सिरोही। दोपहर बाद हिंदू महोत्सव समिति के तत्वावधान में भगवान राम-जानकी की आरती की गई। इसके पश्चात मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम अपने लाव-लश्कर के साथ भक्तों को दर्शन देने के लिए रामझरोखा मंदिर से भव्य शोभायात्रा के रूप में निकले। शोभायात्रा में सबसे आगे रामदूत हनुमान चल रहे थे, जो भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए थे। इसके पीछे भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण की सुसज्जित झांकियां रथ पर विराजमान थीं। यह शोभायात्रा भाटकड़ा सर्कल से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए आगे बढ़ी। शोभायात्रा का मार्ग संपूर्णानंद कॉलोनी, बसस्टैंड रोड, सरजावाव दरवाजा, खंडेलवाल मंदिर, सदर बाजार, मोचीवाड़ा एनसीसी सर्कल, आर्य समाज रोड, घांचीवाड़ा और पैलेस रोड होते हुए अंत में श्रीराम मंदिर पर जाकर समाप्त हुआ। करीब 5 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को तय करने में शोभायात्रा को लगभग साढ़े चार घंटे से अधिक समय लगा। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने फूल वर्षा कर भगवान श्रीराम का स्वागत किया। शोभायात्रा में भक्ति और उत्साह का अनोखा संगम देखने को मिला। डीजे पर बजते भक्ति गीतों, बैंड की मधुर धुनों और ढोल-नगाड़ों की थाप पर युवा झूमते नजर आए। भगवा साफा और पारंपरिक परिधान पहने श्रद्धालु हाथों में भगवा ध्वज लेकर नाचते-गाते हुए शोभायात्रा में शामिल हुए। जगह-जगह भजन मंडलियों द्वारा सुंदर भजनों की प्रस्तुतियां दी गईं, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। इस शोभायात्रा की सबसे खास बात भगवान राम की 18 फीट ऊंची और हनुमान की 15 फीट ऊंची मूर्तियां रहीं, जो आमजन के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनीं। इसके अलावा दिल्ली से आए कलाकारों द्वारा प्रस्तुत 8 फीट ऊंचे बजरंगबली का जीवंत स्वरूप भी लोगों को मंत्रमुग्ध करता रहा। श्रद्धालु इन झांकियों के साथ फोटो और वीडियो बनाते नजर आए।
झांकियों ने दर्शाया सांस्कृतिक वैभव
शोभायात्रा में शहर की 22 बस्तियों, विभिन्न समाजों, विद्यालयों और छात्रावासों की ओर से 55 से अधिक आकर्षक झांकियां शामिल की गईं। इन झांकियों में भगवान राम के जीवन प्रसंगों, रामायण की घटनाओं और भारतीय संस्कृति के विविध रूपों का सुंदर चित्रण किया गया। हर झांकी अपने आप में एक अलग संदेश और प्रस्तुति लेकर आई थी, जिसे देखने के लिए मार्ग के दोनों ओर खड़े श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इस शोभायात्रा में केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों और शहरों की सांस्कृतिक झलक भी देखने को मिली।
नासिक की प्रसिद्ध ढोल पार्टी ने अपनी जोशीली धुनों से माहौल को ऊर्जावान बना दिया।
बालोतरा का पारंपरिक गैर नृत्य लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। 15 से अधिक भजन मंडलियों ने पूरे मार्ग में भक्ति रस की धारा बहाई।
सुरक्षा बंदोबस्त माकूल रहे
इतने बड़े आयोजन को सफल बनाने के लिए प्रशासन और पुलिस विभाग की ओर से विशेष इंतजाम किए गए थे। शहर के प्रमुख चौराहों और मार्गों पर पुलिस बल तैनात रहा। ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए गए थे। साथ ही चिकित्सा और आपातकालीन सेवाओं की भी व्यवस्था की गई थी, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
सामाजिक समरसता और एकता का संदेश
रामनवमी का यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सामाजिक समरसता और एकता का भी संदेश दिया। विभिन्न समाजों और वर्गों के लोग एक साथ मिलकर इस आयोजन में शामिल हुए। हर वर्ग, हर आयु और हर क्षेत्र के लोगों ने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाया, जिससे समाज में भाईचारे और एकजुटता की भावना मजबूत हुई। देर शाम शोभायात्रा श्रीराम मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई। पूरे दिन चले इस आयोजन ने सिरोही शहर को पूरी तरह राममय बना दिया।













