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अमेरिकी अपीलीय न्यायालय ने आप्रवासियों को बिना जमानत के हिरासत में रखने में ट्रंप प्रशासन का समर्थन किया

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वॉशिंगटन, डी.सी. | 27 अप्रैल 2024

अमेरिका की एक अपीलीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन के उस फैसले का समर्थन किया है, जिसमें आप्रवासी बिना जमानत के हिरासत में रखे जा सकते हैं। इस निर्णय ने ऐतिहासिक रूप से अपनाई गई जमानत नीति पर नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है, जिसमें निर्दोष और गैर-उड़ान जोखिम वाले आप्रवासियों को अक्सर जमानत दी जाती थी।

परंपरागत रूप से, जिन आव्रजकों के ऊपर कोई आपराधिक आरोप नहीं होते, और जो भागने का खतरा नहीं दिखाते, उन्हें जमानत पर रिहा किया जाता था। इसके अतिरिक्त, जबरन हिरासत केवल हाल ही में सीमापार करने वाले आप्रवासियों तक सीमित था। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इस नियम में परिवर्तन कर दिया, जिससे आप्रवासियों को हिरासत में रखने की अवधि बिना जमानत के बढ़ाने का अधिकार मिला।

न्यायालय के फैसले ने इस बदलाव को वैध ठहराया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि संघीय सरकार के पास अधिक अधिकार हैं ताकि वे सुरक्षा और सीमा प्रबंधन के लिए परिवर्तित परिस्थितियों के अनुरूप कदम उठा सकें। समर्थकों का कहना है कि यह निर्णय सीमाओं की सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया को मजबूत करेगा, जबकि विपक्षी इसे मानवाधिकारों के उल्लंघन के रूप में देखते हैं और मानते हैं कि इससे आप्रवासियों की स्वतंत्रता में अनावश्यक बाधाएं आएंगी।

इस फैसले के साथ ही ट्रंप प्रशासन के उस नीति को भी बल मिला है, जिसमें आप्रवासियों को हिरासत में रखने के लिए न्यायिक जमानत पर निर्भरता को कम किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय आप्रवासन से जुड़े कानूनी विवादों में नई मिसाल कायम कर सकता है।

इसके परिणामस्वरूप, कई आप्रवासी अधिकार समूह और नागरिक संगठनों ने चिंता जाहिर की है। उन्होंने न्यायालय से अपील करने और इस नीति की समीक्षा करने का आग्रह किया है ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि व्यक्ति की स्वतंत्रता और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान हो।

यह मामला अमेरिकी आप्रवासन नीति और न्यायिक हस्तक्षेप के बीच संतुलन की चुनौतियों को दर्शाता है, जो आगामी दिनों में और भी अधिक चर्चा का विषय बना रहेगा।

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