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सरजावाव चौराहा बना ‘खतरे का कॉरिडोर’

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रासूखात की हूल या प्रशासन की चुप्पी?
सिरोही। शहर के मुख्य दरवाजे से जुड़ी सडक़ों की हालत आज सवालों के घेरे में है। जहां एक ओर प्रशासन विकास और सुचारू यातायात के बड़े-बड़े दावे करता है, वहीं दूसरी ओर हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई देती है। सरजावाव चौराहे से राजमाता धर्मशाला रोड तक का हिस्सा इन दिनों बदहाली, अतिक्रमण और अव्यवस्था का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। हालांकि हाथ लारी की कोई परेशानी नहीं है। वे अपना सामान बेच चलता बनते है। दुखद पहलू तो यह है कि यहां स्थायी दुकानदार अतिक्रमण की पहल में शुमार है।
यह सडक़ न केवल शहर के मुख्य प्रवेश मार्ग से जुड़ी है, बल्कि रोडवेज डिपो जाने वाले यात्रियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण रास्ता है। बावजूद इसके, यहां की स्थिति ऐसी है कि हर गुजरने वाला व्यक्ति खुद को जोखिम में महसूस करता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस क्षेत्र में अतिक्रमण करने वालों का हौसला इतना बढ़ गया है कि यदि कोई उन्हें टोकने की कोशिश करता है तो वे राजनीतिक रासूख का हवाला देने लगते है। यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कहीं न कहीं प्रशासनिक ढील और राजनीतिक संरक्षण अतिक्रमण को बढ़ावा दे रहे हैं।
सरजावाव चौराहा, अतिक्रमण और गड्ढे का ‘डेंजर जोन’
सरजावाव चौराहा, जो शहर का एक प्रमुख आवाजाही का जंक्शन है, इन दिनों दुर्घटनाओं का केंद्र बन गया है। राजमाता धर्मशाला रोड के मुहाने पर स्थित एक मिष्ठान भंडार ने अपनी दुकान के बाहर लगभग 10 से 15 फीट तक सडक़ पर कब्जा कर रखा है। इतना ही नहीं, सडक़ के बीचों-बीच नाली पर बना गड्ढा स्थिति को और खतरनाक बना देता है। इस कारण से पूरी सडक़ सिकुडक़र मात्र 5 से 7 फीट रह गई है। हालात यह है कि दोपहिया वाहन चालक रोजाना गिरते-पड़ते है। चार पहिया वाहनों का निकलना तो कोई जंग से कम नहीं। अतिक्रमण के कारण सडक़ पर टेबल-कुर्सियां, दुकान का सामान और ग्राहकों के वाहन बेतरतीब खड़े रहते हैं। इससे हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। कई बार तो स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि एम्बुलेंस या इमरजेंसी वाहन भी फंस सकते हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि एक संभावित बड़ा खतरा है जो कभी भी गंभीर हादसे का रूप ले सकता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस सडक़ से रोजाना प्रशासनिक अधिकारी गुजरते हैं। नगर परिषद भी महज कुछ फर्लांग की दूरी पर स्थित है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि यह सडक़ एक ‘डेंजर जोन’ की तरह है। कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। जहां तक नियमों की बात करें तो सार्वजनिक सडक़ों पर अतिक्रमण पूरी तरह प्रतिबंधित है। दोषी पाए जाने पर जुर्माना और हटाने की कार्रवाई अनिवार्य है। इसके बावजूद यदि कार्रवाई नहीं हो रही है, तो यह प्रशासनिक विफलता मानी जा सकती है। शहरवासियों का साफ कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि वह बिना किसी दबाव के अतिक्रमण हटाने की मुहिम चलाए और इस सडक़ को सुरक्षित बनाए।

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