
जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को जयपुर में आयोजित संत संसद कार्यक्रम में संतों की भूमिका और सनातन संस्कृति के संरक्षण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि संतों का जीवन केवल व्यक्तिगत साधना तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह पूरे विश्व के कल्याण और मानवता के मार्गदर्शन के लिए समर्पित रहता है। उन्होंने कहा कि संतों के सानिध्य में आने से व्यक्ति अपने जीवन को सही दिशा में ले जा सकता है और अपने कर्मों को सार्थक बना सकता है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक परंपरा विश्व में अद्वितीय है और संत-महात्माओं ने सदियों से इस परंपरा को जीवित रखा है। उन्होंने कहा कि संत समाज केवल धार्मिक शिक्षा ही नहीं देता, बल्कि समाज में नैतिकता, सेवा और समरसता का संदेश भी फैलाता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ राजस्थान की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में सरकार ने राजकीय मंदिरों में वर्षभर उत्सवों के भव्य आयोजन के लिए वित्तीय स्वीकृतियां दी हैं, जिससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिला है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने मंदिरों में कार्यरत पुजारियों के मानदेय में वृद्धि की है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है। यह कदम न केवल पुजारियों के सम्मान को बढ़ाता है, बल्कि धार्मिक संस्थानों की मजबूती में भी सहायक है। मुख्यमंत्री ने राज्य के प्रमुख तीर्थ स्थलों के विकास पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने बताया कि पूंछरी का लौठा, खाटूश्याम जी और तीर्थराज पुष्कर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है। इन स्थलों पर आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, यात्री सुविधाओं का विकास और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि खाटूश्याम जी जैसे तीर्थ स्थल पर हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं, इसलिए वहां बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। इसी तरह पुष्कर, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है, वहां भी विकास कार्यों को गति दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने “कृष्ण गमन पथ” परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परियोजना न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि यह प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करेगी। इस परियोजना के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े स्थानों को एक धागे में पिरोने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को एक समग्र आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होगा। उन्होंने गौ संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का भी विस्तार से उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोशालाओं में गायों के चारे के लिए प्रतिदिन 50 रुपये और बछड़ों के लिए 25 रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। इसके साथ ही गोशालाओं में टीनशेड, स्वच्छ पानी और उचित चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। गायों के संरक्षण से जैविक खेती को बढ़ावा मिलता है और किसानों की आय में भी वृद्धि होती है। मुख्यमंत्री ने संत समाज से आह्वान किया कि वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए आगे आएं और युवाओं को संस्कारों और नैतिक मूल्यों की शिक्षा दें। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब समाज तेजी से बदल रहा है, तब संतों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
कार्यक्रम में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम, विधायक कुलदीप धनकड़ और बालमुकुंदाचार्य सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। इसके अलावा मेहंदीपुर बालाजी के महंत 1008 नरेश पुरी महाराज सहित बड़ी संख्या में साधु-साध्वीगण भी कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर संतों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए समाज में नैतिकता और आध्यात्मिकता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली के बीच संतों का मार्गदर्शन लोगों को संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम का समापन भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण में हुआ, जहां उपस्थित लोगों ने संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया और समाज के उत्थान के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।
इस प्रकार, जयपुर में आयोजित संत संसद कार्यक्रम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इसने समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक जागरूकता को भी बढ़ावा दिया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संबोधन ने यह स्पष्ट कर दिया कि राज्य सरकार आने वाले समय में भी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास करती रहेगी।











