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Author name: Kamlesh Purohit

Sooryavanshi blitz, Jurel 81* help RR take down RCB with ease
खेल जगत

सूर्यवंशी की धमाकेदार पारी और ज्युरेल के 81* रन से RR ने आसानी से RCB को हराया

राजस्थान रॉयल्स ने अपनी ताकतवर बल्लेबाजी के दम पर लगातार चौथी जीत दर्ज की है। इस मैच में सूर्यवंशी की बेहतरीन बल्लेबाजी और ज्युरेल के शानदार 81* रन ने आरआर की टीम को मजबूती प्रदान की, जिससे उन्होंने रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर को आसानी से मात दी। मैच की शुरुआत से ही सूर्यवंशी ने आक्रामक बल्लेबाजी की और अपनी ताकत का परिचय दिया। उनकी बिना रोक-टोक बल्लेबाजी ने टीम को जल्दी ही अच्छे कुल तक पहुंचाने में मदद की। सूर्यवंशी के क्रीज पर टिके रहने और बड़े शॉट खेलने की कला ने विपक्षी गेंदबाजों को काफी परेशान किया। वहीं दूसरी ओर, ज्युरेल ने संयमित और शानदार खेल दिखाया। उनकी छक्कों और चौकों की बरसात ने राजस्थान के स्कोर को उच्च स्तर पर पहुंचा दिया। ज्युरेल की पारी ने आरआर के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया, जिससे टीम को जवाबी कार्रवाई में मजबूती मिली। आरआर की जीत का सबसे बड़ा कारण उनकी बल्लेबाजी के अलावा फील्डिंग और गेंदबाजी भी रही। गेंदबाजों ने समय-समय पर विकेट लिए और दबाव बनाए रखा, जबकि खिलाड़ियों ने फील्डिंग में भी कोई कमी नहीं छोड़ी। इस जीत के साथ राजस्थान रॉयल्स ने लीग में अपनी स्थिति मजबूत की है और प्लेऑफ की दौड़ में अपनी उम्मीदें बनाए रखी हैं। टीम के इस प्रदर्शन से साफ है कि वे आगामी मैचों में भी अपने विरोधियों के लिए एक चुनौती बने रहेंगे। खेल प्रेमियों के लिए यह मैच रोमांचक तो था ही, साथ ही राजस्थान टीम की सामूहिक मेहनत और रणनीति का उदाहरण भी था। ऐसे प्रदर्शन से उम्मीद की जा सकती है कि आरआर आगे भी इसी जोश और उमंग के साथ खेलता रहेगा।

Pani Puri Recipe – Street Style | Golgappa or Puchka – 5 Tips
खाना खजाना

पानी पूरी रेसिपी – स्ट्रीट स्टाइल | गोलगप्पा या पुचका – 5 टिप्स

  पानी पूरी या गोलगप्पा भारत में सबसे लोकप्रिय और पसंदीदा स्ट्रीट फूड में से एक है। यह व्यंजन अपने अनोखे स्वाद और मसालों के मिश्रण के कारण न केवल भारत में, बल्कि विश्व के कई देशों में पसंद किया जाता है। पानी पूरी बनाने की विधि काफी सरल होते हुए भी उसमें कुछ खास तरीके और टिप्स का पालन करना आवश्यक होता है जिससे इसका स्वाद और भी बेहतर हो जाता है। पानी पूरी में सबसे जरूरी होती है खस्ता और पतली पूरी जो तली जाती है, साथ ही तीयाजे और मसालेदार पानी की विशेषता भी होती है। यह पानी अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग प्रकार से बनाया जाता है, जिसमें हरी मिर्च, धनिया, पुदीना, इमली और अन्य मसालों का मिश्रण होता है। इसके साथ ही एक मीठी और खट्टी चटनी भी पानी पूरी के स्वाद को बढ़ाती है। यह स्ट्रीट फूड मुख्य रूप से छोटे-छोटे गोल पूरियों के साथ परोसा जाता है, जिनके अंदर उबली हुई आलू या मसालेदार छोले भरे जाते हैं, फिर उन्हें पानी में डुबोकर खाया जाता है। स्थानीय बाजारों और सड़क किनारे लगे ठेलों पर पानी पूरी का स्वाद लेना हर किसी के लिए एक आनंददायक अनुभव होता है। आईए जानते हैं पानी पूरी बनाने के कुछ महत्वपूर्ण टिप्स जो इसे और बेहतर बनाते हैं। सबसे पहले, पूरी बनाने के लिए अच्छे क्वालिटी के सूजी या मैदा का इस्तेमाल करें जिससे पूरी क्रिस्पी और फुली हुई बने। दूसरी बात, पानी की ताज़गी और मसालों का तौल-तौल कर मिलाना जरूरी है ताकि स्वाद हर बार समान बना रहे। तीसरा, पानी पूरी का पानी ज्यादा तेज या ज्यादा मीठा नहीं होना चाहिए, इसे संतुलित करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। चौथा, पूरी को तब तक ताजा परोसा जाना चाहिए, क्योंकि वह जल्दी सॉफ्ट हो जाती है। अंत में, उचित सफाई और स्वच्छता का खास ध्यान रखें क्योंकि स्ट्रीट फूड खाते समय खाद्य सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। पानी पूरी आज भी भारतीय खाने का ऐसा हिस्सा है जो हर आयु वर्ग के लोगों को आकर्षित करता है। इसके सरल निर्माण और विविधता के चलते यह कई घरों और रेस्त्रांओं में लोकप्रिय बना हुआ है। गली मोहल्लों का यह स्वादिष्ट व्यंजन हमारी संस्कृति और खान-पान की विविधता का प्रतिनिधित्व करता है और आने वाले समय में भी इसकी लोकप्रियता कम नहीं होगी।

थारू कैंप के पास ग्लेशियर टूटा, केदारनाथ पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त:यात्रा से पहले बारिश-बर्फबारी बनी सबसे बड़ी चुनौती, धाम में 3 फीट तक बर्फ
धर्म एवं यात्रा

थारू कैंप के पास ग्लेशियर टूटने से केदारनाथ पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त, यात्रा शुरू होने से पहले बारिश और बर्फबारी बनी सबसे बड़ी चुनौती, धाम में तीन फीट तक बर्फ जमी

  केदारनाथ धाम के कपाट खुलने में अब मात्र 11 दिन शेष हैं। 22 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए धाम के द्वार खोल दिए जाएंगे। प्रशासन ने यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इस बार आने वाले भक्तों को बेहतर अनुभव देने हेतु धाम और उसके आसपास सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्ती और विकास की दिशा में तेजी से काम चल रहा है। केदारनाथ तक पहुँचने वाले पैदल मार्ग और बेस कैंप की साफ-सफाई, मरम्मत तथा सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम ज़ोर-शोर से चल रहा है। प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों के बीच निरंतर समन्वय के साथ काम हो रहा है ताकि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न उत्पन्न हो। बर्फ हटाने से लेकर रास्तों को सुरक्षित बनाने तक हर स्तर पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि इन तैयारियों के बीच मौसम चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। लगातार हो रही बारिश और बर्फबारी के कारण कार्य प्रभावित हो रहा है, और थारू कैंप के पास ग्लेशियर के टूटने से पैदल मार्ग को भी नुकसान पहुँचा है। इसके बावजूद सफाई एवं मरम्मत कार्य में लगी टीमें हर मुश्किल परिस्थिति में तत्पर हैं ताकि निर्धारित समय पर यात्राओं को सुचारू रूप से शुरू किया जा सके। धूप खिलने से तैयारियाँ तेज त्योहारों से पहले हुई भारी बारिश और हिमपात के बाद अब मौसम सुधरना शुरू हो गया है। तेज धूप के कारण धाम के आस-पास जमी मोटी बर्फ को हटाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। कर्मचारी और मजदूर मिलकर रास्ते की मरम्मत और सफाई में लगे हुए हैं ताकि श्रद्धालुओं के लिए यात्रा मार्ग पूरी तरह सुरक्षित और साफ-सुथरा बनाया जा सके। ग्लेशियर टूटने पर अफरा-तफरी यात्रा की तैयारियों के बीच गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर थारू कैंप के पास दोपहर लगभग साढ़े बारह बजे ग्लेशियर टूट गया। यह घटना बड़ी लिनचौली से ऊपर हुई, जहां यात्रा मार्ग को सुगम बनाने के लिए लगातार कार्य चल रहा था। घटना के समय मौके पर कार्यरत मजदूर और कर्मचारी मौजूद थे। अचानक ग्लेशियर टूटने से कार्यस्थल पर अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षा की दृष्टि से उस मार्ग पर यात्रा को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया। खुशकिस्मती रही कि इस घटना में किसी के घायल होने या जान की हानि की कोई सूचना नहीं मिली है। प्रशासन ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रशासन ने बढ़ाई सतर्कता ग्लेशियर टूटने के बाद जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। क्षतिग्रस्त मार्ग को जल्द से जल्द दुरुस्त किया जा रहा है। लगातार भिन्न-भिन्न मौसम परिस्थितियाँ और बर्फबारी ऐसी घटनाओं को जन्म दे रही हैं, लेकिन राहत यह है कि बचाव टीम मौके पर लगी हुई है और यात्रा को समय पर शुरू कराने में कोई कोताही नहीं बरती जा रही है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि ग्लेशियर टूटने से कोई जनहानि नहीं हुई है और सभी कार्यकर्ता सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में परिस्थिति नियंत्रण में है और मार्ग खोलने के लिए श्रमिकों को तैनात कर दिया गया है। भक्तों की संख्या में जारी है आस्था पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों की बात करें तो केदारनाथ धाम पर श्रद्धालुओं की संख्या में उतार-चढ़ाव के बावजूद भक्ति और श्रद्धा में कमी नहीं आई है। वर्ष 2023 में लगभग 19.6 लाख, 2024 में 16.5 लाख और वर्ष 2025 में करीब 17.7 लाख श्रद्धालुओं ने धाम के दर्शन किए। कुल मिलाकर पिछले तीन वर्षों में लगभग 53.8 लाख श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं जो दर्शाता है कि आस्था लगातार बढ़ रही है। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि मौसम की विपरीत परिस्थितियों और चुनौतियों के बीच भी लोग बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ पहुंच रहे हैं। प्रशासन और संबंधित विभाग हर संभव प्रयास कर रहे हैं कि इस बार भी यात्रियों को एक सुरक्षित, सहज और सुखद यात्रा अनुभव मिले।

Vijay’s ‘Jana Nayagan’ leaked online: KVN Productions initiates probe
मनोरंजन

विजय की ‘जना नायक’ ऑनलाइन लीक: KVN प्रोडक्शंस ने शुरू की जांच

  डिजिटल पायरेसी की समस्या ने फिल्म इंडस्ट्री को एक बार फिर से झकझोर दिया है। सुपरस्टार विजय की आगामी फिल्म ‘जना नायक’ हाल ही में ऑनलाइन लीक हो गई है, जिससे निर्माताओं और फिल्म प्रेमियों में चिंता की लहर दौड़ गई है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, फिल्म के प्रोडक्शन हाउस KVN प्रोडक्शंस ने त्वरित और कड़ी कार्रवाई की घोषणा की है। फिल्म के प्रमुख निर्माता वेंकट के नारायण ने इस ऑनलाइन लीक को डिजिटल पायरेसी की एक गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि ऐसे कदम न केवल फिल्म के वित्तीय नुकसान का कारण बनते हैं, बल्कि फिल्म उद्योग के मूल्यों को भी चोट पहुंचाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि KVN प्रोडक्शंस जल्द से जल्द उन सभी व्यक्तियों और समूहों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करेगा, जो इस डिजिटल पायरेसी में शामिल हैं या इसे बढ़ावा दे रहे हैं। पायरेसी ने हमेशा से ही फिल्म उद्योग के लिए दर्द की जगह साबित किया है। यह न केवल निर्माताओं और कलाकारों के लिए आर्थिक नुकसान लेकर आता है, बल्कि नई कलाकारों और प्रोडक्शन टीम के लिए भी अवसरों को सीमित कर देता है। ‘जना नायक’ फिल्म का ऑनलाइन लीक होना इस बात का प्रमाण है कि डिजिटल फॉर्मेट में सामग्री सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है, जिस पर उद्योग को मिलकर काम करने की जरुरत है। KVN प्रोडक्शंस के प्रवक्ता ने बताया कि वे तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से इस मामले की जांच कर रहे हैं ताकि लीक की सही वजह और स्रोत का पता लगाया जा सके। साथ ही, उन्होंने जनता से भी अनुरोध किया है कि वे इस डिजिटल पायरेसी में भाग न लें और केवल कानूनी माध्यमों से ही फिल्म देखें। कई फिल्मकारों और कलाकारों ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता जताई है और डिजिटल पायरेसी को रोकने के लिए कड़े नियमों और कानूनों की मांग की है। फिल्म ‘जना नायक’ के निर्माता भी पूरी तरह से आसक्त हैं कि इस प्रकार की घटनाएं भविष्य में न हों, इसलिए वे सभी कानूनी और तकनीकी उपायों का सहारा लेंगे। यह घटना दर्शाती है कि डिजिटल युग में भी फिल्म उद्योग को अपनी रचनात्मक संपत्ति की सुरक्षा के लिए सतर्क रहना होगा। पायरेसी को रोकने और कानूनी कार्रवाई को तेज करने से ही इस समस्या से निपटा जा सकता है। ‘जना नायक’ का यह मामला निश्चित रूप से अन्य निर्माताओं के लिए भी एक चेतावनी है कि वे अपनी फिल्मों के डिजिटल रिलीज़ के दौरान विशेष सावधानी बरतें। अंत में, KVN प्रोडक्शंस का यह कदम फिल्म उद्योग की सुरक्षा और सम्मान बनाए रखने के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। उम्मीद की जाती है कि इसका प्रभावी समाधान जल्द ही मिल जाएगा और फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को डिजिटल खतरों से बचाया जा सकेगा।

114 नए राफेल स्वदेशी मिसाइलों से लैस होंगे:18 जेट फ्रांस में, 96 भारत में बनेंगे; कंपनी ने सोर्स कोड देने से इनकार किया
धर्म एवं यात्रा

114 नए राफेल जेट्स स्वदेशी मिसाइलों से लैस होंगे: 18 फ्रांस में और 96 भारत में बनेगा; कंपनी ने सोर्स कोड देने से इनकार किया

  भारत फ्रांस से 114 नए राफेल फाइटर जेट खरीदने जा रहा है, जिसमें से 18 जेट सीधे फ्रांस से फ्लाई-अवे कंडीशन में मिलेंगे और बाकी 96 जेट भारत में बनाए जाएंगे। ये सभी जेट उच्च तकनीक वाली स्वदेशी मिसाइलों और हथियार सिस्टम से लैस होंगे, जो भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को काफ़ी मजबूत करेंगे। हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार, इंटरफेस कंट्रोल डॉक्यूमेंट (ICD) के जरिए राफेल जेट्स और स्वदेशी हथियार आपस में इंटीग्रेट होंगे। रक्षा मंत्रालय अगले महीने फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन को रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी करेगा, जिसके बाद डील के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर बातचीत शुरू होगी। यह सौदा पहले ही फेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने 12 फरवरी को मंजूरी दे दी है। इस डील में 25% कलपुर्जे भारत में तैयार किए जाएंगे, जिससे मेक इन इंडिया पहल को भी बल मिलेगा। रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि फ्रांस ने राफेल जेट का सोर्स कोड साझा करने से साफ इनकार किया है। अधिकारियों के अनुसार, किसी भी देश का फाइटर जेट का सोर्स कोड उसकी सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील होता है, जो रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, टारगेट ट्रैकिंग और हथियार सिस्टम को नियंत्रित करता है, इसलिए इसे साझा नहीं किया जाता। हालांकि, इसका डील पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह ध्यान देने योग्य है कि रूस और अमेरिका भी अपने फाइटर जेट्स के सोर्स कोड अन्य देशों के साथ साझा नहीं करते। भारत ने रूस से 5वीं पीढ़ी के Su-57 जेट के लिए प्रस्ताव प्राप्त किए हैं और साथ ही Su-30 MKI को अपग्रेड करने में भी सहयोग कर रहा है, लेकिन रूस ने भी सोर्स कोड शेयर नहीं किया। अमेरिका का रुख भी समान रहा है, और भारत के पास मौजूद अमेरिकी ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और अटैक हेलिकॉप्टर के सॉफ्टवेयर कोड भी साझा नहीं किए गए हैं। भारतीय वायुसेना ने सितंबर 2025 तक 114 अतिरिक्त राफेल जेट की मांग रक्षा मंत्रालय को भेजी थी। फिलहाल एयरफोर्स के पास 36 राफेल विमान हैं और भारतीय नौसेना ने 26 मरीन वेरिएंट राफेल का ऑर्डर दिया है। एक समान प्लेटफॉर्म के अधिक संख्या में होने से रखरखाव लागत में कमी आएगी और ऑपरेशनल क्षमता भी सुधरेगी। अंबाला एयरबेस पर राफेल के प्रशिक्षण और मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सेंटर पहले से सक्रिय हैं। वायुसेना के पास दो स्क्वाड्रन में 36-38 विमान शामिल करने के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पेयर पार्ट्स और प्रशिक्षित स्टाफ भी उपलब्ध हैं। इन सौदों के बाद भारत के राफेल विमान बेड़े की कुल संख्या 176 हो जाएगी। अभी तक 36 राफेल विमानों को शामिल किया जा चुका है जबकि नौसेना के 26 मरीन वेरिएंट फ्रांस से मंगाए जा रहे हैं। इन्हें देश के प्रमुख एयरबेस जैसे अंबाला और हैशिनारा से संचालित किया जाता है। 2016 में भारतीय वायुसेना और फ्रांस के बीच हुए पहले समझौते की कुल लागत लगभग 58,000 करोड़ रुपये थी। राफेल मरीन विमानों में एयरफोर्स के राफेल की तुलना में एडवांस फीचर्स मौजूद हैं, जो समुद्री अभियानों के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए हैं। यह सौदा भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा माना जा रहा है, जिसकी कुल कीमत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। कुल मिलाकर, यह नया राफेल डील भारतीय वायुसेना की लड़ाकू ताकत में अभूतपूर्व इजाफा करेगा और साथ ही भारत के रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को भी बढ़ावा देगा। आने वाले वर्षों में यह समझौता रक्षा क्षेत्र को तकनीकी दृष्टि से और मजबूत बनाने में मद्दगार साबित होगा।

‘Jaws’ re-release: Steven Spielberg’s 1975 classic to return in 4K restored version
मनोरंजन

‘जॉज’ की फिर से रिलीज: स्टीवन स्पिलबर्ग की 1975 की क्लासिक फ़िल्म 4K रिस्टोर्ड संस्करण में वापस आ रही है

  स्टीवन स्पिलबर्ग द्वारा निर्देशित 1975 की प्रतिष्ठित फ़िल्म ‘जॉज’ की फिर से रिलीज़ की घोषणा ने सिनेमाई दुनिया में उत्साह की लहर दौड़ा दी है। यह क्लासिक थ्रिलर, जिसने न केवल इस शैली को परिभाषित किया बल्कि ‘इवेंट सिनेमा’ का नया मानक स्थापित किया, अब उच्च गुणवत्ता वाले 4K रिस्टोर्ड संस्करण में दर्शकों के सामने आएगी। ‘जॉज’ की कहानी मानव और प्रकृति के बीच संघर्ष पर आधारित है, जिसमें रेउर्स-नीचे सागर के एक छोटे शहर को एक विशाल मनुष्यों को यह डराने वाले शार्क ने आतंकित किया होता है। फिल्म की जबरदस्त पटकथा, साउंड डिजाइन और स्पिलबर्ग के निर्देशन ने उस युग की फ़िल्म निर्माण तकनीकों को कई मायनों में बदल दिया। फिल्म की यह 4K रिस्टोर्ड एडिशन न केवल दृश्य गुणवत्ता में सुधार लाएगी, बल्कि ऑडियो अनुभव को भी बेहतर बनाएगी, जिससे दर्शक एक बार फिर से उस थ्रिलिंग अनुभव का आनंद ले पाएंगे जिसे पहली बार देखना रोमांचकारी था। स्टीवन स्पिलबर्ग की यह फिल्म हमेशा से ही समीक्षकों और दर्शकों दोनों के बीच खास रही है। इसकी रिलीज के बाद, इसने बॉक्स ऑफिस पर अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की और हॉलीवुड के टॉप थ्रिलर की सूची में अपनी जगह बनाई। फिल्म में उपयोग किए गए विशेष प्रभाव और नेटिव साउंडट्रैक ने इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बना दिया। इस क्लासिक की इस नई रिलीज़ से न केवल पुराने दर्शक यादों को ताजा कर सकेंगे, बल्कि नई पीढ़ी भी इस कालजयी थ्रिलर की गहराई में डुबकी लगा सकेगी। इसके अलावा, फिल्मों के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण उपकार होगा क्योंकि यह हमें याद दिलाता है कि किस प्रकार एक बेहतरीन कहानी और संगीतमय निर्देशन मिलकर सिनेमाई इतिहास रचते हैं। यह पुनः रिलीज़ जल्द ही चुनिंदा सिनेमाघरों में शुरू होगी, और इसके साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध कराए जाने की संभावना है, जिससे इस ऐतिहासिक फ़िल्म का प्रभाव व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंच सकेगा।

'शांति से ₹15,000 देते रहो, खुश रहो':सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी से 16 साल से अलग रह रहे पति से कहा, तलाक देने से इनकार
धर्म एवं यात्रा

‘शांति से ₹15,000 देते रहो, खुश रहो’: सुप्रीम कोर्ट ने 16 साल से अलग रहे पति को तलाक से किया इनकार

  सुप्रीम कोर्ट ने 16 साल से पत्नी से अलग रहने वाले 54 वर्षीय पति की तलाक याचिका को खारिज किया है। इस दौरान कोर्ट ने पति को निर्देश दिया कि वह अपनी पत्नी को ₹15,000 मासिक गुजारा भत्ता नियमित रूप से देते रहें। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि पति तलाक चाहते हैं, तो उन्हें स्थायी गुजारा भत्ते का ठोस प्रस्ताव प्रस्तुत करना होगा। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि आज के समय में ₹15,000 की राशि बहुत कम है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा, “शांति से ₹15,000 देते रहो, खुश रहो।” इससे पहले इस व्यक्ति की तलाक याचिका हाईकोर्ट ने भी खारिज कर दी थी। पति-पत्नी के बारे में और अधिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि पति द्वारा बताई गई क्रूरता की बात केवल इतनी है कि पत्नी चाहती थी कि वह अपने पति के साथ रहें, चाहे वह जहां भी पोस्टेड हों। कोर्ट ने इस आधार पर सवाल उठाया कि इसमें क्या परेशानी है। वहीं, पत्नी के वकील ने कोर्ट को बताया कि वह स्थायी गुजारा भत्ता नहीं चाहती हैं और अपने पति के साथ रहना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि दंपति की कोई संतान नहीं है और फिलहाल पत्नी अपनी मां के साथ रह रही हैं। कोर्ट ने मामला खारिज नहीं किया बल्कि दोनों पक्षों को स्थायी गुजारा भत्ते की राशि तय करने के लिए समय दिया है। अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी। कोर्ट गुजारा भत्ते के लिए किन आधारों पर फैसला करता है CrPC की धारा 125: यदि पत्नी अपना खर्च नहीं उठा सकती हैं, तो पति से गुजारा भत्ता दिलाया जा सकता है। हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 24/25: केस के दौरान और मुकदमे के बाद स्थायी गुजारा भत्ता तय होता है। यह फैसला घरेलू संबंधों और कानूनी सहायता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मान्यता दर्शाता है, जहां कोर्ट पत्नी को आर्थिक सुरक्षा देने पर जोर दे रहा है। संबंधित खबर: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के लोग ही अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य धर्म जैसे ईसाई धर्म में धर्म परिवर्तन करता है तो उसका अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाएगा।

‘The Punisher: One Last Kill’ trailer: Jon Bernthal’s ruthless vigilante is pulled back into action
मनोरंजन

द पनिशर: वन लास्ट किल ट्रेलर: जॉन बर्नथल का निर्दयी विजिलेंट वापस एक्शन में

  हॉलीवुड की एक लोकप्रिय एक्शन फ़िल्म ‘द पनिशर: वन लास्ट किल’ का नया ट्रेलर रिलीज़ हो गया है, जिसमें जॉन बर्नथल अपने किरदार में फिर लौटे हैं। यह फिल्म रेनाल्डो मारकस ग्रीन द्वारा निर्देशित है और इसे डिज़्नी+ पर 12 मई को रिलीज़ किया जाएगा। ट्रेलर में देखा जा सकता है कि जॉन बर्नथल अपने किरदार के रूप में एक निर्दयी विजिलेंट की भूमिका में वापस आ रहे हैं, जो हिंसा और अराजकता के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हैं। इस फिल्म की कहानी में उनका किरदार एक बार फिर अपनी मंशा और बदले की आग लेकर सामने आता है। डायरेक्टर रेनाल्डो मारकस ग्रीन ने इस प्रोजेक्ट को खास रूप से तैयार किया है, ताकि दर्शकों को एक सशक्त और रोंगटे खड़े कर देने वाला अनुभव मिल सके। फिल्म की कहानी में जॉन बर्नथल का किरदार अपनी पिछली चुनौतियों से निपटता नजर आएगा और नई लड़ाइयों का सामना करेगा। इस संदर्भ में, डिज़्नी+ ने इस फिल्म के प्रमोशन के लिए ट्रेलर जारी कर दिया है, जिसमें रोमांचक एक्शन सीक्वेंस और इमोशनल संघर्ष दोनों मौजूद हैं। यह फिल्म उन दर्शकों को खासकर पसंद आएगी जो एक्शन और थ्रिलर फिल्मों के प्रशंसक हैं। फिल्म के रिलीज़ तारीख के करीब आते ही इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है और दर्शक बेसब्री से इसे देखने का इंतजार कर रहे हैं। डिज़्नी+ पर रिलीज़ होने से यह फिल्म घरेलू दर्शकों के लिए आसानी से उपलब्ध होगी, जिससे इसकी पहुंच और भी ज्यादा बढ़ेगी। निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि ‘द पनिशर: वन लास्ट किल’ उन फिल्मों में से एक होगी जो अपनी कहानी, अभिनय और एक्शन के कारण चर्चा में बनी रहेगी। जॉन बर्नथल की वापसी दर्शकों को एक बार फिर उसी पुराने रोमांच और चुनौतीपूर्ण किरदार का अनुभव कराएगी।

गगनयान मिशन का दूसरा क्रू मॉड्यूल टेस्ट सफल:चिनूक हेलिकॉप्टर से 3 किमी ऊंचाई से छोड़ा गया; पैराशूट के साथ समुद्र में सेफ लैंडिंग
धर्म एवं यात्रा

गगनयान मिशन के दूसरे क्रू मॉड्यूल टेस्ट में सफलता हासिल: चिनूक हेलिकॉप्टर से 3 किमी ऊंचाई से छोड़ा गया, पैराशूट के सहारे समुद्र में सुरक्षित लैंडिंग

  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता दर्ज की है। शुक्रवार को ISRO ने दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-1) सफलता पूर्वक पूरा किया। इस टेस्ट का मुख्य उद्देश्य पैराशूट प्रणाली की प्रभावशीलता और विश्वसनीयता की जांच करना था, जो मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी में अहम भूमिका निभाएगा। टेस्ट के दौरान लगभग 5.7 टन वजनी डमी क्रू कैप्सूल को वायुसेना के चिनूक हेलिकॉप्टर से 3 किलोमीटर ऊंचाई से छोड़ा गया। कैप्सूल ने पैराशूट के माध्यम से सुरक्षित रूप से समुद्र में लैंड किया। यह टेस्ट पिछले आठ महीनों में दूसरा एयर ड्रॉप टेस्ट था, पहला टेस्ट 24 अगस्त 2025 को संपन्न हुआ था। यह परीक्षण गगनयान मिशन की तैयारी की दिशा में एक बड़ा कदम है। गगनयान मिशन भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन है, जिसमें 2027 में तीन भारतीय पायलट अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे। ये पायलट तीन दिन तक 400 किलोमीटर की कक्षा में रहेंगे, उसके बाद स्पेसक्राफ्ट हिंद महासागर में सुरक्षित रूप से लैंड होगा। मिशन की कुल लागत लगभग 20,193 करोड़ रुपए निर्धारित की गई है। फिलहाल इसरो ने वायुसेना के चार पायलटों को चुना है, जिनमें ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भी शामिल हैं। शुभांशु शुक्ला पहले ही इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर 18 दिन बिताकर अपने अनुभव से इस मिशन को मजबूती प्रदान कर चुके हैं। गगनयान मिशन की तैयारियां लॉन्च व्हीकल (HLVM3) तैयार: इंसान को अंतरिक्ष में ले जाने वाले इस रॉकेट की सिक्योरिटी और अन्य टेस्टिंग पूरी हो चुकी है। इसे पहले GSLV Mk III के नाम से जाना जाता था जिसे अपग्रेड किया गया है। एस्ट्रोनॉट्स का चयन और प्रशिक्षण: चयनित पायलटों ने भारत और रूस में व्यापक प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इसमें सिम्युलेटर से लेकर मेडिकल और स्पेस संबंधित अन्य तैयारियां शामिल हैं। क्रू और सर्विस मॉड्यूल: क्रू मॉड्यूल (जहां पायलट बैठेंगे) और सर्विस मॉड्यूल (पावर, प्रोपल्शन, लाइफ सपोर्ट सिस्टम) विकास के अंतिम चरण में हैं। इसकी टेस्टिंग एवं इंटीग्रेशन शेष है। क्रू एस्केप सिस्टम: लॉन्चिंग के दौरान आकस्मिक स्थिति के लिए क्रू मॉड्यूल को तुरंत अलग करने के लिए सॉलिड मोटर्स पर आधारित सिस्टम सफलतापूर्वक विकसित और परीक्षण किए गए हैं। रिकवरी टेस्टिंग: ISRO और भारतीय नौसेना ने अरब सागर में असमय लैंडिंग के बाद क्रू मॉड्यूल की सुरक्षित वापसी के लिए परीक्षण किए हैं, साथ ही ऑस्ट्रेलिया के साथ बैकअप रिकवरी के लिए समझौता हुआ है। मानव रहित मिशन के लिए रोबोट: 2020 में ISRO ने व्योममित्र नामक ह्यूमनोइड रोबोट का निर्माण किया है, जो माइक्रोग्रेविटी में प्रयोगों और मॉड्यूल की टेस्टिंग करेगा। भविष्य की योजनाओं में, गगनयान मिशन के लिए इसरो दो मानव रहित टेस्ट फ्लाइट भेजेगा, उसके पश्चात एक रोबोट मिशन और फिर चौथी फ्लाइट में मानव को भेजा जाएगा। पहली मानव रहित टेस्ट फ्लाइट वर्ष के अंत तक भेजे जाने की संभावना है। इसरो के वैज्ञानिक और तकनीकी दल गगनयान मिशन को सफल बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं, जो भारत को अंतरिक्ष के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में एक बड़ा कदम साबित होगा। इस तरह के परीक्षण मिशन की सफलता के लिए आवश्यक हैं क्योंकि वे वास्तविक परिस्थितियों में प्रणालियों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हैं। इससे मिशन की सुरक्षा और सफलता की संभावनाएं बढ़ती हैं। गगनयान मिशन भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है, जिसने देश की क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया है।

Review | A vibrant portrait of early-2000s Bengaluru: Good Arguments by Deepika Arwind
मनोरंजन

समीक्षा | 2000 के दशक की शुरुआती बेंगलुरु का जीवंत चित्र: दीपिका अरविंद की ‘गुड आर्ग्युमेंट्स’

  बेंगलुरु, एक ऐसा शहर जिसने 2000 के दशक की शुरुआत में युवा, बेचैन और कलात्मक दृष्टिकोण रखने वाले लोगों की भावनाओं को गहराई से महसूस किया, अब एक नॉवल के ज़रिए पुनः जीवित हो उठा है। दीपिका अरविंद की किताब ‘गुड आर्ग्युमेंट्स’ इस युग के जटिल मनोवैज्ञानिक पहलुओं, सामाजिक विरोधाभासों और इतिहास की संजीव तस्वीर प्रस्तुत करती है। यह उपन्यास न केवल एक कहानी है बल्कि उस दौर की सांस्कृतिक ग़ुलज़ारियों का आभास भी कराता है, जब बेंगलुरु तेजी से एक आधुनिक महानगर के रूप में उभर रहा था। युवा वर्ग के भीतर व्याप्त आंतरिक संघर्ष, नवाचार और कलात्मकता की खोज इस पुस्तक की मुख्य थीम है। लेखिका ने बखूबी उन भावनाओं और परिस्थितियों को शब्दों में पिरोया है जो उस समय के युवाओं की मानसिकता को दर्शाती हैं। व्यक्तित्व, प्रेम, दोस्ती और सामाजिक दबावों के बीच की गुत्थी को इस उपन्यास में परिष्कृत तरीके से उजागर किया गया है। गुड आर्ग्युमेंट्स पाठकों को उस युग की जीवंतता और जटिलताओं से रू-ब-रू कराता है, जहाँ सपनों और वास्तविकताओं के बीच एक निरंतर टकराव चलता रहता था। यह नॉवल उन लोगों के लिए खासकर प्रासंगिक है जो उस समय के सांस्कृतिक और सामाजिक बदलावों को समझना चाहते हैं। दूसरी ओर, पुस्तक में प्रस्तुत संवाद और पात्रों के बीच के संबंध गहराई से इमर्शिव अनुभव प्रदान करते हैं, जो आधुनिक साहित्य में दुर्लभ है। बेंगलुरु के फुसफुसाते सड़कों से लेकर शिक्षण संस्थानों की हलचल तक की तस्वीर इसमें स्पष्ट रूप से मिलती है। इस उपन्यास को पढ़ना युवा पीढ़ी के लिए विगत युग की सांस्कृतिक कहानी से जुड़ने का माध्यम है, जबकि पुराने पाठकों के लिए यह स्मृतियों को पुनः जीवंत करने का साधन भी है। ऐसे में ‘गुड आर्ग्युमेंट्स’ साहित्यिक और सामाजिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। फैसले, पसंद, और आत्म-खोज की पृष्ठभूमि में बुनी यह कहानी किसी भी पाठक को अपने समय के संघर्षों और आनंदों की गहराई से समझ पैदा करने में सक्षम है। दीपिका अरविंद का यह उपन्यास बाज़ार में एक नई दिशा प्रस्तुत करता है जो बेंगलुरु के बदलावों को आत्मसात करता है। कुल मिलाकर, ‘गुड आर्ग्युमेंट्स’ एक शानदार साहित्यिक कृति है जो 2000 के दशक की बेंगलुरु की जीवनकथा को प्रभावी ढंग से बयान करती है। यह न केवल एक शहर की कहानी है, बल्कि उस समय के युवा मनों की जटिलताओं तथा कलात्मक संघर्षों की सजीव अभिव्यक्ति भी है।

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