
देश में अब विकास पाइपलाइन से होकर गुजर रहा है और अगर आपके घर तक वो पाइप नहीं, तो समझिए आपकी रसोई की किस्मत भी नोटिस के भरोसे है। सरकार का नया फरमान कुछ ऐसा है कि अब एलपीजी सिलेंडर भी पूछेगा भाई पीएनजी लिया कि नहीं? अगर जवाब ‘ना’ हुआ, तो 90 दिन बाद वो भी कहेगा अब मैं चलता हूं, तुम पाइप संभालो! जनता पहले महंगाई से परेशान है, अब कनेक्शन से परेशान है। पहले रिश्ते जोडऩा मुश्किल था, अब गैस कनेक्शन जोडऩा अनिवार्य हो गया है। फर्क बस इतना है कि रिश्तों में नोटिस नहीं आता, यहां 90 दिन का अल्टीमेटम भी है।
सरकार का तर्क भी कम दिलचस्प नहीं है जहां पीएनजी नहीं है, वहां एलपीजी बचानी है। यानी जिनके पास विकल्प है, वो मजबूरी बन जाए, और जिनके पास मजबूरी है, वो विकल्प का इंतजार करें। इधर बेचारी जनता हिसाब लगा रही है कि
1090 में कनेक्शन या 1000 में सिलेंडर? फर्क सिर्फ इतना कि एक में आग तुरंत मिलेगी, दूसरे में नियमों की गर्मी! अब रसोई में खाना कम, और नियम ज्यादा पक रहे हैं। क्योंकि नए भारत में गैस सिर्फ जलती नहीं नीति भी बनती है। बेचारी पब्लिक के पास अब रसोई में दो ही रास्ते हैं या तो पाइपलाइन अपनाओ, या सिलेंडर को अलविदा कहने की तैयारी करो। सरकारी फरमान गैस चाहिए तो लाइन में आओ वरना लाइन बंद!












