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चुनाव को लुभाने के लिए राजनीतिक पार्टियों की बढ़ती कोशिशों के बीच चेन्नई में ‘पावर आर्ट’ की महत्वपूर्ण भूमिका

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चुनाव की लगन में जहां राजनीतिक दल जनता का ध्यान आकर्षित करने के लिए नई-नई रणनीतियां अपना रहे हैं, वहीं चेन्नई के चिंतद्रिपेट के कारीगर अपनी पारंपरिक कला को एक नए रूप में उभार रहे हैं। यहाँ के कारीगर जो पारंपरिक लेस माला बनाते हैं, वे इसे चुनावी माहौल के अनुरूप नया स्वरूप देते नजर आ रहे हैं।

रेशमी धागों और कड़ी मेहनत से बुनी गई लेस माला अब केवल सांस्कृतिक और धार्मिक अवसरों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि चुनावी महत्वाकांक्षा के साथ जुड़ी एक कला बन गई है। कारीगर इस कला के माध्यम से राजनीतिक संदेश और चुनावी प्रतीक भी माला में शामिल कर रहे हैं, ताकि यह जनता के बीच प्रभावशाली तरीके से पहुंच सके।

स्थानीय कारीगर राघव ने बताया, “पारंपरिक रूप से ये माला शादियों, त्योहारों और धार्मिक कार्यों में इस्तेमाल होती थी, लेकिन हाल के चुनावों में राजनीतिक दल इसे अपने प्रचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहे हैं। हम लोग अपनी कला में रंग और डिज़ाइन को इस तरह से बदल रहे हैं कि वह विभिन्न पार्टियों के चुनाव चिन्हों और नीतियों को दर्शाए।”

राजनीतिक पार्टियों की ओर से इस कला को अपनाने की एक प्रमुख वजह यह भी है कि जनता के बीच इस तरह की कलात्मक और सांस्कृतिक वस्तुएं आसानी से पहुंचती हैं और उनकी याददाश्त में बने रहती हैं। इसलिए प्रचार सामग्री के रूप में लेस माला का प्रयोग बढ़ता जा रहा है।

चेन्नई के चुनाव विश्लेषक डॉ. सुमित्रा ने कहा, “लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदाता को लुभाने के लिए सिर्फ दौड़ और भाषण काफी नहीं होते। लोक-संस्कृति और लोक-कला का समावेश चुनावों को और प्रभावशाली बनाता है। लेस माला जैसी स्थानीय कला चुनाव प्रचार को एक सांस्कृतिक आयाम देती है, जिससे राजनीतिक पार्टियों का जनसमुह के बीच प्रभाव बढ़ता है।”

यह बदलाव केवल कारीगरों के लिए रोजगार के नए अवसर ही नहीं प्रदान कर रहा है, बल्कि राजनीतिक संवाद में सांस्कृतिक तत्वों की उपस्थिति भी बढ़ा रहा है। इसके साथ ही, यह स्थानीय समुदाय मे अपनी कला के लिए गर्व की भावना भी जगाता है।

जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, चिंतद्रिपेट के ये कारीगर अपनी कलात्मक क्षमता से सत्ता के खेल को सजाने में लगे हैं। यह एक अनूठा मिश्रण है लोकतंत्र का, कला का और राजनीति का, जो चेन्नई की सड़कों से लेकर मतदाताओं के दिलों तक पहुंच रहा है।

Kamlesh Purohit
Kamlesh Purohit
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