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जमशेदपुर में जुड़ते धागे | एक पारसी परिवार का अभिलेख ‘स्पार्सिंग’ में बदलता नजर

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दो प्रतिष्ठित लोकाज़ी फोटूबुक ग्रांट विजेता, जॉयोना मेधी और अभिषेक बसु, पारिवारिक अभिलेख को नए दृष्टिकोण और अभिव्यक्ति के साथ पेश कर रहे हैं। उनके इस अनोखे प्रयास ने पारिवारिक यादों को एक कला और इतिहास के रूप में पुनर्जीवित किया है, जो ‘स्पार्सिंग’ नामक कला परियोजना का हिस्सा है।

‘स्पार्सिंग’ एक ऐसा मौलिक प्रोजेक्ट है जिसमें पारसी परिवार के निजी अभिलेखों, तस्वीरों और दस्तावेजों को एक नये नजरिए से देखा और प्रस्तुत किया गया है। जॉयोना मेधी और अभिषेक बसु ने पारंपरिक पारिवारिक चित्र संग्रह से हटकर ऐसी रचनात्मक विधा अपनाई है, जो दर्शकों को व्यक्तिगत और सामूहिक स्मृतियों को अधिक गहराई से समझने का अवसर देती है।

जॉयोना मेधी के अनुसार, “हमारे प्रयासों का मकसद केवल तस्वीरें दिखाना नहीं, बल्कि उनकी पृष्ठभूमि, कहानी और भावनाओं को जीवंत करना है। पारिवारिक अभिलेख हमारे इतिहास का आईना होते हैं, पर अक्सर उन्हें चुनौतीपूर्ण और अनुपयोगी समझ लिया जाता है। हम इसे बदलना चाहते हैं।”

इस परियोजना के तहत, अभिषेक बसु ने पारसी परिवारों के सांस्कृतिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उनके दैनंदिन जीवन और परंपराओं को तस्वीरों के माध्यम से उजागर किया है। उन्होंने कहा, “जब हम अपने अतीत को समझते हैं, तो हम अपने वर्तमान और भविष्य को बेहतर रूप से समझ पाते हैं। यह परियोजना उन अनकहे कथाओं को सामने लाने का एक जरिया है जो अक्सर समय के साथ धूल में खो जाती हैं।”

लोकाज़ी फोटूबुक ग्रांट जैसे मंच इस तरह के कलाकारों और फोटोग्राफरों को नई संभावनाएं प्रदान करते हैं। यह प्रोत्साहन उन्हें अपनी कला के दम पर सामाजिक, सांस्कृतिक, और पारिवारिक इतिहास को समृद्ध करने के लिए एक अनमोल अवसर देता है।

‘स्पार्सिंग’ परियोजना का प्रदर्शन जल्द ही भारत में कई प्रमुख कला सम्मेलनों और प्रदर्शनी स्थलों पर आयोजित किया जाएगा, जहां पारिवारिक अभिलेखों की इस नई प्रस्तुति को लेकर व्यापक चर्चा और सराहना की उम्मीद है।

यह पहल दर्शाती है कि कैसे पारंपरिक यादों और दस्तावेजों को आधुनिक कला के माध्यम से पुनः जीवित किया जा सकता है, जिससे अगली पीढ़ी तक सांस्कृतिक विरासत सजीव और प्रासंगिक बनी रहे।

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