तेलंगाना के नलगोंडा जिले में बैंक से करोड़ों का घोटाला, चार आरोपी गिरफ्तार
तेलंगाना के नलगोंडा जिले से एक बड़े बैंक घोटाले की खबर सामने आई है, जिसमें सरकारी बैंक की शाखा से 2.65 करोड़ रुपए की हेराफेरी की गई है। इस मामले में दो बैंक मैनेजर और हाउसकीपिंग स्टाफ समेत कुल चार लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि ये आरोपी मिलकर बैंक की नॉन-ब्रांच ऑनलाइन KYC अपडेट सिस्टम की खामी का फायदा उठाकर खातों से पैसे अवैध तरीके से ट्रांसफर करते रहे।
एसपी शरत चंद्र पवार ने बताया कि मुख्य आरोपी बैंक में कॉन्ट्रैक्ट पर हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में तैनात था। इस स्टाफ ने दो बैंक मैनेजरों और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर यह घोटाला अंजाम दिया। आरोपियों ने बैंक के डॉर्मेंट लेकिन एक्टिव बैलेंस वाले खातों का दुरुपयोग करते हुए लगभग 2.65 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खातों में ट्रांसफर किए गए 2.42 करोड़ रुपए भी बरामद किए हैं।
पुलिस ने बताया कि इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब बैंक के नियमित ऑडिट में संदिग्ध लेनदेन का पता चला। जांच में पता चला कि आरोपी नॉन-ब्रांच ऑनलाइन KYC अपडेट सिस्टम की खामियों का इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे खातों की जानकारी को बिना शाखा में रिपोर्ट किए ही अपडेट किया जा रहा था। यह व्यवस्था बैंक के डाटा प्रोटेक्शन और नियमों के खिलाफ थी, जिसका फायदा उठाते हुए ये आरोपी लंबे समय तक बड़ी रकम हेराफेर करते रहे।
नलगोंडा पुलिस की टीम ने सक्रिय जांच के बाद आरोपियों को पकड़कर बैंक के करीब 2.42 करोड़ रुपये जब्त कर लिए हैं। मामला गंभीरता से देखने पर स्थानीय प्रशासन ने बताया कि बैंक की आंतरिक सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि भविष्य में ऐसे मामले न हों।
इस दौरान पुलिस ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद आरोपियों से पूछताछ जारी है और अधिकारियों का मानना है कि इस घोटाले में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। बैंक प्रशासन भी इस घोटाले को लेकर पूरी तरह से सहयोग दे रहा है।
अन्य बड़ी खबरों में, दिल्ली ब्लास्ट केस में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को कोर्ट ने 45 दिन की अतिरिक्त मोहलत दी है। NIA ने कहा है कि जांच अभी जारी है और इसे पूरा करने के लिए और समय चाहिए। कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए एजेंसी को अतिरिक्त समय प्रदान किया है। फिलहाल, इस मामले में जांच के विस्तार और गिरफ्तारियों को लेकर कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
इस प्रकार, नलगोंडा बैंक घोटाले से साफ होता है कि वित्तीय संस्थानों में सुरक्षात्मक उपायों को मजबूत करने की जरूरत है, ताकि आम जनता का भरोसा बरकरार रहे और ऐसी गलत गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।












