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अर्बुदा गौशाला विकास को लेकर जिला कलेक्टर ने दिए अहम निर्देश

संचालन समिति पुनर्गठन, नंदीशाला स्थापना और पौधारोपण पर विशेष जोर सिरोही, 27 मई। जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर की अध्यक्षता में बुधवार को अर्बुदा गौशाला एवं डेयरी फार्म, सिरोही में बैठक आयोजित की गई, जिसमें संबंधित सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में गौशाला के विकास, व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण तथा भविष्य की कार्ययोजना को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। गौशाला संचालक रघुनाथ सिंह ने अर्बुदा गौशाला एवं डेयरी फार्म की गतिविधियों एवं व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। इस दौरान जिला कलेक्टर ने संचालन समिति में आवश्यक बदलाव एवं कार्यकारी सदस्यों के पुनर्गठन के साथ सुव्यवस्थित स्ट्रक्चर तैयार करने हेतु कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने गौशाला में दान एवं सहयोग बढ़ाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने, ऑडिट करवाने तथा पंचायत समिति स्तर पर नंदीशाला खोलने के लिए संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग को निविदा प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश प्रदान किए। जिला कलेक्टर ने तहसीलदार को त्रैमासिक बैठक आयोजित करने के निर्देश देते हुए कहा कि गौशाला में धन संग्रह के लिए गौपालकों को प्रेरित किया जाए। साथ ही सफाई व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने तथा अधिक से अधिक पौधारोपण करने पर भी जोर दिया। बैठक के दौरान गौशाला से संबंधित विभिन्न समस्याओं एवं आवश्यक कार्यों से जिला कलेक्टर को अवगत कराया गया, जिस पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। बैठक के अंत में गौशाला संचालक एवं संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग ने सभी समिति सदस्यों का आभार व्यक्त किया। इससे पूर्व जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने गौशाला परिसर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने गौपूजन कर गौवंश की देखभाल, चारा-पानी एवं अन्य सुविधाओं की जानकारी भी प्राप्त की। बैठक में गोविंद वल्लभदास, एसडीएम हरिसिंह देवल, तहसीलदार जगदीश विश्नोई, बीडीओ मंछाराम, डॉ. मुकेश चौधरी, रघुनाथ सिंह राजपुरोहित, धनराज चौधरी, रघु भाई माली, नरेंद्र सिंह, भूराराम पुरोहित, ब्रह्मदत्त पुरोहित नाररवाड़ा, कमलेश माली, प्रवीण माली, किशन जनापुर, प्रमोद जानी, रमेश सिंह, अशोक पुरोहित आदर्श सहित अन्य मौजूद रहे।

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डीएलएसए सचिव ने किया वन स्टॉप सेंटर का आकस्मिक निरीक्षण

व्यवस्थाएं संतोषजनक मिलीं, बालिका की चिकित्सीय जांच के दिए निर्देश सिरोही। सदस्य सचिव, राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के आदेशानुसार एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सिरोही के निर्देशानुसार श्रीमती सवित्री आनंद निर्भीक, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सिरोही द्वारा मंगलवार को वन स्टॉप सेंटर, सिरोही का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने केंद्र पर उपलब्ध व्यवस्थाओं, अभिलेखों, सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता एवं लाभार्थियों को प्रदान की जा रही सुविधाओं का गहन अवलोकन एवं जांच की। निरीक्षण के समय केंद्र की समस्त व्यवस्थाएं संतोषजनक एवं सुव्यवस्थित पाई गईं। इस दौरान केंद्र पर एक बालिका भी उपस्थित पाई गई। मामले को गंभीरता एवं संवेदनशीलता से लेते हुए सचिव श्रीमती सवित्री आनंद निर्भीक ने संबंधित अधिकारियों को बालिका की आवश्यक चिकित्सीय जांच एवं अन्य जरूरी मेडिकल टेस्ट शीघ्र करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बालिका को समय पर समुचित उपचार एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए। सचिव ने अधिकारियों से कहा कि वन स्टॉप सेंटर में आने वाली प्रत्येक पीडि़ता एवं जरूरतमंद महिला/बालिका को संवेदनशीलता के साथ सहायता उपलब्ध कराई जाए तथा उनकी सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी भी ली तथा रिकॉर्ड संधारण एवं कार्यप्रणाली की सराहना की। निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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साइकिल क्रांति, सिरोही बना प्रेरणा केंद्र, प्रशासन ने दिया ऊर्जा संरक्षण का संदेश

ऊर्जा संरक्षण, फिट इंडिया और पर्यावरण सुरक्षा को मिला जन आंदोलन का स्वरूप  प्रशासनिक अधिकारियों की अनूठी पहल बनी बदलाव की मिसाल, आमजन और युवाओं में जागी नई जागरूकता सिरोही। बदलते वैश्विक हालात और बढ़ती ऊर्जा चुनौतियों के बीच सिरोही जिला प्रशासन ने एक सकारात्मक और प्रेरणादायक पहल करते हुए समाज के सामने जिम्मेदार नागरिकता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ईंधन एवं संसाधनों की बचत के आह्वान को धरातल पर उतारते हुए शुक्रवार को जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर के नेतृत्व में विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी और कर्मचारी साइकिल से अपने कार्यालय पहुंचे। इस अनूठी पहल ने न केवल ऊर्जा संरक्षण का संदेश दिया, बल्कि पर्यावरण सुरक्षा, स्वस्थ जीवनशैली और सामूहिक जिम्मेदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी नई दिशा प्रदान की। सुबह शहर की सडक़ों पर जब प्रशासनिक अधिकारी साइकिल चलाते हुए अपने कार्यालयों की ओर बढ़े तो यह दृश्य आमजन के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया। जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर के साथ मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रकाशचंद अग्रवाल, तहसीलदार जगदीश विश्नोई, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त निदेशक गोविंद चौधरी सहित कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने साइकिल के माध्यम से कार्यालय पहुंचकर यह संदेश दिया कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं। इस पहल को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसे जनभागीदारी और सामाजिक जागरूकता से जोडऩे का प्रयास किया गया। अधिकारियों ने आम नागरिकों से भी सप्ताह में कम से कम एक दिन साइकिल या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपील की। उनका मानना है कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में थोड़ी-सी ऊर्जा बचत को आदत बना ले, तो देश स्तर पर इसका व्यापक सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। ऊर्जा संरक्षण आर्थिक आवश्यकता ही नहीं बल्कि सामाजिक व पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने कहा कि वर्तमान समय में ऊर्जा संरक्षण केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी है। उन्होंने बताया कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें हमें वैकल्पिक और जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा देती हैं। साइकिल का उपयोग न केवल ईंधन बचाता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। नियमित साइकिल चलाने से शरीर स्वस्थ रहता है, प्रदूषण कम होता है और ट्रैफिक दबाव में भी कमी आती है। उन्होंने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि यदि संभव हो तो सप्ताह में कम से कम एक दिन निजी वाहन का उपयोग न करें। छोटी दूरी के लिए साइकिल अपनाएं या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि आने वाली पीढिय़ों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण तैयार करने में भी मदद मिलेगी। इस पहल के दौरान शहरवासियों ने भी प्रशासन के इस प्रयास की सराहना की। कई लोगों ने इसे सकारात्मक बदलाव की शुरुआत बताते हुए कहा कि जब प्रशासन स्वयं आगे बढक़र उदाहरण प्रस्तुत करता है, तब समाज में जागरूकता स्वत: बढ़ती है। युवाओं ने भी इस अभियान को फिटनेस और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए इसे नियमित रूप से अपनाने की बात कही। साइकिल संस्कृति को बढ़ावा देने से शहरी जीवन में कई सकारात्मक परिवर्तन संभव हैं। इससे वायु प्रदूषण में कमी आती है, ईंधन पर निर्भरता घटती है और नागरिकों का स्वास्थ्य बेहतर होता है। विकसित देशों में साइकिल आधारित परिवहन को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है और अब भारत के विभिन्न शहरों में भी इस दिशा में जागरूकता बढ़ रही है। सिरोही प्रशासन की यह पहल उसी सोच को मजबूत करने वाली मानी जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के प्रयास भविष्य में भी जारी रहेंगे और इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में कार्य किया जाएगा। विद्यालयों, महाविद्यालयों और सामाजिक संगठनों को भी इस अभियान से जोडऩे की योजना बनाई जा रही है ताकि युवाओं में ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूकता विकसित हो सके। वर्तमान समय में जब पूरी दुनिया ऊर्जा संकट और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब सिरोही प्रशासन का यह कदम एक सकारात्मक संदेश लेकर सामने आया है। यह पहल बताती है कि समाधान केवल बड़े स्तर की योजनाओं में ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की छोटी आदतों और सामूहिक प्रयासों में भी छिपा होता है।उल्लेखनीय है कि हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई है। सिरोही जिला मुख्यालय पर पेट्रोल के दाम बढक़र 109.32 रुपए प्रति लीटर और डीजल 94.42 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया है। ऐसे समय में ईंधन बचत को लेकर प्रशासन द्वारा शुरू किया गया यह संदेश आमजन को आर्थिक रूप से राहत देने के साथ-साथ संसाधनों के संतुलित उपयोग की दिशा में भी प्रेरित कर रहा है।  

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सिरोही कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर को मिला एक्सीलेंस पुरस्कार

लखपति दीदी योजना में उत्कृष्ट कार्य के लिए राज्य स्तर पर हुआ सम्मान सिरोही। लोक सेवा दिवस के अवसर पर जयपुर में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में सिरोही जिला कलेक्टर रोहिताश्वसिंह तोमर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास के हाथों सीएम एक्सीलेंस पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें फ्लैगशिप योजनाओं की श्रेणी में बारां जिले में पदस्थापन के दौरान लखपति दीदी योजना के तहत किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए प्रदान किया गया। यह उपलब्धि न केवल सिरोही जिले के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे राज्य प्रशासनिक तंत्र के लिए प्रेरणादायक उदाहरण भी बनकर उभरी है। तोमर के नेतृत्व में बारां जिले में ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में जो बदलाव देखने को मिला, उसने इस योजना को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। लखपति दीदी योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोडऩे की सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, ताकि वे अपनी आय बढ़ाकर सालाना एक लाख रुपए या उससे अधिक कमा सकें। योजना की प्रारंभिक अवस्था को चरम तक पहुंचाया बारां जिले में जब रोहिताश्वसिंह तोमर ने पदभार संभाला, तब यह योजना प्रारंभिक अवस्था में थी। कई समूह सक्रिय नहीं थे और महिलाओं को योजना के लाभों की पूरी जानकारी भी नहीं थी। ऐसे में तोमर ने इसे मिशन मोड में लागू करते हुए व्यापक बदलाव की शुरुआत की। तोमर के नेतृत्व में प्रशासन ने गांव-गांव जाकर महिलाओं को योजना से जोडऩे का अभियान चलाया। उन्होंने केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर जाकर समूहों की समस्याओं को समझा और उनका समाधान किया। अधिकारियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से घर-घर जाकर महिलाओं को योजना के बारे में जानकारी दी गई। महिलाओं को सिलाई, बुनाई, डेयरी, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प आदि क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया गया। बैंकिंग और वित्तीय समावेशन स्वयं सहायता समूहों को बैंक से जोडक़र उन्हें आसान ऋण सुविधा उपलब्ध कराई गई। महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों को स्थानीय और ऑनलाइन बाजारों से जोडऩे के प्रयास किए गए, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई। तोमर के प्रयासों का सबसे बड़ा प्रभाव महिलाओं की आय में वृद्धि के रूप में सामने आया। कई महिलाएं, जो पहले आर्थिक रूप से निर्भर थीं, आज स्वयं अपने परिवार की आय का प्रमुख स्रोत बन चुकी हैं। बारां जिले में हजारों महिलाओं ने इस योजना के माध्यम से अपनी आय को बढ़ाकर लखपति दीदी बनने का लक्ष्य हासिल किया। इससे न केवल उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ, बल्कि समाज में उनकी स्थिति भी मजबूत हुई। सामाजिक बदलाव की मिसाल बना बारां मॉडल बारां जिले में लागू किया गया यह मॉडल केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी कारण बना। परिवारों में निर्णय लेने की क्षमता में उनकी भागीदारी बढ़ी बेटियों की शिक्षा पर जोर बढ़ा। यह मॉडल अब अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बन चुका है और राज्य स्तर पर इसे अपनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। तोमर ने इस योजना को सफल बनाने के लिए केवल प्रशासनिक मशीनरी पर निर्भर नहीं रहे, बल्कि स्थानीय समुदाय, स्वयंसेवी संस्थाओं और बैंकिंग संस्थानों को भी साथ जोड़ा। पुरस्कार प्रदान करते समय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने रोहिताश्व सिंह तोमर के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के नवाचार और समर्पण से ही सरकारी योजनाएं वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचती हैं। उन्होंने कहा कि बारां में किया गया कार्य अन्य जिलों के लिए मार्गदर्शक है और इससे राज्य की विकास यात्रा को नई दिशा मिलेगी। वर्तमान में सिरोही के जिला कलेक्टर के रूप में कार्यरत तोमर की इस उपलब्धि से जिले के प्रशासनिक अधिकारियों और नागरिकों में खुशी की लहर है। सिरोही के लोगों का मानना है कि जिस प्रकार उन्होंने बारां में उत्कृष्ट कार्य किया, उसी तरह वे यहां भी विकास की नई इबारत लिखेंगे। रोहिताश्व सिंह तोमर की कार्यशैली युवा प्रशासनिक अधिकारियों के लिए प्रेरणा बन रही है। उनका फोकस हमेशा परिणामों पर रहता है और वे हर योजना को आम जनता तक पहुंचाने के लिए नवाचार करने से पीछे नहीं हटते। उनकी यह उपलब्धि यह दर्शाती है कि यदि इच्छाशक्ति और समर्पण हो, तो सरकारी योजनाओं के माध्यम से समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। लखपति दीदी योजना की सफलता के बाद अब राज्य सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों को और अधिक मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। आने वाले समय में इन समूहों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोडऩे, ई-कॉमर्स के माध्यम से उत्पादों की बिक्री बढ़ाने और नई तकनीकों का उपयोग करने पर जोर दिया जाएगा। एक अधिकारी, जिसने बदल दी हजारों जिंदगियां रोहिताश्व सिंह तोमर को मिला सीएम एक्सीलेंस पुरस्कार केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उन हजारों महिलाओं की मेहनत और संघर्ष की भी पहचान है, जिनके जीवन में इस योजना के माध्यम से सकारात्मक बदलाव आया है। बारां जिले में उनके द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों ने यह साबित कर दिया है कि सही नेतृत्व और प्रभावी क्रियान्वयन से सरकारी योजनाएं वास्तव में समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकती हैं।

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602 वें स्थापना दिवस पर सूना रहा सिरोही, प्रशासन की बेरुखी से आहत हुए शहरवासी

 इतिहास का सम्मान होना चाहिए था, वहां पसरी रही खामोशी सिरोही। सिरोही के 602वें स्थापना दिवस जैसे गौरवशाली, पावन और ऐतिहासिक अवसर पर इस बार प्रशासनिक स्तर पर कोई विशेष आयोजन नहीं होना शहरवासियों के लिए गहरी निराशा का कारण बना। जिस दिन पूरे नगर को अपनी समृद्ध विरासत, संस्कृति और इतिहास का उत्सव मनाते हुए एकजुट होना चाहिए था, उसी दिन जिम्मेदार तंत्र की चुप्पी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। स्थापना दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि शहर की पहचान, उसके गौरवशाली अतीत और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक होता है। ऐसे महत्वपूर्ण अवसर पर प्रशासन की निष्क्रियता ने यह संदेश दिया कि शायद अब परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के प्रति संवेदनशीलता कम होती जा रही है। शहर के बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, हर वर्ग में इस बात को लेकर नाराजगी और मायूसी साफ तौर पर देखी गई। चौधरी लाइन के नागरिकों ने निभाई परंपरा जब प्रशासनिक तंत्र मौन रहा, तब सिरोही की जागरूक जनता ने अपनी जिम्मेदारी निभाई। चौधरी लाइन क्षेत्र के परिवारों, व्यापारियों एवं आसपास के नागरिकों ने इस ऐतिहासिक दिन को यूं ही गुजरने नहीं दिया। शाम को शीशाजी मंदिर प्रांगण में एकत्रित होकर उन्होंने आरती का आयोजन किया और शहर की सुख-समृद्धि, शांति और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। यह आयोजन इस बात का सशक्त उदाहरण बना कि सिरोही की जनता आज भी अपने संस्कारों, परंपराओं और इतिहास से गहराई से जुड़ी हुई है। लोगों ने कहा कि चाहे प्रशासन साथ दे या न दे, लेकिन शहर की अस्मिता और परंपरा को जीवित रखना हर नागरिक का कर्तव्य है। यही कारण है कि सीमित संसाधनों के बावजूद नागरिकों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस आयोजन को सफल बनाया। दो वर्ष पहले था उत्साह, अब उदासीनता? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दो वर्ष पूर्व जब संयम विधायक थे, तब सिरोही स्थापना दिवस बड़े उत्साह, उल्लास और गरिमा के साथ मनाया जाता था। उस समय प्रशासन और जनप्रतिनिधि दोनों मिलकर इस दिन को यादगार बनाते थे। विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, सामाजिक आयोजन और शहर की विरासत को प्रदर्शित करने वाली गतिविधियां आयोजित की जाती थीं, जिससे लोगों में गर्व और उत्साह का माहौल बनता था। लेकिन पिछले दो वर्षों से स्थिति पूरी तरह बदलती नजर आ रही है। अब यह गौरवमयी दिवस उपेक्षा का शिकार होता दिख रहा है। न तो प्रशासन की ओर से कोई पहल दिखाई देती है और न ही जनप्रतिनिधियों की सक्रियता नजर आती है। इस बदलाव ने शहरवासियों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर उनकी भावनाओं और शहर की परंपराओं के प्रति जिम्मेदार लोगों की संवेदनाएं कहां खो गई हैं? आस्था और इतिहास का केंद्र शीशाजी मंदिर सिरोही नगर की स्थापना के इतिहास में शीशाजी मंदिर का विशेष महत्व है। मान्यता है कि जब सिरोही नगर की स्थापना का संकल्प लिया गया था, तब सर्वप्रथम इसी पवित्र मंदिर की स्थापना की गई थी। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सिरोही की आस्था, संस्कृति, समृद्ध परंपरा और गौरवशाली इतिहास का मूल आधार एवं प्रेरणास्रोत है। स्थापना दिवस जैसे अवसर पर इस मंदिर में आयोजन होना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह शहर की जड़ों से जुडऩे और अपनी पहचान को सहेजने का भी माध्यम है। शाम 7.30 बजे हुई आरती, गूंजे श्रद्धा के स्वर स्थापना दिवस के अवसर पर शाम साढे सात बजे श्री शीशाजी मंदिर, चौधरी लाइन, सदर बाजार में भव्य आरती का आयोजन किया गया। आरती के दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। दीपों की रोशनी, मंत्रोच्चार और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को अत्यंत भावनात्मक और प्रेरणादायक बना दिया। शहरवासियों ने एक स्वर में सिरोही की सुख-शांति, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की। यह दृश्य इस बात का प्रतीक था कि चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों, लेकिन सिरोही की जनता अपने शहर के प्रति प्रेम और समर्पण में कभी कमी नहीं आने देगी। इनकी रही मौजूदगी इस आयोजन में क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। वरिष्ठजनों में किशोर चौधरी, जयंतीलाल , व्यापारी वर्ग से राजू भाई, नितेश उर्फ लाला , जय, विक्रम हरण, निरंजन भाई सहित क्षेत्र की महिलाएं एवं अनेक नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर न केवल आरती में भाग लिया, बल्कि शहर के विकास और समृद्धि के लिए सामूहिक संकल्प भी लिया।    

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समारोहों पर संकट: गैस सिलेंडर की कमी पर लोढ़ा ने मांगा तुरंत समाधान

ग्रामीण क्षेत्रों में शादी-ब्याह और धार्मिक आयोजनों पर असर, आपूर्ति सुधारने के दिए सुझाव सिरोही। जिले में कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की लगातार बनी हुई किल्लत अब एक गंभीर जनसमस्या का रूप लेती जा रही है। इस मुद्दे को लेकर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा से सीधे फोन पर बात कर स्थिति से अवगत कराया और तत्काल समाधान की मांग की। लोढ़ा ने मंत्री का ध्यान विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की ओर आकर्षित करते हुए बताया कि वहां कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की भारी कमी के कारण शादी-विवाह और धार्मिक समारोहों के आयोजन में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के सामाजिक और पारिवारिक आयोजनों में गैस की उपलब्धता बेहद जरूरी होती है, लेकिन वर्तमान स्थिति में लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंत्री को भेजे गए पत्र में संयम लोढ़ा ने विस्तार से बताया कि सिरोही जिले की ग्रामीण गैस एजेंसियों को कॉमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति अनियमित रूप से हो रही है। कई एजेंसियों को पर्याप्त मात्रा में सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है। इसका सीधा असर आमजन पर पड़ रहा है, खासकर उन परिवारों पर जिनके यहां विवाह या अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होने वाले हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कई जगहों पर लोगों को समय पर सिलेंडर नहीं मिलने के कारण वैकल्पिक व्यवस्थाएं करनी पड़ रही हैं, जिससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। प्रशासनिक प्राथमिकता से वितरण की मांग पूर्व विधायक लोढ़ा ने मंत्री से आग्रह किया कि इस समस्या के समाधान के लिए जिला प्रशासन को निर्देशित किया जाए कि वह कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों का वितरण प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करे। विशेष रूप से शादी-विवाह और धार्मिक आयोजनों के लिए सिलेंडरों की उपलब्धता को प्राथमिकता दी जाए, ताकि सामाजिक कार्यक्रमों में किसी प्रकार की बाधा न आए। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे आयोजनों के लिए सिलेंडरों का वितरण प्रशासनिक अनुमति के आधार पर किया जाए, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और वास्तविक जरूरतमंदों को ही प्राथमिकता मिल सके। मांग के अनुसार आपूर्ति के निर्देश देने की अपील लोढ़ा ने मंत्री सुमित गोदारा से यह भी मांग की कि गैस आपूर्ति करने वाली कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि वे जिले की वास्तविक मांग के अनुसार कॉमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति सुनिश्चित करें। वर्तमान में आपूर्ति की कमी के कारण स्थिति बिगड़ती जा रही है, जिसे समय रहते नियंत्रित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि कंपनियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएं और आपूर्ति प्रणाली को मजबूत किया जाए, तो इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है। व्यावसायिक और सामाजिक उपयोग में संतुलन जरूरी लोढ़ा ने अपने सुझाव में यह भी उल्लेख किया कि कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों के वितरण में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। एक ओर जहां शादी-विवाह और धार्मिक आयोजनों के लिए प्राथमिकता दी जानी चाहिए, वहीं शेष सिलेंडरों को व्यावसायिक उपयोग के लिए भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित न हों। उन्होंने कहा कि यदि इस दिशा में स्पष्ट नीति बनाई जाती है, तो दोनों प्रकार की आवश्यकताओं को संतुलित किया जा सकता है और किसी भी वर्ग को असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।  

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सिरोही में जनसेवा का नया अध्याय विधायक जनसेवा केंद्र

मंत्री देवासी ने शुरु किया केंद्र, पहले दिन ही मिली आमजन को राहत    प्रदेशध्यक्ष मदन राठौड़, सांसद लुम्बाराम चौधरी भी रहे मौजूद सिरोही। राजस्थान की राजनीति और जनसेवा के क्षेत्र में एक सकारात्मक पहल करते हुए राज्य सरकार के मंत्री एवं स्थानीय विधायक ओटाराम देवासी ने सिरोही में विधायक जनसेवा केंद्र का शुभारंभ किया। इस केंद्र की खास बात यह रही कि उदघाटन के पहले ही दिन इसे औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि आमजन की समस्याओं का समाधान और सहायता कार्य तुरंत शुरू कर दिया गया। यह पहल न केवल प्रशासनिक कार्यों को सरल बनाएगी, बल्कि आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का एक मजबूत माध्यम भी बनेगी। इस सेवा केंद्र के शुभारंभ के साथ ही यह संदेश साफ तौर पर दिया गया कि सरकार अब जनता की समस्याओं के समाधान के लिए एक व्यवस्थित और सुलभ व्यवस्था बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। पहले दिन ही कई लोगों के कार्यों का निस्तारण कर यह केंद्र लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा। जनसेवा केंद्र के उदघाटन के साथ ही आमजन की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुनने और समाधान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। यहां आने वाले लोगों ने बताया कि पहले उन्हें अपनी समस्याओं के समाधान के लिए कई कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे, लेकिन अब एक ही स्थान पर उनकी बात सुनी जा रही है और त्वरित कार्रवाई भी हो रही है। केंद्र पर नियुक्त स्टाफ को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है ताकि वे विभिन्न विभागों से जुड़े मामलों को समझकर तुरंत उचित दिशा में कार्यवाही कर सकें। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। दुखद घटना में मिली सहायता इस मौके पर एक संवेदनशील पहल भी देखने को मिली, जिसने प्रशासन की मानवीयता को उजागर किया। मनोरा निवासी घांची समाज की एक बेटी की हाईटेंशन विद्युत लाइन की चपेट में आने से दुखद मृत्यु हो गई थी। यह घटना पूरे क्षेत्र के लिए बेहद पीड़ादायक रही। इस मामले में मंत्री ओटाराम देवासी के विशेष प्रयासों से पीडि़त परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की गई। कार्यक्रम के दौरान मंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और सांसद के हाथों से पीडि़त परिवार को 5 लाख रुपए का चेक सौंपा गया। इस सहायता ने न केवल परिवार को आर्थिक संबल दिया, बल्कि यह भी दर्शाया कि सरकार जनता के दुख-दर्द में उनके साथ खड़ी है। अन्य लाभार्थियों को भी मिला सहयोग इस कार्यक्रम में केवल एक परिवार ही नहीं, बल्कि विभिन्न विभागों के माध्यम से कई अन्य जरूरतमंद लोगों को भी सहायता राशि के चेक वितरित किए गए। इसमें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, चिकित्सा सहायता, दुर्घटना सहायता और अन्य सरकारी योजनाओं के लाभार्थी शामिल रहे। पंचायत समिति सिरोही में शुरू किया गया यह विधायक सेवा केंद्र क्षेत्र के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा साबित होने जा रहा है। यहां पर नियुक्त स्टाफ नागरिकों की समस्याओं को सुनकर संबंधित विभागों तक पहुंचाने और उनका समाधान कराने का कार्य करेगा। इस केंद्र के माध्यम से सरकारी योजनाओं की जानकारी और आवेदन सहायता, पेंशन, राशन, चिकित्सा और शिक्षा से जुड़े मामलों का समाधान,बिजली, पानी, सडक़ जैसी मूलभूत समस्याओं पर कार्रवाई, शिकायत दर्ज कर उसका फॉलो-अप,दस्तावेजी सहायता और मार्गदर्शन दिया जाएगा। यह केंद्र प्रशासन और जनता के बीच एक सेतु का कार्य करेगा, जिससे लोगों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह सेवा केंद्र केवल एक स्थानीय पहल नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान के लिए एक मॉडल के रूप में उभर रहा है। बताया जा रहा है कि यह प्रदेश का पहला विधायक सेवा केंद्र है, जो इस स्तर पर आमजन के लिए समर्पित किया गया है। इस पहल से अन्य जिलों और विधायकों को भी प्रेरणा मिलेगी और भविष्य में ऐसे केंद्र पूरे प्रदेश में स्थापित किए जा सकते हैं। इससे शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी और जनहितैषी बन सकेगी। जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी कार्यक्रम में मंत्री ओटाराम देवासी के साथ-साथ प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, सांसद लुुंबाराम चौधरी और अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस पहल को और भी मजबूत बनाया। सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि जनता की सेवा ही उनका मुख्य उद्देश्य है और यह केंद्र उसी दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस केंद्र का अधिक से अधिक उपयोग करें और अपनी समस्याओं को बिना किसी संकोच के यहां प्रस्तुत करें। पारदर्शिता और जवाबदेही की ओर कदम विधायक सेवा केंद्र की स्थापना से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि प्रशासन अब पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दे रहा है। यह केंद्र न केवल समस्याओं के समाधान का माध्यम बनेगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचे। भविष्य में इस केंद्र के माध्यम से डिजिटल सेवाओं को भी जोड़ा जा सकता है, जिससे लोग ऑनलाइन भी अपनी शिकायत दर्ज कर सकेंगे और उसकी स्थिति ट्रैक कर सकेंगे। यह केंद्र केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक गंभीर और समर्पित प्रयास है। अब यह जिम्मेदारी आमजन की भी है कि वे इस सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करें और इसे सफल बनाएं, ताकि यह मॉडल पूरे प्रदेश में लागू किया जा सके। इनको मिला आर्थिक सहयोग जिले में कृषि विभाग की ओर से संचालित योजनाओं के तहत किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। सूची में शामिल लाभार्थियों में कई ऐसे किसान हैं, जिन्हें सिंचाई, खेती के आधुनिकीकरण और उत्पादन बढ़ाने के लिए अनुदान दिया गया है। पहले क्रम उथमण को 16 लाख 91 हजार रुपए की सहायता पाली हाउस योजना के तहत दी गई। यह योजना किसानों को सिंचाई सुविधाएं बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि होती है। इस तरह की बड़ी राशि मिलने से किसान अब आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर सकेंगे। दूसरे लाभाथी उथमण निवासी गोपालसिंह पुत्र सुखसिंह को 12 हजार 896 रुपए की सहायता प्लास्टिक मल्च योजना के तहत दी गई। यह तकनीक खेतों में नमी बनाए रखने, खरपतवार नियंत्रण और उत्पादन बढ़ाने में मदद करती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन का महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पशुपालन विभाग द्वारा मंगला पशु बीमा योजना के तहत लाभार्थियों को

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सिरोही में नारी शक्ति का विराट उदय, पांच हजार से अधिक मातृशक्ति की ऐतिहासिक भागीदारी

विशेष संवाददाता भूपेंद्र माली की खास रिपोर्ट सिरोही। माली समाज छात्रावास स्थित लखमीदास मंदिर प्रांगण आज उस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना, जब माली समाज सेवा संस्थान 14 परगना, सिरोही के तत्वावधान में आयोजित महिला जागृति महासम्मेलन महाकुंभ में 5000 से अधिक मातृशक्ति ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। यह आयोजन नारी शक्ति की एकता, जागरूकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक बनकर उभरा। माली समाज के 14 परगनों से गांव-गांव से पहुंची महिलाओं ने इस महासम्मेलन को जनआंदोलन का रूप दे दिया। पूरे कार्यक्रम में अनुशासन, उत्साह और समाज के प्रति समर्पण का अद्भुत संगम देखने को मिला। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो सिरोही की धरती पर नारी जागरण की नई लहर उमड़ पड़ी हो। इस ऐतिहासिक आयोजन ने पूरे जिले को नारी सशक्तिकरण की भावना से सराबोर कर दिया। महासम्मेलन में शामिल होने के लिए दूर-दराज के गांवों से महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में, उत्साह और आत्मविश्वास के साथ पहुंचीं। उनकी उपस्थिति ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि अब ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं भी जागरूकता और आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। कार्यक्रम स्थल पर हर ओर ऊर्जा, उत्साह और एकता का वातावरण दिखाई दे रहा था। महिलाओं ने न केवल अपनी भागीदारी दर्ज कराई, बल्कि समाज के विकास में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का भी संकल्प लिया। यह महासंगम वास्तव में नारी शक्ति के जागरण का जीवंत उदाहरण बन गया। महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने किया मार्गदर्शन इस महाकुंभ में महिलाओं को विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूक किया गया। विधिक सेवा, चिकित्सा सेवा, साइबर क्राइम एवं फ्रॉड से बचाव, रोजगार और स्वावलंबन जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी। विधिक सेवा प्राधिकरण से वार्ताकार डॉ. गीता माली, विशाखापट्टनम ने महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में जागरूक किया। चिकित्सा विभाग से वार्ताकार डॉ. कीर्ति शर्मा ने स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। पुलिस विभाग एवं साइबर धोखाधड़ी से बचाव के विषय पर वार्ताकार राजकुंवर ने डिजिटल युग में सुरक्षा के उपाय बताए। स्वावलंबन विभाग की प्रतिनिधि रुचिका रावल एवं उनके वरिष्ठ अधिकारियों ने महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसरों के बारे में मार्गदर्शन दिया। इन सभी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा और वे अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति अधिक सजग हुईं। इस आयोजन का सफल संचालन माली समाज 14 परगना अध्यक्ष हीरालाल माली एवं उनकी पूरी कमेटी के नेतृत्व में किया गया। उनके कुशल मार्गदर्शन और अथक प्रयासों के कारण यह कार्यक्रम समाज की एकता, संगठन और सशक्तिकरण की मिसाल बनकर सामने आया। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पूरी टीम ने समर्पण और मेहनत का परिचय दिया। आयोजन की प्रत्येक व्यवस्था चाहे वह स्वागत हो, मंच संचालन हो या व्यवस्थापन—सभी में अनुशासन और समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण देखने को मिला। आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हुआ महासम्मेलन महासम्मेलन की विशेषता रही वात्सल्य मूर्ति पद्म विभूषण साध्वी ऋतंभरा की कृपा पात्र शिष्या साध्वी सत्यसिद्धा गिरी की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनके सानिध्य ने पूरे कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की। साध्वी गिरी ने कहा कि सामाजिक समरसता, राष्ट्र निर्माण और एकता का संदेश दिया। उनके विचारों ने उपस्थित जनसमूह में नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच का संचार किया। उनके आशीर्वचन ने कार्यक्रम को केवल सामाजिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी समृद्ध बना दिया। नारी सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम यह महासम्मेलन न केवल माली समाज की मातृशक्ति के लिए एक सशक्त मंच साबित हुआ, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गया। इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि जब महिलाएं एकजुट होकर आगे बढ़ती हैं, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य आता है। सिरोही आज नारी शक्ति का केंद्र बनकर उभरा, जहां से जागरूकता, एकता और सशक्तिकरण की नई क्रांति का आगाज हो चुका है। यह आयोजन आने वाले समय में समाज के विकास और समरसता के लिए मील का पत्थर साबित होगा। बालिका शिक्षा पर नाट्य प्रस्तुति ने जीता दिल कार्यक्रम के दौरान प्रेरणा एंड पार्टी की ओर से बालिका शिक्षा पर आधारित नाट्य प्रस्तुति दी गई, जिसने सभी उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। इस प्रस्तुति के माध्यम से समाज में बालिका शिक्षा के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। नाटक ने यह संदेश दिया कि यदि बेटियों को उचित शिक्षा और अवसर दिए जाएं, तो वे समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। दर्शकों ने इस प्रस्तुति की सराहना करते हुए कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। पूरे कार्यक्रम का मंच संचालन एशू माली एंड पार्टी की ओर से किया गया, जिन्होंने अपनी प्रभावशाली शैली से कार्यक्रम को रोचक और व्यवस्थित बनाए रखा। उनके संचालन ने कार्यक्रम को एक सुगठित स्वरूप प्रदान किया और दर्शकों का ध्यान अंत तक बनाए रखा। डेढ़ माह की मेहनत से साकार हुआ आयोजन इस महासम्मेलन को सफल बनाने के लिए माली समाज 14 परगनों की पूरी कार्यकारिणी, अध्यापकों की टीम एवं महिलाओं की टीम ने करीब डेढ़ माह तक गांव-गांव जाकर जनसंपर्क किया। उन्होंने महिलाओं को जागरूक करते हुए इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। इस अथक मेहनत और समर्पण का ही परिणाम रहा कि इतनी बड़ी संख्या में मातृशक्ति ने एकत्र होकर इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। यह सामूहिक प्रयास समाज की एकजुटता और संगठन शक्ति का प्रमाण है। कार्यक्रम के अंत में मंत्री एवं उपाध्यक्ष ने सभी सहयोगियों, अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज को नई दिशा देने का कार्य करते हैं और भविष्य में भी ऐसे प्रयास जारी रहेंगे। सिरोही में आयोजित यह महिला जागृति महासम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत है। इसने यह संदेश दिया कि नारी शक्ति जब जागृत होती है, तो समाज में परिवर्तन की धारा स्वत: प्रवाहित होने लगती है।  

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महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव में उमड़ा श्रद्धा और उत्साह

सिरोही में गूंजा ‘अहिंसा परमो धर्म’ का संदेश सिरोही। शहर में इस वर्ष भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया। जैन समाज द्वारा आयोजित इस पावन अवसर ने पूरे शहर को धार्मिक रंग में रंग दिया, जहां हर ओर अहिंसा परमो धर्म और जियो और जीने दो के संदेश गूंजते नजर आए। इस महोत्सव ने न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ किया, बल्कि सामाजिक समरसता और विश्व शांति के संदेश को भी व्यापक रूप से जन-जन तक पहुंचाया। महोत्सव की शुरुआत प्रात:कालीन प्रभात फेरी से हुई। सुबह-सुबह श्रद्धालु भक्ति गीतों और भगवान महावीर के जयकारों के साथ शहर की प्रमुख गलियों से होकर निकले। इस दौरान वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे आयोजन का महत्व और भी बढ़ गया। इसके बाद भव्य वरघोड़ा और शोभायात्रा का आयोजन किया गया, जो महोत्सव का मुख्य आकर्षण रहा। सजी-धजी झांकियों, बैंड-बाजों और पारंपरिक वेशभूषा में सजे श्रद्धालुओं ने इस शोभायात्रा को यादगार बना दिया। भगवान महावीर के जीवन प्रसंगों को दर्शाती झांकियों ने लोगों को उनके आदर्शों की याद दिलाई। शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालु वर्धमान वीर की जय के उद्घोष करते हुए आगे बढ़ते रहे। शहर के विभिन्न स्थानों पर लोगों ने इस शोभायात्रा का स्वागत किया और पुष्प वर्षा कर अपनी श्रद्धा प्रकट की। महोत्सव के अंतर्गत विभिन्न मंदिरों में विशेष पूजन-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर के चरणों में शीश नवाकर अपने जीवन में शांति, संयम और सदाचार की कामना की। पूजन कार्यक्रमों में जैन धर्म के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डाला गया। आचार्यों और विद्वानों ने अपने प्रवचनों में बताया कि सच्चा धर्म बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धता और सरल जीवनशैली में निहित होता है। स्वामी वात्सल्य और सेवा कार्य धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ समाजसेवा की भावना भी इस महोत्सव में देखने को मिली। स्वामी वात्सल्य कार्यक्रम के तहत बड़ी संख्या में लोगों को भोजन प्रसादी वितरित की गई। इसके अलावा दिव्यांगजनों को मिठाई वितरित कर मानवता और करुणा का परिचय दिया गया। यह पहल इस बात का प्रतीक थी कि भगवान महावीर का संदेश केवल उपदेशों तक सीमित नहीं, बल्कि व्यवहार में भी उतारा जा रहा है। गांधी पार्क योग संस्थान में इस अवसर पर एक विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। इस सभा में विश्व शांति, सद्भाव और मानव कल्याण के लिए प्रार्थना की गई। योग प्रशिक्षकों और समाजसेवियों ने इस दौरान कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भगवान महावीर के विचार अत्यंत प्रासंगिक हैं। आज जब दुनिया हिंसा, अशांति और संघर्षों से जूझ रही है, तब अहिंसा का सिद्धांत ही मानवता को सही दिशा दे सकता है। रात्रि में भक्ति संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें भजन-कीर्तन के माध्यम से भगवान महावीर की महिमा का गुणगान किया गया। भक्तों ने देर रात तक भक्ति में लीन होकर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया। भक्ति संध्या ने पूरे आयोजन को एक भावनात्मक और आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की, जहां हर व्यक्ति भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करता नजर आया। समाज में एकता का आह्वान इस अवसर पर समाजसेवी जय विक्रम हरण और नितेश जैन उर्फ लाला भाई ने जैन समाज को एकजुट रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि समाज को छोटे-छोटे मतभेदों से ऊपर उठकर एकता और सहयोग की भावना को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने सभी से भगवान महावीर के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाने और समाज तथा राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। कार्यक्रम में कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया, जिनमें भ्रष्टाचार निरोधक विभाग के रामेश्वर लाल, योग प्रशिक्षक भीक सिंह भाटी, समाजसेवी जय विक्रम हरण, टीकम भाई सिंधी, योगाचार्य रामचंद्र, आशुतोष पटनी और गोविंद भाई शामिल रहे। इन सभी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और लोगों को नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करते हैं। भगवान महावीर के जीवन का संदेश भगवान महावीर का जीवन त्याग, तपस्या, संयम और अहिंसा का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने अपने जीवन के माध्यम से यह सिखाया कि सच्ची खुशी बाहरी भौतिक वस्तुओं में नहीं, बल्कि आत्मिक शांति में निहित होती है। उनका सिद्धांत जियो और जीने दो आज के समय में और भी महत्वपूर्ण हो गया है। यह सिद्धांत न केवल व्यक्तिगत जीवन में शांति लाता है, बल्कि समाज में भी सह-अस्तित्व और सद्भाव को बढ़ावा देता है। वर्तमान समय में जब पूरी दुनिया कई तरह की चुनौतियों से जूझ रही है—चाहे वह युद्ध हो, पर्यावरण संकट हो या सामाजिक असमानता—ऐसे में भगवान महावीर के विचार एक मार्गदर्शक के रूप में सामने आते हैं। उनकी अहिंसा की शिक्षा हमें यह सिखाती है कि किसी भी समस्या का समाधान हिंसा से नहीं, बल्कि शांति और संवाद से संभव है। उनका जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि हम अपने भीतर झांकें और अपने विचारों और कर्मों को शुद्ध करें।

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