
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात 8:30 बजे देश को एक महत्वपूर्ण संबोधन करेंगे। हालांकि अभी संबोधन के विषय को आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि वे महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल को लेकर अपने विचार साझा कर सकते हैं। यह संबोधन टीवी और डिजिटल माध्यमों पर सीधे प्रसारित किया जाएगा।
बीते शुक्रवार को लोकसभा में केंद्र सरकार का 131वां संविधान संशोधन बिल, जो संसद की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान लेकर आया था, पास नहीं हो पाया। इस बिल के पक्ष में 298 सांसदों ने मतदान किया जबकि 230 विपक्ष में थे। कुल 528 सांसदों ने वोट डाला, लेकिन आवश्यक दो-तिहाई बहुमत 352 वोटों का हासिल न हो पाने के कारण यह बिल 54 वोटों से असफल रहा। यह मोदी सरकार का 12 साल के शासन काल में पहली बार ऐसा अनुभव है जब कोई सरकारी बिल सदन में पास नहीं हो पाया।
सरकार ने अन्य दो बिलों पर वोटिंग कराने से भी इनकार किया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि ये बिल भी मुख्य बिल से जुड़े होने के कारण अलग से वोटिंग की आवश्यकता नहीं है। इससे पहले सरकार ने लोकसभा में महिला आरक्षण, परिसीमन और सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए तीन महत्वपूर्ण बिल पेश किए थे।
महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के अंतर्गत लोकसभा और राज्य विधानसभा में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जानी थीं। हालांकि, इस आरक्षण को लागू करने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया आवश्यक है, जिसमें सीमाओं और सीटों की संख्या का निर्धारण होता है। नया परिसीमन आयोग इस कार्य को पूरा करेगा और तब ही महिला आरक्षण लागू हो सकेगा। अभी इस प्रक्रिया में देरी के कारण यह आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव में लागू नहीं हो पाएगा, बल्कि 2034 से प्रभावी होगा।
यह ध्यान देने योग्य है कि दो दशकों के बाद पहली बार कोई सरकारी विधेयक संसद में गिरा है। 2002 का आतंकवाद निवारण अधिनियम (पोटा) के बाद यह घटना अब सामने आई है। महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक बहस को तूल दिया है।
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस विषय पर टिप्पणी करते हुए कहा कि संसद में बिल गिरना लोकतंत्र की जीत है। उनका आरोप था कि सरकार सीटों की संख्या बढ़ाकर सत्ता में बने रहने की भूख रखती है और महिला आरक्षण को भी राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा था। उन्होंने कहा, ‘हमें महिला विरोधी कहकर मसीहा नहीं बन सकते।’
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने 17 अप्रैल को सोशल मीडिया के माध्यम से राजनीतिक दलों से महिला आरक्षण के पक्ष में मतदान करने की अपील भी की थी। इसके बावजूद यह बिल लोकसभा में पास नहीं हो सका, जिससे राजनीति की दुनिया में नई गहमागहमी पैदा हो गई है।
विश्लेषकों के अनुसार इस बिल के असफल होने से सरकार को आगामी जनगणना परिणामों के बाद परिसीमन और महिला आरक्षण को लागू करने में लंबा वक्त लग सकता है। इससे 2029 के लोकसभा चुनावों में महिला आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाएगा, जो राजनीतिक दलों की रणनीति पर भी असर डाल सकता है।
देशभर के मीडियाकर्मियों और आम जनता की निगाहें आज के प्रधानमंत्री के संबोधन पर टिकी हैं कि वे इस संवेदनशील विषय पर कितनी स्पष्टता से अपनी सोच पेश करते हैं। सरकार की आगामी रणनीतियां और ऐलान राजनीतिक हलकों में बड़ी उत्सुकता का विषय रहेगा।











