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सिरोही में जनसेवा का नया अध्याय विधायक जनसेवा केंद्र

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मंत्री देवासी ने शुरु किया केंद्र, पहले दिन ही मिली आमजन को राहत  
 प्रदेशध्यक्ष मदन राठौड़, सांसद लुम्बाराम चौधरी भी रहे मौजूद
सिरोही। राजस्थान की राजनीति और जनसेवा के क्षेत्र में एक सकारात्मक पहल करते हुए राज्य सरकार के मंत्री एवं स्थानीय विधायक ओटाराम देवासी ने सिरोही में विधायक जनसेवा केंद्र का शुभारंभ किया। इस केंद्र की खास बात यह रही कि उदघाटन के पहले ही दिन इसे औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि आमजन की समस्याओं का समाधान और सहायता कार्य तुरंत शुरू कर दिया गया। यह पहल न केवल प्रशासनिक कार्यों को सरल बनाएगी, बल्कि आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का एक मजबूत माध्यम भी बनेगी। इस सेवा केंद्र के शुभारंभ के साथ ही यह संदेश साफ तौर पर दिया गया कि सरकार अब जनता की समस्याओं के समाधान के लिए एक व्यवस्थित और सुलभ व्यवस्था बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। पहले दिन ही कई लोगों के कार्यों का निस्तारण कर यह केंद्र लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा। जनसेवा केंद्र के उदघाटन के साथ ही आमजन की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुनने और समाधान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। यहां आने वाले लोगों ने बताया कि पहले उन्हें अपनी समस्याओं के समाधान के लिए कई कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे, लेकिन अब एक ही स्थान पर उनकी बात सुनी जा रही है और त्वरित कार्रवाई भी हो रही है। केंद्र पर नियुक्त स्टाफ को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है ताकि वे विभिन्न विभागों से जुड़े मामलों को समझकर तुरंत उचित दिशा में कार्यवाही कर सकें। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।
दुखद घटना में मिली सहायता
इस मौके पर एक संवेदनशील पहल भी देखने को मिली, जिसने प्रशासन की मानवीयता को उजागर किया। मनोरा निवासी घांची समाज की एक बेटी की हाईटेंशन विद्युत लाइन की चपेट में आने से दुखद मृत्यु हो गई थी। यह घटना पूरे क्षेत्र के लिए बेहद पीड़ादायक रही। इस मामले में मंत्री ओटाराम देवासी के विशेष प्रयासों से पीडि़त परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की गई। कार्यक्रम के दौरान मंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और सांसद के हाथों से पीडि़त परिवार को 5 लाख रुपए का चेक सौंपा गया। इस सहायता ने न केवल परिवार को आर्थिक संबल दिया, बल्कि यह भी दर्शाया कि सरकार जनता के दुख-दर्द में उनके साथ खड़ी है।
अन्य लाभार्थियों को भी मिला सहयोग
इस कार्यक्रम में केवल एक परिवार ही नहीं, बल्कि विभिन्न विभागों के माध्यम से कई अन्य जरूरतमंद लोगों को भी सहायता राशि के चेक वितरित किए गए। इसमें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, चिकित्सा सहायता, दुर्घटना सहायता और अन्य सरकारी योजनाओं के लाभार्थी शामिल रहे। पंचायत समिति सिरोही में शुरू किया गया यह विधायक सेवा केंद्र क्षेत्र के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा साबित होने जा रहा है। यहां पर नियुक्त स्टाफ नागरिकों की समस्याओं को सुनकर संबंधित विभागों तक पहुंचाने और उनका समाधान कराने का कार्य करेगा। इस केंद्र के माध्यम से सरकारी योजनाओं की जानकारी और आवेदन सहायता, पेंशन, राशन, चिकित्सा और शिक्षा से जुड़े मामलों का समाधान,बिजली, पानी, सडक़ जैसी मूलभूत समस्याओं पर कार्रवाई, शिकायत दर्ज कर उसका फॉलो-अप,दस्तावेजी सहायता और मार्गदर्शन दिया जाएगा। यह केंद्र प्रशासन और जनता के बीच एक सेतु का कार्य करेगा, जिससे लोगों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह सेवा केंद्र केवल एक स्थानीय पहल नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान के लिए एक मॉडल के रूप में उभर रहा है। बताया जा रहा है कि यह प्रदेश का पहला विधायक सेवा केंद्र है, जो इस स्तर पर आमजन के लिए समर्पित किया गया है। इस पहल से अन्य जिलों और विधायकों को भी प्रेरणा मिलेगी और भविष्य में ऐसे केंद्र पूरे प्रदेश में स्थापित किए जा सकते हैं। इससे शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी और जनहितैषी बन सकेगी।
जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में मंत्री ओटाराम देवासी के साथ-साथ प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, सांसद लुुंबाराम चौधरी और अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस पहल को और भी मजबूत बनाया। सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि जनता की सेवा ही उनका मुख्य उद्देश्य है और यह केंद्र उसी दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस केंद्र का अधिक से अधिक उपयोग करें और अपनी समस्याओं को बिना किसी संकोच के यहां प्रस्तुत करें।
पारदर्शिता और जवाबदेही की ओर कदम
विधायक सेवा केंद्र की स्थापना से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि प्रशासन अब पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दे रहा है। यह केंद्र न केवल समस्याओं के समाधान का माध्यम बनेगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचे।
भविष्य में इस केंद्र के माध्यम से डिजिटल सेवाओं को भी जोड़ा जा सकता है, जिससे लोग ऑनलाइन भी अपनी शिकायत दर्ज कर सकेंगे और उसकी स्थिति ट्रैक कर सकेंगे। यह केंद्र केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक गंभीर और समर्पित प्रयास है। अब यह जिम्मेदारी आमजन की भी है कि वे इस सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करें और इसे सफल बनाएं, ताकि यह मॉडल पूरे प्रदेश में लागू किया जा सके।
इनको मिला आर्थिक सहयोग
जिले में कृषि विभाग की ओर से संचालित योजनाओं के तहत किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। सूची में शामिल लाभार्थियों में कई ऐसे किसान हैं, जिन्हें सिंचाई, खेती के आधुनिकीकरण और उत्पादन बढ़ाने के लिए अनुदान दिया गया है। पहले क्रम उथमण को 16 लाख 91 हजार रुपए की सहायता पाली हाउस योजना के तहत दी गई। यह योजना किसानों को सिंचाई सुविधाएं बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि होती है। इस तरह की बड़ी राशि मिलने से किसान अब आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर सकेंगे। दूसरे लाभाथी उथमण निवासी गोपालसिंह पुत्र सुखसिंह को 12 हजार 896 रुपए की सहायता प्लास्टिक मल्च योजना के तहत दी गई। यह तकनीक खेतों में नमी बनाए रखने, खरपतवार नियंत्रण और उत्पादन बढ़ाने में मदद करती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन का महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पशुपालन विभाग द्वारा मंगला पशु बीमा योजना के तहत लाभार्थियों को सहायता दी गई। सूची के अनुसार दो लाभार्थियों क्रमश मीरपुर निवासी श्रीमती ओबू देवी पुत्री उदाराम मेघवाल व कृष्णगंज निवासी श्रीमती तुलसीबाई पुत्री कसनाराम को चालीस- चालीस हजार रुपए की सहायता दी गई। यह योजना पशुओं के बीमा से संबंधित है, जिससे पशुपालकों को किसी भी अनहोनी की स्थिति में आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।
आत्मा योजना से किसानों को प्रोत्साहन
कृषि क्षेत्र में नवाचार और बेहतर खेती को बढ़ावा देने के लिए आत्मा योजना के तहत भी सहायता दी गई। इस योजना के अंतर्गत दो किसानों हालीवाड़ा निवासी प्रकाशराज पुत्र चीनाजी पुरोहित व भूतगांव निवासी शंकरलाल पुत्र रावताजी माली को दस-दस हजार रुपए का पुरस्कार दिया गया।
इनमें एक किसान को जैविक खेती पुरस्कार और दूसरे को उन्नत खेती पुरस्कार प्रदान किया गया। यह पुरस्कार उन किसानों को दिए जाते हैं, जिन्होंने खेती में नए प्रयोग कर बेहतर परिणाम हासिल किए हैं। इस पहल का उद्देश्य अन्य किसानों को भी प्रेरित करना है, ताकि वे पारंपरिक खेती से आगे बढक़र आधुनिक और टिकाऊ खेती की ओर कदम बढ़ाएं।
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