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गंगश्यामजी मंदिर: बसंत पंचमी से रंग पंचमी तक होली की मस्ती

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जोधपुर। भीतरी शहर स्थित गंगश्यामजी मंदिर में फागोत्सव चरम पर है। यहां पूरे पैंतालिस दिन तक होली का जश्न चलता है। श्रद्धालुओं के साथ विदेशी सैलानी भी यहां होली खेलते है।
मंदिर में उत्सव की शुरुआत बसंत पंचमी से होती है और रंग पंचमी तक जारी रहती है। इस रंगारंग उत्सव में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और भक्ति के रंग में रंग जाते हैं। सबसे खास बात ये है कि मंदिर में 250 सालों से होली खेलने की परम्परा निभाई जा रही है।
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि सुबह 12 से 2 बजे तक गुलाल और पुष्पों से होली खेली जाती है, जबकि रात 8 से 11 बजे तक होली के मधुर गीतों का गायन होता है। ये परंपरा पिछले 250 सालों से चली आ रही है और आज भी उतनी ही जीवंत है।
मंदिर में विराजमान भगवान श्याम की प्रतिमा जोधपुर नरेश राव गांगा को उनके विवाह में दहेज के रूप में मिली थी। राव गांगा (1515-1531) का विवाह सिरोही के राव जगमाल की पुत्री रानी देवड़ी से हुआ था। विदाई के समय राव जगमाल ने बेटी की भगवान कृष्ण के प्रति गहरी आस्था देखकर कृष्ण की मूर्ति और ठाकुरजी की सेवा के लिए सेवग जीवराज को भी दहेज में जोधपुर भेज दिया। पहले ये मूर्ति किले में स्थापित की गई, फिर शहर की जूनी धान मंडी में विक्रम संवत 1818 में भव्य मंदिर बनवाकर प्रतिष्ठित की गई। चूंकि राव गांगा ने इसे स्थापित किया, इसलिए इन्हें गंगश्यामजी कहा जाता है।

Kamlesh Purohit
Kamlesh Purohit
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