
जालोर। राजस्थान के जालोर जिले में स्थित ऐतिहासिक और आस्था के प्रमुख केंद्र सिरे मंदिर में सोमवार को रत्नेश्वर महादेव मंदिर के 375वें स्थापना महोत्सव के अवसर पर भव्य धार्मिक कार्यक्रम और धर्मसभा का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर देशभर से संत-महात्मा, श्रद्धालु और जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संबोधन रहा, जिसमें उन्होंने धर्म, संस्कृति, समाज और राजनीति से जुड़े कई मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए। धर्मसभा को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने देश की सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपरा और सनातन धर्म की शक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की पहचान उसकी आध्यात्मिक परंपरा से है। उन्होंने इस दौरान कांग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों पर भी निशाना साधते हुए राम मंदिर आंदोलन, राम सेतु और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर तीखे बयान दिए। उन्होंने कहा कि यदि देश की आजादी के बाद तत्कालीन सरकारें चाहतीं, तो अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बहुत पहले बन सकता था। लेकिन उस समय की सरकारों ने इस विषय पर सकारात्मक पहल करने के बजाय उल्टी पैरवी की और राम के अस्तित्व पर भी सवाल खड़े किए। अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या में भगवान राम का मंदिर भारत की करोड़ों जनता की आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह मंदिर देश की स्वतंत्रता के तुरंत बाद ही बन सकता था, लेकिन उस समय की सरकारों की नीतियों के कारण यह संभव नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि उस समय कुछ लोगों ने राम सेतु को तोडऩे तक का प्रयास किया और सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र देकर यह कहा गया कि भगवान राम का कोई अस्तित्व नहीं है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिन्होंने राम और कृष्ण के अस्तित्व को नकारा, आज समय ने उन्हें जवाब दे दिया है। जिन लोगों ने भगवान राम और भगवान कृष्ण के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगाया, उन्हें आज जनता ने नकार दिया है। प्रभु की कृपा से आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो चुका है और यह भारत की सांस्कृतिक पुनर्जागरण की पहचान बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारत की आस्था और संस्कृति को कभी दबाया नहीं जा सकता। समय-समय पर आने वाली चुनौतियों के बावजूद सनातन संस्कृति और भारतीय परंपरा हमेशा मजबूत होकर उभरती है।
सिरे मंदिर और रत्नेश्वर महादेव मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
जिले का सिरे मंदिर राजस्थान के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। यह मंदिर नाथ संप्रदाय की परंपरा से जुड़ा हुआ है और यहां हर साल हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। रत्नेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना लगभग 375 वर्ष पहले हुई थी और तब से यह क्षेत्र धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। मंदिर के स्थापना महोत्सव के अवसर पर हर वर्ष विशेष धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना और संत सम्मेलन आयोजित किए जाते हैं। इस बार 375वें महोत्सव को लेकर मंदिर परिसर में भव्य आयोजन किया गया, जिसमें राजस्थान के साथ-साथ अन्य राज्यों से भी संत-महात्मा और श्रद्धालु पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर को आकर्षक सजावट से सजाया गया था। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर में दर्शन और पूजा के लिए उमड़ती रही। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ भजन-कीर्तन और प्रवचन का भी आयोजन किया गया।
आध्यात्मिक शक्ति की परंपरा का किया उल्लेख
धर्मसभा के दौरान योगी आदित्यनाथ ने भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की संत परंपरा सदियों से समाज को मार्गदर्शन देती आई है। उन्होंने कहा कि नाथ संप्रदाय की परंपरा में 9 नाथ और 84 सिद्धों का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि इन संतों की आध्यात्मिक शक्ति और तपस्या के कारण ही भारत की आध्यात्मिक चेतना आज भी जीवित है। योगी ने कहा कि इन संतों की सूक्ष्म दृष्टि और कृपा से समाज को हमेशा सकारात्मक दिशा मिलती रहती है। 9 नाथ और 84 सिद्धों की परंपरा अजर-अमर है। यह परंपरा केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का भी प्रतीक है। इनके आशीर्वाद से समाज में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। संतों की शिक्षाएं समाज को जोडऩे का कार्य करती हैं और लोगों को धर्म, सेवा और परोपकार की प्रेरणा देती हैं।
राजा मानसिंह के योगदान की सराहना की
अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने रत्नेश्वर महादेव मंदिर के निर्माण में ऐतिहासिक योगदान देने वाले राजा मानसिंह का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय राजा मानसिंह ने इस मंदिर के निर्माण और विकास में जो सहयोग दिया, वह एक महान कार्य था। उन्होंने कहा कि इतिहास में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं जब राजाओं और शासकों ने धर्म और समाज की सेवा के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। रत्नेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण भी उसी परंपरा का एक उदाहरण है। योगी ने कहा कि किसी भी महान कार्य के लिए यदि सकारात्मक मानसिकता से योगदान दिया जाए, तो वह योगदान कभी व्यर्थ नहीं जाता। समाज और आने वाली पीढय़िां उसे हमेशा याद रखती हैं।
समाज को तोडऩे वाली राजनीति पर जताई चिंता
अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने समाज में बढ़ते जातिवाद और विभाजनकारी राजनीति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जातिवाद समाज को कमजोर करता है और लोगों के बीच दूरी पैदा करता है। उन्होंने कहा कि समाज को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है कि सभी लोग मिलकर काम करें और आपसी भाईचारे को बढ़ावा दें। योगी ने कहा कि भारत की संस्कृति हमेशा से वसुधैव कुटुंबकम की भावना पर आधारित रही है। जातिवाद की राजनीति समाज को तोडऩे का काम करती है। हमें ऐसी मानसिकता से दूर रहना होगा और समाज को एकजुट करने की दिशा में प्रयास करना होगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे समाज में एकता और सदभाव बनाए रखने के लिए सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें।
कार्यक्रम में संत-महात्माओं का रहा सानिध्य
रत्नेश्वर महादेव मंदिर के 375वें महोत्सव के अवसर पर आयोजित धर्मसभा में कई संत-महात्माओं का सानिध्य भी प्राप्त हुआ। इस दौरान मंच पर विभिन्न संतों और धार्मिक गुरुओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक गरिमामय बना दिया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से गंगानाथ महाराज, योगी नरहरिनाथ, संध्यानाथ महाराज, गिरवरनाथ महाराज, योगी काशीनाथ, योगी रूपनाथ महाराज, केशवनाथ महाराज, योगी पंचमनाथ, योगी सुंदराईनाथ महाराज, नारायणनाथ महाराज, मंगलाईनाथ महाराज, विक्रमनाथ महाराज और योगी कमलनाथ महाराज सहित कई संत उपस्थित रहे। इन संतों ने भी अपने प्रवचनों में धर्म, संस्कृति और समाज के उत्थान से जुड़े विचार व्यक्त किए।












