
सडक़ों पर अब गाडिय़ां ही नहीं, जेबें भी सफर करेंगी और वो भी पेड मोड में। नेशनल हाइवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया ने एक बार फिर साबित कर दिया कि देश की सडक़ें भले धीरे-धीरे बनें, लेकिन टोल रेट हर साल समय पर विकास कर लेते हैं। एक अप्रेल से टोल दरों में बढ़ोतरी लागू होगी और तारीख भी ऐसी कि जनता को लगे कहीं ये अप्रेल फूल स्पेशल ऑफर तो नहीं! लेकिन नहीं, ये मज़ाक नहीं है। ये वही गंभीर मजाक है जो हर साल दोहराया जाता है। हालांकि कार वालों को राहत दी गई है। मतलब आम आदमी को मनोवैज्ञानिक सुकून मिल गया। लेकिन असली चोट कॉमर्शियल और भारी वाहनों पर पड़ी है और जैसा कि परंपरा है, वो खर्च आखिरकार आम जनता की जेब से ही वसूला जाएगा बस रास्ता थोड़ा घुमा हुआ होगा। थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर रेट तय होते हैं। यानी अगर महंगाई बढ़े तो टोल बढ़ेगा, और अगर महंगाई कम भी हो जाए तो भी टोल संभावनाओं के आधार पर बढ़ सकता है! कारों के सालाना पास की बात करेें तो पहले 3000 रुपए में 200 बार टोल पार करने का मौका मिलता था, अब 3075 रुपए में वही सुविधा मिलेगी। यानी 75 रुपए ज्यादा देकर आपको वही पुराना रास्ता, वही ट्रैफिक और वही गडढे, बस अनुभव थोड़ा महंगा हो जाएगा। कुल मिलाकर, सडक़ें अब सिर्फ दूरी कम नहीं कर रहीं बल्कि धीरे-धीरे बैंक बैलेंस भी कम कर रही हैं। हम सब इस विकास यात्रा में शामिल हैं क्योंकि रास्ता चाहे कोई भी हो, टोल तो देना ही पड़ेगा!












