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जांच के नाम पर जांच, दो टेस्ट में करोड़ों का स्वास्थ्य लाभ?

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सीएमएचओ पर खरीद अनियमितताओं के आरोप, ज्ञापन पहुंचा कलेक्टर तक
सिरोही। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था इन दिनों दो जांचों में सम्पूर्ण समाधान मॉडल पर चलती दिख रही है। भाजपा जिला मीडिया प्रभारी रोहित खत्री ने जिला कलक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि सीएमएचओ डॉ. दिनेश खराड़ी और डिप्टी सीएमएचओ डॉ. सत्य प्रकाश शर्मा ने एनएचएम राशि के उपयोग में ऐसे नवाचार किए हैं, जिनसे सरकार को राजस्व हानि और आमजन को जांच से दूरी दोनों का अनुभव एक साथ मिल रहा है।
143 जांचों का बजट, लेकिन फोकस सिर्फ 2 पर
ज्ञापन के अनुसार, मुख्यमंत्री निशुल्क जांच योजना के तहत उप स्वास्थ्य केन्द्र से जिला अस्पताल तक 143 प्रकार की जांचों के लिए बजट मिलता है। लेकिन आरोप है कि इस व्यापक व्यवस्था को सरलीकरण की राह पर ले जाते हुए बजट का बड़ा हिस्सा सिर्फ दो जांचों ग्लूकोमीटर और हीमोग्लोबीन पर केंद्रित कर दिया गया। जहां उप स्वास्थ्य केन्द्र स्तर पर 14, पीएचसी पर 66, सीएचसी पर 101 और जिला अस्पताल में 143 जांचों की सुविधा होनी चाहिए, वहां जमीनी हकीकत यह बताई जा रही है कि बाकी जांचें मानो अवकाश पर चली गई हैं। परिणामस्वरूप मरीजों को या तो इंतजार करना पड़ रहा है या फिर पड़ोसी राज्य गुजरात की ओर रुख करना पड़ रहा है।
एकल स्रोत निविदा, प्रतिस्पर्धा से परहेज? तीन गुना दाम पर खरीद के आरोप
खत्री ने आरोप लगाया कि तीन-चार आइटम की खरीद के लिए बार-बार एकल स्रोत उपापन (सिंगल सोर्स प्रोक्योरमेंट) अपनाया गया। लगभग 150 लाख रुपए का क्रय बाजार दर से तीन गुना अधिक कीमत पर किए जाने की बात कही गई है। जहां आमतौर पर सबसे कम बोली की तलाश होती है, वहां यहां सबसे भरोसेमंद स्रोत की परंपरा इतनी मजबूत दिखी कि खुली निविदा की जरूरत ही महसूस नहीं हुई।
बजट की मांग बनाम बजट का मार्ग
राजकीय मेडिकल कॉलेज सिरोही और जिला अस्पताल की ओर से 143 जांचों के संचालन के लिए बार-बार बजट की मांग किए जाने के पत्र भी सामने आए हैं। लेकिन आरोप है कि यह बजट संबंधित संस्थानों तक पहुंचने के बजाय सीमित जांचों की खरीद में ही खप गया। इस बीच अस्पतालों में अन्य जांचों का ठप होना न केवल मरीजों के लिए परेशानी का कारण बना, बल्कि सरकारी योजनाओं की छवि पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
हब एंड स्पोक मॉडल, खबरों में लॉन्च, जमीन पर इंतजार
17 फरवरी को समाचार पत्रों में यह दावा किया गया था कि 15 दिनों के भीतर जिले में हब एंड स्पोक मॉडल लागू हो जाएगा और 151 तक उन्नत जांचें निशुल्क उपलब्ध होंगी। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि यह मॉडल अभी भी प्रेस विज्ञप्तियों में सक्रिय है, जबकि जमीनी स्तर पर इसकी शुरुआत का इंतजार जारी है।

मरीजों का विकल्प, ‘निशुल्क’ से ‘अनिवार्य यात्रा’ तक, गुजरात की ओर बढ़ते कदम
जांच सुविधाओं के अभाव में मरीजों का गुजरात जाना अब एक आम दृश्य बनता जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि जब योजना का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर मुफ्त जांच उपलब्ध कराना था, तो क्या यह आउटसोर्सिंग मॉडल अनजाने में लागू हो गया है? जिला कलक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने मामले में कमेटी गठित कर निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया है।

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