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सिरोही में नारी शक्ति का विराट उदय, पांच हजार से अधिक मातृशक्ति की ऐतिहासिक भागीदारी

विशेष संवाददाता भूपेंद्र माली की खास रिपोर्ट सिरोही। माली समाज छात्रावास स्थित लखमीदास मंदिर प्रांगण आज उस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना, जब माली समाज सेवा संस्थान 14 परगना, सिरोही के तत्वावधान में आयोजित महिला जागृति महासम्मेलन महाकुंभ में 5000 से अधिक मातृशक्ति ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। यह आयोजन नारी शक्ति की एकता, जागरूकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक बनकर उभरा। माली समाज के 14 परगनों से गांव-गांव से पहुंची महिलाओं ने इस महासम्मेलन को जनआंदोलन का रूप दे दिया। पूरे कार्यक्रम में अनुशासन, उत्साह और समाज के प्रति समर्पण का अद्भुत संगम देखने को मिला। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो सिरोही की धरती पर नारी जागरण की नई लहर उमड़ पड़ी हो। इस ऐतिहासिक आयोजन ने पूरे जिले को नारी सशक्तिकरण की भावना से सराबोर कर दिया। महासम्मेलन में शामिल होने के लिए दूर-दराज के गांवों से महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में, उत्साह और आत्मविश्वास के साथ पहुंचीं। उनकी उपस्थिति ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि अब ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं भी जागरूकता और आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। कार्यक्रम स्थल पर हर ओर ऊर्जा, उत्साह और एकता का वातावरण दिखाई दे रहा था। महिलाओं ने न केवल अपनी भागीदारी दर्ज कराई, बल्कि समाज के विकास में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का भी संकल्प लिया। यह महासंगम वास्तव में नारी शक्ति के जागरण का जीवंत उदाहरण बन गया। महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने किया मार्गदर्शन इस महाकुंभ में महिलाओं को विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूक किया गया। विधिक सेवा, चिकित्सा सेवा, साइबर क्राइम एवं फ्रॉड से बचाव, रोजगार और स्वावलंबन जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी। विधिक सेवा प्राधिकरण से वार्ताकार डॉ. गीता माली, विशाखापट्टनम ने महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में जागरूक किया। चिकित्सा विभाग से वार्ताकार डॉ. कीर्ति शर्मा ने स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। पुलिस विभाग एवं साइबर धोखाधड़ी से बचाव के विषय पर वार्ताकार राजकुंवर ने डिजिटल युग में सुरक्षा के उपाय बताए। स्वावलंबन विभाग की प्रतिनिधि रुचिका रावल एवं उनके वरिष्ठ अधिकारियों ने महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसरों के बारे में मार्गदर्शन दिया। इन सभी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा और वे अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति अधिक सजग हुईं। इस आयोजन का सफल संचालन माली समाज 14 परगना अध्यक्ष हीरालाल माली एवं उनकी पूरी कमेटी के नेतृत्व में किया गया। उनके कुशल मार्गदर्शन और अथक प्रयासों के कारण यह कार्यक्रम समाज की एकता, संगठन और सशक्तिकरण की मिसाल बनकर सामने आया। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पूरी टीम ने समर्पण और मेहनत का परिचय दिया। आयोजन की प्रत्येक व्यवस्था चाहे वह स्वागत हो, मंच संचालन हो या व्यवस्थापन—सभी में अनुशासन और समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण देखने को मिला। आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हुआ महासम्मेलन महासम्मेलन की विशेषता रही वात्सल्य मूर्ति पद्म विभूषण साध्वी ऋतंभरा की कृपा पात्र शिष्या साध्वी सत्यसिद्धा गिरी की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनके सानिध्य ने पूरे कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की। साध्वी गिरी ने कहा कि सामाजिक समरसता, राष्ट्र निर्माण और एकता का संदेश दिया। उनके विचारों ने उपस्थित जनसमूह में नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच का संचार किया। उनके आशीर्वचन ने कार्यक्रम को केवल सामाजिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी समृद्ध बना दिया। नारी सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम यह महासम्मेलन न केवल माली समाज की मातृशक्ति के लिए एक सशक्त मंच साबित हुआ, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गया। इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि जब महिलाएं एकजुट होकर आगे बढ़ती हैं, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य आता है। सिरोही आज नारी शक्ति का केंद्र बनकर उभरा, जहां से जागरूकता, एकता और सशक्तिकरण की नई क्रांति का आगाज हो चुका है। यह आयोजन आने वाले समय में समाज के विकास और समरसता के लिए मील का पत्थर साबित होगा। बालिका शिक्षा पर नाट्य प्रस्तुति ने जीता दिल कार्यक्रम के दौरान प्रेरणा एंड पार्टी की ओर से बालिका शिक्षा पर आधारित नाट्य प्रस्तुति दी गई, जिसने सभी उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। इस प्रस्तुति के माध्यम से समाज में बालिका शिक्षा के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। नाटक ने यह संदेश दिया कि यदि बेटियों को उचित शिक्षा और अवसर दिए जाएं, तो वे समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। दर्शकों ने इस प्रस्तुति की सराहना करते हुए कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। पूरे कार्यक्रम का मंच संचालन एशू माली एंड पार्टी की ओर से किया गया, जिन्होंने अपनी प्रभावशाली शैली से कार्यक्रम को रोचक और व्यवस्थित बनाए रखा। उनके संचालन ने कार्यक्रम को एक सुगठित स्वरूप प्रदान किया और दर्शकों का ध्यान अंत तक बनाए रखा। डेढ़ माह की मेहनत से साकार हुआ आयोजन इस महासम्मेलन को सफल बनाने के लिए माली समाज 14 परगनों की पूरी कार्यकारिणी, अध्यापकों की टीम एवं महिलाओं की टीम ने करीब डेढ़ माह तक गांव-गांव जाकर जनसंपर्क किया। उन्होंने महिलाओं को जागरूक करते हुए इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। इस अथक मेहनत और समर्पण का ही परिणाम रहा कि इतनी बड़ी संख्या में मातृशक्ति ने एकत्र होकर इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। यह सामूहिक प्रयास समाज की एकजुटता और संगठन शक्ति का प्रमाण है। कार्यक्रम के अंत में मंत्री एवं उपाध्यक्ष ने सभी सहयोगियों, अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज को नई दिशा देने का कार्य करते हैं और भविष्य में भी ऐसे प्रयास जारी रहेंगे। सिरोही में आयोजित यह महिला जागृति महासम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत है। इसने यह संदेश दिया कि नारी शक्ति जब जागृत होती है, तो समाज में परिवर्तन की धारा स्वत: प्रवाहित होने लगती है।  

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महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव में उमड़ा श्रद्धा और उत्साह

सिरोही में गूंजा ‘अहिंसा परमो धर्म’ का संदेश सिरोही। शहर में इस वर्ष भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया। जैन समाज द्वारा आयोजित इस पावन अवसर ने पूरे शहर को धार्मिक रंग में रंग दिया, जहां हर ओर अहिंसा परमो धर्म और जियो और जीने दो के संदेश गूंजते नजर आए। इस महोत्सव ने न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ किया, बल्कि सामाजिक समरसता और विश्व शांति के संदेश को भी व्यापक रूप से जन-जन तक पहुंचाया। महोत्सव की शुरुआत प्रात:कालीन प्रभात फेरी से हुई। सुबह-सुबह श्रद्धालु भक्ति गीतों और भगवान महावीर के जयकारों के साथ शहर की प्रमुख गलियों से होकर निकले। इस दौरान वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे आयोजन का महत्व और भी बढ़ गया। इसके बाद भव्य वरघोड़ा और शोभायात्रा का आयोजन किया गया, जो महोत्सव का मुख्य आकर्षण रहा। सजी-धजी झांकियों, बैंड-बाजों और पारंपरिक वेशभूषा में सजे श्रद्धालुओं ने इस शोभायात्रा को यादगार बना दिया। भगवान महावीर के जीवन प्रसंगों को दर्शाती झांकियों ने लोगों को उनके आदर्शों की याद दिलाई। शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालु वर्धमान वीर की जय के उद्घोष करते हुए आगे बढ़ते रहे। शहर के विभिन्न स्थानों पर लोगों ने इस शोभायात्रा का स्वागत किया और पुष्प वर्षा कर अपनी श्रद्धा प्रकट की। महोत्सव के अंतर्गत विभिन्न मंदिरों में विशेष पूजन-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर के चरणों में शीश नवाकर अपने जीवन में शांति, संयम और सदाचार की कामना की। पूजन कार्यक्रमों में जैन धर्म के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डाला गया। आचार्यों और विद्वानों ने अपने प्रवचनों में बताया कि सच्चा धर्म बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धता और सरल जीवनशैली में निहित होता है। स्वामी वात्सल्य और सेवा कार्य धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ समाजसेवा की भावना भी इस महोत्सव में देखने को मिली। स्वामी वात्सल्य कार्यक्रम के तहत बड़ी संख्या में लोगों को भोजन प्रसादी वितरित की गई। इसके अलावा दिव्यांगजनों को मिठाई वितरित कर मानवता और करुणा का परिचय दिया गया। यह पहल इस बात का प्रतीक थी कि भगवान महावीर का संदेश केवल उपदेशों तक सीमित नहीं, बल्कि व्यवहार में भी उतारा जा रहा है। गांधी पार्क योग संस्थान में इस अवसर पर एक विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। इस सभा में विश्व शांति, सद्भाव और मानव कल्याण के लिए प्रार्थना की गई। योग प्रशिक्षकों और समाजसेवियों ने इस दौरान कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भगवान महावीर के विचार अत्यंत प्रासंगिक हैं। आज जब दुनिया हिंसा, अशांति और संघर्षों से जूझ रही है, तब अहिंसा का सिद्धांत ही मानवता को सही दिशा दे सकता है। रात्रि में भक्ति संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें भजन-कीर्तन के माध्यम से भगवान महावीर की महिमा का गुणगान किया गया। भक्तों ने देर रात तक भक्ति में लीन होकर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया। भक्ति संध्या ने पूरे आयोजन को एक भावनात्मक और आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की, जहां हर व्यक्ति भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करता नजर आया। समाज में एकता का आह्वान इस अवसर पर समाजसेवी जय विक्रम हरण और नितेश जैन उर्फ लाला भाई ने जैन समाज को एकजुट रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि समाज को छोटे-छोटे मतभेदों से ऊपर उठकर एकता और सहयोग की भावना को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने सभी से भगवान महावीर के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाने और समाज तथा राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। कार्यक्रम में कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया, जिनमें भ्रष्टाचार निरोधक विभाग के रामेश्वर लाल, योग प्रशिक्षक भीक सिंह भाटी, समाजसेवी जय विक्रम हरण, टीकम भाई सिंधी, योगाचार्य रामचंद्र, आशुतोष पटनी और गोविंद भाई शामिल रहे। इन सभी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और लोगों को नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करते हैं। भगवान महावीर के जीवन का संदेश भगवान महावीर का जीवन त्याग, तपस्या, संयम और अहिंसा का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने अपने जीवन के माध्यम से यह सिखाया कि सच्ची खुशी बाहरी भौतिक वस्तुओं में नहीं, बल्कि आत्मिक शांति में निहित होती है। उनका सिद्धांत जियो और जीने दो आज के समय में और भी महत्वपूर्ण हो गया है। यह सिद्धांत न केवल व्यक्तिगत जीवन में शांति लाता है, बल्कि समाज में भी सह-अस्तित्व और सद्भाव को बढ़ावा देता है। वर्तमान समय में जब पूरी दुनिया कई तरह की चुनौतियों से जूझ रही है—चाहे वह युद्ध हो, पर्यावरण संकट हो या सामाजिक असमानता—ऐसे में भगवान महावीर के विचार एक मार्गदर्शक के रूप में सामने आते हैं। उनकी अहिंसा की शिक्षा हमें यह सिखाती है कि किसी भी समस्या का समाधान हिंसा से नहीं, बल्कि शांति और संवाद से संभव है। उनका जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि हम अपने भीतर झांकें और अपने विचारों और कर्मों को शुद्ध करें।

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