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महिला आरक्षण पर PM की महिलाओं के नाम चिट्‌ठी:लिखा- भारत की बेटियों से उनके हक के लिए सालों तक इंतजार करने नहीं कह सकते
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महिला आरक्षण पर प्रधानमंत्री का पत्र: बेटियों से कहा- हक के लिए लंबा इंतजार न करें

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देश की महिलाओं के नाम एक पत्र लिखकर महिला अधिकारों और आरक्षण को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। पत्र में उन्होंने कहा कि यदि वर्ष 2029 के लोकसभा और विभिन्न विधानसभाओं के चुनाव महिलाओं के लिए पूर्ण आरक्षण के साथ आयोजित होते हैं, तो यह भारतीय लोकतंत्र को और मजबूत तथा जीवंत बनाएगा। पीएम मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि जब महिलाएं कई क्षेत्रों में अपनी विशिष्टता और उत्कृष्टता का परिचय दे रही हैं, तो विधायी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना आवश्यक है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में लिखा, “भारत की बेटियों से उस चीज के लिए सालों तक इंतजार करने को नहीं कहा जा सकता जो उनका स्वाभाविक अधिकार है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह पत्र ‘नारी शक्ति’ के नाम है, जिसमें वे दशकों से लंबित महिला आरक्षण के वादे को पूरा करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हैं। सितंबर 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’, जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण अधिनियम कहा जाता है, ने महिलाओं के लिए लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में एक तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया था। हालांकि यह आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पा रहा था क्योंकि इसे 2027 की जनगणना के बाद परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने तक लागू नहीं किया जा सकता था। इस कारण 2029 के लोकसभा चुनावों से यह आरक्षण लागू करने के लिए इस अधिनियम में संशोधन आवश्यक हो गया है। सरकार ने इसी उद्देश्य से संसद में एक विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया है, जहाँ विधेयकों के माध्यम से संशोधन प्रस्तावित किए जाएंगे। सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधनों में दो महत्वपूर्ण पहलू हैं, जिनमें एक अलग परिसीमन विधेयक भी शामिल है। इन दोनों विधेयकों को संवैधानिक संशोधन के रूप में पारित करना आवश्यक होगा। मौजूदा व्यवस्था के तहत अल्पसंख्यक ओबीसी वर्ग के लिए कोई आरक्षण प्रावधान नहीं है, जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षण पहले की तरह जारी रहेगा। यदि संशोधन सफल हो जाते हैं तो लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी, जिनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। महिला आरक्षण अधिनियम के संशोधन के साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को कम से कम 33% सीटें आरक्षित हों। यह प्रावधान वर्ष 2023 में संविधान में संपुष्टित किया गया था, लेकिन इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया अब पूरी होने जा रही है। पीएम मोदी के संबोधन में अन्य महत्वपूर्ण बातें: प्रधानमंत्री ने 13 अप्रैल को नई दिल्ली में आयोजित नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा था, “हमारे देश की संसद एक नया इतिहास रचने के करीब है। विधानसभाओं से लेकर संसद तक दशकों की प्रतीक्षा के अंत का समय आ गया है। इसलिए सरकार 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुला रही है।” उन्होंने महिला सशक्तिकरण योजनाओं का हवाला देते हुए बताया कि देश की महिलाएं आर्थिक रूप से भी मजबूत हुई हैं और यह सरकार की बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह महिला आरक्षण संशोधन देश के लोकतांत्रिक विनिर्माण में एक मील का पत्थर साबित होगा। इस महत्वपूर्ण कदम से न केवल महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि लोकतंत्र में विविधता और समावेशिता को भी मजबूती मिलेगी। सरकार का मानना है कि महिलाओं के सक्रिय सहयोग और नेतृत्व से ही भारत समृद्ध और सशक्त राष्ट्र बन सकता है। सरकार के इस प्रयास का स्वागत करते हुए विभिन्न महिला संगठनों और समाजशास्त्र विशेषज्ञों ने इसे महिलाओं के अधिकारों की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है। यह संशोधन न केवल महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देगा बल्कि समानता और न्याय के सिद्धांतों को भी मजबूत करेगा। आगामी संसद सत्र में महिला आरक्षण विधेयक के पारित होने की उम्मीद है, जो देश के लोकतंत्र को और अधिक समावेशी एवं मजबूत बनाएगा।

लोकसभा सीटें 545 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव:2029 से लागू होगा, महिलाओं को 33% आरक्षण मिलेगा, सीटें बढ़ाने पर दक्षिणी राज्यों का विरोध
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लोकसभा सीटों की संख्या 545 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव: महिला आरक्षण 33% सहित 2029 से होगा लागू, दक्षिणी राज्यों में विरोध

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव संसद में रखा है। इस प्रस्ताव के अनुसार, 850 सीटों में से 815 सीटें राज्यों को और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों को आवंटित की जाएंगी। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन करना आवश्यक होगा, जिसे जल्द संसद की विशेष सत्र में पेश किया जाएगा। इस संशोधन प्रस्ताव का ड्राफ्ट बिल संसद के सभी सांसदों के साथ साझा किया जा चुका है। सरकार इस बिल को 16 अप्रैल से आयोजित होने वाले तीन दिवसीय विशेष सत्र में पेश करेगी। योजना है कि यह नया परिसीमन और सीटों की वृद्धि 2029 के आम चुनावों में लागू हो। सरकार का उद्देश्य संसदीय प्रतिनिधित्व को और अधिक समावेशी बनाना है। इसके तहत महिलाओं को लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान भी शामिल है, जिससे राजनीतिक भागीदारी और अधिक बढ़ सके। वर्तमान परिसीमन और सीटों के निर्धारण का आधार 2011 की जनगणना के आंकड़े होंगे, जो देश की आधिकारिक और अंतिम जनसंख्या संख्या हैं। इससे परिसीमन विधि में तेजी आएगी और मतदाताओं के न्यायसंगत प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित किया जा सकेगा। इसके अलावा, केंद्र सरकार विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों जैसे दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी के लिए विशेष विधेयक भी लोकसभा में प्रस्तुत करेगी, जिससे उन क्षेत्रों को उचित संसदीय प्रतिनिधित्व मिले। हालांकि, इस प्रस्ताव का दक्षिणी राज्यों में व्यापक विरोध हुआ है। कई राजनीतिक दलों ने इसे उनकी राजनीतिक ताकत को कम करने वाला कदम बताया है। वे इसे संसदीय प्रणाली में असंतुलन पैदा करने वाला मानते हैं। विपक्षी दल संसद में इस बिल के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं और इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए हानिकारक बता रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि यह संशोधन सफलतापूर्वक लागू हो गया तो यह देश में संसदीय व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव साबित होगा। संसदीय जनप्रतिनिधित्व अधिक समान होगा और महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व भी बढ़ेगा, जो लोकतंत्र के लिए आवश्यक माना जाता है। सरकार का मानना है कि यह कदम देश के बदलते जनसंख्या आयामों के अनुसार प्रतिनिधित्व की बेहतर व्यवस्था करेगा और लोकतंत्र को मजबूत बनाएगा। हालांकि, इसके लिए सभी दलों के बीच संवाद और सहमति जरूरी होगी ताकि इस प्रस्ताव का सफल कार्यान्वयन हो सके।

इस साल मानसून कमजोर रहेगा, अल नीनो का असर:करीब 80 सेमी बारिश का अनुमान, सीजन के आखिर में थोड़ी राहत मिल सकती है
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इस साल मानसून कमजोर रहेगा, अल नीनो के कारण करीब 80 सेंटीमीटर बारिश का अनुमान, सीजन के अंत में कुछ राहत संभव

नई दिल्ली: इस साल मानसून सामान्य से कम रहने की भविष्यवाणी भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने की है। IMD के अनुसार, 2024 के मानसून सीजन में देश में करीब 80 सेंटीमीटर बारिश होने का अनुमान है, जो पिछले 50 वर्षों के औसत 87 सेंटीमीटर से कम है। यह पिछले आठ वर्षों में मानसून की पहली बार कमजोर होने की स्थिति है। IMD के डिप्टी डायरेक्टर जनरल, डॉ. एम. मोहापात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस बार बारिश कुल मिलाकर लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का लगभग 92 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिसे सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में रखा गया है। खासतौर पर लद्दाख, पूर्वोत्तर राज्य, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश के मध्य इलाके, दक्षिण ओडिशा, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु को छोड़कर पूरे देश के बड़े हिस्से में सामान्य से कम बारिश देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून इस साल 1 जून के आसपास केरल के तट पर पहुंचेगा और 15 से 20 जून के बीच भोपाल समेत मध्य भारत में दाखिल होगा। लेकिन अल नीनो नामक जलवायु प्रभाव के कारण मानसून में कुछ देरी हो सकती है। जून के महीने में अल नीनो की संभावना बढ़ जाती है, जो समुद्र के तापमान में वृद्धि के कारण मानसून को कमजोर करता है, जिससे वर्षा कम होने का खतरा रहता है। इतिहास को देखें तो 1951 से अब तक 16 बार अल नीनो की स्थिति बनी है, जिसमें अधिकांश बार देश में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है। हालांकि, इस बार सितंबर के आखिर में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) के सकारात्मक चरण के कारण कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, जो सामान्यतः वर्षा बढ़ाने में मदद करता है। अल नीनो और ला नीना दो प्रमुख जलवायु पैटर्न होते हैं। अल नीनो में समुद्र का तापमान 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है, जिससे सामान्य से अधिक या कम बारिश के क्षेत्र बदलते हैं। वहीं, ला नीना में समुद्र का पानी ठंडा होता है, जिससे अधिक बादल बनते हैं और मानसून अच्छी तरह सक्रिय रहता है। पिछले वर्ष मानसून केरल पहुंचने में 8 दिन पहले था, 24 मई को। सामान्यतः मानसून 1 जून के आसपास केरल पहुंचता है और जून के मध्य तक महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ पहुंच जाता है। मुंबई तक मानसून लगभग 11 जून तक पहुंच जाता है और पूरे देश में बारिश का यह सिलसिला जुलाई के मध्य तक जारी रहता है। मानसून की वापसी उत्तर-पश्चिम भारत से सितंबर के बीच शुरू होकर अक्टूबर के मध्य तक पूरी होती है। IMD के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 150 सालों के दौरान मानसून के केरल पहुंचने की तारीखें भिन्न रही हैं। 1918 में यह सबसे जल्दी 11 मई को पहुंचा था, जबकि 1972 में सबसे देर से 18 जून को। इस वर्ष अल नीनो की वजह से मानसून में कुछ देरी और कमजोर पड़ने की संभावना है, लेकिन अक्टूबर तक मौसम में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है। आम आदमी के लिए 9 बड़ी बातें इस साल बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है। IMD का अनुमान है कि कुल वर्षा 80 सेंटीमीटर के करीब होगी। अल नीनो के कारण मानसून कमजोर पड़ सकता है। लद्दाख, पूर्वोत्तर राज्यों को छोड़कर ज्यादातर इलाकों में कम बारिश होगी। दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जून के आसपास केरल पहुंचेगा। 15-20 जून तक मध्य भारत में मानसून दस्तक देगा। सितंबर में इंडियन ओशन डाइपोल से बारिश में सुधार संभव है। पिछले साल मानसून 8 दिन पहले आया था। मानसून की वापसी अक्टूबर तक पूरी हो जाती है। यह स्थिति खेती, जल स्रोत और जलभराव के नजरिए से महत्वपूर्ण है। किसानों को मौसम की सूचनाओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होगी ताकि वे आगे की योजनाएं बेहतर तरीके से बना सकें।

भारत बोला-चीन के दिए नाम मनगढ़ंत, अरुणाचल भारत का हिस्सा:झूठे दावे हकीकत नहीं बदलते; चीन ने 9 साल में 89 जगहों के नाम बदले
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भारत ने चीन के मनगढ़ंत नामों को खारिज किया, अरुणाचल को कहा भारतीय क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा; चीन ने 9 साल में 89 जगहों के नाम बदले

नयी दिल्ली: चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों को मनगढ़ंत नाम देने की कथित कार्रवाई पर भारत ने कड़ा विरोध जताया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने रविवार को स्पष्ट किया कि ऐसे झूठे दावे क्षेत्र की हकीकत को नहीं बदल सकते और अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न एवं अविभाज्य हिस्सा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि चीन पिछले 9 वर्षों में 89 भारतीय स्थानों के नामों में बदलाव कर चुका है, जो भारत द्वारा पूरी तरह खारिज किया जाता है। उन्होंने इसे ‘शरारती कोशिश’ करार देते हुए कहा कि ऐसे कदम भारत-चीन के द्विपक्षीय संबंधों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। जायसवाल ने एक प्रेस नोट जारी कर कहा कि चीन के इस प्रकार के दावे और नामकरण की कोई वैधता नहीं है और यह दोनों देशों के बीच बेहतर समझ और शांति स्थापित करने की प्रक्रिया के लिए बाधक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अरुणाचल प्रदेश पर भारत के संप्रभु अधिकारों में कोई कमी नहीं आ सकती और इसे किसी भी कीमत पर बदला नहीं जा सकता। इसके अतिरिक्त, चीन ने शिनजियांग क्षेत्र में ‘सेनलिंग’ नाम से नया काउंटी बनाया है, जिसे 26 मार्च को मंजूरी मिली। यह नया प्रशासनिक गठन कराकोरम क्षेत्र के निकट स्थित है, जो अफगानिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) की सीमा के पास आता है। काउंटी चीन में जिला जैसी प्रशासनिक इकाई होती है। इस कदम को लेकर भारत ने भी चिंता जताई है क्योंकि इससे सीमा क्षेत्रों की स्थिति जटिल हो सकती है। चीन के द्वारा शिनजियांग में यह तीसरा नया काउंटी है जिसको पिछले वर्ष में बनाया गया है, इससे पहले ‘हियान’ और ‘हेकांग’ नये काउंटी बनाए गए थे, जिनमें ‘हियान’ का एक बड़ा हिस्सा अक्साई चिन क्षेत्र में आता है जिसे भारत लद्दाख का अभिन्न हिस्सा मानता है। सेंलिंग काउंटी काशगर क्षेत्र से जुड़ा है, जो प्राचीन व्यापार मार्ग सिल्क रूट का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यह क्षेत्र आज चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का भी हब है, जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से गुजरता है और जिसे भारत अपनी संप्रभुता के उल्लंघन के रूप में देखता है। भारत ने चीन को आगाह किया है कि इस तरह के एकतरफा कदम दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ाने वाले हैं और चीन को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। विदेश मंत्रालय का कहना है कि दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने के वास्ते हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए जिससे क्षेत्रीय स्थिरता बनी रहे। चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने की कोशिशों को भारत ने बार-बार नकारा है और कहा है कि यह उसकी संप्रभुता पर प्रत्यक्ष हमला है। भारत अपने क्षेत्रीय अखंडता के प्रति पूर्ण सतर्क है और किसी भी अवैध अधिकार को स्वीकार नहीं करता।

खबर हटके- बूढ़ी मां के लिए बनाया AI बेटा:युवक ने जलती चिता से सुलगाया हुक्का; लोगों को पसंद आ रहा गोबर का सूप
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खबर हटके- बूढ़ी मां के लिए बना AI बेटा: युवक ने जलती चिता से हुक्का सुलगाया; लोगों को पसंद आ रहा गोबर का सूप

चीन, उत्तर प्रदेश और वियतनाम से संबंधित अनोखी और दिलचस्प खबरें इस बार चर्चा का विषय बनी हैं। आज की ‘खबर हटके’ रिपोर्ट में हम आपको पांच ऐसी खबरें बताएंगे जो न केवल रोचक हैं बल्कि समाज के विविध पहलुओं को भी उजागर करती हैं। सबसे पहले बात करें चीन की, जहां एक बुजुर्ग महिला के लिए उसके मृतक पुत्र का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्वरूप विकसित किया गया है। इस तकनीक के जरिए महिला को अपने बेटे का आभास मिलता है जो न केवल संवाद करता है बल्कि उसकी यादें और भावनाएं भी साझा करता है। इस पहल का मकसद उन बुजुर्गों को अकेलापन कम करना और मानसिक सहारा प्रदान करना है, जिनके परिवार के सदस्य दुनिया से विदा हो चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह नई तकनीक सामाजिक संबंधों और बुजुर्गों की भावनात्मक ज़रूरतों पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। वहीं, उत्तर प्रदेश के एक युवक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह जलती हुई चिता से हुक्का सुलगा रहा है। यह अनूठा और असामान्य तरीका लोगों के बीच चर्चा में है। युवक ने बताया कि यह उसकी निजी परंपरा है, जिससे उसे अपने प्रियजनों की याद सताती है और वह उनके लिए श्रद्धांजलि अर्पित करता है। वीडियो को देखने वाले लोग इसे अलग तरह की श्रद्धांजलि और भावुकता की मिसाल बता रहे हैं। इसके अलावा, वियतनाम में गोबर से बना सूप तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह पारंपरिक और प्राकृतिक खाना न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है बल्कि स्वाद में भी अद्भुत बताया जा रहा है। स्थानीय लोग इसे अपनी सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद के रूप में देख रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, गोबर का उपयोग प्राकृतिक खाद और एंटीसेप्टिक गुणों की वजह से लंबे समय से किया जा रहा है, लेकिन इसका सूप के रूप में अब चलन बढ़ा है। इन तीन खबरों के अतिरिक्त भी आज की खबर हटके रिपोर्ट में ऐसी ही दो और रोमांचक खबरें शामिल हैं, जो समाज की भिन्न-भिन्न परतों को दर्शाती हैं। इस तरह की खबरें हमें सोचने पर मजबूर करती हैं कि विज्ञान, परंपरा और सामाजिक व्यवहार कैसे एक साथ मिलकर हमारी ज़िंदगी को समृद्ध बना सकते हैं। तो ये थी आज की खबर हटके की खास रिपोर्ट। आगे भी हम आपको ऐसी रोचक, अनोखी और समाज को जुड़ने वाली खबरों से अवगत कराते रहेंगे। आपका फीडबैक हमारे लिए महत्वपूर्ण है ताकि हम खबर हटके को बेहतर बना सकें। कृपया अपनी राय और सुझाव देने के लिए <a href=”

हापुड़ में ट्रक-बस की टक्कर, 6 बारातियों की मौत:टकराने के बाद बस पर गिरा, लोग अंदर दबे, गाड़ी काटकर निकाले गए
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हापुड़ में ट्रक और बस की भयानक टक्कर, 6 बारातियों की हुई मौत; ट्रक बस के ऊपर गिरा, लोग फंस गए, बचाव में जुटी पुलिस

यूपी के हापुड़ जिले में रविवार देर रात 1:30 बजे एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ, जिसमें बारातियों से भरी बस और तीव्र रफ्तार ट्रक में जोरदार टक्कर हो गई। इस हादसे में छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और सात अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना धौलाना थाना क्षेत्र के धौलाना-गुलावठी रोड पर हुई, जो जिला मुख्यालय से लगभग 22 किलोमीटर दूर है। जानकारी के मुताबिक, बारात गाजियाबाद के डासना से बुलंदशहर के गुलावठी जा रही थी। वापसी के दौरान बस ग्रामीण इलाके में एक संकरी सड़क पर खड़ी थी। उस वक्त करीब 10-12 लोग बस से नीचे उतरकर चाय-नाश्ता कर रहे थे। अचानक तेज रफ्तार से आ रहे ट्रक ने बस को जोरदार टक्कर मारी। टक्कर लगते ही बस पलट गई और ट्रक भी बेकाबू होकर बस के ऊपर गिर पड़ा। इस कारण बस के परखच्चे उड़ गए और यात्रियों के अंदर दबने की सूचना मिली। चमड़ियों ने चीख-पुकार मच गई, जिससे आसपास के लोग और आसपास के ग्रामीण मौके पर पहले सहायता के लिए दौड़े। उन्होंने पुलिस को इसकी तुरंत जानकारी दी। पुलिस और स्थानीय लोगों ने मिलकर तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। बस के टूटी हुई शीशे तोड़कर कुछ घायलों को बाहर निकाला गया, वहीं कुछ घायलों को बस की बॉडी कटर से काटकर बाहर लाने में सफलता मिली। एसपी ज्ञानंजय सिंह ने बताया कि यह हादसा तेज रफ्तार और पूरी तरह से अंधेरे की वजह से हुआ। पुलिस टीम घटना स्थल पर जल्दी पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को नजदीकी अस्पताल, पिलखुवा स्थित रामा मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। सभी घायलों की हालत स्थिर बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शी चांद कुरैशी ने हादसे का वर्णन करते हुए कहा कि वह भी बारात के साथ दूसरी कार से लौट रहे थे। उन्होंने बताया कि बस रास्ते में खड़ी थी, जिसमें लगभग 20-25 लोग सवार थे। अचानक तेज रफ्तार ट्रक आया और टक्कर मारकर बस पर पलट गया। मृतकों में उनके अपने रिश्तेदार शामिल हैं, जो गाजियाबाद के डासना के निवासी थे। पुलिस ने मृतकों की पहचान यूनुस (50), युसूफ (55), अख्तर (40), सोनू (25), मुन्ना (60) और ट्रक चालक के रूप में की है। घायलों में नदीम (32), नईम (23), जुनेद (24), अय्युब (45), सिराजुद्दीन (35), हसरत (45) और हबीब (45) शामिल हैं। थाना प्रभारी अवनीश शर्मा ने बताया कि प्रारंभ में सभी घायलों को धौलाना सीएचसी पहुंचाया गया। फिर गंभीर घायलों को रामा मेडिकल कॉलेज और जीएस मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। हादसे के कारण आसपास के इलाके में कुछ समय के लिए यातायात बाधित रहा। प्रशासनिक अमला भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रहा है। यह दुखद हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करता है, जहां तेज रफ्तार और अनजान रास्तों पर सावधानी न बरतने के कारण जान गंवानी पड़ती है। पुलिस और प्रशासन सड़क सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू करने पर ज़ोर दे रहे हैं ताकि इस प्रकार के हादसों को रोका जा सके।

BJP ने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया:16-18 अप्रैल तक संसद में मौजूद रहना होगा; महिला आरक्षण के लिए विशेष सत्र; PM ने पत्र लिखा
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BJP ने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया: 16-18 अप्रैल तक संसद में मौजूद रहना अनिवार्य; महिला आरक्षण पर विशेष सत्र; पीएम ने लिखा पत्र

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने रविवार को लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों को तीन लाइन का व्हिप जारी करते हुए 16 से 18 अप्रैल तक संसद में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। इस दौरान किसी प्रकार की छुट्टी की अनुमति नहीं होगी। यह विशेष आदेश महिला आरक्षण के लिए बुलाए गए संसद के विशेष सत्र के मद्देनजर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन का ड्राफ्ट बिल मंजूर किया गया था। इसके तहत संसद के बजट सत्र को बढ़ाकर 16 से 18 अप्रैल तक विशेष सत्र बुलाया जा रहा है। संसद से मंजूरी मिलने पर संबंधित कानून 31 मार्च 2029 से प्रभावी होगा, और उसी वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में पहली बार लागू होगा। विशेष सत्र से पहले शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा और राज्यसभा के सभी दलों के फ्लोर लीडर्स को पत्र लिखकर इस अधिनियम पर समर्थन मांगा। उन्होंने पत्र में लिखा कि महिलाओं के लिए आरक्षण को विस्तार देना अब समय की मांग है, ताकि देश में महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़े। प्रधानमंत्री ने सभी दलों से आग्रह किया कि वे इस महत्वपूर्ण कानून का समर्थन करें और इसे सही मायनों में लागू करने में मदद करें। दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री के पत्र का जवाब देते हुए कहा कि राज्य चुनावों के बीच विशेष सत्र बुलाना सरकार की जल्दबाजी को दर्शाता है, जो राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है। खड़गे ने मांग की कि महिला आरक्षण अधिनियम पर विस्तार से चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए ताकि सभी पक्ष अपने सुझाव रख सकें। महिला आरक्षण कानून के अंतर्गत प्रस्ताव है कि लोकसभा की सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 किया जाएगा, जिसमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसके अलावा एक संशोधन विधेयक के साथ परिसीमन कानून में भी संशोधन के लिए अलग विधेयक लाया जाएगा, ताकि नए सिरे से सीटों के निर्धारण का कार्य सम्पन्न हो सके। नई सीटों का निर्धारण 2027 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा। यह कानून राज्यों की विधानसभाओं के साथ-साथ दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू होगा। कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर ने इस विधेयक और परिसीमन प्रक्रिया में जल्दबाजी के खिलाफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण कानून को राजनीतिक हथियार नहीं बनाना चाहिए और इससे संघवाद या संसद की गरिमा को धक्का नहीं पहुंचाना चाहिए। थरूर ने सभी पार्टियों से आग्रह किया है कि वे इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर बेहतर संवाद और संतुलित निर्णय लें। इस पहल का उद्देश्य भारत में महिलाओं के राजनीतिक अधिकार और भागीदारी को मजबूत करना है। देश भर के मतदाताओं और सांसदों की अपेक्षाएं हैं कि यह कानून महिलाओं के लिए नई संभावनाएं खोलेगा और लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक समावेशी बनाएगा। आने वाले दिनों में संसद के विशेष सत्र में इस कानून पर व्यापक चर्चा और बहस होगी, जो देश के लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा।

उमा भारती के लिए चेन पुलिंग कर पंजाब मेल रोकी:झांसी में 5 मिनट खड़ी रही; रेलवे बोला- ट्रेन समय पर थी, पूर्व CM ने कहा- पहले छूटी
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उमा भारती के लिए चेन पुलिंग कर पंजाब मेल को रोका गया, झांसी में ट्रेन 5 मिनट तक रुकी

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के लिए रविवार को झांसी रेलवे स्टेशन पर पंजाब मेल ट्रेन को चेन पुलिंग के जरिए रोकना पड़ा। उमा भारती जब प्लेटफॉर्म पहुंचीं, तो नई दिल्ली जाने वाली पंजाब मेल पहले ही आधा प्लेटफॉर्म छोड़ चुकी थी। उनकी यात्रा को लेकर उनके समर्थकों ने तुरंत चेन पुलिंग की, जिससे ट्रेन को करीब पांच मिनट तक रुका रहना पड़ा। इस दौरान ट्रेन का फर्स्ट एसी कोच A-1 यार्ड में पहुंच चुका था, इसलिए उमा भारती B-1 कोच में सवार हुईं। इस घटना के बाद पूर्व मुख्यमंत्री का कहना था कि ट्रेन निर्धारित समय से पहले ही चल पड़ी थी, जो रेलवे की अव्यवस्था का प्रमाण है। उन्होंने कहा, “आज जो मेरे साथ हुआ, वो आम यात्रियों के साथ भी अक्सर होता है। खासकर मथुरा, झांसी और ललितपुर स्टेशन पर ऐसी दिक्कतें अधिक होती हैं। वरिष्ठ नागरिक, महिलाओं और दिव्यांगों के लिए ये स्थिति और कठिनाई पैदा करती है।” उमा भारती का दावा: ट्रेन समय से पहले रवाना हुई उमा भारती ने बताया कि वे दोपहर 2:18 बजे झांसी स्टेशन पर पहुंच गई थीं, जबकि उनकी ट्रेन 2:23 बजे रवाना होनी थी। वे एस्केलेटर से प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रही थीं, मगर रेलवे अधिकारियों ने उन्हें ई-कार्ट इस्तेमाल करने के लिए कहा। जब ई-कार्ट ट्रैक के सामने पहुंचा, तो एक ट्रेन गुजरने के कारण उन्हें पांच मिनट तक वहीं ठहरना पड़ा। इसके बाद उन्होंने हाथ ठेला लिया, जिससे वे देर हो गईं और ट्रेन छूट गई। रेल मंत्री को लिखे पत्र में रेलवे व्यवस्था पर उठाए सवाल इस घटना को लेकर उमा भारती ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने रेलवे की संवेदनशीलता की कमी पर चिंता जताई और कहा कि मथुरा जैसे स्टेशनों पर भी यात्रियों के लिए सुविधाओं की सही व्यवस्था नहीं है। उन्होंने झांसी रेलवे स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग की। उन्होंने कहा, “मैं ट्रेन आने से पहले आई थी, लेकिन ट्रेन समय से पहले आई और चली गई। मंच के बीच में चल रही व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत है।” उन्होंने यह भी बताया कि जब वे प्लेटफॉर्म के 1 नंबर से 4 नंबर की ओर जा रही थीं, तो ट्रैक पर लंबी गाड़ी चल रही थी, जिसके कारण इंतजार करना पड़ा। बाद में हाथ ठेला ट्रैक में फंसा था, जिसके निकाले जाने में भी समय लगा। ट्रेन अपने निर्धारित समय से पहले पहुंचने और पहले छूटने के कारण ये परेशानी उत्पन्न हुई। रेलवे का पक्ष और जांच मंडल रेल प्रबंधक अनिरुद्ध कुमार ने बताया कि चेन पुलिंग उमा भारती के समर्थकों ने नहीं बल्कि अन्य यात्रियों ने की थी। उन्होंने कहा कि रेलवे के सिस्टम में ट्रेन निर्धारित समय से पहले प्लेटफॉर्म छोड़ने की व्यवस्था नहीं होती है। हालांकि, ट्रेन निर्धारित समय से पहले प्लेटफॉर्म पर पहुंच जाती है। रेलवे इस घटना की जांच कर रहा है ताकि पता चल सके कि ट्रेन टाइम से पहले रवाना हुई या नहीं। यात्रियों के लिए जरूरी सुधार उमा भारती ने इस घटना का हवाला देते हुए रेलवे अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे ऐसे घटनाओं को गंभीरता से लें और यात्रियों की सुविधाओं में सुधार करें। उन्होंने कहा, “मेरे साथ जो हुआ, वह आम जनता के लिए एक चेतावनी है। महिलाएं, बुजुर्ग, दिव्यांग और बच्चे लिए लोग रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा चाहते हैं। रनवे की प्रणाली में ऐसे बदलाव जरूरी हैं कि कोई यात्री ऐसी परेशानी का शिकार न हो।” यह पूरी घटना रेलवे स्टेशन पर बेहतर प्रबंधन और समन्वय की जरूरत को दर्शाती है ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थिति न उत्पन्न हो और यात्रियों को सुविधा समय के अनुसार मिल सके।

कांग्रेस बोली-सरकार जाति जनगणना को ठंडे बस्ते में डालना चाहती:जयराम रमेश ने कहा- महिला आरक्षण में बदलाव से देश को गुमराह किया जा रहा
राजनीति

जाति जनगणना पर सियासत तेज: कांग्रेस का आरोप—सरकार टाल रही है फैसला, महिला आरक्षण पर भी उठे सवाल

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार जाति जनगणना को ठंडे बस्ते में डालना चाहती है और महिला आरक्षण कानून में होने वाले बदलाव के जरिए देश को गुमराह कर रही है। उन्होंने यह बातें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने आधिकारिक पेज से कही। जय राम रमेश ने कहा कि सरकार अनुच्छेद 334-A में संशोधन करने की तैयारी में है, जिसका वे औचित्य यह दे रही है कि जाति जनगणना के नतीजे आने में समय लगेगा। लेकिन उन्होंने इस तर्क को खारिज करते हुए बताया कि बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने छह महीने से कम समय में जाति सर्वेक्षण पूरा किया है, इसलिए यह कोई बड़ा बहाना नहीं बन सकता। उन्होंने इसे सरकार के छिपे हुए एजेंडे के रूप में बताया और आरोप लगाया कि असल मकसद जाति जनगणना को रोकना है। अनुच्छेद 334-A महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने को जाति जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया है। जयराम रमेश का मानना है कि सरकार इसे अलग करने का प्रयास कर रही है ताकि महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू किया जा सके, लेकिन इस प्रक्रिया में देश को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने इस मुद्दे पर चार मुख्य सवाल भी उठाए हैं, जिनमें महिला आरक्षण बिल की प्रक्रिया तथा इससे जुड़ी जनगणना की भूमिका को लेकर शंका व्यक्त की गई है। महिला आरक्षण बिल के लिए प्रस्तावित विशेष सत्र जयराम रमेश के बयान ऐसे समय में सामने आए हैं जब 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद का विशेष सत्र प्रस्तावित है। इस सत्र में महिला आरक्षण कानून लागू करने और लोकसभा की सीटों में वृद्धि से संबंधित बिल पेश किए जाने की संभावना है। यदि संसद से अनुमति मिल जाती है, तो यह कानून 31 मार्च 2029 से लागू होगा और उसी वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में पहली बार प्रभावी होगा। जनगणना 2027 का पहला चरण शुरू जनगणना 2027 का पहला फेज 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है, जो 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस फेज में ‘हाउस लिस्टिंग’ यानी मकान गिनती कराई जा रही है। दूसरा चरण, जिसमें जनसंख्या गणना और जाति संबंधी प्रश्न शामिल हैं, फरवरी 2027 में किया जाएगा। यह पहली बार होगा जब स्वतंत्रता के बाद जाति का डेटा संकलित किया जाएगा, आखिरी बार ऐसा 1931 में हुआ था। जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से होगी, जिसमें कर्मचारी मोबाइल ऐप के जरिए स्मार्टफोन से ही डेटा संग्रह करेंगे। आंकड़े जुटाने के लिए कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे। महिला आरक्षण और भाजपा का सख्त रुख 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद के विशेष सत्र के लिए भाजपा ने अपने सभी सांसदों को कड़ाई से 3-लाइन व्हिप जारी किया है, जिसमें इस दौरान संसद में उपस्थित रहने को आवश्यक बताया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हाल ही में सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दी है जो महिला आरक्षण की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। कांग्रेस के नेता जयराम रमेश के बयान केंद्र सरकार की नीति और आगामी जनगणना तथा महिला आरक्षण कानून के बीच संबंध को लेकर चर्चा को और गहरा कर देंगे। आगामी संसद सत्र में इस विषय पर कई राजनीतिक और सामाजिक बहसें देखने को मिल सकती हैं, जो भारत के सामाजिक न्याय और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकती हैं।

Untested TVK adding suspense to the script of Tamil Nadu thriller this time
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अनटेस्टेड TVK इस बार तमिलनाडु थ्रिलर की स्क्रिप्ट में बढ़ा रहे है सस्पेंस

अनटेस्टेड TVK इस बार तमिलनाडु के थ्रिलर स्क्रिप्ट में नयापन और सस्पेंस लेकर आए हैं। फिल्म जगत में अपनी पहचान बनाने वाले TVK का यह नया अवतार दर्शकों के लिए रोमांचक अनुभव साबित होगा। उम्मीद है कि उनकी प्रस्तुति कहानी की गहराई को बढ़ाएगी और दर्शकों को बांधे रखेगी। विजय की नई पार्टी ने डाला राजनीतिक क्षेत्र में नया रंग तमिलनाडु में फिल्म अभिनेता विजय की नई राजनीतिक पार्टी दो साल पहले शुरू हुई और अब वह अपनी पहली चुनावी परीक्षा दे रही है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस पार्टी का प्रदर्शन विजयकांत की डीएमडीके की शुरुआत से काफी मिलता-जुलता हो सकता है। उनके अनुसार, पार्टी को आठ से दस प्रतिशत वोट शेयर मिलने की संभावना है। हालांकि कुछ समीक्षक कहते हैं कि सिर्फ फिल्मी लोकप्रियता से राजनैतिक सफलता को सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। स्थायी राजनीतिक असर के लिए मजबूत संगठन, स्पष्ट नीतियाँ और जनसंपर्क की जरूरत होती है। ऐसे में विजय की पार्टी को इन चुनौतियों का सामना करना होगा। राजनीतिक विश्लेषक यह भी बताते हैं कि तमिलनाडु में फिल्म अभिनेता ही अक्सर राजनीतिक मैदान में उतरते हैं, लेकिन सफल होने के लिए उन्हें जनता के मुद्दों को गहराई से समझना जरूरी होता है। विजय की पार्टी चुनाव के दौरान किस तरह रणनीति अपनाएगी, यह देखना दिलचस्प होगा। अभी तक प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, विजय की पार्टी ने मजबूत प्रचार अभियान शुरू किया है और युवाओं तथा फिल्म प्रेमियों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश की जा रही है। यह देखना बाकी है कि क्या यह प्रयास उन्हें चुनावी सफलता दिलाएगा या नहीं। इस चुनावी दौर में तमिलनाडु की राजनीति में नई पार्टियों की एंट्री से मुकाबला और भी रोमांचक और गतिशील हो गया है। विजय के राजनीतिक सफर पर सभी की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि आने वाले चुनावों में यह तय होगा कि नई पार्टी कितनी मजबूत होती है और राजनैतिक परिदृश्य में अपनी पकड़ बना पाती है या नहीं।

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