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कॉमेडियन को पुलिस ने प्रयागराज से उठाया:पवन कल्याण की 3 शादियों का मजाक उड़ाया, भतीजी के तलाक पर भी कमेंट किया
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कॉमेडियन अनुदीप कटिकला को प्रयागराज से गिरफ्तार किया गया: पवन कल्याण की 3 शादियों और भतीजी के तलाक पर विवादित टिप्पणी

प्रयागराज में साउथ के लोकप्रिय स्टैंडअप कॉमेडियन अनुदीप कटिकला को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया। आंध्र प्रदेश पुलिस की टीम विशेष रूप से प्रयागराज पहुंची और वहां से अनुदीप को हिरासत में लेकर ट्रेन से काकीनाडा ले गई। अनुदीप अपने परिवार से मिलने आए थे, जहां उनकी पुलिस द्वारा गिरफ्तारी की गई। परिवार के सदस्यों का कहना है कि अब अनुदीप काकीनाडा में पुलिस हिरासत में हैं, जहां उनसे पूछताछ की जाएगी। अनुदीप कटिकला पर आरोप है कि उन्होंने अपने एक स्टैंड-अप वीडियो में आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और तेलुगु स्टार पवन कल्याण की तीन शादियों का मजाक उड़ाया है। इसके साथ ही उन्होंने पवन कल्याण की भतीजी और तेलुगु अभिनेत्री निहारिका कोनिडेला के तलाक पर भी अनुचित टिप्पणी की। निहारिका का तलाक 2023 में हुआ था। अनुदीप ने इस बात को लेकर मजाक किया कि निहारिका अपने चाचा पवन कल्याण से इस मामले में सलाह ले सकती हैं। यह टिप्पणी जन सेना पार्टी के समर्थकों के बीच भारी विवाद का कारण बनी। 11 अप्रैल को काकीनाडा टाउन पुलिस स्टेशन में अनुदीप के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उन्होंने अपने वीडियो के माध्यम से पवन कल्याण और उनके परिवार की छवि को नुकसान पहुंचाया है। साथ ही, अशोभनीय भाषा और व्यंग्य का भी आरोप लगाया गया है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो के प्रसार के बाद अनुदीप को ट्रोलिंग और धमकियों का भी सामना करना पड़ा। पुलिस ने बताया कि 14 अप्रैल की शाम को काकीनाडा के दो पुलिस अधिकारी प्रयागराज पहुंचे और वहां अनुदीप के मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रेस की। उस समय वे अपने पिता के साथ एक पार्क में थे। पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और स्थानीय थाना ले जाकर पूछताछ की। इसके बाद उन्हें काकीनाडा ट्रेनों द्वारा भेज दिया गया। परिवार को बताया गया है कि काकीनाडा पहुंचने पर अनुदीप को नोटिस जारी करके रिहा भी किया जा सकता है क्योंकि ज्यादातर आरोप जमानती हैं। अनुदीप के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 356(2) और 353(2) के तहत मानहानि, अफवाह फैलाने और वैमनस्य बढ़ाने का केस दर्ज है। इसके अलावा महिला की गरिमा का अपमान करने और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 में भी आरोप लगाए गए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है। अनुदीप कटिकला हैदराबाद के 30 वर्षीय स्टैंड-अप कॉमेडियन हैं। उन्होंने IIT बॉम्बे से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम करने के बाद स्टैंड-अप कॉमेडी की दुनिया में आए। वे ‘सिली साउथ कॉमेडी क्लब’ के फाउंडर भी हैं, जो तेलुगु कॉमेडियंस को मंच प्रदान करता है। उनकी लोकप्रियता ‘द टॉलीवुड रोस्ट शो’ से बढ़ी, जिसमें उन्होंने तेलुगु सितारों के ऊपर व्यंग्य किए। हालांकि, उनके द्वारा की गई मजाकिया टिप्पणियों ने विवाद को जन्म दिया। अनुदीप ने अपनी सफाई में कहा था कि उनका उद्देश्य तलाक जैसे विषयों को सामान्य मानना और सामाजिक तौर पर खुले तौर पर बात करने को बढ़ावा देना था, ना कि किसी की निजता या सम्मान का हनन करना। उन्होंने कहा कि वे केवल हास्य के माध्यम से सामाजिक मुद्दों को उजागर करना चाहते थे। इस घटना के बाद, सोशल मीडिया पर बहस और प्रतिक्रिया जारी है, जहां एक ओर कुछ लोग उनकी व्यंग्य कला की बात कर रहे हैं तो दूसरी ओर उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई को उचित ठहरा रहे हैं। मामले का कानूनी और राजनीतिक पड़ाव आगे क्या होगा, यह आने वाले समय में देखने को मिलेगा।

सबरीमाला केस, आज 5वें दिन सुनवाई:कल SC ने कहा था- करोड़ों की आस्था को गलत ठहराना मुश्किल; मंदिर मैनेजमेंट बोला- महिलाएं क्यों आना चाहती हैं
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सबरीमाला केस: आज 5वें दिन सुनवाई, कल SC ने कहा करोड़ों की आस्था को गलत ठहराना मुश्किल; मंदिर प्रबंधन ने महिलाओं के प्रवेश पर उठाए सवाल

केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज पांचवें दिन सुनवाई हो रही है। यह संवेदनशील मामला जहां आस्था और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा है, वहीं संविधान के अधिकारों से भी गहरा संबंधित है। पिछले चार दिनों में दोनों पक्षों के बीच हुई बहस ने सामाजिक और कानूनी दृष्टिकोण से इस विवाद को और जटिल बना दिया है। कल की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की 9 सदस्यीय बेंच ने यह स्पष्ट किया कि करोड़ों लोगों की आस्था को गलत ठहराना सबसे मुश्किल कार्यों में से एक है। न्यायालय ने कहा कि सामाजिक सुधार के नाम पर धर्म की मूल संरचना को कमजोर करना उचित नहीं होगा। यह टिप्पणी मंदिर की सांस्कृतिक पवित्रता और आस्था के महत्व को दर्शाती है। मंदिर प्रबंधन के प्रतिनिधि त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखा कि सबरीमाला कोई सामान्य धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यहां के देवता ब्रह्मचारी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मंदिर खेल या मनोरंजन का केंद्र नहीं है। अधिसूचना में कहा गया कि भारत में लगभग 1,000 अयप्पा मंदिर हैं, जहां महिलाएं दर्शन कर सकती हैं, इसलिए उन्हें विशेष रूप से सबरीमाला मंदिर में आने की जरुरत नहीं होनी चाहिए। यह विवाद 1991 से चला आ रहा है, जब केरल हाईकोर्ट ने मासिक धर्म दौरान महिलाओं (आयु 10 से 50 वर्ष) की एंट्री पर रोक लगा दी थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इस प्रतिबंध को हटा दिया था, जिससे मंदिर प्रबंधन और कुछ धार्मिक समूहों ने पुनर्विचार याचिकाएं दायर कीं। वर्तमान सुनवाई इसी मुद्दे पर केंद्रित है। 7 अप्रैल से शुरू हुई सुनवाई में केंद्र सरकार ने महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ दलीलें पेश की थीं। सरकार ने कहा कि देशभर के कई देवी मंदिरों में पुरुषों के प्रवेश पर भी रोक है और इस प्रकार धार्मिक परंपराओं का सम्मान जरूरी है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कई हिंदू मंदिरों में प्रवेश प्रतिबंधों पर बहस की। सुनवाई के मुख्य दिनवार विवरण इस प्रकार रहे हैं: 7 अप्रैल: केंद्र की दलील – मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत है। 8 अप्रैल: न्यायालय ने पूछा कि जो याचिकाकर्ता भक्त नहीं हैं, वे धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहे हैं। 9 अप्रैल: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मंदिरों में अनावश्यक प्रवेश रोकना समाज को विभाजित कर सकता है। 15 अप्रैल: सबरीमाला मैनेजमेंट ने कहा कि अयप्पा मंदिर कोई रेस्टोरेंट नहीं है, बल्कि यहां ब्रह्मचारी देवता पूजा के पात्र हैं। आज की सुनवाई में अपेक्षा है कि दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क और नए साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे। सात प्रश्नों पर बहस केंद्रित है, जिनमें धर्म की स्वतंत्रता, सामाजिक सुधार, और संवैधानिक अधिकार प्रमुख हैं। सबरीमाला मामला अकेला नहीं है; इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट पांच अन्य महत्वपूर्ण मामलों पर भी विचार कर रहा है, जो धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन को परखने वाले हैं। इस फैसले का व्यापक प्रभाव होगा, न केवल विवादित मंदिरों पर, बल्कि पूरे देश में धार्मिक अधिकारों और सामाजिक मान्यताओं के बीच संबंधों पर भी। आम जनता, धार्मिक नेता और कानूनी विशेषज्ञ इसकी निगाह बनाए हुए हैं, जो आने वाले समय में धार्मिक आस्था और संवैधानिक अधिकारों के बीच एक महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा।

TIME-100 सूची में सुंदर पिचाई, रणबीर कपूर, विकास खन्ना शामिल:दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोगों की लिस्ट; मोदी, शाहरुख और सचिन भी रह चुके हैं हिस्सा
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TIME-100 सूची में सुंदर पिचाई, रणबीर कपूर और विकास खन्ना शामिल: विश्व के सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों की प्रतिष्ठित लिस्ट; मोदी, शाहरुख और सचिन भी रह चुके हैं हिस्सा

नई दिल्ली। प्रतिष्ठित TIME मैगजीन ने बुधवार को 2026 की TIME100 सूची जारी की, जिसमें दुनिया भर के विभिन्न क्षेत्रों के सबसे प्रभावशाली 100 लोगों को शामिल किया गया है। इस साल की सूची में भारत से सुंदर पिचाई, बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर और मशहूर शेफ विकास खन्ना को सम्मानित किया गया है। यह सूची हर वर्ष मनोरंजन, तकनीक, खेल, वित्त, एक्टिविज्म और अकादमिक क्षेत्रों में卓越 योगदान देने वाले व्यक्तियों को प्रस्तुत करती है। TIME100 की इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल होना किसी भी व्यक्ति के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, क्योंकि यह वैश्विक स्तर पर उनके प्रभाव को मान्यता देती है। इस वर्ष सुंदर पिचाई को उनके तकनीकी नवाचार और नेतृत्व के लिए सराहा गया है, वहीं रणबीर कपूर को उनकी फिल्मी और सामाजिक जिम्मेदारी के चलते चुना गया है। खासतौर पर मशहूर शेफ विकास खन्ना ने इस सम्मान को अपने लिए गर्व का क्षण बताया। खन्ना ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “TIME100 2026 की सूची में शामिल होना मेरे लिए अत्यधिक सम्मान की बात है। यह सफलता मेरे परिवार के त्याग, आशीर्वाद और मार्गदर्शन के बिना संभव नहीं थी। खासकर मेरी दादी, मां और बहन के योगदान को मैं कभी नहीं भूल सकता।” इस सूची में इस बार विश्व के अन्य प्रमुख हस्तियों जैसे राल्फ लॉरेन, केट हडसन, ईथन हॉक, मार्क केली और हिलारी नाइट को भी उनके-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्टता के लिए जगह मिली है। यह सूची समकालीन विश्व की विविधता और बहुआयामी प्रतिभाओं का प्रतिनिधित्व करती है। यह उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 2025 में पहली बार 21 साल के इतिहास में कोई भी भारतीय इस सूची में शामिल नहीं था, जो चर्चा का विषय बना था। उस वर्ष बांग्लादेश के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद यूनुस को सूची में जगह मिली थी। भारत के लिए इस बार के चयन ने फिर से यह साबित किया है कि देश के लोग तकनीक, कला और सामाजिक बदलाव में विश्व स्तर पर अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। TIME100 सूची में पहले शाहरुख खान, सचिन तेंदुलकर, नरेंद्र मोदी, दीपिका पादुकोण और महात्मा गांधी जैसे दिग्गज शामिल हो चुके हैं, जो इस सम्मान की व्यापक पहचान को दर्शाता है। इस वर्ष भारतीय हस्तियों का चयन न केवल देश की बढ़ती वैश्विक छवि को दर्शाता है, बल्कि यह युवा पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। यह सम्मान भारत और विश्व के बीच सांस्कृतिक और तकनीकी संवाद को मजबूत करता है। समाप्त करते हुए, TIME100 की इस सूची में स्थान पाना वह सम्मान है जो व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ देश की सामूहिक प्रतिभा की मिसाल पेश करता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत के पास विश्व मंच पर चमकने वाले अनेक सितारे हैं, जो देश का नाम गर्व से दुनिया भर में रोशन कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट में चुनावों में वोटिंग अनिवार्य करने की मांग:याचिका खारिज; CJI बोले- जरूरत जागरूकता की है, हम किसी को मजबूर नहीं कर सकते
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सुप्रीम कोर्ट में चुनावों में वोटिंग अनिवार्य करने की मांग खारिज: CJI बोले- जरूरत जागरूकता की, किसी को मजबूर नहीं कर सकते

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को देश में चुनावों में वोटिंग अनिवार्य करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वोटिंग अनिवार्य करना नीतिगत मामला है और इसे न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र के बाहर माना जाता है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमलया बागची तथा जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि जान-बूझकर वोट नहीं डालने वालों के लिए दंडात्मक कार्रवाई और वोटिंग को अनिवार्य बनाने संबंधी याचिका पर अदालत सुनवाई नहीं कर सकती। बेंच ने याचिकाकर्ता अजय गोयल से कहा कि वे अपनी शिकायतों को लेकर सम्बंधित पक्षों से संपर्क करें। याचिकाकर्ता ने यह भी प्रस्ताव रखा था कि जो लोग जान-बूझकर मतदान से दूरी बनाते हैं उनके लिए सरकारी सुविधाओं को रोकने के निर्देश जारी किए जाएं। हालांकि, CJI ने कहा कि लोकतंत्र कानूनी दबाव से नहीं बल्कि जन जागरूकता से फलता-फूलता है। ‘‘यह देश कानून के शासन और लोकतंत्र में विश्वास रखता है, जहां 75 वर्षों में हमने दिखा दिया कि हम इस व्यवस्था पर कितना भरोसा करते हैं। हमें हर किसी से उम्मीद है कि वह मतदान करें, लेकिन यदि नहीं करते तो उनकी मर्जी। आवश्यकता जागरूकता की है, किसी को मजबूर नहीं किया जा सकता।’’ सुनवाई के दौरान बेंच ने यह भी कहा कि चुनाव के समय नागरिकों को काफी कार्य करना पड़ता है। उन्होंने वोटिंग को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव की व्यावहारिक कठिनाइयों को रेखांकित किया। CJI ने कहा, ‘‘मान लीजिए कि मेरे साथी जस्टिस बागची को मतदान के लिए पश्चिम बंगाल जाना पड़े, जबकि वह उसी दिन काम पर हों, क्या हम इसे कर्तव्य समझेंगे?’’ इसके साथ ही न्यायालय ने समाज के वंचित वर्ग की विशेष चिंताएं भी जताईं। उन्होंने पूछा कि यदि कोई गरीब व्यक्ति अपनी रोज़ी-रोटी कमाने में लगा है तो उसे कैसे वोटिंग के लिए प्रेरित किया जाए। याचिकाकर्ता ने सुझाव दिया कि चुनाव आयोग को निर्देशित किया जाए कि वह एक समिति बनाए जो ऐसे लोगों पर रोक लगाने के प्रस्ताव दे, जो अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने में नाकामयाब रहते हैं। हालांकि, चीफ जस्टिस ने कहा, ‘‘हमे डर है कि ये मामले नीतिगत दायरे में आते हैं और इन्हें न्यायपालिका द्वारा नहीं सुलझाया जा सकता।’’

सुप्रीम कोर्ट बोला- बंगाल में सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट बने:ट्रिब्यूनल जिन्हें 21 अप्रैल तक वोटर मानेगा, वो 23 को वोट डाल सकेंगे
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सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया- बंगाल में सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट बने, 21 अप्रैल तक मान्य वोटर 23 को कर सकेंगे मतदान

नई दिल्ली,  सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश दिया। कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जल्द ही जारी करे, जिसमें उन सभी वोटर्स को शामिल किया जाए जिनकी अपीलों पर ट्रिब्यूनल ने फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिनकी अपीलें अभी लंबित हैं, उन्हें वोट डालने की अनुमति नहीं मिलेगी। इससे पहले, पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत लगभग 90.83 लाख वोटर्स के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे। इसके बाद त्रिपक्षीय ट्रिब्यूनल का गठन किया गया है, जहां इन हटाए गए नामों पर अपीलों की सुनवाई की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमलया बागची शामिल हैं, SIR प्रक्रिया से जुड़े विवादों पर सुनवाई कर रही है। बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में होने वाले हैं, पहला चरण 23 अप्रैल को और दूसरा 29 अप्रैल को। पहले चरण के लिए जिन इलाकों में मतदान होना है, वहां 21 अप्रैल तक ट्रिब्यूनल के फैसले आने पर ही वोटर मतदान कर सकेंगे। वहीं दूसरे चरण के क्षेत्र के वोटर्स के लिए यह अंतिम तारीख 27 अप्रैल रखी गई है। ट्रिब्यूनल द्वारा नामों को वोटर सूची में वापस जोड़ने के आदेश के बाद, चुनाव आयोग का इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर तुरंत सूची में संशोधन करेगा। ट्रिब्यूनल की संख्या 19 है और ये रिटायर्ड हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की अगुवाई में काम कर रहे हैं, जिनके सामने कुल 34 लाख से अधिक अपीलें लंबित हैं। कोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया कि ट्रिब्यूनलों को अतिभारित ना किया जाए ताकि वे समय पर मामले निपटा सकें। पश्चिम बंगाल में SIR का उद्देश्य मतदाता सूची से डुप्लिकेट व अयोग्य नाम काटना है। बावजूद इसके, इस प्रक्रिया को लेकर सियासी विवाद खूब गर्माया है। सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बड़े पैमाने पर उनके समर्थकों को सूची से बाहर किया जा रहा है, जबकि चुनाव आयोग इसे निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की जरूरी प्रक्रिया मानता है। हालांकि, इस प्रक्रिया के बाद अक्टूबर 2023 तक पश्चिम बंगाल के कुल 7.66 करोड़ मतदाताओं में से 90.83 लाख नाम हटा दिए गए, जो कुल मतदाता संख्या का लगभग 11.85% है। ज्यादातर हटाए गए नाम राज्य के बांग्लादेश की सीमा से सटे जिलों जैसे नॉर्थ 24 परगना और मृतिका में हैं। नॉर्थ 24 परगना में 5.91 लाख मतदाताओं में से 3.25 लाख और मृतिका में 8.28 लाख में से 2.39 लाख नाम हटाए गए हैं। स्पष्ट रूप से इस प्रक्रिया ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। 8 अप्रैल को, तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल ने चुनाव आयोग से बैठक की थी, जिसमें उन्होंने SIR को लेकर समय मांगा था। लेकिन बैठक में खराब व्यवहार का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने केवल पांच मिनट में उनकी बात सुनी और उन्हें भगा दिया। चुनाव आयोग ने इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक बैठक तनावपूर्ण रही। अंत में, सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से स्पष्ट होता है कि न्यायालय चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने का प्रयास कर रहा है ताकि सभी वैध मतदाता चुनाव में भाग ले सकें और मतदाता सूची में व्यापक पारदर्शिता रहे। यह कदम राजनीतिक दलों के बीच मतदाता सूची को लेकर हो रही विवादों को कम करने के लिए भी अहम माना जा रहा है।

केजरीवाल बोले-जज के बच्चे तुषार मेहता के साथ काम करते:तुषार CBI के वकील हैं, ऐसे में जज कांता मेहता के खिलाफ आदेश कैसे दे पाएंगी
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केजरीवाल ने जताई आपत्ति: जज के बच्चे CBI वकील तुषार मेहता के साथ काम करते हैं, इसलिए जज कैसे दे सकती हैं आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट में जारी शराब घोटाले मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने की पुनः मांग की है। बुधवार को उन्होंने जस्टिस कांता की अदालत में एक नया हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें उन्होंने जज के दो बच्चों के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ काम करने के संबंध में सवाल उठाए हैं। केजरीवाल के हलफनामे में कहा गया है कि जज के दोनों बच्चे तुषार मेहता के साथ काम करते हैं, जो CBI की ओर से मामलों की पैरवी कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा तुषार मेहता के खिलाफ आदेश कैसे जारी कर सकती हैं। यह मुद्दा न्यायिक निष्पक्षता और पक्षपात की आशंका से जुड़ा है। इससे पहले 13 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान भी केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा पर आरएसएस से जुड़े अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रमों में आतंरिक शामिल होने का आरोप लगाया था। वे मांग कर चुके हैं कि ऐसे मामलों में न्यायाधीश को मामले से अलग होना चाहिए ताकि निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित हो सके। केजरीवाल की जज हटाने की अर्जी के मुख्य कारण 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने आबकारी नीति मामले में केजरीवाल समेत 22 आरोपीयों को बरी किया था, जिसे CBI ने चुनौती दी है। 9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय पर रोक लगाते हुए यह कहा कि ट्रायल कोर्ट की कुछ टिप्पणियां गलत हैं। केजरीवाल ने कहा कि सुनवाई के दौरान CBI के अलावा कोई पक्ष मौजूद नहीं था, फिर भी आदेश में पक्षपात दिखाई दिया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जज के करीबी संबंध तुषार मेहता से और उनकी आरएसएस से जुड़ी गतिविधियों के कारण निष्पक्षता पर प्रश्न उठते हैं। केजरीवाल ने जांच अधिकारी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई पर भी रोक लगने को संदिग्ध बताया है। 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में सभी आरोपियों को राहत दी थी और CBI की जांच की कड़ी आलोचना की थी। इसके बाद सीबीआई की याचिका पर जस्टिस शर्मा ने सुनवाई की, जिसमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट के फैसले की पहली नजर में खामियां बताईं। इस मामले में केजरीवाल को 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तार किया गया था और उन्हें 156 दिन की हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। मनीष सिसोदिया भी इस मामले में 530 दिन तक जेल में रहे। हाईकोर्ट ने 9 मार्च को सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी करते हुए CBI के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों पर रोक लगाई है। वहीं, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुनवाई स्थगित करने के आदेश भी जारी किए गए हैं। इससे इस अहम मामले की जटिलता और संवेदनशीलता का पता चलता है। इस पूरे घटनाक्रम ने न्याय प्रक्रिया के प्रति आम जनता में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। निष्पक्ष और शीघ्र न्याय की मांग की जा रही है ताकि तूल पकड़ रहे विवादों का जल्द समाधान हो सके।

NSA डोभाल बोले-जंग का मकसद दुश्मन का मनोबल तोड़ना:देश की सुरक्षा सिर्फ सेना की ताकत से तय नहीं होती, जनता की इच्छाशक्ति सबसे जरूरी
राजनीति

NSA डोभाल बोले- जंग का मकसद दुश्मन का मनोबल तोड़ना, देश की सुरक्षा में जनता की इच्छाशक्ति सबसे जरूरी

नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने मंगलवार को राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी (RRU) के पांचवें दीक्षांत समारोह के दौरान महत्वपूर्ण बातें कही। देश की सुरक्षा केवल उसकी सैन्य शक्ति पर निर्भर नहीं करती, बल्कि जनता की इच्छाशक्ति और मनोबल सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति में आयोजित इस समारोह में डोभाल ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा एक जटिल और बहुआयामी विषय है, जिसमें सेना, तकनीक, संसाधन, कूटनीति के साथ मानव शक्ति भी शामिल है। डोभाल ने कहा, “देश की ताकत आंकते समय सबसे बड़ी गलती यह होती है कि लोगों के मनोबल को नजरअंदाज कर दिया जाता है। युद्ध का मकसद केवल दुश्मन की सैन्य ताकत को हराना नहीं, बल्कि उसके मनोबल को तोड़ना भी है।” उनका स्पष्ट मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना, पुलिस या खुफिया एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह देशवासी की सामूहिक जिम्मेदारी है। दीक्षांत समारोह में मानद PhD से नवाजे जाने के पश्चात् डोभाल ने युवाओं को भी यह संदेश दिया कि सुरक्षा के क्षेत्र में कोई ‘सिल्वर मेडल’ नहीं होता। “आप या तो जीतते हैं या हारते हैं। अगर आप जीतते हैं तो इतिहास बनाते हैं, और अगर हारते हैं तो इतिहास बन जाते हैं,” उन्होंने कहा। इस सम्मान को स्वीकार करते हुए डोभाल ने कहा कि यह उनके लिए अत्यंत गर्व और जिम्मेदारी का विषय है। कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अजीत डोभाल को राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए मानद PhD प्रदान की, जो देश के प्रति उनकी निष्ठा और समर्पण को दर्शाता है। डोभाल ने आगे कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा किसी एक अंग के बूते की बात नहीं है। एक समृद्ध और सुरक्षित राष्ट्र के लिए तकनीकी उन्नति, संसाधनों का समुचित प्रबंधन, कूटनीति तथा हर नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। यही वजह है कि रक्षा और सुरक्षा केवल सीमाओं तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक, और मानसिक दृढ़ता के स्तर पर भी मजबूत होनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि देश के युवा सुरक्षा की इस जटिल प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं और उन्हें इसके लिए प्रशिक्षित और जागरूक करना हमारा कर्तव्य है। डोभाल की बातों से यह साफ होता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा एक साझा प्रयास है, जिसमें हर भारतीय का योगदान अनिवार्य है। डोभाल ने इससे पहले भी तानाशाही और खराब शासन के खतरे पर प्रकाश डाला था। उन्होंने कहा था कि बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल जैसे देशों में राजनीतिक अस्थिरता और खराब प्रशासन का देश कमजोर होने का कारण बनता है। इस संदर्भ में उन्होंने लोकतंत्र की मजबूती को अत्यंत आवश्यक बताया। राष्ट्रीय सुरक्षा पर डोभाल के विचार और उनके अनुभव देश के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शक सिद्ध हो सकते हैं। उनकी बातों से यह स्पष्ट होता है कि सिर्फ सैन्य शक्ति से नहीं, बल्कि देश की जनता की एकजुटता और मनोबल से ही भारत को सशक्त और सुरक्षित बनाया जा सकता है।

टाटा सन्स चेयरमैन बोले- नासिक की घटना परेशान करने वाली:सीनियर अफसर से जांच करा रहे, TCS कैंपस में यौन उत्पीड़न, जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप हैं
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टाटा सन्स के चेयरमैन ने नासिक की घटना को बताया गंभीर, जांच के आदेश दिए

टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने TCS नासिक ऑफिस में यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोपों को बहुत गंभीर और चिंताजनक बताया है। उन्होंने कहा कि मामले की सीनियर अधिकारियों द्वारा त्वरित और निष्पक्ष जांच की जा रही है तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह प्रतिक्रिया कंपनी की उस घोषणा के बाद आई है जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनके यहां उत्पीड़न के लिए शून्य सहिष्णुता नीति लागू है। महाराष्ट्र के नासिक स्थित TCS कार्यालय में आठ महिला कर्मचारियों ने यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप लगाए हैं। आरोप लगाने वाली महिलाओं का कहना है कि उनके वरिष्ठों ने मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया और उनकी शिकायतें HR विभाग द्वारा अनसुनी की गईं। इस मामले में पुलिस ने कंपनी के सात लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुस्लिम टीम लीडर और एक महिला HR मैनेजर भी शामिल हैं। पुलिस ने इस गंभीर मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया है, जो पूरी विस्तार से जांच कर उचित कानूनी कदम उठा रहा है। जब आरोपों की जानकारी कंपनी को मिली, तो उसने तत्काल संबंधित कर्मचारियों को निलंबित कर दिया। कंपनी अब अपनी प्रक्रियाओं और कार्यस्थल की सुरक्षा नीतियों की पुनः समीक्षा भी कर रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों। इस घटना ने नासिक की IT कंपनी में कार्यबल के माहौल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोपितों पर जबरन नमाज पढ़ने, हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने के भी आरोप हैं, जिसके कारण स्थानीय हिंदू संगठनों ने कैंपस में हंगामा भी किया। कंपनी और पुलिस दोनों ही इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और न्याय सुनिश्चित करने का पूर्ण प्रयास कर रहे हैं। टाटा सन्स के चेयरमैन की ये प्रतिक्रिया घटना के सार्वजनिक होने के बाद पहली औपचारिक प्रतिक्रिया है, जो यह दर्शाती है कि कंपनी इस मामले की जांच और पुनरावलोकन में पूर्ण पारदर्शिता और ज़िम्मेदारी दिखाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।

शाह बोले- बंगाल में बाबरी मस्जिद नहीं बनने देंगे:राहुल आज मुर्शिदाबाद सहित 3 जिलों में जाएंगे; EC ने वोटरों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया
राजनीति

शाह बोले- बंगाल में बाबरी मस्जिद नहीं बनने देंगे: राहुल आज मुर्शिदाबाद सहित तीन जिलों में जाएंगे; EC ने वोटरों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया

पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी जारी है। सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह ने रानीगंज में अपनी चुनावी सभा को संबोधित करते हुए बड़ी बात कही। शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और हुमायूं कबीर दोनों एक ही तरह के नेता हैं, जो राज्य में अराजकता फैला रहे हैं। उन्होंने भाजपा की ओर से यह साफ किया कि सत्ता में आने पर वे बंगाल में बाबरी मस्जिद के निर्माण को किसी भी हालत में नहीं होने देंगे। अमित शाह की यह टिप्पणी बीरभूम में एक अन्य सभा के दौरान आई, जहां उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता राजनीतिक हिंसा का जवाब अपने वोट से देगी तथा 5 मई को भाजपा सरकार का गठन होगा। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर भ्रष्टाचार और राजनीतिक हिंसा के गंभीर आरोप लगाए। शाह ने आश्वस्त किया कि चुनाव समाप्त होने के तुरंत बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी मंगलवार को पश्चिम बंगाल पहुंचेंगे। वह मुर्शिदाबाद जिले के समसेरगंज, मालदा जिले के चंचल और उत्तर दिनाजपुर जिले के रायगंज में चुनावी सभाएं करेंगे। राहुल गांधी के इस दौरे का मकसद क्षेत्रीय मतदाताओं से संपर्क बढ़ाना और चुनाव प्रचार को गति देना है। वहीं, चुनाव आयोग ने कानून व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों के लिए बंगाल के मतदाताओं हेतु 24×7 हेल्पलाइन और ईमेल सुविधा शुरू कर दी है। आयोग ने मतदान प्रक्रिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए टोल-फ्री नंबर 18003450008 जारी किया है, जहां मतदाता अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। साथ ही, wbfreeandfairpolls@gmail.com पर ईमेल के माध्यम से भी शिकायतें भेजी जा सकती हैं। ये सेवाएं 4 मई तक सक्रिय रहेंगी। पश्चिम बंगाल में चुनाव को लेकर सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां अपने अंतिम पड़ाव पर हैं। राजनीतिक दलों के बीच तीव्र प्रतिस्पर्धा के बीच आम जनता की निगाहें शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव पर टिकी हैं। आगामी दिनों में मतदाताओं के फैसले से राज्य की राजनीतिक दिशा तय होगी। अंत में यह कहा जा सकता है कि इस बार की गर्म लड़ाई में मतदाता ही निर्णायक साबित होंगे और सभी दलों को उनके विश्वास पर खरा उतरना होगा। चुनाव आयोग भी निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सम्पन्न कराने के लिए हरसंभव कदम उठा रहा है ताकि पश्चिम बंगाल की जनता के अधिकार सुरक्षित रहें।

पीएम मोदी आज सहारनपुर में मां काली की पूजा करेंगे:वाइल्डलाइफ कॉरिडोर देखेंगे; CM योगी और धामी साथ रहेंगे
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पीएम मोदी आज सहारनपुर में मां काली की पूजा करेंगे, वाइल्डलाइफ कॉरिडोर का निरीक्षण करेंगे; साथ रहेंगे CM योगी और धामी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के दौरे पर रहेंगे। उनके इस दौरे का मुख्य उद्देश्य दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का उद्घाटन करना है। प्रधानमंत्री सुबह 11:15 बजे सहारनपुर पहुंचेंगे, जहां वे वाइल्डलाइफ सेक्शन का निरीक्षण करेंगे और फिर मां डाट काली मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उनके साथ रहेंगे। प्रधानमंत्री का हेलिकॉप्टर सहारनपुर के गणेशपुर हेलीपैड पर पहुंचेगा, जहां से वे मनोहरपुर जाएंगे। वहां बनाए गए पंडाल में वे कॉरिडोर से जुड़ा वीडियो देखेंगे और वाइल्डलाइफ कॉरिडोर की समीक्षा करेंगे। समीक्षा के बाद प्रधानमंत्री कार से ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे यानी एलिवेटेड कॉरिडोर पर पहुंचकर निरीक्षण करेंगे। तत्पश्चात वे उत्तराखंड सीमा पर स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ जय मां डाट काली मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना करेंगे। दोपहर करीब 12:30 बजे वे देहरादून में जनसभा को सम्बोधित करेंगे और वहीं से इकोनॉमिक कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे। 212 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे लगभग 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से बना है, जो करीब 4 वर्षों में तैयार हुआ है। इसका लगभग 64 प्रतिशत हिस्सा यानी 135 किलोमीटर उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। उद्घाटन के बाद दिल्ली से देहरादून तक की यात्रा का समय लगभग छह घंटे से घटकर तीन घंटे तक पहुंच जाएगा, जिससे क्षेत्र में यातायात और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। सहारनपुर में पीएम के स्वागत के लिए तलवारबाजी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। मंदिर परिसर को वृंदावन और पश्चिम बंगाल से मंगाए गए सौ किलो से अधिक ताजा फूलों से सजाया गया है। सुरक्षा के लिहाज से तीन हजार से अधिक जवान तैनात किए गए हैं। इसमें पीएसी और आरएएफ की टीमें भी शामिल हैं। एसपीजी और खुफिया एजेंसियों ने हेलीपैड, जनसभा स्थल तथा पूरे रूट का बड़े पैमाने पर निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था को अंतिम रूप दिया है। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर में छह लेन वाली सड़क के साथ दस इंटरचेंجز, तीन रेलवे ओवरब्रिज और चार बड़े पुल बनाए गए हैं। इसके अलावा, इसमें 12 वे-साइड सुविधाएं और एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम भी लगाया गया है। विशेष बात यह है कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए 12 किलोमीटर लंबा वाइल्डलाइफ एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया गया है, जिसे एशिया का सबसे लंबा माना जा रहा है। इसके अलावा आठ एनिमल पास, दो 200-200 मीटर के हाथी अंडरपास और डाट काली मंदिर के समीप 370 मीटर लंबी टनल भी शामिल है, जिससे स्थानीय जीव-जंतुओं की आवाजाही सुरक्षित बनी रहेगी। लोकसभा चुनाव के बाद सहारनपुर के लिए यह प्रधानमंत्री का पहला दौरा है। इससे पहले वे 6 अप्रैल 2024 को सहारनपुर आ चुके हैं। इसके पूर्व सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सहारनपुर जाकर तैयारियों का जायजा लिया था। इस दौरे से क्षेत्र में विकास को नया impetus मिलने की उम्मीद है, साथ ही धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी बढ़ेगा।

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