
World TB Day पर बड़ा खुलासा
हर साल 24 मार्च को World TB Day मनाया जाता है, ताकि लोगों को Tuberculosis यानी टीबी के प्रति जागरूक किया जा सके। आमतौर पर टीबी को फेफड़ों की बीमारी माना जाता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी महिलाओं के प्रजनन तंत्र को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।
क्या है ‘जेनिटल टीबी’?
गुरुग्राम स्थित प्रजनन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. पुनीत राणा अरोड़ा के मुताबिक, जब टीबी का संक्रमण महिलाओं के रिप्रोडक्टिव सिस्टम में पहुंचता है, तो इसे ‘जेनिटल टीबी’ कहा जाता है। यह बीमारी गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब और अंडाशय को नुकसान पहुंचाती है।
महिलाओं में कैसे असर डालती है टीबी?
जेनिटल टीबी का सबसे गंभीर असर बांझपन के रूप में सामने आता है। यह फैलोपियन ट्यूब में सूजन और ब्लॉकेज पैदा करती है, जिससे अंडा और शुक्राणु का मिलना मुश्किल हो जाता है।
गंभीर समस्याएं जो पैदा हो सकती हैं
- पीरियड्स का अनियमित होना
- गर्भधारण में कठिनाई
- बार-बार गर्भपात
- हार्मोनल असंतुलन
पुरुषों में क्यों कम खतरा?
Tuberculosis का असर पुरुषों में आमतौर पर फेफड़ों तक सीमित रहता है। हालांकि, कुछ मामलों में यह टेस्टिस और प्रोस्टेट को प्रभावित कर सकता है, लेकिन महिलाओं की तुलना में बांझपन का खतरा कम होता है।
पहचान में देरी क्यों होती है?
जेनिटल टीबी के लक्षण बहुत हल्के होते हैं—जैसे पेट दर्द, कमजोरी, या पीरियड्स में बदलाव। महिलाएं अक्सर इन्हें नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे बीमारी देर से पकड़ में आती है।
इलाज और बचाव
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और इलाज से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है। जागरूकता और समय पर मेडिकल सलाह लेना बेहद जरूरी है।












