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Author name: Kamlesh Purohit

Deepika Padukone, Ranveer Singh announce second pregnancy
मनोरंजन

दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह ने दूसरी बार खुशखबरी सुनाई

बॉलीवुड के चर्चित और पसंदीदा जोड़ी दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह एक बार फिर से खुशखबरी लेकर आए हैं। इस मशहूर कपल ने अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की घोषणा करते हुए अपने फैंस को बेहद खुशी दी है। दोनों ने हाल ही में सोशल मीडिया के माध्यम से यह खुशखबरी साझा की है, जो फैंस और बॉलीवुड जगत के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है। राजधानी मुंबई से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दीपिका और रणवीर ने अपनी पहली संतान का स्वागत पिछले महीने, 8 सितंबर 2024 को किया था। इस नन्हें मेहमान के आने से उनके जीवन में सुख-शांति और खुशहाली बनी है। वहीं दूसरी ओर, दूसरी प्रेग्नेंसी की घोषणा से लोग और भी ज्यादा उत्साहित और खुश नजर आ रहे हैं। दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की जोड़ी बॉलीवुड इंडस्ट्री में काफी लोकप्रिय है। अपने बेहतरीन अभिनय और बेबाक पर्सनालिटी की वजह से दोनों का नाम देश-विदेश में जाता है। दीपिका, जो कि गर्व से भारत की फिल्मों में अपनी छाप छोड़ चुकी हैं, और रणवीर, जिन्होंने अपनी अलग तरह की एक्टिंग से लोगों को परे प्रभावित किया है, दोनों की लाइफस्टाइल और रिश्तों की खबरें मीडिया और फैंस के लिए हमेशा से खास रही हैं। दूसरी प्रेग्नेंसी की खबर ने उनके फैंस के बीच खुशी की लहर दौड़ा दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोग इस समाचार का स्वागत शानदार अंदाज में कर रहे हैं। ज्ञात हो कि चुनौतीपूर्ण और व्यस्त इंडस्ट्री में होने के बावजूद ये कपल अपनी पारिवारिक जिंदगी को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने समय-समय पर अपनी खुशियों की जानकारी अपने प्रशंसकों के साथ साझा की है जिससे उनके और उनके फैंस के बीच एक मजबूत रिश्ता बन पाया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, दूसरी प्रेग्नेंसी की घोषणा के बाद यह जरूरी है कि दीपिका अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखें। इस वक्त उन्हें पर्याप्त आराम, सही खानपान और नियमित जांच कराना अत्यंत आवश्यक रहेगा ताकि माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रहें। फैन्स और इंडस्ट्री के लोग दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह को इस नए अध्याय की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि सभी के लिए यह समय खुशियों और सफलता से भरा रहे। बॉलीवुड में ऐसे कई कलाकार हैं जो अपने परिवार की ख़ुशी और सेहत को लेकर सजग रहते हैं और दीपिका-रणवीर की यह खुशखबरी भी सबको प्रेरित करती है कि परिवार जीवन में कितना महत्वपूर्ण होता है।

Malayalam film Private screened at Moscow International Film Festival
मनोरंजन

मॉस्को अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में दिखाया गया मलयालम फिल्म प्राइवेट

मॉस्को। भारतीय सिनेमा के मलयालम भाषा में बनी फिल्म ‘प्राइवेट’ को मॉस्को अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में गैर-प्रतिस्पर्धात्मक श्रेणी में चुना गया है। इस फिल्म में इंद्रन्स और मीनाक्षी अनूप मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म को अपने सामाजिक मुद्दों और संवेदनशील कहानी के लिए प्रशंसा मिली है। फिल्म का पहला प्राइवेट स्क्रीनिंग 18 अप्रैल को आयोजित किया गया, जिसमें फिल्म समीक्षकों और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों ने भाग लिया। दूसरे प्रदर्शनी की तारीख 20 अप्रैल निर्धारित की गई है, जहां फिल्म को फिर से दिखाया जाएगा। मालयालम सिनेमा को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने वाली इस फिल्म में समाज के विभिन्न पहलुओं को बारीकी से दिखाया गया है। इंद्रन्स और मीनाक्षी अनूप के अभिनय की भी दर्शकों द्वारा सराहना की जा रही है। मॉस्को अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव विश्व के प्रमुख फिल्म महोत्सवों में से एक है, जहाँ विभिन्न देशों से फिल्मों का चयन होता है। इस महोत्सव में गैर-प्रतिस्पर्धात्मक श्रेणी में चुनने का मतलब यह है कि यह फिल्म प्रोग्राम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके माध्यम से दर्शकों तक अपनी बात पहुंचा रही है। फिल्म ‘प्राइवेट’ की इस उपलब्धि से केरल के फिल्म निर्माताओं को भी गर्व महसूस हो रहा है। यह फिल्म मलयालम सिनेमा की कला, संस्कृति और सामाजिक संवेदनाओं को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर सफलतापूर्वक प्रस्तुत कर रही है। इस प्रकार, मलयालम फिल्म ‘प्राइवेट’ का महोत्सव में चयन न केवल फिल्म की सफलता का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय regional cinema की विस्तृत पहचान का भी सबूत है। दर्शक और फैंस फिल्म के आगामी प्रदर्शन के लिए उत्सुक हैं।

‘Mahavatar Parshuraam’: After ‘Narsimha’, Hombale Films announces next Mahavatar Cinematic Universe film
मनोरंजन

‘महावतार परशुराम’: ‘नरसिंह’ के बाद हॉम्बलेफिल्म्स ने महावतार सिनेमैटिक यूनिवर्स की अगली फिल्म का ऐलान किया

हॉम्बलेफिल्म्स द्वारा निर्मित महावतार सिनेमैटिक यूनिवर्स की नई फिल्म ‘महावतार परशुराम’ दिसंबर 2027 में बड़े परदे पर दस्तक देने जा रही है। यह फिल्म सात भागों वाली महावतार सिनेमैटिक यूनिवर्स की एक अहम कड़ी होगी, जो दर्शकों को पौराणिक कथाओं के मार्मिक और मनोरंजक सफर पर ले जाएगी। महावतार परशुराम की कहानी हिंदू पौराणिक कथाओं के प्रसिद्ध अवतारों में से एक, परशुराम जी के जीवन एवं उनके वीरता के किस्सों पर आधारित है। परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं और उनकी कहानी कई पीढ़ियों से लोकपरंपराओं में जीवित है। फिल्म निर्माता हॉम्बलेफिल्म्स ने इस फिल्म के ज़रिए इस पौराणिक पात्र को बड़े परदे पर नई ऊर्जा और आधुनिकता के साथ पेश करने का लक्ष्य रखा है। हॉम्बलेफिल्म्स की इस महावतार सिनेमैटिक यूनिवर्स योजना में कुल सात फिल्में बनींगी, जिनमें से ‘नरसिंह’ पहली फिल्म थी, जिसने दर्शकों से काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त की। इसके बाद अब ‘महावतार परशुराम’ को लेकर दर्शकों में उत्साह और जिज्ञासा बढ़ गई है। फिल्म के निर्देशक, निर्माताओं और कास्ट के चयन पर फिलहाल विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि हॉम्बलेफिल्म्स अपनी इस श्रृंखला को अत्याधुनिक तकनीक और उच्च गुणवत्ता वाले निर्देशन के साथ प्रस्तुत करेगा। फिल्म की रिलीज डेट दिसंबर 2027 घोषित किए जाने के बाद से ही सोशल मीडिया और फिल्म प्रेमी इस परियोजना पर अपनी चर्चा में जुट गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पौराणिक कथाओं पर आधारित इस तरह की सिनेमैटिक यूनिवर्स फिल्मों की मात्रा बढ़ रही है, जो भारतीय सिनेमा की विविधता और सांस्कृतिक धरोहर को एक वैश्विक मंच प्रदान कर रही हैं। हॉम्बलेफिल्म्स की इस पहल को भारतीय सिनेमा में एक नया आयाम देने वाला माना जा रहा है। फिल्म के ट्रेलर और अन्य प्रमोशनल सामग्री की जानकारी आने के बाद इस परियोजना पर और भी रोशनी डाली जाएगी। फिलहाल, दर्शक और समीक्षक दोनों ही महावतार परशुराम की रिलीज के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके साथ ही पौराणिक कथाओं को नए युग के सिनेमा माध्यम से देखने की उम्मीदें भी चरम पर हैं।

निहंग सिंहों का अनूठा संकल्प:युद्ध कला में निपुण जत्थेदार बिना कीटनाशक खेती कर रहे, ताकि लंगर पवित्र हो
राजनीति

निहंग सिंहों का अनोखा संकल्प: युद्ध कला में निपुण जत्थेदार बिना कीटनाशक खेती कर लंगर को पवित्र बना रहे

निहंग सिंहों का अनूठा प्रयास: बिना कीटनाशक के 3000 एकड़ में ऑर्गेनिक खेती पंजाब युद्ध कला के माहिर निहंग सिंह अपने अनोखे संकल्प के तहत पर्यावरण और धार्मिक पवित्रता दोनों को सहेजने का काम कर रहे हैं। वे बिना किसी कीटनाशकों का प्रयोग किए, 3000 एकड़ जमीन पर ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं, ताकि गुरुद्वारा साहिब के लंगर के प्रसाद हर प्रकार से शुद्ध और पवित्र बने रहें। यह पहल शिरोमणि पंथ अकाली श्री मिसल शहीदां तरनादल बाबा बकाला साहिब के मुखी जत्थेदार बाबा जोगा सिंह व संत बाबा गुरदेव सिंह जी शहीदी बाग श्री आनंदपुर साहिब के निर्देशानुसार दल द्वारा संचालित की जा रही है। निहंगों द्वारा अपनाई गई खेती की तकनीक काफी अनूठी है। वे सबसे पहले ढैंचा जैसी फसलें खेत में उगाते हैं, जो मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी को पूरा करती हैं। इसके बाद सड़े हुए गोबर को मिट्टी में मिलाकर उसे उपजाऊ बनाया जाता है। जत्थेदार बाबा जोगा सिंह और बाबा नोध सिंह समाध के प्रबंधन में यह क्रम जारी है। बाबा परमिंदरबीर सिंह के अनुसार, जत्थेदार भगवान सिंह गेहूं की क्वालिटी को सिर्फ बरकरार ही नहीं रख रहे, बल्कि उसे बेहतर भी बना रहे हैं। गेहूं की बुवाई के बाद 25-30 दिन तक हाथों से या छोटे उपकरणों से निराई-गुड़ाई की जाती है। जैसे ही पौधे निकलते हैं, उनकी जरूरत के अनुरूप स्वाह या नीम के घोल से छिड़काव किया जाता है, ताकि फसल की रक्षा हो सके। यदि फसल में कीड़े व अन्य कीट लगते हैं तो 10 प्रकार की कड़वी पत्तियों से बना अर्क छिड़का जाता है, जो किसानों के लिए प्राकृतिक और प्रभावी सुरक्षा का जरिया है। यह भी बताया गया कि बारिश न होने पर फसल को 4-5 बार पानी दिया जाता है जिससे उसकी अच्छी पैदावार सुनिश्चित हो सके। निहंग सिंह गेहूं के अतिरिक्त लंगर में प्रयुक्त सभी खाद्य पदार्थ जैसे गन्ना, मूंग, गोभी, आलू, प्याज, सरसों, मक्का, जौ, तेल और तिल जैसी फसलों की भी उन्नत ऑर्गेनिक खेती करते हैं। यह सारी उपज सीधे लंगर में उपयोग की जाती है और इसे बाहर बाजार में नहीं बेचा जाता। बिना कीटनाशक के फसल बचाना चुनौतीपूर्ण है लेकिन निहंग सिंह ऐसी कठिनाइयों का मुकाबला बड़ी प्रतिबद्धता और समर्पण से कर रहे हैं। कभी-कभी स्वाह को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ढोना पड़ता है, क्योंकि हर खेत की जरूरत अलग-अलग होती है। स्वाह, जो कि रसोई से निकलने वाला प्राकृतिक पदार्थ है, को बिल्कुल व्यर्थ नहीं जाने दिया जाता। इसके अलावा, बड़ी संख्या में गोशालाएं भी चलायी जा रही हैं जहां से नियमित रूप से गोबर प्राप्त होता है। यह पहल न केवल धार्मिक भावनाओं को सशक्त कर रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक मिसाल कायम कर रही है। निहंग सिंह अपनी पारंपरिक युद्ध कला की महारत के साथ-साथ कृषि के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। उनकी यह सेवा गुरु की श्रद्धा के साथ-साथ प्रकृति के प्रति उनकी जिम्मेदारी को दर्शाती है। इस प्रकार, निहंग सिंहों का यह अनूठा प्रयोग आधुनिक कृषि पद्धतियों और पारंपरिक संस्कारों का सुंदर संगम है, जो आने वाले समय में अन्य धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।

Abuzar Akhtar introspects on humility and faith with ‘Ehtram’
मनोरंजन

अबुज़र अख्तर ने ‘एहम्रम’ के साथ विनम्रता और आस्था पर किया आत्मनिरीक्षण

मुंबई से संबंध रखने वाले प्रसिद्ध गायक अबुज़र अख्तर ने हाल ही में संगीत की दुनिया में एक नया कदम बढ़ाया है। उन्होंने अपना स्वयं का रिकॉर्ड लेबल लॉन्च करके न केवल संगीत की दुनिया में अपनी पहचान मजबूती से स्थापित की है, बल्कि वे अब एक सफल उद्यमी के रूप में भी उभर रहे हैं। अभिनेता और गायक के रूप में पहले से ही एक मजबूत स्थान बना चुके अबुज़र अख्तर ने इस नए प्रोजेक्ट के जरिये न केवल अपने संगीत को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है, बल्कि वे नए और उभरते कलाकारों को भी प्लेटफॉर्म देने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनका उद्देश्य संगीत प्रेमियों तक गुणवत्ता युक्त संगीत पहुंचाना और टैलेंटेड कलाकारों को सही अवसर प्रदान करना है। मुंबई, जो भारतीय मनोरंजन उद्योग का केंद्र है, यहां से कई कलाकारों ने अपनी मंजिल पाई है। अबुज़र अख्तर का रिकॉर्ड लेबल इस बात का प्रमाण है कि वे संगीत के साथ-साथ व्यावसायिक समझ भी रखते हैं। उनका मानना है कि संगीत केवल कला ही नहीं, बल्कि एक व्यवसाय भी है जिसे समर्पण और उत्कृष्ट प्रबंधन की जरूरत होती है। इस नई पहल के तहत वह गाने की रिकॉर्डिंग, प्रोडक्शन, मार्केटिंग और वितरण से जुड़ी सभी जिम्मेदारियां स्वयं उठाएंगे। यह कदम न केवल उनकी रचनात्मक स्वतंत्रता को बढ़ावा देगा, बल्कि युवा कलाकारों के लिए भी अवसरों के द्वार खोल देगा। संगीत प्रेमी और उद्योग विशेषज्ञ इस पहल को बहुत सकारात्मक रूप से देख रहे हैं। उनका मानना है कि अबुज़र अख्तर का यह कदम भारतीय संगीत उद्योग में नई ऊर्जा लाएगा और देश के विशाल संगीत प्रेमी समुदाय के बीच इसे अच्छी प्रतिक्रिया मिलने की पूरी संभावना है। मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, अबुज़र ने अपने नए स्टार्टअप के बारे में विस्तार से चर्चा की और कहा, “मेरा उद्देश्य केवल संगीत बनाना नहीं, बल्कि संगीत को सही दिशा और सम्मान देना है। इस रिकॉर्ड लेबल के माध्यम से मैं खुद को और दूसरों को विकसित करने का प्रयास करूंगा।” उद्यमिता के साथ-साथ अबुज़र अख्तर ने अपनी कला में भी निरंतर सुधार किया है और अब उनकी आवाज़ को नए आयाम मिलेंगे। संगीत प्रेमियों को उम्मीद है कि उनके इस नए प्रयास से नए और असाधारण संगीत का सृजन होगा। इस प्रकार, अबुज़र अख्तर का रिकॉर्ड लेबल न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रगति का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय संगीत उद्योग के विकास में भी सहायक होगा। भविष्य में यह नई पहल संगीत जगत में एक नया अध्याय लिख सकती है।

SL allrounder Shanaka banned from PSL for one year
खेल जगत

शानाका पर PSL से एक साल का प्रतिबंध लगा

श्रीलंका के प्रमुख ऑलराउंडर दुष्मंत निसांका शानाका पर पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) से एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह प्रतिबंध तब आया जब शानाका ने अचानक लाहौर कलंदर के साथ अपने अनुबंध से वापस लेने का फैसला किया और इसके बाद उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की टीम राजस्थान रॉयल्स से जुड़ने का निर्णय लिया। सूत्रों के अनुसार, शानाका ने PSL के नियमों के खिलाफ जाकर लाहौर कलंदर के साथ समझौता तोड़ दिया, जो लीग की अनुशासनात्मक टीम के लिए गंभीर मामला माना गया। पैसों और अनुबंध की शर्तों को लेकर विवाद के बीच उनके इस कदम ने विवाद का रूप ले लिया। PSL की प्रबंधन समिति ने पुष्टि की है कि शानाका को लीग से बाहर करने का फैसला लीग की अखंडता और अनुशासन के लिए लिया गया है। समिति के प्रमुख ने बताया कि खेल के नियमों और अनुबंध की शर्तों का पालन करना खिलाड़ियों के लिए अनिवार्य है, और इसका उल्लंघन करने वाले पर कार्रवाई की जाएगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, शानाका ने अपने करियर को IPL में फोकस करने के लिए यह फैसला लिया। राजस्थान रॉयल्स ने भी उनकी सेवाओं को लेकर खुशी जताई है और उम्मीद जताई है कि वह टीम के लिए सकारात्मक योगदान देंगे। यह मामला क्रिकेट प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि PSL में एक प्रमुख खिलाड़ी का इस तरह से बहिर्गमन लीग की छवि पर प्रभाव डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि खिलाड़ियों को अपने अनुबंधों के प्रति गंभीर और प्रतिबद्ध रहना चाहिए, ताकि खेल की भावना बनी रहे। शानाका के इस कदम से एक बार फिर खिलाड़ियों की लीगों के बीच टक्कर और अनुबंध प्रबंधन पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखने वाली बात होगी कि PSL की अगली कार्रवाई क्या होगी और बाकी फ्रेंचाइजी इस स्थिति को कैसे संभालती हैं। इस मामले में आगे की जानकारी और शानाका के संभावित अपील पर भी नजर रखी जाएगी। फिलहाल, शानाका की IPL टीम राजस्थान रॉयल्स में मौजूदगी ही उनकी क्रिकेट यात्रा का मुख्य केन्द्र बनी हुई है।

‘Jaws’ at 50: Still has bite
मनोरंजन

‘जॉज़’ के 50 वर्ष: आज भी है जबरदस्त प्रभाव

1975 में बनी स्टीवन स्पीलबर्ग की कालजयी फिल्म ‘जॉज़’ को 50 वर्ष पूरे होने पर 4K पुनर्स्थापित संस्करण देखना एक रोमांचक अनुभव था। यह फिल्म केवल एक हॉरर थ्रिलर ही नहीं, बल्कि ब्लॉकबस्टर फिल्मों के लिए एक नई मिसाल भी साबित हुई। उस वक्त मात्र 26 वर्ष के स्टीवन स्पीलबर्ग ने जिस तरह की क्रांतिकारी कहानी और निर्देशन प्रस्तुत किया, वह आज भी फिल्मकारों के लिए प्रेरणा स्रोत है। ‘जॉज़’ की कहानी एक छोटे समुद्री शहर में एक विशालकाय शार्क के आतंक को दिखाती है, जिसने वहां के लोगों की जान और समुद्री पर्यटन दोनों को खतरे में डाल दिया। फिल्म की सफलता न केवल इसकी रचनात्मक कहानी के कारण थी, बल्कि इसके तकनीकी नवाचारों, दृश्य प्रभावों और संगीत के इस्तेमाल ने इसे एक यादगार अनुभव बना दिया। 4K रिज़ॉल्यूशन में देखने पर फिल्म की गुणवत्ता, तस्वीरों की स्पष्टता और ध्वनि का प्रभाव पुरानी यादों को फिर से जीवंत कर देता है। विशेष रूप से जॉन विलियम्स द्वारा रचित संगीत की थीम आज भी दर्शकों के मन में डर और उत्सुकता दोनों पैदा करती है। इस पुनर्स्थापित संस्करण ने दर्शकों को उन पलों का अनुभव दोबारा कराया जब ‘जॉज़’ ने सिनेमाघरों में तहलका मचा दिया था। फिल्म ने हॉरर-थ्रिलर शैली में एक नए युग की शुरुआत की और समुद्री शिकार पर आधारित फिल्मों के लिए एक मानक स्थापित किया। इसके बाद कई फिल्मों और टीवी शो ने इसी शैली की झलक दिखाई, लेकिन ‘जॉज़’ की सफलता को कोई पार नहीं कर पाया। स्टीवन स्पीलबर्ग का यह मास्टरपीस न केवल उनकी प्रतिभा का द्योतक था, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह कम संसाधनों और नए विचारों से एक हिट फिल्म बनाई जा सकती है। 50 वर्ष के इस सफर में ‘जॉज़’ ने अपने आप को एक क्लासिक के रूप में स्थापित किया है और आज भी समकालीन दर्शकों में उत्साह जगाता है। इसके पुनर्स्थापित संस्करण ने पुराने और नए दोनों प्रकार के सिनेमाप्रेमियों को एक साथ बांधने का काम किया है। इस प्रकार, ‘जॉज़’ न केवल एक फिल्म है, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक भी है, जो समय की कसौटी पर खरी उतरी है।

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602 वें स्थापना दिवस पर सूना रहा सिरोही, प्रशासन की बेरुखी से आहत हुए शहरवासी

 इतिहास का सम्मान होना चाहिए था, वहां पसरी रही खामोशी सिरोही। सिरोही के 602वें स्थापना दिवस जैसे गौरवशाली, पावन और ऐतिहासिक अवसर पर इस बार प्रशासनिक स्तर पर कोई विशेष आयोजन नहीं होना शहरवासियों के लिए गहरी निराशा का कारण बना। जिस दिन पूरे नगर को अपनी समृद्ध विरासत, संस्कृति और इतिहास का उत्सव मनाते हुए एकजुट होना चाहिए था, उसी दिन जिम्मेदार तंत्र की चुप्पी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। स्थापना दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि शहर की पहचान, उसके गौरवशाली अतीत और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक होता है। ऐसे महत्वपूर्ण अवसर पर प्रशासन की निष्क्रियता ने यह संदेश दिया कि शायद अब परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के प्रति संवेदनशीलता कम होती जा रही है। शहर के बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, हर वर्ग में इस बात को लेकर नाराजगी और मायूसी साफ तौर पर देखी गई। चौधरी लाइन के नागरिकों ने निभाई परंपरा जब प्रशासनिक तंत्र मौन रहा, तब सिरोही की जागरूक जनता ने अपनी जिम्मेदारी निभाई। चौधरी लाइन क्षेत्र के परिवारों, व्यापारियों एवं आसपास के नागरिकों ने इस ऐतिहासिक दिन को यूं ही गुजरने नहीं दिया। शाम को शीशाजी मंदिर प्रांगण में एकत्रित होकर उन्होंने आरती का आयोजन किया और शहर की सुख-समृद्धि, शांति और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। यह आयोजन इस बात का सशक्त उदाहरण बना कि सिरोही की जनता आज भी अपने संस्कारों, परंपराओं और इतिहास से गहराई से जुड़ी हुई है। लोगों ने कहा कि चाहे प्रशासन साथ दे या न दे, लेकिन शहर की अस्मिता और परंपरा को जीवित रखना हर नागरिक का कर्तव्य है। यही कारण है कि सीमित संसाधनों के बावजूद नागरिकों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस आयोजन को सफल बनाया। दो वर्ष पहले था उत्साह, अब उदासीनता? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दो वर्ष पूर्व जब संयम विधायक थे, तब सिरोही स्थापना दिवस बड़े उत्साह, उल्लास और गरिमा के साथ मनाया जाता था। उस समय प्रशासन और जनप्रतिनिधि दोनों मिलकर इस दिन को यादगार बनाते थे। विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, सामाजिक आयोजन और शहर की विरासत को प्रदर्शित करने वाली गतिविधियां आयोजित की जाती थीं, जिससे लोगों में गर्व और उत्साह का माहौल बनता था। लेकिन पिछले दो वर्षों से स्थिति पूरी तरह बदलती नजर आ रही है। अब यह गौरवमयी दिवस उपेक्षा का शिकार होता दिख रहा है। न तो प्रशासन की ओर से कोई पहल दिखाई देती है और न ही जनप्रतिनिधियों की सक्रियता नजर आती है। इस बदलाव ने शहरवासियों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर उनकी भावनाओं और शहर की परंपराओं के प्रति जिम्मेदार लोगों की संवेदनाएं कहां खो गई हैं? आस्था और इतिहास का केंद्र शीशाजी मंदिर सिरोही नगर की स्थापना के इतिहास में शीशाजी मंदिर का विशेष महत्व है। मान्यता है कि जब सिरोही नगर की स्थापना का संकल्प लिया गया था, तब सर्वप्रथम इसी पवित्र मंदिर की स्थापना की गई थी। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सिरोही की आस्था, संस्कृति, समृद्ध परंपरा और गौरवशाली इतिहास का मूल आधार एवं प्रेरणास्रोत है। स्थापना दिवस जैसे अवसर पर इस मंदिर में आयोजन होना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह शहर की जड़ों से जुडऩे और अपनी पहचान को सहेजने का भी माध्यम है। शाम 7.30 बजे हुई आरती, गूंजे श्रद्धा के स्वर स्थापना दिवस के अवसर पर शाम साढे सात बजे श्री शीशाजी मंदिर, चौधरी लाइन, सदर बाजार में भव्य आरती का आयोजन किया गया। आरती के दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। दीपों की रोशनी, मंत्रोच्चार और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को अत्यंत भावनात्मक और प्रेरणादायक बना दिया। शहरवासियों ने एक स्वर में सिरोही की सुख-शांति, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की। यह दृश्य इस बात का प्रतीक था कि चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों, लेकिन सिरोही की जनता अपने शहर के प्रति प्रेम और समर्पण में कभी कमी नहीं आने देगी। इनकी रही मौजूदगी इस आयोजन में क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। वरिष्ठजनों में किशोर चौधरी, जयंतीलाल , व्यापारी वर्ग से राजू भाई, नितेश उर्फ लाला , जय, विक्रम हरण, निरंजन भाई सहित क्षेत्र की महिलाएं एवं अनेक नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर न केवल आरती में भाग लिया, बल्कि शहर के विकास और समृद्धि के लिए सामूहिक संकल्प भी लिया।    

भाजपा नेता की हत्या में कर्नाटक कांग्रेस MLA को उम्रकैद:2016 के केस में विनय कुलकर्णी समेत 17 को सजा; CBI ने जांच की थी
राजनीति

भाजपा नेता की हत्या में कर्नाटक कांग्रेस MLA को उम्रकैद: 2016 के केस में विनय कुलकर्णी समेत 17 को सजा; CBI ने जांच की

कर्नाटक के भाजपा नेता योगेश गौड़ा गौदर की हत्या के मामले में बेंगलुरु के स्पेशल कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री विनय कुलकर्णी समेत 17 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी दोषियों पर 30-30 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला 2016 में हुई इस हत्या की जांच के बाद आया है, जिसे प्रारंभ में स्थानीय पुलिस देख रही थी, लेकिन बाद में राजनीतिक दबाव के कारण 2019 में जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई थी। दरअसल, 15 जून 2016 को धारवाड़ जिले में बीजेपी नेता और जिला पंचायत सदस्य योगेश गौड़ा की उनके जिम में बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी और आरोप लगे कि मामले की जांच पर दबाव डाला गया। CBI की जांच में यह मामला गंभीर हो गया और कोर्ट ने 15 अप्रैल को कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी एवं 16 अन्य आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120B (आपराधिक साजिश) के अंतर्गत दोषी पाया। स्पेशल जज संतोष गजानन भट ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी एक साजिश रचकर योगेश गौड़ा की हत्या में शामिल थे। अदालत ने यह अदालत से स्पष्ट रूप से कहा कि इस हत्या की योजना पूर्व में बनाई गई थी और सभी दोषी इसमें समान रूप से हिस्सा लेने वाले थे। इस सजा के बाद कांग्रेस नेता विनय कुलकर्णी की विधानसभा सदस्यता खतरे में है, क्योंकि कानून के अनुसार दो साल या उससे अधिक की सजा मिलने पर एक जनप्रतिनिधि अयोग्य हो जाता है। विनय कुलकर्णी के अलावा आरोपियों में विक्रम बेल्लारी, कीर्ति कुमार, संदीप सावदत्ती, विनायक कटगी, महाबलेश्वर होंगल उर्फ ​​मुदाका, संतोष सावदत्ती, दिनेश एम, एस अश्वथ, केएस सुनील, नजीर अहमद, शानवाज, के नूतन, सी हर्षित, चन्द्रशेखर इंडी उर्फ ​​चंद्रू मामा, विकास कलबुर्गी और चन्नकेशव तिंगरीकर शामिल हैं। हालांकि, दो आरोपियों वासुदेव रामा नीलेकानी और सोमशेखर न्यामगौड़ा को सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया गया। इस घटना की जांच की शुरुआत में स्थानीय पुलिस ने की, लेकिन राजनीतिक दबाव और जांच में बाधा आने की वजह से मामले की सीबीआई को जिम्मेदारी दी गई। सीबीआई ने पूरे मामले की गंभीरता से जांच की और अदालत में साक्ष्य पेश किए। इस केस में न्याय देवताओं ने सख्त फैसला सुनाकर कानूनी व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने का संदेश दिया है। योगेश गौड़ा हत्या केस की टाइमलाइन 15 जून 2016 – धारवाड़ में योगेश गौड़ा की उनके जिम में हत्या। 2016-2019 – स्थानीय पुलिस द्वारा प्रारंभिक जांच। 2019 – मामले की जांच CBI को सौंपी गई। 15 अप्रैल 2024 – कांग्रेस विधायक और अन्य 16 आरोपियों को दोषी ठहराया गया। 28 अप्रैल 2024 – दोषियों को उम्रकैद और जुर्माना इत्यादि सजा सुनाई गई। यह फैसला राजनीतिक और अपराध जगत के लिए एक मजबूत संदेश है कि कानून के आगे सभी बराबर हैं। इसके साथ ही, इस केस का निष्पक्ष और समयबद्ध समाधान न्याय व्यवस्था की साख के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ है। सजा के बाद यदि कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी की सदस्यता रद्द होती है तो उनकी राजनीतिक भविष्य पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। सम्बंधित खबरें तमिलनाडु की मदुरै सेशन कोर्ट ने हाल ही में पिता-पुत्र की हिरासत में हुई मौत के मामले में 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (बहुत दुर्लभ) करार दिया और कहा कि यह अत्यधिक बर्बरता और सत्ता के दुरुपयोग का मामला है। यह मामला 2020 का है और छह साल की सुनवाई के बाद यह फैसला आया है। तमिलनाडु की इस घटना में कुल दस आरोपी थे, जिनमें से एक की कोविड के दौरान मौत हो गई थी। इस प्रकार के कड़े फैसलों से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय न्याय व्यवस्था में अपराध के खिलाफ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। न्यायपालिका अपने निर्णयों से समाज में सुरक्षा और विश्वास कायम रखेगी।

U.S.-Israel war with Iran | Why damage to Tehran’s Golestan Palace should worry India
मनोरंजन

अमेरिका-इज़राइल और ईरान का युद्ध | तेहरान के गोलस्तान पैलेस को हुए नुकसान से भारत को क्यों है चिंता

तेहरान: दो दिन पहले ईरान के राजधानी तेहरान में स्थित ऐतिहासिक गोलस्तान पैलेस को एक हवाई हमले में गंभीर नुकसान पहुँचा। इस महल में स्थित गुलशन एलबम, जिसमें 11वीं से 17वीं सदी के पेंटिंग्स, कालीग्राफी और नक़्क़ाशी की दुर्लभ कलेक्शन है, को भारी खतरा उत्पन्न हो गया है। इस हमला न केवल ईरान की सांस्कृतिक विरासत के लिए बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। गोलस्तान पैलेस, जो यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल भी है, फारसी कला और वास्तुकला का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। इस संग्रहालय में संग्रहित गुलशन एलबम में करीब 250 प्राचीन चित्रकारी, हस्तलिखित दस्तावेज़ और कलाकृतियाँ शामिल हैं, जो फारसी इतिहास और संस्कृति को जीवित रखती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन कलाकृतियों को हुए नुकसान का मरम्मत में वर्षों लग सकते हैं, और कुछ अभिलेखीय क्षतियाँ स्थायी भी हो सकती हैं। इस हमले के पीछे अमेरिका और इज़राइल के संभावित राज्य समर्थित अभियान का संदेह जताया जा रहा है, जो ईरान की परमाणु और सैन्य गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए चल रहे तनावपूर्ण संघर्ष का हिस्सा है। क्षेत्रीय शक्ति संघर्ष में फंसे ईरान और इन दो देशों के बीच बढ़ती तनातनी ने मध्य पूर्व में सुरक्षा और स्थिरता की चिंताओं को गहरा दिया है। भारत के लिए इस घटना का बड़ा महत्व है। तेहरान के इस सांस्कृतिक केंद्र को हुए नुकसान से द्विपक्षीय संबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीतियों पर सवाल उठे हैं। भारत ने मध्य पूर्व में सद्भाव और स्थिरता कायम रखने के लिए परंपरागत तौर पर संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता दी है। इस घटना की पृष्ठभूमि में भारत के लिए आवश्यक हो गया है कि वह अपनी विदेश नीति में संतुलित दृष्टिकोण बनाए रखे और सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आवाज उठाए। विश्लेषकों के अनुसार, अगर इस तरह के हमले बढ़ते रहे, तो इससे फारसी और पड़ोसी देशों के बीच सांस्कृतिक और राजनीतिक खाई बढ़ सकती है, जो पूरे एशिया के लिए अप्रत्याशित परिणाम पैदा कर सकता है। इसलिए, राहत कार्य और वार्ता के जरिये विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की अहमियत और बढ़ जाती है। गोलस्तान पैलेस के नवीनीकरण और संरक्षण के लिए अभी अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर कई आयामों पर चर्चा और सहयोग की जरूरत है ताकि इस महत्वपूर्ण धरोहर को बचाया जा सके और भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके। इस घटना ने एक बार फिर से याद दिलाया है कि युद्ध और संघर्ष केवल जीवन और संरचनाओं को नहीं, बल्कि सभ्यताओं के अमूल्य हिस्सों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। भारत सहित विश्व समुदाय को इस दिशा में सतर्क एवं सजग रहना होगा।

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