं। निर्देशक की नयी सोच और नवाचार की कमी फिल्म के हर पहलू में देखने को मिलती है। अक्षय कुमार के अभिनय में भी उस चीख-पूछ की चमक कम दिखती है जो उनकी पिछली फिल्मों में हमें लुभा चुकी थी। फिल्म की कॉमेडी अधिकतर अभद्र और अतिप्रशंसित लगती है, जो दर्शकों से जुड़ने में विफल होती है। सिनेमा प्रेमी और समीक्षक यह मानते हैं कि “भूत बंगला” किसी भी नयेपन को प्रस्तुत करने में असफल है। यह एक ऐसी फिल्म है, जो केवल अपने पुराने दौर की प्रसिद्धि का निशान छोड़ना चाहती है, पर सफल नहीं हो पाती। बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म का प्रदर्शन औसत से कम बताया जा रहा है, जो दर्शाता है कि दर्शक इसका बेसब्री से इंतजार नहीं कर रहे थे। कुल मिलाकर, “भूत बंगला” अक्षय कुमार और प्रियदर्शन के लिए एक निराशाजनक प्रस्तुति साबित हुई है। जिन्हें हॉरर-कॉमेडी से कुछ नया और ताजगी भरा अनुभव मिलने की उम्मीद थी, वे इस फिल्म से निराश हो सकते हैं। अगर ये कलाकार फिर से अपने पुरानी फार्मूले में फंसकर नहीं निकले, तो उनका भविष्य और भी अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। फिल्म की कहानी, संवाद और निर्देशन में नवीनता की कमी इसके सबसे बड़े नुकसान हैं। हॉरर और कॉमेडी दोनों के सही तालमेल के अभाव ने फिल्म की अपील को बहुत हद तक नुकसान पहुंचाया है। ऐसी स्थितियों में दर्शक और समीक्षक दोनों की प्रतिक्रियाएँ स्पष्ट कर रही हैं कि इस जोड़ी को दोबारा नई ऊर्जा और विचारधारा के साथ काम करना होगा ताकि वे फिर से अपनी मशहूर पहचान बना सकें।

Canada T20 World Cup match under ICC corruption investigation
खेल जगत

कनाडा T20 विश्व कप मैच पर ICC भ्रष्टाचार जांच शुरू

नई दिल्ली,  कनाडा के कप्तान दिलप्रीत बाजवा द्वारा न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गए एक ओवर को लेकर एक नई डॉक्यूमेंट्री ने गंभीर आरोप लगाए हैं। शुक्रवार को प्रसारित इस डॉक्यूमेंट्री ने दावा किया है कि इस ओवर में अनियमितता की संभावना है, जिसके बाद क्रिकेट की वैश्विक नियामक संस्था ICC ने इस मामले की आधिकारिक जांच शुरू कर दी है। डॉक्यूमेंट्री में दिखाए गए तथ्यों और वीडियो फुटेज का विश्लेषण करते हुए, यह पता चला है कि बाजवा ने allegedly नियमों के विरुद्ध गेंदबाजी की, जिससे मैच की नतीजे पर सवाल उठने लगे हैं। ICC ने तुरंत इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि खेल की निष्पक्षता को बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। ICC के प्रवक्ता ने बताया, “हमने इस घटना की प्रारंभिक रिपोर्ट प्राप्त कर ली है और पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है। संबंधित खिलाड़ियों, अधिकारियों एवं अन्य प्रभारी व्यक्तियों से जानकारी ली जाएगी। हमारी जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होगी।” कनाडा क्रिकेट टीम के प्रतिनिधि ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, “हम ICC की जांच प्रक्रिया का सम्मान करते हैं और पूरी तरह से सहयोग कर रहे हैं। दिलप्रीत बाजवा और टीम पूरे मामले में अपनी सफाई देने के लिए तैयार हैं। हमारा मानना है कि खेल हमेशा ईमानदारी से खेला जाना चाहिए।” विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं क्रिकेट की विश्वसनीयता पर असर डाल सकती हैं, इसलिए जल्द और सटीक जांच आवश्यक हो गई है। खिलाड़ियों और टीमों के लिए भी यह एक चेतावनी है कि खेल भावना और नियमों का उल्लंघन कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस जांच की अपडेट्स आने वाले हफ्तों में सार्वजनिक किए जाएंगे और ICC ने वादा किया है कि किसी भी दोषी खिलाड़ी या अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस मामले को लेकर क्रिकेट जगत में चर्चा बढ़ती जा रही है, और फैंस व विशेषज्ञ दोनों ही निष्पक्ष जांच के परिणामों को लेकर उत्सुक हैं। अभी तक प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पहला मौका नहीं है जब टी20 विश्व कप मैचों में भ्रष्टाचार को लेकर संदेह व्यक्त किया गया हो, फिर भी ICC की सतर्कता और प्रतिक्रिया प्रशंसनीय मानी जा रही है। अंत में, खिलाड़ियों और प्रशासकों के समक्ष एक बार फिर यह चुनौती आई है कि वे क्रिकेट के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए खेल को शुद्ध और पारदर्शी बनाए रखें। इस मामले की तह तक पहुंचना और उचित कदम उठाना ही खेल के भविष्य के लिए लाभकारी होगा।

शाह ने समझाया- कैसे लोकसभा की सीटें 850 होंगी:दक्षिण के 5 राज्यों की सीटें 129 से 195 हो जाएंगी; सबसे ज्यादा फायदा यूपी, महाराष्ट्र को
राजनीति

शाह ने समझाया- लोकसभा की सीटें 850 कैसे होंगी: दक्षिण के 5 राज्यों की सीटें 129 से बढ़कर 195 होंगी; यूपी, महाराष्ट्र को मिलेगा सबसे अधिक लाभ

नई दिल्ली: लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन बिलों पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि परिसीमन के कारण किसी भी राज्य को कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने विस्तार से समझाया कि कैसे लोकसभा की सीटें वर्तमान 543 से बढ़ाकर लगभग 850 तक की जा सकती हैं। विपक्ष द्वारा आरोप लगाया जा रहा था कि परिसीमन प्रक्रिया में उत्तरी राज्यों को फायदा होगा और दक्षिणी राज्यों की सीटें कम हो जाएंगी। कांग्रेस ने इसे महिला आरक्षण बिल का बहाना बताते हुए कहा कि यह चोर दरवाजे से परिसीमन लागू करने का प्रयास है। इस बाबत अमित शाह ने विपक्ष की चर्चाओं का खंडन करते हुए यह स्पष्ट किया कि 850 सीटों की संख्या क्यों सामने आई है और इसका क्या मतलब है। शाह ने कहा, “मान लीजिए कुल लोकसभा सीटें 100 हैं, और यदि महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करना है तो सीटें बढ़ाने पर 50% वृद्धि के बाद कुल सीटें 150 हो जाएंगी। जब 150 सीटों का 33% हिस्सा महिलाओं के लिए आरक्षित होगा तो यह लगभग 50 सीटों के बराबर आता है। इसी तर्क के तहत मौजूदा 543 सीटों में 50% की वृद्धि करके लगभग 816-850 सीटों तक पहुंचा जा सकता है, ताकि महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिल सके।” उन्होंने विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीटों में वृद्धि का जिक्र करते हुए कहा कि पांच दक्षिणी राज्यों की कुल सीटें वर्तमान में 129 हैं, जो बढ़कर 195 हो जाएंगी। यह दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व में सुधार का संकेत है। तमिलनाडु की सीटें 39 से 59, केरल की 20 से 30, तेलंगाना की 17 से 26 और आंध्र प्रदेश की 25 से 38 तक बढ़ेंगी। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों को भी अतिरिक्त सीटें मिलने की बात सामने आई है। विशेष रूप से महाराष्ट्र को 24 अतिरिक्त लोकसभा सीटें मिलेंगी, जो इसे उत्तर प्रदेश के बाद दूसरे सबसे बड़े प्रतिनिधि वाला राज्य बनाएगी। अमित शाह ने यह भी कहा कि परिसीमन कानून में कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह मौजूदा कानून के तहत ही लागू होगा। इसका किन्हीं विंध्य चुनावों पर प्रभाव नहीं पड़ेगा। वे संसद में महिलाओं के लिए समानता और बेहतर प्रतिनिधित्व की बात करते हुए यह भी स्पष्ट करते हुए कह रहे हैं कि संशोधन संसद के संविधान के सात अनुच्छेदों – 55, 81, 82, 170, 330, 332 और 334(A) – में पर्यटित हैं। पार्टी नेताओं ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी। प्रधानमंत्री मोदी ने महिला आरक्षण बिल से जुड़े इन संशोधनों को निष्पक्ष एवं संतुलित बताते हुए कहा कि किसी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा और वे इसके पूर्ण क्रेडिट विपक्ष को भी देने को तैयार हैं। वहीं, कांग्रेस की प्रियंका गांधी ने महिलाओं पर विवादित टिप्पणियां करने वाले पुरुषों को सावधानी बरतने की चेतावनी दी। इस पूरे मसले पर संसद में विपक्ष और सरकार के बीच तीव्र बहस जारी है, जिसमें महिला आरक्षण की मांग के साथ-साथ सामाजिक न्याय का गंभीर मुद्दा भी जुड़ा हुआ है। अमित शाह की ये व्याख्या इस दावे का जवाब है कि परिसीमन दक्षिण के विकास को रोकने वाला नहीं बल्कि सभी राज्यों को समान प्रतिनिधित्व दिलाने वाला कदम है। लोकसभा की सीटों में प्रस्तावित वृद्धि और महिला आरक्षण बिल के अंतर्गत हो रहे संशोधन पूरे देश की राजनीतिक तस्वीर में नए अध्याय का आरंभ कर सकते हैं। आगामी दिनों में संसद में इस विषय पर विस्तृत चर्चा और सर्वसम्मति की भी संभावना बनी हुई है। इस विषय पर सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह कदम संसद को और अधिक समावेशी, संतुलित और समान अधिकारों वाला बनाने के लिए उठाया जा रहा है, जिससे लोकतंत्र और अधिक सशक्त होगा।

Madras High Court dismisses Tamannaah Bhatia’s plea for ₹1-crore damages from Power Soaps
Trending, मनोरंजन

मद्रास उच्च न्यायालय ने तमन्ना भाटिया की पॉवर सोप्स से ₹1 करोड़ हर्जाने की याचिका खारिज की

मद्रास,  तमन्ना भाटिया द्वारा पॉवर सोप्स कंपनी के खिलाफ दाखिल ₹1 करोड़ के हर्जाने की याचिका मद्रास उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी है। अभिनेत्री ने कंपनी पर आरोप लगाया था कि उनके लोकप्रियता का दुरुपयोग किया गया, जबकि समझौते की अवधि समाप्त हो चुकी थी। लेकिन अदालत ने इस दावे के पक्ष में पर्याप्त सबूतों की कमी को देखते हुए उनका यह आवेदन अस्वीकार कर दिया। तमन्ना भाटिया ने अपनी याचिका में कहा था कि कंपनी ने विज्ञापन अनुबंध की अवधि समाप्त होने के बाद भी उनके छवि का उपयोग जारी रखा, जिससे उन्हें आर्थिक और नैतिक नुकसान हुआ। उन्होंने यह भी मांग की थी कि कंपनी उन्हें ₹1 करोड़ का हर्जाना दे। हालांकि, कंपनी ने अदालत में आपत्तियां जताईं और कहा कि वे अनुबंध की शर्तों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं और किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है। मामले की सुनवाई के दौरान, अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुना, लेकिन तमन्ना द्वारा प्रस्तुत किए गए सबूत इतने मजबूत नहीं पाए गए कि वे उनके आरोपों की पुष्टि कर सकें। इसके परिणामस्वरूप न्यायालय ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि बिना ठोस प्रमाण के किसी भी तरह का दावा न्यायसंगत नहीं हो सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कॉन्ट्रैक्ट संबंधी किसी भी विवाद में, दावे को साबित करने का भार शिकायतकर्ता के कंधों पर होता है, जो इस मामले में पूरा नहीं हुआ। इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि किसी भी प्रदर्शनकारी को अपनी लोकप्रियता के दुरुपयोग के खिलाफ कड़े और प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। फैसले के बाद तमन्ना भाटिया ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वह फैसले का सम्मान करती हैं लेकिन इस मुद्दे को आगे बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कलाकारों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए कानूनी व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता है। वहीं, पॉवर सोप्स की कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि वे हमेशा अपने अनुबंधों का पालन करते हैं और इस मामले में अदालत के निर्णय का स्वागत करते हैं। यह मामला मनोरंजन और विज्ञापन उद्योग में अनुबंधों और कलाकारों के अधिकारों से जुड़ी महत्वपूर्ण कानूनी चुनौतियों को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के मामलों में स्पष्ट अनुबंध और दस्तावेजी प्रमाणों का होना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी भी विवाद की संभावना को कम किया जा सके। सारांश के तौर पर, तमन्ना भाटिया का यह दावा न्यायालय में स्वीकार नहीं किया गया, जो कलाकारों और कंपनियों के लिए एक सशक्त संदेश है कि उनके बीच के समझौतों का सम्मान और संरक्षण आवश्यक है।

Has de Kock overtaken Rickelton as MI's first pick for overseas opener?
खेल जगत

क्या डि कॉक ने रिकेल्टन को MI के ओवरसीज़ ओपनर के पहले विकल्प के रूप में पीछे छोड़ दिया है

मुंबई इंडियंस (MI) के लिए विदेशी ओपनर की भूमिका हमेशा से टीम की अहम प्राथमिकताओं में से एक रही है। इस बीच क्विंटन डि कॉक की फॉर्म और मानसिक स्थिति पर हाल ही में एक बड़ा बयान सामने आया है, जिसने टीम चयन की संभावनाओं पर चर्चा शुरू कर दी है। एरॉन फिंच, जो खुद एक अनुभवी खिलाड़ी हैं, ने क्विंटन डि कॉक को लेकर कहा, “वह एक ऐसा खिलाड़ी है जो अपनी करियर स्थिति को लेकर सुकून में है, और इसे वे किसी और खिलाड़ी से अलग तरह से लेकर चलते हैं।” इस बयान का मतलब साफ है कि डि कॉक अपने खेल और करियर से संतुष्ट हैं, जो उनके प्रदर्शन पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में जब मुंबई इंडियंस को अपने ओपनिंग बल्लेबाज के तौर पर विदेशी खिलाड़ी चुनना है, तो डि कॉक ने अपनी स्थिरता और अनुभव की वजह से एक मजबूत दावेदारी पेश की है। इसके विपरीत, रिकेल्टन जैसा युवा खिलाड़ी भी अपने खेल से प्रभावित कर रहा है, पर डि कॉक के मुकाबले उनकी तुलना अभी पूरी तरह से संभव नहीं लगती। मुंबई इंडियंस के कोचिंग स्टाफ के अनुसार, टीम के लिए सबसे जरूरी है एक भरोसेमंद और मानसिक रूप से मजबूत ओपनर मिलना जो बड़े दबाव में अच्छी बल्लेबाजी कर सके। इस लिहाज से डि कॉक की मानसिक शांति और अनुभवी खेल चयनकर्ताओं को आकर्षित कर रही है। वहीं, रिकेल्टन की बल्लेबाजी तकनीक और युवा जोश भी MI के लिए आकर्षक विकल्प हैं, लेकिन उनकी लगातार प्रदर्शन क्षमता पर अभी भी निगरानी रखी जा रही है। इस कारण मुंबई इंडियंस के अधिकारिक चयन के पहले, दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा बनी रहेगी। अंततः, टीम की रणनीति और मुकाबले की जरूरतों के अनुसार ही कोई निर्णय लिया जाएगा, लेकिन क्विंटन डि कॉक के आत्मविश्वास और शांतिपूर्ण करियर स्थिति ने उनकी संभावनाओं को मजबूत किया है। खिलाड़ी चयन को लेकर आने वाले हफ्तों में अधिक स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।

‘Matka King’ series review: A cautionary tale on the cost of ambition that pays rich dividends
मनोरंजन

‘मटका किंग’ सीरीज समीक्षा: महत्वाकांक्षा की कीमत पर एक सतर्कता की कहानी जो बड़ी सफलता देती है

विजय वर्मा की संयमित उत्कृष्टता और निर्देशक नागराज मंजुले की सामाजिक यथार्थवाद ने ‘मटका किंग’ सीरीज को एक परिचित लेकिन मंत्रमुग्ध कर देने वाला क्राइम ड्रामा बना दिया है। इस सीरीज ने दर्शकों के बीच एक गहरा प्रभाव छोड़ा है, जहां महत्वाकांक्षा और उसके परिणामों को एक सजीव और प्रामाणिक तरीके से प्रस्तुत किया गया है। ‘मटका किंग’ की कहानी मटका खेलने की दुनिया के भीतर झांकती है, जो क्राइम, राजनीति और मानवीय इच्छाओं से भरी हुई है। विजय वर्मा ने अपने सीमित लेकिन प्रभावशाली अभिनय से मुख्य किरदार को जीवन्तता प्रदान की है। उनकी प्रस्तुति में गहराई और यथार्थ का बेहद सुविचारित मिश्रण देखा जा सकता है, जो इसे सामान्य से हटकर बनाता है। निर्देशक नागराज मंजुले की पहचान उनके सामाजिक मुद्दों पर आधारित सशक्त कहानियों से है, और ‘मटका किंग’ भी इससे अलग नहीं है। उन्होंने मटका और उससे जुड़ी क्रिमिनल एक्टिविटी के संदर्भ में सामाजिक असमानताओं और संघर्ष को बड़ी सोच-समझ के साथ दर्शाया है। उनकी कहानी व्यावहारिक और यथार्थवादी है, जिसमें केवल मनोरंजन नहीं बल्कि समाज की बड़ी तस्वीर भी उभर कर नजर आती है। सीरीज में पटकथा और पटकथा लेखन ने एक मजबूत नींव पाई है। संवाद प्रभावशाली और संदर्भपूर्ण हैं जो कहानी में गहराई लाते हैं। साथ ही, सीरीज में इस्तेमाल हुई लोकेशन और सिनेमैटोग्राफी भी मटका की दुनिया की रौनक और कड़क हकीकत को बखूबी प्रस्तुत करती है। विजय वर्मा का किरदार एक ऐसे व्यक्ति की कहानी बयां करता है, जिसे अपने सपनों को पूरा करने के लिए कई सामाजिक और व्यक्तिगत बाधाओं का सामना करना पड़ता है। महत्वाकांक्षा की कीमत, जो कभी-कभी भारी पड़ती है, उसकी गूंज इस कहानी में स्पष्ट नजर आती है। यह दर्शाता है कि सफलता के पीछे छुपी जटिलताएं और संघर्ष कितने गहरे होते हैं। कुल मिलाकर, ‘मटका किंग’ सीरीज एक मनोरंजक और सोचने पर मजबूर कर देने वाली पेशकश है, जो प्रतियोगी क्राइम ड्रामा की दुनिया में खुद को अलग पहचान देती है। अगर आप उस तरह की कहानियों के शौकीन हैं जो आपको सिर्फ समय बिताने के लिए न होकर सोचने पर मजबूर करें, तो यह सीरीज जरूर देखनी चाहिए। इसका प्रभाव लंबे समय तक आपके मन में बना रहेगा।

CBSE बोर्ड 10वीं सेशन-1 का रिजल्ट जारी:UMANG एप पर चेक कर सकते हैं मार्कशीट; 15 मई से होंगे सेशन 2
राजनीति

CBSE बोर्ड 10वीं सेशन-1 का परिणाम घोषित: UMANG एप पर चेक करें मार्कशीट; सेशन 2 15 मई से शुरू

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने 10वीं कक्षा के सेशन 1 का परिणाम आधिकारिक तौर पर जारी कर दिया है। इस वर्ष 25 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं ने इस परीक्षा में भाग लिया। उम्मीदवार अपना रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट results.cbse.nic.in और UMANG ऐप के माध्यम से देख सकते हैं। सेशन 1 की परीक्षाएं देशभर के 8,000 से ज्यादा परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गईं। छात्रों को पास करने के लिए थ्योरी और आंतरिक आकलन दोनों में 33% से कम नहीं अंक लाना आवश्यक है। बोर्ड ने इस वर्ष 10वीं कक्षा के लिए नया टू-सेशन बोर्ड परीक्षा प्रणाली अपनाई है। पहला सत्र 17 फरवरी से 11 मार्च 2026 तक समाप्त हुआ, जबकि सेशन 2 के परीक्षा 15 मई से शुरू होकर 1 जून 2026 तक आयोजित की जाएंगी। सेशन 2 की परीक्षाएं उन छात्रों के लिए हैं जो अपने अंकों में सुधार करना चाहते हैं या सेक्शनल फेल हैं। इसमें सुधार के लिए अधिकतम तीन अंक सुधारने का अवसर मिलेगा। यदि किसी छात्र ने दो विषयों में फेल किया है तो वे कंपार्टमेंट कैटेगरी में आ सकते हैं और सेशन 2 की परीक्षा दे सकते हैं। तीन या उससे अधिक विषयों में फेल छात्र अगली मुख्य परीक्षा 2027 में देंगे। CBSE बोर्ड इस बार मेरिट लिस्ट या टॉपर घोषित नहीं करेगा। बोर्ड ने सभी स्कूलों व संस्थानों को निर्देश दिया है कि किसी भी छात्र को स्कूल या जिले का टॉपर घोषित न करें। यह नई नीति छात्रों पर अनावश्यक दबाव कम करने के उद्देश्य से लागू की गई है। सेशन 1 और सेशन 2 परीक्षा दोनों पूरे सिलेबस पर आधारित होती हैं और दोनों परीक्षाओं का प्रारूप समान रहता है। छात्रों को दोनों सत्रों में एक ही परीक्षा केंद्र पर परीक्षा देनी होगी और प्रैक्टिकल परीक्षाएं केवल एक बार ही दिसंबर-जनवरी के महीने में सम्पन्न होंगी। सेशन 2 की परीक्षा के लिए विद्यार्थियों को अलग से रजिस्ट्रेशन नहीं कराना होगा, हालांकि, यदि वे दोनों परीक्षाओं में भाग लेते हैं तो फीस एक साथ रखी जाएगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि 10वीं के लिए अब कोई सप्लीमेंट्री परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी, जिससे परीक्षाओं की व्यवस्था और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। छात्र UMANG ऐप पर अपना रिजल्ट ऐसे देख सकते हैं: ऐप खोलें, CBSE सेक्शन में जाएं, 10वीं सेशन 1 रिजल्ट विकल्प चुनें और अपना रोल नंबर भर कर परिणाम डाउनलोड करें। परीक्षा में हिस्सा लेने वाले सभी छात्र अपने स्कोरकार्ड की डिजिटल कॉपी सुरक्षित रख सकते हैं। बोर्ड ने कहा है कि 2025-26 से लागू इस नए टू बोर्ड सिस्टम के द्वारा छात्रों को बेहतर प्रदर्शन के कई विकल्प मिलेंगे, जिससे पढ़ाई में मनोबल भी बढ़ेगा और परिणामों में सुधार होगा। अधिक जानकारी और अपडेट के लिए आधिकारिक वेबसाइट तथा UMANG ऐप नियमित चेक करते रहें। 10वीं कक्षा सेशन 1 के परिणाम प्रकाशित होने के साथ ही शिक्षा जगत में नई उम्मीदें जग गई हैं और छात्र आगामी सेशन 2 के लिए तैयारियां तेज कर रहे हैं।

Stokes 'got lucky' with facial injury as he targets Durham comeback in May
खेल जगत

स्टोक्स की चेहरे की चोट में मिली ‘किस्मत’, मई में डरहम वापसी पर नजर

इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी श्रृंखला से पहले अपनी फिटनेस और फॉर्म को पुनः स्थापित करने के लिए तीन प्रथम श्रेणी मैच खेलने का लक्ष्य बनाया है। इसमें इंग्लैंड लायंस की टीम के लिए भी खेलना शामिल होगा। यह कदम उनकी हाल ही में हुई चेहरे की चोट से उबरने के बाद अपने रिकॉर्ड को सुधारने और टीम में वापसी करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। स्टोक्स ने दावा किया है कि उनकी चेहरे की चोट में उन्हें किस्मत साथ मिली क्योंकि चोट की स्थिति और समय को देखते हुए यह उनकी करियर के लिए अपेक्षाकृत सौभाग्यशाली साबित हुई। खास कर तब जब उन्होंने ऐसे समय में इस चोट को झेला, जब वे अपनी सर्वश्रेष्ठ स्थिति में थे। उनका मानना है कि वह मई में डरहम के लिए खेलने को लेकर पूरी तरह से तैयार हैं और इससे उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ श्रृंखला से पहले अपने खेल को निखारने में मदद मिलेगी। इंग्लैंड लायंस टीम के लिए खेलने को लेकर स्टोक्स ने कहा कि यह उनके लिए फिर से उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा में आने की अहम रणनीति है। तीन मैचों की यह श्रृंखला उनकी लम्बी अवधि की योजना का हिस्सा है, जो उन्हें पूरी तरह पुनः सक्रिय करने और मैच रफ्तार पकड़ने में सहायक होगी। कोचिंग स्टाफ और मेडिकल टीम के साथ मिलकर बनाई गई यह योजना उनकी वापसी को सहज बनाने पर केंद्रित है। कप्तान का मानना है कि चोट से उबरने के बाद मैदान पर वापसी करना हमेशा चुनौतिपूर्ण होता है, लेकिन सही योजनाबद्ध तरीके से वह जल्दी ही अपनी पुरानी फॉर्म में लौटने का भरोसा रखते हैं। उन्होंने कहा, “मेरे लिए यह महत्वपूर्ण है कि मैं अच्छी तरह से खेलूं और टीम को मजबूती से परिचालित कर सकूं। इसलिए मैं अपने फिटनेस स्तर को उच्चतम बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हूं।” यह कदम इंग्लैंड क्रिकेट टीम के लिए भी एक बड़ी राहत है क्योंकि स्टोक्स की मौजूदगी टीम के प्रदर्शन पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। उनके अनुभव और नेतृत्व गुणों की मदद से टीम का आत्मविश्वास बढ़ता है। मई में इन तीन मैचों के दौरान मिली वापसी की सफलता न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी श्रृंखला में खेल रणनीति निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि स्टोक्स का यह फैसला उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण को दर्शाता है। चोट से उबरने के बाद शीर्ष स्तर पर वापसी करना आसान नहीं होता, लेकिन उनके आत्मविश्वास और सही योजना के कारण यह संभव हो पाया है।

Rituparna Sengupta interview: On Rahul Arunoday Banerjee’s death and the no-work protest
मनोरंजन

ऋतु सेनगुप्ता का इंटरव्यू: राहुल अरुणोदय बनर्जी की मृत्यु और नो-वर्क प्रोटेस्ट पर बयान

पश्चिम बंगाल की फिल्म उद्योग हाल ही में एक गंभीर संकट का सामना कर रहा है, जहां अनेक कलाकार और कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। इस विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में, प्रसिद्ध अभिनेत्री ऋतुপরण सेनगुप्ता ने खुलकर अपनी बात रखी है और इस क्षेत्र में बदलाव की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है। ऋतुপরण सेनगुप्ता ने हालिया घटनाओं और राहुल अरुणोदय बनर्जी के आकस्मिक निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह दुखद घटना केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि बंगाली फिल्म उद्योग की सुरक्षा और संरचना में मौजूद खामियों का परिणाम भी है। उन्होंने कहा, “हमें चाहिए कि हमारी फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वालों के लिए सुरक्षा के उचित इंतजाम हों। हर कलाकार और कर्मचारी का जीवन हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।” उन्होंने नो-वर्क प्रोटेस्ट के माध्यम से अपने विरोध को व्यक्त करते हुए कहा कि यह विरोध केवल काम के खिलाफ नहीं है, बल्कि इस प्रणालीगत समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करने का एक प्रयास है। “सिर्फ काम से इनकार करना ही समाधान नहीं है, हमें इसके पीछे की वजहों को समझना और उन पर काम करना होगा,” ऋतुपरण ने आगे कहा। बंगाली फिल्म उद्योग के अंदर कार्य स्थितियों, अनुबंधों की पारदर्शिता, सुरक्षा उपायों और कर्मचारियों के अधिकारों के प्रति होती लापरवाही ऋतुপরण के अनुसार, तत्काल सुधार की मांग करती है। उन्होंने यह भी ज़ोर देकर कहा कि कलाकारों का उत्साह और प्रतिभा तभी फल-फूल सकती है जब उन्हें एक सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल मिले। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान, बंगाली फिल्म उद्योग के अन्य कलाकारों और तकनीकी कर्मचारियों ने भी अपनी आवाज़ उठाई है। वे मांग कर रहे हैं कि सरकार एवं संबंधित संस्थान मिलकर इस उद्योग को सुरक्षित और स्थायी बनी रहने योग्य बनाएं। ऋतुপরण सेनगुप्ता का मानना है कि मीडिया और जनता की जागरूकता भी इन बदलावों की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा, “जब तक हम सभी मिलकर इस मुद्दे पर ध्यान नहीं देंगे, तब तक हम सही मायनों में बदलाव नहीं ला पाएंगे।” अंततः, बंगाली फिल्म उद्योग को समर्पित यह विरोध न केवल एक आवाज़ है, बल्कि एक श्रृंखला की शुरूआत भी है, जो कलाकारों और श्रमिकों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए की जा रही है। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सभी संबंधित पक्षों को मिलकर कार्य करना आवश्यक होगा।

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