
चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दूसरे फेज के तहत शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में फाइनल वोटर लिस्ट जारी की गई, जिसके साथ ही 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों की वोटर लिस्ट में कुल 6.08 करोड़ नाम कट गए हैं। यह सबसे बड़े पैमाने पर वोटर सूची संशोधन का उदाहरण है, जिससे देश के निर्वाचन तंत्र की पारदर्शिता और गुणवत्ता को और बढ़ावा मिलेगा।
पिछले साल 27 अक्टूबर को SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाताओं की कुल संख्या लगभग 51 करोड़ थी, जो अब फाइनल लिस्ट के बाद घटकर 44.92 करोड़ रह गई है। उत्तर प्रदेश में शुक्रवार को जारी SIR की फाइनल लिस्ट में वोटरों की संख्या करीब 13 प्रतिशत घटकर 13.39 करोड़ रह गई है, यानी लगभग 2.04 करोड़ नाम इस सूची से हटाए गए हैं। वहीं पश्चिम बंगाल में करीब 91 लाख वोटर्स के नाम फाइनल लिस्ट से बाहर हुए हैं।
SIR प्रक्रिया के दूसरे फेज में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल, गुजरात, मध्य प्रदेश, गोवा, पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार, तथा लक्षद्वीप की फाइनल वोटर लिस्ट प्रकाशित की गई है। यह प्रक्रिया सभी राज्यों में मतदाता सूची को अपडेट करने और साफ-सुथरी बनाने का एक महत्वपूर्ण कदम है।
चुनाव आयोग ने देश में अब तक करीब 60 करोड़ मतदाताओं को इस अभियान में शामिल किया है और बाकी 39 करोड़ मतदाताओं को अगले फेज में कवर किया जाएगा। SIR के तीसरे फेज में 17 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया लागू होगी, जो इस महीने पांच विधानसभा चुनावों के बाद शुरू होगी।
पश्चिम बंगाल में वोटर सूची में बड़ी कटौती
पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के तहत करीब 91 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, यह कार्रवाई नवंबर से चल रही प्रक्रिया के तहत की गई है। आयोग के 28 फरवरी तक के आंकड़ों के मुताबिक, SIR शुरू होने के बाद पहले से ही 63.66 लाख नाम हटाए गए थे, जिससे मतदाताओं की संख्या करीब 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गई। बाद में जांच और प्रक्रिया पूरी होने के साथ कुल हटाए गए नामों की संख्या बढ़कर लगभग 90.83 लाख हो गई है।
SIR प्रक्रिया के बारे में 6 जरूरी सवाल-जवाब
- SIR क्या है? यह चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है जिसमें घर-घर जाकर वोटर फॉर्म भरे जाते हैं और फॉरम्स के जरिए वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है। इसमें नए 18 वर्ष से अधिक के वोटर जोड़े जाते हैं और मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं।
- पहले फेज में कौन-कौन से राज्यों की वोटर सूची संशोधित हुई? पहले फेज में बिहार में SIR किया गया था। दूसरे फेज में उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप को शामिल किया गया।
- ये प्रक्रिया कौन करता है? ब्लॉक लेवल ऑफिसर (BLO) और बूथ लेवल एजेंट (BLA) घर-घर जाकर वोटरों का सत्यापन करते हैं।
- मतदाताओं को क्या करना होता है? मतदाताओं को दिए गए फॉर्म्स की जानकारी मिलान करनी होती है। यदि किसी वोटर के नाम दो जगह हैं तो एक हटवाना होता है, या नए वोटर होने पर नाम जोड़वाना होता है।
- कौन से दस्तावेज मान्य हैं? पेंशनर पहचान पत्र, सरकारी आईडी, जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, 10वीं की मार्कशीट, स्थायी निवास प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, आधार कार्ड आदि मान्य दस्तावेज हैं।
- SIR का उद्देश्य क्या है? यह सुनिश्चित करना है कि वोटर लिस्ट में कोई भी योग्य वोटर छूट न जाए और कोई अयोग्य मतदाता शामिल न हो। इसके जरिए मतदाता सूची में पुरानी और गलत जानकारियों को सही किया जाता है।
पूरे देश में निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को मज़बूत करने के लिए इस तरह की व्यापक पहल आवश्यक है। 2025 तक पूरे भारत में SIR पूरी करने का लक्ष्य चुनाव आयोग ने निर्धारित किया है, जिससे भविष्य में चुनाव स्वच्छ और विश्वसनीय तरीके से आयोजित हो सकें।












