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साइकिल क्रांति, सिरोही बना प्रेरणा केंद्र, प्रशासन ने दिया ऊर्जा संरक्षण का संदेश

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ऊर्जा संरक्षण, फिट इंडिया और पर्यावरण सुरक्षा को मिला जन आंदोलन का स्वरूप
 प्रशासनिक अधिकारियों की अनूठी पहल बनी बदलाव की मिसाल, आमजन और युवाओं में जागी नई जागरूकता

सिरोही। बदलते वैश्विक हालात और बढ़ती ऊर्जा चुनौतियों के बीच सिरोही जिला प्रशासन ने एक सकारात्मक और प्रेरणादायक पहल करते हुए समाज के सामने जिम्मेदार नागरिकता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ईंधन एवं संसाधनों की बचत के आह्वान को धरातल पर उतारते हुए शुक्रवार को जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर के नेतृत्व में विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी और कर्मचारी साइकिल से अपने कार्यालय पहुंचे। इस अनूठी पहल ने न केवल ऊर्जा संरक्षण का संदेश दिया, बल्कि पर्यावरण सुरक्षा, स्वस्थ जीवनशैली और सामूहिक जिम्मेदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी नई दिशा प्रदान की। सुबह शहर की सडक़ों पर जब प्रशासनिक अधिकारी साइकिल चलाते हुए अपने कार्यालयों की ओर बढ़े तो यह दृश्य आमजन के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया। जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर के साथ मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रकाशचंद अग्रवाल, तहसीलदार जगदीश विश्नोई, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त निदेशक गोविंद चौधरी सहित कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने साइकिल के माध्यम से कार्यालय पहुंचकर यह संदेश दिया कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं। इस पहल को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसे जनभागीदारी और सामाजिक जागरूकता से जोडऩे का प्रयास किया गया। अधिकारियों ने आम नागरिकों से भी सप्ताह में कम से कम एक दिन साइकिल या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपील की। उनका मानना है कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में थोड़ी-सी ऊर्जा बचत को आदत बना ले, तो देश स्तर पर इसका व्यापक सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।
ऊर्जा संरक्षण आर्थिक आवश्यकता ही नहीं बल्कि सामाजिक व पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी
जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने कहा कि वर्तमान समय में ऊर्जा संरक्षण केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी है। उन्होंने बताया कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें हमें वैकल्पिक और जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा देती हैं। साइकिल का उपयोग न केवल ईंधन बचाता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। नियमित साइकिल चलाने से शरीर स्वस्थ रहता है, प्रदूषण कम होता है और ट्रैफिक दबाव में भी कमी आती है।
उन्होंने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि यदि संभव हो तो सप्ताह में कम से कम एक दिन निजी वाहन का उपयोग न करें। छोटी दूरी के लिए साइकिल अपनाएं या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि आने वाली पीढिय़ों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण तैयार करने में भी मदद मिलेगी।
इस पहल के दौरान शहरवासियों ने भी प्रशासन के इस प्रयास की सराहना की। कई लोगों ने इसे सकारात्मक बदलाव की शुरुआत बताते हुए कहा कि जब प्रशासन स्वयं आगे बढक़र उदाहरण प्रस्तुत करता है, तब समाज में जागरूकता स्वत: बढ़ती है। युवाओं ने भी इस अभियान को फिटनेस और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए इसे नियमित रूप से अपनाने की बात कही। साइकिल संस्कृति को बढ़ावा देने से शहरी जीवन में कई सकारात्मक परिवर्तन संभव हैं। इससे वायु प्रदूषण में कमी आती है, ईंधन पर निर्भरता घटती है और नागरिकों का स्वास्थ्य बेहतर होता है। विकसित देशों में साइकिल आधारित परिवहन को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है और अब भारत के विभिन्न शहरों में भी इस दिशा में जागरूकता बढ़ रही है। सिरोही प्रशासन की यह पहल उसी सोच को मजबूत करने वाली मानी जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के प्रयास भविष्य में भी जारी रहेंगे और इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में कार्य किया जाएगा। विद्यालयों, महाविद्यालयों और सामाजिक संगठनों को भी इस अभियान से जोडऩे की योजना बनाई जा रही है ताकि युवाओं में ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूकता विकसित हो सके। वर्तमान समय में जब पूरी दुनिया ऊर्जा संकट और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब सिरोही प्रशासन का यह कदम एक सकारात्मक संदेश लेकर सामने आया है। यह पहल बताती है कि समाधान केवल बड़े स्तर की योजनाओं में ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की छोटी आदतों और सामूहिक प्रयासों में भी छिपा होता है।उल्लेखनीय है कि हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई है। सिरोही जिला मुख्यालय पर पेट्रोल के दाम बढक़र 109.32 रुपए प्रति लीटर और डीजल 94.42 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया है। ऐसे समय में ईंधन बचत को लेकर प्रशासन द्वारा शुरू किया गया यह संदेश आमजन को आर्थिक रूप से राहत देने के साथ-साथ संसाधनों के संतुलित उपयोग की दिशा में भी प्रेरित कर रहा है।

 

Kamlesh Purohit
Kamlesh Purohit
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