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602 वें स्थापना दिवस पर सूना रहा सिरोही, प्रशासन की बेरुखी से आहत हुए शहरवासी

 इतिहास का सम्मान होना चाहिए था, वहां पसरी रही खामोशी सिरोही। सिरोही के 602वें स्थापना दिवस जैसे गौरवशाली, पावन और ऐतिहासिक अवसर पर इस बार प्रशासनिक स्तर पर कोई विशेष आयोजन नहीं होना शहरवासियों के लिए गहरी निराशा का कारण बना। जिस दिन पूरे नगर को अपनी समृद्ध विरासत, संस्कृति और इतिहास का उत्सव मनाते हुए एकजुट होना चाहिए था, उसी दिन जिम्मेदार तंत्र की चुप्पी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। स्थापना दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि शहर की पहचान, उसके गौरवशाली अतीत और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक होता है। ऐसे महत्वपूर्ण अवसर पर प्रशासन की निष्क्रियता ने यह संदेश दिया कि शायद अब परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के प्रति संवेदनशीलता कम होती जा रही है। शहर के बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, हर वर्ग में इस बात को लेकर नाराजगी और मायूसी साफ तौर पर देखी गई। चौधरी लाइन के नागरिकों ने निभाई परंपरा जब प्रशासनिक तंत्र मौन रहा, तब सिरोही की जागरूक जनता ने अपनी जिम्मेदारी निभाई। चौधरी लाइन क्षेत्र के परिवारों, व्यापारियों एवं आसपास के नागरिकों ने इस ऐतिहासिक दिन को यूं ही गुजरने नहीं दिया। शाम को शीशाजी मंदिर प्रांगण में एकत्रित होकर उन्होंने आरती का आयोजन किया और शहर की सुख-समृद्धि, शांति और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। यह आयोजन इस बात का सशक्त उदाहरण बना कि सिरोही की जनता आज भी अपने संस्कारों, परंपराओं और इतिहास से गहराई से जुड़ी हुई है। लोगों ने कहा कि चाहे प्रशासन साथ दे या न दे, लेकिन शहर की अस्मिता और परंपरा को जीवित रखना हर नागरिक का कर्तव्य है। यही कारण है कि सीमित संसाधनों के बावजूद नागरिकों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस आयोजन को सफल बनाया। दो वर्ष पहले था उत्साह, अब उदासीनता? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दो वर्ष पूर्व जब संयम विधायक थे, तब सिरोही स्थापना दिवस बड़े उत्साह, उल्लास और गरिमा के साथ मनाया जाता था। उस समय प्रशासन और जनप्रतिनिधि दोनों मिलकर इस दिन को यादगार बनाते थे। विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, सामाजिक आयोजन और शहर की विरासत को प्रदर्शित करने वाली गतिविधियां आयोजित की जाती थीं, जिससे लोगों में गर्व और उत्साह का माहौल बनता था। लेकिन पिछले दो वर्षों से स्थिति पूरी तरह बदलती नजर आ रही है। अब यह गौरवमयी दिवस उपेक्षा का शिकार होता दिख रहा है। न तो प्रशासन की ओर से कोई पहल दिखाई देती है और न ही जनप्रतिनिधियों की सक्रियता नजर आती है। इस बदलाव ने शहरवासियों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर उनकी भावनाओं और शहर की परंपराओं के प्रति जिम्मेदार लोगों की संवेदनाएं कहां खो गई हैं? आस्था और इतिहास का केंद्र शीशाजी मंदिर सिरोही नगर की स्थापना के इतिहास में शीशाजी मंदिर का विशेष महत्व है। मान्यता है कि जब सिरोही नगर की स्थापना का संकल्प लिया गया था, तब सर्वप्रथम इसी पवित्र मंदिर की स्थापना की गई थी। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सिरोही की आस्था, संस्कृति, समृद्ध परंपरा और गौरवशाली इतिहास का मूल आधार एवं प्रेरणास्रोत है। स्थापना दिवस जैसे अवसर पर इस मंदिर में आयोजन होना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह शहर की जड़ों से जुडऩे और अपनी पहचान को सहेजने का भी माध्यम है। शाम 7.30 बजे हुई आरती, गूंजे श्रद्धा के स्वर स्थापना दिवस के अवसर पर शाम साढे सात बजे श्री शीशाजी मंदिर, चौधरी लाइन, सदर बाजार में भव्य आरती का आयोजन किया गया। आरती के दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। दीपों की रोशनी, मंत्रोच्चार और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को अत्यंत भावनात्मक और प्रेरणादायक बना दिया। शहरवासियों ने एक स्वर में सिरोही की सुख-शांति, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की। यह दृश्य इस बात का प्रतीक था कि चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों, लेकिन सिरोही की जनता अपने शहर के प्रति प्रेम और समर्पण में कभी कमी नहीं आने देगी। इनकी रही मौजूदगी इस आयोजन में क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। वरिष्ठजनों में किशोर चौधरी, जयंतीलाल , व्यापारी वर्ग से राजू भाई, नितेश उर्फ लाला , जय, विक्रम हरण, निरंजन भाई सहित क्षेत्र की महिलाएं एवं अनेक नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर न केवल आरती में भाग लिया, बल्कि शहर के विकास और समृद्धि के लिए सामूहिक संकल्प भी लिया।    

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समारोहों पर संकट: गैस सिलेंडर की कमी पर लोढ़ा ने मांगा तुरंत समाधान

ग्रामीण क्षेत्रों में शादी-ब्याह और धार्मिक आयोजनों पर असर, आपूर्ति सुधारने के दिए सुझाव सिरोही। जिले में कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की लगातार बनी हुई किल्लत अब एक गंभीर जनसमस्या का रूप लेती जा रही है। इस मुद्दे को लेकर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा से सीधे फोन पर बात कर स्थिति से अवगत कराया और तत्काल समाधान की मांग की। लोढ़ा ने मंत्री का ध्यान विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की ओर आकर्षित करते हुए बताया कि वहां कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की भारी कमी के कारण शादी-विवाह और धार्मिक समारोहों के आयोजन में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के सामाजिक और पारिवारिक आयोजनों में गैस की उपलब्धता बेहद जरूरी होती है, लेकिन वर्तमान स्थिति में लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंत्री को भेजे गए पत्र में संयम लोढ़ा ने विस्तार से बताया कि सिरोही जिले की ग्रामीण गैस एजेंसियों को कॉमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति अनियमित रूप से हो रही है। कई एजेंसियों को पर्याप्त मात्रा में सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है। इसका सीधा असर आमजन पर पड़ रहा है, खासकर उन परिवारों पर जिनके यहां विवाह या अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होने वाले हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कई जगहों पर लोगों को समय पर सिलेंडर नहीं मिलने के कारण वैकल्पिक व्यवस्थाएं करनी पड़ रही हैं, जिससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। प्रशासनिक प्राथमिकता से वितरण की मांग पूर्व विधायक लोढ़ा ने मंत्री से आग्रह किया कि इस समस्या के समाधान के लिए जिला प्रशासन को निर्देशित किया जाए कि वह कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों का वितरण प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करे। विशेष रूप से शादी-विवाह और धार्मिक आयोजनों के लिए सिलेंडरों की उपलब्धता को प्राथमिकता दी जाए, ताकि सामाजिक कार्यक्रमों में किसी प्रकार की बाधा न आए। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे आयोजनों के लिए सिलेंडरों का वितरण प्रशासनिक अनुमति के आधार पर किया जाए, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और वास्तविक जरूरतमंदों को ही प्राथमिकता मिल सके। मांग के अनुसार आपूर्ति के निर्देश देने की अपील लोढ़ा ने मंत्री सुमित गोदारा से यह भी मांग की कि गैस आपूर्ति करने वाली कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि वे जिले की वास्तविक मांग के अनुसार कॉमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति सुनिश्चित करें। वर्तमान में आपूर्ति की कमी के कारण स्थिति बिगड़ती जा रही है, जिसे समय रहते नियंत्रित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि कंपनियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएं और आपूर्ति प्रणाली को मजबूत किया जाए, तो इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है। व्यावसायिक और सामाजिक उपयोग में संतुलन जरूरी लोढ़ा ने अपने सुझाव में यह भी उल्लेख किया कि कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों के वितरण में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। एक ओर जहां शादी-विवाह और धार्मिक आयोजनों के लिए प्राथमिकता दी जानी चाहिए, वहीं शेष सिलेंडरों को व्यावसायिक उपयोग के लिए भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित न हों। उन्होंने कहा कि यदि इस दिशा में स्पष्ट नीति बनाई जाती है, तो दोनों प्रकार की आवश्यकताओं को संतुलित किया जा सकता है और किसी भी वर्ग को असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।  

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सिरोही में जनसेवा का नया अध्याय विधायक जनसेवा केंद्र

मंत्री देवासी ने शुरु किया केंद्र, पहले दिन ही मिली आमजन को राहत    प्रदेशध्यक्ष मदन राठौड़, सांसद लुम्बाराम चौधरी भी रहे मौजूद सिरोही। राजस्थान की राजनीति और जनसेवा के क्षेत्र में एक सकारात्मक पहल करते हुए राज्य सरकार के मंत्री एवं स्थानीय विधायक ओटाराम देवासी ने सिरोही में विधायक जनसेवा केंद्र का शुभारंभ किया। इस केंद्र की खास बात यह रही कि उदघाटन के पहले ही दिन इसे औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि आमजन की समस्याओं का समाधान और सहायता कार्य तुरंत शुरू कर दिया गया। यह पहल न केवल प्रशासनिक कार्यों को सरल बनाएगी, बल्कि आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का एक मजबूत माध्यम भी बनेगी। इस सेवा केंद्र के शुभारंभ के साथ ही यह संदेश साफ तौर पर दिया गया कि सरकार अब जनता की समस्याओं के समाधान के लिए एक व्यवस्थित और सुलभ व्यवस्था बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। पहले दिन ही कई लोगों के कार्यों का निस्तारण कर यह केंद्र लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा। जनसेवा केंद्र के उदघाटन के साथ ही आमजन की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुनने और समाधान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। यहां आने वाले लोगों ने बताया कि पहले उन्हें अपनी समस्याओं के समाधान के लिए कई कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे, लेकिन अब एक ही स्थान पर उनकी बात सुनी जा रही है और त्वरित कार्रवाई भी हो रही है। केंद्र पर नियुक्त स्टाफ को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है ताकि वे विभिन्न विभागों से जुड़े मामलों को समझकर तुरंत उचित दिशा में कार्यवाही कर सकें। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। दुखद घटना में मिली सहायता इस मौके पर एक संवेदनशील पहल भी देखने को मिली, जिसने प्रशासन की मानवीयता को उजागर किया। मनोरा निवासी घांची समाज की एक बेटी की हाईटेंशन विद्युत लाइन की चपेट में आने से दुखद मृत्यु हो गई थी। यह घटना पूरे क्षेत्र के लिए बेहद पीड़ादायक रही। इस मामले में मंत्री ओटाराम देवासी के विशेष प्रयासों से पीडि़त परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की गई। कार्यक्रम के दौरान मंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और सांसद के हाथों से पीडि़त परिवार को 5 लाख रुपए का चेक सौंपा गया। इस सहायता ने न केवल परिवार को आर्थिक संबल दिया, बल्कि यह भी दर्शाया कि सरकार जनता के दुख-दर्द में उनके साथ खड़ी है। अन्य लाभार्थियों को भी मिला सहयोग इस कार्यक्रम में केवल एक परिवार ही नहीं, बल्कि विभिन्न विभागों के माध्यम से कई अन्य जरूरतमंद लोगों को भी सहायता राशि के चेक वितरित किए गए। इसमें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, चिकित्सा सहायता, दुर्घटना सहायता और अन्य सरकारी योजनाओं के लाभार्थी शामिल रहे। पंचायत समिति सिरोही में शुरू किया गया यह विधायक सेवा केंद्र क्षेत्र के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा साबित होने जा रहा है। यहां पर नियुक्त स्टाफ नागरिकों की समस्याओं को सुनकर संबंधित विभागों तक पहुंचाने और उनका समाधान कराने का कार्य करेगा। इस केंद्र के माध्यम से सरकारी योजनाओं की जानकारी और आवेदन सहायता, पेंशन, राशन, चिकित्सा और शिक्षा से जुड़े मामलों का समाधान,बिजली, पानी, सडक़ जैसी मूलभूत समस्याओं पर कार्रवाई, शिकायत दर्ज कर उसका फॉलो-अप,दस्तावेजी सहायता और मार्गदर्शन दिया जाएगा। यह केंद्र प्रशासन और जनता के बीच एक सेतु का कार्य करेगा, जिससे लोगों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह सेवा केंद्र केवल एक स्थानीय पहल नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान के लिए एक मॉडल के रूप में उभर रहा है। बताया जा रहा है कि यह प्रदेश का पहला विधायक सेवा केंद्र है, जो इस स्तर पर आमजन के लिए समर्पित किया गया है। इस पहल से अन्य जिलों और विधायकों को भी प्रेरणा मिलेगी और भविष्य में ऐसे केंद्र पूरे प्रदेश में स्थापित किए जा सकते हैं। इससे शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी और जनहितैषी बन सकेगी। जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी कार्यक्रम में मंत्री ओटाराम देवासी के साथ-साथ प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, सांसद लुुंबाराम चौधरी और अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस पहल को और भी मजबूत बनाया। सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि जनता की सेवा ही उनका मुख्य उद्देश्य है और यह केंद्र उसी दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस केंद्र का अधिक से अधिक उपयोग करें और अपनी समस्याओं को बिना किसी संकोच के यहां प्रस्तुत करें। पारदर्शिता और जवाबदेही की ओर कदम विधायक सेवा केंद्र की स्थापना से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि प्रशासन अब पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दे रहा है। यह केंद्र न केवल समस्याओं के समाधान का माध्यम बनेगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचे। भविष्य में इस केंद्र के माध्यम से डिजिटल सेवाओं को भी जोड़ा जा सकता है, जिससे लोग ऑनलाइन भी अपनी शिकायत दर्ज कर सकेंगे और उसकी स्थिति ट्रैक कर सकेंगे। यह केंद्र केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक गंभीर और समर्पित प्रयास है। अब यह जिम्मेदारी आमजन की भी है कि वे इस सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करें और इसे सफल बनाएं, ताकि यह मॉडल पूरे प्रदेश में लागू किया जा सके। इनको मिला आर्थिक सहयोग जिले में कृषि विभाग की ओर से संचालित योजनाओं के तहत किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। सूची में शामिल लाभार्थियों में कई ऐसे किसान हैं, जिन्हें सिंचाई, खेती के आधुनिकीकरण और उत्पादन बढ़ाने के लिए अनुदान दिया गया है। पहले क्रम उथमण को 16 लाख 91 हजार रुपए की सहायता पाली हाउस योजना के तहत दी गई। यह योजना किसानों को सिंचाई सुविधाएं बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि होती है। इस तरह की बड़ी राशि मिलने से किसान अब आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर सकेंगे। दूसरे लाभाथी उथमण निवासी गोपालसिंह पुत्र सुखसिंह को 12 हजार 896 रुपए की सहायता प्लास्टिक मल्च योजना के तहत दी गई। यह तकनीक खेतों में नमी बनाए रखने, खरपतवार नियंत्रण और उत्पादन बढ़ाने में मदद करती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन का महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पशुपालन विभाग द्वारा मंगला पशु बीमा योजना के तहत लाभार्थियों को

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Trinity International School का 6वां वार्षिकोत्सव ‘Euphoria’ धूमधाम से सम्पन्न, विद्यार्थियों ने बिखेरा प्रतिभा का रंग

सिरोही। पिंडवाड़ा झांकर गांव स्थित  Trinity International School में 6th Annual Function ‘Euphoria’ का आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास, उत्साह, उमंग एवं भव्यता के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर विद्यालय परिसर को आकर्षक रंग-बिरंगी सजावट और मनमोहक रोशनी से सजाया गया, जिससे पूरा वातावरण उत्सवमय और आलोकित हो उठा। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा गणमान्य अतिथियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे आयोजन की गरिमा और भी बढ़ गई। विद्यालय प्रबंधन द्वारा कार्यक्रम की भव्य तैयारियां कई दिनों पूर्व से ही प्रारंभ कर दी गई थीं। मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की रूपरेखा इस प्रकार तैयार की गई थी कि हर प्रस्तुति दर्शकों के मन में एक अलग छाप छोड़ सके। जैसे ही कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ, पूरे परिसर में उल्लास और ऊर्जा का वातावरण स्पष्ट रूप से महसूस किया जा सकता था। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक विधि से दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस शुभ अवसर पर सन्तों का पावन सानिध्य प्राप्त हुआ—श्री श्री 1008 गोविंद वल्लभ  महाराज (श्रीपति धाम) एवं श्री श्री 1008 रेवानाथ जी महाराज (मरकुंडेश्वर धाम, अजारी) विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके साथ ही मुख्य अतिथि प्रोफेसर अजय कुमार , प्राचार्य, PG College सिरोही, विद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रशांत कुमार एवं चेयरमैन  जगदीश सिंह सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया।  दीप प्रज्वलन के इस पावन क्षण ने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता से भर दिया। मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों ने विद्यार्थियों को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। संत  गोविंद वल्लभ  महाराज ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक सफलता ही नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों को भी अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक होती है, जब उसमें नैतिकता, अनुशासन, संस्कार और भारतीय संस्कृति का समावेश हो।उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने, मेहनत करने और अपने माता-पिता तथा गुरुओं का सम्मान करने का संदेश दिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है, लेकिन जो विद्यार्थी अपने मूल्यों पर अडिग रहते हैं, वही जीवन में सच्ची सफलता प्राप्त करते हैं। रेवानाथ जी महाराज ने भी विद्यार्थियों को आशीर्वाद देते हुए उन्हें जीवन में सकारात्मक सोच अपनाने और अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा दी। विद्यालय प्रशासन का उद्बोधन: उपलब्धियों और संकल्प का उल्लेख विद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रशांत कुमार ने अपने उद्बोधन में विद्यालय की शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों की मेहनत, लगन और प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि Trinity International School केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का एक सशक्त मंच है। उन्होंने यह भी बताया कि विद्यालय निरंतर नए-नए नवाचारों के माध्यम से विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने शिक्षकों के योगदान को भी विशेष रूप से सराहा और कहा कि शिक्षकों की मेहनत और मार्गदर्शन के बिना विद्यार्थियों की सफलता संभव नहीं है। वहीं चेयरमैन  जगदीश सिंह ने अपने संबोधन में विद्यालय के सतत विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखना, बल्कि उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में सक्षम बनाना है। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत विविध और आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी दर्शकों का मन मोह लिया। प्रत्येक प्रस्तुति में विद्यार्थियों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और कठिन परिश्रम स्पष्ट रूप से झलक रहा था। मंच पर प्रस्तुत “मंजुलिका” की नाटकीय प्रस्तुति ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। इसके साथ ही शहीद-ए-आजम भगत सिंह पर आधारित नाट्य प्रस्तुति ने देशभक्ति की भावना को जीवंत कर दिया। विद्यार्थियों ने अपने अभिनय के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष और बलिदान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। “छावा” नाट्य प्रस्तुति भी दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें ऐतिहासिक घटनाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। महाकाली मण्डन की शक्तिशाली झांकी ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया, वहीं कविता “रश्मिरथी (कृष्ण की चेतावनी)” की प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। हर प्रस्तुति के अंत में दर्शकों की तालियों की गूंज यह स्पष्ट कर रही थी कि विद्यार्थियों की मेहनत को भरपूर सराहना मिल रही है। पुरस्कार वितरण: प्रतिभाओं का सम्मान कार्यक्रम के समापन अवसर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर “Best Student of the Year” का प्रतिष्ठित सम्मान विक्रम सिंह आढा को प्रदान किया गया। उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुशासन और सर्वांगीण विकास को देखते हुए यह सम्मान उन्हें दिया गया। इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ओलिंपियाड में गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाली छात्रा यशस्वी सोलंकी को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। उनकी इस उपलब्धि ने विद्यालय का नाम गौरवान्वित किया। पुरस्कार वितरण समारोह ने विद्यार्थियों को आगे बढ़ने और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। ‘Euphoria’ बना सर्वांगीण विकास का प्रतीक ‘Euphoria’ 6th Annual Function केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, सृजनात्मकता और आत्मविश्वास का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा। इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि Trinity International School विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ मंच प्रदान कर उनकी प्रतिभा को निखारने का कार्य कर रहा है। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं को पहचानने और उन्हें प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किया, जिससे उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई। अंत में विद्यालय परिवार की ओर से सभी अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का इस सफल आयोजन में सहयोग और सहभागिता के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम का समापन सकारात्मक ऊर्जा, प्रेरणा और यादगार अनुभवों के साथ हुआ। ‘Euphoria’ ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और मूल्यों का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करते हुए सभी के मन में एक अमिट छाप छोड़ी।

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मिडिल ईस्ट जंग का सीधा असर: राजस्थान में तेल के टिन पर महंगाई की मार, 200 रुपए तक उछाल

राजस्थान में ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध का असर अब थाली तक पहुंच गया है। मुंबई तेल के 15 किलो के टिन की कीमतों में करीब 200 रुपए की वृद्धि दर्ज की गई है। इस वृद्धि ने आम जनता के रसोई बजट को प्रभावित किया है। इस रिपोर्ट में हम आपको ताजा तेल के भाव के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। मध्य-पूर्व तनाव का असर भारत की रसोई तक उदयपुर। मध्य-पूर्व में ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थिति ने न केवल वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया है, बल्कि इसका सीधा असर भारतीय बाजारों विशेषकर राजस्थान की आम जनता की रसोई तक पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेल की आपूर्ति में गिरावट के कारण तेल की कीमतों में अचानक वृद्धि दर्ज की गई है। खाद्य तेल की कीमतों में यह उछाल आम जनता के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। विशेषकर 15 किलो के तेल के टिन पर करीब 200 रुपए की बढ़ोतरी ने घरेलू बजट को प्रभावित किया है। यह वृद्धि सीधे तौर पर खाद्य तेल की कम आपूर्ति और बढ़ती मांग के कारण हुई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण बनी हुई है, जिससे तेल निर्यात प्रभावित हुआ है। राजस्थान के विभिन्न शहरों में, जैसे उदयपुर, जोधपुर, जयपुर, भी इस स्थति के प्रत्यक्ष प्रभाव देखे जा रहे हैं। आम जनता घरेलू आवश्यकताओं के लिए तेल के नए बढ़े हुए दामों को जूझ रही है। व्यापारियों का कहना है कि भविष्य में भी यह मूल्य स्थिर नहीं रहेंगे और अगर मध्य-पूर्व की स्थिति खराब होती रही तो कीमतों में और वृद्धि हो सकती है। सरकारी अधिकारी बाजार की निगरानी कर रहे हैं और वे आने वाले समय में आवश्यक कदम उठाने की तैयारियां कर रहे हैं ताकि आम जनता को ज्यादा परेशान नहीं होना पड़े। वहीं, विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि घरेलू उपयोग की तेल की बचत करे और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए जिससे बाजार में तेल की कमी को कुछ हद तक रोका जा सके। अंततः, मध्य-पूर्व के इस तनावपूर्ण युद्ध ने न केवल क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित किया है बल्कि खाद्य तेल जैसे जरूरी उपभोक्ता वस्त्रों की कीमतों पर भी गहरा असर डाला है। आम जनता के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, और कीमतों में तेजी के कारण घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा है। सरकार और बाजार के संयोजन से ही इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।

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तीन अहम स्थानों पर अंडरब्रिज निर्माण की मांग

सिरोही में बढ़ती ट्रैफिक समस्या पर बड़ा कदम सांसद लुम्बाराम चौधरी ने नितिन गडकरी से की मुलाकात सिरोही। जिले में राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगातार बढ़ते यातायात दबाव और सडक़ दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए अब समाधान की दिशा में पहल तेज हो गई है। सिरोही-जालोर के सांसद लुम्बाराम चौधरी ने केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर जिले के तीन महत्वपूर्ण स्थानों पर अंडरब्रिज निर्माण की मांग उठाई। सांसद चौधरी ने मंत्री गडकरी को अवगत कराया कि सिरोही जिले से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-62 और राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-27 पर वाहनों का दबाव तेजी से बढ़ रहा है। इन मार्गों पर भारी वाहनों, स्थानीय यातायात और पैदल यात्रियों की एक साथ आवाजाही के कारण स्थिति लगातार जटिल होती जा रही है। उन्होंने बताया कि इन राजमार्गों पर कई ऐसे स्थान हैं जहां पर्याप्त सुरक्षा उपायों का अभाव है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। विशेष रूप से ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में यह समस्या अधिक गंभीर रूप ले रही है। सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि जिन स्थानों पर अंडरब्रिज की मांग की गई है, वे क्षेत्र स्कूलों, बाजारों और आवासीय इलाकों के पास स्थित हैं। यहां रोजाना बड़ी संख्या में छात्र, महिलाएं और आमजन सडक़ पार करते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए अंडरब्रिज का निर्माण अत्यंत आवश्यक बताया गया। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल दुर्घटनाओं में कमी लाएगा, बल्कि आमजन को भी बड़ी राहत देगा। इन तीन स्थानों पर रखी गई अंडरब्रिज की मांग सांसद लुम्बाराम चौधरी ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष तीन प्रमुख स्थानों का प्रस्ताव रखा जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग-62 पर साणेश्वर महादेव मंदिर रोड जहां यह क्षेत्र धार्मिक आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ स्थानीय आवाजाही का भी प्रमुख मार्ग है। यहां श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की आवाजाही अधिक रहती है। डॉ. भीमराव अंबेडकर राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय के पास एचएच-62 जहां मेडिकल कॉलेज के आसपास मरीजों, स्टाफ और विद्यार्थियों की आवाजाही अधिक रहती है, जिससे यहां सुरक्षित पारगमन की आवश्यकता बेहद जरूरी है। राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर आबूरोड स्थित हनुमान टेकरी, यह स्थान धार्मिक और स्थानीय दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है, जहां अक्सर भीड़ रहती है और सडक़ पार करना जोखिम भरा होता है। सांसद चौधरी ने कहा कि अंडरब्रिज निर्माण से न केवल सडक़ दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि यातायात भी सुचारू होगा। इससे स्थानीय लोगों, विद्यार्थियों और श्रद्धालुओं को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध होगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस तरह की आधारभूत संरचना का विकास क्षेत्रीय प्रगति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इससे सिरोही जिले में विकास को नई गति मिलेगी। केंद्रीय मंत्री ने दिया सकारात्मक आश्वासन मुलाकात के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सांसद की मांगों को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को प्रस्तावों का परीक्षण करने के निर्देश देने का आश्वासन दिया। मंत्री ने कहा कि सडक़ सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है और जहां भी आवश्यक होगा, वहां उपयुक्त कदम उठाए जाएंगे।

Mob vandalises prayer hall over burial dispute in Bastar
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बस्तर में दाह संस्कार विवाद ने लिया हिंसक रूप, प्रार्थना केंद्र पर हमला

काँकेर जिले के एक गाँव में क्रिस्चियन दाह संस्कार की रीति-रिवाजों के विरोध के बाद तनाव भड़क गया और भीड़ ने प्रार्थना हॉल को नुकसान पहुंचाया। इस घटना में पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बल स्थिति को नियंत्रण में लाने के प्रयास में जुटे हैं। मिली जानकारी के अनुसार, गाँव में हाल ही में एक मृतक के लिए क्रिस्चियन दाह संस्कार किया जाना था, जिसे कुछ लोगों ने स्वीकार नहीं किया। इसके विरोध में विवाद शुरू हुआ, जो जल्द ही हिंसातक रूप ले लिया। भीड़ ने प्रार्थना हॉल पर हमला कर तोड़फोड़ की, जिससे इलाके में दहशत का माहौल पैदा हो गया। पुलिस के अनुसार, भीड़ ने जबरदस्ती स्थान पर कब्जा करने की कोशिश की और सुरक्षा कर्मियों पर भी हमला किया। कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। उन्होंने बताया कि फिलहाल स्थिति को काबू में लाने के लिए अतिरिक्त बल की तैनाती की गई है। स्थानीय प्रशासन ने शांतिपूर्ण समाधान के लिए सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के लिए तैयार रहने की अपील की है। साथ ही, घटना की जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की गई है जो मामले की तह तक जाने का काम करेगी। इस घटना से पूर्व, इस क्षेत्र में धार्मिक सामंजस्य को लेकर कई बार विवाद होते रहे हैं। प्रशासन का यह प्रयास है कि इस प्रकार की घटनाओं को आगे न बढ़ने दिया जाए और सामाजिक सौहार्द कायम रखा जाए। स्थानीय लोगों ने भी अपील की है कि वे शांति बनाए रखें और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों का सम्मान होना चाहिए और एक-दूसरे के विश्वासों को समझने की जरूरत है। काँकेर पुलिस ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। वे जनता से सहयोग की अपेक्षा करते हैं ताकि जल्द से जल्द इलाके में सामान्य स्थिति बहाल हो सके। इस पूरे मामले ने बस्तर क्षेत्र में धार्मिक और सामाजिक एकता की अहमियत को फिर से उजागर किया है और अधिकारियों को इसका समाधान निकालने के लिए सतर्क कर दिया है। आने वाले दिनों में हालात कैसे विकसित होते हैं, यह देखने वाली बात होगी।

Almost 60% of India’s elephants are in Karnataka, Assam, T.N.
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भारत के 60% हाथी सिर्फ 3 राज्यों में! जानिए क्यों खास हैं कर्नाटक, असम और तमिलनाडु

नई दिल्ली: वाइल्डलाइफ़ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) ने देशभर में हाथियों की पहली बार डीएनए आधारित समकालिक गणना जारी की है। इस अध्ययन में सामने आया है कि भारत के लगभग 60 प्रतिशत हाथी तीन राज्यों – कर्नाटक, असम और तमिलनाडु – में पाए जाते हैं। यह रिपोर्ट हाथी संरक्षण और उनकी आवासीय स्थिति को समझने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हाथी भारत का राष्ट्रीय धरोहर प्राणी है और वन्यजीवन में इसकी अहमियत न केवल पारिस्थितिक तंत्र के लिए, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। देश में हाथियों की संख्या और उनकी आबादी पर नजर रखना इनके संरक्षण के लिए आवश्यक होता है। इस उद्देश्य से वाइल्डलाइफ़ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने नवीनतम तकनीकों का प्रयोग करते हुए डीएनए आधारित पुनरावृत्ति परीक्षण के माध्यम से देशभर में हाथियों की संख्या का सटीक आकलन किया है। इस अध्ययन के अनुसार, कुल हाथी आबादी में कर्नाटक का हिस्सा सबसे बड़ा है, जिसके बाद असम और तमिलनाडु का स्थान आता है। कर्नाटक में विशाल वनों की उपलब्धता और संरक्षित क्षेत्रों की संख्या अधिक होने से हाथियों की संख्या यहाँ सर्वाधिक देखी गई है। असम, जो भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में है, भी हाथी संरक्षण के लिए जाना जाता है, जबकि तमिलनाडु के जंगलों में भी हाथियों की अच्छी-खासी आबादी मौजूद है। विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत में हाथियों की संख्यात्मक समीक्षा का यह पहला बड़ा प्रयास है जो डीएनए आधारित तकनीक पर आधारित है। इससे पारंपरिक सर्वेक्षणों की तुलना में अधिक विश्वसनीय और सटीक आंकड़े प्राप्त हुए हैं। इससे वन विभाग को संरक्षण रणनीतियों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी जिससे हाथियों के संघर्ष को कम किया जा सकेगा और प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। वाइल्डलाइफ़ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा, “हाथियों की सही संख्या का आंकलन उनके संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने में बड़ी भूमिका निभाएगा। हमारा लक्ष्य हाथियों और मनुष्यों के बीच संतुलन बनाए रखना और इनके आवासों का संरक्षण करना है।” उन्होंने यह भी बताया कि आगे भी इसके जैसे आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर वन्यजीवन की गहन निगरानी जारी रखी जाएगी। इस रिपोर्ट ने जहां हाथी संरक्षण में एक नया अध्याय जोड़ा है, वहीं यह नीति निर्माताओं के लिए भी दिशा-निर्देश प्रदान करती है कि किस प्रकार से वन्यजीव संरक्षण योजनाओं में सुधार किया जाए। कर्नाटक, असम और तमिलनाडु सरकारों को विशेष रूप से अपने-अपने राज्यों में हाथियों के आवासों को सुरक्षित करने और मानव-हाथी टकराव को कम करने के लिए तत्पर रहना होगा। देश में हाथी आबादी बढ़ाने के साथ-साथ उनके प्राकृतिक आवासों को संरक्षित करना आवश्यक है ताकि जैव विविधता बनी रहे और हाथी संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें। यह अध्ययन वन्यजीव संरक्षण में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के महत्व को दर्शाता है और कहा जा सकता है कि भविष्य में ऐसे आधुनिक अध्ययन और भी ज्यादा प्रभावी साबित होंगे।

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सरजावाव चौराहा बना ‘खतरे का कॉरिडोर’

रासूखात की हूल या प्रशासन की चुप्पी? सिरोही। शहर के मुख्य दरवाजे से जुड़ी सडक़ों की हालत आज सवालों के घेरे में है। जहां एक ओर प्रशासन विकास और सुचारू यातायात के बड़े-बड़े दावे करता है, वहीं दूसरी ओर हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई देती है। सरजावाव चौराहे से राजमाता धर्मशाला रोड तक का हिस्सा इन दिनों बदहाली, अतिक्रमण और अव्यवस्था का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। हालांकि हाथ लारी की कोई परेशानी नहीं है। वे अपना सामान बेच चलता बनते है। दुखद पहलू तो यह है कि यहां स्थायी दुकानदार अतिक्रमण की पहल में शुमार है। यह सडक़ न केवल शहर के मुख्य प्रवेश मार्ग से जुड़ी है, बल्कि रोडवेज डिपो जाने वाले यात्रियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण रास्ता है। बावजूद इसके, यहां की स्थिति ऐसी है कि हर गुजरने वाला व्यक्ति खुद को जोखिम में महसूस करता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस क्षेत्र में अतिक्रमण करने वालों का हौसला इतना बढ़ गया है कि यदि कोई उन्हें टोकने की कोशिश करता है तो वे राजनीतिक रासूख का हवाला देने लगते है। यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कहीं न कहीं प्रशासनिक ढील और राजनीतिक संरक्षण अतिक्रमण को बढ़ावा दे रहे हैं। सरजावाव चौराहा, अतिक्रमण और गड्ढे का ‘डेंजर जोन’ सरजावाव चौराहा, जो शहर का एक प्रमुख आवाजाही का जंक्शन है, इन दिनों दुर्घटनाओं का केंद्र बन गया है। राजमाता धर्मशाला रोड के मुहाने पर स्थित एक मिष्ठान भंडार ने अपनी दुकान के बाहर लगभग 10 से 15 फीट तक सडक़ पर कब्जा कर रखा है। इतना ही नहीं, सडक़ के बीचों-बीच नाली पर बना गड्ढा स्थिति को और खतरनाक बना देता है। इस कारण से पूरी सडक़ सिकुडक़र मात्र 5 से 7 फीट रह गई है। हालात यह है कि दोपहिया वाहन चालक रोजाना गिरते-पड़ते है। चार पहिया वाहनों का निकलना तो कोई जंग से कम नहीं। अतिक्रमण के कारण सडक़ पर टेबल-कुर्सियां, दुकान का सामान और ग्राहकों के वाहन बेतरतीब खड़े रहते हैं। इससे हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। कई बार तो स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि एम्बुलेंस या इमरजेंसी वाहन भी फंस सकते हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि एक संभावित बड़ा खतरा है जो कभी भी गंभीर हादसे का रूप ले सकता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस सडक़ से रोजाना प्रशासनिक अधिकारी गुजरते हैं। नगर परिषद भी महज कुछ फर्लांग की दूरी पर स्थित है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि यह सडक़ एक ‘डेंजर जोन’ की तरह है। कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। जहां तक नियमों की बात करें तो सार्वजनिक सडक़ों पर अतिक्रमण पूरी तरह प्रतिबंधित है। दोषी पाए जाने पर जुर्माना और हटाने की कार्रवाई अनिवार्य है। इसके बावजूद यदि कार्रवाई नहीं हो रही है, तो यह प्रशासनिक विफलता मानी जा सकती है। शहरवासियों का साफ कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि वह बिना किसी दबाव के अतिक्रमण हटाने की मुहिम चलाए और इस सडक़ को सुरक्षित बनाए।

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राज्यसभा चुनाव में ‘अवैध गतिविधियों’ का आरोप: हरियाणा कांग्रेस ने चुनाव आयोग से की शिकायत

कांग्रेस ने निष्पक्ष मतदान पर उठाए सवाल, चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग हरियाणा कांग्रेस ने हाल ही में संपन्न राज्यसभा चुनावों के मद्देनजर चुनाव आयोग को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया में विभिन्न स्तरों पर गैरकानूनी गतिविधियों की बात कही है और उचित जांच की मांग की है। इस कदम को राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सुदृढ़ता के लिए एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। हरियाणा कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि चुनाव के दौरान नियमों का उल्लंघन किया गया है, जिसके कारण चुनाव की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ उम्मीदवारों और उनके समर्थकों द्वारा दबाव और प्रोत्साहन के माध्यम से मतदाता प्रभावी रणनीतियाँ अपनाई गईं, जो चुनाव के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध हैं। पार्टी के प्रवक्ता ने संवाददाताओं से कहा, “हमें खेद है कि चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए कुछ लोगों ने नियमों की खुलेआम अवहेलना की है। हम चुनाव आयोग से अनुरोध करते हैं कि वे इन सभी मामलों की गंभीरता से जांच करें और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें ताकि लोकतंत्र का सम्मान बना रहे।” चुनाव आयोग ने अभी इस शिकायत पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन यह मामला चुनाव आयोग की सतर्कता और जवाबदेही को लेकर सत्ताधारी दलों और विपक्ष दोनों के लिए एक परीक्षण का मौका होगा। चुनाव आयोग की भूमिका चुनाव की निष्पक्षता बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। विश्लेषकों का मानना है कि हरियाणा में आगामी राजनीतिक माहौल और आगामी विधान सभा चुनावों से पहले यह विषय काफी संवेदनशील है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर अपनी सुनवाई कराएंगे और इसे अपने राजनीतिक एजेंडा का हिस्सा बनाएंगे। यह भी देखा जाना बाकी है कि चुनाव आयोग कैसे स्थिति को संभालता है और किस प्रकार के कदम उठाता है। विधि और नियमों का कड़ाई से पालन ही एक स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है, और इस मामले में हरियाणा कांग्रेस का कदम चुनाव आयोग की असरदार भूमिका की मांग को स्पष्ट करता है। अतः, आगामी दिनों में चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और संभावित कार्रवाई से इस विवाद का समाधान निकालने की उम्मीद की जा रही है, जिससे भविष्य में चुनाव प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बने।

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