
नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश दिया। कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जल्द ही जारी करे, जिसमें उन सभी वोटर्स को शामिल किया जाए जिनकी अपीलों पर ट्रिब्यूनल ने फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिनकी अपीलें अभी लंबित हैं, उन्हें वोट डालने की अनुमति नहीं मिलेगी।
इससे पहले, पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत लगभग 90.83 लाख वोटर्स के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे। इसके बाद त्रिपक्षीय ट्रिब्यूनल का गठन किया गया है, जहां इन हटाए गए नामों पर अपीलों की सुनवाई की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमलया बागची शामिल हैं, SIR प्रक्रिया से जुड़े विवादों पर सुनवाई कर रही है।
बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में होने वाले हैं, पहला चरण 23 अप्रैल को और दूसरा 29 अप्रैल को। पहले चरण के लिए जिन इलाकों में मतदान होना है, वहां 21 अप्रैल तक ट्रिब्यूनल के फैसले आने पर ही वोटर मतदान कर सकेंगे। वहीं दूसरे चरण के क्षेत्र के वोटर्स के लिए यह अंतिम तारीख 27 अप्रैल रखी गई है। ट्रिब्यूनल द्वारा नामों को वोटर सूची में वापस जोड़ने के आदेश के बाद, चुनाव आयोग का इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर तुरंत सूची में संशोधन करेगा।
ट्रिब्यूनल की संख्या 19 है और ये रिटायर्ड हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की अगुवाई में काम कर रहे हैं, जिनके सामने कुल 34 लाख से अधिक अपीलें लंबित हैं। कोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया कि ट्रिब्यूनलों को अतिभारित ना किया जाए ताकि वे समय पर मामले निपटा सकें।
पश्चिम बंगाल में SIR का उद्देश्य मतदाता सूची से डुप्लिकेट व अयोग्य नाम काटना है। बावजूद इसके, इस प्रक्रिया को लेकर सियासी विवाद खूब गर्माया है। सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बड़े पैमाने पर उनके समर्थकों को सूची से बाहर किया जा रहा है, जबकि चुनाव आयोग इसे निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की जरूरी प्रक्रिया मानता है।
हालांकि, इस प्रक्रिया के बाद अक्टूबर 2023 तक पश्चिम बंगाल के कुल 7.66 करोड़ मतदाताओं में से 90.83 लाख नाम हटा दिए गए, जो कुल मतदाता संख्या का लगभग 11.85% है। ज्यादातर हटाए गए नाम राज्य के बांग्लादेश की सीमा से सटे जिलों जैसे नॉर्थ 24 परगना और मृतिका में हैं। नॉर्थ 24 परगना में 5.91 लाख मतदाताओं में से 3.25 लाख और मृतिका में 8.28 लाख में से 2.39 लाख नाम हटाए गए हैं।
स्पष्ट रूप से इस प्रक्रिया ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। 8 अप्रैल को, तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल ने चुनाव आयोग से बैठक की थी, जिसमें उन्होंने SIR को लेकर समय मांगा था। लेकिन बैठक में खराब व्यवहार का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने केवल पांच मिनट में उनकी बात सुनी और उन्हें भगा दिया। चुनाव आयोग ने इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक बैठक तनावपूर्ण रही।
अंत में, सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से स्पष्ट होता है कि न्यायालय चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने का प्रयास कर रहा है ताकि सभी वैध मतदाता चुनाव में भाग ले सकें और मतदाता सूची में व्यापक पारदर्शिता रहे। यह कदम राजनीतिक दलों के बीच मतदाता सूची को लेकर हो रही विवादों को कम करने के लिए भी अहम माना जा रहा है।












