
सिरोही। होली से आठ दिन पूर्व होलाष्टक एवं होली से सात दिन बाद शीतला सप्तमी तक माताजी का अगता होने से कुल 15 दिन तक समस्त शुभ कार्यों पर रोक रहेगी।
ज्योतिष एवं वास्तुविद आचार्य प्रदीप दवे ने बताया कि फाल्गुन शुक्ला अष्टमी मंगलवार से फाल्गुन पूर्णिमा मंगलवार 3 मार्च तक कुल आठ दिन होलाष्टक रहेगा तथा होलाष्टक समाप्त होते ही चैत्र कृष्ण प्रतिपदा बुधवार 4 मार्च से चैत्र कृष्ण सप्तमी मंगलवार 10 मार्च अर्थात शीतला सप्तमी तक कुल सात दिन माताजी का अगता रहेगा। इस प्रकार होलाष्टक एवं अगता होने से कुल 15 दिन शुभ कार्यों पर रोक रहेगी। इस अवधि में गृह प्रवेश, विवाह मुहूत्र्त, मुंडन, देव प्रतिष्ठा आदि मांगलिक कार्य नहीं हो सकेंगे। भारतीय ज्योतिष, लौकिक एवं स्थानीय मान्यतानुसार इस अवधि में मानसिक तनाव दूर करने, मौज-मस्ती, हास-परिहास, व्यंग्य-विनोद, हंसी-ठिठोली, फाग-गायन, चंगवादन, हुडदंग, गेरनृत्य, ढूंढ, सामाजिक मेलजोल बढ़ाने तथा चेचक से बचाव के लिए 15 दिन तक समस्त शुभ कार्यों पर रोक रहती है। इन दिनों में आकाशीय ग्रह शिथिल रहते हैं। जिससे उनका प्रभाव नकारात्मक रहता है। इसी कारण मनुष्य के शरीर की प्रकृति शिथिल हो जाती है तथा दिन में नींद, सुस्ती व आलस्य का प्रभाव बढ़ जाता है तथा रात्रि की नींद कम हो जाती है।
क्या होता है होलाष्टक
आचार्य प्रदीप दवे ने बताया कि होली से पूर्व जो आठ दिन होते है। उसे होलाष्टक कहते है। इस अवधि में ग्रहों के शिथिल होने से उनका प्रभाव नकारात्मक होने मांगलिक कार्य करने की मनाही है।
क्या होता है अगता
लौकिक धार्मिक एवं स्थानीय मान्यता अनुसार चेचक से बचने के लिए होली दहन से शीतला सप्तमी तक ओरी व शीतला माता को प्रसन्न किया जाता है। इसके लिए समस्त महत्वपूर्ण कार्य रोक कर बड़ी चेचक से बचने के लिए शीतला माता व छोटी चेचक से बचने के लिए ओरी माता की पूजा की जाती है व महिलाएं माताजी के भजन व गीत गाती है। पहले चेचक का बहुत प्रकोप रहता था और छोटेे बच्चे काल के ग्रास बन जाते थे। अत: बड़ी चेचक व छोटी चेचक से बचने के लिए शीतला व ओरी माता के भजन, गीत तथा ठंडा भोजन का प्रसाद चढाकर शीतला व ओरी माता को प्रसन्न किया जाता था।












