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Author name: Kamlesh Purohit

JEE मेन सेशन 2 रिजल्ट घोषित:26 कैंडिडेट्स को मिला 100 पर्सेंटाइल, 5-5 स्टूडेंट्स आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से
राजनीति

JEE मेन सेशन 2 के नतीजे घोषित: 26 कैंडिडेट्स ने 100 पर्सेंटाइल स्कोर किया, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से 5-5 टॉपर्स

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने सोमवार को JEE Main 2026 के दूसरे सेशन के परिणाम घोषित कर दिए हैं। इस बार 26 छात्रों ने 100 पर्सेंटाइल का स्कोर हासिल किया है, जो पिछले साल के 24 स्तर से थोड़ा अधिक है। इस परीक्षा में देशभर के 10 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया था, जिन्होंने 2 से 8 अप्रैल के बीच अपनी परीक्षा पूरी की। सूत्रों के अनुसार 100 पर्सेंटाइल स्कोर करने वाले 26 टॉपर्स में सबसे अधिक – 5-5 छात्र आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से हैं। इसके बाद राजस्थान से 4, दिल्ली से 3, महाराष्ट्र और हरियाणा से 2-2 छात्र शामिल हैं। इसके अतिरिक्त चंडीगढ़, बिहार, तमिलनाडु, ओडिशा और गुजरात से भी एक-एक छात्र ने यह महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। NTA ने स्पष्ट किया है कि 100 पर्सेंटाइल स्कोर प्रतिशत अंक के अनुरूप नहीं होता बल्कि यह एक नॉर्मलाइज्ड स्कोर होता है। इसका उद्देश्य विभिन्न शिफ्टों में परीक्षा देने वाले छात्रों के प्रदर्शन को तुलनात्मक रूप से मापना होता है। यही वजह है कि प्रत्येक उम्मीदवार का स्कोर उनके समूह में उनके प्रदर्शन के आधार पर निर्धारित किया जाता है। पहले सेशन में ही, जो जनवरी माह के 21 से 29 तारीख तक आयोजित किया गया था, 13 लाख से ज्यादा छात्रों ने हिस्सा लिया था। NTA की यह प्रक्रिया देश में इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की गुणवत्ता और निष्पक्षता को बढ़ावा देने में सहायक मानी जाती है। परीक्षा में शामिल छात्रों के लिए रिजल्ट ऑफिशियल वेबसाइट jeemain.nta.nic.in पर उपलब्ध हैं। छात्र अपने एप्लीकेशन नंबर और पासवर्ड का उपयोग कर लॉगिन कर अपने स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। यह रिजल्ट आगे की प्रवेश प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस उपलब्धि के साथ, छात्रों का सपना इंजीनियरिंग के प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिला पाने का और भी मजबूत हुआ है, जहां ये अंक उनके कैरियर की नई शुरुआत का आधार साबित होंगे। एनटीए की यह कोशिश देश के तकनीकी क्षेत्र को और अधिक प्रतिस्पर्धी व सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

MP में 31% महिला कलेक्टर, दक्षिणी राज्यों में 39%:प्रशासन में भी महिलाओं को बड़ी जिम्मेदारियां देने में राज्य पीछे
Trending, राजनीति

मध्यप्रदेश में 31% महिला कलेक्टर, दक्षिणी राज्यों में 39%: प्रशासन में महिलाओं को बड़ी जिम्मेदारियां देने में राज्य पिछड़े

देश में महिलाओं को 33% आरक्षण का कानून लागू होने का इंतजार लंबा चल रहा है। हालांकि प्रशासनिक ढांचे में महिलाओं की भूमिका का जायजा लें तो कई राज्यों में उनकी भागीदारी अपेक्षाकृत कम दिख रही है। प्रदेश अनुसार देखें तो दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में महिला कलेक्टरों की हिस्सेदारी 35 से 39 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जबकि हिंदी पट्टी के राज्यों में यह आंकड़ा कहीं कम है। मध्यप्रदेश 55 जिलों में 17 महिला कलेक्टरों के साथ लगभग 31% महिला प्रतिनिधित्व के साथ हिंदी पट्टी का अकेला ऐसा बड़ा राज्य है, जहां महिलाएं प्रशासन में बढ़-चढ़कर भाग ले रही हैं। दूसरी ओर, छोटा राज्य सिक्किम 33% महिला कलेक्टरों के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियों में महिलाओं की भागीदारी का उदाहरण प्रस्तुत करता है। दक्षिण भारत के राज्यों में तेलंगाना में महिला कलेक्टरों का हिस्सा 39% तक पहुंच चुका है, जो पूरे देश में सबसे अधिक है। तमिलनाडु में यह आंकड़ा 38% है जबकि केरल में 36% तक पहुंचा है। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में भी क्रमशः 35% और 32% महिला कलेक्टर कार्यरत हैं। इस तुलना में हिंदी पट्टी के अन्य बड़े राज्य, जैसे उत्तर प्रदेश और झारखंड, काफी पीछे हैं जहां महिला कलेक्टरों का प्रतिशत क्रमशः 16% और 16% ही है। कुछ अन्य राज्यों के आंकड़ों की बात करें तो बिहार में 18%, हरियाणा में 18%, गुजरात में भी 18% और पश्चिम बंगाल में लगभग 26% महिला कलेक्टर हैं। वहीं, ओडिशा में यह आंकड़ा केवल 8% तक सीमित है, जो अन्य राज्यों के मुकाबले बेहद कम है। इस प्रकार देखा जाए तो प्रशासनिक जिम्मेदारी में महिलाओं को समान अवसर देने में राज्यों के बीच काफी अंतर है। विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं को प्रशासनिक दायित्वों में अधिक अवसर देना राज्य के संतुलित विकास के लिए आवश्यक है। महिला अधिकारियों की भागीदारी से निर्णय लेने की प्रक्रिया में विविधता आती है, जिससे नीतियों में महिलाओं से जुड़े मुद्दों को पहले से बेहतर तरीके से ध्यान में रखा जा सकता है। वहीं, महिला आरक्षण विधेयक के परिप्रेक्ष्य में भी राज्यों की भूमिका महत्वपूर्ण है। विपक्ष की ओर से विधेयक में विलंब और विरोध के कारण इस पर बहस जारी है, जिससे केवल महिला आरक्षण बिल नहीं, बल्कि परिसीमन विधेयक को लेकर भी राजनीतिक उठापटक बनी हुई है। इस संदर्भ में यह जरूरी है कि राज्य प्रशासनिक संरचना में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने के लिए नीतिगत सुधार किए जाएं। महिलाओं को निर्णायक पदों पर लाने से न केवल प्रशासनिक प्रणाली में मजबूती आएगी, बल्कि समाज में लैंगिक समानता के प्रतीक के रूप में उनका स्थान भी सुनिश्चित होगा। अतः महिलाओं को प्रमुख प्रशासनिक पदों पर जगह देने में राज्य अब भी पीछे हैं। मध्यप्रदेश जैसे कुछ राज्यों ने निश्चित तौर पर यह भूमिका निभाई है, लेकिन पूरे देश में समानता लाने और महिलाओं को सरकारी पदों पर सुनिश्चित भूमिका देने के लिए गंभीर प्रयासों की आवश्यकता है।

‘Raja Shivaji’ trailer: Riteish Deshmukh as the valiant Maratha warrior battles the Mughals
मनोरंजन

राजा शिवाजी ट्रेलर: रितेश देशमुख के रूप में पराक्रमी मराठा योद्धा मुगलों से लड़ते हुए

मुंबई: बॉक्स ऑफिस पर जल्द ही धमाका करने के लिए दर्शकों का इंतजार खत्म होने वाला है, जब फिल्म “राजा शिवाजी” का ट्रेलर रिलीज हुआ। ट्रेलर में रितेश देशमुख को एक साहसी और दूरदर्शी मराठा योद्धा राजा शिवाजी की भूमिका में देखा जा सकता है, जो मुगलों के खिलाफ अपनी असाधारण वीरता और नेतृत्व कौशल का परिचय देते हैं। यह फिल्म इतिहास के प्रसिद्ध मराठा सम्राट की गौरवशाली जीवन कथा पर आधारित है और भारतीय सिनेमा में शौर्य और राष्ट्रीयता का नया अध्याय जोड़ने का दावा करती है। फिल्म में रितेश देशमुख के अलावा कई बड़े सितारे भी प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे। संजय दत्त, अभिषेक बच्चन, जेनेलिया देशमुख, जितेंद्र जोशी, फरेदीन खान और विद्या बालन जैसे अनुभवी कलाकार इस महाकाव्य फिल्म का हिस्सा हैं। इनके अभिनय से फिल्म में और भी दमक और गहराई आएगी, जिससे दर्शकों को एक प्रामाणिक और भावनात्मक अनुभव मिलेगा। राजा शिवाजी की कहानी साहस, रणनीति और पुनर्जागरण की है। यह फिल्म न केवल उनके युद्ध कौशल को दर्शाती है, बल्कि उनके मानवीय गुणों और राजनीति के अंदरूनी पहलुओं को भी बखूबी प्रस्तुत करती है। ट्रेलर में रितेश देशमुख ने अपनी भूमिका के लिए गहन तैयारी की झलक दी है, जहां उन्होंने मराठा योद्धाओं की परंपरा और उनके शौर्य का सजीव चित्रण किया है। फिल्म की शूटिंग महाराष्ट्र के विभिन्न ऐतिहासिक स्थानों पर की गई है, जिससे स्थानीय संस्कृति और माहौल को वास्तव में बखूबी दर्शाया गया है। फिल्म निर्देशक ने इस परियोजना के लिए कई महीनों की रिसर्च की है ताकि इतिहास के साथ पूर्ण सटीकता और निष्पक्षता बनी रहे। इंडस्ट्री विशेषज्ञों द्वारा कहा जा रहा है कि “राजा शिवाजी” भारतीय इतिहास पर बनी फिल्मों के लिए एक नया मानदंड स्थापित करेगा। यह फिल्म युवा वर्ग को भी उनके इतिहास और संस्कृति से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। सिनेमाघरों में इसे बड़ी संख्या में देखने की उम्मीद है क्योंकि यह भारतीय वीरता का जश्न मनाने वाली एक अनूठी फिल्म है। इस फिल्म के निर्माता ने बताया कि जल्द ही फिल्म की रिलीज डेट का ऐलान कर दिया जाएगा। आने वाले हफ्तों में ट्रेलर के साथ साथ और भी कई एक्सक्लूसिव वीडियो और इंटरव्यू रिलीज होंगे, जिनसे दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ेगी। “राजा शिवाजी” के ट्रेलर ने सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया प्राप्त की है और दर्शक इसके लिए बेहद उत्साहित हैं। यह फिल्म न केवल मनोरंजन का अच्छा स्रोत बनेगी बल्कि यह भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण यादगार भी होगी।

First Day First Show | ‘Jana Nayagan’ row, ‘The Raja Saab’ review
मनोरंजन

पहला दिन, पहली शो | ‘जाना नायक’ विवाद, ‘द राजा साहब’ समीक्षा

फर्स्ट डे फर्स्ट शो: सिनेमा और स्ट्रीमिंग की दुनिया से ताज़ा खबरें द हिन्दू का ‘फर्स्ट डे फर्स्ट शो’ न्यूज़लेटर आपको सिनेमा और स्ट्रीमिंग की दुनिया से जुड़ी हर नई अपडेट और समीक्षा लेकर आता है। इस मंच पर हम नवीनतम फिल्मों, वेब सीरीज और डिजिटल कंटेंट की गहराई से समीक्षा प्रस्तुत करते हैं ताकि दर्शकों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिल सके। हाल ही में पर्दे पर आई कई फिल्मों ने चर्चा बटोरी है, जिनमें से कुछ प्रभावशाली तो कुछ विवादित भी रहे। इसी कड़ी में, ‘जाना नायक’ फिल्म के इर्द-गिर्द विवाद छिड़ा है, जिसने दर्शकों और क्रिटिक्स के बीच काफी बहस को जन्म दिया है। दूसरी ओर, ‘द राजा साहब’ को लेकर समीक्षाएँ मिश्रित नजर आई हैं। ‘जाना नायक’ को लेकर उठ रही बहस का केंद्र इसकी कहानी और जिस तरह से सामाजिक संदर्भों को पेश किया गया है, उस पर विवाद है। कुछ लोग इसे एक साहसिक प्रयास मानते हैं, जबकि अन्य इसे अतिशयोक्ति और अपरिपक्वता की आलोचना करते हैं। फिल्म के निर्माताओं ने अपनी तरफ से कहा है कि यह फिल्म समाज के विविध दृष्टिकोणों को उजागर करने का प्रयास है। वहीं दूसरी ओर, ‘द राजा साहब’ को लेकर आलोचक यह मान रहे हैं कि फिल्म तकनीकी रूप से अच्छी है, पर कहानी में कहीं-कहीं कमजोर पहलू देखे गए हैं। कलाकारों के प्रदर्शन की सराहना की गई, विशेष रूप से मुख्य कलाकार की भूमिका को दर्शकों ने पसंद किया। हालांकि, इसके पेशेवर समीक्षकों ने कहा कि फिल्म का ट्रैक थोड़ा धीमा पड़ता है और दर्शकों को पूरी तरह बांधे रखने में असफल रहती है। इस न्यूज़लेटर के जरिए हम ऐसे तमाम विषयों पर विस्तार से जानकारी प्रदान करते हैं, जो फिल्म प्रेमियों और डिजिटल कंटेंट के शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी सिद्ध होती है। आप यहां न केवल फिल्मों की समीक्षाएं पाएंगे, बल्कि प्रमुख घटनाओं, रिलीज की खबरें और इंडस्ट्री से जुड़ी अन्य ताजा जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इस प्रकार, द हिन्दू का ‘फर्स्ट डे फर्स्ट शो’ प्रदर्शित करता है कि कैसे सिनेमा और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म आज हमारे मनोरंजन के अनुभवों को प्रभावित कर रहे हैं। हम इसे जारी रखेंगे, ताकि आप हर नई रिलीज़ के बारे में पूरी जानकारी के साथ अपडेट रहें।

Tilak ends MI's losing streak with 45-ball century
खेल जगत

तिलक ने 45 गेंदों में शतक लगाकर MI की हारों की श्रृंखला को समाप्त किया

मुंबई इंडियंस के तैयारियों में एक नई उम्मीद जगी है क्योंकि तिलक वर्मा ने अपनी शानदार पारी से टीम को जीत दिलाई और हारों की लगातार सिलसिला तोड़ा। तिलक ने महज 45 गेंदों में शतकीय स्कोर बनाकर अपनी अग्नि परीक्षा पास की, जो मुंबई इंडियंस के लिए खास उपलब्धि है। यह शतक न केवल तिलक की विख्यात बल्लेबाजी क्षमताओं का प्रमाण है, बल्कि यह MI के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ भी साबित हुआ है। 2008 में सनथ जयसूर्या द्वारा बनाए गए तेज शतक के बराबर यह प्रदर्शन रहा, जिसने MI के इतिहास में एक नई मिसाल कायम की। मैच की शुरुआत में ही तिलक ने विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था। उनकी आक्रामकता और समय का उचित उपयोग इस बात का संकेत था कि यह पारी कुछ खास होगी। दर्शकों को मैदान में लगातरBoundary लगाते हुए उनका उत्साह देखते ही बना। इस शतकीय पारी का MI के लिए मतलब बहुत बड़ा था क्योंकि टीम पिछले कई मैचों से जीत के लिए तरस रही थी। तिलक के इस प्रदर्शन ने अन्य खिलाड़ियों को भी प्रेरित किया और अंत में टीम को एक यादगार जीत हासिल हुई। विश्लेषकों का मानना है कि तिलक वर्मा का यह शतक उनकी प्रतिभा का परिचायक है और भविष्य में वे MI की बल्लेबाजी की रीढ़ साबित हो सकते हैं। साथ ही, यह पारी MI के लिए आगामी मैचों में आत्मविश्वास का बड़ा स्रोत होगी। तिलक वर्मा की बल्लेबाजी ने विकल्पों की भरमार की है और मुंबई इंडियंस के कोच व कप्तान दोनों ने उनकी तारीफ में कोई कसर नहीं छोड़ी। इस जीत के साथ MI ने अपनी हारों की सीरीज खत्म करके नई शुरुआत की ओर कदम बढ़ाया है। फैंस भी इस प्रदर्शन से बेहद उत्साहित हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि तिलक का यह निखरता हुआ रूप टीम के लिए कई जीत लेकर आएगा। आगामी मैचों में उनकी बल्लेबाजी पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

The Strokes torch U.S. imperialism at Coachella with Gaza montage and CIA takedown
मनोरंजन

द स्टोक्स ने कोचेला में अमेरिकी साम्राज्यवाद की मॉकिंग की, गाजा मोंटाज और CIA पर प्रहार

लॉस एंजिल्स, 2026 – अमेरिकी बैंड द स्टोक्स ने कोचेला 2026 के मंच पर एक ऐसा प्रदर्शन किया जिसने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया। अपने अंतिम सेट के दौरान, उन्होंने एक विडियो मोंटाज प्रस्तुत किया, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका की विदेश नीति की आलोचना की गई और गाजा में इजरायल द्वारा किए जा रहे नरसंहार को उजागर किया गया। यह प्रदर्शन अमेरिकी विदेश नीति पर तीखा प्रहार था, खासकर उन कृत्यों पर जो वाशिंगटन द्वारा समर्थित हैं। कोचेला में आयोजित इस संगीत महोत्सव में हजारों युवा और विश्वभर से आए लोग शामिल थे। द स्टोक्स की यह प्रस्तुति सामाजिक-राजनीतिक जागरुकता के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश बनी। मोंटाज में अमेरिका की सीआईए और उसकी विदेशी हस्तक्षेप नीतियों की कड़ी निंदा की गई, जिससे यूएस के वैश्विक प्रभाव और उसकी सैन्य हमलों की छवि उजागर हुई। इस प्रदर्शन ने वैश्विक स्तर पर गाजा में हो रहे संघर्षों और मानवीय संकटों को भी प्रमुखता से सामने रखा। द स्टोक्स ने अपने मंच पर दिखाए गए वीडियो में गाजा के आम लोगों के दर्द और उनके साथ हो रहे अत्याचारों को दिखाते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के राजनीतिक संदर्भ वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम युवाओं में राजनीतिक जागरुकता पैदा करने का एक नया जरिया बन चुके हैं। द स्टोक्स ने स्पष्ट रूप से यह संकेत दिया कि संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाने का एक सशक्त मंच भी हो सकता है। इस प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना रहा, जहां समर्थकों और आलोचकों दोनों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए। जबकि कुछ ने द स्टोक्स की साहसिकता की प्रशंसा की, कुछ अन्य ने इसे विवादित और अनचाहा बताया। फिर भी यह प्रदर्शन अमेरिकी सामरिक नीतियों और उनके प्रभावों पर एक जरूरी बहस को जन्म देने में सहायक साबित हुआ। इस प्रकार, द स्टोक्स का कोचेला 2026 में यह मोंटाज न केवल एक संगीत प्रस्तुति थी, बल्कि यह अमेरिकी साम्राज्यवाद और उसकी वैश्विक नीतियों पर एक खुला राजनीतिक बयान भी था, जिसने दुनिया भर के लोगों के समक्ष मानवीय संकट की तस्वीर रखी।

पचपदरा रिफाइनरी अग्निकांड- सुरक्षा एजेंसियां जांच करने पहुंचीं:पीएम का दौरा स्थगित होने के बाद क्रेन से हटा रहे डोम; सीएम आज करेंगे निरीक्षण
राष्ट्रीय

पचपदरा रिफाइनरी अग्निकांड: सुरक्षा एजेंसियां जांच के लिए पहुंचीं

20 अप्रैल को बालोतरा के पचपदरा रिफाइनरी में आग लगने की घटना ने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है। यह हादसा उस वक्त हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रिफाइनरी के उद्घाटन के लिए आने वाले थे, लेकिन दुर्घटना के कारण उनका दौरा स्थगित कर दिया गया। हादसे के लगभग 20 घंटे बाद सुरक्षा एजेंसियां और तकनीकी विशेषज्ञ मौके पर पहुंचकर गहन जांच कर रहे हैं। पचपदरा रिफाइनरी में सोमवार दोपहर करीब 2 बजे हीट एक्सचेंजर सर्किट में हाइड्रोकार्बन की लीकेज के चलते अचानक आग लग गई। इस आग ने कुछ ही मिनटों में तेजी पकड़ ली और बड़ी लपटों के साथ धुआं पूरे क्षेत्र में फैल गया। कई किलोमीटर दूर से भी आग की लपटें और धुंए को देखा जा सकता था, जिसने स्थानीय लोगों में डर और चिंता की स्थिति पैदा कर दी। आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की टीमों ने संयुक्त रूप से काम किया और कई घंटे की मशक्कत के बाद आग को नियंत्रण में लाने में सफलता मिली। इस बीच रिफाइनरी के बहुमंजिली डोम को प्रधानमंत्री की जनसभा के लिए तैयार किया गया था, लेकिन प्रधानमंत्री के दौरे के स्थगित होने के साथ ही मंगलवार सुबह से क्रेन की मदद से इसे हटाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। रिफाइनरी परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और बाहरी लोगों का किसी भी प्रकार का प्रवेश पूरी तरह बंद है ताकि जांच कार्य सुगमता से हो सके। सुरक्षा एजेंसियां घटना के कारणों का पता लगाने में लगी हुई हैं और तकनीकी टीमें सामान एकत्रित कर रही हैं ताकि अग्निकांड की सही कारणों का खुलासा हो सके। प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा आज दोपहर लगभग 12:35 बजे पचपदरा रिफाइनरी पहुंचकर स्थिति का जायजा लेंगे। मुख्यमंत्री का निरीक्षण घटनास्थल पर कार्रवाई की गति और प्रभावित क्षेत्र का अवलोकन करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान कर्मचारियों और अधिकारियों की तैयारियों में आई कमी पर भी सवाल उठाने की उम्मीद है। यह दुर्घटना राज्य के लिए गहरा सदमा साबित हुई है क्योंकि यह रिफाइनरी 13 साल की लंबी प्रतीक्षा के बाद पूर्ण होने वाली थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बेहतर टेक्नोलॉजी और कुशल इंजीनियर्स के मौजूद होने के बावजूद इस स्तर की सुरक्षा चूक गंभीर चिंता की बात है। यह सवाल उठता है कि क्या सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन पर्याप्त रूप से किया गया था। पीएम मोदी के दौरे के टलने से रिफाइनरी परिसर में उदासी और निराशा का माहौल है। सुरक्षा एजेंसियां, तकनीकी टीमें और शासन प्रशासन मिलकर ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने पर फोकस कर रहे हैं ताकि भविष्य में इस तरह की अप्रत्याशित घटनाओं से बचा जा सके। अग्निकांड की पल-पल की अपडेट और विस्तृत रिपोर्ट के लिए संबंधित ब्लॉग और खबर चैनल निरंतर जानकारी प्रदान कर रहे हैं। राज्य प्रशासन का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द जांच के निष्कर्ष जारी किए जाएं और पचपदरा रिफाइनरी की गतिविधियां पुनः सामान्य हो सकें।

Ayush Mhatre ruled out of IPL 2026 with hamstring injury
खेल जगत

आयुष म्हात्रे की आईपीएल 2026 से बाहर होने की संभावना, हैमस्ट्रिंग चोट के कारण

चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के प्रमुख बल्लेबाज आयुष म्हात्रे इस सीजन के आईपीएल में अब तक टीम के शीर्ष रन-स्कोरर रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से उन्हें हैमस्ट्रिंग की चोट के कारण आगामी मुकाबलों से बाहर रहना पड़ सकता है। टीम से मिली जानकारी के अनुसार, म्हात्रे को गंभीर हैमस्ट्रिंग इंजरी हुई है, जिसके कारण उन्हें कम से कम छह से बारह हफ्तों तक पुनर्वास की जरूरत होगी। यह चोट उनकी फिटनेस और खेलने की क्षमता पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। आईपीएल की टीमों के लिए खिलाड़ी की ऐसी चोटें चिंता का विषय होती हैं क्योंकि वे टीम के प्रदर्शन को सीधे प्रभावित कर सकती हैं। आयुष म्हात्रे ने इस सीजन में अपनी बल्लेबाजी से सभी का ध्यान आकर्षित किया था। उनकी चोट से टीम की बल्लेबाजी क्रम में जरूर कमी आएगी। चेन्नई सुपर किंग्स के कोच और मेडिकल टीम ने पुष्टि की है कि म्हात्रे को अभी आराम और उचित इलाज की जरूरत है, जिससे वे जल्द से जल्द मैदान पर वापसी कर सकें। टीम मैनेजमेंट भी कोशिश कर रहा है कि खिलाड़ी का रिकवरी प्रॉसेस को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाएं। फैंस और क्रिकेट विशेषज्ञों के लिए यह खबर निराशाजनक है, क्योंकि म्हात्रे का प्रदर्शन आईपीएल में काफी प्रभावशाली रहा है। इसके बावजूद, खिलाड़ी की सेहत को प्राथमिकता देते हुए उचित इलाज और पुन: चिकित्सा जरूरी है। आयुष म्हात्रे की अनुपस्थिति में चेन्नई सुपर किंग्स को अपने बल्लेबाजी सेटअप में बदलाव करना पड़ सकता है। टीम प्रबंधक और कोच नए विकल्पों पर विचार कर रहे हैं ताकि वे टीम के प्रदर्शन को बनाए रख सकें। इस चोट की जानकारी मिलने के बाद सोशल मीडिया पर भी फैंस ने खिलाड़ी के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। कई क्रिकेट प्रेमियों ने म्हात्रे की वापसी के लिए प्रार्थना करते हुए उन्हें समर्थन दिया है। म्हात्रे के न होने से चेन्नई सुपर किंग्स की रणनीति में बदलाव आना स्वाभाविक है, खासकर टूर्नामेंट के महत्वपूर्ण दौर में। टीम अब इस चुनौतियों का सामना कैसे करती है, यह आने वाले हफ्तों में देखने वाली बात होगी।

पढ़ाई-जॉब के लिए रूस गए,फौजी बनाकर युद्ध में झोंका:रूस-यूक्रेन युद्ध, भारत के 13 से ज्यादा युवाओं की मौत
राजनीति, राष्ट्रीय

पढ़ाई और नौकरी के लिए रूस गए युवाओं को फौजी बना युद्ध में भेजा: रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत के 13 से अधिक युवाओं की मौत

हरियाणा के रेवाड़ी जिले के युवा अंशु पढ़ाई के लिए रूस गया था, लेकिन वहां उसे जबरन सैनिक बनाकर यूक्रेन युद्ध में भेज दिया गया। लगभग छह महीने बाद, 17 अप्रैल को उसका शव घर पहुंचा, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। यह केवल अंशु का मामला नहीं है, बल्कि हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के अनेक परिवार इसी तरह के दर्द का सामना कर रहे हैं। इन राज्यों के कुल 13 से अधिक युवाओं की मृत्यु हो चुकी है और सैकड़ों युवा अभी भी लापता हैं। दैनिक भास्कर ने इन परिवारों से विस्तृत बातचीत की, जिसमें पता चला कि एजेंटों ने युवाओं को स्टडी, वर्क या टूरिस्ट वीजा के बहाने रूस भेजा। वहां पहुंचकर उन्हें पैसों के लालच या भय दिखाकर जबरदस्ती आर्मी में भर्ती करवा लिया गया और मात्र 10-15 दिनों की ट्रेनिंग के बाद युद्ध की फ्रंट लाइन पर भेज दिया गया। वर्तमान में कई युवाओं के शव रूसी झंडे में लिपटे उनके घर लौट रहे हैं, जबकि कुछ का कोई पता नहीं चल पा रहा। इस दुखद घटना से प्रभावित परिवारों में कुछ के नाम इस प्रकार हैं: हरियाणा से विकास और अनुज (करनाल), अंशु (रेवाड़ी), अंकित (फतेहाबाद), रवि, गीतिक शर्मा, कर्मचंद (कैथल), सोनू (हिसार), अंकित (सोनीपत); पंजाब से समरजीत (लुधियाना) और मनदीप (जालंधर); राजस्थान से अजय (बीकानेर); तथा जम्मू-कश्मीर से सचिन और खाऊर पालनवाला (जम्मू)। इस पूरे मामले में 4 राज्यों के 26 परिवारों ने संयुक्त रूप से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका की सुनवाई 24 अप्रैल को निर्धारित है। रोहतक के श्रीभगवान और हिसार के विकास ने बताया कि परिवारों से संपर्क कर इन्हें संयुक्त रूप से आवाज बुलंद करने की प्रेरणा मिली है। याचिका में मांग की गई है कि जिन युवाओं को जबरन युद्ध में भेजा गया है, उनकी स्थिति स्पष्ट की जाए, मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए तथा झांसेबाज एजेंटों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। यह घटनाक्रम देश भर में चिंता का विषय बन गया है और युवाओं के भविष्य एवं उनके परिवारों की बेहतरी के लिए त्वरित एवं ठोस कदम उठाने की जरूरत है। सरकार और न्यायपालिका से उम्मीद की जा रही है कि वे इस मामले को संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ देखेंगे ताकि ऐसे दुर्घटनाओं को दोबारा न होने दिया जा सके।

Assamese film ‘Aakuti’ heads to New York Indian Film Festival 2026
मनोरंजन

असमिया फिल्म ‘आकुति’ न्यूयॉर्क इंडियन फिल्म फेस्टिवल 2026 के लिए चुनी गई

असमिया सिनेमा में नई ऊर्जा लेकर आईं निदेशक स्नेहा पी रॉय ने अपनी पहली असमिया फिल्म ‘आकुति’ के माध्यम से दर्शकों का मनोरंजन करने के साथ ही भावनाओं को छूने में सफलता हासिल की है। यह फिल्म शुरुआत में एक लघु फिल्म के रूप में बनाई गई थी, जिसे बाद में लंबे स्वरूप की फीचर फिल्म में परिवर्तित किया गया। स्नेहा पी रॉय ने इस फिल्म के निर्माण में पहली बार एक बाल अभिनेता के साथ काम करने का अनुभव साझा किया है, जो उनके लिए एक चुनौती और साथ ही एक यादगार अनुभव रहा। स्नेहा पी रॉय ने इस मौके पर बताया कि असमिया सिनेमा में डेब्यू करना उनके लिए बेहद खास रहा है। उन्होंने कहा, “असम की सांस्कृतिक विविधता और आत्मीयतापूर्ण दृश्य मेरे लिए इस फिल्म को बनाने की प्रेरणा रही। बाल कलाकार के साथ काम करना मुझे भावनाओं को व्यक्त करने के नए तरीकों से परिचित कराएगा।” फिल्म ‘आकुति’ की कहानी एक छोटे से बच्चे के नजरिए से जीवन की जटिलताओं और खुशियों को दर्शाती है। इस बदलाव के पीछे निर्देशक की मंशा थी कि कहानी को विस्तार देते हुए दर्शकों के दिलों को छूने वाली फिल्म बनाई जाए। इसी कारण यह लघु फिल्म से फीचर फिल्म बनने की दिशा में बढ़ी। स्नेहा पी रॉय ने बताया कि फिल्म के भावनात्मक पहलू पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा, “चाइल्ड एक्टर के साथ काम करते समय उनकी सहजता और प्रतिभा को निखारने का जिम्मा निर्देशक पर होता है। मैं अपने बाल कलाकार को पूरी तरह से समर्थन देने और सहज वातावरण प्रदान करने पर विश्वास करती हूं।” यह फिल्म न केवल असमिया सिनेमा के लिए गौरव की बात है, बल्कि यह बताता है कि किस प्रकार नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर क्षेत्रीय फिल्में अपनी अलग पहचान बना रही हैं। ‘आकुति’ ने न्यूयॉर्क इंडियन फिल्म फेस्टिवल 2026 में स्क्रीनिंग के लिए चुनी जाने के बाद असमिया सिनेमा में नई उम्मीद जगाई है। स्नेहा पी रॉय के प्रयासों ने असमिया फिल्म उद्योग में नयी दिशा दी है, जिससे क्षेत्रीय कहानियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलने में मदद मिलेगी। फिल्म को लेकर दर्शक और समीक्षकों की उत्सुकता बढ़ती जा रही है, और माना जा रहा है कि ‘आकुति’ फिल्म के माध्यम से असमिया सिनेमा की प्रतिष्ठा और मजबूत होगी।

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