असमिया सिनेमा में नई ऊर्जा लेकर आईं निदेशक स्नेहा पी रॉय ने अपनी पहली असमिया फिल्म ‘आकुति’ के माध्यम से दर्शकों का मनोरंजन करने के साथ ही भावनाओं को छूने में सफलता हासिल की है। यह फिल्म शुरुआत में एक लघु फिल्म के रूप में बनाई गई थी, जिसे बाद में लंबे स्वरूप की फीचर फिल्म में परिवर्तित किया गया। स्नेहा पी रॉय ने इस फिल्म के निर्माण में पहली बार एक बाल अभिनेता के साथ काम करने का अनुभव साझा किया है, जो उनके लिए एक चुनौती और साथ ही एक यादगार अनुभव रहा।
स्नेहा पी रॉय ने इस मौके पर बताया कि असमिया सिनेमा में डेब्यू करना उनके लिए बेहद खास रहा है। उन्होंने कहा, “असम की सांस्कृतिक विविधता और आत्मीयतापूर्ण दृश्य मेरे लिए इस फिल्म को बनाने की प्रेरणा रही। बाल कलाकार के साथ काम करना मुझे भावनाओं को व्यक्त करने के नए तरीकों से परिचित कराएगा।”
फिल्म ‘आकुति’ की कहानी एक छोटे से बच्चे के नजरिए से जीवन की जटिलताओं और खुशियों को दर्शाती है। इस बदलाव के पीछे निर्देशक की मंशा थी कि कहानी को विस्तार देते हुए दर्शकों के दिलों को छूने वाली फिल्म बनाई जाए। इसी कारण यह लघु फिल्म से फीचर फिल्म बनने की दिशा में बढ़ी।
स्नेहा पी रॉय ने बताया कि फिल्म के भावनात्मक पहलू पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा, “चाइल्ड एक्टर के साथ काम करते समय उनकी सहजता और प्रतिभा को निखारने का जिम्मा निर्देशक पर होता है। मैं अपने बाल कलाकार को पूरी तरह से समर्थन देने और सहज वातावरण प्रदान करने पर विश्वास करती हूं।”
यह फिल्म न केवल असमिया सिनेमा के लिए गौरव की बात है, बल्कि यह बताता है कि किस प्रकार नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर क्षेत्रीय फिल्में अपनी अलग पहचान बना रही हैं। ‘आकुति’ ने न्यूयॉर्क इंडियन फिल्म फेस्टिवल 2026 में स्क्रीनिंग के लिए चुनी जाने के बाद असमिया सिनेमा में नई उम्मीद जगाई है।
स्नेहा पी रॉय के प्रयासों ने असमिया फिल्म उद्योग में नयी दिशा दी है, जिससे क्षेत्रीय कहानियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलने में मदद मिलेगी। फिल्म को लेकर दर्शक और समीक्षकों की उत्सुकता बढ़ती जा रही है, और माना जा रहा है कि ‘आकुति’ फिल्म के माध्यम से असमिया सिनेमा की प्रतिष्ठा और मजबूत होगी।












