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डीएलएसए सचिव ने किया वन स्टॉप सेंटर का आकस्मिक निरीक्षण

व्यवस्थाएं संतोषजनक मिलीं, बालिका की चिकित्सीय जांच के दिए निर्देश सिरोही। सदस्य सचिव, राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के आदेशानुसार एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सिरोही के निर्देशानुसार श्रीमती सवित्री आनंद निर्भीक, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सिरोही द्वारा मंगलवार को वन स्टॉप सेंटर, सिरोही का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने केंद्र पर उपलब्ध व्यवस्थाओं, अभिलेखों, सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता एवं लाभार्थियों को प्रदान की जा रही सुविधाओं का गहन अवलोकन एवं जांच की। निरीक्षण के समय केंद्र की समस्त व्यवस्थाएं संतोषजनक एवं सुव्यवस्थित पाई गईं। इस दौरान केंद्र पर एक बालिका भी उपस्थित पाई गई। मामले को गंभीरता एवं संवेदनशीलता से लेते हुए सचिव श्रीमती सवित्री आनंद निर्भीक ने संबंधित अधिकारियों को बालिका की आवश्यक चिकित्सीय जांच एवं अन्य जरूरी मेडिकल टेस्ट शीघ्र करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बालिका को समय पर समुचित उपचार एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए। सचिव ने अधिकारियों से कहा कि वन स्टॉप सेंटर में आने वाली प्रत्येक पीडि़ता एवं जरूरतमंद महिला/बालिका को संवेदनशीलता के साथ सहायता उपलब्ध कराई जाए तथा उनकी सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी भी ली तथा रिकॉर्ड संधारण एवं कार्यप्रणाली की सराहना की। निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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सहकारी संस्थाओं में भ्रष्टाचारियों पर कसेगा शिकंजा, गबन करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई और वसूली के दिए निर्देश जयपुर। सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम कुमार दक ने सहकारिता विभाग के कार्यालयों एवं सहकारी संस्थाओं में अनियमितताओं, गबन और भ्रष्टाचार से जुड़े दर्ज प्रकरणों में कठोर कार्रवाई करने के निर्देश गृह विभाग, पुलिस एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना राज्य सरकार की प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दक बुधवार को शासन सचिवालय स्थित चिंतन सभागार में सहकारिता विभाग के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन कार्यालयों एवं सहकारी संस्थाओं में गबन, अनियमितताओं एवं अन्य मामलों में दर्ज एफआईआर की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क का हो खुलासा प्रकरणों में त्वरित, निष्पक्ष और न्यायोचित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए गृह विभाग, पुलिस एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। दक ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गबन, भ्रष्टाचार एवं वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों में शीघ्र अनुसंधान पूरा कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि गबन के मामलों में दोषियों के खिलाफ आपराधिक धाराओं में कार्रवाई के साथ-साथ वसूली भी सुनिश्चित की जाए। फर्जीवाड़े और घोटालों के मामलों में मुख्य आरोपियों के साथ पूरे नेटवर्क का खुलासा कर सभी संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही दोषियों द्वारा परिजनों के नाम पर बनाई गई संपत्तियों के विरुद्ध भी कार्रवाई कर वसूली की जाए। बिना पर्याप्त आधार एफआर लगाने पर जताई नाराजगी सहकारिता मंत्री ने कहा कि गंभीर प्रकृति के मामलों में जिस मंशा से एफआईआर दर्ज करवाई जाती है, उसी अनुरूप कार्रवाई भी होनी चाहिए। ऐसे मामलों में बिना पर्याप्त आधार के एफआर लगने से गलत संदेश जाता है। अपराध प्रमाणित होने पर न्यायालय में समय पर चालान प्रस्तुत किए जाएं। उन्होंने कहा कि पुलिस मुख्यालय स्तर पर अलग सेल का गठन कर ऐसे मामलों की नियमित मॉनिटरिंग की जानी चाहिए। दक ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद सहित अन्य कार्यों में फर्जीवाड़े एवं अनियमितताओं के कई बड़े मामले सामने आए हैं, जिनसे विभाग की छवि प्रभावित हुई है। ऐसे मामलों पर विशेष फोकस किया जाए। ई-मित्र संचालकों और बैंक खाते किराये पर देने वालों पर भी कार्रवाई दक ने फर्जीवाड़े में शामिल ई-मित्र संचालकों एवं बैंक खाते किराये पर देने वाले लोगों के विरुद्ध भी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आमजन और किसानों का सहकारी संस्थाओं पर विश्वास बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए सभी समितियों में वित्तीय अनुशासन, नियमित ऑडिट, पारदर्शी कार्यप्रणाली और जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं में भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं के मामले सामने आने से विभाग की छवि धूमिल होती है तथा आमजन का विश्वास कम होता है। दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होने से भविष्य में ऐसे मामलों पर अंकुश लगेगा और आमजन का सहकारिता पर विश्वास मजबूत होगा। लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण का भरोसा सहकारिता विभाग के शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां डॉ. समित शर्मा ने कहा कि गबन एवं अनियमितताओं के मामलों में विभाग द्वारा सहकारी अधिनियम की धाराओं के अंतर्गत जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई का प्रावधान है। केवल गंभीर प्रकृति के मामलों में ही एफआईआर दर्ज करवाई जाती है। उन्होंने कहा कि अधिकांश मामलों में पूर्व जांच हो चुकी होती है तथा आरोपी भी ज्ञात होते हैं, इसलिए पुलिस स्तर पर तत्काल कार्रवाई संभव है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई होने से निचले स्तर तक स्पष्ट संदेश जाएगा और अनियमितताओं पर रोक लगेगी। पुलिस एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अधिकारियों ने विश्वास दिलाया कि आगामी दिनों में कार्रवाई में तेजी लाते हुए लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जाएगा। ये रहे उपस्थित बैठक में पुलिस महानिरीक्षक, गृह विभाग दीपक कुमार, डीआईजी सीआईडी (सीबी) दीपक भार्गव, राजफेड के प्रबंध निदेशक सौरभ स्वामी, पुलिस अधीक्षक (एसीबी) गोरधन लाल, संयुक्त शासन सचिव सहकारिता विभाग प्रह्लाद सहाय नागा, एडिशनल डीसीपी पुलिस आयुक्तालय जयपुर नीतिराज सिंह सहित सहकारिता विभाग, पुलिस एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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ना करो सितम पर सितम, मुझे जीने दो

शहर की सुबह अब चिडिय़ों की चहचहाहट से नहीं, बल्कि सरकारी आदेशों की खडख़ड़ाहट से खुलती है। कहीं पेट्रोल पंप पर लंबी कतारें हैं, कहीं गैस एजेंसी के बाहर खाली सिलेंडर लिए खड़े लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। सडक़ पर निकलो तो ट्रैफिक पुलिस ऐसे घूरती है मानो जनता नहीं, कोई भगोड़ा अपराधी घूम रहा हो। और यदि गलती से किसी गरीब ने फुटपाथ के कोने पर अपनी रोजी-रोटी का छोटा सा ठिकाना बना लिया, तो समझो उसने व्यवस्था के खिलाफ सबसे बड़ा अपराध कर दिया। बेचारी पब्लिक आखिर करे भी तो क्या करे। उसकी आवाज अब नारे नहीं बनती, केवल आह बनकर रह जाती है। उसके हिस्से में विरोध नहीं, सिर्फ गिड़गिड़ाहट बची है। वह हाथ जोडक़र कहती है साहब, जीने दो। लेकिन व्यवस्था के कानों तक उसकी आवाज पहुंचती ही कहां है। वहां तो नोटों की खनखनाहट इतनी तेज है कि गरीब की चीखें दब जाती हैं। आज के दौर में प्रशासन की तलवार बड़ी अदभुत हो गई है। उसका एक सिरा गरीब की झोपड़ी काटता है और दूसरा अमीरों की तिजोरी चमकाता है। कानून की किताबें सबके लिए बराबर होने का दावा करती हैं, लेकिन उनकी स्याही भी शायद जेब देखकर रंग बदल लेती है। निर्धनों के लिए नियम लोहे की जंजीर हैं, जबकि रसूखदारों के लिए वही नियम मोम की तरह पिघल जाते हैं। आखिर इनका दर्द कौन जानें मंगलवार की दोपहर शहर ने एक ऐसा दृश्य देखा जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। फुटपाथ पर कुछ मजदूर परिवार अपने नन्हें बच्चों के साथ पतले कपड़ों और प्लास्टिक की चादरों से छोटा सा आशियाना बनाकर रह रहे थे। वे कोई महल नहीं खड़ा कर रहे थे, न ही सरकारी जमीन बेच रहे थे। वे तो केवल धूप से बचने की कोशिश कर रहे थे। दिनभर मजदूरी करने वाले इन लोगों की सबसे बड़ी ख्वाहिश सिर्फ इतनी थी कि शाम को बच्चे खुले आसमान के नीचे नहीं, बल्कि किसी कपड़े की ओट में सो जाएं। लेकिन व्यवस्था को यह मंजूर नहीं था। निकाय का अमला पहुंचा। जेसीबी ऐसे आगे बढ़ी मानो किसी आतंकवादी अड्डे को ध्वस्त करने जा रही हो। अधिकारियों के चेहरे पर कठोरता थी और गरीबों की आंखों में डर। मासूम बच्चे अपनी मांओं की उंगलियां पकडक़र सहमे खड़े थे। कुछ महिलाएं हाथ जोडक़र विनती कर रही थीं साहब, शाम तक रहने दो, बच्चे हैं। मगर वहां संवेदना नहीं, केवल आदेश था। और आदेश भी ऐसा, जिसका नाम लेते ही हर सवाल खत्म हो जाए। अधिकारी बोले यह कलेक्टरी आदेश है। यह वाक्य आजकल लोकतंत्र का सबसे बड़ा ब्रह्मास्त्र बन चुका है। इसके आगे इंसानियत, संवेदना, करुणा सब बौनी हो जाती हैं। अधिकारी भी इसे ऐसे बोलते हैं जैसे भगवान का फरमान सुना रहे हों। जनता सुनते ही चुप हो जाती है, क्योंकि उसे पता है कि इस आदेश के पीछे सत्ता की पूरी मशीनरी खड़ी है। क्या आदेश केवल गरीबों के लिए होते हैं? शहर की सडक़ों पर नजर दौड़ाइए। बड़े-बड़े प्रतिष्ठानों ने फुटपाथ निगल लिए। कहीं होटल वालों ने पार्किंग बना ली, कहीं दुकानदारों ने सडक़ तक सामान फैला दिया। कई रसूखदारों के भवन तो ऐसे खड़े हैं मानो सरकारी जमीन उनके दादा की विरासत हो। लेकिन वहां न जेसीबी पहुंचती है, न नोटिस चिपकते हैं। वहां कानून आंखों पर पट्टी बांध लेता है। क्योंकि वहां राजनीति की छतरी तनी होती है। वहां नोटों की खनखनाहट होती है। वहां फोन आते हैं अपने आदमी हैं, ध्यान रखना। और प्रशासन तुरंत समझ जाता है कि कौन-सा अतिक्रमण अवैध है और कौनसा सम्माननीय। व्यवस्था का यह दोहरा चरित्र अब छुपा नहीं है। गरीब के लिए नियमों की पूरी सेना उतर आती है, जबकि रसूखदारों के लिए कानून छुट्टी पर चला जाता है। यही कारण है कि शहर में अतिक्रमण की एक समानांतर दुनिया खड़ी हो चुकी है। फर्क सिर्फ इतना है कि गरीब का अतिक्रमण तिरपाल का होता है और अमीर का कंक्रीट का। गरीब की झोपड़ी एक घंटे में टूट जाती है, लेकिन रसूखदारों की बहुमंजिला दीवारों को वर्षों तक कोई हाथ नहीं लगाता। आखिर क्यों? क्योंकि गरीब के पास सिफारिश नहीं होती। उसके पास नेता का मोबाइल नंबर नहीं होता। उसके पास कुछ अधिकारियों की मेज तक पहुंचने वाली हरी पत्तियां नहीं होतीं। आज राजनीति और प्रशासन का रिश्ता भी बड़ा दिलचस्प हो गया है। जनता समझती है कि नेता जनता के सेवक हैं और अधिकारी व्यवस्था के रक्षक। लेकिन असल तस्वीर कुछ और ही है। यहां कई बार नेता और अधिकारी मिलकर ऐसा खेल खेलते हैं जिसमें जनता सिर्फ मोहरा बनकर रह जाती है। जब कार्रवाई करनी होती है तो गरीबों पर डंडा चलता है, ताकि अखबारों में सुर्खियां बनें प्रशासन सख्त। और जब रसूखदारों पर कार्रवाई की बारी आती है, तो फाइलें अचानक गायब हो जाती हैं, नोटिस ठंडे बस्ते में चले जाते हैं और जांच समितियां नींद में चली जाती हैं। यह वही राजनीति है जहां मंचों पर गरीबों के नाम पर आंसू बहाए जाते हैं, लेकिन पर्दे के पीछे उन्हीं गरीबों की झोपडिय़ां उजाड़ी जाती हैं। चुनाव आते हैं तो नेता गरीब की चौखट पर बैठकर रोटी खाते हैं, फोटो खिंचवाते हैं, बच्चों को गोद में उठाते हैं। लेकिन चुनाव खत्म होते ही वही गरीब प्रशासनिक बुलडोजर के नीचे कुचला जाता है। सबसे दुखद बात यह है कि गरीब अब विरोध भी नहीं करता। उसने शायद मान लिया है कि यह व्यवस्था उसके लिए बनी ही नहीं है। वह केवल तमाशा देखता है। उसकी आंखों में गुस्सा नहीं, बल्कि हार दिखाई देती है। मानसिक संवेदनाओं का विध्वंस फुटपाथ पर रोते वे मासूम बच्चे केवल अपने टूटे आशियाने को नहीं देख रहे थे, वे इस व्यवस्था का असली चेहरा देख रहे थे। वे समझ रहे थे कि इस शहर में गरीब होना सबसे बड़ा अपराध है। उन बच्चों ने देखा कि कैसे कुछ लोग फोन घुमाकर अपने अवैध निर्माण बचा लेते हैं। कैसे कुछ लोग नोटों की गड्डिया खनकाकर नियमों को खरीद लेते हैं। कैसे कुछ नेताओं की मुस्कान के पीछे गरीबों की बेबसी छुपी होती है। यह केवल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं थी, यह संवेदनाओं का विध्वंस था। विडंबना देखिए, प्रशासन विकास की बातें करता है। शहर को सुंदर बनाने के दावे किए जाते

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पैडल पर निकले अफसर, शहर को दे रहे पेट्रोल- डीजल बचत का संदेश

सिरोही। जब जिम्मेदार अफसर खुद साइकिल की घंटी के साथ सडक़ों पर उतरें, तो संदेश केवल शब्दों में नहीं, बल्कि पूरे शहर की सोच में उतर जाता है। सिरोही में इन दिनों कुछ ऐसा ही प्रेरणादायी दृश्य देखने को मिल रहा है, जहां पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पेट्रोल-डीजल बचाने, पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए साइकिल पर कार्यालय और निरीक्षण कार्य कर नई मिसाल पेश कर रहे हैं। जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर द्वारा शुरू की गई यह संदेशात्मक पहल अब जिले के पुलिस अधिकारियों तक भी पहुंच चुकी है। रविवार शाम अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सहित पुलिस अधिकारियों ने साइकिल पर शहर में सांयकालीन गश्त कर आमजन को ऊर्जा संरक्षण और फिटनेस का संदेश दिया। अधिकारियों की इस अनूठी मुहिम को शहरवासियों ने उत्साह और सराहना के साथ देखा। सडक़ों पर जब पुलिस अधिकारी साइकिल से गश्त करते नजर आए, तो लोगों में उत्सुकता के साथ सकारात्मक सोच भी जागृत हुई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक किशोरसिंह चौहान, डीएसपी मुकेश चौधरी, सब इंस्पेक्टर प्रेमसिंह तथा कोतवाली के सहायक उपनिरीक्षक सचिंद्र रतनू ने शहर के विभिन्न मार्गों पर साइकिल से गश्त की। इस दौरान अधिकारियों ने यातायात व्यवस्था का जायजा लिया तथा आमजन से कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग की अपील भी की। प्रदूषण घटाने और ईंधन बचाने की अपील पुलिस अधिकारियों ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण और ईंधन की खपत को देखते हुए साइकिल चलाने जैसी आदतों को बढ़ावा देना बेहद आवश्यक है। साइकिल न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अधिकारियों ने कहा कि यदि छोटी दूरी के लिए लोग मोटर वाहनों की बजाय साइकिल का उपयोग करें, तो पेट्रोल और डीजल की बड़ी मात्रा में बचत की जा सकती है तथा प्रदूषण को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। साइकिल गश्त के दौरान अधिकारियों ने शहर के प्रमुख मार्गों, बाजार क्षेत्रों और सार्वजनिक स्थलों का निरीक्षण किया। साथ ही व्यापारियों और आमजन से संवाद कर यातायात नियमों की पालना, हेलमेट पहनने और सडक़ सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने की अपील भी की। इस पहल का उद्देश्य केवल गश्त करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जिम्मेदारी का संदेश देना भी रहा। पुलिस विभाग की इस अनूठी पहल को लोगों ने प्रेरणादायी बताया। कई युवाओं ने कहा कि जब अधिकारी स्वयं साइकिल चलाकर उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं, तो इससे फिटनेस और पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई जागरूकता पैदा होगी।

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साइकिल क्रांति, सिरोही बना प्रेरणा केंद्र, प्रशासन ने दिया ऊर्जा संरक्षण का संदेश

ऊर्जा संरक्षण, फिट इंडिया और पर्यावरण सुरक्षा को मिला जन आंदोलन का स्वरूप  प्रशासनिक अधिकारियों की अनूठी पहल बनी बदलाव की मिसाल, आमजन और युवाओं में जागी नई जागरूकता सिरोही। बदलते वैश्विक हालात और बढ़ती ऊर्जा चुनौतियों के बीच सिरोही जिला प्रशासन ने एक सकारात्मक और प्रेरणादायक पहल करते हुए समाज के सामने जिम्मेदार नागरिकता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ईंधन एवं संसाधनों की बचत के आह्वान को धरातल पर उतारते हुए शुक्रवार को जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर के नेतृत्व में विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी और कर्मचारी साइकिल से अपने कार्यालय पहुंचे। इस अनूठी पहल ने न केवल ऊर्जा संरक्षण का संदेश दिया, बल्कि पर्यावरण सुरक्षा, स्वस्थ जीवनशैली और सामूहिक जिम्मेदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी नई दिशा प्रदान की। सुबह शहर की सडक़ों पर जब प्रशासनिक अधिकारी साइकिल चलाते हुए अपने कार्यालयों की ओर बढ़े तो यह दृश्य आमजन के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया। जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर के साथ मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रकाशचंद अग्रवाल, तहसीलदार जगदीश विश्नोई, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त निदेशक गोविंद चौधरी सहित कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने साइकिल के माध्यम से कार्यालय पहुंचकर यह संदेश दिया कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं। इस पहल को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसे जनभागीदारी और सामाजिक जागरूकता से जोडऩे का प्रयास किया गया। अधिकारियों ने आम नागरिकों से भी सप्ताह में कम से कम एक दिन साइकिल या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपील की। उनका मानना है कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में थोड़ी-सी ऊर्जा बचत को आदत बना ले, तो देश स्तर पर इसका व्यापक सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। ऊर्जा संरक्षण आर्थिक आवश्यकता ही नहीं बल्कि सामाजिक व पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने कहा कि वर्तमान समय में ऊर्जा संरक्षण केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी है। उन्होंने बताया कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें हमें वैकल्पिक और जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा देती हैं। साइकिल का उपयोग न केवल ईंधन बचाता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। नियमित साइकिल चलाने से शरीर स्वस्थ रहता है, प्रदूषण कम होता है और ट्रैफिक दबाव में भी कमी आती है। उन्होंने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि यदि संभव हो तो सप्ताह में कम से कम एक दिन निजी वाहन का उपयोग न करें। छोटी दूरी के लिए साइकिल अपनाएं या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि आने वाली पीढिय़ों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण तैयार करने में भी मदद मिलेगी। इस पहल के दौरान शहरवासियों ने भी प्रशासन के इस प्रयास की सराहना की। कई लोगों ने इसे सकारात्मक बदलाव की शुरुआत बताते हुए कहा कि जब प्रशासन स्वयं आगे बढक़र उदाहरण प्रस्तुत करता है, तब समाज में जागरूकता स्वत: बढ़ती है। युवाओं ने भी इस अभियान को फिटनेस और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए इसे नियमित रूप से अपनाने की बात कही। साइकिल संस्कृति को बढ़ावा देने से शहरी जीवन में कई सकारात्मक परिवर्तन संभव हैं। इससे वायु प्रदूषण में कमी आती है, ईंधन पर निर्भरता घटती है और नागरिकों का स्वास्थ्य बेहतर होता है। विकसित देशों में साइकिल आधारित परिवहन को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है और अब भारत के विभिन्न शहरों में भी इस दिशा में जागरूकता बढ़ रही है। सिरोही प्रशासन की यह पहल उसी सोच को मजबूत करने वाली मानी जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के प्रयास भविष्य में भी जारी रहेंगे और इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में कार्य किया जाएगा। विद्यालयों, महाविद्यालयों और सामाजिक संगठनों को भी इस अभियान से जोडऩे की योजना बनाई जा रही है ताकि युवाओं में ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूकता विकसित हो सके। वर्तमान समय में जब पूरी दुनिया ऊर्जा संकट और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब सिरोही प्रशासन का यह कदम एक सकारात्मक संदेश लेकर सामने आया है। यह पहल बताती है कि समाधान केवल बड़े स्तर की योजनाओं में ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की छोटी आदतों और सामूहिक प्रयासों में भी छिपा होता है।उल्लेखनीय है कि हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई है। सिरोही जिला मुख्यालय पर पेट्रोल के दाम बढक़र 109.32 रुपए प्रति लीटर और डीजल 94.42 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया है। ऐसे समय में ईंधन बचत को लेकर प्रशासन द्वारा शुरू किया गया यह संदेश आमजन को आर्थिक रूप से राहत देने के साथ-साथ संसाधनों के संतुलित उपयोग की दिशा में भी प्रेरित कर रहा है।  

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अपणायत के सेल्फी मोड में सरकार, गड्ढ़ों में भविष्य खोजते युवा

राज्य की राजनीति भी बड़ी अदभुत चीज है। यहां हर मौसम का अपना अलग सरकारी संस्करण होता है। गर्मी पड़े तो जनसंवाद, बारिश आए तो निरीक्षण, चुनाव नजदीक हों तो विकास यात्रा और जनता सवाल पूछने लगे तो अपणायत। इन दिनों प्रदेश में अपणायत ऋतु चल रही है। मुख्यमंत्री गांव-गांव घूम रहे हैं, किसी चौपाल में चाय पी रहे हैं, कहीं बच्चों के साथ सेल्फी ले रहे हैं, तो कहीं किसी बुजुर्ग के कंधे पर हाथ रखकर कैमरे को यह भरोसा दिला रहे हैं कि सरकार और जनता के बीच दूरी कम हो गईं है। इधर प्रदेश का एक युवा अपने कमरे में बंद बैठा है। टेबल पर नीट की किताबें खुली हैं, लेकिन उसका भरोसा बंद हो चुका है। उसे समझ नहीं आ रहा कि वह डॉक्टर बनने की तैयारी करे या सिस्टम की बीमारी का इलाज ढूंढे। क्योंकि परीक्षा में मेहनत कम और मैनेजमेंट ज्यादा काम आने लगा है। परीक्षा केंद्रों से लेकर रिजल्ट तक ऐसी कहानियां निकल रही हैं कि अब छात्र बायोलॉजी से ज्यादा सेटिंग साइंस को महत्वपूर्ण मानने लगे हैं। लेकिन सरकार चिंतित नहीं है। आखिर युवा का काम ही क्या है? वह या तो परीक्षा दे, या विरोध करे, या फिर अगली भर्ती का इंतजार करे। सरकार को तो फिलहाल गांव में अपणायत की फसल बोनी है। मुख्यमंत्रीजी गांव में घूमते हुए इतने सहज दिख रहे हैं मानो प्रदेश में सब कुछ ठीक चल रहा हो। ऐसा लग रहा है जैसे पूरा प्रशासन किसी पर्यटन विभाग की डॉक्यूमेंट्री शूट कर रहा हो। प्रदेश में इन दिनों सडक़ें भी बड़ी भावुक हो गई हैं। नई सडक़ों की घोषणाएं सुनते ही पुरानी सडक़ें टूटकर बिखर जाती हैं। उन्हें पता है कि अब उनका नंबर खत्म हो चुका है। नेताजी के क्षेत्र में नई सडक़ स्वीकृत हो जाए, इससे बड़ा विकास सूचकांक अब कोई नहीं। चाहे पुरानी सडक़ पर इतने गड्ढ़े हो कि कार चलाते-चलाते आदमी आध्यात्मिक यात्रा पर निकल जाए, लेकिन नई सडक़ का शिलान्यास जरूरी है। क्योंकि राजनीति में सडक़ की मजबूती नहीं, फीते की मजबूती मायने रखती है। प्रदेश का नागरिक भी अब समझदार हो गया है। वह जानता है कि सडक़ बनते समय उसमें डामर कम और फोटो ज्यादा डाले जाते हैं। ठेकेदार सडक़ नहीं बनाता, बल्कि भविष्य के गड्ढों की नींव रखता है। पहली बारिश आते ही सडक़ अपने मूल स्वरूप में लौट आती है। यानी मिट्टी। फिर अधिकारी निरीक्षण करते हैं, नेता नाराजगी जताते हैं और ठेकेदार अगले टेंडर की तैयारी करता है। यह एक पवित्र लोकतांत्रिक चक्र है, जिसे तोडऩा संविधान के खिलाफ माना जा सकता है। सडक़ हादसों की खबरें इतनी आम हो चुकी हैं कि अखबारों में अब उनके लिए भावनाएं भी सीमित हो गई हैं। तेज रफ्तार, अनियंत्रित, मौके पर मौत। ये शब्द अब खबर नहीं, स्थायी कॉलम बन चुके हैं। सडक़ें इतनी टूटी हुई हैं कि वाहन चलाने वाला व्यक्ति ड्राइवर कम और एडवेंचर स्पोट्र्स खिलाड़ी ज्यादा लगता है। कहीं गड्ढे बचाओ, कहीं आवारा पशु बचाओ, कहीं अचानक गायब हो जाने वाले डिवाइडर से बचो। ऊपर से प्रशासन कहता है सावधानी हटी, दुर्घटना घटी। जनता पूछना चाहती है साहब, सडक़ हटी तो क्या करें? भ्रष्टाचार की हालत तो यह है कि अब वह किसी विभाग में नहीं रहता, बल्कि पूरे सिस्टम का आधिकारिक शुभंकर बन चुका है। पहले लोग चोरी-छिपे रिश्वत लेते थे, अब बड़े आत्मविश्वास से लेते हैं। जैसे यह उनका संवैधानिक अधिकार हो। आम आदमी भी अब रिश्वत देते समय शर्मिंदा नहीं होता, बल्कि डरता केवल इस बात से है कि कहीं कम न पड़ जाए। सरकारी दफ्तरों में फाइलें अब पंखों से नहीं, नोटों की हवा से उड़ती हैं। प्रदेश का युवा सबसे ज्यादा भ्रमित है। उसे बचपन से सिखाया गया कि मेहनत करो, ईमानदारी से पढ़ो, आगे बढ़ोगे। लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ा होता है, उसे पता चलता है कि आगे वही बढ़ता है जिसकी पहुंच ऊपर तक हो। बाकी लोग केवल कोचिंग सेंटरों के पोस्टर में मुस्कुराने के लिए रह जाते हैं। नीट जैसी परीक्षाओं में धांधली की खबरें आने के बाद अब छात्रों को लगता है कि परीक्षा हॉल में वे प्रश्नपत्र हल नहीं कर रहे, बल्कि अपने भरोसे का पोस्टमार्टम कर रहे हैं। लेकिन सरकार के पास हर सवाल का एक सुंदर उत्तर है जांच होगी। इस देश में जांच एक ऐसी रहस्यमयी प्रक्रिया है, जिसमें समय के साथ जनता का गुस्सा समाप्त हो जाता है और फाइलें स्थायी निद्रा में चली जाती हैं। जांच समितियां बनती हैं, रिपोर्ट आती है, कुछ छोटे अधिकारी निलंबित होते हैं और फिर सब सामान्य हो जाता है। जैसे कुछ हुआ ही न हो। आखिर लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत यही है कि यहां हर घोटाला कुछ दिनों बाद पुरानी खबर बन जाता है। शीर्ष नेताओं को लोग गांवों में लोग फूल-मालाएं पहना रहे हैं। बच्चे कविताएं सुना रहे हैं। प्रशासन पहले से तय कर रहा है कि किस किसान को क्या बोलना है। ऐसा लगता है जैसे पूरा प्रदेश एक विशाल रियलिटी शो बन गया हो। इंडियाज बेस्ट अपणायत। कैमरे के सामने सब मुस्कुरा रहे हैं, कैमरे के पीछे बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और अव्यवस्था चाय पी रही है। राजनीति में आजकल संवेदनशीलता भी इवेंट मैनेजमेंट का हिस्सा बन चुकी है। कोई हादसा हो जाए तो नेता ट्वीट कर देता है दुखद। फिर अगले कार्यक्रम में ढोल-नगाड़ों के साथ मंच पर पहुंच जाता है। जनता भी अब अभ्यस्त हो चुकी है। उसे मालूम है कि उसकी समस्याएं केवल भाषणों में जीवित रहती हैं। जमीन पर वे अक्सर फाइलों में दम तोड़ देती हैं। प्रदेश की हालत उस छात्र जैसी हो गई है, जो परीक्षा में फेल होने के बाद भी मुस्कुराकर फोटो खिंचवा रहा हो ताकि रिश्तेदारों को शक न हो। ऊपर से विकास के होर्डिंग चमक रहे हैं, नीचे गड्ढों में वाहन फंस रहे हैं। मंचों पर रोजगार की बातें हो रही हैं, कोचिंग सेंटरों में छात्र निराशा की दवाइयां खोज रहे हैं। सबसे मजेदार बात यह है कि हर समस्या का समाधान अगली घोषणा में खोजा जा रहा है। सडक़ टूटी, नई सडक़ घोषित करो। परीक्षा में गड़बड़ी, नई समिति बना दो। भ्रष्टाचार बढ़ा, हेल्पलाइन जारी कर दो। जनता परेशान, अपणायत यात्रा निकाल दो। ऐसा लगता है कि सरकार प्रशासन नहीं चला

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विकास कार्यों की जमीनी पड़ताल, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

विभिन्न सुधारात्मक उपायों और आवश्यक कार्यवाहियों के दिए निर्देश सिरोही। जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने बुधवार को सिरोही शहर एवं आसपास के विभिन्न स्थानों का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विकास कार्यों, सफाई व्यवस्था, सड़क निर्माण, जल प्रबंधन तथा सौंदर्यीकरण से जुड़े विषयों की समीक्षा की।  जिला कलेक्टर ने सरस डेयरी के चिलिंग प्लांट, गोयली स्थित गौण मंडी फल-सब्जी मंडी यार्ड, एसटीपी प्लांट, निडोरा तालाब, टाउन हॉल, सरजावाव गेट, अनुसूचित जनजाति छात्रावास एवं विभिन्न सड़कों के निर्माण कार्यों का अवलोकन कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। सरस डेयरी के चिलिंग प्लांट के निरीक्षण के दौरान जिला कलेक्टर ने साफ-सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने तथा राज्य सरकार की बजट घोषणा से संबंधित भूमि कार्यों की त्वरित क्रियान्विति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने प्रयोगशाला में की जाने वाली जांचों, प्लांट की स्टोरेज व्यवस्था, विभिन्न संयंत्रों, समितियों से आने वाले दूध तथा रानीवाड़ा दूध भेजने की प्रक्रिया का गहनता से अवलोकन किया और आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। इसके बाद जिला कलेक्टर ने ग्राम गोयली में गौण मंडी फल-सब्जी यार्ड का निरीक्षण किया। उन्होंने वहां उपलब्ध सुविधाओं एवं अपेक्षित व्यवस्थाओं की जानकारी लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। साथ ही चिन्हित दुकानों, फुटकर दुकानों, थोक दुकानों एवं प्राप्त आपत्तियों के संबंध में भी जानकारी ली। जिला कलेक्टर ने निडोरा तालाब में अमृत 2.0 योजना के तहत चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने टाउन हॉल का अवलोकन करते हुए निर्माण कार्यों तथा विभिन्न तकनीकी विषयों की जानकारी लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। शहर के सौंदर्यीकरण पर चर्चा करते हुए जिला कलेक्टर ने ड्रेनेज सिस्टम में सुधार करने, विभिन्न स्थानों पर हुए अतिक्रमण हटाने तथा हवाई पट्टी के बाहर सड़कों के किनारे पौधारोपण करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने गोयली चौराहा, अनादरा चौराहा, तीन बत्ती चौराहा एवं भाटकड़ा चौराहा के विकास के लिए विस्तृत प्लान तैयार करने को कहा। उन्होंने भाटकड़ा से अनादरा चौराहे तक पैचवर्क कार्य गुणवत्तापूर्ण तरीके से करवाने के निर्देश दिए। वहीं सरजावाव से झालरा बावड़ी तक सड़क निर्माण कार्य को त्वरित गति से पूर्ण करने की बात कही। जिला कलेक्टर ने निर्माणाधीन राजकीय अंबेडकर अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास का भी निरीक्षण किया तथा कार्य को गुणवत्तापूर्ण एवं शीघ्रता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। एसटीपी प्लांट के निरीक्षण के दौरान उन्होंने पानी वितरण व्यवस्था, ड्यू कनेक्शन से संबंधित कार्यों तथा पानी की गुणवत्ता को लेकर अधिकारियों से चर्चा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान उपखंड अधिकारी हरिसिंह देवल, आयुक्त जोधाराम विश्नोई सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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केवल शादी नहीं बल्कि सेवा का संकल्प, रामपुरा में बेटी के विवाह ने जगाई करुणा की अलख

बेटी के विवाह में दिखा गौसेवा का अनूठा संगम खौड़ (पाली)। अक्सर शादियां सिर्फ उत्सव बनकर रह जाती हैं, लेकिन ग्राम पंचायत बडेरावास के गांव रामपुरा में एक विवाह ने इस परंपरा को नई दिशा दे दी। सरपंच लीला चौधरी और अमराराम चौधरी ने अपनी पुत्री के विवाह को सामाजिक सरोकारों से जोड़ते हुए इसे गौसेवा के महाअभियान में बदल दिया। रविवार रात जहां आमतौर पर बंदोली की धूम होती है, वहीं यहां गौ भक्ति संध्या का आयोजन हुआ। रामपुरा खैरवा स्थित प्रभु प्रेमी गौशाला में सजी इस संध्या ने पूरे क्षेत्र को सेवा, संवेदना और संस्कारों के रंग में रंग दिया। प्रसिद्ध गायक ओम मुंडेल और उनकी टीम ने जैसे ही मंच संभाला, वातावरण भक्ति में डूब गया। गौ माता री सेवा सूं मोटो ना कोई धरम जैसे भजनों पर श्रोता देर रात तक झूमते रहे। यह महज सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक ऐसा भावनात्मक जागरण था, जहां हर व्यक्ति ने खुद को गौसेवा से जुड़ा हुआ महसूस किया। यह आयोजन रामपुरा खैरवा स्थित प्रभु प्रेमी गौशाला में हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र में सेवा और संस्कार का संदेश फैलाया। गौ भक्ति संध्या में प्रसिद्ध गायक ओम मुंडेल और उनकी टीम ने गौ माता की महिमा का ऐसा रस घोला कि पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा। गौ माता री सेवा सूं मोटो ना कोई धरम… जैसे भजनों पर श्रोता देर रात तक झूमते रहे। यह केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि गौसेवा के प्रति भावनात्मक जागरण का सजीव दृश्य था, जहां हर व्यक्ति ने खुद को इस पुण्य कार्य से जुड़ा महसूस किया। घोषणाओं की गूंज, गौशाला विकास के लिए उमड़ा सहयोग इस प्रेरणादायक आयोजन में भामाशाहों ने दिल खोलकर सहयोग की घोषणाएं कीं, जिससे गौशाला विकास को नई दिशा मिली। पुनाराम लच्छाराम देवड़ा (कराड़ी, हाल पुणे) ने गौशाला में कार्यालय निर्माण की घोषणा की। अचलाराम नाराराम पंवार (गोदावास) एवं महेंद्रकुमार देवाराम राठौड़ (आंकड़ावास) ने संयुक्त रूप से स्वराज 733 मॉडल ट्रैक्टर भेंट करने का संकल्प लिया। भंवरलाल, खरताराम, रमेश कुमार, पुखराज पुत्र गोमाराम आगलेचा ने लगभग 7 लाख रुपए की लागत से पक्षी घर व चबूतरा बनाने की घोषणा की। रामलाल पुत्र मोतीलाल सेणचा (रामपुरा, हाल गांधीधाम) ने ट्रैक्टर ट्रॉली देने की घोषणा की। कन्याबाई पत्नी वेनाराम मुलेवा एवं भंवर शिवसेना ने चारा कुतर मशीन भेंट करने का संकल्प लिया। सुखीबाई पत्नी दिवंगत लुंबाराम काग ने ट्रैक्टर कल्टीवेटर, तथा भंवरलाल पुत्र मूलाराम पंवार (बाड़सा, पुणे) ने सीड ड्रिल कल्टीवेटर देने की घोषणा की। विद्यादेवी पत्नी खरताराम काग (सोडावास, हाल मुंबई) ने गौ माता हेल्प मशीन भेंट की। डूंगाराम पुत्र हेमाराम वर्पा (गोदावास) ने डिस्क प्लाऊ (दो तवी) देने का संकल्प लिया। नारायणलाल पुत्र पकाराम काग ने गौशाला से जुड़े सभी जेसीबी कार्य अपनी मशीन से निशुल्क करने की घोषणा की। इसके साथ ही विंजाराम भीलवाड़ा, दुर्गाराम सेंणचा, कोलाराम सेंणचा, देवीलाल अड़ाणिया सोनी, लुंबाराम चोयल, पपसा चोयल, मुकेशकुमार आगलेचा, तिलोकराम, डूंगाराम सेंणचा, मांगीलाल आगलेचा, देवाराम केनपुरा, शेराराम सेंणचा, डूंगाराम काग, नारायणलाल मुलेवा मेवाड़, चंपादेवी चौहान, पिंकीदेवी सेंणचा, गुडियाबाई पाली, प्रवीणकुमार नथाराम आगलेचा (रामपुरा) एवं रताराम-रुपाराम देवासी (केनपुरा) सहित अनेक भामाशाहों ने नकद राशि देकर गौशाला को सशक्त बनाने में योगदान दिया। सम्मान और आभार, सेवा ही सबसे बड़ा संस्कार सरपंच लीला चौधरी और अमराराम चौधरी ने सभी भामाशाहों का साफा, शॉल और माला पहनाकर अभिनंदन किया। अमराराम चौधरी ने भावुक शब्दों में कहा किबेटी का विवाह तो केवल एक निमित्त है, हमारा उद्देश्य गौसेवा के इस पुण्य कार्य को आगे बढ़ाना है। जिन दानदाताओं ने सहयोग दिया, हम उनके सदैव आभारी रहेंगे। जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने बढ़ाई गरिमा इस प्रेरणादायक आयोजन में कैबिनेट मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक जोराराम कुमावत, सांसद पीपी चौधरी, पाली प्रधान मोहनीदेवी पुखराज पटेल, अखिल भारतीय सीरवी समाज के महासचिव भंवर चौधरी, सहित आसपास के गांवों के पंच-पटेल और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। एक संदेश जो दिलों में बस गया यह आयोजन सिर्फ एक शादी नहीं, बल्कि समाज को जोडऩे, सेवा को बढ़ावा देने और संस्कारों को जीवित रखने का उदाहरण बन गया। रामपुरा की इस पहल ने साबित कर दिया कि जब खुशियों में सेवा का रंग घुल जाता है, तो वह अवसर प्रेरणा की मिसाल बन जाता है।

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माइंड मैट्रिक्स प्रतियोगिता का भव्य आयोजन

जोधपुर के जी.डी. मेमोरियल ग्रुप ऑफ कॉलेज में ज्ञान और प्रतिभा का उत्सव जोधपुर। सेक्टर चार, कुड़ी भगतासनी हाउसिंग बोर्ड स्थित जी.डी. मेमोरियल ग्रुप ऑफ कॉलेज में 25 अप्रे्रल को माइंड मैट्रिक्स प्रतियोगिता का भव्य एवं आकर्षक आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता, तर्कशक्ति और समसामयिक विषयों पर पकड़ को परखने के लिए विशेष रूप से प्रश्नोत्तरी सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने उत्साह और आत्मविश्वास के साथ हिस्सा लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के निदेशक प्रो. जे.जे. मिश्रा की ओर से सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर उपस्थित सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने ज्ञान की देवी माँ सरस्वती का स्मरण करते हुए कार्यक्रम की सफलता की कामना की। वातावरण पूरी तरह शैक्षणिक ऊर्जा और सकारात्मकता से भर गया। छह टीमों के बीच हुआ रोमांचक मुकाबला प्रतियोगिता में ग्रुप ऑफ कॉलेज की कुल 6 टीमों ने भाग लिया। सभी टीमों के बीच प्रतिस्पर्धा अत्यंत रोचक और ज्ञानवर्धक रही। प्रतिभागियों ने सामान्य ज्ञान, करंट अफेयर्स, तार्किक प्रश्नों और विषय आधारित क्विज के विभिन्न चरणों में शानदार प्रदर्शन किया। हर राउंड के साथ प्रतियोगिता का स्तर और भी चुनौतीपूर्ण होता गया, जिससे प्रतिभागियों की बौद्धिक क्षमता का वास्तविक परीक्षण हो सका। दर्शकों के रूप में उपस्थित विद्यार्थियों ने भी हर सही उत्तर पर तालियों से उत्साहवर्धन किया। प्रतियोगिता में कला संकाय की टीम—गर्वित चौहान, अमित एवं कुसुम देवासी ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। तीनों प्रतिभागियों ने अपने सटीक उत्तरों और बेहतरीन टीमवर्क के बल पर सभी राउंड में बढ़त बनाए रखी और अंतत: विजेता बनने में सफल रहे। उपविजेता बनी गोमी देवी महिला शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय की टीम वहीं, गोमी देवी महिला शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय की टीम की सौम्या पुरोहित, कल्पना चौधरी एवं गोमती ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए उपविजेता का स्थान प्राप्त किया। इस टीम ने कई कठिन प्रश्नों के सटीक उत्तर देकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया और अंत तक कड़ी टक्कर दी। विजेताओं को किया गया सम्मानित महाविद्यालय प्रशासन की ओर से विजेता टीम (आर्ट्स) को 1100 तथा उपविजेता टीम (एजुकेशन) को 500 नगद पुरस्कार के साथ प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। पुरस्कार वितरण के दौरान विद्यार्थियों के चेहरे पर खुशी और गर्व साफ झलक रहा था। इस अवसर पर शिक्षकों ने विजेता एवं उपविजेता टीमों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। समकालीन विषयों पर आधारित प्रश्नों ने बढ़ाया उत्साह कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों से समकालीन विषयों पर आधारित विविध प्रश्न पूछे गए। इनमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं, विज्ञान, इतिहास, साहित्य तथा सामाजिक विषयों से जुड़े प्रश्न शामिल थे। प्रतिभागियों ने न केवल सही उत्तर दिए, बल्कि कई प्रश्नों पर अपने विचार भी प्रस्तुत किए, जिससे कार्यक्रम और भी ज्ञानवर्धक बन गया। यह प्रतियोगिता विद्यार्थियों के लिए सीखने और अपनी समझ को विस्तार देने का बेहतरीन मंच साबित हुई। मंच संचालन और आयोजन में रही महत्वपूर्ण भूमिका कार्यक्रम का मंच संचालन सहायक आचार्य राधिका पारिक की ओर से प्रभावी एवं आकर्षक ढंग से किया गया। उन्होंने पूरे कार्यक्रम को सुव्यवस्थित तरीके से संचालित करते हुए प्रतिभागियों और दर्शकों को जोड़े रखा। प्रतियोगिता के समन्वयक के रूप में डॉ. गीता सांखला, डॉ. आदिति मुथा तथा सहायक आचार्य वीवा सिंह चम्पावत ने तकनीकी एवं क्विज मास्टर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनके कुशल मार्गदर्शन और समन्वय के कारण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो सका। इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। माइंड मैट्रिक्स प्रतियोगिता जैसे आयोजन न केवल विद्यार्थियों के ज्ञान को बढ़ाते हैं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, टीमवर्क और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता का भी विकास करते हैं। महाविद्यालय प्रशासन द्वारा इस तरह के आयोजन समय-समय पर किए जाते हैं, जिससे विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। निदेशक ने किया उत्साहवर्धन कार्यक्रम के अंत में निदेशक प्रो. जे.जे. मिश्रा ने सभी प्रतिभागियों, महाविद्यालय के सहायक आचार्यों एवं विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं और भविष्य में भी ऐसे आयोजन निरंतर किए जाएंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे इसी तरह अपनी प्रतिभा को निखारते रहें और शिक्षा के साथ-साथ प्रतिस्पर्धात्मक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी निभाएं। कार्यक्रम के सफल आयोजन से महाविद्यालय परिसर में उत्साह का माहौल देखने को मिला। विद्यार्थियों और शिक्षकों ने इसे एक यादगार अनुभव बताया।  

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सिरोही कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर को मिला एक्सीलेंस पुरस्कार

लखपति दीदी योजना में उत्कृष्ट कार्य के लिए राज्य स्तर पर हुआ सम्मान सिरोही। लोक सेवा दिवस के अवसर पर जयपुर में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में सिरोही जिला कलेक्टर रोहिताश्वसिंह तोमर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास के हाथों सीएम एक्सीलेंस पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें फ्लैगशिप योजनाओं की श्रेणी में बारां जिले में पदस्थापन के दौरान लखपति दीदी योजना के तहत किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए प्रदान किया गया। यह उपलब्धि न केवल सिरोही जिले के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे राज्य प्रशासनिक तंत्र के लिए प्रेरणादायक उदाहरण भी बनकर उभरी है। तोमर के नेतृत्व में बारां जिले में ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में जो बदलाव देखने को मिला, उसने इस योजना को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। लखपति दीदी योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोडऩे की सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, ताकि वे अपनी आय बढ़ाकर सालाना एक लाख रुपए या उससे अधिक कमा सकें। योजना की प्रारंभिक अवस्था को चरम तक पहुंचाया बारां जिले में जब रोहिताश्वसिंह तोमर ने पदभार संभाला, तब यह योजना प्रारंभिक अवस्था में थी। कई समूह सक्रिय नहीं थे और महिलाओं को योजना के लाभों की पूरी जानकारी भी नहीं थी। ऐसे में तोमर ने इसे मिशन मोड में लागू करते हुए व्यापक बदलाव की शुरुआत की। तोमर के नेतृत्व में प्रशासन ने गांव-गांव जाकर महिलाओं को योजना से जोडऩे का अभियान चलाया। उन्होंने केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर जाकर समूहों की समस्याओं को समझा और उनका समाधान किया। अधिकारियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से घर-घर जाकर महिलाओं को योजना के बारे में जानकारी दी गई। महिलाओं को सिलाई, बुनाई, डेयरी, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प आदि क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया गया। बैंकिंग और वित्तीय समावेशन स्वयं सहायता समूहों को बैंक से जोडक़र उन्हें आसान ऋण सुविधा उपलब्ध कराई गई। महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों को स्थानीय और ऑनलाइन बाजारों से जोडऩे के प्रयास किए गए, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई। तोमर के प्रयासों का सबसे बड़ा प्रभाव महिलाओं की आय में वृद्धि के रूप में सामने आया। कई महिलाएं, जो पहले आर्थिक रूप से निर्भर थीं, आज स्वयं अपने परिवार की आय का प्रमुख स्रोत बन चुकी हैं। बारां जिले में हजारों महिलाओं ने इस योजना के माध्यम से अपनी आय को बढ़ाकर लखपति दीदी बनने का लक्ष्य हासिल किया। इससे न केवल उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ, बल्कि समाज में उनकी स्थिति भी मजबूत हुई। सामाजिक बदलाव की मिसाल बना बारां मॉडल बारां जिले में लागू किया गया यह मॉडल केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी कारण बना। परिवारों में निर्णय लेने की क्षमता में उनकी भागीदारी बढ़ी बेटियों की शिक्षा पर जोर बढ़ा। यह मॉडल अब अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बन चुका है और राज्य स्तर पर इसे अपनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। तोमर ने इस योजना को सफल बनाने के लिए केवल प्रशासनिक मशीनरी पर निर्भर नहीं रहे, बल्कि स्थानीय समुदाय, स्वयंसेवी संस्थाओं और बैंकिंग संस्थानों को भी साथ जोड़ा। पुरस्कार प्रदान करते समय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने रोहिताश्व सिंह तोमर के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के नवाचार और समर्पण से ही सरकारी योजनाएं वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचती हैं। उन्होंने कहा कि बारां में किया गया कार्य अन्य जिलों के लिए मार्गदर्शक है और इससे राज्य की विकास यात्रा को नई दिशा मिलेगी। वर्तमान में सिरोही के जिला कलेक्टर के रूप में कार्यरत तोमर की इस उपलब्धि से जिले के प्रशासनिक अधिकारियों और नागरिकों में खुशी की लहर है। सिरोही के लोगों का मानना है कि जिस प्रकार उन्होंने बारां में उत्कृष्ट कार्य किया, उसी तरह वे यहां भी विकास की नई इबारत लिखेंगे। रोहिताश्व सिंह तोमर की कार्यशैली युवा प्रशासनिक अधिकारियों के लिए प्रेरणा बन रही है। उनका फोकस हमेशा परिणामों पर रहता है और वे हर योजना को आम जनता तक पहुंचाने के लिए नवाचार करने से पीछे नहीं हटते। उनकी यह उपलब्धि यह दर्शाती है कि यदि इच्छाशक्ति और समर्पण हो, तो सरकारी योजनाओं के माध्यम से समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। लखपति दीदी योजना की सफलता के बाद अब राज्य सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों को और अधिक मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। आने वाले समय में इन समूहों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोडऩे, ई-कॉमर्स के माध्यम से उत्पादों की बिक्री बढ़ाने और नई तकनीकों का उपयोग करने पर जोर दिया जाएगा। एक अधिकारी, जिसने बदल दी हजारों जिंदगियां रोहिताश्व सिंह तोमर को मिला सीएम एक्सीलेंस पुरस्कार केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उन हजारों महिलाओं की मेहनत और संघर्ष की भी पहचान है, जिनके जीवन में इस योजना के माध्यम से सकारात्मक बदलाव आया है। बारां जिले में उनके द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों ने यह साबित कर दिया है कि सही नेतृत्व और प्रभावी क्रियान्वयन से सरकारी योजनाएं वास्तव में समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकती हैं।

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