
दिल्ली हाईकोर्ट में जारी शराब घोटाले मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने की पुनः मांग की है। बुधवार को उन्होंने जस्टिस कांता की अदालत में एक नया हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें उन्होंने जज के दो बच्चों के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ काम करने के संबंध में सवाल उठाए हैं।
केजरीवाल के हलफनामे में कहा गया है कि जज के दोनों बच्चे तुषार मेहता के साथ काम करते हैं, जो CBI की ओर से मामलों की पैरवी कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा तुषार मेहता के खिलाफ आदेश कैसे जारी कर सकती हैं। यह मुद्दा न्यायिक निष्पक्षता और पक्षपात की आशंका से जुड़ा है।
इससे पहले 13 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान भी केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा पर आरएसएस से जुड़े अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रमों में आतंरिक शामिल होने का आरोप लगाया था। वे मांग कर चुके हैं कि ऐसे मामलों में न्यायाधीश को मामले से अलग होना चाहिए ताकि निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित हो सके।
केजरीवाल की जज हटाने की अर्जी के मुख्य कारण
- 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने आबकारी नीति मामले में केजरीवाल समेत 22 आरोपीयों को बरी किया था, जिसे CBI ने चुनौती दी है।
- 9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय पर रोक लगाते हुए यह कहा कि ट्रायल कोर्ट की कुछ टिप्पणियां गलत हैं।
- केजरीवाल ने कहा कि सुनवाई के दौरान CBI के अलावा कोई पक्ष मौजूद नहीं था, फिर भी आदेश में पक्षपात दिखाई दिया।
- उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जज के करीबी संबंध तुषार मेहता से और उनकी आरएसएस से जुड़ी गतिविधियों के कारण निष्पक्षता पर प्रश्न उठते हैं।
- केजरीवाल ने जांच अधिकारी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई पर भी रोक लगने को संदिग्ध बताया है।
27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में सभी आरोपियों को राहत दी थी और CBI की जांच की कड़ी आलोचना की थी। इसके बाद सीबीआई की याचिका पर जस्टिस शर्मा ने सुनवाई की, जिसमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट के फैसले की पहली नजर में खामियां बताईं।
इस मामले में केजरीवाल को 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तार किया गया था और उन्हें 156 दिन की हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। मनीष सिसोदिया भी इस मामले में 530 दिन तक जेल में रहे।
हाईकोर्ट ने 9 मार्च को सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी करते हुए CBI के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों पर रोक लगाई है। वहीं, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुनवाई स्थगित करने के आदेश भी जारी किए गए हैं। इससे इस अहम मामले की जटिलता और संवेदनशीलता का पता चलता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने न्याय प्रक्रिया के प्रति आम जनता में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। निष्पक्ष और शीघ्र न्याय की मांग की जा रही है ताकि तूल पकड़ रहे विवादों का जल्द समाधान हो सके।











