अस्पताल में कुत्तें ना आए, डाक्टर्स की जिम्मेदारी

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प्रदेश में अब डाक्टर्स को भी कुत्तें भगाने की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके लिए बाकायदा आदेश भी जारी हुए है। सरकारी हॉस्पिटलों में घूमने वाले आवारा कुत्तों को रोकने के लिए नोडल ऑफिसर नियुक्त किए गए हैं। ये नोडल ऑफिसर हॉस्पिटल में ही पोस्टेड डॉक्टर हैं। यानी अस्पताल परिसर में कुत्ते न आएं इसकी रोकथाम और इन्हें पकड़वाने की जिम्मेदारी इन डॉक्टर्स की रहेगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में कई जगहों पर इस तरह के ऑर्डर जारी किए गए हैं, जिनमें हॉस्पिटल में आवारा कुत्तों को हटवाने या उनकी एंट्री रोकने के लिए निगम के साथ कॉर्डिनेट करने के लिए किसी न किसी डॉक्टर को नोडल अधिकारी बनाया गया है। अभी जोधपुर के प्रतापनगर और मंडोर सैटेलाइट हॉस्पिटल के साथ जैसलमेर के जवाहिर हॉस्पिटल में आदेश के तहत लागू की गई है। जैसलमेर पीएमओ डॉ. रविंद्र सांखला ने बताया कि आवारा कुत्ते हॉस्पिटल में नहीं आएं, इसकी जिम्मेदारी डॉक्टर्स को सौंपी गई है।
जोधपुर और जैसलमेर के तीन हॉस्पिटल में वहां पोस्टेड डॉक्टर्स को नोडल अधिकारी बनाया गया है। जोधपुर के प्रतापनगर हॉस्पिटल में डॉ. नरेश चौहान और मंडोर सैटेलाइट हॉस्पिटल में डॉ. निर्मला बिश्नोई को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। जबकि जैसलमेर के जवाहिर हॉस्पिटल में डेंटिस्ट डॉ. सरदाराराम पंवार को नोडल अधिकरी बनाया गया है।  राज्य सरकार का निर्देश है कि हॉस्पिटल में कुत्ते नहीं होने चाहिए। इसलिए हमने डॉ. सरदाराराम को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। उनकी ड्यूटी होगी कि हॉस्पिटल में कुत्ते नहीं आने चाहिए। गेट बंद रहे और जहां भी चार दिवारी से कुत्ते आ रहे हैं, उन्हें रोका जाए। हॉस्पिटल में कुत्तो की संख्या ज्यादा होने पर वे पीएमओ और नगर परिषद की टीम से कॉर्डिनेट कर उन्हें पकड़वाने का काम करेंगे।

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