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छात्र व छात्राओं के लिए अलग- अलग वॉशरूम हो, अन्यथा स्कूल की मान्यता रदद

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हर स्कूल में छात्राओं को फ्री सैैनेटरी बांटना अनिवार्य
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक विशेष निर्देश जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर स्कूल में छात्राओं को फ्री में सैनेटरी पैड बांटना अनिवार्य होगा। छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग वॉशरूम बनाने होंगे। जो स्कूल ऐसा नहीं कर पाएंगे उनकी मान्यता रद्द की जाएगी। इसके साथ ही कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि हर स्कूल में दिव्यांग-अनुकूल (डिसेबल-फ्रेंडली) टॉयलेट बनाए जाएं। जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने क्लास 6 से 12 तक की छात्राओं के लिए सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में केंद्र सरकार की मेंस्ट्रुअल हाइजिन पॉलिसी (मासिक धर्म स्वच्छता नीति) को पूरे भारत में लागू करने पर यह आदेश सुनाया। यह आदेश सिर्फ कानूनी व्यवस्था से जुड़े लोगों के लिए नहीं है। यह उन क्लासरूम के लिए भी है, जहां लड़कियां मदद मांगने में झिझकती हैं। यह उन टीचर्स के लिए है, जो मदद करना चाहते हैं, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण बंधे हुए हैं। यह उन माता-पिता के लिए भी है, जो शायद यह नहीं समझ पाते कि उनकी चुप्पी का क्या असर पड़ता है। यह समाज के लिए भी है, ताकि प्रगति का पैमाना इस बात से तय हो कि हम अपने सबसे कमजोर वर्ग की कितनी सुरक्षा करते हैं। हम हर उस बच्ची तक यह संदेश पहुंचाना चाहते हैं, जो स्कूल में अबसेंट होने की शिकार बनी, क्योंकि उसके शरीर को बोझ की तरह देखा गया जबकि इसमें उसकी कोई गलती नहीं है।

Kamlesh Purohit
Kamlesh Purohit
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