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सिरोही: सेंट जोसेफ चर्च में क्रॉस यात्रा और प्रार्थना से गूंजा वातावरण

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सिरोही। शहर में गुड फ्राइडे के पावन अवसर पर सेंट जोसेफ कैथोलिक गिरजाघर में गहन श्रद्धा और आस्था के साथ ‘दुख भोग स्मरण’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पूरे गिरजाघर परिसर में आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला, जहां श्रद्धालु प्रभु यीशु मसीह के बलिदान को याद करते हुए भाव-विभोर नजर आए। कार्यक्रम की शुरुआत पल्ली पुरोहित फादर जोमी, फादर जोजी थॉमस और फादर जीबीन के नेतृत्व में हुई। उनके मार्गदर्शन में श्रद्धालुओं ने अनुशासन और श्रद्धा के साथ सभी धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। गिरजाघर के प्रवक्ता रणजी स्मिथ ने जानकारी देते हुए बताया कि क्रॉस यात्रा चर्च के मुख्य द्वार से प्रारंभ होकर परिसर के सामने समाप्त हुई। इस यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए, जिन्होंने प्रभु यीशु के कष्टों को स्मरण करते हुए 14 विभिन्न स्थानों पर घुटनों के बल बैठकर आराधना की।
यह क्रॉस यात्रा ‘स्टेशंस ऑफ द क्रॉस’ के रूप में जानी जाती है, जिसमें प्रभु यीशु के जीवन के अंतिम क्षणों और उनके बलिदान को याद किया जाता है। यात्रा के दौरान वातावरण पूरी तरह शांत और भक्ति से ओतप्रोत रहा। श्रद्धालुओं ने हाथों में क्रॉस लेकर प्रार्थना की और प्रभु यीशु के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कई लोग भावुक होकर प्रार्थना करते नजर आए, जिससे पूरा माहौल आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। क्रॉस यात्रा के समापन के बाद लगभग 10 मिनट के विश्राम के पश्चात गिरजाघर के भीतर प्रार्थना और आराधना कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से पवित्र बाइबल का वाचन किया। बाइबल वाचन में प्रभु यीशु के जीवन, उनके संघर्ष, त्याग और मानवता के लिए दिए गए संदेशों का विस्तार से वर्णन किया गया। श्रद्धालुओं ने ध्यानपूर्वक इन शिक्षाओं को सुना और अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। गिरजाघर के भीतर गूंजती प्रार्थनाओं और भजनों ने वातावरण को और अधिक पवित्र बना दिया। हर ओर शांति, भक्ति और आत्मचिंतन का माहौल नजर आया।

ईश्वर में अटूट विश्वास से ही दूर होंगे दुख- फादर जीबीन
इस अवसर पर फादर जीबीन ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए प्रभु यीशु के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यीशु मसीह ने अपने जीवन में अनेक कष्टों को सहन किया, लेकिन उन्होंने कभी भी ईश्वर पर विश्वास नहीं छोड़ा। उन्होंने बाइबल के एक महत्वपूर्ण संदेश को साझा करते हुए कहा किवे क्या कर रहे हैं, वे नहीं जानते, उन्हें माफ किया जाए।
फादर जीबीन ने बताया कि यह संदेश हमें क्षमा, प्रेम और सहनशीलता की सीख देता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब दुनिया भौतिकवाद की ओर तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में इंसान अपने रिश्तों और समाज से दूर होता जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास बनाए रखना चाहिए और दूसरों के साथ प्रेम व सद्भाव का व्यवहार करना चाहिए। फादर जीबीन ने अपने संबोधन में वर्तमान समय की चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के दौर में मनुष्य अपनी भौतिक आवश्यकताओं को पूरा करने की दौड़ में इतना व्यस्त हो गया है कि वह आध्यात्मिकता से दूर होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि समाज में तनाव, अशांति और असंतोष बढ़ता जा रहा है। ऐसे समय में प्रार्थना ही एक ऐसा माध्यम है, जो मनुष्य को शांति, संतुलन और सच्चे मार्ग की ओर ले जा सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे अपने जीवन में नियमित रूप से प्रार्थना करें और ईश्वर के प्रति अपनी आस्था को मजबूत बनाए रखें।
श्रद्धा, समर्पण और आत्मचिंतन का प्रतीक बना गुड फ्राइडे
गुड फ्राइडे का यह आयोजन सिरोही में केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आध्यात्मिक जागरूकता का एक महत्वपूर्ण अवसर बनकर सामने आया। इस दिन श्रद्धालुओं ने प्रभु यीशु के बलिदान को याद करते हुए अपने जीवन की गलतियों पर विचार किया और बेहतर इंसान बनने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी ने शांति, प्रेम और भाईचारे का संदेश देते हुए समाज में सदभाव बनाए रखने की कामना की।

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