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Author name: Kamlesh Purohit

Why do mosquitoes love some people more than others?
तकनीकी

मच्छर कुछ लोगों को दूसरों से ज्यादा क्यों आकर्षित करते हैं?

नई दिल्ली: मच्छर, जो कि मौसम बदलते ही सबसे ज्यादा परेशान करने वाले कीट बन जाते हैं, कुछ लोगों को दूसरों की तुलना में ज्यादा क्यों पसंद करते हैं, यह सवाल अक्सर उठा है। यह धारणा कि मच्छर केवल मीठे खून वाले इंसानों को ही काटते हैं, पूरी तरह सही नहीं है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि मच्छर लोगों को कई अन्य कारकों के आधार पर आकर्षित करते हैं। सबसे पहला कारण है कार्बन डाइऑक्साइड (CO2)। जब हम सांस लेते हैं, तो हम CO2 उत्सर्जित करते हैं, और मच्छर इसी गैस को अपनी भक्षक खोजने के लिए इस्तेमाल करते हैं। जिन लोगों की सांस तेज होती है, वे अधिक CO2 उत्सर्जित करते हैं, जिससे मच्छर उनकी ओर आकर्षित होते हैं। इसके अलावा, शरीर से निकलने वाली विशिष्ट गंध भी मच्छरों को आकर्षित करती है। इंसान के शरीर से निकलने वाले स्वेद, बैक्टीरिया और त्वचा पर मौजूद रसायन मच्छरों की गंध पहचान प्रणाली को सक्रिय करते हैं। कुछ लोग आनुवंशिक रूप से ऐसे रसायनों को अधिक उत्सर्जित करते हैं, जो मच्छरों के लिए आकर्षक होते हैं। शारीरिक गर्मी भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मच्छर गर्म शरीर की ओर अधिक आकर्षित होते हैं। इसलिए, शारीरिक व्यायाम या गर्म वातावरण में रहने से शरीर की तापन अधिक होती है, जिससे मच्छर का ध्यान बढ़ता है। कपड़े के रंगों का भी प्रभाव होता है। गहरे रंग जैसे काला और लाल रंग मच्छरों को ज्यादा आकर्षित करते हैं, जबकि हल्के रंगों के कपड़े उन्हें कम आकर्षित करते हैं। इसलिए, यह कहना गलत है कि केवल मीठे खून वाले लोगों को मच्छर ज्यादा काटते हैं। कई पर्यावरणीय और शारीरिक عوامل एक साथ मिलकर मच्छरों के व्यवहार को प्रभावित करते हैं। मच्छरों से बचाव के लिए उचित सावधानियां बरतना आवश्यक है, जैसे कि मच्छरदानी का उपयोग करना, कीटनाशक लगाना और साफ-सफाई रखना। अन्ततः, मच्छरों के व्यवहार को समझकर और सावधानी अपनाकर हम अपने स्वयं को मच्छर जनित रोगों से बचा सकते हैं।

Movie-to-menu: When The Princess and the Frog came to the table in Chennai
लाइफस्टाइल

मूवी से मेन्यू तक: जब द प्रिंसेस एंड द फ्रॉग ने चेन्नई की मेज पर कदम रखा

चेन्नई, 27 अप्रैल 2024 — डिज़्नी के मशहूर एनिमेटेड क्लासिक ‘द प्रिंसेस एंड द फ्रॉग’ की यादों को एक अनोखे तरीके से जीने का मौका मिला है। शहर के एक प्रतिष्ठित रेस्टोरेंट ने इस फिल्म को मूर्ति रूप देने के लिए एक पाँच-कोर्स भोजन का आयोजन किया, जिसमें लुइसियाना की सांस्कृतिक और पाक विरासत का खासा सम्मान किया गया। इस अनुभव का मुख्य आकर्षण था गम्बो से लेकर बेन्ये तक की व्यंजन श्रृंखला, जो फिल्म के प्रमुख खाद्य पदार्थों को जीवंत कर गई। गम्बो, जो लुइसियाना की एक पारंपरिक सूप है, अपने मसालेदार और सृजनात्मक स्वाद के लिए जानी जाती है। इसके बाद बेन्ये, जो एक प्रकार का फ्रेंच डोनट है, मिठास और परंपरा का मेल प्रस्तुत करता है। कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया कि यह प्रयास केवल भोजन तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें फिल्म की थीम, संगीत और संस्कृति को भी शामिल किया गया, जिससे मेहमानों को एक समृद्ध सांस्कृतिक अनुभव मिला। चेन्नई में इस तरह का आयोजन पहली बार किया गया है, जो फिल्म प्रेमियों और फूड क्रिटिक्स दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बना। रेस्टोरेंट के प्रमुख शेफ ने कहा, “हमें खुशी है कि हम एक ऐसी कहानी को खाने के माध्यम से जीवंत कर पाए जो सभी आयु वर्ग के लोगों के दिलों में खास जगह रखती है। हमारा उद्देश्य था कि हर डिश में फिल्म की भावना झलके और यह अनुभव अविस्मरणीय बने।” फिल्म और भोजन का इस तरह का संयोजन न केवल मनोरंजन प्रदान करता है बल्कि सांस्कृतिक समझ को भी बढ़ावा देता है। आयोजकों का यह प्रयास दर्शाता है कि कैसे पारंपरिक कहानियों को आधुनिक रूप में पेश किया जा सकता है, जिससे स्थानीय और वैश्विक दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया जा सके। चेन्नई में इस आयोजन को सामाजिक माध्यमों पर भी खूब सराहना मिली है और आने वाले समय में ऐसे और आयोजनों के लिए दर्शकों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। “द प्रिंसेस एंड द फ्रॉग का यह पांच-कोर्स भोजन अनुभव निश्चित रूप से एक सांस्कृतिक पुल का काम करेगा,” एक स्थानीय फूड ब्लॉग ने लिखा। यह आयोजन दर्शाता है कि किस प्रकार फिल्म और पाक कला का मेल विभिन्न संस्कृतियों को जोड़ने और साझा अनुभव प्रदान करने का एक प्रभावी माध्यम बन सकता है।

IPL 2026 PBKS vs GT | Sai Sudharsan one of the hardest workers in the game: Titans batting coach Hayden
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आईपीएल 2026 PBKS बनाम GT | टाइटंस के बल्लेबाजी कोच हेडन ने सई सुधर्शन को खेल के सबसे मेहनती खिलाड़ियों में बताया

चेन्नई: आईपीएल 2026 में पंजाब किंग्स (PBKS) और गुजरात टाइटंस (GT) के बीच मुकाबले को लेकर काफी उत्साह है। इस मैच में GT के बल्लेबाजी कोच मैथ्यू हेडन ने सई सुधर्शन की प्रशंसा करते हुए उन्हें खेल के सबसे मेहनती खिलाड़ियों में से एक बताया है। हेडन ने तमिलनाडु के इस बल्लेबाज की तैयारी और कार्यशैली की सराहना की है। हेडन ने कहा, “सई सुधर्शन और शुभमन गिल को मैदान पर तैयारी करते देखना एक सौभाग्य की बात है। उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण प्रेरणादायक है।” उन्होंने यह भी बताया कि सई के बूते GT की बल्लेबाजी लाइनअप को काफी मजबूती मिली है। सई सुधर्शन ने IPL के पिछले सीज़न में अपनी बल्लेबाजी की शानदार झलक दिखाते हुए टीम में अपनी जगह पक्की की है। उनकी तकनीक, संयम और रन बनाने की क्षमता उन्हें भविष्य का बड़ा खिलाड़ी बनाती है। GT के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि ऐसे युवा और मेहनती खिलाड़ी टीम में हों जो दबाव में भी अपना खेल दिखा सकें। हेडन ने आगे कहा, “सई का फोकस, अनुशासन और ट्रेनिंग के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें बाक़ी खिलाड़ियों से अलग बनाती है। हम क्लब के रूप में भी उनकी प्रगति पर गर्व महसूस करते हैं और उन्हें शीर्ष स्तर पर पहुंचने के लिए पूरी सहायता प्रदान करेंगे।” गुजरात टाइटंस ने पिछले कुछ सालों में अपनी टीम में संतुलित युवा और अनुभवी खिलाड़ियों की शुरुआत की है, जिन्होंने IPL में शानदार प्रदर्शन किया है। सई सुधर्शन और शुभमन गिल जैसे खिलाड़ियों की मौजूदगी ने टीम की बल्लेबाजी को और भी मजबूत किया है। फैंस भी कई मैचों में सई के पावरहिटिंग और बड़े शॉट्स से रोमांचित हुए हैं। अब IPL 2026 के मंच पर उनकी मेहनत के नतीजे देखने को मिल सकते हैं, जिससे GT को और ऊंचाइयों पर ले जाने में मदद मिलेगी। इस मुकाबले से पहले GT की टीम ने अपने अभ्यास सत्रों को और भी कड़ा किया है ताकि IPL के इस सीजन में बेहतरीन प्रदर्शन कर सके। सई सुधर्शन और शुभमन गिल की लगातार मेहनत और सकारात्मक रवैया टीम की सफलता की उम्मीदों को बढ़ा रहा है। यह मुकाबला किसी दर्शक के लिए रोमांचक होने वाला है, जिसमें दोनों टीमों के खिलाड़ी अपनी पूरी क्षमता दिखाने के लिए तैयार हैं। IPL जैसे बड़े टूर्नामेंट में खिलाड़ी की मेहनत ही सफलता की कुंजी होती है और सई सुधर्शन ने इसे अच्छे से समझकर अपनी पहचान बनाई है।

Trending, धर्म एवं यात्रा

नवपद ओली तप: आस्था, संयम और आत्मशुद्धि का महापर्व,महावीर जन्म कल्याणक पर निकलेगी शोभायात्राएं

सिरोही,महावीर जैन। जैन धर्म में चैत्र और वैशाख माह में मनाए जाने वाले नवपद ओली तप का प्राचीन काल से विशेष महत्व रहा है। मान्यता है कि इस तप, जप और आराधना से कर्मों की निर्जरा होती है तथा आत्मा को शाश्वत सुख की प्राप्ति होती है। आचार्य भगवंत एवं साधु-साध्वी समुदाय नवपद ओली की महिमा का वर्णन करते हुए बताते हैं कि इस तप के प्रभाव से जीवन के बड़े संकट भी सहज रूप से दूर हो जाते हैं। नवपद ओली तप के दौरान तपस्वी 9 दिनों तक नवपद की आराधना करते हैं। इस अवधि में वे उकाले हुए पानी का सेवन करते हुए दिन में एक बार सादा, बिना मसाले वाला आयंबिल (लूखा-अलूणा) भोजन ग्रहण करते हैं और दसवें दिन पारणा करते हैं। चैत्र मास में सिरोही जिले के विभिन्न प्राचीन जैन तीर्थों और मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं इस तपस्चर्या में बढ़-चढक़र भाग ले रहे हैं। जिरावला पार्श्वनाथ महातीर्थ में आचार्य रश्मिरत्न सूरी महाराज की निश्रा में एक हजार से अधिक तपस्वी नवपद ओली कर रहे हैं। इसी प्रकार आबू देलवाड़ा तीर्थ में आचार्य कल्पचंद्रसूरी, पावापुरी तीर्थ में आचार्य जयेशरत्नसूरी महाराज, मंडार में मुनिराज भव्यविजय महाराज तथा सिरोही शहर में भी आचार्य भगवंत की निश्रा में ओली आराधना श्रद्धा और उत्साह के साथ जारी है। चैत्र सुदी तेरस को भगवान महावीर के जन्म कल्याणक के अवसर पर जिलेभर में भव्य आयोजन होंगे। इस दिन त्रिशला नंदन वीर की जय, बोलो महावीर की के जयकारों के साथ शोभायात्राएं शहर के विभिन्न मार्गों से निकाली जाएंगी और श्रद्धालुओं को मुंह मीठा कराया जाएगा। इसके साथ ही चैत्र सुदी पूर्णिमा को सिद्धचक्र महापूजन का आयोजन किया जाएगा। नवपद ओली के दौरान प्रतिदिन एक-एक पद—अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु, ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप—की आराधना कराई जाती है। साधक इन नौ पदों की महिमा को समझते हुए प्रतिदिन 27 मालाओं का जाप करते हैं। उल्लेखनीय है कि इसी प्रकार की ओली मूल नवरात्रा के दौरान भी की जाती है। यह आराधना पूरे देश में जैन मंदिरों और उपासरों में साधु-साध्वी भगवंतों की निश्रा में श्रद्धा के साथ संपन्न होती है

In Focus Podcast | What happens to the FIFA World Cup if Iran were to withdraw?
विशेषज्ञों की राय

अगर ईरान वर्ल्ड कप से हटता है तो क्या होगा?

अमेरिका में आयोजित होने वाले आगामी फीफा विश्व कप से ईरान के संभावित वापसी पर विशेषज्ञों और खेल प्रेमियों के बीच चर्चा तेज हो गई है। इस संबंध में प्रख्यात खेल पत्रकार विजय लोकपल्ली ने इन फोकस पॉडकास्ट के एक हालिया एपिसोड में कहा कि अगर ईरान इस प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाता है, तो फुटबॉल के लिए यह एक बड़ा आघात साबित होगा। लोकपल्ली के अनुसार, ईरान न केवल एशिया के फुटबॉल जगत में एक मजबूत टीम है, बल्कि विश्व कप जैसी वैश्विक टूर्नामेंट में उसकी भागीदारी पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। ईरान का बाहर होना विश्व कप के मुकाबलों की प्रतिस्पर्धा और विविधता को प्रभावित करेगा। ईरान के फुटबॉल प्रेमी और खिलाड़ी इस टूर्नामेंट के लिए उच्च उम्मीदें लगाए बैठे हैं। टीम ने अपने प्रदर्शन से विश्व कप में अपनी छाप छोड़ रखी है, इसलिए उनका अचानक बाहर होना न केवल खिलाड़ियों के मनोबल पर असर डालेगा, बल्कि प्रशंसकों की निराशा भी बढ़ाएगा। विजय लोकपल्ली ने यह भी उल्लेख किया कि अमेरिका में फुटबॉल को बढ़ावा देने के लिए यह विश्व कप एक महत्वपूर्ण अवसर है, और ईरान जैसे देशों की भागीदारी से टूर्नामेंट की सार्थकता और बढ़ जाती है। यदि ईरान बाहर हुआ तो फीफा और आयोजकों को इसके विकल्प तलाशने होंगे ताकि टूर्नामेंट की प्रतिस्पर्धा और रोमांच बरकरार रहे। विश्लेषकों का मानना है कि राजनीतिक या प्रशासनिक कारणों से यदि ईरान withdrew करता है, तो इसका समग्र प्रभाव फुटबॉल की वैश्विक छवि पर भी पड़ेगा। इस मामले में फीफा के निर्णय और प्रतिक्रिया पर पूरी दुनिया की नज़र होगी। अतः इस संदर्भ में आने वाले दिनों में स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। खिलाड़ियों, प्रशंसकों और फुटबॉल जगत की निगाहें इस विषय पर टिकी हैं कि आखिर क्या होगा, और विश्व कप की यह महाकुंभ ईरान के बिना कैसा दिखेगा। जैसे-जैसे टूर्नामेंट की तारीख नजदीक आती है, ऐसी परिस्थितियों में हर एक अपडेट खेल जगत के लिए महत्वपूर्ण होगा। विजय लोकपल्ली के इस पॉडकास्ट एपिसोड को सुनना इसलिए जरूरी है ताकि इस गंभीर मुद्दे की विषद जानकारी प्राप्त की जा सके।

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गैस की पाइप लो या चूल्हा ठंडा रखो!

देश में अब विकास पाइपलाइन से होकर गुजर रहा है और अगर आपके घर तक वो पाइप नहीं, तो समझिए आपकी रसोई की किस्मत भी नोटिस के भरोसे है। सरकार का नया फरमान कुछ ऐसा है कि अब एलपीजी सिलेंडर भी पूछेगा भाई पीएनजी लिया कि नहीं? अगर जवाब ‘ना’ हुआ, तो 90 दिन बाद वो भी कहेगा अब मैं चलता हूं, तुम पाइप संभालो! जनता पहले महंगाई से परेशान है, अब कनेक्शन से परेशान है। पहले रिश्ते जोडऩा मुश्किल था, अब गैस कनेक्शन जोडऩा अनिवार्य हो गया है। फर्क बस इतना है कि रिश्तों में नोटिस नहीं आता, यहां 90 दिन का अल्टीमेटम भी है। सरकार का तर्क भी कम दिलचस्प नहीं है जहां पीएनजी नहीं है, वहां एलपीजी बचानी है। यानी जिनके पास विकल्प है, वो मजबूरी बन जाए, और जिनके पास मजबूरी है, वो विकल्प का इंतजार करें। इधर बेचारी जनता हिसाब लगा रही है कि 1090 में कनेक्शन या 1000 में सिलेंडर? फर्क सिर्फ इतना कि एक में आग तुरंत मिलेगी, दूसरे में नियमों की गर्मी! अब रसोई में खाना कम, और नियम ज्यादा पक रहे हैं। क्योंकि नए भारत में गैस सिर्फ जलती नहीं नीति भी बनती है। बेचारी पब्लिक के पास अब रसोई में दो ही रास्ते हैं या तो पाइपलाइन अपनाओ, या सिलेंडर को अलविदा कहने की तैयारी करो। सरकारी फरमान गैस चाहिए तो लाइन में आओ वरना लाइन बंद!

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सडक़ वही, सफर वही,टोल का मूड अपग्रेड!

सडक़ों पर अब गाडिय़ां ही नहीं, जेबें भी सफर करेंगी और वो भी पेड मोड में। नेशनल हाइवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया ने एक बार फिर साबित कर दिया कि देश की सडक़ें भले धीरे-धीरे बनें, लेकिन टोल रेट हर साल समय पर विकास कर लेते हैं। एक अप्रेल से टोल दरों में बढ़ोतरी लागू होगी और तारीख भी ऐसी कि जनता को लगे कहीं ये अप्रेल फूल स्पेशल ऑफर तो नहीं! लेकिन नहीं, ये मज़ाक नहीं है। ये वही गंभीर मजाक है जो हर साल दोहराया जाता है। हालांकि कार वालों को राहत दी गई है। मतलब आम आदमी को मनोवैज्ञानिक सुकून मिल गया। लेकिन असली चोट कॉमर्शियल और भारी वाहनों पर पड़ी है और जैसा कि परंपरा है, वो खर्च आखिरकार आम जनता की जेब से ही वसूला जाएगा बस रास्ता थोड़ा घुमा हुआ होगा। थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर रेट तय होते हैं। यानी अगर महंगाई बढ़े तो टोल बढ़ेगा, और अगर महंगाई कम भी हो जाए तो भी टोल संभावनाओं के आधार पर बढ़ सकता है! कारों के सालाना पास की बात करेें तो पहले 3000 रुपए में 200 बार टोल पार करने का मौका मिलता था, अब 3075 रुपए में वही सुविधा मिलेगी। यानी 75 रुपए ज्यादा देकर आपको वही पुराना रास्ता, वही ट्रैफिक और वही गडढे, बस अनुभव थोड़ा महंगा हो जाएगा। कुल मिलाकर, सडक़ें अब सिर्फ दूरी कम नहीं कर रहीं बल्कि धीरे-धीरे बैंक बैलेंस भी कम कर रही हैं। हम सब इस विकास यात्रा में शामिल हैं क्योंकि रास्ता चाहे कोई भी हो, टोल तो देना ही पड़ेगा!

Pope Leo XIV rejects claims that God justifies war in Palm Sunday Mass message
अंतरराष्ट्रीय

पोप लियो चौदहवें ने पाम संडे मैसेज में युद्ध को भगवान के न्यायसंगत ठहराने के दावों से किया इनकार

पोप लियो चौदहवें ने हाल ही में होली वीक के दौरान एक महत्वपूर्ण संदेश में कहा कि क्रिश्चियन समुदाय को कभी भी यह नहीं भूलना चाहिए कि पूरी दुनिया में कितनी बड़ी संख्या में लोग मसीह की तरह कष्ट झेल रहे हैं। उन्होंने यह बात पाम संडे के अवसर पर अपने प्रवचन में कही। पोप लियो ने जोर देते हुए कहा कि होली वीक का समय मनुष्यता के प्रति करुणा और सहानुभूति का प्रतीक है। इस दौरान हमें याद रखना चाहिए कि यीशु मसीह ने जो तकलीफें और पीड़ा सहन की, वे आज भी हजारों-लाखों लोगों के जीवन में प्रतिरूपित हो रही हैं। उन्होंने सभी को प्रेरित किया कि वे अपने आसपास के दुखी और कष्ट झेल रहे लोगों की मदद करें और उनके लिए दुआ करें। विशेष रूप से, पोप ने यह स्पष्ट किया कि भगवान युद्ध को कभी भी न्यायसंगत या उचित नहीं मानते। उन्होंने पाम संडे के संदेश में युद्ध के समर्थन में कही जाने वाली सभी दलीलों का खंडन करते हुए कहा कि भगवान का संदेश प्रेम, शांति और सहिष्णुता का है। पोप ने विश्वासियों से अपील की कि वे अपनी आस्था के आधार पर शांति और सद्भावना फैलाने में अग्रणी भूमिका निभाएं। पोप लियो ने यह भी कहा कि आज के दौर में, जब विश्व कई संघर्षों और दृष्टिकोणों के कारण विभाजित है, धर्म का काम उन विभाजनों को पाटना एवं मानवता को जोड़ना है। उन्होंने कहा कि मसीह के बलिदान को समझना और अपनाना ही वह रास्ता है जिससे हम सभी बेहतर जीवन और समाज का निर्माण कर सकते हैं। उनके इस संदेश ने विश्व के विभिन्न हिस्सों में शांति और सहिष्णुता के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद की है। इस दौरान, पॉप के संदेश ने न केवल धार्मिक समुदायों को बल्कि विश्व के साथ-साथ आम जनता में भी सहानुभूति और मानवता की भावना को प्रबल करने का काम किया। पॉप के इस संदेश को लेकर विभिन्न धर्मगुरुओं और सामाजिक संगठनों ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस बात की सराहना की कि पोप लियो ने युद्ध और हिंसा के विषय पर स्पष्ट और प्रभावशाली बयान देकर शांति की आवश्यकता पर बल दिया। समाज के लिए यह संदेश एक प्रेरणा है कि हम सब को अपने आस-पास के दुखी और परेशान लोगों का ध्यान रखना चाहिए तथा उनके लिए एक सहायक और प्रेमपूर्ण वातावरण बनाना चाहिए। होली वीक का समय हमें यही सिखाता है कि मसीह की तरह करुणामय और सहनशील बनकर हम इस दुनिया को एक बेहतर स्थान बना सकते हैं।

Deepak Parambol on his cop role in the Zee5 web series ‘Kasaragod Embassy’
Breaking

दीपक परंबोल ने ज़ी5 वेब सीरीज ‘कसारगोड एम्बेसी’ में अपने पुलिस अधिकारी की भूमिका पर साझा किया अनुभव

मलयालम फिल्म और वेब सीरीज के युवा और प्रतिभाशाली अभिनेता दीपक परंबोल ने हाल ही में अपनी वेब सीरीज ‘कसारगोड एम्बेसी’ में पुलिस अधिकारी के बेहद चुनौतीपूर्ण किरदार को निभाने पर अपनी भावनाएं साझा कीं। दीपक ने बताया कि इस भूमिका ने उन्हें एक नया मनोरंजन अनुभव दिया, जो उनकी 16 वर्षों की फिल्म इंडस्ट्री यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ है। दीपक परंबोल ने कहा, “मेरे लिए पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाना बेहद रोमांचक रहा। इसे निभाने में मैंने अपने चरित्र के हर पहलू को समझने का प्रयास किया ताकि दर्शकों को एक यथार्थवादी अनुभव मिल सके। यह किरदार मेरे अभिनय के सफर में एक नया आयाम लेकर आया।” इसके साथ ही, उन्होंने मशहूर निर्देशक शाजी कैलास की आगामी फिल्म में अपनी भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि शाजी कैलास के साथ काम करना उनके कैरियर के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और उन्होंने इस अवसर को लेकर बेहद उत्साह व्यक्त किया। “शाजी सर के निर्देशन में काम करना मेरे लिए सीखने का एक अनूठा मौका है। उनकी फिल्मों में जो गहराई और संदेश होता है, उसमें भूमिका निभाना गर्व की बात है,” दीपक ने जोड़ा। दीपक परंबोल ने 16 वर्षों के अपने फिल्मी सफर में कई तरह की भूमिकाओं को निभाया है, जिससे उन्होंने अपनी विविधता और प्रतिबद्धता दोनों साबित की हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि इन वर्षों में मेहनत और समर्पण से ही वे आज इस मुकाम पर पहुंच पाए हैं। “मैं अपने दर्शकों और सहयोगियों का आभारी हूं, जिन्होंने मुझे लगातार प्रेरित किया। मेरा सफर अभी जारी है और मैं नई चुनौतियों के लिए तैयार हूं,” उन्होंने कहा। वेब सीरीज ‘कसारगोड एम्बेसी’ ने मलयालम मनोरंजन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है, और दीपक के अभिनय ने इसकी सफलता में अहम भूमिका निभाई है। उन्हें पुलिस अधिकारी की भूमिका में देखने के लिए दर्शक उत्सुक हैं, जो ज़ी5 पर स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध है। जैसे-जैसे मलयालम वेब सीरीज और फिल्म उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है, दीपक परंबोल जैसी प्रतिभाएं इस क्षेत्र को और भी समृद्ध बनाती हैं। उनकी मेहनत और विविध भूमिकाएं इंडस्ट्री के नए मानदंड स्थापित कर रही हैं। इस प्रकार, दीपक परंबोल की ‘कसारगोड एम्बेसी’ में भूमिका, उनकी शाजी कैलास की फ़िल्म में भागीदारी और 16 सालों के अनुभव को देखते हुए, यह निश्चित है कि वे आने वाले वर्षों में भी मलयालम मनोरंजन दुनिया में एक मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति बनाए रखेंगे।

Max Verstappen says he is considering F1 retirement
खेल जगत

मैक्स वर्सटैपेन ने एफ1 से रिटायरमेंट पर विचार करने का इरादा जाहिर किया

चार बार के एफ1 विश्व चैम्पियन, मैक्स वर्सटैपेन, जिन्होंने 2021 से 2024 तक लगातार रेड बुल टीम के लिए ड्राइविंग करते हुए शीर्ष स्थान बनाए रखा, ने हाल ही में भविष्य में अपने करियर को लेकर अहम बयान दिया है। वर्सटैपेन ने यह संकेत दिया है कि वे एफ1 से संन्यास लेने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। पिछले सीजन में मैकलेरन के लैंडो नोरिस ने एफ1 टाइटल जीतकर सभी को चौंका दिया था और इस उपलब्धि के बाद वर्सटैपेन की स्थिति काफी चर्चा में आ गई। नोरिस की जीत ने यह साबित कर दिया कि प्रतियोगिता बेहद कड़ी होती जा रही है, और कई शीर्ष ड्राइवरों के लिए यह समय अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने का है। मैक्स वर्सटैपेन ने मीडिया से बातचीत में माना कि उन्होंने हाल के प्रतियोगिताओं में महसूस किया है कि अब एफ1 के दबाव और मांगें उनके लिए कठिन होती जा रही हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि वे आगामी सीजन के बाद अपने भविष्य का फैसला कर सकते हैं। उनकी टिप्पणी से यह भी स्पष्ट होता है कि हालांकि वे अभी भी प्रतिस्पर्धा को गंभीरता से लेते हैं, लेकिन उनकी प्राथमिकताएं बदल रही हैं। रेड बुल टीम के प्रबंधक और उनके सहयोगी इस बारे में कुछ विशेष बयान देने से बच रहे हैं, लेकिन सभी का मानना है कि वर्सटैपेन की मौजूदगी टीम के प्रदर्शन के लिए बेहद महत्वपूर्ण रही है। उनकी प्रतिस्पर्धात्मक भावना, तेज ड्राइविंग स्टाइल और अनुभव टीम को महत्वपूर्ण जीत दिलाते रहे हैं। आर्थिक और शारीरिक चुनौतियों के बीच एफ1 ड्राइवरों के लिए लंबे समय तक प्रतिस्पर्धा करना कठिन होता जा रहा है। ऐसे में वर्सटैपेन का रिटायरमेंट पर विचार करना अत्यंत संवेदनशील विषय है, खासकर तब जब वे अभी भी शीर्ष स्तर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि वर्सटैपेन का यह कदम एफ1 की दुनिया में व्यापक प्रभाव डाल सकता है। यदि वे रिटायर होते हैं, तो यह अन्य स्टार ड्राइवरों और टीमों को भी अपनी रणनीतियों के पुनर्मूल्यांकन के लिए प्रेरित करेगा। फैन्स और एफ1 कम्युनिटी अब बेसब्री से यह जानने के लिए इंतजार कर रहे हैं कि वर्सटैपेन का अगला कदम क्या होगा। फिलहाल, यह स्पष्ट है कि रेड बुल का स्टार ड्राइवर अपनी अगली बड़ी घोषणा के लिए तैयार है, जो एफ1 के भविष्य को प्रभावित कर सकती है।

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