नई दिल्ली: लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन बिलों पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि परिसीमन के कारण किसी भी राज्य को कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने विस्तार से समझाया कि कैसे लोकसभा की सीटें वर्तमान 543 से बढ़ाकर लगभग 850 तक की जा सकती हैं।
विपक्ष द्वारा आरोप लगाया जा रहा था कि परिसीमन प्रक्रिया में उत्तरी राज्यों को फायदा होगा और दक्षिणी राज्यों की सीटें कम हो जाएंगी। कांग्रेस ने इसे महिला आरक्षण बिल का बहाना बताते हुए कहा कि यह चोर दरवाजे से परिसीमन लागू करने का प्रयास है। इस बाबत अमित शाह ने विपक्ष की चर्चाओं का खंडन करते हुए यह स्पष्ट किया कि 850 सीटों की संख्या क्यों सामने आई है और इसका क्या मतलब है।
शाह ने कहा, “मान लीजिए कुल लोकसभा सीटें 100 हैं, और यदि महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करना है तो सीटें बढ़ाने पर 50% वृद्धि के बाद कुल सीटें 150 हो जाएंगी। जब 150 सीटों का 33% हिस्सा महिलाओं के लिए आरक्षित होगा तो यह लगभग 50 सीटों के बराबर आता है। इसी तर्क के तहत मौजूदा 543 सीटों में 50% की वृद्धि करके लगभग 816-850 सीटों तक पहुंचा जा सकता है, ताकि महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिल सके।”
उन्होंने विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीटों में वृद्धि का जिक्र करते हुए कहा कि पांच दक्षिणी राज्यों की कुल सीटें वर्तमान में 129 हैं, जो बढ़कर 195 हो जाएंगी। यह दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व में सुधार का संकेत है। तमिलनाडु की सीटें 39 से 59, केरल की 20 से 30, तेलंगाना की 17 से 26 और आंध्र प्रदेश की 25 से 38 तक बढ़ेंगी।
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों को भी अतिरिक्त सीटें मिलने की बात सामने आई है। विशेष रूप से महाराष्ट्र को 24 अतिरिक्त लोकसभा सीटें मिलेंगी, जो इसे उत्तर प्रदेश के बाद दूसरे सबसे बड़े प्रतिनिधि वाला राज्य बनाएगी।
अमित शाह ने यह भी कहा कि परिसीमन कानून में कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह मौजूदा कानून के तहत ही लागू होगा। इसका किन्हीं विंध्य चुनावों पर प्रभाव नहीं पड़ेगा। वे संसद में महिलाओं के लिए समानता और बेहतर प्रतिनिधित्व की बात करते हुए यह भी स्पष्ट करते हुए कह रहे हैं कि संशोधन संसद के संविधान के सात अनुच्छेदों – 55, 81, 82, 170, 330, 332 और 334(A) – में पर्यटित हैं।
पार्टी नेताओं ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी। प्रधानमंत्री मोदी ने महिला आरक्षण बिल से जुड़े इन संशोधनों को निष्पक्ष एवं संतुलित बताते हुए कहा कि किसी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा और वे इसके पूर्ण क्रेडिट विपक्ष को भी देने को तैयार हैं। वहीं, कांग्रेस की प्रियंका गांधी ने महिलाओं पर विवादित टिप्पणियां करने वाले पुरुषों को सावधानी बरतने की चेतावनी दी।
इस पूरे मसले पर संसद में विपक्ष और सरकार के बीच तीव्र बहस जारी है, जिसमें महिला आरक्षण की मांग के साथ-साथ सामाजिक न्याय का गंभीर मुद्दा भी जुड़ा हुआ है। अमित शाह की ये व्याख्या इस दावे का जवाब है कि परिसीमन दक्षिण के विकास को रोकने वाला नहीं बल्कि सभी राज्यों को समान प्रतिनिधित्व दिलाने वाला कदम है।
लोकसभा की सीटों में प्रस्तावित वृद्धि और महिला आरक्षण बिल के अंतर्गत हो रहे संशोधन पूरे देश की राजनीतिक तस्वीर में नए अध्याय का आरंभ कर सकते हैं। आगामी दिनों में संसद में इस विषय पर विस्तृत चर्चा और सर्वसम्मति की भी संभावना बनी हुई है।
इस विषय पर सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह कदम संसद को और अधिक समावेशी, संतुलित और समान अधिकारों वाला बनाने के लिए उठाया जा रहा है, जिससे लोकतंत्र और अधिक सशक्त होगा।












